प्रेस एवं पुस्तक अधिनियम के… विधि निर्देश की धज्जियां उड़ाई भूपेश बघेल सरकार ने…प्रेस एवं पुस्तक रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1867 की धारा 5 में स्पष्ट किया गया है की समाचार पत्रों के प्रकाशन के बारे में नियम ( भारत में कोई भी समाचार पत्र ) इसमें इसके पश्चात अभिकथित नियमों के अनुरूप ही प्रकाशित किया जायेगा अन्यथा नहीं (विवरण अग्रलिखित है) लेकिन छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल सरकार ने… इस अधिनियम के विधि निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की और छत्तीसगढ़ के सामाजिक परिवेश में…
भूपेश बघेल सरकार ने पत्रकारिता जगत की आधारभूत आवश्यकताओं और मानकों को संरक्षित और अभिप्रमाणित करने की कार्यवाही को… निष्पक्ष शासकीय निर्णय क्षमता वाला प्रजातांत्रिक आधार नहीं दिया…
पढ़िए क्या कहता है अधिनियम...
उद्देशिका मुद्रणालयों तथा समाचारपत्रों के विनियमन के लिए भारत में मुद्रित प्रत्येक पुस्तक तथा समाचारपत्र) की * प्रतियों के परिरक्षण के लिए था ऐसी पुस्तकों तथा समाचारपत्रों के रजिस्ट्रीकरण के लिए उपबन्ध करना समीचीन है अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है
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पंजीयन प्रक्रिया का विधि निर्देश
प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 की धारा 5.
समाचारपत्रों के प्रकाशन के बारे में नियम- [भारत] में कोई भी [समाचारपत्र], इसमें इसके पश्चात् अधिकथित नियमों के अनुरूप ही प्रकाशित किया जाएगा, अन्यथा नहीं:
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धारा 5..(1) धारा 3 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे प्रत्येक समाचारपत्र की प्रत्येक प्रति पर उसके स्वामी तथा उसके सम्पादक के नाम तथा उसके प्रकाशन की तारीख भी स्पष्ट मुद्रित होगी ।] (संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 6)
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धारा 5.(2) ऐसे प्रत्येक समाचारपत्र] का मुद्रक तथा प्रकाशक व्यक्तिगत रूप से या धारा 20 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार इस निमित्त प्राधिकृत अभिकर्ता की मार्फत ऐसे जिला, प्रेसिडेंसी या उपखण्ड मजिस्ट्रेट के समक्ष, जिसकी स्थानीय अधिकारिता में ऐसा समाचारपत्र मुद्रित या प्रकाशित किया जाएगा, **** हाजिर होगा और निम्नलिखित घोषणा करेगा तथा उसकी दो प्रतियों पर हस्ताक्षर करेगा :-
"मैं कख घोषित करता हूं कि मैं अथवा मुद्रित और प्रकाशित किए जाने वाले प्रकाशक) हूं।" _(स्थान) में यथास्थिति, मुद्रित प्रकाशित किए जाने वाले या नामक ' ( समाचारपत्र) का मुद्रण ( या प्रकाशक, मुद्रक और और इस घोषणा के प्ररूप की पहली पंक्ति में जहां मुद्रण या प्रकाशन किया जाता है, उस भवन के बारे में सही-सही और ठीक-ठीक विवरण भरा जाएगा।
(संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 7)
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धारा 5. (2क) नियम (2) के अधीन की प्रत्येक घोषणा में समाचारपत्र का नाम, वह भाषा, जिसमें उसका प्रकाशन किया जाना है. तथा उसकी प्रकाशन आवधिकता विनिर्दिष्ट की जाएगी और उसमें ऐसी अन्य विशिष्टियां भी होंगी, जो विहित की जाएं।]
(संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 11)
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धारा 5. (2ख) जहां नियम (2) के अधीन की घोषणा करने वाला समाचारपत्र का मुद्रक या प्रकाशक उसका स्वामी नहीं है वहां उस घोषणा में स्वामी का नाम विनिर्दिष्ट किया जाएगा और उसके साथ स्वामी का लिखित रूप में ऐसा प्राधिकार भी होगा जिसमें उक्त व्यक्ति को घोषणा करने तथा उस पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।(संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 12)
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धारा 5. (2ग) समाचारपत्र प्रकाशित करने से पूर्व उस समाचारपत्र की बाबत नियम (2) के अधीन घोषणा तथा धारा 6 के अधीन उसका अधिप्रमाणित किया जाना आवश्यक होगा।
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धारा 5.(2घ) जहां किसी समाचारपत्र के नाम या उसकी भाषा या उसकी प्रकाशन आवधिकता में परिवर्तन किया गया है वहां घोषणा प्रभावहीन हो जाएगी और समाचारपत्र के प्रकाशन को चालू करने से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
धारा 5. (2ङ) जितनी बार किसी समाचारपत्र के स्वामित्व में परिवर्तन किया जाता है उतनी बार नई घोषणा आवश्यक होगी ।]
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धारा 5. '[(3)] जितनी बार मुद्रण तथा प्रकाशन के स्थान में परिवर्तन किया जाता है उतनी बार नई घोषणा आवश्यक होगी:
परन्तु जहां ऐसा परिवर्तन तीस दिन से अधिक की अवधि के लिए नहीं है और परिवर्तन के पश्चात् मुद्रण अथवा प्रकाशन का स्थान नियम (2) में निर्दिष्ट मजिस्ट्रेट की स्थानीय अधिकारिता में रहता है वहां नई घोषणा आवश्यक नहीं होगी यदि
(क) परिवर्तन के चौबीस घंटे के भीतर परिवर्तन से सम्बन्धित विवरण उक्त मजिस्ट्रेट को दे दिया जाता है, और
(ख) समाचारपत्र का मुद्रक या प्रकाशक या मुद्रक और प्रकाशक वही व्यक्ति रहता है।]
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धारा 5. (4) ऐसा मुद्रक या प्रकाशक, जिसने यथापूर्वोक्त घोषणा की है, नब्बे दिन से अधिक की अवधि के लिए जितनी भी बार भारत में बाहर जाएगा या जहां ऐसा मुद्रक या प्रकाशक अशक्तता के कारण या अन्यथा नब्बे दिन से अधिक की अवधि के लिए अपने कर्तव्यों को ऐसी परिस्थितियों में, जिनमें उसका पद रिक्त नहीं होता है, कार्यान्वित करने में असमर्थ रहेगा वहां, उतनी ही बार नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (5) जहां समाचारपत्र के प्रकाशन का आरम्भ
(क) सप्ताह में एक या एक से अधिक बार प्रकाशित किए जाने वाले समाचारपत्र की दशा में (धारा 6 के अधीन घोषणा के अधिप्रमाणन के छह सप्ताह के भीतर और
(ख) किसी अन्य समाचारपत्र की दशा में, धारा 6 के अधीन घोषणा के अधिप्रमाणन के] तीन मास के भीतर, नहीं कर दिया जाता वहां समाचारपत्र की बाबत की गई प्रत्येक घोषणा शून्य होगी और ऐसी प्रत्येक दशा में समाचारपत्र प्रकाशित किए जाने से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (6) जहां तीन मास की किसी अवधि में कोई दैनिक, त्रिसाप्ताहिक, द्विसाप्ताहिक, साप्ताहिक या पाक्षिक समाचारपत्र, अपने अंक उतनी संख्या में प्रकाशित करता है, जितनी संख्या तत्सम्बन्धी घोषणा के अनुसार प्रकाशित होने वाली संख्या के आधे से कम है वहां घोषणा प्रभावहीन हो जाएगी और समाचारपत्र का प्रकाशन जारी रखने से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (7) जहां किसी अन्य समाचारपत्र का प्रकाशन बारह मास से अधिक की अवधि के लिए बंद हो गया है वहां उसके बारे में की गई प्रत्येक घोषणा प्रभावहीन हो जाएगी, और समाचारपत्र के पुनः प्रकाशन से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (8) किसी समाचारपत्र के बारे में प्रत्येक विद्यमान घोषणा उस मजिस्ट्रेट द्वारा रद्द कर दी जाएगी, जिसके समक्ष उस समाचारपत्र के बारे में नई घोषणा की जाए और उस पर हस्तारक्षर किए जाएं :
परन्तु कोई भी व्यक्ति जो मामूली तौर से भारत में निवास नहीं करता है या जिसने भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 (1875 का 9) के अनुसार अथवा जिस विधि से वह वयस्कता प्राप्त करने की बाबत शासित होता है उस विधि के अनुसार वयस्कता प्राप्त नहीं की है, इस धारा द्वारा विहित घोषणा करने के लिए न तो अनुज्ञात किया जाएगा और न ही कोई ऐसा व्यक्ति किसी समाचारपत्र का संपादन करेगा ।।
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धारा 5. क. जम्मू-कश्मीर में मुद्रणालय रखने वाले तथा समाचारपत्रों के मुद्रक तथा प्रकाशक विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नई घोषणाएं करेंगे तथा उन पर हस्ताक्षर करेंगे (1) कोई भी व्यक्ति, जिसने जम्मू एण्ड कश्मीर स्टेट प्रेस एण्ड पब्लिकेशन ऐक्ट, संवत् 1989 ( संवत् 1989 का जम्मू-कश्मीर अधिनियम संख्यांक
5क. 1) की धारा 4 के अधीन किसी मुद्रणालय के बारे में घोषणा की है तथा उस पर हस्ताक्षर किए हैं. 1968 के दिसम्बर के इकतीसवें दिन के पश्चात् । पुस्तकों या पत्रों के मुद्रण के लिए कोई भी मुद्रणालय तब तक अपने कब्जे में नहीं रखेगा, जब तक कि "। उस तारीख की समाप्ति के पूर्व वह इस अधिनियम की धारा 4 के अधीन उस मुद्रणालय के बारे में नई घोषणा नहीं कर देता है तथा उस पर हस्ताक्षर नहीं कर देता है।
5क. 2) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसके जम्मू एण्ड कश्मीर स्टेट प्रेस एण्ड पब्लिकेशन ऐक्ट संवत् 1989 (संवत् 1989 का जम्मू- कश्मीर अधिनियम संख्यांक 1) की धारा 5 के अधीन किसी समाचारपत्र के बारे में किसी घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं, '11968 के दिसम्बर के इकतीसवें दिन के पश्चात् उस घोषणा में उल्लिखित समाचारपत्र का सम्पादक, मुद्रक या प्रकाशक केवल उसी रहेगा जब वह उस तारीख की समाप्ति के पूर्व वह इस अधिनियम की धारा 5 में अधिकथित नियमों के नियम (2) समाचारपत्र की बाबत नई घोषणा कर देता है तथा उस पर हस्ताक्षर कर देता है अन्यथा नहीं ।]
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बिंदु 1/
1955 के अधिनियम से 55 की धारा 5 द्वारा (1-7-1956 से) धारा 4 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनसंख्यांकित किया गया।
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बिंदु 2/
1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा "राज्यों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
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बिंदु 3/
1951 के अधिनियम [सं०] 56 की धारा 36 द्वारा मजिस्ट्रेट के स्थान पर (1-2-1952 से प्रतिस्थापित
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बिंदु 4/
1955 के अधिनियम सं०] 55 की धारा 5 द्वारा (1-7-1956 से) जोड़ा गया।
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बिंदु 5/
1922 के अधिनियम स० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। *
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बिंदु 6/
1960 के अधिनियम सं० 26 की धारा 2 द्वारा नियम (1) के स्थान पर (1-10-1960 से) प्रतिस्थापित, जो 1922 के अधिनियम सं० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा अन्तःस्थापित किया गया था।
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बिंदु 7/
1922 के अधिनियम सं० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा नियम (1) को नियम (2) के रूप में संख् किया गया।
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बिंदु 8/
* 1922 के अधिनियम सं० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा नियतकालिक कार्य के स्थान पर प्रतिस्थापित।
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बिंदु 9/
1960 के अधिनियम सं० 26 की धारा 2 द्वारा या ऐसा मुद्रक, या प्रकाशक निवास करता है." शब्दों का ( 1-10-1960 से लोग किया गया।
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बिंदु 10/
1955 के अधिनियम से 55 की धारा 6 द्वारा कुछ शब्दों के स्थान पर (1-7-1956 से) प्रतिस्थापित।
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बिंदु 12/
1955 के अधिनियम सं0 55 की धारा 6 द्वारा (1-7-1956 से) अंतःस्थापित ।
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बिंदु 12/
1960 के अधिनियम मं० 26 की धारा 2 द्वारा (1-10-1960 से अंतःस्थापित ।
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इस लेख पर प्रतिक्रिया अभिप्राप्त करने का इच्छुक लेखक :-
आपका... अमोल मालुसरे 🙏
नोट :- इस लेख के विषयवस्तु पर किसी को दाव-आपत्ति हो तो उनका अमोल मालुसरे सहर्ष स्वागत करता है सक्षम न्यायालय में याचिका दायर कर अमोल मालुसरे को पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर अवश्य दें । 🙏
Mo 9752396665
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