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भारत के श्रम सुधार: सरलीकरण, सुरक्षा एवं सतत विकास


प्रमुख बिंदु

·         सरकार ने 29 श्रम कानूनों को चार व्यापक श्रम संहिताओं में समेकित किया है।

·          चार श्रम संहिताओं में मज़दूरी संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020 शामिल हैं।

·         यह ऐतिहासिक सुधार अनुपालन को सुव्यवस्थित करता है, अप्रचलित प्रावधानों का आधुनिकीकरण करता है, और एक सरल, कुशल ढाँचा बनाता है जो व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देता है, साथ ही श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण की सुरक्षा भी करता है।

भारत के विकास की आधारशिला श्रम

श्रम का सशक्तिकरण एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। इस दृष्टिकोण को दर्शाते हुए, भारत में रोज़गार ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है - 2017-18 में 47.5 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 64.33 करोड़ हो गया, जो महज़ छह वर्षों में 16.83 करोड़ नौकरियों की शुद्ध वृद्धि है। इसी अवधि के दौरान, बेरोज़गारी दर 6.0% से तेज़ी से घटकर 3.2%  हो गई, और 1.56 करोड़ महिलाएँ औपचारिक कार्यबल में शामिल हुईं, जो समावेशी और निरंतर श्रम सशक्तिकरण पर सरकार के ज़ोर को रेखांकित करता है। श्रम बाज़ार के सकारात्मक दृष्टिकोण से एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन भी हुआ है, जो अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के अनुपात में गिरावट से परिलक्षित होता है। इसके अतिरिक्त, भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का तेजी से विस्तार हुआ है और यह विश्व स्तर पर सबसे बड़ी प्रणालियों में से एक बन गई है।

श्रम, आर्थिक वृद्धि और विकास का एक प्रमुख चालक है। श्रमिकों के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले ढाँचे को सरल बनाने और मज़बूत करने के लिए, सरकार ने 29 श्रम कानूनों को चार व्यापक श्रम संहिताओं में समेकित किया है— अर्थात्, मज़दूरी संहिता, 2019,  औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020

यह ऐतिहासिक सुधार सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों को सुरक्षा, गरिमा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी उपायों तक आसान पहुँच प्राप्त हो, जिससे एक निष्पक्ष और भविष्य के लिए तैयार श्रम पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मज़बूत होती है।

मौजूदा 29 श्रम कानूनों को संहिताबद्ध करने के पीछे का तर्क

श्रम कानूनों में सुधार एक सतत प्रक्रिया है। देश के विकसित हो रहे आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य के अनुरूप सरकार विधायी ढाँचे को आधुनिक बनाने और सुव्यवस्थित करने के लिए लगातार काम करती है। 29 मौजूदा श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में संहिताबद्ध करने का कार्य लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करने और प्रणाली को अधिक कुशल तथा समकालीन बनाने के लिए किया गया था। संहिताबद्धता का उद्देश्य व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ाना, रोज़गार सृजन को बढ़ावा देना, और प्रत्येक श्रमिक के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और मज़दूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस सुधार के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

·         अनुपालन को सरल बनाना: कानूनों की बहुलता  के कारण अनुपालन में कठिनाई होती है।

·         प्रवर्तन को सुव्यवस्थित करना: विभिन्न श्रम कानूनों में प्राधिकरणों की बहुलता के कारण प्रवर्तन में जटिलता और कठिनाई होती थी।

·         अप्रचलित कानूनों का आधुनिकीकरण: अधिकांश श्रम कानून स्वतंत्रता-पूर्व युग के दौरान बनाए गए थे, जिसके कारण उन्हें आज की आर्थिक वास्तविकताओं और तकनीकी प्रगति के साथ संरेखित करने की आवश्यकता थी।

4 श्रम संहिताओं का निर्माण

श्रम कानूनों को संहिताबद्धता के माध्यम से युक्तिसंगत बनाने का एक महत्वपूर्ण कारण एकल पंजीकरण, एकल लाइसेंस और एकल रिटर्न की अवधारणा को लागू करके पंजीकरण और लाइसेंसिंग ढांचे को सरल बनाना था, जिससे रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए समग्र अनुपालन बोझ को कम किया जा सके।

दूसरे राष्ट्रीय श्रम आयोग ने सिफारिश की थी कि मौजूदा श्रम कानूनों को कार्यात्मक आधार पर मोटे तौर पर चार/पाँच श्रम संहिताओं में समूहित किया जाना चाहिए।  तदनुसार, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय ने श्रम कानूनों के प्रासंगिक प्रावधानों को चार संहिताओं में युक्तिसंगत बनाने, सरल बनाने और विलय करने का अभ्यास शुरू किया। चार श्रम संहिताएँ 2015 से 2019 के दौरान सरकार, नियोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विभिन्न ट्रेड यूनियनों की त्रिपक्षीय बैठक में हुए विचार-विमर्श के बाद अधिनियमित की गईं। श्रम संहिता, 2019 को 8 अगस्त, 2019 को अधिसूचित किया गया था और शेष तीन संहिताओं को 29 सितंबर, 2020 को अधिसूचित किया गया था।

 

संहिता 1: मजदूरी संहिता 2019

मज़दूरी संहिता, 2019 का उद्देश्य चार मौजूदा कानूनों - मज़दूरी भुगतान अधिनियम, 1936; न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948; बोनस भुगतान अधिनियम, 1965; और समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 - के प्रावधानों को सरल बनाना, समेकित करना और तर्कसंगत बनाना है। इसका लक्ष्य श्रमिकों के अधिकारों को मज़बूत करना है, साथ ही नियोक्ताओं के लिए मज़दूरी से संबंधित अनुपालन में सरलता और एकरूपता को बढ़ावा देना है।

प्रमुख आकर्षण

सार्वभौमिक न्यूनतम मज़दूरी: यह संहिता संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मज़दूरी का एक वैधानिक अधिकार स्थापित करती है। पहले, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम केवल अनुसूचित रोज़गारों पर लागू होता था, जिसमें लगभग 30% श्रमिक ही शामिल थे।

फ्लोर वेज का परिचय: न्यूनतम जीवन स्तर के आधार पर सरकार द्वारा एक वैधानिक फ्लोर वेज निर्धारित किया जाएगा, जिसमें क्षेत्रीय भिन्नता की गुंजाइश होगी। कोई भी राज्य इस स्तर से कम न्यूनतम मज़दूरी तय नहीं कर सकता है, जिससे देश भर में एकरूपता और पर्याप्तता सुनिश्चित होगी।

मज़दूरी निर्धारण के लिए मानदंड: समुचित सरकारें श्रमिकों के कौशल स्तर (अकुशल, कुशल, अर्ध-कुशल और उच्च कुशल), भौगोलिक क्षेत्रों, और नौकरी की स्थितियों जैसे कि तापमान, आर्द्रता, या खतरनाक वातावरण पर विचार करके न्यूनतम मज़दूरी निर्धारित करेंगी।

रोज़गार में लैंगिक समानता: नियोक्ता समान कार्य के लिए भर्ती, मज़दूरी और रोज़गार की शर्तों में लिंग (इसमें ट्रांसजेंडर पहचान शामिल है) के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे।

मज़दूरी भुगतान के लिए सार्वभौमिक कवरेज: समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और अनाधिकृत कटौतियों को रोकने वाले प्रावधान सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे, भले ही उनकी मज़दूरी की सीमा कुछ भी हो (वर्तमान में यह केवल 24,000/माह तक कमाने वाले कर्मचारियों पर लागू है)

ओवरटाइम मुआवज़ा: नियोक्ता को नियमित कामकाजी घंटों से अधिक किए गए किसी भी काम के लिए सभी कर्मचारियों को सामान्य दर से कम से कम दोगुना ओवरटाइम मज़दूरी का भुगतान करना होगा।

मज़दूरी भुगतान की ज़िम्मेदारी: नियोक्ता, जिसमें कंपनियाँ, फर्म या संघ शामिल हैं, अपने कर्मचारियों को मज़दूरी का भुगतान करेंगे। ऐसा करने में विफलता पर मालिक/इकाई अदत्त मज़दूरी के लिए उत्तरदायी होंगे।

निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता: "निरीक्षक" की पारंपरिक भूमिका को "निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता" से बदल दिया गया है, जो अनुपालन में सुधार के लिए प्रवर्तन के साथ-साथ मार्गदर्शन, जागरूकता और सलाहकार भूमिकाओं पर ज़ोर देता है।

अपराधों का समझौता: पहली बार के गैर-कारावास योग्य अपराधों का जुर्माना भरकर समझौता किया जा सकता है। हालाँकि, पाँच साल के भीतर दोहराए गए अपराधों का समझौता नहीं किया जा सकता है।

अपराधों का गैर-अपराधीकरण: यह संहिता कुछ पहली बार के अपराधों के लिए कारावास को मौद्रिक जुर्माने (अधिकतम जुर्माने का 50% तक) से बदल देती है, जिससे ढाँचा कम दंडात्मक और अधिक अनुपालन-उन्मुख बनता है।

संहिता 2: औद्योगिक संबंध संहिता, 2020

औद्योगिक संबंध संहिता (आईआऱ कोड) को ट्रेड यूनियन एक्ट 1926, औद्योगिक रोज़गार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947  के प्रासंगिक प्रावधानों के विलयन, सरलीकरण और युक्तिकरण के बाद तैयार किया गया है। यह संहिता इस तथ्य को स्वीकार करती है कि श्रमिक का अस्तित्व उद्योग के अस्तित्व पर निर्भर करता है। इस पृष्ठभूमि में, यह व्यापार संघों, औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम में रोज़गार की शर्तों, औद्योगिक विवादों की जाँच और निपटान से संबंधित कानूनों को सरल बनाती है।

प्रमुख आकर्षण

निश्चित अवधि का रोज़गार (एफटीई): मज़दूरी और लाभों में पूर्ण समानता के साथ सीधे, समय-सीमा वाले अनुबंधों की अनुमति देता है; एक वर्ष के बाद ग्रेच्युटी की पात्रता। यह प्रावधान अत्यधिक संविदाकरण को कम करता है और नियोक्ताओं को लागत दक्षता प्रदान करता है।

पुनः-कौशल निधि: छँटनी किए गए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए, औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा छँटनी किए गए प्रत्येक श्रमिक के लिए 15 दिनों की मज़दूरी के बराबर राशि का योगदान करके यह निधि स्थापित की गई है। यह छँटनी मुआवज़े के अतिरिक्त है। यह राशि छँटनी के 45 दिनों के भीतर श्रमिक के खाते में जमा कर दी जाएगी।

ट्रेड यूनियन की मान्यता: 51% सदस्यता वाले यूनियन को समझौताकारी यूनियन के रूप में मान्यता मिलेगी; अन्यथा, व्यापार संघ की कम से कम 20% सदस्यता वाले यूनियनों से एक समझौताकारी परिषद का गठन किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था सामूहिक सौदेबाजी को मज़बूत करती है।

श्रमिक की विस्तारित परिभाषा: बिक्री संवर्धन कर्मचारियों, पत्रकारों और 18,000/माह तक कमाने वाले पर्यवेक्षी कर्मचारियों को शामिल किया गया है।

उद्योग की व्यापक परिभाषा: लाभ या पूंजी की परवाह किए बिना सभी व्यवस्थित नियोक्ता-कर्मचारी गतिविधियों को शामिल करती है, जिससे श्रम सुरक्षा तक पहुँच व्यापक होती है।

छँटनी/कामबंदी/बंद करने की उच्च सीमा: अनुमोदन की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दी गई है; राज्य इस सीमा को और बढ़ा सकते हैं। यह प्रावधान अनुपालन को सरल बनाएगा और औपचारिकीकरण में योगदान देगा।

महिलाओं का प्रतिनिधित्व: लैंगिक-संवेदनशील निवारण के लिए शिकायत समितियों में महिलाओं का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।

स्थायी आदेशों की सीमा: 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दी गई है, जिससे अनुपालन आसान होता है और लचीले कार्यबल प्रबंधन को सक्षम किया जाता है।

घर से काम का प्रावधान: पारस्परिक सहमति से सेवा क्षेत्रों में अनुमति दी गई है, जिससे लचीलेपन में सुधार होता है।

औद्योगिक न्यायाधिकरण: विवादों के तेज़ निपटारे के लिए न्यायिक और प्रशासनिक सदस्य से मिलकर बने दो-सदस्यीय न्यायाधिकरण।

सीधा न्यायाधिकरण पहुँच: पार्टियाँ 90 दिनों के भीतर विफल सुलह के बाद सीधे न्यायाधिकरणों से संपर्क कर सकती हैं।

हड़ताल/तालाबंदी के लिए नोटिस: संवाद को बढ़ावा देने और व्यवधानों को कम करने के लिए सभी प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य 14-दिन का नोटिस।

हड़ताल की विस्तारित परिभाषा: "सामूहिक आकस्मिक अवकाश" को भी अपने दायरे में शामिल करता है ताकि अचानक होने वाली हड़तालों को रोका जा सके और वैध कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

गैर-अपराधीकरण और समझौता: मामूली अपराधों को मौद्रिक दंड के साथ समझौता योग्य बनाया गया है, जो अभियोजन की जगह अनुपालन को बढ़ावा देता है।

डिजिटल प्रक्रियाएँ: पारदर्शिता और दक्षता के लिए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड-कीपिंग, पंजीकरण और संचार को सक्षम बनाता है।

संहिता 3: सामाजिक सुरक्षा पर संहिता, 2020

सामाजिक सुरक्षा संहिता में मौजूदा नौ सामाजिक सुरक्षा अधिनियमों को शामिल किया गया है, जो हैं; कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923; कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948; कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952; रोज़गार विनिमय (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) अधिनियम, 1959; मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961; ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972; सिने-कर्मकार कल्याण निधि अधिनियम, 1981; भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 और; असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008यह संहिता सभी श्रमिकों- जिनमें असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक शामिल हैं- को जीवन, स्वास्थ्य, मातृत्व और भविष्य निधि लाभों को कवर करते हुए सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि अधिक दक्षता के लिए डिजिटल सिस्टम और सुविधाप्रदाता-आधारित अनुपालन को भी लागू करती है।

प्रमुख आकर्षण

विस्तारित ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा) कवरेज: ईएसआईसी अब अखिल भारतीय स्तर पर लागू होगा, जिससे "अधिसूचित क्षेत्रों" के मानदंड समाप्त हो गए हैं। 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान नियोक्ता और कर्मचारियों की आपसी सहमति से स्वेच्छा से इसमें शामिल हो सकते हैं।खतरनाक व्यवसायों के लिए कवरेज अनिवार्य होगा और इसे बागान श्रमिकों तक बढ़ाया जाएगा।

समयबद्ध ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) जाँच: ईपीएफ जाँच और वसूली कार्यवाही शुरू करने के लिए पाँच साल की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिसे दो साल के भीतर (एक साल तक बढ़ाया जा सकता है) पूरा करना होगा। मामलों को स्वतः संज्ञान से फिर से खोलने को समाप्त कर दिया गया है, जिससे समय पर समाधान सुनिश्चित होता है।

घटी हुई ईपीएफ अपील जमा राशि: ईपीएफओ के आदेशों के विरुद्ध अपील करने वाले नियोक्ताओं को अब आकलन की गई राशि का केवल 25% जमा करना होगा (पहले 40-70% था), जिससे वित्तीय बोझ कम होता है और व्यवसाय करने में आसानी तथा न्याय तक पहुँच सुनिश्चित होती है।

निर्माण उपकर के लिए स्व-मूल्यांकन: नियोक्ता अब बिल्डिंग और अन्य निर्माण कार्य के संबंध में उपकर देनदारियों का स्व-मूल्यांकन कर सकते हैं, जिसका मूल्यांकन पहले अधिसूचित सरकारी प्राधिकरण द्वारा किया जाता था। इससे प्रक्रियागत देरी और आधिकारिक हस्तक्षेप कम होता है।

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों का समावेशन: सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सक्षम करने के लिए नई परिभाषाएँ शामिल की गई हैं - "एग्रीगेटर," "गिग वर्कर," और "प्लेटफॉर्म वर्कर"। एग्रीगेटरों को वार्षिक कारोबार का 1-2% योगदान करना होगा (ऐसे श्रमिकों को किए गए भुगतान के 5% तक सीमित)

सामाजिक सुरक्षा निधि: असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए जीवन, विकलांगता, स्वास्थ्य और वृद्धावस्था लाभों को कवर करने वाली योजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक समर्पित निधि प्रस्तावित की गई है। अपराधों के समझौता के माध्यम से एकत्र की गई राशि को इस निधि में जमा किया जाएगा और सरकार द्वारा उपयोग किया जाएगा।

आश्रितों की विस्तारित परिभाषा: कवरेज को मातृ दादा-दादी तक बढ़ाया गया है और महिला कर्मचारियों के मामले में इसमें आश्रित सास-ससुर भी शामिल हैं, जिससे पारिवारिक लाभों तक पहुँच व्यापक होती है।

मज़दूरी की एकसमान परिभाषा: "मज़दूरी" में अब मूल वेतन, महँगाई भत्ता और रिटेनिंग भत्ता शामिल हैं; कुल पारिश्रमिक का 50% (या अधिसूचित किया जा सकने वाला ऐसा प्रतिशत) मज़दूरी की गणना में जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रेच्युटी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

यात्रा दुर्घटनाएँ शामिल: घर और कार्यस्थल के बीच यात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को अब रोज़गार-संबंधित माना जाता है, जो मुआवज़े के लिए योग्य बनाती हैं।

निश्चित अवधि के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी: निश्चित अवधि के कर्मचारी एक वर्ष की निरंतर सेवा के बाद ग्रेच्युटी के लिए पात्र हो जाते हैं (पहले पाँच वर्ष)।

निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता प्रणाली: पारदर्शिता और व्यापक अनुपालन के लिए यादृच्छिक वेब-आधारित, एल्गोरिथम-संचालित निरीक्षणों को शुरू किया गया है। निरीक्षक अब पालन को समर्थन देने और उत्पीड़न को कम करने के लिए सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करते हैं।

गैर-अपराधीकरण और मौद्रिक जुर्माने: संहिता ने कुछ अपराधों के लिए कारावास को मौद्रिक जुर्माने से बदल दिया है। किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले नियोक्ता को अनुपालन के लिए अनिवार्य 30 दिनों का नोटिस दिया जाएगा।

अपराधों का समझौता: जुर्माने से दंडनीय प्रथम बार के अपराधों का समझौता किया जा सकता है - केवल जुर्माने वाले अपराधों के लिए: अधिकतम जुर्माने का 50% और जुर्माना/कारावास वाले मामलों के लिए: अधिकतम जुर्माने का 75% - जिससे मुकदमेबाजी कम होती है और व्यवसाय करने में आसानी में सुधार होता है।

अनुपालन का डिजिटलीकरण: रिकॉर्ड, रजिस्टर और रिटर्न के इलेक्ट्रॉनिक रखरखाव को अनिवार्य करता है, जिससे लागत में कटौती होती है और दक्षता में सुधार होता है।

रिक्तियों की रिपोर्टिंग: नियोक्ता भर्ती से पहले निर्दिष्ट करियर केंद्रों को रिक्तियों की रिपोर्ट करेंगे, जिससे रोज़गार के अवसरों में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

संहिता 4: कामकाजी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सेवा शर्तें संहिता 2020

यह संहिता 13 केंद्रीय श्रम अधिनियमों - कारखाना अधिनियम, 1948; बागान श्रम अधिनियम, 1951; खान अधिनियम, 1952; कार्यशील पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें और विविध प्रावधान) अधिनियम, 1955; कार्यशील पत्रकार (मजदूरी दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958; मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961; बीड़ी और सिगार कर्मकार (नियोजन की शर्तें) अधिनियम, 1966; ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970; विक्रय संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976; अंतर-राज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1979; सिने-कर्मकार और सिनेमा थिएटर कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1981; डॉक कर्मकार (सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण) अधिनियम, 1986 और; भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1996  के प्रासंगिक प्रावधानों के समामेलन, सरलीकरण और युक्तिकरण के बाद तैयार की गई है।

यह संहिता श्रमिक अधिकारों और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की सुरक्षा करने, तथा व्यवसाय-अनुकूल नियामक वातावरण बनाने के दोहरे उद्देश्यों को संतुलित करती है। इससे आर्थिक विकास और रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत का श्रम बाज़ार अधिक कुशल, निष्पक्ष और भविष्य के लिए तैयार हो जाएगा।

प्रमुख आकर्षण

एकीकृत पंजीकरण: इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण के लिए 10 कर्मचारियों की एकसमान सीमा निर्धारित की गई है। अधिनियमों में 6 पंजीकरणों के स्थान पर अब एक प्रतिष्ठान के लिए एक ही पंजीकरण की कल्पना की गई है। इससे एक केंद्रीकृत डेटाबेस बनेगा और व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा।

खतरनाक काम तक विस्तार: सरकार इस संहिता के प्रावधानों को एक भी कर्मचारी वाले किसी भी प्रतिष्ठान तक बढ़ा सकती है, बशर्ते वह प्रतिष्ठान खतरनाक या जीवन-घातक व्यवसायों में लगा हो।

सरलीकृत अनुपालन: प्रतिष्ठानों के लिए एक लाइसेंस, एक पंजीकरण और एक रिटर्न का ढाँचा पेश किया गया है, जिससे अनावश्यकता और अनुपालन का बोझ कम होता है।

प्रवासी श्रमिकों की व्यापक परिभाषा: अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों (आईएसएमडब्लू) की परिभाषा में अब वे श्रमिक शामिल हैं जो सीधे, ठेकेदारों के माध्यम से नियोजित हैं, या अपने आप प्रवास करते हैं। प्रतिष्ठानों को आईएसएमडब्लू की संख्या घोषित करनी होगी। लाभों में शामिल हैं: 12 महीनों में एक बार मूल स्थान तक यात्रा के लिए एकमुश्त वार्षिक यात्रा भत्ता और राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी, साथ ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन तक पहुँच।

स्वास्थ्य और औपचारिकता: कर्मचारियों के लिए मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जाँच।

नियुक्ति पत्रों के माध्यम से औपचारिकता: पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नौकरी के विवरण, मज़दूरी और सामाजिक सुरक्षा को निर्दिष्ट करते हुए नियुक्ति पत्र दिए जाएँगे।

महिलाओं का रोज़गार: महिलाएँ सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों में और रात के घंटों (सुबह 6 बजे से पहले, शाम 7 बजे के बाद) में सहमति और सुरक्षा उपायों के साथ काम कर सकती हैं, जिससे समानता और समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

विस्तारित मीडिया कर्मी परिभाषा: "श्रमजीवी पत्रकार" और "सिने कर्मकार" में अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और ऑडियो-विजुअल उत्पादन के सभी रूपों में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं।

असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस: प्रवासी श्रमिकों सहित असंगठित श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस विकसित किया जाएगा ताकि प्रवासी श्रमिकों को नौकरी दिलाने, उनके कौशल का मानचित्रण करने और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने में मदद मिल सके।

पीड़ित को मुआवज़ा: चोट या मृत्यु के मामले में, न्यायालयों द्वारा लगाए गए जुर्माने का कम से कम 50% पीड़ितों या उनके कानूनी वारिसों को मुआवजे के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया जा सकता है।

संविदा श्रम सुधार: प्रयोज्यता की सीमा 20 से बढ़ाकर 50 ठेका श्रमिक कर दी गई है। ठेकेदार को कार्य-आदेश आधारित लाइसेंस के बजाय 5 साल के लिए वैध अखिल भारतीय लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। ठेका श्रम, बीड़ी और सिगार विनिर्माण तथा कारखाने के लिए: एक साझा लाइसेंस की परिकल्पना की गई है और निर्धारित अवधि की समाप्ति के बाद मानद लाइसेंस  का प्रावधान पेश किया गया है। इसके अलावा, लाइसेंस स्वचालित रूप से जनरेट होगा। ठेका श्रम बोर्ड के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है और मुख्य तथा गैर-मुख्य गतिविधियों पर सलाह देने के लिए नामित प्राधिकरण की नियुक्ति का प्रावधान पेश किया गया है।

सुरक्षा समितियाँ: 500 या उससे अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठान नियोक्ता-श्रमिक प्रतिनिधित्व के साथ सुरक्षा समितियों का गठन करेंगे, जिससे कार्यस्थल की सुरक्षा और साझा जवाबदेही बढ़ेगी।

राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड: एकल त्रिपक्षीय सलाहकार बोर्ड छह पूर्ववर्ती बोर्डों का स्थान लेगा ताकि क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक निर्धारित किए जा सकें, जिससे एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

अपराधों का गैर-अपराधीकरण और समझौता: केवल जुर्माने से दंडनीय अपराधों को अधिकतम जुर्माने का 50% भुगतान करके समझौता किया जाएगा; जिन अपराधों में कारावास या जुर्माना या दोनों शामिल हैं, उन्हें 75% भुगतान करके समझौता किया जाएगा। आपराधिक दंड (कारावास) को मौद्रिक जुर्माने जैसे सिविल दंडों से प्रतिस्थापित किया गया है, जो सज़ा की जगह अनुपालन को बढ़ावा देता है।

संशोधित कारखाना सीमाएँ: प्रयोज्यता 10 से बढ़ाकर 20 श्रमिक (बिजली के साथ) और 20 से बढ़ाकर 40 श्रमिक (बिजली के बिना) कर दी गई है, जिससे छोटी इकाइयों के लिए अनुपालन का बोझ कम होगा।

सामाजिक सुरक्षा निधि: असंगठित श्रमिकों के कल्याण और लाभ वितरण के लिए एक निधि की स्थापना की गई है, जिसे दंड और समझौता शुल्क के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा।

संविदा श्रम - कल्याण एवं मज़दूरी: प्रधान नियोक्ताओं को ठेका श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा उपायों जैसी कल्याणकारी सुविधाएँ प्रदान करनी होंगी। यदि ठेकेदार मज़दूरी का भुगतान करने में विफल रहता है, तो प्रधान नियोक्ता को ठेका श्रम को अदत्त मज़दूरी का भुगतान करना होगा।

कार्य के घंटे और ओवरटाइम: सामान्य कार्य के घंटे 8 घंटे/दिन और 48 घंटे/सप्ताह तक सीमित हैं। ओवरटाइम की अनुमति केवल श्रमिक की सहमति से दी जाएगी और इसका भुगतान नियमित दर से दोगुना किया जाएगा।

निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता प्रणाली: निरीक्षक अब केवल पुलिसिंग करने के बजाय नियोक्ताओं को कानून, नियमों और विनियमों का अनुपालन करने में मदद करने के उद्देश्य से सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करेंगे

श्रम संहिताओं का परिवर्तनकारी शक्तियां

भारत की नई श्रम संहिताओं  ने श्रम कानूनों को सरल, निष्पक्ष और आज के कामकाजी वातावरण के अधिक अनुकूल बना दिया है। वे श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा में सुधार करते हैं, व्यवसायों के लिए नियमों का अनुपालन करना आसान बनाते हैं, और बढ़ती अर्थव्यवस्था में अधिक रोज़गार के अवसर पैदा करते हैं। लागू की गईं श्रम संहिताएँ श्रम बाज़ार में निम्नलिखित परिवर्तन लाती हैं:

· श्रम कानूनों को वर्तमान नियमों का आधुनिकीकरण कर विकसित कार्य पद्धतियों, तकनीकी प्रगति और आर्थिक वास्तविकताओं के अनुसार आर्थिक परिदृश्य के साथ संरेखित करना

· श्रमिकों की सभी श्रेणियों को शामिल करते हुए एक एकीकृत और व्यापक ढाँचे के माध्यम से हर श्रमिक की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और वेतन सुरक्षा सुनिश्चित करना

· प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और निवेश तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाला व्यवसाय-अनुकूल वातावरण बनाकर रोज़गार के अवसरों को बढ़ाना

· आसान अनुपालन को  एकसमान परिभाषाएँ, एकल पंजीकरण, एकल रिटर्न और निर्बाध पालन के लिए सरलीकृत ऑनलाइन सिस्टम लागू करके सुविधाजनक बनाना

· दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए डिजिटल पंजीकरण, लाइसेंसिंग और निरीक्षण के माध्यम से श्रम कानूनों के प्रशासन में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करना

· ऑनलाइन, जोखिम-आधारित निरीक्षण तंत्र और उद्देश्यपूर्ण कार्यान्वयन प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रवर्तन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मज़बूत करना

· नियामक ढाँचे का सरलीकरण, सामंजस्य और युक्तिकरण प्राप्त करना - कई श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं  में समेकित करके, जिससे स्थिरता सुनिश्चित होती है और प्रशासनिक बोझ कम होता है। 

निष्कर्ष

नये श्रम संहिताओं की स्थापना भारत के श्रम परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी कदम है - जो उद्यमों की दक्षता के साथ श्रमिकों के कल्याण को संतुलित करता है। इन प्रावधानों से अनुपालन  आसान होता है, सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है और मज़दूरी में निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। इसके अलावा, ये सुधार एक अधिक समान, पारदर्शी और विकास-उन्मुख अर्थव्यवस्था की नींव रखते हैं। ये सुधार एक आधुनिक श्रम इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं, जो श्रमिकों और उद्योगों दोनों को सशक्त बनाता है, तथा समावेशी और सतत प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।

संदर्भ

Labour.gov.in

https://labour.gov.in/sites/default/files/labour_code_eng.pdf

https://labour.gov.in/sites/default/files/the_code_on_wages_2019_no._29_of_2019.pdf

श्रम एवं सेवायोजना मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/newsite/pmreleases.aspx?mincode=21

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2147928#:~:text=As%20per%20the%20latest%20data,47.5%20crore%20in%202017%2D18

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2160547

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2147160

पीके/केसी/एसके(रिलीज़ आईडी: 2192556) आगंतुक पटल : 2093 प्रविष्टि तिथि: 21 NOV 2025 by PIB Delhi

 

जिन विषयों को खोज रहे हैं लोग

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों के परिवारों की भावनाओं को… हाउस लीज विषय बेहद आहत करने वाला मामला, हमेशा से रहा है लेकिन..! इससे भी कहीं अधिक पीड़ा..! इस बात की है कि, बीएसपी हाउस लीज मामले में… झूठा आश्वासन देकर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव जैसे लोगों की… मौका परस्ती वाली राजनीतिक भूमिका ने भिलाई वासियों के भावनात्मक ज़ख्मों को… बेरहमी से कुरेदने का काम किया है लेकिन..! अब इस मामले में विधि अपेक्षित संघर्ष प्रारंभ हो गया है… कागजी कार्यवाहियों में दफ़न किए गए..! जमीन घोटालों को उजागर करने वाला पहला पड़ाव भिलाई निगम संपत्ति ब्यौरा मांगने की नोटिस देकर… मौक परस्त कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव से प्रतिक्रिया मांगी गई क्योंकि इसी प्रतिक्रिया के आधार पर हाउस लीज विषय स्वमेव पुनर्जीवित हो जाएगा है…

निगम संपत्ति का ब्यौरा क्यों ? भिलाई विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र यादव ने दो बार बीएसपी कर्मियों के परिवार की भावनाओं से जुड़े बीएसपी हाउस लीज मामले को झूठी और तथ्य विहीन जानकारी देकर राजनीतिक तौर पर भुनाया है..! उल्लेखनीय है कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव ने अपने चुनावी प्रचार में… यह तथ्य विहीन भ्रम फैलाया था कि… बीएसपी हाउस लीज की रजिस्ट्री होगी तदोपरांत… भ्रमित होकर कई लोगों ने मालिकाना हक्क प्राप्त करने के तर्क विहीन बहकावे में आकर बीएसपी हाउस लीज रजिस्ट्री भी करवाई लेकिन…! इसके बाद रजिस्ट्री करवाने वाले कितने हाउस लीज धारकों को तथाकथित मालिकाना हक्क मिला है..! यह अनुत्तरित प्रश्न विचारणीय पहलू है।  कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव की कुटिल राजनीति के लिए मुंहतोड़ प्रश्न ? गौरतलब रहे कि, पूर्व महापौर देवेंद्र यादव ने भिलाई नगर पालिक निगम संपत्ति का लेखा-जोखा की वार्ड वार विभागीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करवाने का पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया था । जिसके कारण भिलाई नगर निगम की अचल संपत्ति पर कितना अवैधानिक अतिक्रमण और कब्जा किया गया है ? यह अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं हु...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मंच कला क्षेत्र के छह प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना गया, वर्ष 2022 और 2023 के लिए 92 कलाकार संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों के लिए चुने गए, 80 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार दिया जाएगा

  संगीत , नृत्य और नाट्य कला से संबंधित संगीत नाटक अकादमी , नई दिल्ली की जनरल काउंसिल , नेशनल ने 21 और 22 फरवरी 2024 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी बैठक में सर्वसम्मति से मंच कला के क्षेत्र में छह ( 6) प्रतिष्ठित हस्तियों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना है। अकादमी की फेलोशिप सबसे प्रतिष्ठित और अपूर्व सम्मान है। यह फेलोशिप किसी भी खास समय में 40 व्यक्तियों को दी जाती है। जनरल काउंसिल ने वर्ष 2022 और 2023 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत , नृत्य , रंगमंच , पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच , कठपुतली और मंच कला में समग्र योगदान/छात्रवृत्ति के क्षेत्र से 92 कलाकारों का भी चयन किया। इस प्रकार चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता समग्र रूप से राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अतिरिक्त ये ख्याति प्राप्त कलाकार संगीत , नृत्य , नाटक , लोक और जनजातीय कला , कठपुतली और संबद्ध रंगमंच कला रूपों आदि के रूप में मंच कला रूपों के संपूर्ण रूप को कवर करते हैं। अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष ...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों की मनोभावनाओं से खिलवाड़ करके… अपनी राजनैतिक रोटी सेकने वाले… चालबाज विधायक देवेंद्र यादव ने… पुनः एक बार बीएसपी कर्मियों के भावनात्मक ज़ख्मों को कुरदने वाला कार्य व्यवहार किया है… जिसका खुलासा विगत 19 मार्च के विधानसभा प्रश्न कार्यवाही से उजागर हुआ है… जिसमें विधायक देवेंद्र के द्वारा पूछे गए विधानसभा प्रश्नों का मुंहतोड़ प्रशासकीय जवाब… छत्तीसगढ़ के वित्तमंत्री ओ.पी.चौधरी ने दिया है… उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री के जवाब का विषयवस्तु स्पष्ट करता है कि, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र ने बीएसपी कर्मियों को बेवकूफ बनाओ का कूटनीतिक कार्य व्यवहार अपनाकर चुनाव जीता है….

बी.एस.पी प्रबंधन को लीज डीड अनुबंध पंजीयन हेतु प्राप्त आवेदनों के विषय की कूटनीतिक और छल-कपटपूर्ण राजनीति पर प्रकाश डाल रहे है… मौकापरस्त विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न… पढ़िए कैसे ? बीएसपी लीज मामले में विधायक देवेंद्र यादव की धोखाधड़ी उजागर हुई   छत्तीसगढ़ विधानसभा कार्यवाही 19 मार्च से भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों को आहत करने वाला मामला सामने आया गौर तलब रहे कि, छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रश्न क्रम 1. प्रश्न क्रमांक. 186 से विधायक देवेन्द्र ने चार प्रश्न पूछे… जिसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ने दिया है जिसके बाद विधायक देवेंद्र यादव के कथनी और करनी के बीच का भ्रम स्पष्ट हो गया और यह भी स्पष्ट हो गया कि… विधायक देवेंद्र ने विगत विधानसभा चुनावों के पहले कैसे बीएसपी आवासीय मकान के लीज मामले मतदाताओं को गुमराह किया है… पढ़िए विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न और मंत्री द्वारा दिया गया जवाब तथा विधायक देवेंद्र यादव के कूटनीतिक छलावे पर प्रकाश डालने वाले विचारणीय पहलू… विधायक देवेंद्र का प्रश्न क्रमांक 186/1  क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बी.एस.पी प...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

भूपेश सरकार की नाकामी को उजागर कर रहा है विधायक देवेंद्र… भिलाई की कामकाजी महिलाओं को तर्क विहीन संभावना बताकर भावनात्मक आधार पर गुमराह करने का मामल है : भिलाई का सी-मार्ट व्यवस्थापन कार्य व्यवहार... इसलिए आमंत्रित है विधायक देवेंद्र यादव… सी-मार्ट की नोट शीट और मूल नस्ती के साथ.. “विशेष चर्चा के लिए”... सार्वजनिक मंच पर आईए… विधायक महोदय…

कामकाजी महिलाओं की आर्थिक स्थिति से खिलवाड़ का मामल विधानसभा कार्यवाही के बाद से पारदर्शिता के दायरे में आ रहा है । भिलाई क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को अपूर्णीय आर्थिक क्षति पहुंचाने वाली विगत भूपेश सरकार की  "ख्याली पुलाव साबित होने वाली योजना सी-मार्ट" पर विगत वर्षों से जमी अनियमितताओं की धूल को हटाने वाल विधानसभा प्रश्न इस योजना से व्यथित महिलाओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि विधानसभा सत्र दिनांक 25 फरवरी, 2025 का प्रश्न क्रम 25. प्रश्न क्र. 176 से विधायक देवेन्द्र यादव ने प्रश्न पूछा कि, क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि, 1/ नगर पालिका निगम भिलाई के अंतर्गत संचालित सी-मार्ट की वर्तमान स्थिति क्या है ?  2/ क्या उनका संचालन किया जा रहा है ?  3/ यदि हां तो उनमें किन उत्पादनों का विक्रय किया जा रहा है ?  4/ यदि बंद है तो उसको पुनः संचालित कब तक किया जाएगा, जानकारी देवें ? उल्लेखनीय है कि, विधायक देवेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश सरकार की नाकामी और भिलाई नगर निगम के महापौर की तर्क विहीन प्रशासकीय कार्य नीति तथा शासकीय कोष को क्षत...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना, साथ ही पहली बार स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प , जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक

  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया ·         दो चरणों में होने वाली जनगणना- 2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य , पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना , साथ ही पहली बार स्व-गणना ( Self-Enumeration) का विकल्प , स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा के माध्यम से होगी , उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे , जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक , देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक , पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना- 2027 में शामिल होंगे केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के लिए चार digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- “प्रगति” (महिला) और “ विकास” (पुरुष) - का...

सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना

  सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना   पर्यटन मंत्रालय देशभर में आतिथ्य एवं पर्यटन से संबंधित अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करता है , जिनका उद्देश्य पुरुष और महिला प्रशिक्षुओं , स्थानीय समुदायों , जनजातीय क्षेत्रों आदि के कौशल विकास , कौशल उन्नयन एवं पुनः कौशल विकास को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम ‘सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण’ योजना के अंतर्गत संचालित किया जाता है। यह योजना देशभर में , जिसमें राजस्थान और महाराष्ट्र भी शामिल हैं , सरकारी संस्थानों एवं सूचीबद्ध निजी संस्थानों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान , फूड क्राफ्ट संस्थान , भारतीय पाककला संस्थान आदि शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने 2025 में भारतीय गुणवत्ता परिषद के माध्यम से इस योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर और 36,000 से अधिक लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्रदान कर सीबीएसपी योजना ने भारत के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के कार्यबल को सशक्त ...

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने छूट प्रबंधन और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर ईपीएफओ प्रशिक्षण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण निर्धारित किया

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान , पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आज ‘‘छूट प्रबंधन , कानूनी ढांचा और प्रतिभूतियों का मूल्यांकन’’ शीर्षक से एक उच्च स्तरीय पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नौ से 13 मार्च 2026 तक चलने वाला यह कार्यक्रम देशभर में ईपीएफओ अधिकारियों की नियामक और वित्तीय निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन सत्र का नेतृत्व पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने किया , जिन्होंने आधुनिक सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में विशेष प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम को संबोधित दिया। श्री कुमार रोहित ने इस बात पर प्रकाश डाला कि छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों का विनियमन ईपीएफओ के भीतर ‘‘सबसे विशिष्ट और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण’’ क्षेत्रों में से एक है। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित अधिकारियों के कंधों पर टिकी अपार जिम्मेदारी पर जोर दिया। श्री कुमार रोहित ने कहा , ‘‘ छूट प्राप्त प्रतिष्ठान आज करोड़ों रुपये के भविष्य निधि संचय का प्रबंधन करते...

शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना )

  शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना ) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना का कार्यान्वयन करता है। शिल्पकार प्रशिक्षण देश भर में योजना  के तहत , 14,688 आईटीआई (सरकारी - 3,345 और निजी - 11,343) के माध्यम से 169 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत व्यापार पाठ्यक्रम को उद्योग , शिक्षा जगत और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के परामर्श से समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों , आधुनिक उपकरणों और मशीनरी को इसमें शामिल करना हैं। इसके अलावा , शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया जाता है। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण को वर्तमान उद्योग मानकों के अनुरूप बनाना , समग्र गुणवत्ता में सुधार करना , नामांकन बढ़ाना और प्रशिक्षुओं को वेतनभोगी रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए तैयार करना है। पिछले तीन वर्...

प्लास्टिक कचरा मुक्त माझी वसुंधरा करन्याचे... एक पर्यावरणीय आणि सामाजिक आव्हान आपल्या समोर उभे आहे... आणि त्यासाठी आपल्या सर्वाचीच भागीदारी आवश्यक आहे कारण … जगभरात प्लास्टिक कचऱ्याची गंभीर समस्या निर्माण झाली आहे.

आजच्या जगात प्लास्टिक कचरा ही एक जटिल समस्या आहे ज्यासाठी तातडीने आणि बहुआयामी उपाय करन्यास जनजागृती करणे अत्यावश्यक आहे ...... प्लास्टिकचे आरोग्यावर विपरीत परिणाम कसे होतात : आजच्या जगात प्लास्टिक हे एक अत्यावश्यक साहित्य बनले आहे. तथापि, त्याचा अतिवापर आणि अयोग्य विल्हेवाट लावल्याने जगभरात प्लास्टिक कचऱ्याची गंभीर समस्या निर्माण झाली आहे. हा कचरा जमिनीत, पाण्यात आणि हवेत जमा होत आहे, ज्यामुळे पर्यावरणीय ऱ्हास, जैवविविधतेला धोका आणि मानवी आरोग्यावर विपरीत परिणाम होत आहे. ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 ****************************** प्लास्टिक कचरा: धोका आणि उपाय समस्या: प्लास्टिक कचरा हा जमिनीत, पाण्यात आणि हवेत जमा होतो. त्यामुळे प्रदूषण होते आणि जैवविविधतेला धोका निर्माण होतो. मानवी आरोग्यावरही विपरीत परिणाम होतो. ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 ****************************** समस्येवर मात करन्यास उपाय: प्लास्टिकचा वापर कमी करणे. पुनर्वापर आणि पुनर्निर्मिती. योग्य व्यवस्थापन. जागरूकता निर्माण करणे. आपण सर्वांनी मिळ...

क्या दुर्ग जिले को पुनः मिल गई है “प्रशासकीय अनियमितताओं का संरक्षण करने वाली” कलेक्टर और गैर जिम्मेदार जिला दंडाधिकारी..? वर्षों से लंबित जन सामान्य के इन प्रश्नों का समाधान खोजने को मजबूर… दुर्ग की जनता के ये प्रश्न… अब अनुत्तरित नहीं रहेंगे क्योंकि जनहित संरक्षण के लिए एक से अधिक परिवाद सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख ने जिला न्यायालय के समक्ष सप्रमाण प्रस्तुत कर दिए हैं पढ़िए पूरे विषय…

नव पदस्थ दुर्ग कलेक्टर की प्रशासकीय काबिलियत की वस्तुस्थिति जल्द ही सामने आयेगी… गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने उन हाई प्रोफाइल राजनैतिक लोगो को उत्पन्न किया हैं जिन्होंने दुर्ग के मतदाताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर केंद्र और राज्य सरकार में समय-समय पर अग्रणी भूमिका निभाई है । कांग्रेस के स्व.मोतीलाल वोरा जी और जननेता भूपेश बघेल ऐसे ही उल्लेखनीय नाम है लेकिन विडंबना यह है कि, दुर्ग जिले में पदस्थ कलेक्टरों ने कई ऐसी प्रशासकीय अनियमितताओं का खुल्लम-खुल्ला संरक्षण किया हैं जिसके कारण लोकन्याय और लोकहित पर प्रत्यक्ष अतिक्रमण हुआ है क्योंकि दुर्ग के मतदाताओं से जनादेश प्राप्त करने वाले नेताओं ने दुर्ग में पदस्थ कलेक्टरों के कार्यों की नियमानुसार समीक्षा नहीं की थी इसलिए कई प्रशासकीय अनियमितताओं को दुर्ग जिले में फलने-फूलने का अवसर मिला जिसे सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख व्यक्तिगत रूप से जिला न्यायालय के समक्ष विधिवत परिवाद विषय बनाकर प्रस्तुत करके प्रश्नांकित कर रही है । इसलिए अब आने वाला समय बताएगा की दुर्ग की नव पदस्थ कलेक्टर साहिबा प्रशासकीय अनियमितताओं के प्रश्नों पर जनहित सं...

श्रमिक अधिकार जागरूकता कार्ययोजना में... आपकी सहभागिता अपेक्षित है क्योंकि श्रम कानून तभी प्रभावी होंगे जब इन कानूनों के दांव पेंच श्रम क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विधिक दृष्टिकोण से समझ आयेंगे… पढ़िए कार्य योजना…

श्रमिक अधिकार को अभिप्राप्त करने के लिए अगर आप भी अपना योगदान देना चाहते है तो यह लेख और कार्य योजना… आपको श्रम क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवा सकते हैं... ……………….. पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 Contact us: श्रम विभाग से संबंधित जानकारी पर आयोजित कार्यशाला एवं संगोष्ठी में प्रतिभागी बनाने के लिए नीचे दिए गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके संपर्क करें । श्रमिक अधिकार का अर्थ क्या है ? श्रमिक अधिकार वे अधिकार हैं जो सभी श्रमिकों को, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में काम करते हों, प्राप्त हैं। ये अधिकार उन्हें एक सुरक्षित और स्वस्थ कार्यस्थल, उचित वेतन और काम के उचित घंटे प्रदान करते हैं। ……………….. पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇 Contact us: महिला सुरक्षा और महिला श्रमिकों से संबंधित प्रावधानों की जानकारी पर आयोजित कार्यशाला एवं संगोष्ठी में प्रतिभागी बनाने के लिए नीचे दिए गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके संपर्क करें । आपको जानने लायक कुछ महत्वपूर्ण विषयवस्तु है जो श्रमिक अधिकारों में शामिल हैं वह निम्नानुसार है : समान काम के लिए समान वेतन:   महिलाओं और पुरुषों को समान काम के लिए स...

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