प्रिंट मीडिया इको-सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकारी विज्ञापनों की संशोधित दर संरचना को सूचना और प्रसारण मंत्रालय की मंजूरी
सरकार ने विज्ञापन
दरों को 26% तक संशोधित करने का फैसला किया है। प्रिंट मीडिया मेंदैनिक समाचार पत्रों
की एक लाख प्रतियों के लिए श्वेत-श्याम विज्ञापन की मीडिया दरें प्रति वर्ग सेमी,
47.40 रुपये से बढ़ाकर 59.68 रुपये कर दी गई हैं,
जो 26% की वृद्धि है। सरकार ने रंगीन विज्ञापनों,
वरीयता आधारित स्थान निर्धारण के लिए दी जाने वाली प्रीमियम दरों से
संबंधित समिति की सिफारिशों पर भी सहमति व्यक्त की है।
केंद्रीय संचार
ब्यूरो (सीबीसी) केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की ओर से विभिन्न मीडिया
माध्यमों में प्रचार अभियान चलाने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत एक
नोडल मीडिया इकाई है,
जिसमें प्रिंट मीडिया भी शामिल है, जो इस उद्देश्य
के लिए सीबीसी के साथ पैनलबद्ध है। सीबीसी द्वारा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के
प्रकाशन की दरें पिछली बार मंत्रालय द्वारा 8वीं दर संरचना समिति
(आरएससी) की सिफारिशों के आधार पर 09.01.2019 को संशोधित की गई
थीं, जो तीन साल की अवधि के लिए वैध थीं।
समिति ने प्रिंट
मीडिया की लागत का मूल्यांकन किया
प्रिंट मीडिया
में सरकारी विज्ञापनों की दरों के संशोधन के संबंध में सिफारिशें करने के लिए एएस एंड
एफए (आई एंड बी) की अध्यक्षता में 9वीं दर संरचना समिति का
गठन 11 नवंबर, 2021 को किया गया था।
समिति ने नवंबर, 2021 और अगस्त, 2023 के बीच अपनी कार्यवाही के दौरान लघु,
मध्यम और बड़े श्रेणी के समाचार पत्रों के विभिन्न समाचार पत्र संघों,
जैसे इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस), ऑल इंडिया
स्मॉल न्यूजपेपर्स एसोसिएशन (एआईएसएनए), स्मॉल-मीडियम-बिग न्यूजपेपर्स
सोसाइटी (एसएमबीएनएस) और अन्य हितधारकों के अभ्यावेदनों पर विचार किया। समिति ने प्रिंट
मीडिया में विज्ञापनों की दरों पर प्रभाव डालने लाने वाले विभिन्न मापदंडों पर भी विचार-विमर्श
किया, जैसे कि अखबारी कागज के संबंध में थोक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति,
वेतन, मुद्रास्फीति की दर, आयातित अखबारी कागज की कीमतों का रुझान, प्रोसेसिंग लागत
आदि। समिति ने 23 सितंबर, 2023 को अपनी
सिफारिशें प्रस्तुत कीं।
प्रिंट मीडिया
में सरकारी विज्ञापनों की दरें बढ़ाने से सरकार और मीडिया जगत दोनों को कई महत्वपूर्ण
लाभ होंगे। सरकारी विज्ञापनों के लिए उच्च दरें प्रिंट मीडिया को आवश्यक राजस्व सहायता
प्रदान करेंगी,
खासकर विभिन्न अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा के युग में
और पिछले कुछ वर्षों में लागत में वृद्धि के मद्देनजर। इससे संचालन को बनाए रखने,
गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता को कायम रखने और स्थानीय समाचार पहलों को समर्थन
देने में मदद मिल सकती है। वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देकर प्रिंट मीडिया बेहतर सामग्री
में निवेश कर सकता है, जिससे जनहित की सेवा और अधिक प्रभावी ढंग
से की जा सकेगी।
विज्ञापन दरों
में ये वृद्धि मीडिया उपभोग की व्यापक प्रवृत्तियों के अनुरूप है। एक विविध मीडिया
इको-सिस्टम में प्रिंट मीडिया के महत्व को पहचानकर सरकार अपनी संचार रणनीतियों को
बेहतर ढंग से लक्षित कर सकती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे विभिन्न
प्लेटफार्मों पर नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुँचें।
पीके/केसी/आईएम/केके
प्रविष्टि तिथि: 17
NOV 2025 by PIB Delhi