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पीएम-जनमन के अंतर्गत पिछले 3 महीनों में 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी; प्रधानमंत्री ने 15 जनवरी 2024 को पहली किस्त जारी की थी

 

25 दिसंबर 2023 से 100 से ज्यादा जिलों में डेटा संग्रह और सत्यापन को पूरा करने के लिए 10,000 से ज्यादा शिविरों का आयोजन किया गया, पिछले 4 महीनों में, 2 लाख से ज्यादा आधार कार्ड, 5 लाख आयुष्मान कार्ड, 50,000 जन धन खाते बनाए गए; वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) पट्टा प्राप्त करने वाले 5 लाख से ज्यादा जनजातीय परिवारों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हुआ, मिशन के अंतर्गत पहले घर का निर्माण 30 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ; बारां में 30 दिन में पहली सड़क बनकर तैयार हुई, आजादी के 75 वर्षों बाद मैसूर के जनजातीय गांव को मिला विद्युत कनेक्शन; एमएसडीसीएल ने 12 दिनों में महाराष्ट्र में 2,395 जनजातीय घरों में विद्युत की आपूर्ति की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को पीए जनमन योजना की शुरुआत की थी, जो 24,000 करोड़ रुपये के परियोजना परिव्यय के साथ तीन वर्षों के लिए है।  पिछले 3 महीनों में, 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है जिसे संलग्नक में देखा जा सकता है। इनमें से अधिकांश परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता, डीपीआर तैयार करने, संबंधित राज्य के विभागों की मंजूरी और संबंधित 9 मंत्रालयों के अनुमोदन की आवश्यकता थी। अधिकांश राज्यों में, बजट परिव्यय का केंद्रीय हिस्सा जारी किया गया है, आवास, पानी, सड़क, बिजली, दूरसंचार और बहुउद्देशीय केंद्रों से संबंधित परियोजनाओं में निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं। कई राज्यों में जनवरी 2024 में स्वीकृत एमएमयू और आंगनवाड़ी क्रियाशील हो चुके हैं और वनधन केंद्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू हो गए हैं।

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, मिशन न्याय महा अभियान है और 24,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय द्वारा समर्थित है और इसमें पात्र परिवारों और बस्तियों को निम्नलिखित लाभ प्रदान किए जाते हैं।

·        100 या उससे ज्यादा आबादी वाले गांव/बस्ती के लिए सड़क संपर्क

·        प्रत्येक बस्ती के लिए दूरसंचार संपर्क

·        स्थानीय रूप से पसंदीदा डिजाइन के अनुसार पक्का घर, जिसमें शौचालय और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था

·        कवर नहीं किए गए घरों के लिए ग्रिड द्वारा विद्युत और सौर उर्जा

·        स्कूल से जुड़े समर्पित छात्रावास और मोबाइल मेडिकल यूनिट की स्थापना करके शिक्षा एंवं स्वास्थ्य तक बेहतर पहुंच प्रदान करना, जहां स्वास्थ्य केंद्र नहीं है

·        व्यावसायिक शिक्षा/कौशल तक बेहतर पहुंच

राज्यों द्वारा गतिशक्ति पोर्टल पर विकसित मोबाइल एप्लिकेशन द्वारा 30,000 बस्तियों का डेटा एकत्रित किया गया है और बस्ती स्तर पर विभिन्न अवसंरचनात्मक गैप का अनुमान लगाने के लिए राज्य सरकारों / केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन / विभागों द्वारा बस्ती स्तर पर सर्वेक्षण किए गए हैं। डेटा संग्रह और सत्यापन पूरा करने के लिए 25 दिसंबर 2023 से 100 से ज्यादा जिलों में 10,000 से ज्यादा शिविर आयोजित किए गए हैं। बस्ती स्तर के सर्वेक्षण के माध्यम से पहचाने गए गैप पीएम जनमन से जुड़े सभी 9 मंत्रालयों के लिए शुरुआती बिंदु हैं। संबंधित मंत्रालय अपने राज्य विभाग के माध्यम से अंतराल का सत्यापन करने के बाद राज्यों से प्रस्ताव आमंत्रित कर रहे हैं और मंजूरी प्रदान कर रहे हैं। पिछले 4 महीनों में, 2 लाख से ज्यादा आधार, 5 लाख आयुष्मान कार्ड, 50,000 जन धन खाते जारी किए गए हैं। एफआरए पट्टा पाने वाले 5 लाख से ज्यादा जनजातीय परिवारों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हुआ है।

 आज की तारीख में स्वीकृत परियोजनाओं का मंत्रालय-वार ब्यौरा संलग्नक में दिया गया है।   

पिछले 3 महीनों में प्रधानमंत्री जनमन की प्रगति

मंत्रालय के नाम

गतिविधि

 

मिशन लक्ष्य (2023-

2026)

 

8 मार्च 2024

तक प्राप्त लक्ष्य

 

   

ग्रामीण विकास मंत्रालय

   

पक्के घरों का प्रावधान

   

4.90 लाख घर

   

1.7 लाख घरों को मंजूरी

   

संपर्क सड़क

8000 किमी सड़क

2800 किमी सड़क

जल शक्ति मंत्रालय

पाइप से पानी की आपूर्ति

कवर नहीं किए गए सभी घर

260506 एफएचटीसी प्रदान किए गए

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

मोबाइल चिकित्सा इकाई

1000 एमएमयू

300 एमएमयू

शिक्षा मंत्रालय

छात्रावासों का निर्माण और संचालन

500 छात्रावास

100 छात्रावास

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण और संचालन

2500

1050 आंगनवाड़ी केंद्र

जनजातीय कार्य मंत्रालय

वीडीवीके की स्थापना

500

502 वीडीवीके

बहुउद्देशीय केंद्र

1000

822 बहुउद्देशीय केंद्र

विद्युत मंत्रालय

अविद्युतीकृत एचएच का विद्युतीकरण

कवर नहीं किए गए सभी गांव/बस्ती

93712 एचएच

संचार मंत्रालय

मोबाइल टावरों की स्थापना

कवर नहीं किए गए सभी गांव/बस्ती

559 गांवों/बस्तियों का कवरेज

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय

नई सौर ऊर्जा योजना के अंतर्गत स्वीकृत परिवार

 

नई सौर ऊर्जा योजना के अंतर्गत 5067 घरों को मंजूरी प्रदान की गई

 

 

 

 

15 फरवरी 2024 भागचंद आदिवासी के जीवन के लिए एक यादगार दिन होगा, जो 15 नवंबर 2023 (जनजातीय गौरव दिवस) को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए पीएम जनमन के अंतर्गत बने पहले घर के मालिक बनें। घर का निर्माण एक महीने के रिकॉर्ड समय  पूरा हुआ, जिसकी पहली किस्त 50,000 रुपये 15 जनवरी 2024 को श्री मोदी द्वारा डीबीटी के माध्यम से जारी की गई थी। इसकी दूसरी और तीसरी किस्त 22 जनवरी और 26 जनवरी 2024 को जारी की गई थी। सहरिया समुदाय के दो अन्य सदस्य जिनका घर पक्का हुआ, उनमें ममता सहरिया और महेंद्र सिंह शिवपुरी के कालोधरा और डोंगर ग्राम पंचायत के निवासी हैं। मकान निर्माण के लिए 2.39 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। घरों में एक शौचालय, बरामदा और खुला क्षेत्र शामिल है।

शिवपुरी के जिलाधिकारी रवेन्द्र कुमार ने कहा कि सर्वेक्षण में पाया गया कि जिले में 33,088 पीवीटीजी परिवारों के पास कच्चे मकान हैं। आवास पोर्टल पर आधार से जुड़े बैंक खाते के साथ 26,368 मकानों का पंजीकरण किया गया है जिससे धन का सीधा हस्तांतरण किया जा सके। 11,712 घरों को मंजूरी प्रदान गई है और 10,549 लाभार्थियों को 50,000 रुपये की पहली किस्त जारी गई है, जिन्हें इस राशि के साथ प्लिंथ तक निर्माण कार्य पूरा करना आवश्यक है। 75,000 रुपये की दूसरी किस्त का भुगतान 5354 लाभार्थियों को किया गया है, जिन्होंने पहली किस्त का उपयोग कर लिया है और आवास पोर्टल पर अपने घर को जियो टैग किया है। उन्हें लिंटेल (चौखट) तक निर्माण कार्य पूरा करना आवश्यक है। 75,000 रुपये की तीसरी किस्त 237 लाभार्थियों को प्रदान गई है जो इस राशि के साथ पूरा घर बनाएंगे। शौचालय निर्माण और मनरेगा मजदूरी के लिए 39,000 रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की जाती है। 

  

घर आस-पास की बस्तियों में सैकड़ों अन्य निवासियों के लिए आकर्षण एवं प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो रिकॉर्ड अवधि में निर्मित घर को देखने के लिए ललायित हैं

शिवपुरी उन जिलों में से एक है जहां प्रधानमंत्री ने सहरिया जनजाति की श्रीमती ललिता आदिवासी और विद्या आदिवासी के साथ बातचीत की थी। शिवपुरी के जिलाधिकारी ने कहा कि ललिता और विद्या के निवास वाले दोनों मॉडल गांवों में कार्य प्रगति पर है और ग्रामीण अगले 5 माह में इसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहतन कर रहे हैं।

बारां राजस्थान का एकमात्र जिला है जहां सहरिया पीवीटीजी जनजाति निवास करती है, जिले के 8 ब्लॉकों में 149 ग्राम पंचायतों (324-राजस्व गांवों) में फैली 434 बस्तियों में 1,30,068 (33, 743 परिवार) की आबादी के साथ सहरिया पीवीटीजी जनजाति रहते हैं, जिलाधिकारियों के समन्वय से जनजाति कल्याण विभाग के माध्यम से राज्य द्वारा किए गए हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, किशनगंज और शाहबाद में इनकी सबसे बड़ी आबादी में है। बारां उन जिलों में से एक है जहां पीएम जनमन के अंतर्गत प्राप्त सभी मध्यवर्तनों में पर्याप्त प्रगति देखी गई है।

पक्के-घरों का प्रावधान: प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत जिले में 13275 पीएम-अवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 4200 आवासों का भूमि पूजन कर निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। 31 मार्च तक 1000 मकानों का निर्माण पूरा होने का अनुमान है।

जिलाधिकारी और स्थानीय विधायक द्वारा किए गए एक अनूठे पहल में, किशनगंज में स्वीकृत सभी घरों का भूमि पूजन 23 जनवरी 2024 को किया गया और 1341 लाभार्थियों को घर का निर्माण कैसे करवाएं, सामग्री की उपलब्धता और बाद की किस्तें प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

(पीएमएवाई घरों के लिए शिविरों में जिला प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण दिया गया)

(पंचायत एवं जिला प्राधिकारियों द्वारा प्रगति की नियमित समीक्षा)

शिवपुरी में ललिता और विद्या द्वारा दिखाए गए मॉडल गावों से प्रेरित होकर समुदाय जिले में तीन स्थानों पर कोयला सहाराना, बस्थुनी सहाराना और संधारी सहराना के नाम से आदर्श बस्ती 'सहरिया-सहराना बस्ती' स्थापित करने के लिए बहुत उत्साहित हैं जिसमें सहरिया लाभार्थियों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी जैसे पक्के मकान के साथ-साथ पक्की सड़कें, हर घर में नल जल, विद्युत एवं आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा आदि। बांरा के जिलाधिकारी ने इनमें से कुछ बस्तियों की तस्वीरें शेयर की हैं, जहां काम तेजी से हो रहा है।

 

(निर्माणाधीन बस्तियों की तस्वीरें)

संपर्क सड़कें (पीएमजीएसवाई): बारां में 39 सड़कें, जिनकी लंबाई 99.70 किलोमीटर है, के लिए 69.36 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। मंडोला छापर को छागरा बस्ती से जोड़ने वाली एक किमी लंबाई की एक सड़क पूरी हो चुकी है।  

15.29 करोड़ मूल्य की लागत वाले 11 सड़कों के लिए एनआईटी जारी किया गया है और यह 19 फरवरी को खुलेगा। 22 सड़कों के लिए प्रक्रिया चल रही है और सभी सड़कें दिसंबर 2024 तक पूरी हो जाएंगी।

बहुउद्देशीय केंद्रों (एमपीसी) का निर्माण: जिले में 16 एमपीसी को स्वीकृति प्रदान की गई हैं। सभी के लिए भूमि आवंटित किया गया है और निर्माण के लिए निविदा जारी की गई है। सभी 16 एमपीसी के लिए निर्माण कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा हो जाएगा। सभी एमपीसी सहरिया बस्ती में उप स्वास्थ्य केंद्र या आंगनबाड़ी केंद्र के साथ संचालित होंगी।    

आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण और संचालन: सभी केंद्रों के लिए भूमि आवंटित किया गया है और निर्माण प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ताओं की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। सभी केंद्रों को पोषण अभियान के अन्तर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन करने के लिये आवश्यक सामग्री एवं शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करायी गई है। सभी 12 केंद्र मार्च माह से अस्थायी जगहों पर काम करना शुरू कर देंगे।

गैर-विद्युतीकृत घरों का विद्युतीकरण: जिले में 17,633 गैर-विद्युतीकृत घर हैं। फरवरी 2024 तक दिए गए 1000 कनेक्शन के साथ इन घरों के विद्युतीकरण का काम शुरू हो गया है। शेष कनेक्शनों के लिए योजना तैयार की गई है और सितंबर 2024 तक सभी घरों का विद्युतीकरण किया जाएगा।

मोबाइल चिकित्सा इकाई: वर्तमान समय में जिले में 7 एमएमयू कार्यरत हैं और महीने में दो बार प्रत्येक बस्ती का दौरा कर रहे हैं। 16 जनवरी 2024 से अबतक कुल-123 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, कुल उपस्थिति 7207 और प्रति शिविर औसत 58.6 है, जिसमें 3 ब्लॉक किशनगंज, शाहबाद और छाबड़ा में 55 बस्तियों को कवर किया गया है। एमएमयू सुविधाओं में ओपीडी सेवाएं, नि: शुल्क जांच (14), बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, एएनसी सेवाएं, एनसीडी स्क्रीनिंग, टीबी स्क्रीनिंग शामिल हैं।

पीएम जनमन कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए अन्य अवसंरचना कार्यों में शामिल हैं, सहरिया बच्चों के लिए 4 छात्रावास, 50 पीवीटीजी वीडीवीके, 6 मोबाइल टावर, 5500 सहरिया आबादी के लिए विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम।  

पूरे देश में कई ऐसी कहानियां हैं जो दर्शाती हैं कि कैसे आजादी के 75 वर्षों बाद पहली बार एक गांव या बस्ती को बिजली या पानी प्राप्त हुआ। इनमें से कुछ कहानियाँ इस प्रकार साझा की गई हैं:

आजादी के 75 वर्षों के बाद मैसूर के जनजातीय बस्ती को मिला विद्युत कनेक्शन

बांदीपुर टाइगर रिजर्व के हेडियाला रेंज के किनारे पर एक जनजातीय बस्ती, जहां पीढ़ियों से बिजली नहीं पहुंची थी, हाल ही में वह चामुंडेश्वरी बिजली आपूर्ति निगम (सीईएससी) के पावर ग्रिड से जुड़ी है। वन सीमा से सटे भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये 20 परिवार मुख्यधारा से कटे हुए थे और दशकों में अंधेरे में जीवनयापन कर रहे थे।

दिलचस्प बात यह है कि बस्ती के पास के गांवों में विद्युत कनेक्शन था, लेकिन कोथनहल्ली कॉलोनी में जेनू कुरुबा समुदाय के आदिवासी गांव के एक हिस्से को छोड़ दिया गया था और आजादी के बाद विद्युत कनेक्शन प्रदान करने में 75 वर्ष लग गए। स्थानीय ग्राम पंचायत सदस्य मुजीब ने कहा कि ये 20 परिवार वर्षों से बिना विद्युत के झोपड़ियों में जीवनयापन कर रहे हैं। लगभग 15 से 20 वर्ष पहले उनके लिए मकान बनाए गए थे लेकिन किसी कारणवश विद्युत आपूर्ति नहीं की गई और कई अनुरोधों के बावजूद समस्या का समाधान करने हेतु विद्युत की लाइनें प्रदान नहीं की गईं।

2. एमएससीडीसीएल  ने 12 दिनों में महाराष्ट्र में 2,395 जनजातीय घरों में विद्युत की आपूर्ति की

महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) ने सिर्फ 12 दिनों में राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में कमजोर जनजातीय समुदायों को विद्युत की आपूर्ति करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। पीएम जनमन मिशन के अंतर्गत, एमएसईडीसीएल ने विभिन्न जिलों में जनजातीय परिवारों के 2,395 घरों को विद्युत प्रदान की। उपमुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने योजना के कार्यान्वयन को प्राथमिकता दी, जो 15 नवंबर, 2023 को शुरू हुई थी।

सबसे पहले नासिक जिले के सिन्नार तालुका के थनगांव गांव के अशोक दगडू हिलाम के घर में विद्युत की आपूर्ति की गई। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले घर पर विद्युत की आपूर्ति की गई थी, हालांकि उन्होंने इसके लिए आवेदन नहीं किया था। सरकार ने विद्युत कनेक्शन प्रदान किया और बाद में उनके इलाके में रहने वाले 15 और परिवारों को विद्युत की आपूर्ति की गई।

ये प्रेरणादायक कहानियां प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिन्होंने अगस्त 2021 में लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में, सरकार की योजनाओं के साथ हर गांव और घर को संतृप्त करने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री जनमन को 75 पीवीटीजी समुदायों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की योजनाओं में वंचित रह गए थे और इसलिए इस मिशन के माध्यम से उन्हें समर्थन देने की आवश्यकता है। यह मिशन सहकारी संघवाद और जन कल्याण के लिए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण का एक अनूठा उदाहरण भी है- आउटरीच, अभिसरण और संतृप्ति- सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास-सबका प्रयास, जिसकी प्रधानमंत्री ने परिकल्पना की है, जहां 9 मंत्रालय 19 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में 75 सबसे कमजोर समूहों के कल्याण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इन समुदायों को अपने स्थानों की सुदूरस्थता, जागरूकता का अभाव, भौतिक एवं डिजिटल संपर्क की कमी और योजनाबद्ध मानदंडों के कारण आजादी के 75 वर्षों के बाद भी भारत सरकार की अधिकांश योजनाओं से वंचित रहना पड़ा और इनका लाभ प्राप्त नहीं हो सका।

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एमजी/एआर/एके/एजे प्रविष्टि तिथि: 08 MAR 2024 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2012880) आगंतुक पटल : 63

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खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

भारत का चीनी उद्योग

सेक्टर, वैल्यू चेन और हाल ही में मूल्य वृद्धि के कारणों का विश्लेषण भारत का चीनी उद्योग: एक नज़र में भारत का चीनी उद्योग कृषि , उद्योग और ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा इकोसिस्टम है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। गन्ना सेक्टर लगभग 5 करोड़ किसानों और चीनी मिलों व उनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले करीब  5 लाख श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार , वर्ष 2025-26 में भारत का गन्ना उत्पादन 500 एमएमटी तक पहुँच गया है। वर्ष 2015-16 में 348.44 एमएमटी उत्पादन की तुलना में , यह पिछले 10 वर्षों में लगभग 43.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। गन्ने की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल भी 2015-16 के 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भारत के शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य हैं। भारत ने 2016-17 के 0.47 लाख एमटी की तुलना में , 2025-26 में 8 लाख एमटी चीनी का निर्यात किया। सरकार...

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

नीति आयोग की पहल ई-फास्ट इंडिया के तहत भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई के लिए पीएसीटी की शुरुआत

पीएसीटी देश भर में माल ढुलाई इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क स्थापित करके बड़े पैमाने पर शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए व्यावसायिक आधार को मजबूत करेगा। 5 वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन में व्यापार , वित्तपोषण और चार्जिंग साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए जेडईटी मार्केटप्लेस की भी शुरुआत की गई। नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने आज 5 वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में पीएसीटी का शुभारंभ किया। यह शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी उमाशंकर , एमएचआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हनीफ कुरैशी , नीति आयोग की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की कार्यक्रम निदेशक सुश्री अर्चना मित्तल , डब्ल्यूआरआई के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक श्री पवन मुलुकुटला और उद्योग , वित्त और माल ढुलाई क्षेत्र से जुड़े लगभग 250 प्रतिभागी उपस्थित थे। ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म की एक प्रमुख पहल , पीएसीटी को शिपर्स , लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता और अन्य इकोसिस्टम हितधारकों से माल ढुलाई की मांग और चिन्हित माल ढुलाई कॉरिडोर में श...

डॉ. मांडविया ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ​​के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की

·         आधुनिक , प्रौद्योगिकी वाले ईपीएफओ ​कार्यालय से नागरिक देश भर में किसी भी रीजनल ऑफिस में ईपीएफ से जुड़ी कोई भी समस्या हल कर सकेंगे ·         अधिकृत ईपीएफ सुविधा प्रदाता सुविधा देने वाले के तौर पर काम करेंगे , लाभ पाने और समस्याओं को हल करने में सदस्यों का मार्गदर्शन करेंगे ·         एक्सेस की समस्याओं के कारण निष्क्रिय खातों में कर्मचारियों के फंसे पैसे वापस करने के लिए मिशन-मोड केवाईसी अभियान शुरू किया जाएगा ·         भारत के मुक्त व्यापार समझौते में सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के प्रावधान शामिल होंगे , जिससे विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भारत लौटने के बाद भी लाभ पा सकेंगे ·         मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सोशल सिक्योरिटी नेट के तहत लाया जाएगा: डॉ. मांडविया   केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात के वटवा में ईपीएफओ ​​के नवनिर्मित भविष्य निधि भवन का उद्घाटन कि...

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) का अवधि विस्तार 01.07.2026 से 30.06.2027 तक स्वीकृत किया है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं: ·         लाभार्थी व्यक्ति को बेरोज़गारी से ठीक पहले निरन्तर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए और बेरोज़गारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए। ·         बेरोज़गारी कदाचार ( misconduct), लॉकआउट , सुपरअन्यूसिएशन (सेवानिवृत्ति) , या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 की व्यवस्था के तहत गलत बयान देने पर दोषी सिद्ध होने के कारण नहीं होनी चाहिए। ·         योजना के तहत दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं ; इनमें दावों का ऑनलाइन सबमिशन और प्रोसेसिंग , लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ( DBT), और लाभों के समय पर भुगतान सुन...

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजाति के बच्चों को उनके सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना को लागू कर रहा है।   एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दर बढ़ाने के लिए , ब्रिज कोर्स , सुधारात्मक कक्षाएं एवं अकादमिक मार्गदर्शन जैसी कई पहलें शुरू की गई हैं। इनका उद्देश्य अध्यन की कमियों को दूर करना और कक्षाओं में सुचारू रूप से आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना है। उच्च शिक्षा एवं करियर विकल्पों की स्पष्टता प्रदान करने के लिए करियर परामर्श सत्र आयोजित किए जाते हैं। कक्षा 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से नीट/जेईई की तैयारी जैसे विशेष कोचिंग उपलब्ध कराए जाते हैं। सीएसआर के अंतर्गत , आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए तीन उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं , जो मध्य प्रदेश के भोपाल , आंध्र प्रदेश के चिंतपल्ले...

हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने का संकल्प, उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़े का आगाज, राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़ा शुरू

राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरक विभाग में , 1 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा- 2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त सचिव श्री अनुराग रोहतगी के मार्गदर्शन में किया गया , जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री अनुराग रोहतगी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़े की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं , बल्कि देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी कार्मिकों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग राजभाषा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है , इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी क्रम में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अधिक...

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