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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई)

  “100 ज़िलों में केंद्रित कृषि विकास का एक साल” जिला-स्तर पर कार्रवाई के ज़रिए कृषि में बदलाव भारत के कृषि क्षेत्र में अलग-अलग इलाकों और किसान समुदायों के बीच काफी क्षमता है। हालांकि इतनी क्षमता होने के बावजूद , कई इलाकों को कम उत्पादकता , सिंचाई की अपर्याप्त सुविधा , ऋण मिलने में मुश्किल और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नतीजतन , ये इलाके अपनी पूरी कृषि क्षमता हासिल नहीं कर पाते और आर्थिक विकास में पीछे रह जाते हैं। पीएम धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई ) इन कमियों को दूर करने और खास तौर पर ध्यान देकर 100 आकांक्षी कृषि ज़िलों का विकास करने का लक्ष्य रखती है। ज़िले की खास ज़रूरतों को पूरा करके , यह योजना उत्पादकता , सिंचाई , लोन की सुविधा और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे में नए मौके खोलने में मदद कर सकती है। पीएमडीडीकेवाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई , 2025 को छह साल की अवधि के लिए मंज़ूरी दी थी और माननीय प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर , 2025 को इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस साल 11 अक्टूबर को इसकी पहल...
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शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की "नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने" पर 382वीं रिपोर्ट संबंधी प्रेस विज्ञप्ति।

श्री मुकुल वासनिक , संसद सदस्य , राज्य सभा की अध्यक्षता में विभाग-संबंधित शिक्षा , महिला , बाल , युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 9 अक्तूबर , 2026 को उच्चतर शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय से संबंधित "राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार और सुदृढीकरण" विषय पर 382 वाँ प्रतिवेदन माननीय सभापति , राज्य सभा को प्रस्तुत किया।   2. समिति ने 382 वें प्रतिवेदन की तैयारी के दौरान उच्चतर शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय के सचिव ; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव ; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अध्यक्ष ; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक ; डॉ. के. राधाकृष्णन , पूर्व सचिव , अंतरिक्ष विभाग एवं उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष तथा विभाग के अन्य प्रतिनिधियों के विचार सुने और विषय की विस्तृत जाँच की। 3. समिति ने 25 अगस्त , 2026 को आयोजित अपनी बैठक में इस प्रतिवेदन पर विचार किया और इसे स्वीकार किया। प्रतिवेदन में समिति द्वारा की गई समुक्तियाँ/सिफारिशें इसके साथ संलग्न हैं। 4. यह प्रतिवेदन निम्नलिखित लिंक पर भी उपलब्ध है:-           http...

शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए पाँच उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी

केंद्रों का उद्देश्य भारत की भाषाई और साहित्यिक विरासत के अनुसंधान , संरक्षण , डिजिटलीकरण तथा व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना उच्च शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय , भारत सरकार ने शास्त्रीय असमिया , शास्त्रीय बंगाली , शास्त्रीय मराठी , शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत में अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्रों ( सीओई ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह पहल उन्नत शैक्षणिक अनुसंधान , भाषाई और साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण और इन शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए समर्पित संस्थागत सहायता प्रदान करेगी। निम्नलिखित उच्च शिक्षण संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे : क्रम संख्या शास्त्रीय भाषा उत्कृष्टता केंद्र 1   शास्त्रीय असमिया तेजपुर विश्वविद्यालय , असम 2 शास्त्रीय बांग्ला विश्वभारती विश्वविद्यालय , पश्चिम बंगाल 3 शास्त्रीय मराठी डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान ( ...

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