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अपना डिजिपिन जानें' और 'अपना पिन कोड जानें' वेब पोर्टल का शुभारंभ: भारत के भू-स्थानिक और पता संबंधी बुनियादी ढांचे में एक उपलब्धि

  संचार मंत्रालय के डाक विभाग ने आज दो परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरूआत की: ‘अपना डिजीपिन जानें’ और ‘अपना पिन कोड जानें’ , जो भारत की पता प्रणाली और भू-स्थानिक शासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन प्लेटफार्मों को राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 के अनुरूप शुरू किया गया , जिसमें डिजिटल शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सहयोग के लिए एक उन्नत भू-स्थानिक बुनियादी ढांचे के विकास की परिकल्पना की गई है। अपने डिजिपिन वेब एप्लिकेशन को जानें डिजिपिन (डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर) एक ओपन-सोर्स , इंटरऑपरेबल , जियो-कोडेड , ग्रिड-आधारित डिजिटल एड्रेस सिस्टम है जिसे डाक विभाग ने आईआईटी हैदराबाद और एनआरएससी , इसरो के सहयोग से विकसित किया है। यह डाक विभाग के एड्रेस-एज-ए-सर्विस (एएएएस) पेश करने की कल्पना का आधार है - उपयोगकर्ताओं , सरकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र के संगठनों के बीच सुरक्षित और कुशल बातचीत का समर्थन करने के लिए पता डेटा प्रबंधन से जुड़ी जनता को दी जाने वाली सेवाओं का एक दायरा है। ‘ अपना डिजिपिन जानें’ पोर्टल उपयोगकर्ताओं को सक्षम बनाता है: सटीक भौगोलिक...

पीएलआई योजना के अंतर्गत दूरसंचार उपकरण विनिर्माण की बिक्री 50 हजार करोड़ रुपये के पार,सरकार के प्रयासों के कारण वित्त वर्ष 2023-24 में दूरसंचार उपकरण निर्यात (1.49 लाख करोड़ रुपये) और आयात (1.53 लाख करोड़ रुपये) समान स्तर पर रहेंगे।

   पीएलआई योजनाएं उत्पादन , रोजगार-सृजन और आर्थिक विकास वृद्धि में योगदान देती हैं , प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को ' आत्मनिर्भर ' बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप , दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों तथा इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े पैमाने पर विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से देश में उत्पादन , रोजगार-सृजन , आर्थिक विकास और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूरसंचार पीएलआई योजना के तीन वर्षों के अंतराल में   इस योजना ने 3,400 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है। दूरसंचार उपकरण उत्पादन 50,000 करोड़ रुपये के उच्‍चतम स्‍तर को पार कर गया है , जिसमें लगभग 10,500 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। इससे 17,800 से अधिक प्रत्यक्ष और कई अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। यह उपलब्धि भारत के दूरसंचार विनिर्माण उद्योग की सुदृढ बढ़ोतरी और प्रतिस्पर्धात्मकता को रेखांकित करती है। यह सफलता सरकारी योजनाओं के माध्‍यम से मिली है , क्‍योंकि सरकार ने स्थानीय उत्पादन को प्रोत्‍साहन दिया और आयात निर्भरता को कम करने के लिए पहल की। पीएलआई योजना का उद्देश्य घरेलू व...

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) ने 14 मार्च, 2024 को दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियम, 2024 जारी किए, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हो जाएँगे।

  01 जुलाई से दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियम , 2024 लागू हो जाएगा इन संशोधन विनियमों का उद्देश्य बेईमान तत्वों द्वारा धोखाधड़ी वाले सिम स्वैप/प्रतिस्थापन के माध्यम से मोबाइल नंबरों की पोर्टिंग पर अंकुश लगाना है। इन संशोधन विनियमों के माध्यम से , एक विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) के आवंटन के अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए एक अतिरिक्त मानदंड प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से , यदि सिम स्वैप/प्रतिस्थापन की तारीख से सात दिनों की समाप्ति से पहले विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) के लिए अनुरोध किया गया है , तो विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) आवंटित नहीं किया जाएगा। किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए श्री अखिलेश कुमार त्रिवेदी , सलाहकार (नेटवर्क , स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग) , भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) से टेलीफोन नंबर +91-11-20907758 पर संपर्क किया जा सकता है। **** एमजी/एआर/आरपी/एमकेएस/एसएस प्रविष्टि तिथि: 28 JUN 2024 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2029398) आगंतुक पटल : 376

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