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ई-नाम प्लेटफॉर्म का विस्तार: भारत के सबसे बड़े डिजिटल कृषि व्यापार प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के लिए 9 नई वस्तुओं को जोड़ा गया

  ई-नाम प्लेटफॉर्म पर वस्तुओं की संख्या बढ़कर 247 हो गई है , जिससे किसानों और व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 09 अतिरिक्त वस्तुओं को शामिल करके राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के दायरे का विस्तार करके इसे और मजबूत किया है , जिससे इस मंच पर व्यापार योग्य कृषि वस्तुओं की कुल संख्या 247 हो गई है। यह महत्वपूर्ण कदम किसानों , व्यापारियों और अन्य हितधारकों की निरंतर मांग को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है , ताकि व्यापक कमोडिटी कवरेज और बाजार एकीकरण को और मजबूत किया जा सके।  इस पहल का उद्देश्य किसानों और व्यापारियों को एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में सक्षम बनाकर उनके लिए अवसरों को बढ़ाना है , जो पूरे भारत के बाजारों को जोड़ता है  विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई) , जिसे ई-नाम पर व्यापार किए जाने वाले वस्तुओं के लिए व्यापार योग्य मापदण्ड तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है , ने राज्य एजेंसियों , व्यापारियों , विषय विशेषज्ञों और एसएफएसी के साथ व्यापक परामर्श के बाद तथा केंद्रीय कृषि एवं ...

कीट नियंत्रण के लिए तकनीकी सहायता

  ऐसा कोई विशिष्ट आँकड़ा उपलब्ध नहीं है जो दर्शाता हो कि जलवायु परिवर्तन , गर्मी , लू और टिड्डियों जैसी आपदाओं के कारण कपास और मूंग जैसी फसलों में कीटों का प्रकोप और बीमारियों का प्रकोप 33% या उससे अधिक हो गया है , जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवाचार (एनआईसीआरए) नामक एक परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है , जो फसलों , पशुधन , बागवानी और मत्स्य पालन सहित कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन करती है। यह जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल प्रौद्योगिकियों का विकास और संवर्धन भी करती है , जिससे सूखा , बाढ़ , पाला , लू आदि जैसी प्रतिकूल मौसम स्थितियों से ग्रस्त क्षेत्रों को इन प्रतिकूल स्थितियों से निपटने में मदद मिलती है। एनआईसीआरए के अंतर्गत 12 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में महत्वपूर्ण फसलों के लिए कीटों , रोगों और मौसम पर डेटाबेस विकसित करके , फील्ड परिस्थितियों में जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों में होने वाली बीमारियों की घटनाओं का समाधान किया जा रहा है। अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं के लिए राज्य आपदा मोच...

योजना- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजनाएं जारी रखने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करने और उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजनाएं जारी रखने की मंजूरी दे दी है।, इस पर 15वें वित्त आयोग के दौरान 2025-26 तक 35,000 करोड़ रुपये कुल वित्तीय व्यय होगा। सरकार ने किसानों और उपभोक्ताओं को अधिक कुशलता से सेवा प्रदान करने के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) और मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) योजनाओं को पीएम आशा में मिला दिया है। पीएम-आशा की एकीकृत योजना इसके कार्यान्वयन में और अधिक प्रभावशीलता लाएगी , जिससे न केवल किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य प्रदान करने में मदद मिलेगी , बल्कि उपभोक्ताओं को किफायती मूल्‍यों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करके मूल्यों में उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। पीएम-आशा में अब मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) , मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) , मूल्य घाटा भुगतान योजना (पीओपीएस) और बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के घटक शामिल होंग...

मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए योजनाबद्ध कार्यक्रम

  मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए योजनाबद्ध कार्यक्रम  सरकार द्वारा वर्ष 2015 से ही मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना क्रियान्वित की जा रही है , जिसके तहत फसल उगाने वाली मिट्टी की क्षमता में सुधार लाने और इसके फलस्वरूप उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) जारी किए जाते हैं। इस तरह के कार्ड किसानों को जैविक खादों व जैव-उर्वरकों के साथ-साथ द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों सहित उर्वरक के विवेकपूर्ण उपयोग हेतु प्रोत्साहित करते हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिट्टी की पोषकता स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं और वे मिट्टी के स्वास्थ्य तथा उर्वरता में सुधार लाने के लिए पोषक तत्वों की उचित मात्रा के बारे में अनुशंसा करते हैं। देश भर में किसानों को अब तक 24.17 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं , जो फसल उत्पादकों को भूमि की मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। एक बार मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार हो जाने के बाद कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) , कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) , कृषि सखी आदि के माध्यम से किसानों...

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में उच्च उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल और जैव-सशक्त फसलों की 109 किस्मों को जारी किया।

  प्र धानमंत्री ने उच्च उपज देने वाली , जलवायु अनुकूल और जैव-सशक्त फसलों की 109 किस्में जारी कीं , प्रधानमंत्री ने कृषि में मूल्य संवर्धन के महत्व को रेखांकित किया , इन फसलों के बीज जलवायु के अनुकूल हैं और प्रतिकूल मौसम में भी अच्छी फसल दे सकते हैं:  आज का कार्यक्रम प्रयोगशाला से भूमि कार्यक्रम का सबसे अच्छा उदाहरण है:  श्री शिवराज सिंह चौहान इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने किसानों और वैज्ञानिकों से परस्‍पर बातचीत भी की। इन नई फसल किस्मों के महत्व पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि में मूल्य संवर्धन के महत्व पर बल दिया। किसानों ने कहा कि ये नई किस्में अत्यधिक लाभकारी होंगी क्योंकि इनसे उनका व्‍यय कम होगा और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने मोटे अनाजों के महत्व पर चर्चा की और इस बात को रेखांकित किया कि कैसे लोग पौष्टिक भोजन की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि केवीके को प्रत्‍येक महीने विकसित की जाने वाली नई किस्‍मों के लाभों के बारे में किसा...

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