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वर्ष 2019-20 साठीच्या उच्चशिक्षण विषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवालाला,

उच्च शिक्षणविषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवाल (AISHE) 2019-20 ला केंद्रीय शिक्षणमंत्र्यांची मंजुरी

केंद्र सरकारने सातत्याने उच्च शिक्षणाला दिलेल्या महत्वाचे अहवालात प्रतिबिंब

विद्यार्थी पटसंख्येत 2015-16 पासून 2019-20 पर्यंतच्या काळात 11.4% ची वाढ

उच्च शिक्षणात 2015-16 पासून 2019-20 पर्यंतच्या काळात मुलींच्या पटसंख्येत 18.2% ची वाढ

वर्ष 2019-20 मध्ये उच्च शिक्षणात सकल नोंदणी गुणोत्तर (GER) 27.1%

Posted Date:- Jun 10, 2021
नवी दिल्‍ली, 10 जून 2021

वर्ष 2019-20 साठीच्या उच्चशिक्षण विषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवालाला, आज केंद्रीय शिक्षणमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ यांनी मंजुरी दिली आहे. या अहवालात देशातील उच्चशिक्षणाच्या सद्यस्थितीविषयी माहिती असून, महत्वाच्या क्षेत्रांमधील कामगिरीचा ठळक उल्लेख करण्यात आला आहे.

I feel delighted to announce the release of the All India Survey on Higher Education 2019-20 report. As you can see, we have improved in GER, Gender parity Index. The number of Institutions of National importance increased 80% (from 75 in 2015 to 135 in 2020). (1/2) pic.twitter.com/ISpGansJFM

— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) June 10, 2021
 

2015-16 ते 2019-20 या पाच वर्षांच्या काळात, विद्यार्थी पटसंख्येत (नोंदणीत) 11.4% ची वाढ झाली. याच काळात उच्चशिक्षणात मुलींच्या पटसंख्येत 18.2% ची वाढ झाली आहे, असे पोखरीयाल यांनी सांगितले. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या नेतृत्वाखालील सरकार उच्च शिक्षणावर सातत्याने भर देत असून, त्यातही मुली, महिलांचे शिक्षण तसेच सामाजिक दृष्ट्या मागास वर्गांच्या सक्षमीकरणाकडे विशेष लक्ष देत आहे. सरकारच्या विविध उपायांमुळेच,उच्च शिक्षणात, महिला, अनुसूचित जाती-जमातीच्या लोकांचा सहभाग वाढला असून त्याचेच प्रतिबिंब या अहवालात पडल्याचे दिसते, असे पोखरीयाल यांनी सांगितले. 

या अहवालात काढण्यात आलेले निष्कर्ष, पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी उच्चशिक्षण क्षेत्रात लागू केलेली धोरणे यशस्वी ठरल्याचेच निदर्शक आहे, असे शिक्षण राज्यमंत्री संजय धोत्रे यावेळी म्हणाले. या अहवालामुळे धोरणकर्त्यांना देशातील उच्च शिक्षणाची परिस्थिती आणखी सुधारण्यासाठी मदत होईल, अशी आशा त्यांनी व्यक्त केली. 

उच्चशिक्षण विभागाचे सचिव अमित खरे यांनी या अहवालाविषयी माहिती देतांना सांगितले की, हा उच्च शिक्षणविषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवाल (AISHE) दरवर्षी शिक्षण मंडळातर्फे प्रकाशित केला जात असून, यंदाचा हा दहावा अहवाल आहे. आपल्या राष्ट्रीय शिक्षण धोरण 2020 चाच भाग म्हणून, शिक्षणाची उपलब्धता सुधारणे, समानता आणि गुणवत्ता ही उद्दिष्टे साध्य करण्यासाठी विद्यार्थी पटसंख्येत आणि शैक्षणिक संस्थांमध्ये वाढ, लिंगभाव समानता या उपाययोजना केल्या जात आहेत, असे त्यांनी पुढे सांगितले.

उच्च शिक्षणविषयक अखिल भारतीय सर्वेक्षण अहवाला 2019-20 ची(AISHE)ठळक वैशिष्ट्ये

1. वर्ष 2019-20 मध्ये उच्च शिक्षणात एकूण विद्यार्थी नोंदणी (पटसंख्या) 3.85 कोटी इतकी होती. वर्ष 2018-19 मध्ये ही संख्या 3.74 कोटी इतकी होती. म्हणजेच एकूण पटसंख्येत 11.36 लाखांची वाढ झाली आहे. वर्ष 2014-15 मध्ये एकूण पटसंख्या 3.42 कोटी इतकी होती
2. सकल नोंदणी गुणोत्तर, म्हणजेच पात्र वयोगटातील एकूण मुलांपैकी उच्च शिक्षणासाठी नोंदणी केलेल्या विद्यार्थ्यांचे प्रमाण, वर्ष 2019-20 मध्ये 27.1% इतके होते. वर्ष 2018-19 मध्ये ते 26.3% आणि 2014-2015 मध्ये 24.3% इतके होते.

3. उच्च शिक्षणातील लैंगिक समानता निर्देशांक वर्ष 2019-20 मध्ये 1.01 होता,वर्ष 2018-19 मध्ये तो 1.00 होता. यात झालेली सुधारणा, उच्च शिक्षण क्षेत्रात पुरुष विद्यार्थ्यांच्या तुलनेत महिलांचे प्रमाण वाढल्याचे निदर्शक आहे.

4. उच्च शिक्षणात वर्ष 2019-20 मध्ये विद्यार्थी-शिक्षक गुणोत्तर 26 इतके आहे.

5. वर्ष 2019-20: विद्यापीठे: 1,043 (2%); महाविद्यालये: 42,343(77%) आणि स्वतंत्र संस्था, : 11,779(21%).


6. 3.38 कोटी विद्यार्थ्यांनी पदवीपूर्व आणि पदव्युत्तर अभ्यासक्रमांसाठी नोंदणी केली आहे. यापैकी, सुमारे 85% विद्यार्थी (2.85 कोटी) यांनी सहा महत्वाच्या विद्याशाखा, जसे की मानव्यशास्त्रे, विज्ञान, वाणिज्य, अभियांत्रिकी आणि तंत्रज्ञान, वैद्यकीय शिक्षण आणि माहिती तंत्रज्ञान-कॉम्पुटर अशा अभ्यासक्रमांसाठी नोंदणी केली आहे.

7. वर्ष 2019-20 मध्ये पीएचडी अध्ययन करण्यासाठी 2.03 लाख विद्यार्थ्यांनी नोंदणी केली आहे, वर्ष 2014-15 ही संख्या 1.17 लाख इतकी होती.

8. देशात उच्च शिक्षणक्षेत्रातल्या एकूण शिक्षकांची संख्या 15,03,156 इतकी असून त्यात 57.5% पुरुष आणि 42.5% महिला आहेत.

संपूर्ण अहवाल वाचण्यासाठी खाली क्लिक करा :

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पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

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फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

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लोक स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले अनियमित चिकित्सा व्यवसाई ग्रामीण और शहरी दोनो ही जगह… अपनी दुकान चला रहें है लेकिन जन जागरूक के आभाव में इनके विरुद्ध शासन कानूनी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है… इसलिए यह लेख जन जागरूकता लाने का एक प्रयास है… झोलाछाप डॉक्टरों को पहचानना और उनसे बचना बेहद ज़रूरी है। ये लोग न केवल आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं बल्कि आपकी जान को भी खतरे में डाल सकते हैं। झोलाछाप डॉक्टरों की कुछ खास पहचान: अयोग्यता का दावा: ये लोग अक्सर असाध्य बीमारियों का भी इलाज करने का दावा करते हैं, जो किसी योग्य डॉक्टर के लिए भी मुश्किल हो सकता है। गुप्त स्थान: ये लोग अक्सर घरों, छोटी दुकानों या ऐसी जगहों पर अपना क्लीनिक चलाते हैं जहां कोई मेडिकल सुविधाएं नहीं होतीं। सस्ते इलाज का लालच: ये लोग आमतौर पर अन्य डॉक्टरों की तुलना में बहुत कम पैसे में इलाज करने का झांसा देते हैं। आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञता: ये लोग आधुनिक मेडिकल उपकरणों और तकनीकों से अनजान होते हैं। अनावश्यक दवाएं: ये लोग अक्सर मरीजों को अनावश्यक दवाएं देते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

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कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

जीवन का सशक्तिकरण: नमस्ते योजना स्वच्छता कर्मचारियों के लिए ठोस बदलाव ला रही ह

राष्ट्रीय यांत्रिक स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य योजना (नमस्ते) ने देश भर में सफाईकर्मियों के सम्मान , सुरक्षा और स्थायी आजीविका को प्रोत्साहन देने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह योजना सफाईकर्मियों के सम्मान , सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वित्त वर्ष 2023-24 में शुरू होने के बाद से , इस पहल ने लक्षित हस्तक्षेपों , सामुदायिक भागीदारी और खतरनाक मैनुअल सफाई प्रथाओं को समाप्त करने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से विशेष असर दिखाया है। कुल 90,942 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों का प्रोफाइल तैयार किया गया है , जिनमें से 89,248 का सत्यापन हो चुका है। 87,037 कर्मचारियों को पीपीई किट उपलब्ध कराई गई हैं , जबकि 76,247 कर्मचारियों को कई स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अंतर्गत कवर किया गया है। 983 सफाई कर्मचारियों को 364 वाहन खरीदने के लिए ₹ 34.17 करोड़ की अग्रिम पूंजी सब्सिडी जारी की गई है। इसके साथ ही , देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरना...

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