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नए आपराधिक कानूनों की मुख्य विशेषताएँ


नए आपराधिक कानूनों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने वाले प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन कानूनों की मुख्य विशेषताएँ अनुलग्नक में दी गई हैं।

जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:

i. बीएनएसएस की धारा 290 में, आरोपी का अभियोजक के साथ समझौता करना (प्ली बार्गेनिंग) समयबद्ध बनाया गया है और प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन आरोप तय होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर किया जा सकता है।  बीएनएस की धारा 293 के अंतर्गत मामले का पारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटारा करने के लिए, जहाँ अभियुक्त ने पहली बार अपराध किया है और उसे पहले कभी किसी अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है, न्यायालय ऐसे अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित दंड का एक-चौथाई/छठा भाग दंड दे सकता है।

ii. बीएनएसएस की धारा 479 में विचाराधीन कैदी को हिरासत में रखने की अधिकतम अवधि निर्धारित की गई है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि जहाँ कोई व्यक्ति पहली बार अपराध करता है (जिसे पहले कभी किसी अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है), उसे न्यायालय द्वारा मुचलके पर रिहा किया जाएगा, यदि उसे कानून के तहत ऐसे अपराध के लिए निर्दिष्ट कारावास की अधिकतम अवधि की एक-तिहाई अवधि तक हिरासत में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, इस संबंध में न्यायालय में आवेदन करना जेल अधीक्षक का कर्तव्य होगा।

iii. पहली बार, सामुदायिक सेवा को दंडों में से एक के रूप में पेश किया गया है।

नए आपराधिक कानूनों की मुख्य विशेषताएँ

नए आपराधिक कानून नागरिक-केंद्रित, अधिक सुलभ और कुशल न्याय प्रणाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। नए आपराधिक कानूनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

A. पीड़ित-केंद्रित प्रावधान

i. घटनाओं की ऑनलाइन रिपोर्ट: अब कोई व्यक्ति पुलिस थाने जाए बिना, इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से घटनाओं की रिपोर्ट कर सकता है। इससे रिपोर्टिंग आसान और त्वरित हो जाती है, जिससे पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई संभव हो जाती है।

 ii. किसी भी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करें: ज़ीरो एफआईआर की शुरुआत के साथ, कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस थाने में, चाहे उसका क्षेत्राधिकार कुछ भी हो, प्राथमिकी दर्ज करा सकता है। इससे कानूनी कार्यवाही शुरू करने में होने वाली देरी समाप्त हो जाती है और अपराध की तत्काल रिपोर्ट सुनिश्चित होती है।

iii. एफआईआर की निःशुल्क प्रति: पीड़ित को एफआईआर की निःशुल्क प्रति प्राप्त करने का अधिकार है, जिससे कानूनी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होती है।

iv. गिरफ्तारी पर सूचना देने का अधिकार: गिरफ्तारी की स्थिति में, व्यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को सूचित करने का अधिकार है। इससे गिरफ्तार व्यक्ति को तत्काल सहायता और सहयोग सुनिश्चित होगा।

v. गिरफ्तारी की जानकारी प्रदर्शित करना: अब प्रत्येक पुलिस थाने और जिले में एक नामित पुलिस अधिकारी होना अनिवार्य है, जो एएसआई के पद से नीचे का न हो और सभी गिरफ्तार व्यक्तियों की जानकारी अब प्रत्येक थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी। इससे अभियुक्तों के अधिकारों की रक्षा होती है और पुलिस द्वारा हिरासत में हिंसा और अवैध हिरासत की घटनाओं में कमी आती है।

vi. पीड़ितों को प्रगति संबंधी अद्यतन सूचना: पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर अपने मामले की प्रगति की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। यह प्रावधान पीड़ितों को कानूनी प्रक्रिया से अवगत और संबद्ध रखता है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास बढ़ता है।

vii. पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ों की आपूर्ति: अभियुक्त और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर प्राथमिकी, पुलिस रिपोर्ट/आरोपपत्र, बयान, स्वीकारोक्ति और अन्य दस्तावेज़ों की प्रतियाँ प्राप्त करने का अधिकार है।

viii. गवाह संरक्षण योजना: नए कानून सभी राज्य सरकारों को गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानूनी कार्यवाही की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए गवाह संरक्षण योजना लागू करने का निर्देश देते हैं।

ix. पुलिस थाने जाने से छूट: महिलाओं, 15 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों, 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों और दिव्यागजन या गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को पुलिस थाने जाने से छूट दी गई है।

x. बीएनएसएस की धारा 360 में अभियोजन से हटने से पहले पीड़ित की सुनवाई अनिवार्य है। पीड़ित के सुनवाई के अधिकार को वैधानिक मान्यता आपराधिक न्याय प्रणाली के न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।  मामलों की वापसी से संबंधित कार्यवाही में पीड़ित की अनिवार्य सुनवाई से न्याय प्रणाली अपराध से सीधे प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं और चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है।

 B. महिला एवं बाल संरक्षण के प्रावधान

i. बीएनएस के नए अध्याय-V में महिलाओं और बच्चों के साथ अपराधों को अन्य सभी अपराधों पर वरीयता दी गई है।

ii. बीएनएस में, सामूहिक बलात्कार की नाबालिग पीड़ितों के लिए आयु का अंतर समाप्त कर दिया गया है। पहले 16 वर्ष और 12 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए अलग-अलग दंड निर्धारित थे। इस प्रावधान को संशोधित किया गया है और अब अठारह वर्ष से कम आयु की लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा का प्रावधान है।

iii. महिलाओं को परिवार के एक वयस्क सदस्य के रूप में मान्यता दी गई है जो सम्मन किए गए व्यक्ति की ओर से सम्मन प्राप्त कर सकती हैं। पहले के 'किसी वयस्क पुरुष सदस्य' के संदर्भ को 'किसी वयस्क सदस्य' से बदल दिया गया है।

iv. पीड़िता को अधिक सुरक्षा प्रदान करने और बलात्कार के अपराध से संबंधित जाँच में पारदर्शिता लागू करने के लिए, पुलिस पीड़िता का बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से दर्ज करेगी।

v. महिलाओं के साथ कुछ अपराधों के लिए, जहाँ तक संभव हो, पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट द्वारा और उसकी अनुपस्थिति में पुरुष मजिस्ट्रेट द्वारा महिला की उपस्थिति में दर्ज किया जाना चाहिए ताकि संवेदनशीलता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके और पीड़ितों के लिए सहायक वातावरण तैयार किया जा सके।

vi. चिकित्सकों को बलात्कार पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी को भेजना अनिवार्य है।

vii. यह प्रावधान किया गया है कि पंद्रह वर्ष से कम आयु के या 60 वर्ष (65 वर्ष से पहले) से अधिक आयु के किसी भी पुरुष व्यक्ति, महिला, मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यागजन या गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को उस स्थान के अलावा किसी अन्य स्थान पर उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी जहाँ वह पुरुष या महिला निवास करता है। ऐसे मामलों में जहाँ ऐसा व्यक्ति पुलिस थाने उपस्थित होने के लिए तैयार है, उसे ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है।

viii. नए कानून में सभी अस्पतालों में महिलाओं और बच्चों के साथ अपराधों के पीड़ितों को निःशुल्क प्राथमिक उपचार या चिकित्सा उपचार प्रदान करने का प्रावधान है। यह प्रावधान चुनौतीपूर्ण समय में पीड़ितों की भलाई और स्वास्थ्य लाभ को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक चिकित्सा देखभाल तक तत्काल पहुँच सुनिश्चित करता है।

 ix. किसी अपराध के लिए बच्चों को काम पर रखना, नियोजित करना या उन्हें अपराध में शामिल करना, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 95 के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। इसके लिए न्यूनतम सात वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य गिरोहों या समूहों को अपराध करने के लिए बच्चों को काम पर रखने/नियोजित करने से रोकना है।

C. प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक के उपयोग से संबंधित प्रावधान

i. फोरेंसिक साक्ष्य संग्रहण और वीडियोग्राफी: मामले और जाँच को मज़बूत बनाने के लिए, फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए गंभीर अपराधों की जांच के लिए अपराध स्थलों का दौरा करना और 7 वर्ष या उससे अधिक की सज़ा वाले अपराधों में साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, साक्ष्यों से छेड़छाड़ को रोकने के लिए अपराध स्थल पर साक्ष्य संग्रहण की प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी की जाएगी। यह दोहरा दृष्टिकोण जाँच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है और न्याय के निष्पक्ष प्रशासन में योगदान देता है।

ii. इलेक्ट्रॉनिक समन: अब समन इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जा सकते हैं, जिससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेज़ी आएगी, कागजी कार्रवाई कम होगी और सभी संबंधित पक्षों के बीच कुशल संचार सुनिश्चित होगा।

iii. सभी कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक मोड में: सभी कानूनी कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित करके, नए कानून पीड़ितों, गवाहों और अभियुक्तों को सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे पूरी कानूनी प्रक्रिया सुव्यवस्थित और त्वरित हो जाती है।

D. समय-सीमा

i.तेज़ और निष्पक्ष समाधान: नए कानून मामलों के तेज़ और निष्पक्ष समाधान का वादा करते हैं, जिससे कानूनी प्रणाली में विश्वास पैदा होता है।  जांच और परीक्षण के महत्वपूर्ण चरण जैसे - प्रारंभिक जांच (14 दिनों में पूरी की जानी है), आगे की जांच (90 दिनों में पूरी की जानी है), पीड़ित और आरोपी को दस्तावेज की आपूर्ति (14 दिनों के भीतर), मुकदमे के लिए मामले की प्रतिबद्धता (90 दिनों के भीतर), निर्वहन आवेदन दाखिल करना (60 दिनों के भीतर), आरोप तय करना (60 दिनों के भीतर), निर्णय की घोषणा (45 दिनों के भीतर) और दया याचिका दायर करना (राज्यपाल के समक्ष 30 दिन और राष्ट्रपति के समक्ष 60 दिन) - को सुव्यवस्थित किया गया है और निर्धारित समय अवधि के भीतर पूरा किया जाना है।

 ii. त्वरित जाँच: नए कानूनों ने महिलाओं और बच्चों के साथ अपराधों की जाँच को प्राथमिकता दी है, जिससे सूचना दर्ज होने के दो महीने के भीतर जाँच पूरी हो सके।

iii. स्थगन: अदालतें मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी से बचने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम दो स्थगन दे सकती हैं।

E. सुधारात्मक दृष्टिकोण

i. सामुदायिक सेवा: नए कानूनों में छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की व्यवस्था की गई है। अपराधियों को समाज में सकारात्मक योगदान देने, अपनी गलतियों से सीखने और मज़बूत सामुदायिक बंधन बनाने का अवसर मिलता है।

ii. संक्षिप्त सुनवाई के दायरे का विस्तार: अब संक्षिप्त सुनवाई के दायरे का विस्तार करके इसमें और अधिक अपराधों को शामिल किया गया है ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित हो सके।

F. अभियुक्त के अधिकार

केवल न्यायिक कार्यवाही शुरू करने के लिए व्यक्तियों की मनमानी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है। अब पुलिस को केवल मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए किसी आरोपी को गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं है और हस्तलेख, हस्ताक्षर, फिंगरप्रिंट या आवाज के नमूने लेने के लिए किसी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।

G. नए अपराध

i. आतंकवादी कृत्य, भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य, मॉब लिंचिंग, छीना-झपटी, संगठित अपराध, छोटे-मोटे संगठित अपराध आदि से संबंधित नए अपराध जोड़े गए हैं।

ii. बार-बार चोरी का अपराध करने वालों के लिए कठोर दंड निर्धारित किया गया है - न्यूनतम 1 वर्ष की सजा अनिवार्य है जिसे जुर्माने के साथ 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। हालाँकि, छोटी-मोटी चोरी को प्रमुख अपराध बनने से रोकने के लिए, पहली बार अपराध करने वालों को केवल सामुदायिक सेवा की सजा दी जाती है, जहाँ चोरी की गई संपत्ति का मूल्य 5000 रुपये से कम है और या तो वह मूल्य वापस कर दिया जाता है, या वह संपत्ति वापस कर दी जाती है।

H. अनुपस्थिति में मुकदमा

उद्घोषित अपराधी घोषित व्यक्तियों के लिए अनुपस्थिति में मुकदमे का नया प्रावधान न्यायालय को अभियुक्त की अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने और फैसला सुनाने की अनुमति देता है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि न्याय में न तो देरी हो और न ही न्याय से इनकार किया जाए।

 गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/पीके/एसएस प्रविष्टि तिथि: 20 AUG 2025 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2158608) आगंतुक पटल : 421

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सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

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तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई)

खनन से होने वाले लाभ उन लोगों के साथ साझा करना , जो इसकी कीमत चुकाते हैं   संक्षिप्त विवरण खनिज महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधन हैं। इनके खनन से राजस्व प्राप्त होता है , उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। हालांकि , जिन जिलों में खनन गतिविधियां होती हैं , वहां रहने वाले लोगों को अक्सर इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। विस्थापन , प्रदूषण और पारंपरिक आजीविका के नुकसान का बोझ स्थानीय समुदायों को उठाना पड़ता है। भारत ने खनन से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा इन समुदायों के कल्याण के लिए वापस उपलब्ध कराने की एक विशेष व्यवस्था की है। यह व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) के माध्यम से संचालित होती है। डीएमएफ खनन पट्टाधारकों से कानूनी रूप से अनिवार्य योगदान एकत्र करते हैं। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) 17 सितंबर , 2015 को शुरू की गई थी। इसके तहत इन निधियों का उपयोग जमीनी स्तर पर कल्याण एवं विकास की योजनाओं के लिए किया जाता है। योजना के बारे में जानकारी खनन से प्रभावित प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम बुनियादी सामाजिक और भौतिक ...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने का संकल्प, उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़े का आगाज, राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़ा शुरू

राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरक विभाग में , 1 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा- 2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त सचिव श्री अनुराग रोहतगी के मार्गदर्शन में किया गया , जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री अनुराग रोहतगी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़े की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं , बल्कि देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी कार्मिकों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग राजभाषा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है , इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी क्रम में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अधिक...

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने प्राथमिक शिक्षक संबंधी शिक्षा में छह माह के प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया

यह पाठ्यक्रम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सेवारत प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करेगा केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने 16 सितंबर , 2026 को नई दिल्ली में प्राथमिक शिक्षक संबंधी शिक्षा (पीटीई) में छह माह के प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। यह पाठ्यक्रम ऐसे सेवारत प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है , जिनके पास बी.एड. की डिग्री है। यह पाठ्यक्रम ऐसे शिक्षकों के लिए प्राथमिक स्तर पर शिक्षण हेतु आवश्यक प्रमाणन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। यह विशेष व्यावसायिक विकास कार्यक्रम शिक्षकों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करेगा , जिससे वे प्राथमिक स्तर (कक्षा I से V) के   विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से शिक्षित करने के लिए आवश्यक कौशल और दक्षताएं विकसित कर सकेंगे। यह ब्रिज पाठ्यक्रम राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत शिक्षकों को बाल-केंद्रित , समावेशी तथा बाल विकास के अनुरुप शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा। इससे शिक्षा के आधारभूत औ...

घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना

  हर घर के लिए स्वच्छ और किफायती पाइप से आपूर्ति की जाने वाली खाना पकाने की गैस   संक्षिप्त विवरण       पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी ) का विस्तार भारत की स्वच्छ घरेलू ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की ओर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। घरों तक पीएनजी पहुंचाना सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन ( सीजीडी ) नेटवर्क के विकास का हिस्सा है। इस तरह के नेटवर्क में पाइपलाइन और उससे जुड़ी सुविधाएं होती हैं , जो घरों , वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों को सेवा देती हैं। इसे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी ) द्वारा अधिकृत संस्थाओं द्वारा विकसित किया जाता है। पीएनजीआरबी ने 309 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए ) में संस्थाओं को अधिकृत किया है। इन क्षेत्रों में देश के पूरे मुख्य भू-भाग शामिल हैं। 18 अगस्त 2026 तक देशभर में 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध थे। पीएनजी कवरेज को और बढ़ाने के लिए , 18 अगस्त 2026 को घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। यह योजना 1 सितंबर...

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंदौर (मध्य प्रदेश), भोपाल (मध्य प्रदेश) और उदयपुर (राजस्थान) शहरों के लिए आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत वेटलैंड सिटी प्रमाणन (डब्ल्यूसीए) के लिए भारत से तीन नामांकन प्रस्तुत किए हैं।

  पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंदौर , भोपाल और उदयपुर शहरों के लिए आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत वेटलैंड सिटी प्रमाणन के लिए प्रस्ताव दिया  पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंदौर (मध्य प्रदेश) , भोपाल (मध्य प्रदेश) और उदयपुर (राजस्थान) शहरों के लिए आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत वेटलैंड सिटी प्रमाणन (डब्ल्यूसीए) के लिए भारत से तीन नामांकन प्रस्तुत किए हैं। ये पहले तीन भारतीय शहर हैं जिनके लिए नगर निगमों के सहयोग से संबंधित राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर डब्ल्यूसीए के लिए नामांकन प्रस्तुत किए गए हैं। इन शहरों में और उसके आसपास स्थित आर्द्रभूमि अपने नागरिकों को बाढ़ विनियमन , आजीविका के अवसरों , मनोरंजक और सांस्कृतिक मूल्यों के संदर्भ में अनेक लाभ प्रदान करती है। सिरपुर वेटलैंड (इंदौर में रामसर साइट) , यशवंत सागर (इंदौर के समीप रामसर साइट) , भोज वेटलैंड (भोपाल में रामसर साइट) और उदयपुर और उसके आसपास कई वेटलैंड्स (झीलें) इन शहरों के लिए जीवन रेखा के रूप में काम करते हैं। तीन नामांकित शहरों में शाम...

सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी भंडारण सीमा 15 दिनों से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। अतिरिक्त स्टॉक की खरीद अग्रिम स्‍वीकृति योजना (एएएस) और शुल्‍क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत आयातित चीनी से ही की जाएगी

खुदरा चीनी की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट ; सरकार ने व्यापारियों और थोक विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वे कम हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा 15 दिनों की चीनी भंडारण सीमा को बढ़ाकर 30 दिन करने का निर्णय लिया है , बशर्ते मौजूदा 15 दिनों की सीमा से अधिक स्टॉक की मात्रा केवल अग्रिम स्‍वीकृति योजना (एएएस) और शुल्‍क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत आयातित चीनी से ही प्राप्त की जाए। खुले बाजार से खरीद के लिए स्टॉक रखने की सीमा अपरिवर्तित रहेगी और केवल 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगी। सरकार ने थोक उपभोक्ताओं द्वारा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल @https://foodstock.dfpd.gov.in/ के माध्यम से प्रत्येक शुक्रवार को चीनी स्टॉक की घोषणा और साप्ताहिक जानकारी के लिए एक तंत्र भी स्थापित किया है। सरकार ने चीनी के प्रमुख थोक उपभोक्ताओं के साथ विस्तृत परामर्श किया है और एक स्थिर और व्यवस्थित चीनी बाजार को बनाए रखने के उद्देश्य से उनके सुझावों पर विधिवत विचार किया गया है। वर्तमान में उत्पादन , उपभोग या उपयोग के लिए कच्चे...

नीति आयोग की पहल ई-फास्ट इंडिया के तहत भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई के लिए पीएसीटी की शुरुआत

पीएसीटी देश भर में माल ढुलाई इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क स्थापित करके बड़े पैमाने पर शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए व्यावसायिक आधार को मजबूत करेगा। 5 वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन में व्यापार , वित्तपोषण और चार्जिंग साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए जेडईटी मार्केटप्लेस की भी शुरुआत की गई। नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने आज 5 वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में पीएसीटी का शुभारंभ किया। यह शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी उमाशंकर , एमएचआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हनीफ कुरैशी , नीति आयोग की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की कार्यक्रम निदेशक सुश्री अर्चना मित्तल , डब्ल्यूआरआई के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक श्री पवन मुलुकुटला और उद्योग , वित्त और माल ढुलाई क्षेत्र से जुड़े लगभग 250 प्रतिभागी उपस्थित थे। ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म की एक प्रमुख पहल , पीएसीटी को शिपर्स , लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता और अन्य इकोसिस्टम हितधारकों से माल ढुलाई की मांग और चिन्हित माल ढुलाई कॉरिडोर में श...

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