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प्रेस एवं पुस्तक अधिनियम के… विधि निर्देश की धज्जियां उड़ाई भूपेश बघेल सरकार ने…प्रेस एवं पुस्तक रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1867 की धारा 5 में स्पष्ट किया गया है की समाचार पत्रों के प्रकाशन के बारे में नियम ( भारत में कोई भी समाचार पत्र ) इसमें इसके पश्चात अभिकथित नियमों के अनुरूप ही प्रकाशित किया जायेगा अन्यथा नहीं (विवरण अग्रलिखित है) लेकिन छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल सरकार ने… इस अधिनियम के विधि निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की और छत्तीसगढ़ के सामाजिक परिवेश में…

भूपेश बघेल सरकार ने पत्रकारिता जगत की आधारभूत आवश्यकताओं और मानकों को संरक्षित और अभिप्रमाणित करने की कार्यवाही को… निष्पक्ष शासकीय निर्णय क्षमता वाला प्रजातांत्रिक आधार नहीं दिया…
पढ़िए क्या कहता है अधिनियम...
उद्देशिका मुद्रणालयों तथा समाचारपत्रों के विनियमन के लिए भारत में मुद्रित प्रत्येक पुस्तक तथा समाचारपत्र) की * प्रतियों के परिरक्षण के लिए था ऐसी पुस्तकों तथा समाचारपत्रों के रजिस्ट्रीकरण के लिए उपबन्ध करना समीचीन है अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है 
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पंजीयन प्रक्रिया का विधि निर्देश 
प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 की धारा 5. 
समाचारपत्रों के प्रकाशन के बारे में नियम- [भारत] में कोई भी [समाचारपत्र], इसमें इसके पश्चात् अधिकथित नियमों के अनुरूप ही प्रकाशित किया जाएगा, अन्यथा नहीं:
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धारा 5..(1) धारा 3 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे प्रत्येक समाचारपत्र की प्रत्येक प्रति पर उसके स्वामी तथा उसके सम्पादक के नाम तथा उसके प्रकाशन की तारीख भी स्पष्ट मुद्रित होगी ।] (संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 6)
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धारा 5.(2) ऐसे प्रत्येक समाचारपत्र] का मुद्रक तथा प्रकाशक व्यक्तिगत रूप से या धारा 20 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार इस निमित्त प्राधिकृत अभिकर्ता की मार्फत ऐसे जिला, प्रेसिडेंसी या उपखण्ड मजिस्ट्रेट के समक्ष, जिसकी स्थानीय अधिकारिता में ऐसा समाचारपत्र मुद्रित या प्रकाशित किया जाएगा, **** हाजिर होगा और निम्नलिखित घोषणा करेगा तथा उसकी दो प्रतियों पर हस्ताक्षर करेगा :-
"मैं कख घोषित करता हूं कि मैं अथवा मुद्रित और प्रकाशित किए जाने वाले प्रकाशक) हूं।" _(स्थान) में यथास्थिति, मुद्रित प्रकाशित किए जाने वाले या नामक ' ( समाचारपत्र) का मुद्रण ( या प्रकाशक, मुद्रक और और इस घोषणा के प्ररूप की पहली पंक्ति में जहां मुद्रण या प्रकाशन किया जाता है, उस भवन के बारे में सही-सही और ठीक-ठीक विवरण भरा जाएगा।
(संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 7)
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धारा 5. (2क) नियम (2) के अधीन की प्रत्येक घोषणा में समाचारपत्र का नाम, वह भाषा, जिसमें उसका प्रकाशन किया जाना है. तथा उसकी प्रकाशन आवधिकता विनिर्दिष्ट की जाएगी और उसमें ऐसी अन्य विशिष्टियां भी होंगी, जो विहित की जाएं।]
(संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 11)
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धारा 5. (2ख) जहां नियम (2) के अधीन की घोषणा करने वाला समाचारपत्र का मुद्रक या प्रकाशक उसका स्वामी नहीं है वहां उस घोषणा में स्वामी का नाम विनिर्दिष्ट किया जाएगा और उसके साथ स्वामी का लिखित रूप में ऐसा प्राधिकार भी होगा जिसमें उक्त व्यक्ति को घोषणा करने तथा उस पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।(संदर्भ : नीचे लिखे बिंदु 12)
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धारा 5. (2ग) समाचारपत्र प्रकाशित करने से पूर्व उस समाचारपत्र की बाबत नियम (2) के अधीन घोषणा तथा धारा 6 के अधीन उसका अधिप्रमाणित किया जाना आवश्यक होगा।
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धारा 5.(2घ) जहां किसी समाचारपत्र के नाम या उसकी भाषा या उसकी प्रकाशन आवधिकता में परिवर्तन किया गया है वहां घोषणा प्रभावहीन हो जाएगी और समाचारपत्र के प्रकाशन को चालू करने से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी। 

धारा 5. (2ङ) जितनी बार किसी समाचारपत्र के स्वामित्व में परिवर्तन किया जाता है उतनी बार नई घोषणा आवश्यक होगी ।]
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धारा 5. '[(3)] जितनी बार मुद्रण तथा प्रकाशन के स्थान में परिवर्तन किया जाता है उतनी बार नई घोषणा आवश्यक होगी:
परन्तु जहां ऐसा परिवर्तन तीस दिन से अधिक की अवधि के लिए नहीं है और परिवर्तन के पश्चात् मुद्रण अथवा प्रकाशन का स्थान नियम (2) में निर्दिष्ट मजिस्ट्रेट की स्थानीय अधिकारिता में रहता है वहां नई घोषणा आवश्यक नहीं होगी यदि
(क) परिवर्तन के चौबीस घंटे के भीतर परिवर्तन से सम्बन्धित विवरण उक्त मजिस्ट्रेट को दे दिया जाता है, और
(ख) समाचारपत्र का मुद्रक या प्रकाशक या मुद्रक और प्रकाशक वही व्यक्ति रहता है।]
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धारा 5. (4) ऐसा मुद्रक या प्रकाशक, जिसने यथापूर्वोक्त घोषणा की है, नब्बे दिन से अधिक की अवधि के लिए जितनी भी बार भारत में बाहर जाएगा या जहां ऐसा मुद्रक या प्रकाशक अशक्तता के कारण या अन्यथा नब्बे दिन से अधिक की अवधि के लिए अपने कर्तव्यों को ऐसी परिस्थितियों में, जिनमें उसका पद रिक्त नहीं होता है, कार्यान्वित करने में असमर्थ रहेगा वहां, उतनी ही बार नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (5) जहां समाचारपत्र के प्रकाशन का आरम्भ
(क) सप्ताह में एक या एक से अधिक बार प्रकाशित किए जाने वाले समाचारपत्र की दशा में (धारा 6 के अधीन घोषणा के अधिप्रमाणन के छह सप्ताह के भीतर और
(ख) किसी अन्य समाचारपत्र की दशा में, धारा 6 के अधीन घोषणा के अधिप्रमाणन के] तीन मास के भीतर, नहीं कर दिया जाता वहां समाचारपत्र की बाबत की गई प्रत्येक घोषणा शून्य होगी और ऐसी प्रत्येक दशा में समाचारपत्र प्रकाशित किए जाने से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (6) जहां तीन मास की किसी अवधि में कोई दैनिक, त्रिसाप्ताहिक, द्विसाप्ताहिक, साप्ताहिक या पाक्षिक समाचारपत्र, अपने अंक उतनी संख्या में प्रकाशित करता है, जितनी संख्या तत्सम्बन्धी घोषणा के अनुसार प्रकाशित होने वाली संख्या के आधे से कम है वहां घोषणा प्रभावहीन हो जाएगी और समाचारपत्र का प्रकाशन जारी रखने से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (7) जहां किसी अन्य समाचारपत्र का प्रकाशन बारह मास से अधिक की अवधि के लिए बंद हो गया है वहां उसके बारे में की गई प्रत्येक घोषणा प्रभावहीन हो जाएगी, और समाचारपत्र के पुनः प्रकाशन से पूर्व नई घोषणा आवश्यक होगी।
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धारा 5. (8) किसी समाचारपत्र के बारे में प्रत्येक विद्यमान घोषणा उस मजिस्ट्रेट द्वारा रद्द कर दी जाएगी, जिसके समक्ष उस समाचारपत्र के बारे में नई घोषणा की जाए और उस पर हस्तारक्षर किए जाएं :
परन्तु कोई भी व्यक्ति जो मामूली तौर से भारत में निवास नहीं करता है या जिसने भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 (1875 का 9) के अनुसार अथवा जिस विधि से वह वयस्कता प्राप्त करने की बाबत शासित होता है उस विधि के अनुसार वयस्कता प्राप्त नहीं की है, इस धारा द्वारा विहित घोषणा करने के लिए न तो अनुज्ञात किया जाएगा और न ही कोई ऐसा व्यक्ति किसी समाचारपत्र का संपादन करेगा ।।
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धारा 5. क. जम्मू-कश्मीर में मुद्रणालय रखने वाले तथा समाचारपत्रों के मुद्रक तथा प्रकाशक विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नई घोषणाएं करेंगे तथा उन पर हस्ताक्षर करेंगे (1) कोई भी व्यक्ति, जिसने जम्मू एण्ड कश्मीर स्टेट प्रेस एण्ड पब्लिकेशन ऐक्ट, संवत् 1989 ( संवत् 1989 का जम्मू-कश्मीर अधिनियम संख्यांक
5क. 1) की धारा 4 के अधीन किसी मुद्रणालय के बारे में घोषणा की है तथा उस पर हस्ताक्षर किए हैं. 1968 के दिसम्बर के इकतीसवें दिन के पश्चात् । पुस्तकों या पत्रों के मुद्रण के लिए कोई भी मुद्रणालय तब तक अपने कब्जे में नहीं रखेगा, जब तक कि "। उस तारीख की समाप्ति के पूर्व वह इस अधिनियम की धारा 4 के अधीन उस मुद्रणालय के बारे में नई घोषणा नहीं कर देता है तथा उस पर हस्ताक्षर नहीं कर देता है।
5क. 2) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसके जम्मू एण्ड कश्मीर स्टेट प्रेस एण्ड पब्लिकेशन ऐक्ट संवत् 1989 (संवत् 1989 का जम्मू- कश्मीर अधिनियम संख्यांक 1) की धारा 5 के अधीन किसी समाचारपत्र के बारे में किसी घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं, '11968 के दिसम्बर के इकतीसवें दिन के पश्चात् उस घोषणा में उल्लिखित समाचारपत्र का सम्पादक, मुद्रक या प्रकाशक केवल उसी रहेगा जब वह उस तारीख की समाप्ति के पूर्व वह इस अधिनियम की धारा 5 में अधिकथित नियमों के नियम (2) समाचारपत्र की बाबत नई घोषणा कर देता है तथा उस पर हस्ताक्षर कर देता है अन्यथा नहीं ।]
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बिंदु 1/ 
1955 के अधिनियम से 55 की धारा 5 द्वारा (1-7-1956 से) धारा 4 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनसंख्यांकित किया गया। 
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बिंदु 2/
1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा "राज्यों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
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बिंदु 3/ 
1951 के अधिनियम [सं०] 56 की धारा 36 द्वारा मजिस्ट्रेट के स्थान पर (1-2-1952 से प्रतिस्थापित 
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बिंदु 4/ 
1955 के अधिनियम सं०] 55 की धारा 5 द्वारा (1-7-1956 से) जोड़ा गया।
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बिंदु 5/ 
1922 के अधिनियम स० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। * 
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बिंदु 6/ 
1960 के अधिनियम सं० 26 की धारा 2 द्वारा नियम (1) के स्थान पर (1-10-1960 से) प्रतिस्थापित, जो 1922 के अधिनियम सं० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा अन्तःस्थापित किया गया था।
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बिंदु 7/ 
1922 के अधिनियम सं० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा नियम (1) को नियम (2) के रूप में संख् किया गया।
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बिंदु 8/ 
* 1922 के अधिनियम सं० 14 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा नियतकालिक कार्य के स्थान पर प्रतिस्थापित। 
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बिंदु 9/ 
1960 के अधिनियम सं० 26 की धारा 2 द्वारा या ऐसा मुद्रक, या प्रकाशक निवास करता है." शब्दों का ( 1-10-1960 से लोग किया गया।
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बिंदु 10/ 
1955 के अधिनियम से 55 की धारा 6 द्वारा कुछ शब्दों के स्थान पर (1-7-1956 से) प्रतिस्थापित। 
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बिंदु 12/ 
1955 के अधिनियम सं0 55 की धारा 6 द्वारा (1-7-1956 से) अंतःस्थापित ।
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बिंदु 12/ 
1960 के अधिनियम मं० 26 की धारा 2 द्वारा (1-10-1960 से अंतःस्थापित ।
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इस लेख पर प्रतिक्रिया अभिप्राप्त करने का इच्छुक लेखक :-
           आपका... अमोल मालुसरे 🙏
नोट :- इस लेख के विषयवस्तु पर किसी को दाव-आपत्ति हो तो उनका अमोल मालुसरे सहर्ष स्वागत करता है सक्षम न्यायालय में याचिका दायर कर अमोल मालुसरे को पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर अवश्य दें । 🙏
Mo 9752396665
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कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

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निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

साइबर अपराध पर जागरूकता फैलाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं जिसमें अन्य बातों के अलावा, एसएमएस, आई4सी सोशल मीडिया अकाउंट यानी एक्स (पूर्व में ट्विटर) (@साइबरदोस्त), फेसबुक (साइबरदोस्तआई4सी), इंस्टाग्राम (साइबरदोस्तआई4सी), टेलीग्राम (साइबरदोस्तआई4सी), रेडियो अभियान के जरिए संदेशों का प्रसार, कई माध्यमों में प्रचार के लिए माईगव को शामिल करना, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से साइबर सुरक्षा और सुरक्षा जागरूकता सप्ताह का आयोजन, किशोरों/छात्रों के लिए हैंडबुक का प्रकाशन आदि शामिल है।

    साइबर अपराध भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मुख्य रूप से अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से साइबर अपराध सहित अपराधों की रोकथाम , उसका पता लगाने , उसकी जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की पहलों को उनकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) की क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सलाह और वित्तीय सहायता के माध्यम से पूरक बनाती है। साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने हेतु तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं , जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं: i. गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई 4 सी) की स्थापना की है। ii. मेवात , जामताड़ा , अहमदाबाद , हैदराबाद , चंडीगढ़ , विशाखापत्तनम और गुवाहाटी के लिए आई 4 सी के तहत सात संयुक्त साइबर समन्वय दल (जेसीसी...

भूमि अधिग्रहण के लिए उचित मुआवजा

  भूमि का मुआवजा ; भूमि अधिग्रहण , पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 के प्रावधानों के अनुसार तय किया जाता है , जो भूमि के निर्धारित बाजार मूल्य से 2 से 4 गुना अधिक होता है। - प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को आम तौर पर किसानों द्वारा मजबूत प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा है। हालांकि पंजाब के कुछ मामलों समेत कुछ अन्य मामलों में मुआवजे में वृद्धि को लेकर किसानों द्वारा विरोध की सूचना मिली है। यद्यपि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि का अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम , 1956 के प्रावधानों के तहत किया जाता है , लेकिन भूमि का मुआवजा ; भूमि अधिग्रहण , पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 के प्रावधानों के अनुसार तय किया जाता है , जो भूमि के निर्धारित बाजार मूल्य से 2 से 4 गुना अधिक होता है। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। *** एमजी/एमएस/आरपी/जेके/एचबी/एसके प्रविष्टि तिथि: 09 AUG 2023 by ...

भारत का चीनी उद्योग

सेक्टर, वैल्यू चेन और हाल ही में मूल्य वृद्धि के कारणों का विश्लेषण भारत का चीनी उद्योग: एक नज़र में भारत का चीनी उद्योग कृषि , उद्योग और ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा इकोसिस्टम है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। गन्ना सेक्टर लगभग 5 करोड़ किसानों और चीनी मिलों व उनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले करीब  5 लाख श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार , वर्ष 2025-26 में भारत का गन्ना उत्पादन 500 एमएमटी तक पहुँच गया है। वर्ष 2015-16 में 348.44 एमएमटी उत्पादन की तुलना में , यह पिछले 10 वर्षों में लगभग 43.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। गन्ने की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल भी 2015-16 के 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भारत के शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य हैं। भारत ने 2016-17 के 0.47 लाख एमटी की तुलना में , 2025-26 में 8 लाख एमटी चीनी का निर्यात किया। सरकार...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दी, पहली बार काम करने वालों को दो किस्तों में एक महीने का वेतन अधिकतम 15,000 रुपये मिलेगा

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दी सभी क्षेत्रों में रोजगार सृजन , रोजगार क्षमता और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने की योजना विनिर्माण क्षेत्र पर जोर और पहली बार काम करने वालों के लिए प्रोत्साहन पहली बार काम करने वालों को दो किस्तों में एक महीने का वेतन अधिकतम 15,000 रुपये मिलेगा एक लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार के सृजन को समर्थन देने की योजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए सभी क्षेत्रों में रोजगार सृजन , रोजगार क्षमता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत , जहां पहली बार रोजगार करने वाले कर्मचारियों को एक महीने का वेतन (15,000 रुपये तक) मिलेगा , वहीं नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए दो साल की अवधि के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा , साथ ही विनिर्माण क्षेत्र के लिए दो साल के लिए विस्तारित लाभ दिया जाएगा। ईएलआई योजना की घोषणा केंद्रीय बजट ...

प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए एआई सहायता प्राप्त लोक शिकायत निवारण प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) विकसित करने के लिए 128 करोड़ रुपये और प्रशासनिक सुधारों के लिए 107 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई

  सरकार ने अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए डीएआरपीजी की प्रशासनिक सुधार योजना के लिए दो वर्षों ( 2024-25 और 2025-26) के लिए 235.10 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए एआई सहायता प्राप्त लोक शिकायत निवारण प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) विकसित करने के लिए 128 करोड़ रुपये और प्रशासनिक सुधारों के लिए 107 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई सेवाओं की शत-प्रतिशत आपूर्ति , अंतिम व्य क्ति तक निर्बाध सेवा वितरण , कुशल निर्णय लेने के लिए सरकारी प्रक्रिया की पुनर्रचना , ज्ञान साझा करने वाले मंचों को मजबूत करना आदि नई योजना के कुछ प्रमुख घटक हैं सरकार ने 15 वें वित्त आयोग के अगले दो वर्षों ( 2024-25 और 2025-26) में लागू की जाने वाली डीएआरपीजी की प्रशासनिक सुधारों की संशोधित योजना के लिए 235 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दे दी है। यह योजना विकसित भारत की नई आकांक्षाओं के अनुरूप अगली पीढ़ी के महत्वाकांक्षी प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाएगी। प्रशासनिक सुधारों के लिए संशोधित योजना में 2 कार्यक्षेत्र है...

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