दूरियों को पाटकर भविष्य का निर्माण: सीआईएल ने छत्तीसगढ़ में ईएमआरएस को मजबूत करने के लिए 10 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई
जनजातीय छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता को समर्थन देने के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन
जनजातीय
कार्य मंत्रालय (एमओटीए) और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते
हुए छत्तीसगढ़ राज्य में जनजातीय छात्रों को दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता में
सुधार के लिए साझेदारी की है। सीआईएल अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व
(सीएसआर) के तहत छत्तीसगढ़ में 68 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) को
सहयोग प्रदान करेगा,
जिससे 28,000 से अधिक जनजातीय छात्र लाभान्वित होंगे।
जनजातीय
कार्य मंत्रालय,
भारत सरकार ने अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
प्रदान करने के लिए ईएमआरएस की स्थापना की है, जिससे वे उच्च
एवं व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों में अवसरों का लाभ उठा सकें और विभिन्न क्षेत्रों
में लाभकारी रोजगार प्राप्त कर सकें। ईएमआरएस उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान
करने के अलावा उनके पोषण, समग्र स्वास्थ्य एवं विकास का भी
ध्यान रखता है। आज देश भर में 479 ईएमआरएस कार्यरत हैं।
सीआईएल ने घोषणा की है कि वह जनजातीय मामलों के
मंत्रालय को उसके कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के तहत सहयोग
देगा। उसने निम्नलिखित कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं:
·
कंप्यूटर लैब की स्थापना करके डिजिटल
शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा; लगभग 3200 कंप्यूटर और 300 टैबलेट
खरीदे जाएंगे;
·
छात्राओं की स्वास्थ्य और स्वच्छता के
लिए स्कूलों और छात्रावासों में लगभग 1200 सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें और 1200
भस्मक लगाए जाएंगे;
·
छात्रों के लिए व्यापक मार्गदर्शन; और
·
छात्रों के लिए आवासीय उद्यमशीलता
शिविर (आईआईटी/आईआईएम/एनआईटी में)
इस व्यापक हस्तक्षेप के माध्यम से जनजातीय कार्य मंत्रालय और सीआईएल की योजना ईएमआरएस में आधुनिक और नवीन शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने और समाज के वंचित वर्ग के छात्रों को समान अवसर प्रदान करने की है। इस सहयोग का उद्देश्य डिजिटल शिक्षा, करियर की तैयारी और उद्यमशीलता की मानसिकता के माध्यम से आदिवासी युवाओं के लिए शैक्षिक अंतराल को पाटना और नए रास्ते खोलना है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत समाज के सभी वर्गों के लिए समान और समावेशी शैक्षिक अवसर सृजित करने के सरकार के व्यापक प्रयासों को दर्शाता है।यह परियोजना राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के माध्यम से क्रियान्वित की जाएगी, जो मंत्रालय के अंतर्गत एक सेक्शन 8 कंपनी है।
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