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1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य

27.43 करोड़ उपभोक्‍ताओं ( 89.9 प्रतिशत) ने पहले ही प्रमाणीकरण पूरा करवा लिया है और उन्हें आगे कुछ करने की आवश्‍यकता नहीं , प्रमाणीकरण डिलीवरी के समय , वितरक की दुकान पर या ओएमसी मोबाइल ऐप पर पूरा करवाया जा सकता है 1 अक्टूबर 2026 से , घरेलू एलपीजी उपभेक्‍ताओं को सब्सिडी के साथ विनियमित खुदरा बिक्री मूल्य (आरएसपी) पर रिफिल बुक करने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण ( BAA) पूरा करवाना होगा। बीएए से यह सुनिश्चित होता है कि सब्सिडी वाली एलपीजी केवल वास्‍तविक और योग्‍य परिवारों तक पहुंचे। प्रत्‍येक कनेक्शन को आधार-प्रमाणित उपभोक्‍ता से जोड़ने से सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का वाणिज्यिक और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डायवर्जन रोकने में मदद मिलती है , डुप्लीकेट और अयोग्य कनेक्शन हटते हैं और सब्सिडी पहुंचाने का तरीका पारदर्शी तथा सही लोगों तक पहुंचने वाला बनता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्‍य किसी भी वास्‍तविक परिवार को एलपीजी से वंचित करना नहीं है और प्रत्‍येक योग्य उपभोक्‍ता इसे कई आसान तरीकों से पूरा कर सकते हैं। 1 अक्टूबर 2026 से क्या बदलाव होंगे   •    जिन उपभोक्‍त...
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सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी भंडारण सीमा 15 दिनों से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। अतिरिक्त स्टॉक की खरीद अग्रिम स्‍वीकृति योजना (एएएस) और शुल्‍क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत आयातित चीनी से ही की जाएगी

खुदरा चीनी की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट ; सरकार ने व्यापारियों और थोक विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वे कम हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा 15 दिनों की चीनी भंडारण सीमा को बढ़ाकर 30 दिन करने का निर्णय लिया है , बशर्ते मौजूदा 15 दिनों की सीमा से अधिक स्टॉक की मात्रा केवल अग्रिम स्‍वीकृति योजना (एएएस) और शुल्‍क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत आयातित चीनी से ही प्राप्त की जाए। खुले बाजार से खरीद के लिए स्टॉक रखने की सीमा अपरिवर्तित रहेगी और केवल 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगी। सरकार ने थोक उपभोक्ताओं द्वारा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल @https://foodstock.dfpd.gov.in/ के माध्यम से प्रत्येक शुक्रवार को चीनी स्टॉक की घोषणा और साप्ताहिक जानकारी के लिए एक तंत्र भी स्थापित किया है। सरकार ने चीनी के प्रमुख थोक उपभोक्ताओं के साथ विस्तृत परामर्श किया है और एक स्थिर और व्यवस्थित चीनी बाजार को बनाए रखने के उद्देश्य से उनके सुझावों पर विधिवत विचार किया गया है। वर्तमान में उत्पादन , उपभोग या उपयोग के लिए कच्चे...

प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई)

खनन से होने वाले लाभ उन लोगों के साथ साझा करना , जो इसकी कीमत चुकाते हैं   संक्षिप्त विवरण खनिज महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधन हैं। इनके खनन से राजस्व प्राप्त होता है , उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। हालांकि , जिन जिलों में खनन गतिविधियां होती हैं , वहां रहने वाले लोगों को अक्सर इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। विस्थापन , प्रदूषण और पारंपरिक आजीविका के नुकसान का बोझ स्थानीय समुदायों को उठाना पड़ता है। भारत ने खनन से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा इन समुदायों के कल्याण के लिए वापस उपलब्ध कराने की एक विशेष व्यवस्था की है। यह व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) के माध्यम से संचालित होती है। डीएमएफ खनन पट्टाधारकों से कानूनी रूप से अनिवार्य योगदान एकत्र करते हैं। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) 17 सितंबर , 2015 को शुरू की गई थी। इसके तहत इन निधियों का उपयोग जमीनी स्तर पर कल्याण एवं विकास की योजनाओं के लिए किया जाता है। योजना के बारे में जानकारी खनन से प्रभावित प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम बुनियादी सामाजिक और भौतिक ...

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