छत्तीसगढ़ के महासमुंद लोकसभा सीट से छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा है, उल्लेखनीय है कि, ताम्रध्वज साहू वही पूर्व गृहमंत्री है जिसे उसके गृह विधानसभा क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण के मतदाताओं ने नकार दिया है उसे महासमुंद के कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कांग्रेस हाई कमान ने क्यों थोपा है इस प्रश्न पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने चुप्पी साधे रखी है पढ़िए क्यों..?
दुर्ग ग्रामीण के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ताम्रध्वज साहू को अपना नेता स्वीकार किया होता तो क्या ताम्रध्वज साहू को असम्मान जनक वोटों से हार का स्वाद चखना नहीं पड़ता लेकिन इस हार ने ताम्रध्वज साहू और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच की गहरी खाई को जग जाहिर कर दिया है इसलिए महासमुंद के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अग्रलीखित प्रश्नों पर चिंतन मनन करना चाहिए…
मौकापरस्त नेता है क्या ?
वरिष्ठ और पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के अनुभव ताम्रध्वज साहू के मामले में कैसे हैं यह पूछा जाना जरूरी है क्योंकि विगत विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ताम्रध्वज साहू के नेतृत्व को स्वीकार किया होता तो शायद दुर्ग ग्रामीण का चुनाव परिणाम अलग ही होते लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री ने कार्यकर्ताओं के दम पर जीत हासिल करने के बाद जो कार्य व्यवहार किया उसके परिणाम स्वरूप ताम्रध्वज साहू हार गया और इस प्रश्न को ताम्रध्वज साहू को मिले मतों की संख्या ने खड़ा कर दिया की क्या ताम्रध्वज साहू मौका परस्त नेता है इसलिए हार गया ?
***************जीतने के बाद भूल जाता है क्या ?
कांग्रेस का पूर्व गृहमंत्री अपने ही निर्वाचन क्षेत्र से मतदाताओं द्वारा नकार दिया गया जिसका कारण निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया जाना होगा यह कहे जाने में शायद ही दो मत होगा लेकिन ताम्रध्वज साहू ने कभी इस प्रश्न की परवाह नहीं की क्योंकि ताम्रध्वज साहू को निर्वाचन क्षेत्र बदलने का अनुभव है लेकिन महासमुंद के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चुनाव परिणाम आने के बाद क्या वैसा ही अनुभव मिलेगा जैसा दुर्ग ग्रामीण के काग्रेस कार्यकर्ताओं को मिला है यह तो आने वाला समय बतायेगा।
***************
पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇
निर्वाचन क्षेत्र छोड़कर भागता क्यों है, ताम्रध्वज साहू ?
गौरतलब रहे कि, कोई भी नेता तीन परिथितियों में अपना निर्वाचन क्षेत्र छोड़कर भागता है पहला कार्यकर्ताओं के मध्य अविश्वास दूसरा मतदाताओं से विश्वासघात करके और तीसरा अपने निर्वाचन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विकास कार्य करने से विफल होने की स्थिति में लेकिन ताम्रध्वज साहू के द्वारा निर्वाचन क्षेत्र बदले जाने के मामले में इन तीनों में से कौन सी विकट परिस्थितियों का मामल था यह दुर्ग ग्रामीण के कार्यकर्ता भली भांति बता सकते है ।
महासमुंद जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अधिकार पर अतिक्रमण नहीं है क्या ?
ताम्रध्वज साहू की दुर्ग ग्रामीण की करारी हार के बाद महासमुंद लोकसभा सीट पर किस्मत आजमाने चले जाने का मामला कई राजनैतिक दृष्टिकोण से अवसरवाद और कूटनीतिक दखल का है क्योंकि जिला बदलकर चुनाव लड़ाने से पुराने निर्वाचन क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के प्रति जवाबदेही की स्थिति बनती नहीं है और कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को आसानी से नज़र अंदाज किया जा सकता है क्या महासमुंद ताम्रध्वज साहू की जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ दुर्ग ग्रामीण जैसी स्थिति नही बनेगी ?
***************
पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇
क्या महासमुंद जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साजिश हो रहीं थी ?
महासमुंद के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव में दावेदारी करने से रोकने के लिए पूर्व गृहमंत्री स्तर से प्रयास किया जा रहा था क्या? इस बात का खुलासा तो महासमुंद कांग्रेस के कार्यकर्ता ही कर सकते हैं लेकिन वर्तमान वस्तुस्थिति तो यह है की महासमुंद कांग्रेस के किसी भी कार्यकर्ता को लोकसभा प्रत्याशी घोषित किए जाने से रोकने में ताम्रध्वज साहू ने सफलता हासिल कर ली है और दुर्ग से विधानसभा चुनावों के करारी हार के बाद महासमुंद में किस्मत आजमाने का मौका हासिल कर लिया है ।
***************
इस लेख पर प्रतिक्रिया अभिप्राप्त करने का इच्छुक लेखक : आपका... अमोल मालुसरे 🙏नोट :- इस लेख के विषयवस्तु पर किसी को दाव-आपत्ति हो तो उनका अमोल मालुसरे सहर्ष स्वागत करता है सक्षम न्यायालय में याचिका दायर कर अमोल मालुसरे को पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर अवश्य दें । 🙏
***************
पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇
