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वन क्षेत्र में वृद्धि,पिछले पांच वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य को ग्रीन इंडिया मिशन के तहत जारी धनराशि का विवरण इस प्रकार है

 world earth day news effect of jal jeevan hariyali abhiyan visible forest  area of bihar increased by one percent in two years - विश्व पृथ्वी दिवस:  दिखने लगा जल जीवन हरियाली अभियान

वन क्षेत्र में वृद्धि

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक संगठन भारतीय वन सर्वेक्षण (फारेस्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया -एफएसआई), देहरादूनद्विवार्षिक रूप से वन आवरण का मूल्यांकन करता है और निष्कर्ष भारत राज्य वन रिपोर्ट (आईएसएफआर) में प्रकाशित किए जाते हैं। आईएसएफआर 2017 और आईएसएफआर 2021 के बीच देश के वन क्षेत्र में 5516 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। आईएसएफआर 2017 और आईएसएफआर 2021 के बीच छत्तीसगढ़ राज्य सहित वन क्षेत्र में परिवर्तन का राज्य / केंद्रशासित प्रदेशवार विवरण अनुबंध-I में दिया गया है।

मंत्रालय द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना, अर्थात् हरित भारत मिशन (ग्रीन इंडिया मिशन) के माध्यम से वनीकरण गतिविधियों को चलाने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन किया जाता  है। मंत्रालय की इस प्रमुख वनीकरण योजना का उद्देश्य लोगों की भागीदारी के साथ निम्नीकृत वन क्षेत्रों में वनीकरण गतिविधियाँ शुरू करना है। यह योजना वनीकरण और वृक्षारोपण, ख़राब वन परिदृश्यों की बहाली, मिट्टी की नमी संरक्षण गतिविधियों सहित आवास सुधार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देती है।  

पिछले पांच वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य को ग्रीन इंडिया मिशन के तहत जारी धनराशि का विवरण इस प्रकार है:

वर्ष

हरित भारत मिशन (ग्रीन इंडिया मिशन) के अंतर्गत जारी धनराशि (करोड़ रूपये में) 

2018-19

5.36

2019-20

5.04

2020-21

1.66

2021-22

6.12

2022-23

शून्य

2023-24

शून्य

कुल योग

18.18

 प्रतिपूरक वनरोपण निधि अधिनियम, 2016 के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार प्रतिपूरक वनरोपण निधि के तहत वनीकरण गतिविधियाँ भी प्रमुख रूप से की जाती हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य की प्रतिपूरक  वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कम्पेंसेटरी एफॉरेस्टेशान फंडमैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी –कैम्प सीएएमपीए ) निधि के अंतर्गत  गतिविधियाँ शुरू करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अनुमोदित वार्षिक संचालन योजना (एपीओ) इस प्रकार है:

वर्ष

राज्य कैम्पा के अंतर्गत एपीओ में स्वीकृत राशि (करोड़ रूपये में)

2018-19

897.52

2019-20

848.51

2020-21

1347.02

2021-22

1500.75

2022-23

688.47

2023-24

471.31

 मंत्रालय नगर वन योजना भी लागू कर रहा है जिसमें 2020-21 से 2026-27 की अवधि के दौरान देश में 600 नगर वैन और 400 नगर वाटिका के निर्माण की परिकल्पना की गई है। नगर वन योजना का उद्देश्य शहरी और उप-शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ाना और जैविक विविधता को बढ़ाना है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, राष्ट्रीय बांस मिशन, कृषि वानिकी पर उप-मिशन आदि जैसे संबंधित मंत्रालयों के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के तहत और विभिन्न विभागों, गैर-राज्य सरकारों / केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों की योजनाओं के तहत भी वनीकरण गतिविधियां शुरू की जाती हैं। सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी, कॉर्पोरेट निकाय आदि बहुविभागीय प्रयासों से देश में वन आवरण के संरक्षण और वृद्धि में अच्छे परिणाम मिले हैं।

अनुबंध- I

(क्षेत्रफल वर्ग किलोमीटर में)

क्रम सं.

 राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश  

भौगोलिक  क्षेत्र

वन क्षेत्र

आईएसएफआर 2017 और आईएसएफआर 2021 के बीच वन क्षेत्र में बदलाव (बी-ए)

आईएसएफआर 2017 (ए)

आईएसएफआर 2021 (बी)

1

आंध्र प्रदेश

1,62,968

28,147

29,784

1,637

2

अरुणाचल प्रदेश

83,743

66,964

66,431

-533

3

असम

78,438

28,105

28,312

207

4

बिहार

94,163

7,299

7,381

82

5

छत्तीसगढ

1,35,192

55,547

55,717

170

6

दिल्ली

1,483

192.41

195.00

2.59

7

गोवा

3,702

2,229

2,244

15

8

गुजरात

1,96,244

14,757

14,926

169

9

हरयाणा

44,212

1,588

1,603

15

10

हिमाचल प्रदेश

55,673

15,100

15,443

343

11

झारखंड

79,716

23,553

23,721

168

12

कर्नाटक

1,91,791

37,550

38,730

1,180

13

केरल

38,852

20,321

20,321

932

14

मध्य प्रदेश

3,08,252

77,414

77,493

79

15

महाराष्ट्र

3,07,713

50,682

50,798

116

16

मणिपुर

22,327

17,346

16,598

-748

17

मेघालय

22,429

17,146

17,046

-100

18

मिजोरम

21,081

18,186

17,820

-366

19

नगालैंड

16,579

12,489

12,251

-238

20

ओडिशा

1,55,707

51,345

52,156

811

21

पंजाब

50,362

1,837

1,847

10

22

राजस्थान

3,42,239

16,572

16,655

83

23

सिक्किम

7,096

3,344

3,341

-3

24

तमिलनाडु

1,30,060

26,281

26,419

138

25

तेलंगाना

1,12,077

20,419

21,214

795

26

त्रिपुरा

10,486

7,726

7,722

-4

27

उत्तर प्रदेश

2,40,928

14,679

14,818

14,818

28

उत्तराखंड

53,483

24,295

24,305

10

29

पश्चिम बंगाल

88,752

16,847

16,832

-15

30

 

 

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

8,249

6,742

 

6,744

 

2

31

चंडीगढ़

114

21.56

22.88

1.32

32

 

दादरा एवं नगर हवेली

491

 

207

 

227.75

 

0.26

33

दमन और दीव

111

20.49

 

 

34

जम्मू एवं कश्मीर

2,22,236

23,241

21,387

-1,854

35

लद्दाख

0

2,272

2,272

 

36

लक्षद्वीप

30

27.10

27.10

0.00

37

पुदुचेरी

490

53.67

53.30

-0.37

कुल योग

 

32,87,469

7,08,273

7,13,789

5,516

 यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी है ।

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एमजी/एआर/आरपी/एसटी प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2024 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2002842) आगंतुक पटल : 85

जिन विषयों को खोज रहे हैं लोग

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

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आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

भारत का चीनी उद्योग

सेक्टर, वैल्यू चेन और हाल ही में मूल्य वृद्धि के कारणों का विश्लेषण भारत का चीनी उद्योग: एक नज़र में भारत का चीनी उद्योग कृषि , उद्योग और ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा इकोसिस्टम है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। गन्ना सेक्टर लगभग 5 करोड़ किसानों और चीनी मिलों व उनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले करीब  5 लाख श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार , वर्ष 2025-26 में भारत का गन्ना उत्पादन 500 एमएमटी तक पहुँच गया है। वर्ष 2015-16 में 348.44 एमएमटी उत्पादन की तुलना में , यह पिछले 10 वर्षों में लगभग 43.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। गन्ने की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल भी 2015-16 के 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भारत के शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य हैं। भारत ने 2016-17 के 0.47 लाख एमटी की तुलना में , 2025-26 में 8 लाख एमटी चीनी का निर्यात किया। सरकार...

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

नीति आयोग की पहल ई-फास्ट इंडिया के तहत भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई के लिए पीएसीटी की शुरुआत

पीएसीटी देश भर में माल ढुलाई इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क स्थापित करके बड़े पैमाने पर शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए व्यावसायिक आधार को मजबूत करेगा। 5 वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन में व्यापार , वित्तपोषण और चार्जिंग साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए जेडईटी मार्केटप्लेस की भी शुरुआत की गई। नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने आज 5 वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में पीएसीटी का शुभारंभ किया। यह शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी उमाशंकर , एमएचआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हनीफ कुरैशी , नीति आयोग की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की कार्यक्रम निदेशक सुश्री अर्चना मित्तल , डब्ल्यूआरआई के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक श्री पवन मुलुकुटला और उद्योग , वित्त और माल ढुलाई क्षेत्र से जुड़े लगभग 250 प्रतिभागी उपस्थित थे। ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म की एक प्रमुख पहल , पीएसीटी को शिपर्स , लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता और अन्य इकोसिस्टम हितधारकों से माल ढुलाई की मांग और चिन्हित माल ढुलाई कॉरिडोर में श...

डॉ. मांडविया ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ​​के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की

·         आधुनिक , प्रौद्योगिकी वाले ईपीएफओ ​कार्यालय से नागरिक देश भर में किसी भी रीजनल ऑफिस में ईपीएफ से जुड़ी कोई भी समस्या हल कर सकेंगे ·         अधिकृत ईपीएफ सुविधा प्रदाता सुविधा देने वाले के तौर पर काम करेंगे , लाभ पाने और समस्याओं को हल करने में सदस्यों का मार्गदर्शन करेंगे ·         एक्सेस की समस्याओं के कारण निष्क्रिय खातों में कर्मचारियों के फंसे पैसे वापस करने के लिए मिशन-मोड केवाईसी अभियान शुरू किया जाएगा ·         भारत के मुक्त व्यापार समझौते में सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के प्रावधान शामिल होंगे , जिससे विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भारत लौटने के बाद भी लाभ पा सकेंगे ·         मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सोशल सिक्योरिटी नेट के तहत लाया जाएगा: डॉ. मांडविया   केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात के वटवा में ईपीएफओ ​​के नवनिर्मित भविष्य निधि भवन का उद्घाटन कि...

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) का अवधि विस्तार 01.07.2026 से 30.06.2027 तक स्वीकृत किया है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं: ·         लाभार्थी व्यक्ति को बेरोज़गारी से ठीक पहले निरन्तर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए और बेरोज़गारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए। ·         बेरोज़गारी कदाचार ( misconduct), लॉकआउट , सुपरअन्यूसिएशन (सेवानिवृत्ति) , या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 की व्यवस्था के तहत गलत बयान देने पर दोषी सिद्ध होने के कारण नहीं होनी चाहिए। ·         योजना के तहत दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं ; इनमें दावों का ऑनलाइन सबमिशन और प्रोसेसिंग , लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ( DBT), और लाभों के समय पर भुगतान सुन...

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजाति के बच्चों को उनके सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना को लागू कर रहा है।   एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दर बढ़ाने के लिए , ब्रिज कोर्स , सुधारात्मक कक्षाएं एवं अकादमिक मार्गदर्शन जैसी कई पहलें शुरू की गई हैं। इनका उद्देश्य अध्यन की कमियों को दूर करना और कक्षाओं में सुचारू रूप से आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना है। उच्च शिक्षा एवं करियर विकल्पों की स्पष्टता प्रदान करने के लिए करियर परामर्श सत्र आयोजित किए जाते हैं। कक्षा 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से नीट/जेईई की तैयारी जैसे विशेष कोचिंग उपलब्ध कराए जाते हैं। सीएसआर के अंतर्गत , आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए तीन उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं , जो मध्य प्रदेश के भोपाल , आंध्र प्रदेश के चिंतपल्ले...

हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने का संकल्प, उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़े का आगाज, राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़ा शुरू

राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरक विभाग में , 1 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा- 2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त सचिव श्री अनुराग रोहतगी के मार्गदर्शन में किया गया , जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री अनुराग रोहतगी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़े की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं , बल्कि देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी कार्मिकों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग राजभाषा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है , इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी क्रम में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अधिक...

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