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बीएसपी लिज मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है क्योंकि भिलाई के महापौर और अन्य लोक सेवकों को नोटिस भेजकर... बीएसपी लिज मामले में जवाब तालाब करने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है पढ़िए क्या है पूरा मामला 👇

भिलाई इस्पात संयंत्र के लिज मामले में लोकसेवकों के विधि विपरित कार्य व्यवहार के विरूद्ध समाज सेवक मदन सेन व अन्य दो ने भिलाई के महापौर व अन्य लोकसेवकों को नोटिस दी है । यह नोटिस द.प्र.स 195 की विधि विहित प्रक्रिया में आरोप-प्रत्यारोप कार्यवाही करने के पूर्व लिज मामले की वस्तुस्थिति जानने हेतु दी गई है… नोटिस पाने वाले महत्वपूर्ण प्राधिकारी यें हैं :-

  1. श्रीमान महापौर, नगर पालिक निगम भिलाई

  2. श्रीमान कलेक्टर जिला दुर्ग 

  3. श्रीमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भिलाई इस्पात संयंत्र 

  4. श्रीमान पंजीयक जिला दुर्ग

  5. श्रीमान आयुक्त, नगर पालिक निगम भिलाई

  6. श्रीमान आयुक्त, नगर पालिक निगम रिसाली 

भिलाई इस्पात संयंत्र के आवासीय और व्यवसायिक प्रयोजन के भवनों की लीज आबंटन कार्यवाही से संबंधित सभी शासकीय महत्व के सभी निर्णय / आदेश / निर्देश /  दस्तावेजों तक सर्व साधारण की पहुंच स्थापित करने बाबत सक्षम प्राधिकारी व लोक सेवकों के संज्ञानार्थ विषय पर नोटिस प्रेषित की गई है ।

नोटिस प्राप्त करने वाले लोकसेवकों की जानकारी में नोटिस कर्ताओं ने यह लाया है कि, विगत कई वर्षों से भिलाई इस्पात संयंत्र के आवासीय और व्यवसायिक प्रयोजन के भवनों को बीएसपी कर्मियों व गैर बीएसपी कर्मियों को व्यक्तिगत उपयोग के लिए, लीजधारी के उपयोग प्रयोजन हेतु निर्णायक अधिकारों के साथ हस्तांतरित किया गया है और इस हस्तांतरण कार्यवाही को लीज डीड / अभिलेख के तौर पर लिजधारी और बीएसपी प्रबंधन के मद्य एक अनुबंध अभिलेख भी हस्ताक्षरित किया गया है लेकिन बीएसपी प्रबंधन और जन सामान्य के मध्य जो द्विपक्षीय लिखित व हस्ताक्षरित लीज अनुबंध किया गया है ।

इस अनुबंध की विधि मान्यता पर विधिक प्रकाश डालने वाले अग्रलीखित तथ्यों तक इस नोटिस शीर्ष में उक्त उल्लेखित, "आप सभी प्राधिकृत महोदयगण ने" जन सामान्य की पहुंच स्थापित करने का पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया है जो की निम्नलिखित है :-

  1. बीएसपी प्रबंधन के किस प्राधिकारी ने किस प्राधिकृत प्राधिकार का प्रयोग करके लीज अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं यह जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले शासकीय आदेश / निर्देश प्रदान करे तथा जन सामान्य की जानकारी में लाने का पदेन कर्तव्य करने का कष्ट करें l

  2. बीएसपी प्रबंधन के जिस प्राधिकारी ने लीज अनुबंध पर हस्ताक्षर किए है और उसने जिस आदेश / निर्देश से प्राधिकार प्राप्त कर बीएसपी के लीज धारकों के लीज अनुबंध पर हस्ताक्षर किए है उस प्रदत प्राधिकार के विधि मान्यता को प्रमाणित करने वाले आदेश / निर्देश प्रदान करें ?

  3. बीएसपी प्रबंधन ने लीज अनुबंध को विधि मान्यता दिलवाने और विधि सम्मत प्रामाणिकता दिलवाने के लिए किन-किन आदेशों / निर्देशों का "अनुपालन सुनिश्चित करने की कार्यवाहियां",   निर्धारित किए जाने बाबत जारी किए गए आदेश / निर्देश की छायाप्रति प्रदान करें ?

  4. जिला प्रशासन दुर्ग को केंद्र सरकार, केंद्रीय इस्पात मंत्रालय और केंद्रीय विधि एवं विधाई मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा बीएसपी लीज अनुबंध कार्यवाही को सुनिश्चित करवाने बाबत दिए आदेशों / निर्देशों की छायाप्रति प्रदान करें ?

  5. छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, राजस्व विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और भू-अभिलेख विभाग इन पांचों विभागों ने जिला प्रशासन दुर्ग को बीएसपी लीज अनुबंध को पंजीबद्ध करने हेतु निर्देशित विधि मान्य अनुबंध प्रक्रिया की सुनिश्चितता कार्यवाही करने हेतु जो आदेश / निर्देश जारी किए है उन आदेशों की छायाप्रति प्रदान करें ?

  6. बीएसपी के आवासीय और व्यवसायिक प्रयोजन के भूखंडों व भवनों के आबंटन हेतु बीएसपी प्रबंधन और लीजधारी के मध्य किए गए अनुबंध अभिलेख पर नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जाने वाली नगरपालिक कार्यवाहियों के लिए निगम आम सभा और एमआईसी बैठकों में लिए गए निर्णयों के मिनट्स और लेखबद्ध कार्यवाहियों के नोटशीटों की छायाप्रति प्रदान करें l

  7. जिला पंजीयक कार्यालय दुर्ग को बीएसपी के आवासीय और व्यवसायिक प्रयोजन के भूखंडों व भवनों के आबंटन हेतु बीएसपी प्रबंधन और लीजधारी के मध्य किए गए अनुबंध अभिलेख को पंजीकृत करने बाबत शासन और प्रशासन द्वारा दिए गए आदेश / निर्देश की छायाप्रति प्रदान करेंl 

नोटिस से आरोप लगाया गया है कि, उक्त उल्लेखित सातों प्रकार के आदेशों / निर्देशों के अभाव में बीएसपी के आवासीय और व्यवसायिक प्रयोजन के भूखंडों व भवनों के आबंटन हेतु बीएसपी प्रबंधन और लीजधारी के मध्य किए गए अनुबंध अभिलेख पंजीकृत किए जाने की विधि मान्य कार्यवाही की जानकारी के आभाव में अपनी विधि अपेक्षित पंजीकृत स्थिति हासिल नहीं कर पा रहे हैं जिसका फायदा ऐसे तत्वों को हो रहा है जो लीज धारियों को भ्रमति व गुमराह करने का कार्य व्यवहार कर केंद्र और राज्य शासन की गरिमापूर्ण छवि को धूमिल कर रहे हैं l गौर तलब रहें कि, इस अप्रिय विषम विधिक परिस्थिति के कारण विगत कई वर्षों से लीजधारी मानसिक और आर्थिक दोनो ही दृष्टिकोण से प्रताड़ित हो रहे हैं इसलिए उक्त बिंदु 1 से 7 में उल्लेखित शासकीय दस्तावेजों तक सर्व साधारण की पहुंच स्थापित किया जाना आवश्यक है अतः कृपया इस नोटिस प्राप्ति के सात कार्य दिवस में उक्त बिंदु 1 से 7 में उल्लेखित शासकीय दस्तावेजों तक सर्वसाधारण की पहुंच स्थापित करने का पदेन कर्तव्य विधि निर्देशानुसार कार्यान्वित करने का कष्ट करें l

नोटिस कर्ता को आशा है कि, नोटिस पाने वाले लोकसेवकों विशाल लोकहित को संरक्षित करने वाले उक्त उल्लेखित बिंदु 1 से 7 में उल्लेखित शासकीय दस्तावेजों तक जन साधारण की पहुंच इस नोटिस प्राप्ति के 7 कार्यदिवास में स्थापित करवाकर नोटिसकर्ता को लोकहित संरक्षण के लिए सक्षम न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर नहीं करेंगे l

समाज सेवक मदन सेन के द्वारा नोटिस देकर जिन शासकीय दस्तावजों की जानकारी मांगी गई है वह जानकारी बीएसपी लिज धारियों के हित संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक है क्योंकि इन शासकीय आदेशों, निर्देशों और दस्तावेजों के आभाव में भिलाई महापौर मनघड़ंत विषयों को हवा देने को सफल होते रहें है लेकिन जैसे ही इस नोटिस से अभिकथित जानकारी जन सामान्य के जानकारी में आयेगी भ्रमित करने वाले सारे तत्व स्वमेव लिज धारियों को स्पष्ट हो जायेंगे ।
भिलाई की जनता को कई महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज करवाने की व्यवस्था भिलाई के महापौर ने नहीं की थी जिसके कारण भिलाई इस्पात संयंत्र के लिज धारकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है पढ़िए इस लिंक पर है पूरी जानकारी 👇👇👇👇 

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पद्मा पुरस्कार 2026 की घोषणा

पद्मा पुरस्कार 2026 की घोषणा पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं , जो तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं: पद्म विभूषण , पद्म भूषण और पद्म श्री। ये पुरस्कार कला , सामाजिक कार्य , सार्वजनिक मामलों , विज्ञान और इंजीनियरिंग , व्यापार और उद्योग , चिकित्सा , साहित्य और शिक्षा , खेल , सिविल सेवा आदि विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाते हैं। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए , पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोहों में प्रदान किए जाते हैं , जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष मार्च/अप्रैल के आसपास होते हैं। वर्ष 2026 के लिए , राष्ट्रपति ने 131 पद्म पुरस्कारों के प्रदान करने की स्वीकृति दी है , जिनमें 2 युगल पुरस्कार (युगल पुरस्कार को एक ही माना जाता है) शामिल हैं , जैसा कि नीचे दी गई सूची में है। इस सूची में 5 पद्म विभूषण , 13 पद्म भूषण और 113 प...

पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ

पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ ·         ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने हेतु 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी ·         महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में निर्बाध ट्रांजिशन सुनिश्चित किया जाएगा ·         रोजगार , आजीविका और ग्रामीण परिवर्तन को गति देने हेतु ₹ 95,692 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन ·         मौजूदा जॉब कार्ड मान्य रहेंगे , पहले से चल रहे कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए , भारत सरकार ने 11 मई 2026 को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [ VB–G RAM G] अधिनियम , 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्...

रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 एवं 2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा

·         सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 पूर्वी एवं मध्य भारत में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा , ·         डेयरी सहकारी संस्थाएँ महिलाओं को गृहिणी से उद्यमी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण वित्तीय इकोसिस्टम को सशक्त कर रही हैं तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा दे रही हैं , सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की वैश्विक ऊर्जा असंतुलन एवं ऊर्जा संकट के दौर में सहकारी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी एवं सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल भारत को आत्मनिर्भर एवं सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाएंगे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना , प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों एवं किसान-के...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

आंतरिक शिकायत समिति का महत्व... आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। पढ़िए कैसे यह समिति महिलाओं का संरक्षण करती है....

सुरक्षित और दबावपूर्ण कामकाजी वातावरण को... कानून के दायरे में लाकर गरिमापूर्ण बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा.... आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. जागरूकता फैलाना: आईसीसी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता फैलाने का काम करती है। यह कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न के बारे में शिक्षित करती है और उन्हें इस बारे में जानकारी प्रदान करती है कि यदि वे उत्पीड़न का शिकार होते हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए। 5. कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाना: आईसीसी क...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा

  भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा हाइड्रोजन रेल का आगमन भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई 2026 को उद्घाटन के साथ , हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा। यह उत्तर रेलवे के जींद - सोनीपत खंड पर चलेगी। यह ट्रेन समर्पित हाइड्रोजन भंडारण , ईंधन भरने और परिचालन बुनियादी ढांचे के साथ उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकी से युक्त है। यह भारत में स्वच्छ रेल परिवहन की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करेगा। एक प्रायौगिक पहल के रूप में विकसित यह ट्रेन नवाचार के लिए भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार परिवहन ...

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