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श्रमिक मजदुर कानून

 कर्मचारी और श्रमिकों को औद्योगिक दुर्घटना की प्रतिकार राशि दिलवाने वाले कानून को जान लीजिए..!



कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923 को संक्षिप्त में समझिये...

कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923 को संक्षिप्त में समझिये...

1. उद्देश्य:

कर्मचारियों को रोजगार के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं/व्यावसायिक रोगों के लिए मुआवजा प्रदान करना।

2. लागू:

खानों, कारखानों, रेलवे, बंदरगाहों, निर्माण स्थलों, आदि में काम करने वाले कर्मचारियों पर।

3. मुआवजे की गणना:

मासिक आय और क्षति की गंभीरता पर निर्भर करता है।

4. मुआवजे के प्रकार:

अस्थायी/स्थायी विकलांगता, मृत्यु।

5. दावा प्रक्रिया:

निर्धारित फॉर्म में आवेदन पत्र भरकर।

6. कमियां:

मुआवजे की राशि कम, दावा प्रक्रिया जटिल।

7. सुझाव:

मुआवजे की राशि बढ़ाना, दावा प्रक्रिया सरल बनाना।

8. अतिरिक्त जानकारी:

ESI योजना, EPF योजना।

9. अस्वीकरण:

यह केवल सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।


कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923 से विस्तृत परिचय : 

यह अधिनियम क्या है?

कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923, भारत में काम करने वाले कर्मचारियों को रोजगार के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं या व्यावसायिक रोगों के कारण मृत्यु, चोट या विकलांगता के लिए मुआवजा प्रदान करने के लिए बनाया गया कानून है। यह अधिनियम 1 जुलाई 1924 से लागू है।

इस अधिनियम के तहत कौन कवर होता है ?

यह अधिनियम खानों, कारखानों, रेलवे, बंदरगाहों, निर्माण स्थलों और कुछ अन्य उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को कवर करता है।

मुआवजे की राशि:

मुआवजे की राशि कर्मचारी की मासिक आय और दुर्घटना या व्यावसायिक रोग के कारण हुई क्षति की गंभीरता पर निर्भर करती है।

मुआवजे के प्रकार:

अस्थायी विकलांगता के लिए मुआवजा: 

यदि कर्मचारी अस्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो उसे उसकी मासिक आय का एक हिस्सा मुआवजे के रूप में दिया जाता है।

स्थायी विकलांगता के लिए मुआवजा: 

यदि कर्मचारी स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो उसे उसकी मासिक आय का एक हिस्सा या एकमुश्त राशि मुआवजे के रूप में दी जाती है।

मृत्यु के मामले में मुआवजा: 

यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों को मुआवजे का भुगतान किया जाता है।

दावा कैसे करें:


नोट :- कर्मचारी या उसके आश्रित मुआवजे के लिए दावा कर सकते हैं। दावा करने के लिए, उन्हें एक निर्धारित फॉर्म में आवेदन पत्र भरकर, संबंधित अधिकारी को जमा करना होगा।

अधिक जानकारी के लिए:

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की वेबसाइट: https://www.esic.gov.in/

कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923 की प्रति: https://aiftponline.org/journal/2016/june-2016/the-employees-compensation-act-1923-old-name-the-workmens-compensation-act-1923/

https://wa.me/message/CR4BIC6AYNGNN1

महत्वपूर्ण:

  • यह अधिनियम केवल उन कर्मचारियों पर लागू होता है जो अधिनियम के तहत कवर किए गए उद्योगों में काम करते हैं।

  • मुआवजे के लिए दावा करने की समय सीमा दुर्घटना या व्यावसायिक रोग की तारीख से 2 साल है।

  • यदि आपको मुआवजे के लिए दावा करने में कोई कठिनाई हो रही है, तो आप एक वकील से सलाह ले सकते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:

  • कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजना: यह योजना कर्मचारियों को चिकित्सा लाभ और मातृत्व लाभ प्रदान करती है।

  • कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना: यह योजना कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्रदान करती है।

यह जानकारी आपको कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923 के बारे में समझने में मदद करेगी। यदि आपके कोई और प्रश्न हैं, तो कृपया टिप्पणी में पूछें।


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