खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण
खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है…
जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है…
खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है।
वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं:
पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है।
दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक संरक्षण देने वाले दोषी अधिकारियों की प्रशासकीय अनियमितताओं के विरुद्ध विभागीय शीर्ष अधिकारियों द्वारा कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।
इस विषय में जन सामान्य का त्वरित संज्ञान करवाने हेतु दूसरे पहलू के अंतर्गत चल रही विभागीय कार्यवाही के मुख्य बिंदुओं को अग्रलिखित अनुसार विश्लेषित किया जा रहा है:
आबंटन मॉनिटरिंग में अनियमितता: जिले को खाद्यान्न आबंटन करने की संपूर्ण प्रक्रिया पर नियंत्रण रखकर मॉनिटरिंग करने वाले संबंधित अधिकारी के अनियमित कार्य व्यवहार को विभागीय दस्तावेजों और पुख्ता प्रमाणों के आधार पर चिन्हित किया जा रहा है।
रिपोर्टिंग प्रपत्रों के आंकड़ों में हेरफेर: जिला स्तर पर खाद्यान्न आबंटन का लेखा-जोखा नियमित समयावधि में जिला नियंत्रक को सूचित करने वाले जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका संदेहास्पद पाई गई है। उसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टिंग प्रपत्र के आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से यह प्रश्नांकित स्थिति उजागर हुई है।
डिजिटल डेटा के साथ छेड़छाड़ (साइबर अपराध): उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व-सहायता समूहों की समितियों के बिक्री (सेल) से संबंधित ऑनलाइन संधारित डेटा के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। इस गंभीर विषय को साइबर क्राइम सेल में पदस्थ तकनीकी विषय विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के आधार पर पकड़े जाने के लिए कार्यवाही प्रक्रिया में है।
प्रशासनिक चूक एवं संलग्नीकरण: उचित मूल्य दुकानों के आबंटन तथा संलग्नीकरण (अटैचमेंट) की कार्यवाहियों में की गई प्रशासनिक अनियमितताओं को विधि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जा रहे विभागीय समीक्षा प्रतिवेदन के आधार पर स्पष्ट किए जाने की विभागीय कार्यवाह प्रारंभिक प्रक्रिया में है।
अमोल मालूसरे की कलम से:-
स्व सहायता समूहों के आरोपित व्यथा के अनुत्तरित मामले की प्रशासनिक विफलता में संलिप्त जितने भी छोटे या बड़े अधिकारी/कर्मचारी हैं, जिन्होंने जनता के हक के राशन में हेराफेरी को संरक्षण दिया है, उनके विरुद्ध विभागीय स्तर के साथ-साथ कानूनी (आपराधिक) कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, साइबर सेल की रिपोर्ट के आधार पर डेटा छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो। तत्परता और निष्पक्ष जांच के लिए विभागीय शीर्ष नेतृत्व अपनी प्रशासकीय भूमिका निभाने कि दिशा में बढ़ रहा है अतः इस विषय को पकड़वाने में सहयोगी सभी संबंधितों को धन्यवाद।
प्रशासकीय पहल हो गई है...
उल्लेखनीय है कि, उक्त उल्लेखित विश्लेषण अनुसार पहल की गई है जिसके संबंध में शासन स्तर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है जिसके अनुसार दुर्ग जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की कंडिका 16 के तहत एक बड़ी कार्यवाही करते हुए 24 शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) का आबंटन निरस्त कर दिया गया है।
इस पूरी प्रशासनिक अधिसूचना और नई आबंटन प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. निरस्त की गई दुकानों/संस्थाओं की सूची:
इन 24 राशन दुकानों के संचालन में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद इनका आबंटन रद्द किया गया है:
- महिला स्व सहायता समूह
- संगवारी खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उप सेवा सह समिति मर्या.
- नवीन महिला स्व सहायता समूह
- शंकरा महिला स्व सहायता समूह
- जय शक्ति महिला स्व सहायता समूह
- जय श्री कृष्ण महिला स्व सहायता समूह
- दुर्ग सहकारी विपणन समिति
- कृषक सेवा सहकारी समिति कोहका
- जय सदाराम महिला स्व सहायता समूह
- मां अन्नपूर्णा स्व सहायता समूह
- सामुदायिक विकास समिति भिलाई
- एकता महिला स्व सहायता समूह
- सामुदायिक विकास समिति भिलाई
- बीएसपी प्राथमिक सह.उप. भण्डार
- सहकारी उपभोक्ता भण्डार भिलाई
- विन्ध्यवासिनी महिला स्व सहायता समूह
- नवीन प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार
- स्टील नगर महिला स्व सहायता समूह
- जय भवानी महिला स्व सहायता समूह
- इस्पात कर्मचारी कन्ज्यूमर कोआपरेटिव स्टोर्स मर्या. भिलाई
- सामुदायिक विकास समिति रविदास नगर भिलाई
- संतोषी महिला स्व सहायता समूह
- भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ केम्प 1 भिलाई
- प्रेरणा महिला स्व सहायता समूह
2. नए आबंटन हेतु पात्रता और आवेदन की शर्तें:
स्थानीयता की अनिवार्यता: शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन के लिए आवेदन केवल संबंधित वार्ड की स्थानीय संस्था द्वारा ही स्वीकार किए जाएंगे।
कौन कर सकता है आवेदन?
स्थानीय नगरीय निकाय, महिला स्व-सहायता समूह, प्राथमिक कृषि साख समितियां, अन्य सहकारी समितियां, राज्य शासन द्वारा विनिर्दिष्ट उपक्रम, और वन सुरक्षा समितियां आवेदन करने के लिए पात्र हैं।
प्राथमिकता के नियम:
ऐसी सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी जो: आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से कम से कम तीन माह पूर्व पंजीकृत (Registered) और कार्यरत हों।
जिन्हें सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में कार्य करने का पूर्व अनुभव हो।
3. आवेदन की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां:
अंतिम तिथि: आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। इस तिथि के बाद मिलने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
जमा करने का स्थान: आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) दुर्ग में जमा करना होगा।
माध्यम: आवेदन स्वयं उपस्थित होकर, अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से या साधारण डाक द्वारा भेजा जा सकता है।
कानूनी स्थिति: दुकान आबंटन की यह पूरी प्रक्रिया माननीय न्यायालयीन निर्णय एवं शासन के निर्देशों के अधीन संचालित होगी।
