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हाथ से सफाई करने वालों का पुनर्वास

हाथ से सफाई करने वालों के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार, देश के सभी जिलों में हाथ से सफाई करने वालों का एक नया सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें कोई भी हाथ से सफाई करने वाला (एमएस) नहीं पाया गया है।

हालांकि, 2013 और 2018 में किए गए दो सर्वेक्षणों के दौरान 58,098 हाथ से सफाई करने वालों की पहचान की गई थी। सभी पहचाने गए एमएस को 40,000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से एकमुश्त नकद सहायता (ओटीसीए) का भुगतान किया गया है, जिसमें बिहार के 131 एमएस (0.22%) भी शामिल हैं।वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 14,692 एमएस को ओटीसीए, 9,868 एमएस को कौशल विकास प्रशिक्षण और 1,524 एमएस को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई है। ये विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के दौरान कुछ मौतें हुई हैं, जिसका कारण "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास अधिनियम, 2013" और "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास नियम, 2013" तथा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत निर्धारित सुरक्षा सावधानियों का पालन न करना है।

सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों (एसएसडब्ल्यू) की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र (नमस्ते) योजना 2023-24 में शुरू की गई है। नमस्ते योजना के तहत श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए उपाय इस प्रकार हैं:

1.   एसएसडब्ल्यू को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट।

2.   एसएसडब्ल्यू को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण।

3.   बड़े शहरी स्थानीय निकायों में आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ईआरएसयू) को सुरक्षा उपकरण।

4.   सफाई कर्मचारियों, उनके अधिकतम पांच सदस्यीय समूहों और निजी स्वच्छता सेवा संचालकों (पीएसएसओ) को स्वच्छता संबंधी मशीनरी के लिए अग्रिम पूंजी सब्सिडी।

5.   सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई की रोकथाम पर कार्यशालाएं।

6.   जिम्मेदार स्वच्छता प्राधिकरण की नियुक्ति।

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (एसबीएम-यू) 2.0, जो 1 अक्टूबर, 2021 को शुरू हुआ, उसमें एक नया घटक, प्रयुक्त जल प्रबंधन (यूडब्ल्यूएम) शामिल किया गया है। इसका एक मकसद सीवर और सेप्टिक टैंकों में खतरनाक पदार्थों के प्रवेश को रोकना और सीवर तथा सेप्टिक टैंकों की सफाई के मशीनीकरण के ज़रिए हाथ से सफाई को स्थायी रूप से खत्म करना है।

अनुलग्नक

अनुलग्नक का संदर्भ राज्यसभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 3021 के भाग (क) के उत्तर में दिया गया है, जिसका उत्तर 18.03.2026 को हाथ से सफाई करने वालों के पुनर्वास के संबंध में दिया जाना था।

पिछले 5 वर्षों के दौरान 2013 और 2018 में किए गए सर्वेक्षण में चिन्हित हाथ से सफाई करने वालों को दी गई एकमुश्त नकद सहायता, कौशल प्रशिक्षण और पूंजीगत सब्सिडी का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:-

क्रमांक

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नाम

2013 और 2018 के सर्वेक्षण के दौरान पहचाने गए एमएस की संख्या

2020-21 से 2024-25 के दौरान लाभान्वित एमएस की संख्या

ओटीसीए

कौशल विकास प्रशिक्षण

पूंजीगत सब्सिडी

1

आंध्र प्रदेश

1793

330

72

0

2

असम

3921

3051

198

2

3

बिहार

131

0

0

0

4

छत्तीसगढ़

3

0

0

0

5

गुजरात

105

0

0

0

6

झारखंड

192

68

0

0

7

कर्नाटक

2927

1046

326

671

8

केरल

518

0

12

0

9

मध्य प्रदेश

510

169

145

0

10

महाराष्ट्र

6325

718

459

9

11

ओडिशा

230

11

0

0

12

पंजाब

231

9

0

10

13

राजस्थान

2673

232

1094

14

14

तमिलनाडु

398

14

0

3

15

उत्तर प्रदेश

32473

6267

6584

348

16

उत्तराखंड

4988

2775

962

22

17

प. बंगाल

680

2

16

445

 

कुल

58098

14692

9868

1524

यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एनएस/डीए (रिलीज़ आईडी: 2242070) आगंतुक पटल : 97 प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026  by PIB Delhi

 

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

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माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

जिला राजनादगांव के नायब तहसीलदार लालबहादुर नगर द्वारा कि गई जांच अब प्रश्नांकित होकर पुनः विधिक चुनौति का सामना कर रही है.. आरोप गंभीर है!

प्रशासनिक मामला | डोंगरगढ़ नायब तहसीलदार की जांच पर उठे गंभीर सवाल, SDM से स्वतंत्र जांच की मांग विवादित भूमि के स्वामित्व स्रोत, नामांतरण और पूर्व आपत्ति के रिकॉर्ड तक जांच के घेरे में; आवेदक ने कहा—अपूर्ण जांच को अंतिम निष्कर्ष न माना जाए ----------------------------- विवादित भूमि प्रकरण में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग डोंगरगढ़। राजस्व प्रकरण क्रमांक 202602095000018 (प्रकरण शीर्ष ब-121) में विवादित भूमि से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। आवेदक थैलेंद्र  देवांगन उर्फ चंद्रभूषण देवांगन ने अनुविभागीय अधिकारी/अनुविभागीय दंडाधिकारी, डोंगरगढ़ के समक्ष प्रस्तुत लिखित तर्क में लाल बहादुर नगर के नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। आवेदक का मुख्य सवाल है कि जब विवादित भूमि के स्वामित्व के मूल स्रोत, पंजीकृत विक्रय विलेखों और पूर्व में प्रस्तुत आपत्ति के कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण बताई जा रही है, तो इ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

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तहसीलदार भिलाई 3 और अनुविभागीय अधिकारी को भू-अभिलेख संधारण की वस्तुस्थिति बताने के लिए ध्यानाकर्षण करवाकर पहल की गई है!

मेरा दृष्टिकोण | जनहित की वार्ता  भिलाई-3 चरोदा क्षेत्र में भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण को लेकर नागरिक पहल प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने सूचना नोटिस, सांसद-विधायक को भी कराया गया वस्तुस्थिति से अवगत भिलाई-3 | जनहित पहल भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण को लेकर नागरिक स्तर से जन-जागरूकता की पहल भिलाई-3। भिलाई-3 चरोदा तहसील क्षेत्र में भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण तथा उससे जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों द्वारा एक पहल शुरू की गई है। इस पहल के माध्यम से नागरिक स्तर पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भू-अभिलेखों के महत्व तथा उनके नियमानुसार संधारण की आवश्यकता की ओर आकर्षित कराया जा रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे, श्रीमती निशा देशमुख एवं उनके साथियों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भिलाई-3 तथा तहसीलदार, भिलाई-3 के समक्ष सूचना नोटिस प्रस्तुत कर विषय की ओर ध्यानाकर्षण कर...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए पाँच उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी

केंद्रों का उद्देश्य भारत की भाषाई और साहित्यिक विरासत के अनुसंधान , संरक्षण , डिजिटलीकरण तथा व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना उच्च शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय , भारत सरकार ने शास्त्रीय असमिया , शास्त्रीय बंगाली , शास्त्रीय मराठी , शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत में अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्रों ( सीओई ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह पहल उन्नत शैक्षणिक अनुसंधान , भाषाई और साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण और इन शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए समर्पित संस्थागत सहायता प्रदान करेगी। निम्नलिखित उच्च शिक्षण संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे : क्रम संख्या शास्त्रीय भाषा उत्कृष्टता केंद्र 1   शास्त्रीय असमिया तेजपुर विश्वविद्यालय , असम 2 शास्त्रीय बांग्ला विश्वभारती विश्वविद्यालय , पश्चिम बंगाल 3 शास्त्रीय मराठी डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान ( ...

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) का अवधि विस्तार 01.07.2026 से 30.06.2027 तक स्वीकृत किया है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं: ·         लाभार्थी व्यक्ति को बेरोज़गारी से ठीक पहले निरन्तर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए और बेरोज़गारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए। ·         बेरोज़गारी कदाचार ( misconduct), लॉकआउट , सुपरअन्यूसिएशन (सेवानिवृत्ति) , या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 की व्यवस्था के तहत गलत बयान देने पर दोषी सिद्ध होने के कारण नहीं होनी चाहिए। ·         योजना के तहत दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं ; इनमें दावों का ऑनलाइन सबमिशन और प्रोसेसिंग , लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ( DBT), और लाभों के समय पर भुगतान सुन...

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

शक्ति सुपर-शी के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की युवा समाज सेविका एनी पीटर को राष्ट्र मंच पर सम्मानित किया गया… इस अवसर आयोजकों को विशेष आभार ज्ञापित किया गया

दुर्ग। जिला समन्वयक एनी पीटर ने जानकारी दी की उनको राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम स्थल से युवा कांग्रेस शक्ति टीम के राष्ट्रीय कार्यकारणी एवम प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी डॉ पलक वर्मा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री आकाश शर्मा, प्रदेश समन्वयक आशिका कुजूर व प्रीति वैष्णव द्वारा एनी पीटर को  महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देने के लिए जिला समन्वयक एनी पीटर ने धन्यवाद ज्ञापित किया । ………. उन्होंने बताया कि, भारतीय युवा कांग्रेस की अनूठी पहल 'शक्ति सुपर शी' को लॉन्च हुए एक साल हो गया है. यह कार्यक्रम विशेष रूप से युवा महिला नेताओं को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। इसकी राष्ट्रीय समन्वयक सरीफ रहमान हैं। प्रदेश में शक्ति सुपर शी की जिम्मेदारी प्रदेश महासचिव आशिका कुजूर और प्रीति वैष्णव को दी गई है. एसएसएस सदस्यता अभियान में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त हुआ। …………पूरा पढ़ने के लिए 👇क्लिक करें ………. पिछले एक साल में प्रदेश समन्वयक के रूप में काम करते हुए हमें कुछ प्रतिभाशाली महिलाएं/ लड़कियां मिलीं जो अपने क्षेत्र में कांग्रेस का परचम लहरा रही...

हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने का संकल्प, उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़े का आगाज, राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़ा शुरू

राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरक विभाग में , 1 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा- 2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त सचिव श्री अनुराग रोहतगी के मार्गदर्शन में किया गया , जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री अनुराग रोहतगी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़े की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं , बल्कि देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी कार्मिकों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग राजभाषा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है , इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी क्रम में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अधिक...

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