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हाथ से सफाई करने वालों का पुनर्वास

हाथ से सफाई करने वालों के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार, देश के सभी जिलों में हाथ से सफाई करने वालों का एक नया सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें कोई भी हाथ से सफाई करने वाला (एमएस) नहीं पाया गया है।

हालांकि, 2013 और 2018 में किए गए दो सर्वेक्षणों के दौरान 58,098 हाथ से सफाई करने वालों की पहचान की गई थी। सभी पहचाने गए एमएस को 40,000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से एकमुश्त नकद सहायता (ओटीसीए) का भुगतान किया गया है, जिसमें बिहार के 131 एमएस (0.22%) भी शामिल हैं।वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 14,692 एमएस को ओटीसीए, 9,868 एमएस को कौशल विकास प्रशिक्षण और 1,524 एमएस को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई है। ये विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के दौरान कुछ मौतें हुई हैं, जिसका कारण "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास अधिनियम, 2013" और "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास नियम, 2013" तथा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत निर्धारित सुरक्षा सावधानियों का पालन न करना है।

सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों (एसएसडब्ल्यू) की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र (नमस्ते) योजना 2023-24 में शुरू की गई है। नमस्ते योजना के तहत श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए उपाय इस प्रकार हैं:

1.   एसएसडब्ल्यू को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट।

2.   एसएसडब्ल्यू को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण।

3.   बड़े शहरी स्थानीय निकायों में आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ईआरएसयू) को सुरक्षा उपकरण।

4.   सफाई कर्मचारियों, उनके अधिकतम पांच सदस्यीय समूहों और निजी स्वच्छता सेवा संचालकों (पीएसएसओ) को स्वच्छता संबंधी मशीनरी के लिए अग्रिम पूंजी सब्सिडी।

5.   सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई की रोकथाम पर कार्यशालाएं।

6.   जिम्मेदार स्वच्छता प्राधिकरण की नियुक्ति।

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (एसबीएम-यू) 2.0, जो 1 अक्टूबर, 2021 को शुरू हुआ, उसमें एक नया घटक, प्रयुक्त जल प्रबंधन (यूडब्ल्यूएम) शामिल किया गया है। इसका एक मकसद सीवर और सेप्टिक टैंकों में खतरनाक पदार्थों के प्रवेश को रोकना और सीवर तथा सेप्टिक टैंकों की सफाई के मशीनीकरण के ज़रिए हाथ से सफाई को स्थायी रूप से खत्म करना है।

अनुलग्नक

अनुलग्नक का संदर्भ राज्यसभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 3021 के भाग (क) के उत्तर में दिया गया है, जिसका उत्तर 18.03.2026 को हाथ से सफाई करने वालों के पुनर्वास के संबंध में दिया जाना था।

पिछले 5 वर्षों के दौरान 2013 और 2018 में किए गए सर्वेक्षण में चिन्हित हाथ से सफाई करने वालों को दी गई एकमुश्त नकद सहायता, कौशल प्रशिक्षण और पूंजीगत सब्सिडी का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:-

क्रमांक

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नाम

2013 और 2018 के सर्वेक्षण के दौरान पहचाने गए एमएस की संख्या

2020-21 से 2024-25 के दौरान लाभान्वित एमएस की संख्या

ओटीसीए

कौशल विकास प्रशिक्षण

पूंजीगत सब्सिडी

1

आंध्र प्रदेश

1793

330

72

0

2

असम

3921

3051

198

2

3

बिहार

131

0

0

0

4

छत्तीसगढ़

3

0

0

0

5

गुजरात

105

0

0

0

6

झारखंड

192

68

0

0

7

कर्नाटक

2927

1046

326

671

8

केरल

518

0

12

0

9

मध्य प्रदेश

510

169

145

0

10

महाराष्ट्र

6325

718

459

9

11

ओडिशा

230

11

0

0

12

पंजाब

231

9

0

10

13

राजस्थान

2673

232

1094

14

14

तमिलनाडु

398

14

0

3

15

उत्तर प्रदेश

32473

6267

6584

348

16

उत्तराखंड

4988

2775

962

22

17

प. बंगाल

680

2

16

445

 

कुल

58098

14692

9868

1524

यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एनएस/डीए (रिलीज़ आईडी: 2242070) आगंतुक पटल : 97 प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026  by PIB Delhi

 

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान आरंभ किया

  भारत में तम्बाकू के उपयोग से बहुत से रोग पैदा होते हैं और इसके इस्तेमाल से व्यक्ति मृत्यु की कगार तक पहुंच सकता है। देश में हर साल लगभग 1.35 मिलियन मौतें तम्बाकू के कारण होती हैं। भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक भी है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस) 2019 के अनुसार , देश भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत स्कूली छात्र विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते पाये गये हैं। हमारे स्कूल भवनों और परिसरों के आसपास तम्बाकू उत्पादों की विभिन्न रूपों में आसान पहुँच को उपरोक्त स्थिति पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीटीपी) के अंग के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नाबालिगों और युवाओं को तम्बाकू के सेवन से बचाने के लिए शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू रहित बनाने के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान" दिशानिर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूलों के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान कार्यान्वयन मैनुअल" विकसित किया है और...

कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे.

काशिळ येथील कोविड रुग्णालयाचे पालकमंत्री बाळासाहेब पाटील यांच्या हस्ते उद्घाटन कराड व सातारा तालुक्यातील कोरोना रुग्णांना मिळणार चांगली आरोग्य सुविधा सातारा दि. ३ (जिमाका) : काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे. कराड व सातारा तसेच काशिळ परिसरातील नागरिकांना या रुग्णालयाचा लाभ होणार असून या रुग्णालयामार्फत कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत, असा विश्वास पालकमंत्री बाळसाहेब पाटील यांनी व्यक्त केला. काशिळ येथील कोविड रुगणालयाचे उद्घाटन पालकमंत्री श्री. पाटील यांच्या हस्ते आज झाले. यावेळी ते बोलत होते. या उद्घाटन प्रसंगी गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री शभूराज देसाई, खासदार श्रीनिवास पाटील, माजी मुख्यमंत्री तथा आमदार पृथ्वीराज चव्हाण, प्रभारी जिल्हाधिकारी रामचंद्र शिंदे, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौडा, प्रांताधिकारी मिनाज मुल्ला, तहसीलदार आशा होळकर, जिल्हा शल्यचिकित्सक डॉ. सुभाष चव्हाण आदी उपस्थित होते. या कोविड रुग्णालयात 32 आयसीयु बेड व 31 ऑक्सिजन बेड असे एकूण 63 बेड आहेत. यामधील सुरुवातीला 32 ऑक्सिज...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान आरंभ किया

  भारत में तम्बाकू के उपयोग से बहुत से रोग पैदा होते हैं और इसके इस्तेमाल से व्यक्ति मृत्यु की कगार तक पहुंच सकता है। देश में हर साल लगभग 1.35 मिलियन मौतें तम्बाकू के कारण होती हैं। भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक भी है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस) 2019 के अनुसार , देश भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत स्कूली छात्र विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते पाये गये हैं। हमारे स्कूल भवनों और परिसरों के आसपास तम्बाकू उत्पादों की विभिन्न रूपों में आसान पहुँच को उपरोक्त स्थिति पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीटीपी) के अंग के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नाबालिगों और युवाओं को तम्बाकू के सेवन से बचाने के लिए शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू रहित बनाने के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान" दिशानिर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूलों के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान कार्यान्वयन मैनुअल" विकसित किया है और...

कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे.

काशिळ येथील कोविड रुग्णालयाचे पालकमंत्री बाळासाहेब पाटील यांच्या हस्ते उद्घाटन कराड व सातारा तालुक्यातील कोरोना रुग्णांना मिळणार चांगली आरोग्य सुविधा सातारा दि. ३ (जिमाका) : काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे. कराड व सातारा तसेच काशिळ परिसरातील नागरिकांना या रुग्णालयाचा लाभ होणार असून या रुग्णालयामार्फत कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत, असा विश्वास पालकमंत्री बाळसाहेब पाटील यांनी व्यक्त केला. काशिळ येथील कोविड रुगणालयाचे उद्घाटन पालकमंत्री श्री. पाटील यांच्या हस्ते आज झाले. यावेळी ते बोलत होते. या उद्घाटन प्रसंगी गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री शभूराज देसाई, खासदार श्रीनिवास पाटील, माजी मुख्यमंत्री तथा आमदार पृथ्वीराज चव्हाण, प्रभारी जिल्हाधिकारी रामचंद्र शिंदे, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौडा, प्रांताधिकारी मिनाज मुल्ला, तहसीलदार आशा होळकर, जिल्हा शल्यचिकित्सक डॉ. सुभाष चव्हाण आदी उपस्थित होते. या कोविड रुग्णालयात 32 आयसीयु बेड व 31 ऑक्सिजन बेड असे एकूण 63 बेड आहेत. यामधील सुरुवातीला 32 ऑक्सिज...

ट्विटर का यह बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश है।

ट्विटर को देश के कानूनों का पालन करने की जरूरत सरकार ने ट्विटर द्वारा दिए गए बयान की निंदा करते हुए उसे पूरी तरह से निराधार, झूठा और भारत को बदनाम करने वाला बताया है, जिसे कंपनी ने केवल अपनी मूर्खतापूर्ण गलतियों को छिपाने के लिए दिया है Posted Date:- May 27, 2021 भारत सरकार ने आज प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि वह ट्विटर द्वारा किए गए दावों का कड़ा विरोध करती है। भारत में स्वतंत्र भाषण और लोकतांत्रिक प्रथाओं की सदियों पुरानी परंपरा है। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना केवल ट्विटर जैसी निजी, लाभकारी, विदेशी संस्था का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और इसके मजबूत संस्थानों की प्रतिबद्धता है। ट्विटर का यह बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश है। अपने कार्यों और जानबूझकर की गई अवज्ञा से, ट्विटर भारत की कानून व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। इसके अलावा, ट्विटर मध्यस्थ दिशानिर्देशों में उन्हीं नियमों का पालन करने से इनकार करता है जिनके आधार पर वह भारत में किसी भी आपराधिक दायित्व से संरक्षण होने का द...

भारतीय रेल ने होली के त्योहारी सीजन में यात्रियों की निर्विघ्‍न और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए अब तक 540 ट्रेन सेवाएं अधिसूचित की हैं

  प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ को व्‍यवस्थित रखने को प्राथमिकता दी जा रही है इन ट्रेनों द्वारा रेल मार्गों पर देश भर के प्रमुख गंतव्यों को जोड़ने की योजना है पिछले वर्ष की तुलना में इस त्योहारी सीज़न के लिए 219 अधिक सेवाएं जोड़ी गई हैं भारतीय रेल की ओर से होली के इस त्योहारी सीजन में रेल यात्रियों की सुविधा और यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को व्‍यवस्थित रखने के लिए 540 ट्रेन सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इन ट्रेनों द्वारा दिल्ली-पटना , दिल्ली-भागलपुर , दिल्ली-मुजफ्फरपुर , दिल्ली-सहरसा , गोरखपुर-मुंबई , कोलकाता-पुरी , गुवाहाटी-रांची , नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा , जयपुर-बांद्रा टर्मिनस , पुणे-दानापुर , दुर्ग-पटना , बरौनी-सूरत आदि जैसे रेलवे मार्गों पर देश भर के प्रमुख गंतव्यों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। क्र.सं. रेलवे अधिसूचित सेवाएं 1 सीआर 88 2 ईसीआर 79 3 ईआर 17 4 ईसीओआर 12 5 एनसीआर 16 ...

पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना, साथ ही पहली बार स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प , जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक

  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया ·         दो चरणों में होने वाली जनगणना- 2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य , पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना , साथ ही पहली बार स्व-गणना ( Self-Enumeration) का विकल्प , स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा के माध्यम से होगी , उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे , जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक , देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक , पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना- 2027 में शामिल होंगे केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के लिए चार digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- “प्रगति” (महिला) और “ विकास” (पुरुष) - का...

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में उच्च उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल और जैव-सशक्त फसलों की 109 किस्मों को जारी किया।

  प्र धानमंत्री ने उच्च उपज देने वाली , जलवायु अनुकूल और जैव-सशक्त फसलों की 109 किस्में जारी कीं , प्रधानमंत्री ने कृषि में मूल्य संवर्धन के महत्व को रेखांकित किया , इन फसलों के बीज जलवायु के अनुकूल हैं और प्रतिकूल मौसम में भी अच्छी फसल दे सकते हैं:  आज का कार्यक्रम प्रयोगशाला से भूमि कार्यक्रम का सबसे अच्छा उदाहरण है:  श्री शिवराज सिंह चौहान इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने किसानों और वैज्ञानिकों से परस्‍पर बातचीत भी की। इन नई फसल किस्मों के महत्व पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि में मूल्य संवर्धन के महत्व पर बल दिया। किसानों ने कहा कि ये नई किस्में अत्यधिक लाभकारी होंगी क्योंकि इनसे उनका व्‍यय कम होगा और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने मोटे अनाजों के महत्व पर चर्चा की और इस बात को रेखांकित किया कि कैसे लोग पौष्टिक भोजन की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि केवीके को प्रत्‍येक महीने विकसित की जाने वाली नई किस्‍मों के लाभों के बारे में किसा...

राष्ट्रव्यापी अभियान "मेरी माटी मेरा देश" राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 'वीरों' को सम्मानित करेगा अभियान के दौरान देशभर के 4419 ब्लॉकों में कार्यक्रम आयोजित किए गए

  देश के हर कोने से मिट्टी एकत्र की गई , जिसे एक कलश में रखकर आजादी का अमृत महोत्सव के समापन अवसर पर समारोहपूर्वक अमृत वाटिका और अमृत महोत्सव स्मारक में स्थावपित किया जाएगा  " मेरी माटी मेरा देश '' ( एमएमएमडी) अभियान देशभर में अमृत कलश यात्राओं के साथ अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। इस अखिल भारतीय सम्‍पर्क पहल का लक्ष्य देश के हर घर तक पहुंचना रहा। इस महत्वपूर्ण सहयोगात्मक प्रयास के दौरान इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कोयला मंत्रालय समे‍त कई मंत्रालय , राज्य सरकारें , नेहरू युवा केंद्र संगठन , क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र , केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और भारतीय डाक ने गांव तथा ब्लॉक स्तर पर हर घर से मिट्टी एकत्र कर रहे हैं। यह संयुक्त पहल इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उनके समर्पण को ही रेखांकित नहीं करती , बल्कि सामुदायिक सेवा और राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करती है। संस्कृति मंत्रालय के क्षेत्रीय संस्कृति केंद्र भी देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान के बारे में जागरूकता पैदा करने और बेहतर सम्‍पर्क ...

शैक्षणिक सत्र 2023-24 से केंद्र/राज्य सरकार के 57 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों/संस्थानों में चार-वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) का शुभारंभ हुआ पढ़िए पूरी जानकारी

अमोल मालुसरे का दृष्टिकोण है कि, अध्यापन क्षेत्र में अब आया है बड़ा बदलाव ! राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने पूरे देश में शैक्षणिक सत्र 2023-24 से 57 अध्यापक शिक्षा संस्थानों (टीईआई) में एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) शुरू किया है। यह एनईपी 2020 के तहत एनसीटीई का एक प्रमुख कार्यक्रम है। आईटीईपी, जिसे 26 अक्टूबर 2021 को अधिसूचित किया गया था, एक 4 साल की दोहरी-समग्र स्नातक डिग्री है, जो बी.ए. बी.एड./ बी.एससी बी.एड. / और बी.कॉम बी.एड. पाठ्यक्रम पेश करती है। यह पाठ्यक्रम; नयी स्कूल संरचना के 4 चरणों यानि फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी (5+3+3+4) के लिए शिक्षकों को तैयार करेगा। यह कार्यक्रम शुरू में प्रतिष्ठित केंद्र/राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों/संस्थानों में पायलट मोड में चलाया जा रहा है। आईटीईपी उन सभी छात्रों के लिए उपलब्ध होगा, जो सेकेंडरी के बाद अपनी पसंद से शिक्षण को अपने करियर के रूप में चुनते हैं। इस एकीकृत पाठ्यक्रम से छात्रों को एक वर्ष की बचत का लाभ होगा, क्योंकि वे वर्तमान बी.एड. योजना के लिए आवश्यक 5 वर्षों के बजाय पाठ्यक्रम को 4 वर्...

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