छत्तीसगढ़ की समाज सेविका निशा देशमुख कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न निवारण का प्रभावी व्यवस्था तंत्र स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रही है..... इस विशाल लोकहित की गतिविधि के तहत कामकाजी महिलाओं को लैंगिक उत्पीड़न मुक्त कामकाजी वातावरण दिलवाने के लिए निशा देशमुख ने केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क करके.... कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करवाने के लिए एक नोटिस सूचना पत्र भेजा था और आवश्यक विधि अपेक्षित कार्यवाही प्रक्रिया में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा महिलाओं को संरक्षण देने वाले विधि निर्देशों को महत्व दिए जाने के लिए पत्र व्यवहार किया था.... इस पत्र व्यवहार पर भारत सरकार के विधि मंत्रालय ने संज्ञान लेकर भारत के सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल, को महिलाओं के कार्यस्थल पर लौगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन कार्यवाही सुनिश्चित करवाने हेतु प्रार्थना पत्र जारी किया है : पढ़िए क्या है पूरा मामला क्योंकि निशा देशमुख के प्रयासों के कारण महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भारत में बड़ा बदलाव आने वाला है
दिनांक: 05 मई, 2023 सभी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन कार्यवाही सुनिश्चित करवाने हेतु श्री अमरजीत सरोआ अवर सचिव, भारत सरकार विधि एवं न्याय मंत्रलाय न्याय विभाग जैसलमेर हाउस ने प्रार्थना पत्र प्रेषित किया है और निवेदन किया है कि, माननीय महिला एवं बाल विकास मंत्री को संबोधित समाज सेविका श्रीमति निशा देशमुख, निवासी 134/ G रिसाली सेक्टर, जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़ के द्वारा दिनांक 15.04.2023 के प्रार्थना पत्र का संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, उल्लेखनीय है कि, विधि मंत्रालय के पत्र की यह विषयवस्तु स्पष्ट करती है निशा देशमुख जैसे दृढ़ निश्चियी महिला के पहल पर विधि मंत्रालय भारत के सभी उच्च न्यायालयों को विधि निर्देश के अनुपालन का संदेश दे सकता है और महिला सुरक्षा के मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर संज्ञान लेकर उच्च न्यायालयों को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कर्तव्यबद्ध कर सकता है l पढ़िए महिला सुरक्षा के मामले में क्या कहता है विधि एवं न्याय मंत्रालय का पत्र 👇🏾
महिलाओं के कार्यस्थल का वातावरण मानसिक दबाव मुक्त बनाने के लिए और लैंगिक उत्पीड़न मुक्त बनाने के लिए निशा देशमुख विगत वर्षों से बौद्धिक लड़ाई लड़ रही है इस लड़ाई में निशा देशमुख ने छोटे बड़े सभी कार्यक्षेत्र में गरिमापूर्ण कामकाजी वातावरण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य को लक्षित करके सभी कार्यक्षेत्र को अपने अभियान में समाहित कर लिया है उल्लेखनीय हैं कि, उच्च न्यायालय भी इस अभियानीय लक्ष्य का एक हिस्सा है परिणाम स्वरूप उच्च न्यायालय परिसर भी अब जवाबदेही की भूमिका में है क्योंकि विधि मंत्रालय ने महिला सुरक्षा के मामले को गंभीरता से लेकर कार्यवाही करते हुए उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार से जानकारी मांगी गई है गौरतलब रहे कि, केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा इस तरह से भारत के सभी उच्च न्यायालयों से जानकारी मांगे जाने का अर्थ है की अब सभी कार्यस्थलों के नियोक्ताओं को आंतरिक शिकायत समिति के गठन और नियमित कार्यवाही की जानकारी अपने कार्यस्थल पर कार्यरत लोगो से साझा करना पड़ेगा और कर्तव्यनिष्ठा के साथ गरिमापूर्ण कामकाजी वातावरण बनाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी क्योंकि अब उच्च न्यायायालयों के द्वारा अपने कार्यस्थल की जानकारी दिए जाने के बाद निश्चित तौर पर इस बात पर दो मत नहीं होगा कि कोई भी नियोक्ता अब शिकायत समिति के विषय में अनिवार्यतः की जाने वाली कार्यवाही के मामले में गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार नहीं कर सकेगा इसलिए अब महिलाओं को गरिमापूर्ण कामकजी वातावरण मिलने की संभावना बढ़ गई है जिसके लिए समाज सेविका निशा देशमुख की पहल एक मिसाल बन गई है
समाज सेविका निशा देशमुख ने बताया की वह महिलाओं की समस्याओं को लेकर हमेशा सजग और सक्रिय योगदान देती है इसलिए महिलाएं उनसे अपनी समस्याओं को साझा करती है ऐसी ही एक व्यथित महिला ने न्यायालय परिसर में घटित व्यथनिय अनुभव साझा किया जिसके बाद निशा देशमुख ने न्यायालय परिसर से लैंगिक उत्पीड़न समूल हटाने को पहल की और केंद्रीय विधि मंत्रालय से पत्र व्यवहार किया जिस पर विधि मंत्रालय ने संज्ञान लिया और उच्च न्यायालय को विधि निर्देशित कार्यवाही करने विषय कर कार्यनवित हुए निशा देशमुख ने कहा कि कोई भी महिला उनसे संपर्क करके अपनी परेशानी बता सकती है और निशा देशमुख उन महिलाओं का विशेष तौर पर सहयोग करना चाहतीं है जो महिला संरक्षण के क्षेत्र में आगे आकर कार्य करना चाहती है और कामकाजी महिलाओं का संरक्षण कर अपना सामाजिक योगदान देना चाहती है l
संपर्क करें l समाज सेविका श्रीमति निशा देशमुख, निवासी 134/ G रिसाली सेक्टर, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ । मो : 88399 26823
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आलेख: अमोल मालुसरे
समाजसेवक और राजनैतिक विश्लेषक