रोजगार और बेरोजगारी से संबंधित आंकड़े आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा 2017-18 से आयोजित किया जा रहा है। सर्वेक्षण की अवधि प्रतिवर्ष जुलाई से जून तक होती है। नवीनतम उपलब्ध वार्षिक पीएलएफएस रिपोर्टों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए सामान्य स्थिति में अनुमानित श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 2017-18 में 46.8% से बढ़कर 2023-24 में 58.2% हो गया है, जो दर्शाता है कि डब्ल्यूपीआर यानी रोजगार में वृद्धि का रुझान है।
रोजगार सृजन
और रोजगार क्षमता में सुधार सरकार की प्राथमिकता है। तदनुसार, सरकार देश में विभिन्न रोजगार सृजन योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रही
है। सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न रोजगार सृजन योजनाओं और
कार्यक्रमों का विवरण https://dge.gov.in/dge/schemes_programmes पर देखा जा सकता है।
भारत सरकार
के स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) के अंतर्गत, कौशल विकास और
उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण
संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना
(एनएपीएस) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के अंतर्गत कौशल विकास केंद्रों
के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा देश
भर में सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और उन्नत कौशल
प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। स्किल इंडिया मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को
उद्योग से संबंधित कौशल प्रदान करके उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है।
श्रम एवं
रोजगार मंत्रालय ने असंगठित श्रमिकों - प्लेटफॉर्म श्रमिकों और प्रवासी श्रमिकों
सहित का एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल का शुभारंभ किया था। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित
श्रमिकों को स्व-घोषणा के आधार पर एक सार्वभौमिक खाता संख्या (यूएएन) प्रदान करके
उनका पंजीकरण और सहायता करना है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने ई-श्रम को 'वन-स्टॉप-सॉल्यूशन' के रूप में भी लॉन्च किया है,
जिसमें विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल
यानी ई-श्रम पर एकीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य ई-श्रम पर पंजीकृत असंगठित
श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच प्रदान करना और ई-श्रम के माध्यम से
अब तक प्राप्त लाभों को देखना है।
चारों श्रम
संहिताएं परिभाषाओं और अधिकार क्षेत्रों की बहुलता को कम करती हैं, प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाती हैं और प्रवर्तन में पारदर्शिता और
जवाबदेही लाती हैं। साथ ही, यह असंगठित श्रमिकों सहित
श्रमिकों के लिए उपलब्ध सुरक्षा को सुदृढ़ करती है।
भारत सरकार
के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल का
संचालन किया जा रहा है,
जो निजी और सरकारी क्षेत्रों में नौकरियों की जानकारी, ऑनलाइन और ऑफलाइन रोज़गार मेला, नौकरी ढूंढना और
मिलान, करियर परामर्श, व्यावसायिक
मार्गदर्शन, कौशल विकास पाठ्यक्रम, कौशल/प्रशिक्षण
कार्यक्रम आदि सहित कॅरियर संबंधी सेवाएं प्रदान करने वाला एक ही स्थान पर उपलब्ध
समाधान है। यह पोर्टल डिजिटल प्लेटफॉर्म [www.ncs.gov.in] के
माध्यम से उपलब्ध है। इसके अलावा, रोजगार क्षमता बढ़ाने के
लिए एनसीएस पोर्टल प्रमुख कौशल विकास प्लेटफार्मों और पहलों के साथ एकीकृत है।
रोजगार के
अवसरों को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक- निजी भागीदारी को मजबूत करने की मंत्रालय की
रणनीति के तहत निजी और सार्वजनिक नियोक्ताओं, पोर्टल और
प्लेटफ़ॉर्म के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। अब तक 35 से अधिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिनमें स्विगी, ज़ोमैटो, अमेज़न
और ज़ेप्टो जैसे निजी साझेदारों के साथ हुए समझौता ज्ञापन भी शामिल हैं। ये
साझेदार देश भर में एनसीएस पोर्टल के माध्यम से नौकरी चाहने वालों को गिग और
प्लेटफ़ॉर्म-आधारित रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय
कैरियर सेवा (एएनसीए) पोर्टल को ई-श्रम पोर्टल के साथ एकीकृत कर दिया गया है, जिसमें 31 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का
डेटाबेस है, जिनमें गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक भी शामिल हैं।
इस एकीकरण से ई-श्रम के पंजीकृत सदस्यों को एनसीएस पोर्टल पर उपलब्ध सभी सेवाओं,
जैसे कि नौकरी की खोज और संबंधित सुविधाओं का लाभ उठाने की सुविधा
मिलती है।
इसके
अतिरिक्त,
सरकार रोजगार सृजन, रोजगार क्षमता में वृद्धि
और सभी क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री विकसित
भारत रोजगार योजना नामक रोजगार-आधारित प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना लागू कर रही है,
जिसमें विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 99,446 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य दो वर्षों की अवधि में
देश में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए
प्रोत्साहन प्रदान करना है।
केंद्रीय
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के
लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/जेएस
प्रविष्टि तिथि: 02
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