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हाथ से सफाई करने वालों का पुनर्वास

हाथ से सफाई करने वालों के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम , 2013 के प्रावधानों के अनुसार , देश के सभी जिलों में हाथ से सफाई करने वालों का एक नया सर्वेक्षण किया गया है , जिसमें कोई भी हाथ से सफाई करने वाला (एमएस) नहीं पाया गया है। हालांकि , 2013 और 2018 में किए गए दो सर्वेक्षणों के दौरान 58,098 हाथ से सफाई करने वालों की पहचान की गई थी। सभी पहचाने गए एमएस को 40,000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से एकमुश्त नकद सहायता (ओटीसीए) का भुगतान किया गया है , जिसमें बिहार के 131 एमएस ( 0.22%) भी शामिल हैं।वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 14,692 एमएस को ओटीसीए , 9,868 एमएस को कौशल विकास प्रशिक्षण और 1,524 एमएस को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई है। ये विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के दौरान कुछ मौतें हुई हैं , जिसका कारण "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास अधिनियम , 2013" और "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास नियम , 2013" तथा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिय...
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सस्ती दवाइयां और निजी अस्पतालों का नियमन

देश भर में औषधियों की कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश 2013 ( डीपीसीओ 2013) के प्रावधानों के अनुसार विनियमित हैं। डीपीसीओ 2013 के वर्त्तमान  प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) डीपीसीओ , 2013 की अनुसूची- I में निर्दिष्ट दवाओं की अधिकतम मूल्य सीमा और डीपीसीओ , 2013 के पैरा 2(1)(u) में परिभाषित नई दवाओं की खुदरा मूल्य सीमा निर्धारित करता है।   इसके अलावा गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के दौरान किसी भी दवा के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त एनपीपीए असाधारण परिस्थितियों में और जनहित में डीपीसीओ , 2013 के पैरा 19 के अंतर्गत   किसी भी दवा की अधिकतम खुदरा मूल्य सीमा भी निर्धारित करता है। डीपीसीओ 2013 के अंतर्गत मूल्य विनियम निजी अस्पतालों द्वारा बेची जाने वाली दवाओं/फार्मूलेशन पर भी समान रूप से लागू होते हैं। एनपीपीए दवाओं की कीमतों की निगरानी करता है और अधिक कीमत वसूलने के मामलों से डीपीसीओ 2013 के संबंधित प्रावधानों के अनुसार निपटा जाता है। ...

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए उठाए गए कदम, तीन वर्षों में 5.18 लाख से अधिक नमूनों का विश्लेषण किया गया, 88,192 जुर्माने लगाए गए, 3,614 मामलों में दोष सिद्ध हुए

  प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित की है , जिसमें खाद्य व्यवसायों से जुड़े जोखिम के आधार पर निरीक्षण की आवृत्ति तय की और दिशानिर्देश जारी किए,एफएसएसएआई ने खाद्य नमूनों के विश्लेषण के लिए 252 खाद्य परीक्षण  प्रयोगशालाओं और अपीलीय नमूनों के विश्लेषण के लिए 24 रेफरल खाद्य प्रयोगशालाओं को अधिसूचित किया, विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलावट की मौके पर जांच के लिए 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 305 फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स तैनात किए गए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करने और मानव उपभोग के लिए सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उनके निर्माण , भंडारण , वितरण , बिक्री एवं आयात को विनियमित करने का दायित्व सौंपा गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम , 2006 का कार्यान्वयन एवं प्रवर्तन केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करने और समग्र समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है , जबकि राज्य ...

भारत टैक्सी को शुरू करना

  सहकारिता मंत्रालय रोजगार सृजन , सामाजिक सुरक्षा और जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी के साधन के रूप में सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है । भारत टैक्सी की परिकल्पना चालकों- जिन्‍हें सारथियों के रूप में संदर्भित किया जाता है ,  को स्वामित्व , शासन और मूल्य निर्माण के केंद्र में रखकर मोबिलिटी के क्षेत्र में एक रूपांतरणकारी पहल के रूप में की गई है जिससे एग्रीगेटर-चालित मॉडल के लिए एक संधारणीय और सम्मानजनक विकल्प प्रदान किया जा सके । "भारत टैक्सी" भारत का पहला सहकारी नेतृत्व वाला राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है । यह ' सहकार से समृद्धि ' की परिकल्‍पना के अनुरूप सहकारी क्षेत्र को सशक्‍त करने और समावेशी , नागरिक-केंद्रित मोबिलिटी समाधानों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के चल रहे प्रयासों में एक प्रमुख मील का पत्थर है । बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम , 2002 के अधीन पंजीकृत , भारत टैक्सी की स्थापना दिनांक 6 जून , 2025 को सहकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले राष्ट्रीय स्तर के 8 संस्थानों द्वारा की गई है जिसे आधिकारिक रूप से दिनांक 5 फरवरी , 2026 को लॉन्च किया गया...

पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाएँ

  पर्यटन मंत्रालय अपने " सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण (सीबीएसपी)" योजना के तहत देशभर में पुरुष और महिला प्रशिक्षुओं , स्थानीय समुदायों , आदिवासी क्षेत्रों , वंचित पृष्ठभूमि के युवाओं आदि के कौशल विकास , उन्नत कौशल विकास और पुनः कौशल विकास के लिए आतिथ्य एवं पर्यटन संबंधी अल्पकालिक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम आयोजित करता है। इस योजना के अंतर्गत " हुनर से रोजगार तक" सहित कई कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। यह योजना देशभर में सरकारी संस्थानों और सूचीबद्ध निजी संस्थानों , जिनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट , फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट , इंडियन कलिनरी इंस्टीट्यूट आदि शामिल हैं , के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। पर्यटन मंत्रालय ने 2025 में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के माध्यम से योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन इस बात की पुष्टि करता है कि सीबीएसपी योजना ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक विभिन्न क्षेत्रों में 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर और 36,000 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करके भारत के पर्यटन और ...

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