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पेंशन सखियां घर-घर पहुंचाएंगी पेंशन सुरक्षा, सशक्त होगा ग्रामीण भारत

ग्रामीण विकास विभाग और पीएफआरडीए ने महिलाओं के नेतृत्व वाले एनआरएलएम सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से पेंशन कवरेज विस्तार के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए

ग्रामीण परिवारों में पेंशन जागरूकता और सेवानिवृत्ति सुरक्षा पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने संपूर्ण ग्रामीण भारत में 'पेंशन सखियों' के सामुदायिक-आधारित संपर्क तंत्र के निर्माण और समर्थन हेतु आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री अमित शुक्ल और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण की कार्यकारी निदेशक सुश्री सुमीत कौर कपूर ने ग्रामीण विकास विभाग सचिव श्री रोहित कंसल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

इस साझेदारी का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) के अंतर्गत निर्मित व्यापक सामुदायिक संस्थागत नेटवर्क का लाभ उठाना है, जिसमें इसकी बैंकिंग संवाददाता सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति शामिल हैं, ताकि पेंशन जागरूकता, वित्तीय साक्षरता, नामांकन और नामांकन के बाद सहायता को ग्रामीण परिवारों के करीब लाया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की संस्थागत संरचना की शक्ति का उपयोग करके पेंशन कवरेज में एक मूलभूत चुनौती का समाधान निकालते हुए उन परिवारों तक पहुंचना जिनकी औपचारिक वित्तीय सलाह और सेवानिवृत्ति योजना सेवाओं तक सीमित पहुंच हो सकती है। इस साझेदारी के अंतर्गत, पेंशन सखियां विश्वसनीय सामुदायिक स्तर के सूत्रधार के रूप में कार्य करेंगी, विशेष रूप से एसएचजी सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण प्रतिभागियों तक पहुंचेंगी। वे परिवारों को पेंशन और सेवानिवृत्ति योजना संबंधी जानकारी प्रदान करेंगी, नामांकन में सहायता करेंगी और पेंशन संबंधी सेवाओं को समझने में सहायता प्रदान करेंगी।

इस अवसर पर अपने संबोधन में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूह अभियान में भाग लेने वाले ग्रामीण परिवारों की बचत के विशिष्ट तरीके, आजीविका चक्र और जोखिम प्रोफाइल होते हैं, और इसलिए सामाजिक सुरक्षा को सतत समृद्धि के मिशन के व्यापक उद्देश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए।

 उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक सुरक्षा केवल असुरक्षा से बचाव ही नहीं है अपितु यह परिवारों को निरंतर आर्थिक उन्नति प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास और सुदृढ़ता प्रदान करने से भी जुड़ी है।श्री कंसल ने कहा कि पेंशन के प्रति जागरूकता और वित्तीय साक्षरता ईमानदारी, पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि ग्रामीण नागरिकों को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें।

सुश्री ममता शंकर ने बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलते जनसांख्यिकीय पैटर्न के संदर्भ में सेवानिवृत्ति नियोजन के महत्व पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए आशा जताई कि यह साझेदारी औपचारिक सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा तंत्र से बाहर रहने वाले ग्रामीण परिवारों के बीच राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) सहित पेंशन उत्पादों के बारे में जागरूकता और उन्हें अपनाने में उल्लेखनीय सुधार लाएगी।

इस सहयोग से डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल एवं वेब आधारित समाधानों के माध्यम से पहुंच और नामांकन की निगरानी को भी मजबूती मिलेगी, जिसमें विभाग की अपनी लोकोस प्रणाली भी शामिल है। इससे सहभागी संस्थानों को प्रगति का पता लगाने और कवरेज में कमियों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। सामुदायिक स्तर पर पहुंच को निगरानी और सेवा वितरण के लिए उपयुक्त डिजिटल प्रणालियों द्वारा समर्थित किया जाएगा।

यह समझौता ज्ञापन पेंशन विनियमन और सेवानिवृत्ति सुरक्षा प्रणालियों में पीएफआरडीए की विशेषज्ञता और महिला संगठनों और प्रशिक्षित जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के माध्यम से डे-एनआरएलएम की अद्वितीय सामुदायिक पहुंच जैसी दो पूरक शक्तियों को एक साथ लाता है। यह साझेदारी इस संस्थागत पहुंच को ग्रामीण भारत में सतत पेंशन जागरूकता और नामांकन अभियान में परिवर्तित करने का प्रयास करती है। यह पहल मिशन के सामुदायिक कार्यकर्ताओं की भूमिका में बैंकिंग और आजीविका तक पहुंच को सुगम बनाने से लेकर ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता बनाने में सहायता करने तक एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाती है।

भारत के ग्रामीण परिवार औपचारिक वित्तीय प्रणालियों में अधिकाधिक रूप से भाग ले रहे हैं, लेकिन बैंकिंग तक पहुंच का मतलब यह नहीं है कि सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त योजना भी बन जाए। कृषि, अनौपचारिक रोजगार और लघु उद्यमों पर निर्भर कई परिवारों की आय अनियमित होती है और आर्थिक झटकों से प्रभावित हो सकती है। इसलिए, जागरूकता बढ़ाना और समय रहते, सोच-समझकर पेंशन योजनाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना परिवारों की वित्तीय मजबूती का एक महत्वपूर्ण घटक बन सकता है। यह पहल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच से आगे बढ़कर सोच-समझकर भागीदारी, दीर्घकालिक बचत और वित्तीय मजबूती की ओर ग्रामीण वित्तीय समावेशन के एजेंडे में एक व्यापक बदलाव लाने में योगदान देगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग और पीएफआरडीए के बीच 14 सितंबर, 2026 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

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पीके/केसी/एसएस/एसके प्रविष्टि तिथि: 15 SEP 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2310343) आगंतुक पटल : 133

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यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

प्रेस एवं पुस्तक अधिनियम के… विधि निर्देश की धज्जियां उड़ाई भूपेश बघेल सरकार ने…प्रेस एवं पुस्तक रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1867 की धारा 5 में स्पष्ट किया गया है की समाचार पत्रों के प्रकाशन के बारे में नियम ( भारत में कोई भी समाचार पत्र ) इसमें इसके पश्चात अभिकथित नियमों के अनुरूप ही प्रकाशित किया जायेगा अन्यथा नहीं (विवरण अग्रलिखित है) लेकिन छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल सरकार ने… इस अधिनियम के विधि निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की और छत्तीसगढ़ के सामाजिक परिवेश में…

भूपेश बघेल सरकार ने पत्रकारिता जगत की आधारभूत आवश्यकताओं और मानकों को संरक्षित और अभिप्रमाणित करने की कार्यवाही को… निष्पक्ष शासकीय निर्णय क्षमता वाला प्रजातांत्रिक आधार नहीं दिया… पढ़िए क्या कहता है अधिनियम... उद्देशिका मुद्रणालयों तथा समाचारपत्रों के विनियमन के लिए भारत में मुद्रित प्रत्येक पुस्तक तथा समाचारपत्र) की * प्रतियों के परिरक्षण के लिए था ऐसी पुस्तकों तथा समाचारपत्रों के रजिस्ट्रीकरण के लिए उपबन्ध करना समीचीन है अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है  *************** पंजीयन प्रक्रिया का विधि निर्देश  प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 की धारा 5.   समाचारपत्रों के प्रकाशन के बारे में नियम- [भारत] में कोई भी [समाचारपत्र], इसमें इसके पश्चात् अधिकथित नियमों के अनुरूप ही प्रकाशित किया जाएगा, अन्यथा नहीं: ************ धारा 5..(1) धारा 3 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे प्रत्येक समाचारपत्र की प्रत्येक प्रति पर उसके स्वामी तथा उसके सम्पादक के नाम तथा उसके प्रकाशन की तारीख भी स्पष्ट मुद्रित होगी ।] (संद...

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

साइबर अपराध पर जागरूकता फैलाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं जिसमें अन्य बातों के अलावा, एसएमएस, आई4सी सोशल मीडिया अकाउंट यानी एक्स (पूर्व में ट्विटर) (@साइबरदोस्त), फेसबुक (साइबरदोस्तआई4सी), इंस्टाग्राम (साइबरदोस्तआई4सी), टेलीग्राम (साइबरदोस्तआई4सी), रेडियो अभियान के जरिए संदेशों का प्रसार, कई माध्यमों में प्रचार के लिए माईगव को शामिल करना, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से साइबर सुरक्षा और सुरक्षा जागरूकता सप्ताह का आयोजन, किशोरों/छात्रों के लिए हैंडबुक का प्रकाशन आदि शामिल है।

    साइबर अपराध भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मुख्य रूप से अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से साइबर अपराध सहित अपराधों की रोकथाम , उसका पता लगाने , उसकी जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की पहलों को उनकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) की क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सलाह और वित्तीय सहायता के माध्यम से पूरक बनाती है। साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने हेतु तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं , जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं: i. गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई 4 सी) की स्थापना की है। ii. मेवात , जामताड़ा , अहमदाबाद , हैदराबाद , चंडीगढ़ , विशाखापत्तनम और गुवाहाटी के लिए आई 4 सी के तहत सात संयुक्त साइबर समन्वय दल (जेसीसी...

भूमि अधिग्रहण के लिए उचित मुआवजा

  भूमि का मुआवजा ; भूमि अधिग्रहण , पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 के प्रावधानों के अनुसार तय किया जाता है , जो भूमि के निर्धारित बाजार मूल्य से 2 से 4 गुना अधिक होता है। - प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को आम तौर पर किसानों द्वारा मजबूत प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा है। हालांकि पंजाब के कुछ मामलों समेत कुछ अन्य मामलों में मुआवजे में वृद्धि को लेकर किसानों द्वारा विरोध की सूचना मिली है। यद्यपि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि का अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम , 1956 के प्रावधानों के तहत किया जाता है , लेकिन भूमि का मुआवजा ; भूमि अधिग्रहण , पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 के प्रावधानों के अनुसार तय किया जाता है , जो भूमि के निर्धारित बाजार मूल्य से 2 से 4 गुना अधिक होता है। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। *** एमजी/एमएस/आरपी/जेके/एचबी/एसके प्रविष्टि तिथि: 09 AUG 2023 by ...

भारत का चीनी उद्योग

सेक्टर, वैल्यू चेन और हाल ही में मूल्य वृद्धि के कारणों का विश्लेषण भारत का चीनी उद्योग: एक नज़र में भारत का चीनी उद्योग कृषि , उद्योग और ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा इकोसिस्टम है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। गन्ना सेक्टर लगभग 5 करोड़ किसानों और चीनी मिलों व उनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले करीब  5 लाख श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार , वर्ष 2025-26 में भारत का गन्ना उत्पादन 500 एमएमटी तक पहुँच गया है। वर्ष 2015-16 में 348.44 एमएमटी उत्पादन की तुलना में , यह पिछले 10 वर्षों में लगभग 43.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। गन्ने की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल भी 2015-16 के 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भारत के शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य हैं। भारत ने 2016-17 के 0.47 लाख एमटी की तुलना में , 2025-26 में 8 लाख एमटी चीनी का निर्यात किया। सरकार...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दी, पहली बार काम करने वालों को दो किस्तों में एक महीने का वेतन अधिकतम 15,000 रुपये मिलेगा

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दी सभी क्षेत्रों में रोजगार सृजन , रोजगार क्षमता और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने की योजना विनिर्माण क्षेत्र पर जोर और पहली बार काम करने वालों के लिए प्रोत्साहन पहली बार काम करने वालों को दो किस्तों में एक महीने का वेतन अधिकतम 15,000 रुपये मिलेगा एक लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार के सृजन को समर्थन देने की योजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए सभी क्षेत्रों में रोजगार सृजन , रोजगार क्षमता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत , जहां पहली बार रोजगार करने वाले कर्मचारियों को एक महीने का वेतन (15,000 रुपये तक) मिलेगा , वहीं नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए दो साल की अवधि के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा , साथ ही विनिर्माण क्षेत्र के लिए दो साल के लिए विस्तारित लाभ दिया जाएगा। ईएलआई योजना की घोषणा केंद्रीय बजट ...

प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए एआई सहायता प्राप्त लोक शिकायत निवारण प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) विकसित करने के लिए 128 करोड़ रुपये और प्रशासनिक सुधारों के लिए 107 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई

  सरकार ने अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए डीएआरपीजी की प्रशासनिक सुधार योजना के लिए दो वर्षों ( 2024-25 और 2025-26) के लिए 235.10 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए एआई सहायता प्राप्त लोक शिकायत निवारण प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) विकसित करने के लिए 128 करोड़ रुपये और प्रशासनिक सुधारों के लिए 107 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई सेवाओं की शत-प्रतिशत आपूर्ति , अंतिम व्य क्ति तक निर्बाध सेवा वितरण , कुशल निर्णय लेने के लिए सरकारी प्रक्रिया की पुनर्रचना , ज्ञान साझा करने वाले मंचों को मजबूत करना आदि नई योजना के कुछ प्रमुख घटक हैं सरकार ने 15 वें वित्त आयोग के अगले दो वर्षों ( 2024-25 और 2025-26) में लागू की जाने वाली डीएआरपीजी की प्रशासनिक सुधारों की संशोधित योजना के लिए 235 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दे दी है। यह योजना विकसित भारत की नई आकांक्षाओं के अनुरूप अगली पीढ़ी के महत्वाकांक्षी प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाएगी। प्रशासनिक सुधारों के लिए संशोधित योजना में 2 कार्यक्षेत्र है...

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