देश भर में औषधियों की कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश 2013 (डीपीसीओ 2013) के प्रावधानों के अनुसार विनियमित हैं। डीपीसीओ 2013 के वर्त्तमान प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची-I में निर्दिष्ट दवाओं की अधिकतम मूल्य सीमा और डीपीसीओ, 2013 के पैरा 2(1)(u) में परिभाषित नई दवाओं की खुदरा मूल्य सीमा निर्धारित करता है।
इसके अलावा गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में
निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के दौरान किसी भी दवा के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में दस
प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त एनपीपीए असाधारण
परिस्थितियों में और जनहित में डीपीसीओ, 2013 के पैरा 19 के अंतर्गत किसी भी दवा की
अधिकतम खुदरा मूल्य सीमा भी निर्धारित करता है। डीपीसीओ 2013
के अंतर्गत मूल्य विनियम निजी अस्पतालों द्वारा बेची जाने वाली दवाओं/फार्मूलेशन
पर भी समान रूप से लागू होते हैं। एनपीपीए दवाओं की कीमतों की निगरानी करता है और
अधिक कीमत वसूलने के मामलों से डीपीसीओ 2013 के संबंधित
प्रावधानों के अनुसार निपटा जाता है।
रसायन और
उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में लिखित जवाब में यह
जानकारी दी।
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पीके/
केसी/एसके/डीके प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 by PIB Delhi (रिलीज़
आईडी: 2241394) आगंतुक पटल : 90