प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ शिफ्ट होने के तुरंत बाद लिए अपने प्रथम निर्णय में पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस उपचार) योजना के शुभारंभ को स्वीकृति प्रदान की। यह निर्णय—सेवा , करुणा और कमजोर नागरिकों की सुरक्षा पर आधारित शासन के दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित करता है। यह कदम सरकार की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है कि सड़क दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सीय सहायता के अभाव में किसी भी व्यक्ति को जान नहीं गंवानी पड़े। भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बहुत अधिक संख्या में मौते होती हैं , जिनमें से अनेक को समय पर चिकित्सीय सहायता प्रदान कर टाला जा सकता है। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यदि दुर्घटना पीड़ितों को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए , तो लगभग 50% मौतों को टाला जा सकता है। सेवा तीर्थ से पीएम राहत को स्वीकृति देकर प्रधानमंत्री ने जीवनरक्षक हस्तक्षेप , अस्पतालों के लिए वित्तीय सुनिश्चितता और दुर्घटना पीड़ितों के लिए सुव्यवस्थित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने को प्राथमिकता दी है। आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) ...
थोडा सा अलग ... थोडा सा हटकर ... पर तर्कसंगत है - जनहित को सुरक्षित करने के लिए समर्पित है ; स्कुल शिक्षा, उच्च शिक्षा, लोक स्वास्थ्य, नगरीय निकाय, छत्तीसगढ़ी भाषा, स्थानीय भाषा, पर्यावरण संरक्षण जैसे जन सामान्य के लिए महत्वपर्ण विषयों के विधिक पहलू पर प्रकाश डालने वाला है, मेरा दृष्टिकोण , mera drushtikon