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हाथ से सफाई करने वालों का पुनर्वास

हाथ से सफाई करने वालों के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार, देश के सभी जिलों में हाथ से सफाई करने वालों का एक नया सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें कोई भी हाथ से सफाई करने वाला (एमएस) नहीं पाया गया है।

हालांकि, 2013 और 2018 में किए गए दो सर्वेक्षणों के दौरान 58,098 हाथ से सफाई करने वालों की पहचान की गई थी। सभी पहचाने गए एमएस को 40,000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से एकमुश्त नकद सहायता (ओटीसीए) का भुगतान किया गया है, जिसमें बिहार के 131 एमएस (0.22%) भी शामिल हैं।वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 14,692 एमएस को ओटीसीए, 9,868 एमएस को कौशल विकास प्रशिक्षण और 1,524 एमएस को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई है। ये विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के दौरान कुछ मौतें हुई हैं, जिसका कारण "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास अधिनियम, 2013" और "हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास नियम, 2013" तथा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत निर्धारित सुरक्षा सावधानियों का पालन न करना है।

सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों (एसएसडब्ल्यू) की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र (नमस्ते) योजना 2023-24 में शुरू की गई है। नमस्ते योजना के तहत श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए उपाय इस प्रकार हैं:

1.   एसएसडब्ल्यू को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट।

2.   एसएसडब्ल्यू को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण।

3.   बड़े शहरी स्थानीय निकायों में आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ईआरएसयू) को सुरक्षा उपकरण।

4.   सफाई कर्मचारियों, उनके अधिकतम पांच सदस्यीय समूहों और निजी स्वच्छता सेवा संचालकों (पीएसएसओ) को स्वच्छता संबंधी मशीनरी के लिए अग्रिम पूंजी सब्सिडी।

5.   सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई की रोकथाम पर कार्यशालाएं।

6.   जिम्मेदार स्वच्छता प्राधिकरण की नियुक्ति।

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (एसबीएम-यू) 2.0, जो 1 अक्टूबर, 2021 को शुरू हुआ, उसमें एक नया घटक, प्रयुक्त जल प्रबंधन (यूडब्ल्यूएम) शामिल किया गया है। इसका एक मकसद सीवर और सेप्टिक टैंकों में खतरनाक पदार्थों के प्रवेश को रोकना और सीवर तथा सेप्टिक टैंकों की सफाई के मशीनीकरण के ज़रिए हाथ से सफाई को स्थायी रूप से खत्म करना है।

अनुलग्नक

अनुलग्नक का संदर्भ राज्यसभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 3021 के भाग (क) के उत्तर में दिया गया है, जिसका उत्तर 18.03.2026 को हाथ से सफाई करने वालों के पुनर्वास के संबंध में दिया जाना था।

पिछले 5 वर्षों के दौरान 2013 और 2018 में किए गए सर्वेक्षण में चिन्हित हाथ से सफाई करने वालों को दी गई एकमुश्त नकद सहायता, कौशल प्रशिक्षण और पूंजीगत सब्सिडी का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:-

क्रमांक

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नाम

2013 और 2018 के सर्वेक्षण के दौरान पहचाने गए एमएस की संख्या

2020-21 से 2024-25 के दौरान लाभान्वित एमएस की संख्या

ओटीसीए

कौशल विकास प्रशिक्षण

पूंजीगत सब्सिडी

1

आंध्र प्रदेश

1793

330

72

0

2

असम

3921

3051

198

2

3

बिहार

131

0

0

0

4

छत्तीसगढ़

3

0

0

0

5

गुजरात

105

0

0

0

6

झारखंड

192

68

0

0

7

कर्नाटक

2927

1046

326

671

8

केरल

518

0

12

0

9

मध्य प्रदेश

510

169

145

0

10

महाराष्ट्र

6325

718

459

9

11

ओडिशा

230

11

0

0

12

पंजाब

231

9

0

10

13

राजस्थान

2673

232

1094

14

14

तमिलनाडु

398

14

0

3

15

उत्तर प्रदेश

32473

6267

6584

348

16

उत्तराखंड

4988

2775

962

22

17

प. बंगाल

680

2

16

445

 

कुल

58098

14692

9868

1524

यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एनएस/डीए (रिलीज़ आईडी: 2242070) आगंतुक पटल : 97 प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026  by PIB Delhi

 

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

भिलाई का आवासीय लीज मामला नियम कानून और प्रशासनिक असहमतियों के उलझनों से बाहर नहीं निकल पा रहा है इसलिए विधि सम्मत वास्तविकता के धरातल पर स्थापित नहीं हो पा रहा है क्योंकि भिलाई में एक ऐसे नेतृत्व का अभाव विगत वर्षों से रहा है जो बीएसपी आवासीय प्रयोजन के लीज मामले को बहुआयामी विधिक दृष्टिकोण से सक्षम न्यायालय और प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सके… अतः ऐसे विधिक घटकों और उनकी विधि निर्देशित भूमिका को हम सभी को जानना और समझना अपेक्षित है l जिस पर भिलाई का महापौर पर्दा डालने का नाकाम प्रयास करता नजर आ रहा है l

सर्वविहित है कि, भारत देश के सभी भूमि का स्वामित्व प्राधिकार भारत के केंद्र शासन में निहित है छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के स्वामित्व वाली भूमि भी इसी केंद्रीय शासन के निर्णायक प्राधिकार का हिस्सा कहे जाने पर किसी का दो मत नहीं हो सकता है इसलिए भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बनाए गए आवासीय भवनों और भूखंडो का प्रथम मालिकाना अधिकार केंद्र शासन में अधिष्ठित होने की विधिमान्यत भी सुस्पष्ट है लेकिन यह भी विधि अपेक्षित है कि, केंद्र सरकार जो भी निर्णय लेगी उसमें राज्य शासन और स्थानीय नगरीय निकाय अर्थात भिलाई नगर निगम व इसी तारतम्य में स्थानीय प्रशासन अर्थात कलेक्टर दुर्ग के पद में निहित निर्णायक प्राधिकार के आधार पर भिलाई इस्पात संयंत्र के लीज मामले में जो निर्णय आएगा वह विधि मान्य होगा l गौर तलब रहे की उक्त उल्लेखित सभी प्राधिकारियों द्वारा लिए जाने वाले समासंयोजित निर्णय को कोई भी न्यायालयीन चुनौती नहीं दे पायेगा लेकिन इस मामले में भिलाई का महापौर खामोश है और कोई भी अधिकृत जानकारी जनता से साझा नहीं कर रहा है इसका क्या क...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

“क्लिनिक”, “क्लिनिकल स्थापना” और “अस्पताल” में अंतर क्या होता है ?

क्या आप जानते है कि, चिकित्सा व्यवसाय को किये जाने के स्थान को कानून ने अलग - अलग नाम क्यों दिए है नर्सिंग एक्ट के तहत “क्लिनिक”, “क्लिनिकल स्थापना” और “अस्पताल” में अंतर क्या होता है ? -------------------------------- “क्लिनिक” से अभिप्रेत है, कोई ऐसा परिसर जिसमें किसी बीमार के इलाज के लिए सुविधाएं उपलब्ध हों और जो उनके प्रवेशन के लिए उपयोग में लाया जाता हो तथा ठहरने के लिए न हो | ----------------------------------- -“क्लिनिकल स्थापना” से अभिप्रेत है, मेडिकल लेबोरेटरी, फिजियोथेरेपी स्थापना अथवा क्लिनिक अथवा अस्पताल अथवा कोई अन्य स्थापना जो इनमें से किसी के भी सदृश्य हो और जिस किसी नाम से जाना जाता हो |   ----------------------------------- “अस्पताल” से अभिप्रेत है, ऐसा कोई परिसर जिसमें बीमारी के इलाज की सुविधाएं हों और जो उनके प्रवेशन या ठहरने के लिए उपयोग में लाया जाता हो

एनएडीए इंडिया ने रायपुर, छत्तीसगढ़ में डोपिंग रोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया

  राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (एनएडीए इंडिया) ने रायपुर , छत्तीसगढ़ में जूनियर नेशनल फेंसिंग चैंपियनशिप के लिए डोपिंग रोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया।   2 जनवरी 2024 को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य युवा एथलीटों और सहायक कर्मियों के बीच डोपिंग रोधी प्रथाओं के बारे में जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना पैदा करना था। सत्र में डोपिंग रोधी नियमों के महत्वपूर्ण पहलुओं , निष्पक्ष खेल के महत्व और डोपिंग नीतियों के उल्लंघन के परिणामों पर चर्चा की गई। इसने स्वच्छ और निष्पक्ष खेलों की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ते हुए , 200 से अधिक प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक शामिल किया और शिक्षित किया। **** एमजी/एआरएम/केपी/एसएस प्रविष्टि तिथि: 02 JAN 2024 by PIB Delhi( रिलीज़ आईडी: 1992503) आगंतुक पटल : 67

अगर आपके मन में यह प्रश्न है कि सामाजिक संगठन क्या होता है ? इसका गठन क्यो किया जाता है ?

समाज-कार्य (social work) या समाजसेवा एक शैक्षिक एवं व्यावसायिक विधा है जो सामुदायिक सगठन एवं अन्य विधियों द्वारा लोगों एवं समूहों के जीवन-स्तर को उन्नत बनाने का प्रयत्न करता है। सामाजिक कार्य का अर्थ है सकारात्मक, और सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके व्यक्तियों की क्षमताओं को बेहतर करना ताकि वे अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करते हुए अपनी तकलीफ़ों को कम कर सकें। इस प्रक्रिया में समाज-कार्य लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने और उन्हें अपने ही मूल्यों की कसौटी पर खरे उतरने में सहायक होता है। 'समाजसेवा'वैयक्तिक आधार पर, समूह अथवा समुदाय में व्यक्तियों की सहायता करने की एक प्रक्रिया है, जिससे व्यक्ति अपनी सहायता स्वयं कर सके। इसके माध्यम से सेवार्थी वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में उत्पन्न अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने में सक्षम होता है। समाजसेवा अन्य सभी व्यवसायों से सर्वथा भिन्न होती है, क्योंकि समाज सेवा उन सभी सामाजिक, आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों का निरूपण कर उसके परिप्रेक्ष्य में क्रियान्वित होती है, जो व्यक्...

6 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य पूरा करने के लिए 700 शी-मार्ट और 1,000 ज़िला फ़ुलफ़िलमेंट सेंटर बनाए जाएंगे

ग्रामीण विकास सचिव ने डे-एनआरएलएम के अंतर्गत मार्केटिंग पहलों की समीक्षा की ; महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने पर बल दियाक्षमता निर्माण , उद्यम को बढ़ावा देना , ओएनडीसी के साथ साझेदारी और वित्तीय समावेशन मुख्य प्राथमिकताएं बनी रहेंगी ग्रामीण विकास विभाग ने छह करोड़ लखपति दीदियों को तैयार करने के लिए एक रणनीति बनाई है। इस रणनीति के मुख्य हिस्से हैं: उद्यम को बढ़ावा देकर आजीविका के बेहतर अवसर सृजित करना , ग्रामीण महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाना , और स्वयं सहायता समूह (शी) के सदस्यों के लिए क्षमता निर्माण , मार्केटिंग गतिविधियों , प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सहायता पर ध्यान देना। भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस पर चर्चा की गई। इस बैठक का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) और इसकी विभिन्न उप-योजनाओं की प्रगति का आकलन करना था। बैठक में संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा और सुश्री जयश्री एम.जी. के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका प्रभाग और राष्ट्रीय मिशन प...

महिला सुरक्षा का प्रश्न: एक ज्वलंत मुद्दा है… जिस पर हम सभी शासन प्रशासन और सामाजिक व्यवस्थाओं पर आरोप तो लगाते रहते है लेकिन… विडंबना यह है कि, महिला सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत तौर आपने क्या किया है ? इस प्रश्न का जवाब हम में से बहुत कम लोगों के पास होगा..! इसलिए आइए महिला सुरक्षा विषय पर अपनी भागीदारी देने के लिए पहल करते हैं कार्यशाला के प्रतिभागी बनकर अपने अनुभव साझा करते हैं…

महिला सुरक्षा आज के समय में एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने समाज में भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर विचार करना और त्वरित समाधान ढूंढना अत्यंत आवश्यक है और इस विषय का सार्थक हाल सभी को भागीदारी से ही मिल सकता है महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुछ मुख्य कारण: लैंगिक भेदभाव:   समाज में लैंगिक भेदभाव गहराई से जमा हुआ है, जिसके कारण महिलाओं को कमजोर और पुरुषों से कमतर समझा जाता है। पैतृकता:   पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व और नियंत्रण का भाव महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक प्रमुख कारण है। शिक्षा का अभाव :  शिक्षा का अभाव महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों के बारे में जागरूक नहीं होने देता, जिसके कारण वे शोषण का शिकार हो जाती हैं। गरीबी:   गरीबी महिलाओं को कमजोर बनाती है और उन्हें अपराधियों का आसान शिकार बना देती है। कानून व्यवस्था में कमियां:   कानून व्यवस्था में कमियां और अपराधियों को सजा न मिलने से महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा मिलता है। नोट : महिला सुरक्षा संबंधित कार्य करने के इच्छुक लोगों के लिए कार्य...

क्या राजनांदगांव का जिला प्रशासन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्वाचन अपराध को दे रहा है खुल्लम-खुल्ला संरक्षण ?

कौन दे रहा है... निर्वाचन अपराध के आरोपी को खुल्लम-खुल्ला संरक्षण ?  इसका अंदाजा लगा लीजिए! छत्तीसगढ़ के लोकसभा चुनाव के द्वितीय चरण के मतदान में, राजनांदगांव जिला भी आता है इसलिए राजनंदगांव में निर्वाचन नामांकन पत्र पर स्कूटनी कार्यवाही पूरी कर ली गई है लेकिन इस स्कूटनी कार्रवाई को प्रश्नांकित करने की परिस्थिति खड़ी हो गई है क्योंकि जिला राजनांदगांव के निर्वाचन स्कूटनी अधिकारी ने अभ्यर्थी भूपेश बघेल के निर्वाचन नामांकन पत्र पर आपत्ति करने वाले समाज सेविका निशा देशमुख और सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे के आपत्ति आवेदन को स्कूटनी कार्यवाही में जमा करने से पहले ही रोक दिया है जिसके कारण भूपेश बघेल के निर्वाचन अपराध को संरक्षित करने वाला गैर-संवैधानिक लाभ मिल गया है क्योंकि... राजनांदगांव के जिला प्रशासन ने अभ्यर्थी भूपेश बघेल के नामांकन पत्र पर की गई लिखित आपत्ती को नजरअंदाज कर दिया गया है परिणाम स्वरूप अभ्यर्थी भूपेश बघेल को नियमानुसार स्पष्टीकरण निर्वाचन आपत्ति कार्यवाही में नहीं देने का अवैधानिक मौका मिल गया है गौरतलब रहे कि, इस मामले में सबसे आपत्तिजनक बात यह है की रिटर्निग अधिक...

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