सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शासकीय योजना और NGO प्रोजेक्ट के विषय सूचि के लिए क्लिक करें

ज़्यादा दिखाएं

प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति -योजना

पिछले तीन वर्षों के दौरान अनुसूचित जाति के लिए प्री - मैट्रिक और पोस्ट - मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत आवंटित धनराशि और लाभार्थियों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है : वित्तीय वर्ष अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री - मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट - मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना आवंटित धनराशि ( करोड़ रुपये में ) लाभार्थी ( लाख में )   आवंटित धनराशि ( करोड़ रुपये में ) लाभार्थी ( लाख में ) 2020-21 599.71 29.15 4008.60 62.87 2021-22 570.18 38.11 1930.38 30.25 2022-23 207.93 11.34 4392.50 46.41   वित्त वर्ष 2022-23 से , प्री और पोस्ट - मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत छात्रवृत्ति का केंद्रीय हिस्सा आधार आधारित भुगतान प्रणाली ( एपीबी...

डीईपीडब्ल्यूडी की समावेशिता का विज़न: नई पहलों से जीवन में बदलाव प्रमुख बदलाव: डीईपीडब्ल्यूडी की पांच पहलें दिव्‍यांगता अधिकारों के परिदृश्य को नया आकार देंगी

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री कुमारी प्रतिमा भौमिक डीईपीडब्ल्यूडी की पांच पहलें शुरू करेंगी  भारत में दिव्‍यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने एक परिवर्तनकारी यात्रा शुरू की है। अधिक समावेशी समाज की अपनी निरंतर कोशिश में , डीईपीडब्ल्यूडी ने महत्वपूर्ण साझेदारी बनाई है और स्थायी परिवर्तन लाने के लिए अभिनव पहलें लागू की हैं। यूनिक दिव्यांगता आईडी (यूडीआईडी) पोर्टल के माध्यम से अज्ञात डेटा जारी करने के लिए वास्‍तुकला परिषद के साथ एक अभूतपूर्व समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने से लेकर अनुसंधान उद्देश्यों और पीएम दक्ष पोर्टल की शुरुआतहै , जिसे दिव्‍यांग व्यक्तियों को उनके क्षेत्र में सशक्त बनाने , कौशल विकास और रोजगार के अवसरों की खोज के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अतिरिक्त , यह एक विस्‍‍तृत पुस्तिका में भारतीय अदालतों द्वारा दिव्‍यांगता के बुनियादी अधिकारों के संबंध में निर्णयों के संकलन की पड़ताल करता है और दिव्‍यांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त की एक अत्याधुनिक ऑनलाइन केस मॉनिटरिंग पोर्टल के विषय पर जानकारी देता है। सामाजिक न्याय और अधिकार...

सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करने वाले कर्मियों की मौतों को रोकने और उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेइ) तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचय़ूए) ने संयुक्त रूप से "मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (नमस्ते) " नामक एक योजना तैयार की है।

  " मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (नमस्ते)" इस योजना का उद्देश्य सफाई कामगारों का औपचारिकीकरण और पुनर्वास करना है हालाँकि , हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के पुनर्वास के लिए स्व-रोज़गार योजना (एसआरएमएस) और सरकार के अन्य प्रयासों के चलते , हाथ से मैला उठाने वाले काम के खतरे को लगभग समाप्त कर दिया गया है , लेकिन सीवरों की जोखिमपूर्ण सफाई के कारण सीवर/सेप्टिक टैंकों से संबंधित कई मौतों की खबरें समय-समय पर प्रेस में प्रकाशित होती है। ऐसे मामलों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार 10 लाख रुपये के मुआवजे के भुगतान के लिए संबंधित राज्य सरकार के साथ उठाया गया है। इस प्रकार , इन दिनों मुख्य समस्या सीवर और सेप्टिक टैंकों की जोखिमपूर्ण सफाई और सुरक्षा सावधानियों का पालन न करना है , जिसके कारण बहुमूल्य मानव जीवन की हानि होती है। इस जोखिमपूर्ण सफाई को खत्म करने , सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करने वाले कर्मियों की मौतों को रोकने और उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए , सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेइ) तथा आवास और शहरी मामलों ...

इस ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाले नए विषयों को जानने के लिए फॉलो करें