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यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा

रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है ।

जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..! 

वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर गरीब तबके के लोगों के बीच प्रचलित है । उल्लेखनीय है कि, यशवंत यूट्यूब और वेबसाईट पर भ्रामक जानकारी की पोस्ट बनाकर… दबदबा बनाने का हास्यास्पद प्रयास करने वाले कार्य व्यवहार करने का आदि है। विगत दिनों यूट्यूबर यशवंत साहू ने… खाद्य विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाही को फिल्मी अंदाज में गड़बड़ीपूर्ण बताकर गंभीर आरोप लगाए हैं..! उल्लेखनीय है कि यशवंत ने अति उत्साह में प्रदेश सरकार, नेता, मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये है..! जिसकी सत्यता की जांच करने और यशवंत को उसके द्वारा लगाए गए आरोपों को साबित करने का अवसर देने के लिए पुलिस शिकायत दर्ज करवाई गई है पढ़िए शिकायत… 
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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

एनएडीए इंडिया ने रायपुर, छत्तीसगढ़ में डोपिंग रोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया

  राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (एनएडीए इंडिया) ने रायपुर , छत्तीसगढ़ में जूनियर नेशनल फेंसिंग चैंपियनशिप के लिए डोपिंग रोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया।   2 जनवरी 2024 को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य युवा एथलीटों और सहायक कर्मियों के बीच डोपिंग रोधी प्रथाओं के बारे में जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना पैदा करना था। सत्र में डोपिंग रोधी नियमों के महत्वपूर्ण पहलुओं , निष्पक्ष खेल के महत्व और डोपिंग नीतियों के उल्लंघन के परिणामों पर चर्चा की गई। इसने स्वच्छ और निष्पक्ष खेलों की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ते हुए , 200 से अधिक प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक शामिल किया और शिक्षित किया। **** एमजी/एआरएम/केपी/एसएस प्रविष्टि तिथि: 02 JAN 2024 by PIB Delhi( रिलीज़ आईडी: 1992503) आगंतुक पटल : 67

6 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य पूरा करने के लिए 700 शी-मार्ट और 1,000 ज़िला फ़ुलफ़िलमेंट सेंटर बनाए जाएंगे

ग्रामीण विकास सचिव ने डे-एनआरएलएम के अंतर्गत मार्केटिंग पहलों की समीक्षा की ; महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने पर बल दियाक्षमता निर्माण , उद्यम को बढ़ावा देना , ओएनडीसी के साथ साझेदारी और वित्तीय समावेशन मुख्य प्राथमिकताएं बनी रहेंगी ग्रामीण विकास विभाग ने छह करोड़ लखपति दीदियों को तैयार करने के लिए एक रणनीति बनाई है। इस रणनीति के मुख्य हिस्से हैं: उद्यम को बढ़ावा देकर आजीविका के बेहतर अवसर सृजित करना , ग्रामीण महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाना , और स्वयं सहायता समूह (शी) के सदस्यों के लिए क्षमता निर्माण , मार्केटिंग गतिविधियों , प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सहायता पर ध्यान देना। भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस पर चर्चा की गई। इस बैठक का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) और इसकी विभिन्न उप-योजनाओं की प्रगति का आकलन करना था। बैठक में संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा और सुश्री जयश्री एम.जी. के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका प्रभाग और राष्ट्रीय मिशन प...

भारतीय खाद्य निगम ने अपने डिपो में आधुनिक वीडियो निगरानी प्रणाली की शुरुआत की

  उपभोक्ता मामले , खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की 100 दिन की उपलब्धियों के एक हिस्से के रूप में , भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने अपने भंडारण डिपो में वर्तमान एनालॉग सीसीटीवी निगरानी प्रणाली को आधुनिक आईपी-आधारित सीसीटीवी निगरानी प्रणाली में अद्यतन करने की पहल की है।  एफसीआई के स्वामित्व वाले 561 डिपो में लगभग 23,750 कैमरे लगाए जाएंगे। यह बदलाव एफएसडी श्यामनगर में भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) द्वारा आयोजित एक सफल प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) पर आधारित है। इस नई आईपी-आधारित प्रणाली के कार्यान्वयन से बेहतर क्षमता वाली तस्वीरें मापक दायरा और दूर से निगरानी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारतीय खाद्य निगम देश के खाद्यान्न प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है , जो खाद्यान्नों की खरीद , भंडारण और वितरण में अहम है। यह उत्कृष्टता न केवल देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करती है , बल्कि कृषि विकास को भी बढ़ावा देती है। इसके अनेक कार्यों में से , सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जरूरतों ...

भिलाई का आवासीय लीज मामला नियम कानून और प्रशासनिक असहमतियों के उलझनों से बाहर नहीं निकल पा रहा है इसलिए विधि सम्मत वास्तविकता के धरातल पर स्थापित नहीं हो पा रहा है क्योंकि भिलाई में एक ऐसे नेतृत्व का अभाव विगत वर्षों से रहा है जो बीएसपी आवासीय प्रयोजन के लीज मामले को बहुआयामी विधिक दृष्टिकोण से सक्षम न्यायालय और प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सके… अतः ऐसे विधिक घटकों और उनकी विधि निर्देशित भूमिका को हम सभी को जानना और समझना अपेक्षित है l जिस पर भिलाई का महापौर पर्दा डालने का नाकाम प्रयास करता नजर आ रहा है l

सर्वविहित है कि, भारत देश के सभी भूमि का स्वामित्व प्राधिकार भारत के केंद्र शासन में निहित है छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के स्वामित्व वाली भूमि भी इसी केंद्रीय शासन के निर्णायक प्राधिकार का हिस्सा कहे जाने पर किसी का दो मत नहीं हो सकता है इसलिए भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बनाए गए आवासीय भवनों और भूखंडो का प्रथम मालिकाना अधिकार केंद्र शासन में अधिष्ठित होने की विधिमान्यत भी सुस्पष्ट है लेकिन यह भी विधि अपेक्षित है कि, केंद्र सरकार जो भी निर्णय लेगी उसमें राज्य शासन और स्थानीय नगरीय निकाय अर्थात भिलाई नगर निगम व इसी तारतम्य में स्थानीय प्रशासन अर्थात कलेक्टर दुर्ग के पद में निहित निर्णायक प्राधिकार के आधार पर भिलाई इस्पात संयंत्र के लीज मामले में जो निर्णय आएगा वह विधि मान्य होगा l गौर तलब रहे की उक्त उल्लेखित सभी प्राधिकारियों द्वारा लिए जाने वाले समासंयोजित निर्णय को कोई भी न्यायालयीन चुनौती नहीं दे पायेगा लेकिन इस मामले में भिलाई का महापौर खामोश है और कोई भी अधिकृत जानकारी जनता से साझा नहीं कर रहा है इसका क्या क...

शैक्षणिक सत्र 2023-24 से केंद्र/राज्य सरकार के 57 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों/संस्थानों में चार-वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) का शुभारंभ हुआ पढ़िए पूरी जानकारी

अमोल मालुसरे का दृष्टिकोण है कि, अध्यापन क्षेत्र में अब आया है बड़ा बदलाव ! राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने पूरे देश में शैक्षणिक सत्र 2023-24 से 57 अध्यापक शिक्षा संस्थानों (टीईआई) में एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) शुरू किया है। यह एनईपी 2020 के तहत एनसीटीई का एक प्रमुख कार्यक्रम है। आईटीईपी, जिसे 26 अक्टूबर 2021 को अधिसूचित किया गया था, एक 4 साल की दोहरी-समग्र स्नातक डिग्री है, जो बी.ए. बी.एड./ बी.एससी बी.एड. / और बी.कॉम बी.एड. पाठ्यक्रम पेश करती है। यह पाठ्यक्रम; नयी स्कूल संरचना के 4 चरणों यानि फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी (5+3+3+4) के लिए शिक्षकों को तैयार करेगा। यह कार्यक्रम शुरू में प्रतिष्ठित केंद्र/राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों/संस्थानों में पायलट मोड में चलाया जा रहा है। आईटीईपी उन सभी छात्रों के लिए उपलब्ध होगा, जो सेकेंडरी के बाद अपनी पसंद से शिक्षण को अपने करियर के रूप में चुनते हैं। इस एकीकृत पाठ्यक्रम से छात्रों को एक वर्ष की बचत का लाभ होगा, क्योंकि वे वर्तमान बी.एड. योजना के लिए आवश्यक 5 वर्षों के बजाय पाठ्यक्रम को 4 वर्...

श्रमिक बस्ती क्षेत्र को कचरा फेको केंद्र बनाने की कांग्रेसी साजिश नाकाम हुई ! पार्षद धर्मेंद्र भगत ने खोला मोर्चा तो कांग्रेस के महापौर और पार्षदों की बोलती बंद हो गई पढ़िए क्या है पूरा मामला…

भाजपा पार्षद धर्मेंद्र भगत ने लोकस्वास्थ्य संरक्षण मामले पर विधिक कार्यवाही करने का मोर्चा संभालते हुए कचरा फेंकने वाली गाड़ियों को पकड़ा और विधिवत शिकायत दर्ज करवाई  नेवई क्षेत्र को कचरा फेंको केंद्र क्यों बनाना चाहती है कांग्रेस ? रिसाली निगम का नेवई क्षेत्र श्रमिक बस्ती बहुल क्षेत्र है जहां पर श्रमिक रहते हैं । इन्हीं बस्तियों के आसपास कांग्रेस की शहर सरकार वर्षों से  शहरी कचरा नियमविरुध तरीके से फिकवा रही है कांग्रेस की शहर सरकार ऐसा क्यों करवा रही है इसका जवाब तो पूर्व विधायक ताम्रध्वज साहू ज्यादा अच्छे से दे सकते हैं लेकिन वर्तमान स्थिति है कि कचरा फेंकने वाली… जो गाड़ियां मौके वारदात पर पकड़ी गई वे गाड़ियां दुर्ग निगम की बताई जा रही है । इन गाड़ियों को पकड़ने वाले पार्षद और उनके साथीगण लोक स्वास्थ्य को बचाने के लिए सभी जिम्मेदार प्राधिकारियों जैसे कलेक्टर दुर्ग, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई, महापौर रिसाली, पर्यावरण एमआईसी रिसाली और आयुक्त एमआईसी सदस्य के समक्ष शिकायत कर चुके हैं । इसलिए अब सभी को यह जानने की उत्सुकता है कि आखिर यह लोग किसके विरुद्ध क्य...

एनसीबीसी ने केंद्र सरकार को महाराष्ट्र की कुछ खास जातियों/समुदायों को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करने की सलाह दी

  केंद्र सरकार को महाराष्ट्र की कुछ खास जातियों/समुदायों को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करने की सलाह दी है एनसीबीसी ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग [NCBC] ने केंद्र सरकार को (i) लोध, लोधा, लोधी; (ii) बड़गूजर, (iii) सूर्यवंशी गूजर, (iv) रेवे गूजर, लेवे गूजर, रीवा गूजर; (v) डांगरी; (vi) भोयर, पवार (vii) कपेवार, मुन्नार कपेवार, मुन्नार कापू, तेलंगा, तेलंगी, पेंटारेड्डी, बुकेकारी जातियों/समुदायों को महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की केंद्रीय सूची में शामिल करने की सलाह दी है। NCBC(एनसीबीसी) के अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहीर और माननीय सदस्य श्री भुवन भूषण कमल की दो सदस्यीय पीठ ने १७ अक्टूबर, २०२३ और २६ जुलाई,२०२४ को मुंबई में समावेशन के सम्बंध में सुनवाई की थी। महाराष्ट्र के लिए ओबीसी की केंद्रीय सूची में उपरोक्त जातियों को शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को सलाह देने का अंतिम निर्णय८ अक्टूबर, २०२४ को लिया गया और ९अक्टूबर, २०२४ को इसे मूर्त रूप दिया गया। *** एमजी/आरपीएम/केसी/वीके/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2063898) आगंतुक पटल : 43 प्रविष्टि तिथि: 09 OCT 2024 by PIB Delhi ...

अतुल्य भारत डिजिटल पोर्टल एक पर्यटक-केंद्रित, वन-स्टॉप डिजिटल समाधान है जिसे भारत आने वाले आगंतुकों के लिए यात्रा के अनुभव को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है

  पर्यटन मंत्रालय ने अतुल्य भारत कंटेंट हब और डिजिटल पोर्टल शुरू किया भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने 27 सितंबर 2024 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नए सिरे से तैयार किए गए अतुल्य भारत डिजिटल पोर्टल ( www.incredibleindia.gov.in) पर अतुल्य भारत कंटेंट हब शुरू किया। अतुल्य भारत कंटेंट हब एक व्यापक डिजिटल संग्रह है। इसमें भारत में पर्यटन से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाली छवियों , फिल्मों , ब्रोशर और समाचार पत्रों का समृद्ध संग्रह है। यह संग्रह विभिन्न हितधारकों के उपयोग के लिए है। इसमें टूर ऑपरेटर , पत्रकार , छात्र , शोधकर्ता , फिल्म निर्माता , लेखक , प्रभावशाली व्यक्ति , सामग्री निर्माता , सरकारी अधिकारी और राजदूत शामिल हैं। कंटेंट हब नए अतुल्य भारत डिजिटल पोर्टल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में यात्रा व्यापार (यात्रा मीडिया , टूर ऑपरेटर , ट्रैवल एजेंट) के लिए अतुल्य भारत पर अपनी ज़रूरत की हर चीज़ को एक ही स्थान पर एक्सेस करना आसान और सुविधाजनक बनाना है। इससे वे अपने सभी मार्केटिंग और प्रचार प्रयासों में अतुल्य भारत को बढ़ावा दे सकें। कंटेंट हब में वर्तमान में लगभग 5,000 कं...

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