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खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है…

जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है…

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है।

वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं:

पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है।

दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक संरक्षण देने वाले दोषी अधिकारियों की प्रशासकीय अनियमितताओं के विरुद्ध विभागीय शीर्ष अधिकारियों द्वारा कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

इस विषय में जन सामान्य का त्वरित संज्ञान करवाने हेतु दूसरे पहलू के अंतर्गत चल रही विभागीय कार्यवाही के मुख्य बिंदुओं को अग्रलिखित अनुसार विश्लेषित किया जा रहा है:

आबंटन मॉनिटरिंग में अनियमितता: जिले को खाद्यान्न आबंटन करने की संपूर्ण प्रक्रिया पर नियंत्रण रखकर मॉनिटरिंग करने वाले संबंधित अधिकारी के अनियमित कार्य व्यवहार को विभागीय दस्तावेजों और पुख्ता प्रमाणों के आधार पर चिन्हित किया जा रहा है।

रिपोर्टिंग प्रपत्रों के आंकड़ों में हेरफेर: जिला स्तर पर खाद्यान्न आबंटन का लेखा-जोखा नियमित समयावधि में जिला नियंत्रक को सूचित करने वाले जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका संदेहास्पद पाई गई है। उसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टिंग प्रपत्र के आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से यह प्रश्नांकित स्थिति उजागर हुई है।

डिजिटल डेटा के साथ छेड़छाड़ (साइबर अपराध): उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व-सहायता समूहों की समितियों के बिक्री (सेल) से संबंधित ऑनलाइन संधारित डेटा के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। इस गंभीर विषय को साइबर क्राइम सेल में पदस्थ तकनीकी विषय विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के आधार पर पकड़े जाने के लिए कार्यवाही प्रक्रिया में है।

प्रशासनिक चूक एवं संलग्नीकरण: उचित मूल्य दुकानों के आबंटन तथा संलग्नीकरण (अटैचमेंट) की कार्यवाहियों में की गई प्रशासनिक अनियमितताओं को विधि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जा रहे विभागीय समीक्षा प्रतिवेदन के आधार पर स्पष्ट किए जाने की विभागीय कार्यवाह प्रारंभिक प्रक्रिया में है।

अमोल मालूसरे की कलम से:-

स्व सहायता समूहों के आरोपित व्यथा के अनुत्तरित मामले की प्रशासनिक विफलता में संलिप्त जितने भी छोटे या बड़े अधिकारी/कर्मचारी हैं, जिन्होंने जनता के हक के राशन में हेराफेरी को संरक्षण दिया है, उनके विरुद्ध विभागीय स्तर के साथ-साथ कानूनी (आपराधिक) कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, साइबर सेल की रिपोर्ट के आधार पर डेटा छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो। तत्परता और निष्पक्ष जांच के लिए विभागीय शीर्ष नेतृत्व अपनी प्रशासकीय भूमिका निभाने कि दिशा में बढ़ रहा है अतः इस विषय को पकड़वाने में सहयोगी सभी संबंधितों को धन्यवाद।

प्रशासकीय पहल हो गई है...

उल्लेखनीय है कि, उक्त उल्लेखित विश्लेषण अनुसार पहल की गई है जिसके संबंध में शासन स्तर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है जिसके अनुसार दुर्ग जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की कंडिका 16 के तहत एक बड़ी कार्यवाही करते हुए 24 शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) का आबंटन निरस्त कर दिया गया है।

इस पूरी प्रशासनिक अधिसूचना और नई आबंटन प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. निरस्त की गई दुकानों/संस्थाओं की सूची:

इन 24 राशन दुकानों के संचालन में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद इनका आबंटन रद्द किया गया है:

  1. महिला स्व सहायता समूह 
  2. संगवारी खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उप सेवा सह समिति मर्या.
  3. नवीन महिला स्व सहायता समूह
  4. शंकरा महिला स्व सहायता समूह
  5. जय शक्ति महिला स्व सहायता समूह
  6. जय श्री कृष्ण महिला स्व सहायता समूह
  7. दुर्ग सहकारी विपणन समिति
  8. कृषक सेवा सहकारी समिति कोहका
  9. जय सदाराम महिला स्व सहायता समूह
  10. मां अन्नपूर्णा स्व सहायता समूह
  11. सामुदायिक विकास समिति भिलाई
  12. एकता महिला स्व सहायता समूह
  13. सामुदायिक विकास समिति भिलाई 
  14. बीएसपी प्राथमिक सह.उप. भण्डार
  15. सहकारी उपभोक्ता भण्डार भिलाई
  16. विन्ध्यवासिनी महिला स्व सहायता समूह
  17. नवीन प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार
  18. स्टील नगर महिला स्व सहायता समूह
  19. जय भवानी महिला स्व सहायता समूह
  20. इस्पात कर्मचारी कन्ज्यूमर कोआपरेटिव स्टोर्स मर्या. भिलाई
  21. सामुदायिक विकास समिति रविदास नगर भिलाई
  22. संतोषी महिला स्व सहायता समूह
  23. भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ केम्प 1 भिलाई
  24. प्रेरणा महिला स्व सहायता समूह

2. नए आबंटन हेतु पात्रता और आवेदन की शर्तें:

स्थानीयता की अनिवार्यता: शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन के लिए आवेदन केवल संबंधित वार्ड की स्थानीय संस्था द्वारा ही स्वीकार किए जाएंगे।

कौन कर सकता है आवेदन? 

स्थानीय नगरीय निकाय, महिला स्व-सहायता समूह, प्राथमिक कृषि साख समितियां, अन्य सहकारी समितियां, राज्य शासन द्वारा विनिर्दिष्ट उपक्रम, और वन सुरक्षा समितियां आवेदन करने के लिए पात्र हैं।

प्राथमिकता के नियम: 

ऐसी सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी जो: आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से कम से कम तीन माह पूर्व पंजीकृत (Registered) और कार्यरत हों।

जिन्हें सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में कार्य करने का पूर्व अनुभव हो।

3. आवेदन की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां:

अंतिम तिथि: आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। इस तिथि के बाद मिलने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।

जमा करने का स्थान: आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) दुर्ग में जमा करना होगा।

माध्यम: आवेदन स्वयं उपस्थित होकर, अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से या साधारण डाक द्वारा भेजा जा सकता है।

कानूनी स्थिति: दुकान आबंटन की यह पूरी प्रक्रिया माननीय न्यायालयीन निर्णय एवं शासन के निर्देशों के अधीन संचालित होगी।

अगर आप शासकीय वेबसाईट पर जाकर अधिकृत जानकारी पढ़ना चाहते है तो कृपया इस लिंक पर क्लिक करें 

https://dprcg.gov.in/post/1779800680/दुर्ग-जिले-में-24-शासकीय-उचित-मूल्य-दुकानों-का-आबंटन-निरस्त-नए-आवेदन-आमंत्रित 









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दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

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ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

सरकार ने घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्याज निर्यात का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन अधिसूचित किया

  सरकार बफर के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज खरीदेगी , जो पहले से खरीदे गए 5 लाख टन प्याज के अतिरिक्त होगी , कीमतों को नियंत्रित करने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के क्रम में बफर के लिए प्याज की निरंतर खरीद की गयी और निपटान किया गया  सरकार ने आज 29 अक्टूबर , 2023 से 31 दिसंबर , 2023 तक की अवधि के लिए प्याज निर्यात का एफओबी आधार पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन अधिसूचित किया। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किफायती कीमतों पर प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह उपाय किया गया है , क्योंकि प्याज के निर्यात की मात्रा पर अंकुश लगाने से भंडारित रबी 2023 प्याज की मात्रा में कमी आ रही है। 800 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन का एमईपी , लगभग 67 रुपये/किग्रा के बराबर होता है। प्याज निर्यात पर एमईपी लगाने के फैसले के साथ , सरकार ने बफर के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज की खरीद की भी घोषणा की है , जो पहले से खरीदे गए 5 लाख टन से अलावा होगी। देश भर के प्रमुख खपत केंद्रों में अगस्त के दूसरे सप्ताह से बफर से प्याज का निरंतर निपटान किया गया ह...

आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए सहायता (स्माइल) योजना

  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय , स्माइल (आजीविका और उद्यम के लिए सीमांत व्यक्तियों को सहायता) योजना को लागू कर रहा है , जिसमें "भिक्षा वृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास" उप-योजना शामिल है , जिसका उद्देश्य व्यापक पुनर्वास उपायों के माध्यम से भिक्षा वृत्ति मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है। स्माइल भिक्षावृत्ति उप-योजना वर्तमान में देश भर के 181 चयनित शहरों में चलाई जा रही है। 31 जनवरी 2026 तक , कुल 30,257 भिक्षुकों की पहचान की गई है , और विभिन्न शहरों में 8,129   ऐसे व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है। स्माइल योजना के अंतर्गत ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए , सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 23 गरिमा गृहों को वर्तमान में सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से 6 गरिमा गृहों को वर्ष 2025-26 के दौरान नया अनुमोदन प्राप्त हुआ और खोला गया। अगले पांच वर्षों के भीतर प्रत्येक राज्य की राजधानी में कम से कम एक गरिमा गृह स्थापित करने के लिए फिलहाल कोई रोडमैप प्रस्तावित नहीं किया गया है। स्माइल योजना के तहत...

आयुष्मान सहकार योजना

आयुष्मान सहकार योजना राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम , जो सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक  संगठन है , अन्य कार्यों के साथ-साथ विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में सहकारी समितियों के संवर्धन हेतु योजनाएं संचालित करता है । एनसीडीसी ने स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अधिदेश के साथ स्वयं को संरेखित करते हुए आयुष्मान सहकार योजना को अधिसूचित किया । योजना के हिस्से के रूप में , एनसीडीसी परियोजना के विस्तृत तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पात्र सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता स्वीकृत करता है , जिससे दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होती है। यह योजना आयुष सहित स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है , जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रदाय में सामुदायिक स्वामित्व , भागीदारी और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है। कोई भी सहकारी समिति जो किसी भी राज्य अधिनियम या बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम के अधीन पंजीकृत है और जिसकी उपविधियों में अस्पताल , स्वास्थ्य सेवा या स्वास्थ्य शिक्षा से संबंध...

जीवन ऐप और शतायु जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए "जीवन" यानी ज्‍वाइंट इम्‍पावरमेंट एंड वर्चुअल असिस्‍टेंस नेटवर्क (संयुक्त बुजुर्ग सशक्तिकरण एवं वर्चुअल सहायता नेटवर्क) मोबाइल एप्लिकेशन और "शतायु" (वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र देखभाल सहायता एवं प्रशिक्षण) जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड लॉन्च किया है। यह वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा , देखभाल , गरिमा और सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है , ताकि प्रौद्योगिकी आधारित देखभाल सहायता के माध्यम से वृद्धावस्था देखभाल का इकोसिस्‍टम तैयार हो सके। देश भर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत , केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज जीवन (संयुक्त बुजुर्ग सशक्तिकरण और वर्चुअल सहायता नेटवर्क) मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया , जो भारत में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा , कल्याण , स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और सामाजिक समावेश को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह ऐप वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने और ...

श्री धर्मेन्द्र प्रधान और श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने संयुक्त रूप से "आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूलों के साथ स्थापित करने के लिए दिशानिर्देश" जारी किए

श्री धर्मेन्द्र प्रधान और श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने संयुक्त रूप से "आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूलों के साथ स्थापित करने के लिए दिशानिर्देश" जारी किए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने 3 सितंबर 2025 को विज्ञान भवन , नई दिल्ली में स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों को एक ही स्थान पर स्थापित करने के लिए संयुक्त रूप से दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस अवसर पर बोलते हुए , श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ' विकसित भारत ' के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब आने वाले दिनों में हम हर गर्भवती माँ , नवजात शिशु और प्री-स्कूल जाने वाले बच्चे की पूरी देखभाल सुनिश्चित करेंगे। मंत्री ने उन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ("दीदी") के लिए , जिन्होंने 12 वीं कक्षा तक पढ़ाई नहीं की है , लेकिन आगे की शिक्षा प्राप्त करने की इच्छुक हैं , एक समर्पित शिक्षण मॉड्यूल बनाने का ...

पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ

पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ ·         ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने हेतु 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी ·         महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में निर्बाध ट्रांजिशन सुनिश्चित किया जाएगा ·         रोजगार , आजीविका और ग्रामीण परिवर्तन को गति देने हेतु ₹ 95,692 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन ·         मौजूदा जॉब कार्ड मान्य रहेंगे , पहले से चल रहे कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए , भारत सरकार ने 11 मई 2026 को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [ VB–G RAM G] अधिनियम , 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्...

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