31 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार तथा 5 लाख से ज्यादा अस्थाई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को सेवाएं देने वाले श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत
श्रम और
रोजगार मंत्रालय ने ई-श्रम (राष्ट्रीय असंगठित कामगार डाटाबेस) पोर्टल को 26 अगस्त, 2021 को शुरू किया। इसका
उद्देश्य असंगठित, अस्थाई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए
ग्राहकों को सेवा देने वाले, आधार से जुड़े श्रमिकों को स्वयं
घोषणा के आधार पर सार्वभौम खाता संख्या (यूएएन) देकर पंजीकृत करना है। नवंबर,
2025 तक 31.38 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार
तथा 5.09 लाख से ज्यादा अस्थाई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए
ग्राहकों को सेवाएं देने वाले श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।
सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं तक पहुंच
प्रदान करने के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 14 योजनाओं को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ा और चित्रित किया जा चुका है।
19 नवंबर, 2025 तक ई-श्रम के जरिए पंजीकृत असंगठित
कामगारों का विवरण जिन्हें विभिन्न कल्याण योजनाओं का लाभ मिला है-
|
योजना |
पंजीकरणों
की संख्या |
|
एक
राष्ट्र एक राशन कार्ड |
24,15,55,436 |
|
आयुष्मान
भारत—प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना |
15,10,06,017 |
|
प्रधानमंत्री
सुरक्षा बीमा योजना |
8,49,72,519 |
|
महात्मा
गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना |
6,16,93,566 |
|
प्रधानमंत्री
किसान सम्मान निधि |
3,94,74,997 |
|
प्रधानमंत्री
जीवन ज्योति बीमा योजना |
2,25,52,084 |
|
प्रधानमंत्री
आवास योजना-ग्रामीण |
98,06,495 |
|
प्रधानमंत्री
स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि |
32,38,555 |
|
प्रधानमंत्री
मातृ वंदना योजना |
31,58,528 |
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प्रधानमंत्री
आवास योजना-शहरी |
24,83,426 |
|
इंदिरा
गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना |
11,71,070 |
|
इंदिरा
गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना |
1,67,068 |
|
प्रधानमंत्री
मत्स्य संपदा योजना |
23,803 |
भारत सरकार
ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा में अस्थाई तथा
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सेवा देने वाले श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण
कदम घोषित किए हैं। इनमें ई-श्रम पोर्टल के जरिए पंजीकरण, पहचानपत्र
जारी करना तथा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य
सेवा के लाभ देना शामिल है।
सरकार रोजगार
सृजन तथा युवाओं और महिलाओं की रोजगार-क्षमता बढ़ाने को तरजीह दे रही है। वह देश
में रोजगार सृजन की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रही है। इनमें
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंडअप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम तथा वूमेन इन साइंस एंड
इंजीनियरिंग-किरण (वाइज-किरण) शामिल हैं।
सरकार कौशल
विकास केंद्रों, विद्यालयों, महाविद्यालयों
और संस्थानों इत्यादि के विस्तृत नेटवर्क के जरिए कौशल विकास, पुनःकौशलीकरण और कौशल उन्नयन के लिए स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) चला रही
है। इसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, जन शिक्षण संस्थान,
राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना तथा औद्योगिक प्रशिक्षण
संस्थानों के जरिए शिल्पकार प्रशिक्षण योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत चलाया जा
रहा है। एसआईएम का उद्देश्य भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करते हुए
उद्योग के वास्ते प्रासंगिक कौशलों से लैस करना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स
और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी से जुड़े श्रमिक बल को कृत्रिम मेधा समेत 10 नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में रोजगार-क्षमता से लैस
करने के लिए पुनःकौशलीकरण और कौशल उन्नयन का कार्यक्रम ‘फ्यूचर स्किल प्राइम’ शुरू
किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 18.56 लाख से अधिक उम्मीदवारों
ने ‘फ्यूचर स्किल प्राइम’ पोर्टल पर साइनअप किया है। इनमें से 3.37 लाख से ज्यादा उम्मीदवार अपने पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं।
इसके अलावा
सरकार ने विशेष रूप से मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र समेत सभी क्षेत्रों में रोजगार सृजन, रोजगार-क्षमता संवर्द्धन और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने
के लिए रोजगार आधारित प्रोत्साहन योजना - प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना
शुरू की है। कुल 99446 करोड़ रुपए के परिव्यय से चलाई जा रही इस
योजना का उद्देश्य देश में 2 वर्षों में 3.5 करोड़ से ज्यादा रोजगारों के सृजन को प्रोत्साहित करना है।
भारत सरकार
का श्रम और रोजगार मंत्रालय राष्ट्रीय कॅरियर सेवा पोर्टल (एनसीएस) चला रहा है। यह
पोर्टल एक ही जगह पर करियर से संबंधित सेवाएं प्रदान करता है। इन सेवाओं में निजी
और सरकारी क्षेत्रों में नौकरियों, ऑनलाइन और ऑफलाइन रोजगार मेलों, रोजगार खोज और मिलान,
कॅरियर परामर्श, व्यावसायिक निर्देशन, कौशल विकास पाठ्यक्रमों और नियोजनीयता उन्नयन कार्यक्रमों के बारे में
जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराना है।
औद्योगिक संबंध
संहिता 2020, वेतन संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 में राज्यों में
विभिन्न क्षेत्रों में समयबद्ध शिकायत निवारण, न्यूनतम
मजदूरी के अनुपालन और सुरक्षित कार्य दशा सुनिश्चित करने के उपाय किए गए हैं। श्रमिक
अपने वेतन, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभों,
अवैध निष्कासन, औद्योगिक विवाद और अन्य तरह के
मामलों से जुड़ी शिकायतों के हल के लिए समाधान पोर्टल का सहारा ले सकते हैं। इसके
अलावा श्रमिक अपनी शिकायतों को समयबद्ध निपटारे के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत
निपटारा और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के जरिए भी दर्ज करा सकते हैं।
चार केंद्रीय
श्रम संहिताओं को 21 नवंबर 2025 से
प्रभावी कर दिया गया है। इन संहिताओं में औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज
बढ़ाने तथा देश में समग्र श्रमिक कल्याण के लिए दीर्घकालिक रणनीति के रूप में
विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
1.
सभी नौकरियों के लिए न्यूनतम मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करना
2.
वेतन का समय पर भुगतान
3.
सिर्फ चेक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वेतन का भुगतान
4. सभी श्रमिकों/कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र अनिवार्य रूप से जारी कर
नियुक्ति का औपचारीकरण
5. श्रमिकों की मुफ्त सालाना स्वास्थ्य जांच अनिवार्य
6. सामाजिक सुरक्षा का अस्थाई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को सेवाएं
देने वाले श्रमिकों समेत सभी असंगठित कामगारों तक विस्तार
7. 40
वर्ष से अधिक उम्र के सभी श्रमिकों की सालाना स्वास्थ्य जांच
8. महिला कामगार/कर्मचारी मातृत्व लाभ पाने का हकदार होंगी
9. 50
से अधिक श्रमिकों/कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में शिशु गृह की
व्यवस्था
यह
जानकारी श्रम और रोजगार राज्यमंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज लोकसभा में एक
प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एसक प्रविष्टि तिथि: 01 DEC
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