तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है, जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए, शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41ए' जोड़ा गया है, जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है, जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं, जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं, पर ध्यान देने वाली
शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए,
यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, केवल एक राज्य, कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है।
आपदा प्रबंधन
(संशोधन) अधिनियम,
2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा डेटाबेस का निर्माण अनिवार्य किया गया
है, जिसमें जोखिम आकलन, शमन योजनाएं और
आपदाओं से संबंधित त्वरित समय का डेटा शामिल होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
(आईएमडी) जैसी चेतावनी देने वाली एजेंसियों ने सात दिन पहले की भविष्यवाणियों के
लिए मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में एआई/ एमएल मॉडल को एकीकृत किया है। इसमें
मिशन मौसम (2025 में शुरू किया गया, जिसका
उद्देश्य 2030 तक उच्च-क्षमता वाले एआई से पूर्वानुमान देना
है) के अंतर्गत बाढ़ पूर्वानुमान (सात दिन पहले तक) और चक्रवात की ट्रैकिंग के लिए
एआई-संचालित सिमुलेशन शामिल हैं।
उच्च स्तरीय
समिति (एचएलसी) राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा
न्यूनीकरण कोष (एनडीएमएफ) से राज्यों को वित्तीय मदद मंजूर करती है। आपदा प्रबंधन
(संशोधन) अधिनियम,
2025 के लागू होने से पहले भी एचएलसी अस्तित्व में थी। आपदा प्रबंधन
में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, आपदा प्रबंधन
अधिनियम, 2025 में संशोधन के माध्यम से एचएलसी को वैधानिक
दर्जा दिया गया। इसके साथ ही, गृह मंत्रालय किसी गंभीर आपदा
की स्थिति में, तत्काल प्रत्यक्ष क्षति आकलन के लिए
अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) के गठन और प्रतिनियुक्ति की सुविधा प्रदान
करता है।
एचएलसी ने इस
वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत एनडीएमएफ से निम्नलिखित राशि भी
स्वीकृत की है:
·
शहरी निधि जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम
(चरण-II):-
2444.42 करोड़ रुपये।
·
असम की आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार एवं
पुनरुद्धार: 692.05 करोड़ रुपये।
·
पंचायती राज संस्थाओं में समुदाय
आधारित आपदा जोखिम को कम करने वाली पहलों को सुदृढ़ करने हेतु राष्ट्रीय परियोजना:
507.37 करोड़ रुपये (पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आवंटित 203.62 करोड़ रुपये को मिलाकर)।
आपदा प्रबंधन
अधिनियम ने समन्वय,
तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने वाले एक सुदृढ़ कानूनी और
संस्थागत ढांचे की स्थापना करके आपदा प्रबंधन में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के तौर पर
भारत की स्थिति को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ किया है। अधिनियम के कार्यान्वयन के जरिए,
भारत ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर सक्रिय आपदा जोखिम
न्यूनीकरण और प्रभावी प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।
भारत ने
निम्नलिखित कदमों के जरिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के
तौर पर अपनी पहचान बनाई है:
·
आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन
(सीडीआर) का शुभारंभ प्रधानमंत्री जी की ओर से 23 सितंबर,
2019 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर
सम्मेलन में किया गया था। अब तक 53 देश और 12 अंतरराष्ट्रीय संगठन इसके सदस्य बन चुके हैं।
·
सरकार आपदा प्रभावित देशों को मानवीय
मदद और आपदा राहत प्रदान कर रही है। 'वसुधैव कुटुंबकम'
की भावना से प्रेरित होकर, भारत सरकार ने
तुर्की और सीरिया में ऑपरेशन दोस्त, म्यांमार में ऑपरेशन
ब्रह्म आदि जैसी पहल कीं, जिससे आपदा पीड़ितों को तत्काल
मानवीय मदद और आपदा राहत (एचएडीआर) प्रदान की जा सके।
गृह मंत्रालय
में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर
में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एमएम
प्रविष्टि तिथि: 11
FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2226790) आगंतुक
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