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2023 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की प्रमुख पहलें एवं उपलब्धियाँ, शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए श्रेष्ठ योजना के तहत सीबीएसई/राज्य बोर्डों से संबद्ध 142 निजी आवासीय विद्यालयों में 2564 अनुसूचित जाति के छात्रों को प्रवेश दिया गया

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के  लिए TAPAS लॉन्च किया

 प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 18,32,628 एससी छात्र लाभार्थियों के लिए 369.03 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई, एससी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 34,58,538 एससी लाभार्थियों के लिए 3546.34 करोड़ रुपये जारी किए गए

शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए श्रेष्ठ योजना के तहत सीबीएसई/राज्य बोर्डों से संबद्ध 142 निजी आवासीय विद्यालयों में 2564 अनुसूचित जाति के छात्रों को प्रवेश दिया गया
देश भर में 28 स्थानों पर आयोजित आरवीवाई शिविरों में लगभग 12562 वरिष्ठ नागरिकों को 9.05 करोड़ रुपये के सहायक उपकरण प्रदान किए गए
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत लगभग 10.74 करोड़ से अधिक लोगों को मादक द्रव्यों के सेवन के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया
पीएम-दक्ष योजना के कार्यान्वयन के लिए 28 सरकारी और 84 निजी प्रशिक्षण संस्थानों को पैनल में शामिल किया गया
247 विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण पाने के लिए 821 केंद्रों में 55,000 से अधिक आवेदकों ने पीएम-दक्ष पोर्टल पर आवेदन किया

वर्ष 2023 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा शुरू की गई प्रमुख पहलें और उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं -

अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए पहलें-

- अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना

क) उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति के छात्रों के सकल नामांकन अनुपात को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग सबसे गरीब परिवारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, केंद्र प्रायोजित योजनापोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति” को अनुसूचित जातियों के छात्रों के लिए भारत में पढ़ाई के लिए लागू कर रहा है।

- सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने अनुसूचित जाति के छात्रों और अन्य लोगों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की  जिसका उद्देश्य प्री-मैट्रिक चरण में पढ़ रहे अपने बच्चों की शिक्षा के लिए अनुसूचित जाति और अन्य वंचित श्रेणियों के बच्चों के माता-पिता को वित्तीय सहायता के माध्यम से समर्थन देना है।

योजनाओं के अंतर्गत उपलब्धियाँ:

वर्ष 2023 से अब तक (22.12.2023), अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 34,58,538 अनुसूचित जाति से जुड़े लाभार्थियों को 3546.34 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई है।

वर्ष 2023 से अब तक (22.12.2023) अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 18,32,628 लाभार्थियों को 369.03 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि छात्र को छात्रवृत्ति राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उसके आधार से जुड़े खाते में प्राप्त हो, आधार-आधारित भुगतान प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।

कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशो जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक ने न्यूनतम मैन्युअल हस्तक्षेप और बढ़ी हुई पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रमाणपत्रों के डिजिटलीकरण और पात्रता डेटा की ऑटो-फ़ेचिंग द्वारा आवेदनों की प्राप्ति और प्रोसेसिंग की प्रक्रिया को ऑटोमेटेड बना दिया है।

सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों जैसे असम, चंडीगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक और ओडिशा ने वर्ष 2022-23 के लिए पोस्ट मैट्रिक एससी योजना के तहत अपने वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले अधिक लाभार्थियों को कवर किया है।

प्री-मैट्रिक योजना के कंपोनेंट- II के तहत, जो उन बच्चों से संबंधित है जिनके माता-पिता सफाई और खतरनाक व्यवसायों में लगे हुए हैं, वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए भाग लेने वाले राज्यों की संख्या 2022 में एक से बढ़कर 2023 में नौ हो गई है।

) अनुसूचित जाति के लिए उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति के लिए यंग अचीवर्स स्कीम (श्रेयस)

विभाग ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक एससी/ओबीसी छात्रों (भारत और विदेश में) को पूरा करने के लिए विभाग की चार छोटी केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के संसाधनों को मिलाकर एक अंब्रेला स्कीम की परिकल्पना की है। अनुसूचित जाति के लिए उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति के लिए यंग अचीवर्स स्कीम (श्रेयस) बनाई जा रही है। यह केंद्र या राज्यों में  ग्रुप ए/ग्रुप बी सेवाओं में रोजगार प्राप्त करने वाले एससी/ओबीसी छात्रों के लिए भी लागू होगी। योजनाओं के निम्नलिखित घटक हैं -

अनुसूचित जाति के लिए शीर्ष श्रेणी की शिक्षा: 

इस विभाग द्वारा योजना के दिशानिर्देशों को संशोधित किया गया है और योजना के तहत 44 नए संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया है, जिससे संस्थानों की कुल संख्या 266 हो गई है। अब तक 3999 लाभार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान किया गया है।

अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना:

योजना के दिशानिर्देशों को इस विभाग द्वारा संशोधित किया गया है और वित्त वर्ष 2023-24 से यह योजना पैनल में शामिल केंद्रीय विश्वविद्यालयों के माध्यम से डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन (डीएएफ) द्वारा संचालित की जाएगी। जनवरी 2023 से अब तक 483 लाभार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान किया गया है।

अनुसूचित जाति के लिए राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति:

एनओएस योजना के तहत मास्टर्स और पीएच.जी के कोर्स की विदेश में पढ़ाई के लिए अनुसूचित जाति (115 स्लॉट) ; डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (6 स्थान); भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और पारंपरिक कारीगर श्रेणियों (4 स्लॉट) से चयनित छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वर्तमान में, योजना के तहत 125 स्लॉट आवंटित किए गए हैं। 2023-24 में अब तक 125 में से 107 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है।

iv. अनुसूचित जाति के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप:

योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालयों/संस्थानों/कॉलेजों से साइंस, ह्युमैनिटिज और सामाजिक विज्ञान स्ट्रीम्स में एम.फिल., पीएच.डी. की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में फेलोशिप प्रदान करना है।

एनएफएससी योजना के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालयों/संस्थानों/कॉलेजों में साइंस, ह्युमैनिटिज और सामाजिक विज्ञान में एम.फिल/पीएचडी डिग्री के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनुसूचित जाति के छात्रों को फेलोशिप प्रदान की जाती है। यह योजना राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। यह योजना प्रति वर्ष 2000 नए स्लॉट प्रदान करती है, जिन्होंने यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा-जूनियर रिसर्च फेलोशिप (एनईटी-जेआरएफ) और साइंस स्ट्रीम के लिए जूनियर रिसर्च फेलो को यूजीसी-काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (यूजीसी-सीएसआईआर) संयुक्त परीक्षा उत्तीर्ण की है। योजना के तहत दरों को संशोधित किया गया है जिसके तहत 01.01.2023 से जेआरएफ के लिए 37,000/- रुपए प्रति माह एसआरएफ के लिए  और 42,000/- रुपए प्रति माह दिए जा रहे हैं।

ग. श्रेष्ठ (लक्षित क्षेत्रों में उच्च शिक्षण विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा)

विभाग सरकार के विकासात्मक कार्यक्रमों की पहुंच को और आगे बढ़ाने तथा लाभकारी प्रयासों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में सेवा की कमी वाले अनुसूचित जाति के अधिक सांख्य बल के इलाकों में शैक्षिक अंतर को भरने के उद्देश्य से लक्षित गांवों, कस्बों एवं जिलों में उच्च शिक्षण विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्ठ) को लागू कर रहा है। इस विभाग का लक्ष्य शिक्षा के क्षेत्र में अनुदान प्राप्त संस्थानों (एनजीओ द्वारा संचालित) और आवासीय उच्च विद्यालयों के प्रयासों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना तथा अनुसूचित जातियों (एससी) के सामाजिक आर्थिक उत्थान एवं समग्र विकास के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है।

यह योजना दो तरीकों से कार्यान्वित की जा रही है। पहले मोड में, प्रत्येक वर्ष राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों की एक निर्दिष्ट संख्या (3000) को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आवासीय योजना के लिए आयोजित राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा- श्रेष्ठ (एनईटीएस) के माध्यम से चुना जाता है और इसके बाद उन्हें कक्षा 9वीं एवं 11वीं कक्षा में सीबीएसई तथा राज्य बोर्डों से संबद्ध सर्वश्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाता है। दूसरे मोड में, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा क्षेत्र से संबंधित विद्यालय/छात्रावास परियोजनाओं को चलाने के उद्देश्य से गैर सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना मुख्य तौर पर 3 प्रकार की परियोजनाओं को कवर करती है, जिनमें (i) आवासीय विद्यालय (ii) गैर-आवासीय विद्यालय और (iii) प्राथमिक व माध्यमिक विद्यार्थियों के लिए छात्रावास शामिल हैं।

योजना के अंतर्गत प्राप्त की गई उपलब्धियां:

इस योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए सीबीएसई व राज्य बोर्डों से संबद्ध 142 निजी आवासीय विद्यालयों में कुल 2564 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया और इनके लिए विद्यालय शुल्क के रूप में 30.55 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति इस विभाग द्वारा ही की जाती है।

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान जारी निधि और लाभार्थियों की संख्या का विवरण इस प्रकार है:

(Rs. In Lakh)

Sr. No.

2023-24

Total

Total No of Students

Amount

released

1

Amount Released to

No. of

Fund

No. of

2023-24

Private

Students

released to

Students

 

Residential

 

NGOs/VOs

 

 

Schools

 

(Mode -2)

 

 

(Mode-1)

 

 

 

 

 

4921.28

4134*

236.11

3409

5157.39

7543

 

*(दिनांक 10.12.2023 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार)

मोड-1 में 2023-24 के दौरान 2564 विद्यार्थियों का चयन किया गया और 2022-23 तथा 2021-2022 के दौरान चयनित 1570 विद्यार्थियों को आगे बढ़ाया गया।

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय)

विभाग ने प्रधानमंत्री अनुसुचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत केंद्र द्वारा प्रायोजित 03 पूर्ववर्ती योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए से एससीएसपी) और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई) का विशेष केंद्रीय सहायता देने हेतु विलय कर दिया है। मुख्य रूप से कौशल विकास, आय सृजन वाली योजनाओं और अन्य गतिविधियों के माध्यम से अतिरिक्त रोजगार के अवसर उत्पन्न करके अनुसूचित जाति के समुदायों की निर्धनता को कम करने के उद्देश्य के साथ इस पहल का लक्ष्य अनुसूचित जाति की अधिक संख्या वाले गांवों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे व अपेक्षित सेवाओं को सुनिश्चित करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना है। योजना में अब निम्नलिखित तीन घटक हैं:

I. अनुसूचित जाति के अधिक संख्या बल वाले गांवों को 'आदर्श ग्राम' के रूप में विकसित करना

अनुसूचित जाति की सामाजिक व आर्थिक तरक्की के उद्देश्य से जिला एवं राज्य-स्तरीय परियोजनाओं के लिए सहायता अनुदान

उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रावासों का निर्माण

योजना के अंतर्गत हासिल की गई उपलब्धियां:

सहायता अनुदान घटक: 1 जनवरी, 2023 से कुल 3132 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है और इनसे 1,14,722 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। इस अवधि के दौरान, राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को कुल 117.54 करोड़ रुपये की निधि जारी की गई है।

'छात्रावास' घटक: 1 जनवरी, 2023 से लड़कियों के 20 छात्रावास और लड़कों के 10 छात्रावास के निर्माण के लिए 56.04 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

'आदर्श ग्राम' घटक: 1 जनवरी, 2023 से कुल 1786 ग्राम विकास योजनाएं (वीपीडी) तैयार की गई हैं और 1899 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कुल 106.01 करोड़ रुपये का कोष जारी किया गया है।

नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989:

नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को साल 2023 में इन अधिनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए 496 करोड़ रुपये (लगभग) की केंद्रीय सहायता राशि जारी की गई है।

इस योजना के तहत वर्ष 2023 में अत्याचार का शिकार हुए लगभग 92093 पीड़ितों एवं आश्रितों को राहत प्रदान की गई है।

योजना के तहत वर्ष 2023 में लगभग 20000 अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई गई है।

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अस्पृश्यता एवं अत्याचार के अपराधों को रोकने के तरीकों और उपायों को सुनिश्चित करने तथा पीसीआर अधिनियम, 1955 व पीओए अधिनियम, 1989 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए गठित समिति की बैठक 21.11.2023 को माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस दौरान, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पीसीआर अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (पीओए) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई थी।

2. पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए पहल

पीएम-यशस्वी

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजातियों (डीएनटी/एस-एनटी) के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं को कारगर बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसका नाम है पीएम-यशस्वी रखा गया है। इसके लक्ष्यों को पाने के लिए पांच उप-योजनाओं के एक साथ लाया गया है, जिससे समय पर आवश्यक धनराशि का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की डॉ. आंबेडकर योजना और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए प्री-मैट्रिक तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की डॉ. आंबेडकर योजना को 2021-22 से पीएम यशस्वी की प्रमुख योजना में शामिल कर दिया गया है।

I. ओबीसी/ईबीसी और डीएनटी लड़कों एवं लड़कियों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति

ओबीसी/ईबीसी एवं डीएनटी बालकों तथा बालिकाओं हेतु पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति

ओबीसी छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों का निर्माण

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों की सहायता के उद्देश्य से कॉलेज में शीर्ष श्रेणी की शिक्षा की केंद्रीयकृत क्षेत्र की योजना

V. ओबीसी, ईबीसी तथा डीएनटी विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में शीर्ष श्रेणी की शिक्षा की केंद्रीयकृत योजना

श्रेयस

ओबीसी और ईबीसी विद्यार्थियों के शिक्षा सशक्तिकरण विभाग ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने में फेलोशिप (वित्तीय सहायता) और विदेशों में अध्ययन के उद्देश्य से शैक्षिक ऋण पर ब्याज सब्सिडी प्रदान करके, यंग अचीवर्स योजना- श्रेयस के लिए उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति को घटकों के रूप में चल रही दो केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के साथ लागू कर दिया है।

I. ओबीसी विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप

ओबीसी और ईबीसी को विदेशों में अध्ययन के उद्देश्य से शिक्षा ऋण पर डॉ. आंबेडकर केंद्रीय क्षेत्र योजना सहायता प्रदान कर रही है।

पीएम-यशस्वी और श्रेयस की उपलब्धियां:

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत 01.01.2023 से 22.12.2023 तक 383.24 लाख रूपये जारी किए गए हैं और वर्ष 2022-23 के लिए लाभार्थियों की संख्या 21.727 लाख है और वर्ष 2023-24 के लिए लाभार्थियों को आगामी वर्ष के प्रस्ताव के साथ प्रदान किया जाएगा।

 

 

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत 01.01.2023 से 22.12.2023 तक 1064.26 लाख रूपये जारी किए गए हैं और वर्ष 2022-23 के लिए लाभार्थियों की संख्या 25.55 लाख है और वर्ष 2023-24 के लिए लाभार्थियों को आगामी वर्ष के प्रस्ताव के साथ प्रदान किया जाएगा।

ओबीसी लड़कों और लड़कियों के लिए निर्माणाधीन छात्रावासों के लिए वर्ष 2022-23 के लिए 1800 सीटों और वर्ष 2023-24 के लिए 496 सीटों के लिए 01.01.2023 से 22.12.2023 तक 21.6365 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए स्कूलों में उच्‍च श्रेणी की शिक्षा की केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत 1291 छात्रों के लिए 01.01.2023 से 22.12.2023 तक 1.891 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

ओबीसी/ईबीसी छात्रों के लिए विदेशी अध्ययन के लिए डॉ. अंबेडकर ब्याज सब्सिडी योजना के तहत वर्ष 2022-23 में 1570 छात्रों के लिए 48.09 लाख रूपये जारी किए गए हैं।

ओबीसी छात्रों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप के तहत 2734 लाभार्थियों के लिए 56.38 लाख रुपये जारी किए गए हैं (31 दिसंबर 2022 तक)।

3. सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए पहल

(एच). यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना (एनएएमएएसटीई)

मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए स्व-रोजगार योजना (एसआरएमएस) को वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान एक नए नामकरण यानी नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इको-सिस्टम (एनएएमएएसटीई) के साथ संशोधित किया गया है। एनएएमएएसटीई सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई) और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) की एक संयुक्त पहल है और एनएसकेएफडीसी कार्यान्वयन एजेंसी है।

एनएएमएएसटीई योजना का प्राथमिक लक्ष्य जोखिमपूर्ण सफाई कार्यो और सीधे मानव मल को हटाने वाले सीवर और सेप्टिक टैंको में कार्य करने वाले स्वच्छता कार्यकर्ता हैं। मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए एनएएमएएसटीई योजना चलाई जा रही हैं।

एनएएमएएसटीई योजना की उपलब्धियां

सीवर और सेप्टिक वर्कर की प्रोफाइलिंग के लिए एनएएमएएसटीई मोबाइल ऐप पर ऑनलाइन प्रशिक्षण 27 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया गए हैं।

एसएसडब्ल्यू की पहचान के लिए दिसंबर महीने में दिल्ली और चंडीगढ़ में प्रोफाइलिंग शिविर शुरू हुए हैं।

1306 उम्मीदवारों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू हो गया है

79 मैला ढोने वालों/आश्रितों के लिए स्व-रोजगार परियोजनाओं हेतु पूंजीगत सब्सिडी के रूप में 0.85 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

स्वच्छता संबंधी परियोजनाओं के लिए 84 लाभार्थियों के लिए 3.21 करोड़ रुपये पूंजीगत सब्सिडी के रूप में जारी किए गए हैं। इसके अलावा पूर्व वर्ष की 16 परियोजनाओं के लिए 0.51 करोड़ रुपये जारी किए गए जो सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) में व्‍यवधान के कारण जारी नहीं किए जा सके।

सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान जोखिमपूर्ण स्थिति की रोकथाम पर विभिन्न शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) में 307 कार्यशालाएँ आयोजित की गई हैं

4. वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पहल

(आई). अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई)

यह विभाग वृद्ध लोगों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीओपी) योजना के घटक के तहत विभाग आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करता है और सरकारी/गैर-सरकारी संगठनों/पंचायती की क्षमता निर्माण के लिए सहायता प्रदान करके उत्पादक और सक्रिय उम्र बढ़ने को प्रोत्साहित करता है। योजना के तहत पंचायती राज संस्थाओं/स्थानीय निकायों और पात्र गैर-सरकारी स्वैच्छिक संगठनों को सहायता दी जाएगी।

(जे). राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई)- यह योजना आयु संबंधी विकलांगताओं/दुर्बलताओं से पीड़ित बीपीएल वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए वर्ष 2017 में शुरू की गई। सहायक उपकरणों का  निःशुल्क वितरण किया गया।

एवीवाईवाई और आरवीवाई की उपलब्धियां

09 अगस्त, 2023 को वित्त सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नागरिक कल्याण निधि (एससीडब्ल्यूएफ) से वित्त पोषित की जाने वाली योजनाओं की ईएफसी की बैठक में वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 के लिए 979.85 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान किया गया। 

09 अगस्त, 2023 को आयोजित बैठक में अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई)-सीएस के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देशों को ईएफसी की सिफारिशों के अनुरूप वरिष्ठ नागरिक कल्याण निधि (एससीडब्ल्यूएफ) से वित्त पोषित किए जाने वाले घटकों के संबंध में संशोधित किया गया था।

एल्डरलाइन योजना के संबंध में: वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन, प्रस्तावों के लिए अनुरोध (आरएफपी) प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है।

24.09.2023 को राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) के तहत 28 स्थानों पर वितरण शिविर आयोजित किए गए, जिसमें 12562 (लगभग) वरिष्ठ नागरिकों को 9.05 करोड़ रुपये की राशि के सहायक उपकरण प्रदान किए गए हैं।

वृद्धावस्था देखभालकर्ताओं के प्रशिक्षण की योजना के तहत प्रशिक्षण भागीदारों/प्रशिक्षण संस्थानों के आवेदन दिनांक 20.10.2023 तक आमंत्रित किये गये थे। इन आवेदनों की जांच की गई है और राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (एनआईएसडी) और क्षेत्रीय त्वरित परिवहन प्रणाली (आरआरटीसी) सहित 36 प्रशिक्षण भागीदारों और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए कार्य आदेश के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर कार्रवाई की गई है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीएसआरसी) के तहत पिछले 2 वित्तीय वर्षों के दौरान, कुल 88 नए वृद्धाश्रम शामिल किए गए।

राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों और नियमित मासिक बैठकों से राज्य सरकारों की भागीदारी बढ़ी है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना (एसएपीएसआरसी) के तहत विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी ने कुल 76.95 करोड़ रुपये की सिफारिश की है।

5. नशीली पदार्थो पर रोकथाम के लिए पहल

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नशीले पदार्थो की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) शुरू की है, जो एक व्यापक योजना है जिसके तहत (i) 'राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासनों को निवारक शिक्षा और जागरूकता के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और पहले से नशे के आदी लोगों के लिए आजीविका सहयोग, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों आदि के लिए नशीलें पदार्थो की मांग में कमी के लिए  कार्यक्रम और (ii) नशे के आदी लोगों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) को चलाने और इसके रखरखाव के लिए गैर सरकारी संगठन/स्‍वैच्छिक संगठनकिशोरों में प्रारंभिक नशीलें पदार्थो के उपयोग की रोकथाम के लिए समुदाय आधारित सहकर्मी नेतृत्व हस्तक्षेप (सीपीएलआई), आउटरीच और ड्रॉप इन सेंटर (ओडीआईसी), जिला-नशा मुक्ति केंद्र (डीडीएसी); और (iii) सरकारी अस्पतालों में व्यसन उपचार सुविधाएं (एटीएफ)।

मंत्रालय ने देश भर के सभी जिलों में युवाओं में मादक द्रव्यों के सेवन के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूकता के उद्देश्य से नशा मुक्त भारत अभियान की पहल की है।

नशीली पदार्थो की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) की उपलब्धियां

मंत्रालय ने वर्ष 2023 के दौरान एनएपीडीडीआर योजना के तहत एनजीओ/वीओ/एसएपी को 95.97 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।

उक्त अवधि के दौरान, 310 संगठनों को धनराशि स्वीकृत की गई है और योजना के तहत कुल 740616 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है।

मंत्रालय ने वर्ष के दौरान देश भर के जीएपी जिलों में 47 डीडीएसी (जिला नशामुक्ति केंद्र) की स्थापना को मंजूरी दी है।

वर्ष के दौरान 25 नशा उपचार सुविधा (एटीएफ) केंद्र राष्ट्र को समर्पित किये।

भारत की अध्यक्षता में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के दौरान नशीले पदार्थो की मांग में कमी के लिए विशेषज्ञ कार्य समूह की बैठक 7.4.2023 को आयोजित की गई। सभी सदस्य देशों ने ज़ूम प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बैठक में भाग लिया।

मादक पदर्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत उपलब्धियां

मंत्रालय ने कैलेंडर वर्ष 2023 के दौरान मादक पदर्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अनतर्गत एनजीओ/वीओ/एसएपी को 95.97 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।

उक्त अवधि के दौरान, 310 संगठनों को धनराशि स्वीकृत की गई है और योजना के अंतर्गत कुल 740616 लाभार्थियों को लाभ प्राप्त हुआ है।

मंत्रालय ने वर्ष के दौरान देश भर के जीएपी जिलों में 47 डीडीएसी (जिला नशा मुक्ति केंद्र) की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है।

वर्ष के दौरान 25 एटीएफ राष्ट्र को समर्पित किये गये।

भारत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अध्यक्षता में मादक पदार्थों की मांग में कमी पर विशेषज्ञ कार्य समूह की बैठक 7.4.2023 को आयोजित की गई। सभी सदस्य देशों ने ज़ूम प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बैठक में भाग लिया।

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की उपलब्धियां

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के शुभारंभ के बाद से और अब तक, जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से, 10.74 करोड़ से अधिक लोगों को मादक द्रव्यों के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया है, जिसमें 3.38 करोड़ से अधिक युवा और 2.27 करोड़ से अधिक महिलाएं शामिल हैं।

3.28 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि अभियान का संदेश देश के बच्चों और युवाओं तक पहुंचे।

8,000 से अधिक मास्टर स्वयंसेवकों (एमवी) की एक मजबूत सेना की पहचान की गई है और उसे प्रशिक्षित किया गया है।

ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अभियान के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों के माध्यम से जागरूकता।

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) मोबाइल एप्लिकेशन को नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए)  गतिविधियों का डेटा इकट्ठा करने और जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) डैशबोर्ड पर प्रस्तुत करने के लिए विकसित किया गया है।

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की वेबसाइट (http://namba.dosje.gov.in) उपयोगकर्ता/दर्शक को अभियान, एक ऑनलाइन चर्चा मंच, नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) डैशबोर्ड, ई-प्रतिज्ञा के बारे में विस्तृत जानकारी और अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

6.   ट्रांसजेंडरों और भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों का कल्याण

आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए सहायता (मुस्कान)

i.   भिक्षावृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास

विभाग ने संशोधित योजना दिशानिर्देशों को स्वीकृति दे दी है (23.10.2023)

विभाग ने 30 शहरों/स्थानों की पहचान कर सहमति, कार्ययोजना एवं अन्य दस्तावेज प्राप्त किये

सभी 30 शहरों के नोडल अधिकारियों के साथ ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

25 शहरों ने योजना को लागू करने के लिए अपनी सहमति प्रस्तुत की।

कार्यान्वयन एजेंसियों को पहली किस्त के रूप में सीएनए (एनआईएसडी) को 5.00 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

ii.  ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास 

7.   प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष)

एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना, प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना, वर्ष 2020-21 के दौरान शुरू की गई थी। योजना का मुख्य उद्देश्य लक्षित समूहों (अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछडा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछडा वर्ग (ईबीसी), डीएनटी, कचरा बीनने वाले सफाई कर्मचारी आदि) के योग्यता स्तर को बढ़ाना है ताकि उन्हें उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए स्व-रोजगार और मजदूरी-रोजगार दोनों में रोजगार योग्य बनाया जा सके।

योजना के अंतर्गत उपलब्धि:

वर्ष 2023-24 के दौरान, 28 सरकारी और 84 निजी प्रशिक्षण संस्थानों को योजना के कार्यान्वयन के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इन 112 सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों के बीच 95000 से अधिक प्रशिक्षु लक्ष्य वितरित किए गए हैं।

वार्षिक आधार पर संस्थानों को सूचीबद्ध करने की प्रथा को बंद कर दिया गया है और अब संस्थानों को संतोषजनक भौतिक और वित्तीय प्रगति और योजना के कार्यान्वयन से संबंधित किसी भी कदाचार में संबंधित संस्थानों की गैर-लिप्तता के अधीन न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।

पहली बार, राज्यों, जिलों, नौकरी की भूमिकाओं आदि को आवंटित करते समय एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके कारण 82 आकांक्षी जिलों सहित 411 जिलों को कार्यान्वयन के लिए शामिल किया गया है।

इसके अलावा, इन प्रशिक्षण संस्थानों को नवीनतम कार्य भूमिकाएँ आवंटित की गई हैं।

मौजूदा 38 प्रशिक्षण क्षेत्रों में से 32 क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिससे इच्छुक प्रशिक्षु उम्मीदवारों के लिए प्रशिक्षण के अवसरों में विविधता आने की संभावना है और उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

247 विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण चाहने वाले 821 केंद्रों के लिए 55,000 से अधिक आवेदक पहले ही पीएम-दक्ष पोर्टल पर आवेदन कर चुके हैं।

इन 55,000 से अधिक आवेदकों में से 37,000 से अधिक आवेदक महिलाएं हैं जो प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य समूहों में से एक हैं।

प्रशिक्षण के लिए 574 बैच पहले ही गठित किए जा चुके हैं और वे प्रशिक्षण शुरू करने के लिए तैयार हैं।

सभी स्वीकृत केंद्रों पर दिसंबर, 2023 में ही प्रशिक्षण शुरू होने की संभावना है।

***

एमजी/एआर/पीके/एन/पीकेए/आर(रिलीज़ आईडी: 1991986) 



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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

भारत का चीनी उद्योग

सेक्टर, वैल्यू चेन और हाल ही में मूल्य वृद्धि के कारणों का विश्लेषण भारत का चीनी उद्योग: एक नज़र में भारत का चीनी उद्योग कृषि , उद्योग और ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा इकोसिस्टम है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। गन्ना सेक्टर लगभग 5 करोड़ किसानों और चीनी मिलों व उनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले करीब  5 लाख श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार , वर्ष 2025-26 में भारत का गन्ना उत्पादन 500 एमएमटी तक पहुँच गया है। वर्ष 2015-16 में 348.44 एमएमटी उत्पादन की तुलना में , यह पिछले 10 वर्षों में लगभग 43.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। गन्ने की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल भी 2015-16 के 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भारत के शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य हैं। भारत ने 2016-17 के 0.47 लाख एमटी की तुलना में , 2025-26 में 8 लाख एमटी चीनी का निर्यात किया। सरकार...

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

नीति आयोग की पहल ई-फास्ट इंडिया के तहत भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई के लिए पीएसीटी की शुरुआत

पीएसीटी देश भर में माल ढुलाई इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क स्थापित करके बड़े पैमाने पर शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए व्यावसायिक आधार को मजबूत करेगा। 5 वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन में व्यापार , वित्तपोषण और चार्जिंग साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए जेडईटी मार्केटप्लेस की भी शुरुआत की गई। नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने आज 5 वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में पीएसीटी का शुभारंभ किया। यह शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी उमाशंकर , एमएचआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हनीफ कुरैशी , नीति आयोग की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की कार्यक्रम निदेशक सुश्री अर्चना मित्तल , डब्ल्यूआरआई के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक श्री पवन मुलुकुटला और उद्योग , वित्त और माल ढुलाई क्षेत्र से जुड़े लगभग 250 प्रतिभागी उपस्थित थे। ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म की एक प्रमुख पहल , पीएसीटी को शिपर्स , लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता और अन्य इकोसिस्टम हितधारकों से माल ढुलाई की मांग और चिन्हित माल ढुलाई कॉरिडोर में श...

डॉ. मांडविया ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ​​के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की

·         आधुनिक , प्रौद्योगिकी वाले ईपीएफओ ​कार्यालय से नागरिक देश भर में किसी भी रीजनल ऑफिस में ईपीएफ से जुड़ी कोई भी समस्या हल कर सकेंगे ·         अधिकृत ईपीएफ सुविधा प्रदाता सुविधा देने वाले के तौर पर काम करेंगे , लाभ पाने और समस्याओं को हल करने में सदस्यों का मार्गदर्शन करेंगे ·         एक्सेस की समस्याओं के कारण निष्क्रिय खातों में कर्मचारियों के फंसे पैसे वापस करने के लिए मिशन-मोड केवाईसी अभियान शुरू किया जाएगा ·         भारत के मुक्त व्यापार समझौते में सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के प्रावधान शामिल होंगे , जिससे विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भारत लौटने के बाद भी लाभ पा सकेंगे ·         मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सोशल सिक्योरिटी नेट के तहत लाया जाएगा: डॉ. मांडविया   केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात के वटवा में ईपीएफओ ​​के नवनिर्मित भविष्य निधि भवन का उद्घाटन कि...

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) का अवधि विस्तार 01.07.2026 से 30.06.2027 तक स्वीकृत किया है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं: ·         लाभार्थी व्यक्ति को बेरोज़गारी से ठीक पहले निरन्तर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए और बेरोज़गारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए। ·         बेरोज़गारी कदाचार ( misconduct), लॉकआउट , सुपरअन्यूसिएशन (सेवानिवृत्ति) , या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 की व्यवस्था के तहत गलत बयान देने पर दोषी सिद्ध होने के कारण नहीं होनी चाहिए। ·         योजना के तहत दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं ; इनमें दावों का ऑनलाइन सबमिशन और प्रोसेसिंग , लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ( DBT), और लाभों के समय पर भुगतान सुन...

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजाति के बच्चों को उनके सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना को लागू कर रहा है।   एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दर बढ़ाने के लिए , ब्रिज कोर्स , सुधारात्मक कक्षाएं एवं अकादमिक मार्गदर्शन जैसी कई पहलें शुरू की गई हैं। इनका उद्देश्य अध्यन की कमियों को दूर करना और कक्षाओं में सुचारू रूप से आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना है। उच्च शिक्षा एवं करियर विकल्पों की स्पष्टता प्रदान करने के लिए करियर परामर्श सत्र आयोजित किए जाते हैं। कक्षा 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से नीट/जेईई की तैयारी जैसे विशेष कोचिंग उपलब्ध कराए जाते हैं। सीएसआर के अंतर्गत , आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए तीन उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं , जो मध्य प्रदेश के भोपाल , आंध्र प्रदेश के चिंतपल्ले...

हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने का संकल्प, उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़े का आगाज, राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़ा शुरू

राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरक विभाग में , 1 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा- 2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त सचिव श्री अनुराग रोहतगी के मार्गदर्शन में किया गया , जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री अनुराग रोहतगी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़े की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं , बल्कि देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी कार्मिकों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग राजभाषा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है , इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी क्रम में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अधिक...

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