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वर्ष 2019-20 साठीच्या उच्चशिक्षण विषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवालाला,

उच्च शिक्षणविषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवाल (AISHE) 2019-20 ला केंद्रीय शिक्षणमंत्र्यांची मंजुरी

केंद्र सरकारने सातत्याने उच्च शिक्षणाला दिलेल्या महत्वाचे अहवालात प्रतिबिंब

विद्यार्थी पटसंख्येत 2015-16 पासून 2019-20 पर्यंतच्या काळात 11.4% ची वाढ

उच्च शिक्षणात 2015-16 पासून 2019-20 पर्यंतच्या काळात मुलींच्या पटसंख्येत 18.2% ची वाढ

वर्ष 2019-20 मध्ये उच्च शिक्षणात सकल नोंदणी गुणोत्तर (GER) 27.1%

Posted Date:- Jun 10, 2021
नवी दिल्‍ली, 10 जून 2021

वर्ष 2019-20 साठीच्या उच्चशिक्षण विषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवालाला, आज केंद्रीय शिक्षणमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ यांनी मंजुरी दिली आहे. या अहवालात देशातील उच्चशिक्षणाच्या सद्यस्थितीविषयी माहिती असून, महत्वाच्या क्षेत्रांमधील कामगिरीचा ठळक उल्लेख करण्यात आला आहे.

I feel delighted to announce the release of the All India Survey on Higher Education 2019-20 report. As you can see, we have improved in GER, Gender parity Index. The number of Institutions of National importance increased 80% (from 75 in 2015 to 135 in 2020). (1/2) pic.twitter.com/ISpGansJFM

— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) June 10, 2021
 

2015-16 ते 2019-20 या पाच वर्षांच्या काळात, विद्यार्थी पटसंख्येत (नोंदणीत) 11.4% ची वाढ झाली. याच काळात उच्चशिक्षणात मुलींच्या पटसंख्येत 18.2% ची वाढ झाली आहे, असे पोखरीयाल यांनी सांगितले. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या नेतृत्वाखालील सरकार उच्च शिक्षणावर सातत्याने भर देत असून, त्यातही मुली, महिलांचे शिक्षण तसेच सामाजिक दृष्ट्या मागास वर्गांच्या सक्षमीकरणाकडे विशेष लक्ष देत आहे. सरकारच्या विविध उपायांमुळेच,उच्च शिक्षणात, महिला, अनुसूचित जाती-जमातीच्या लोकांचा सहभाग वाढला असून त्याचेच प्रतिबिंब या अहवालात पडल्याचे दिसते, असे पोखरीयाल यांनी सांगितले. 

या अहवालात काढण्यात आलेले निष्कर्ष, पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी उच्चशिक्षण क्षेत्रात लागू केलेली धोरणे यशस्वी ठरल्याचेच निदर्शक आहे, असे शिक्षण राज्यमंत्री संजय धोत्रे यावेळी म्हणाले. या अहवालामुळे धोरणकर्त्यांना देशातील उच्च शिक्षणाची परिस्थिती आणखी सुधारण्यासाठी मदत होईल, अशी आशा त्यांनी व्यक्त केली. 

उच्चशिक्षण विभागाचे सचिव अमित खरे यांनी या अहवालाविषयी माहिती देतांना सांगितले की, हा उच्च शिक्षणविषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवाल (AISHE) दरवर्षी शिक्षण मंडळातर्फे प्रकाशित केला जात असून, यंदाचा हा दहावा अहवाल आहे. आपल्या राष्ट्रीय शिक्षण धोरण 2020 चाच भाग म्हणून, शिक्षणाची उपलब्धता सुधारणे, समानता आणि गुणवत्ता ही उद्दिष्टे साध्य करण्यासाठी विद्यार्थी पटसंख्येत आणि शैक्षणिक संस्थांमध्ये वाढ, लिंगभाव समानता या उपाययोजना केल्या जात आहेत, असे त्यांनी पुढे सांगितले.

उच्च शिक्षणविषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवाला 2019-20 ची(AISHE)ठळक वैशिष्ट्ये

1. वर्ष 2019-20 मध्ये उच्च शिक्षणात एकूण विद्यार्थी नोंदणी (पटसंख्या) 3.85 कोटी इतकी होती. वर्ष 2018-19 मध्ये ही संख्या 3.74 कोटी इतकी होती. म्हणजेच एकूण पटसंख्येत 11.36 लाखांची वाढ झाली आहे. वर्ष 2014-15 मध्ये एकूण पटसंख्या 3.42 कोटी इतकी होती
2. सकल नोंदणी गुणोत्तर, म्हणजेच पात्र वयोगटातील एकूण मुलांपैकी उच्च शिक्षणासाठी नोंदणी केलेल्या विद्यार्थ्यांचे प्रमाण, वर्ष 2019-20 मध्ये 27.1% इतके होते. वर्ष 2018-19 मध्ये ते 26.3% आणि 2014-2015 मध्ये 24.3% इतके होते.

3. उच्च शिक्षणातील लैंगिक समानता निर्देशांक वर्ष 2019-20 मध्ये 1.01 होता,वर्ष 2018-19 मध्ये तो 1.00 होता. यात झालेली सुधारणा, उच्च शिक्षण क्षेत्रात पुरुष विद्यार्थ्यांच्या तुलनेत महिलांचे प्रमाण वाढल्याचे निदर्शक आहे.

4. उच्च शिक्षणात वर्ष 2019-20 मध्ये विद्यार्थी-शिक्षक गुणोत्तर 26 इतके आहे.

5. वर्ष 2019-20: विद्यापीठे: 1,043 (2%); महाविद्यालये: 42,343(77%) आणि स्वतंत्र संस्था, : 11,779(21%).


6. 3.38 कोटी विद्यार्थ्यांनी पदवीपूर्व आणि पदव्युत्तर अभ्यासक्रमांसाठी नोंदणी केली आहे. यापैकी, सुमारे 85% विद्यार्थी (2.85 कोटी) यांनी सहा महत्वाच्या विद्याशाखा, जसे की मानव्यशास्त्रे, विज्ञान, वाणिज्य, अभियांत्रिकी आणि तंत्रज्ञान, वैद्यकीय शिक्षण आणि माहिती तंत्रज्ञान-कॉम्पुटर अशा अभ्यासक्रमांसाठी नोंदणी केली आहे.

7. वर्ष 2019-20 मध्ये पीएचडी अध्ययन करण्यासाठी 2.03 लाख विद्यार्थ्यांनी नोंदणी केली आहे, वर्ष 2014-15 ही संख्या 1.17 लाख इतकी होती.

8. देशात उच्च शिक्षणक्षेत्रातल्या एकूण शिक्षकांची संख्या 15,03,156 इतकी असून त्यात 57.5% पुरुष आणि 42.5% महिला आहेत.

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खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश बघेल सरकार ने दुर्ग की आम जनता के परिवहन साधन… “शहरी बस सेवा” दुर्ग को अनियमितताओं के हवाले कर दिया और आम जनता को सस्ती व सुगम बस सेवा का लाभ लेने से वंचित कर दिया जिसके बाद जनता ने भूपेश बघेल सरकार को सत्ताविहीन कर दिया…

देवेंद्र यादव ने गड़बड़ियां का संरक्षण किया भिलाई के पूर्व महापौर और विधायक देवेंद्र यादव दुर्ग को सार्वजनिक सेवा की प्रशासकीय कार्यवाही में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की परिणाम स्वरूप दुर्ग जिले की बस सेवा अनियमितताओं के हवाले हो गई और दुर्ग जिले की जनता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित हो गई । क्यों जरूरी है बस सेवा ? शहरी बस सेवा: लोक कल्याण की सेवा है  शहरी बस सेवा, शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो नागरिकों को किफायती, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा प्रदान करती है। यह निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करने और शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आम जनता के परिवहन का सबसे सस्ता और सुगम साधन होती है । प्रमुख विशेषताएं: विविधता:  शहरी बसें विभिन्न आकारों और क्षमताओं में उपलब्ध हैं, जो विभिन्न शहरों और यात्री भार की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। कुछ छोटी और अधिक चपल होती हैं, जो संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर ढंग से संचालित होती हैं, जबकि अन्य बड़ी और जोड़दा...

उत्पन्नाचे विवरणपत्र सादर करण्याची मुदत 31 ऑक्टोबर 2021 ऐवजी आता 30 नोव्हेंबर 2021 पर्यंत वाढविण्यात आली आहे;

Ministry of Finance कोविड-19 साथीची दुष्कर परिस्थिती लक्षात घेत सरकारने काही बाबतींत दिली मुदतवाढ Posted Date:- May 20, 2021 नवी दिल्‍ली, 20 मे 2021   कोविड-19 साथीच्या दुष्कर परिस्थितीमुळे विविध भागीदारांना भेडसावणाऱ्या अडचणींवर तोडगा काढण्यासाठी सरकार वचनबद्ध आहे. त्याच प्रयत्नांचा एक भाग म्हणून, विविध भागीदारांकडून आलेल्या विनंत्यांचा विचार करून, 'प्राप्तिकर कायदा,1961' (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर कायदा/ हा कायदा असा असेल) याअंतर्गतच्या अनुपालनासाठीची मुदत पुढील काही बाबतींत वाढवून देण्याचा निर्णय सरकारने घेतला आहे--: ‘प्राप्तिकर नियम,1962’ (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर नियम / हे नियम असा असेल) यातील नियम 114E अंतर्गत आणि संबंधित विविध अधिसूचनांच्या अधीन राहून  31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'वित्तीय वर्ष 2020-21 साठी SFT म्हणजे 'वित्तीय व्यवहार निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरता येईल; सदर नियम 114G अंतर्गत 31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'कॅलेंडर वर्ष 2020 साठी नोंदण्यायोग्य खात्याचे निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा...

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान आरंभ किया

  भारत में तम्बाकू के उपयोग से बहुत से रोग पैदा होते हैं और इसके इस्तेमाल से व्यक्ति मृत्यु की कगार तक पहुंच सकता है। देश में हर साल लगभग 1.35 मिलियन मौतें तम्बाकू के कारण होती हैं। भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक भी है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस) 2019 के अनुसार , देश भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत स्कूली छात्र विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते पाये गये हैं। हमारे स्कूल भवनों और परिसरों के आसपास तम्बाकू उत्पादों की विभिन्न रूपों में आसान पहुँच को उपरोक्त स्थिति पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीटीपी) के अंग के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नाबालिगों और युवाओं को तम्बाकू के सेवन से बचाने के लिए शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू रहित बनाने के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान" दिशानिर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूलों के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान कार्यान्वयन मैनुअल" विकसित किया है और...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने 'रंगीन मछली' ऐप लॉन्च किया, यह ऐप सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, जो शौकीनों, एक्वेरियम शॉप मालिकों और मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान संसाधन प्रदान करता है।

   केंद्रीय मत्स्यपालन , पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने आज भुवनेश्वर स्थित भाकृअनुप-केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान   संस्थान (भाकृअनुप-सीफा) में "रंगीन मछली" मोबाइल ऐप लॉन्च किया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के सहयोग से भाकृअनुप-सीफा द्वारा विकसित यह ऐप सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है , जो शौकीनों , एक्वेरियम शॉप मालिकों और मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान संसाधन प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में मत्स्यपालन , पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अपने संबोधन के दौरान श्री राजीव रंजन सिंह ने सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि मंत्रालय इसके विकास पर जोर दे रहा है , रोजगार पैदा करने और अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इस क्षेत्र की क्षमता को पहचान रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक्वेरियम के शौक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। "रंगीन मछली" ऐप आठ भारतीय भाषाओं में लोकप्रिय सजावटी मछ...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे.

काशिळ येथील कोविड रुग्णालयाचे पालकमंत्री बाळासाहेब पाटील यांच्या हस्ते उद्घाटन कराड व सातारा तालुक्यातील कोरोना रुग्णांना मिळणार चांगली आरोग्य सुविधा सातारा दि. ३ (जिमाका) : काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे. कराड व सातारा तसेच काशिळ परिसरातील नागरिकांना या रुग्णालयाचा लाभ होणार असून या रुग्णालयामार्फत कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत, असा विश्वास पालकमंत्री बाळसाहेब पाटील यांनी व्यक्त केला. काशिळ येथील कोविड रुगणालयाचे उद्घाटन पालकमंत्री श्री. पाटील यांच्या हस्ते आज झाले. यावेळी ते बोलत होते. या उद्घाटन प्रसंगी गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री शभूराज देसाई, खासदार श्रीनिवास पाटील, माजी मुख्यमंत्री तथा आमदार पृथ्वीराज चव्हाण, प्रभारी जिल्हाधिकारी रामचंद्र शिंदे, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौडा, प्रांताधिकारी मिनाज मुल्ला, तहसीलदार आशा होळकर, जिल्हा शल्यचिकित्सक डॉ. सुभाष चव्हाण आदी उपस्थित होते. या कोविड रुग्णालयात 32 आयसीयु बेड व 31 ऑक्सिजन बेड असे एकूण 63 बेड आहेत. यामधील सुरुवातीला 32 ऑक्सिज...

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