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छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ?


गड़बड़ियों के पिटारे में से…

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है ।

छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरों पर हो रहीं है प्रमुख कारणों का विश्लेषण यहां किया जा रहा है जिससे असल मामले पर प्रकाश पड़े ।

1. अधिकारियों और बिचौलियों द्वारा शोषण की शिकायते कितनी तथ्यात्मक हैं ?

अधिकांशत: महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी जमीनी कार्यकर्ताओं द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि, खाद्य विभाग के निचले स्तर के अधिकारी व बिचौलिए उनको जटिल ऑनलाइन वित्तीय व्यवस्थाओं के आधार पर मानसिक दबाव में लाकर उनका आर्थिक शोषण करते हैं क्योंकि उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने की विधिवत ट्रेनिंग महिला समूहों के सदस्यों को नहीं मिलती है। विडंबना यह भी है कि, समूहों द्वारा कि जा रही खरीदी बिक्री का प्रमाणित विवरण खाद्य विभाग नहीं देता है । खाद्य नियंत्रक इस मामले में मूकदर्शक है ।

2/ मानसिक दबाव के आधार पर कमीशनखोरी का धंधा आसान हो जाता है ।

अधिकांश मामलों में महिला समूहों की ओर से आरोप लगते हैं कि, दुकानों के आवंटन, स्टॉक वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) जैसे आधारभूत दस्तावेज प्रमाण खाद्य नियंत्रक कार्यालय उपलब्ध नहीं करता है । जिसके कारण ऑनलाइन संधारित आंकड़ों की गलती बताकर डराया जाता है। इसके साथ-साथ समय पर खाद्यान्न की आपूर्ति (लॉट जारी करने) के बदले अनुचित दबाव बनाया जाता है या कमीशन की मांग की जाती है।

3/ कम स्टॉक की जबरन आपूर्ति मामलों का जवाब देने वाला कोई नहीं है ।

कई बार समूहों द्वारा शिकायत की जाती है कि, गोदामों (नान/FCI) से राशन दुकानों तक जो माल भेजा जाता है, वह तौल में पहले से ही कम होता है (शॉर्टेज) लेकिन अधिकारियों और परिवहनकर्ताओं के दबाव में समूहों को पूरे स्टॉक की पावती (रसीद) पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। बाद में जब जांच होती है, तो स्टॉक कम मिलने का ठीकरा सीधे स्व-सहायता समूह पर फोड़ दिया जाता है।

4/ प्रशासनिक जटिलताएँ और तकनीकी कमियाँ महिला समूहों के शोषण का पूरा इंतजाम करती हैं।

पीओएस (POS) मशीन सर्वर डाउन होने, फिंगरप्रिंट न मैच होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के कारण जब मैन्युअल वितरण या ऑफलाइन डेटा एंट्री में अंतर आता है, जिसकी सुनवाई करने की जिम्मेदारी पूरी की गई है क्या यह प्रश्न अनुत्तरित है परिणामस्वरूप कई बार बिना गहन जांच के समूहों को ही जिम्मेदार मानकर उन पर गबन का मामला दर्ज करा दिया जाता है।

5/. राशन घोटाले और कानूनी कार्यवाही में अधिकारियों व विक्रेताओं की भूमिका शंकासपद है ।

बेहद चौंकाने वाली स्थिति है कि, छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों (जैसे दुर्ग, जांजगीर-चांपा, सरगुजा, कोरबा आदि) में खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन में बड़े स्तर पर राशन गायब होने के मामले भी लगातार उजागर होते रहते हैं लेकिन इन मामलों में किन लोगों के विरुद्ध परिवाद दायर किया गया है और कार्यवाही की गई है यह जानकारी सामने नहीं आती है । कार्यवाही के नाम पर महिला समूहों से दुकान वापस लेकर संलग्नीकरण किया जाता है परंतु दंडात्मक कार्यवाही किसके विरुद्ध की गई है यह गहन खोज का विषय है ।

6/ लाखों का गबन मन घड़ंत आरोप है कि, वास्तविकता है ?

जांच टीमों को अक्सर भौतिक सत्यापन के दौरान शक्कर, चावल, नमक और अन्य सामान के स्टॉक में भारी कमी मिलती है, क्योंकि महिला समूहों को प्रत्येक लेनदेन पर कोई विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय द्वारा प्रति माह महिला समूहों को नहीं दिया जाता है और जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया महिला समूहों को समझना मुश्किल होता है इसलिए महिला समूह जानकारी के आभाव में विरोध करने से वंचित रह जाती है ।

7/ अधिकारियों की मिलीभगत और एफआईआर करवाने वाली कार्यवाही का इंतजार है ।

जब मामले गंभीर होते हैं, तो कलेक्टरों और खाद्य नियंत्रकों के निर्देश पर समूहों के अध्यक्ष, विक्रेताओं और इसमें शामिल विभागीय कर्मचारियों या बिचौलियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं (जैसे धोखाधड़ी) और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत पुलिस केस दर्ज करवाए जाने का प्रावधान है लेकिन ऐसे मामलों में भी प्रतिमाह के स्टॉक विवरण का लेखा जोखा जटिल ऑनलाइन व्यवस्था के तहत संधारित होने से असल मामला सामने नहीं आता है । इसलिए कार्यवाही करने वाले प्रावधान अभी कानूनी किताबों तक सीमित है । खाद्य नियंत्रक दुर्ग को इस विधिक विषम परिस्थितियों से अवगत करवाया गया है और प्रतिक्रिया की जा रहीं है ।

8/ विश्लेषक अमोल मालूसरे के अनुसार मुख्य चुनौती स्व-सहायता समूह मुख्यत मासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक संपरीक्षा रिपोर्ट दिलवाना है ।

ग्रामीण और कम पढ़ी-लिखी या कम प्रशासनिक अनुभव वाली महिलाओं द्वारा राशन दुकान संचालित होते हैं। ऐसे में नियमों की पेचीदगियों का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व या भ्रष्ट अधिकारी उन्हें कागजी हेराफेरी में फंसा देते हैं, जिससे असली दोषी बच निकलते हैं और उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली समूह की महिलाओं को कानूनी कार्यवाहियों के साथ वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का समाधान है स्व-सहायता समूह को उनके द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकानों की मासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक संपरीक्षा रिपोर्ट दिलवाना है । 

उक्त लेख विषयक किसी भी प्रकार की दावा आपत्ति एवं सुझाव हेतु व्हाट्स ऐप करें । अमोल मालूसरे 

संबंधित जानकारी के लिए https://meradrushtikon.blogspot.com/2026/05/24.html पर क्लिक करें।



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यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

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भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

सरकार ने घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्याज निर्यात का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन अधिसूचित किया

  सरकार बफर के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज खरीदेगी , जो पहले से खरीदे गए 5 लाख टन प्याज के अतिरिक्त होगी , कीमतों को नियंत्रित करने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के क्रम में बफर के लिए प्याज की निरंतर खरीद की गयी और निपटान किया गया  सरकार ने आज 29 अक्टूबर , 2023 से 31 दिसंबर , 2023 तक की अवधि के लिए प्याज निर्यात का एफओबी आधार पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन अधिसूचित किया। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किफायती कीमतों पर प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह उपाय किया गया है , क्योंकि प्याज के निर्यात की मात्रा पर अंकुश लगाने से भंडारित रबी 2023 प्याज की मात्रा में कमी आ रही है। 800 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन का एमईपी , लगभग 67 रुपये/किग्रा के बराबर होता है। प्याज निर्यात पर एमईपी लगाने के फैसले के साथ , सरकार ने बफर के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज की खरीद की भी घोषणा की है , जो पहले से खरीदे गए 5 लाख टन से अलावा होगी। देश भर के प्रमुख खपत केंद्रों में अगस्त के दूसरे सप्ताह से बफर से प्याज का निरंतर निपटान किया गया ह...

शास्त्रीय संगीत की हमारी समृद्ध विरासत का उत्सव मनाने के लिए 10 से 12 दिसंबर, 2023 तक विजयवाड़ा में कृष्णावेणी संगीत नीरजनम का आयोजन किया जा रहा है।

  प्रीक्वल संगीत कार्यक्रमों का आयोजन 27 नवंबर को बोबिली , राजमुंदरी , लेपाक्षी , मोव्वा , नेल्लोर और कुरनूल सहित छह स्थानों पर किया जा रहा   हैं। भारत प्राचीन काल से ही समृद्ध मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का वास - स्थान रहा है। हमारी विरासत का उत्सव मनाने के लिए , कार्तिक के शुभ माह में कृष्णा नदी के तट पर विजयवाड़ा में अपनी तरह का प्रथम उत्सव आयोजित किया जा रहा है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय द्वारा आंध्र प्रदेश सरकार और संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से 10 से 12 दिसंबर , 2023 तक कृष्णावेणी संगीत नीरजनम का आयोजन किया जा रहा है। इस संगीत समारोह का उद्देश्य शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत का उत्सव मनाना और हरिकथा व नाम   संकीर्तन परंपराओं पर ध्यान केंद्रित करने में सहयोग करना है। यह बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम प्रख्यात कलाकारों को एक साथ लाएगा और आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों के संगीत महाविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों की सक्रिय भागीदारी का साक्ष्य बनेगा। इस महोत्सव की विशेषताएं क्षेत्रीय व्यंजन , स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा की प्रद...

आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए सहायता (स्माइल) योजना

  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय , स्माइल (आजीविका और उद्यम के लिए सीमांत व्यक्तियों को सहायता) योजना को लागू कर रहा है , जिसमें "भिक्षा वृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास" उप-योजना शामिल है , जिसका उद्देश्य व्यापक पुनर्वास उपायों के माध्यम से भिक्षा वृत्ति मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है। स्माइल भिक्षावृत्ति उप-योजना वर्तमान में देश भर के 181 चयनित शहरों में चलाई जा रही है। 31 जनवरी 2026 तक , कुल 30,257 भिक्षुकों की पहचान की गई है , और विभिन्न शहरों में 8,129   ऐसे व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है। स्माइल योजना के अंतर्गत ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए , सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 23 गरिमा गृहों को वर्तमान में सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से 6 गरिमा गृहों को वर्ष 2025-26 के दौरान नया अनुमोदन प्राप्त हुआ और खोला गया। अगले पांच वर्षों के भीतर प्रत्येक राज्य की राजधानी में कम से कम एक गरिमा गृह स्थापित करने के लिए फिलहाल कोई रोडमैप प्रस्तावित नहीं किया गया है। स्माइल योजना के तहत...

आंतरिक शिकायत समिति का महत्व... आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। पढ़िए कैसे यह समिति महिलाओं का संरक्षण करती है....

सुरक्षित और दबावपूर्ण कामकाजी वातावरण को... कानून के दायरे में लाकर गरिमापूर्ण बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा.... आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. जागरूकता फैलाना: आईसीसी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता फैलाने का काम करती है। यह कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न के बारे में शिक्षित करती है और उन्हें इस बारे में जानकारी प्रदान करती है कि यदि वे उत्पीड़न का शिकार होते हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए। 5. कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाना: आईसीसी क...

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