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भारत का एआई गौरव- भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है।


 20,000 अतिरिक्त जीपीयू भारत के एआई नेतृत्व के अगले चरण को क्षमता प्रदान करेंगे

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है। 17 फरवरी 2026 को, नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित की जा रही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत अपनी कंप्यूट क्षमता को वर्तमान 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) से आगे बढ़ाएगा, और आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़े जाएंगे। यह घोषणा सिर्फ तकनीकी नहीं अपितु रणनीतिक थी। इसने संकेत दिया कि भारत इरादे के साथ आगे बढ़ रहा है और स्वयं की दुनिया की नेतृत्वकारी एआई शक्तियों में मजबूती से जगह बना रहा है।

यह घोषणा सम्मेलन के दूसरे दिन की गई और इसका विषय था-सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय अर्थात सबका हित, सबकी प्रसन्नता। इस आयोजन को पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी एआई भागीदारी कहा जा रहा है। भारत मंडपम के अंदर, ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिख रही थी। इस दौरान होने वाले वार्तालाप सुस्पष्ट, भविष्य की सोच से परिपूर्ण और क्रियाशीलता पर आधारित थे। मंत्री महोदय ने कहा कि कंप्यूट बुनियादी ढांचे का विस्तार, भारत की एआई रणनीति के अगले चरण को दिखाता है, जिसमें ज़्यादा क्षमता को ज़िम्मेदारी से तैनाती के साथ जोड़ा गया है। इसका विषय प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि इसने इम्पैक्ट समिट 2026 का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

भारत का तरीका दुनिया भर में सबसे अलग है। कई देशों में, अत्याधुनिक एआई बुनियादी ढांचा कुछ ही कॉर्पोरेशनों के हाथों में है और वही यह तय करते हैं कि कौन नव परिवर्तन लाएगा जबकि भारत एक अलग मॉडल बना रहा है, जो 10,300 करोड़ से ज्यादा रुपए के इंडिया एआई मिशन पर आधारित है और यह आमजन के हित के लिए उत्तरदायी एआई तक पहुंच बढ़ा रहा है और उसे संभव बना रहा है। इस अभियान के अंतर्गत, वर्तमान 38,000 से ज़्यादा हाई-एंड जीपीयू 65 रुपए प्रति घंटे पर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे स्टार्टअप्स, अनुसंधानकर्ताओं, छात्रों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए कंप्यूट की बाधाऐं कम हुई हैं। वास्तव में, यह एक मज़बूत विश्वास को दिखाता है कि प्रौद्योगिकी का प्रजातंत्रीकरण करना किया जाना चाहिए।

मंत्री महोदय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पांचवीं औद्योगिक क्रांति को आगे बढ़ा रहा है। इसका असर कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, विनिर्माण, शासन और जलवायु के लिए कार्यान्वयन पर पड़ेगा। भारत इस क्रांति से अलग नहीं रह सकता बल्कि वह इसे सक्रिय रूप से आकार दे रहा है। जीपीयू क्षमता का बढ़ना एक ऐसे देश को दिखाता है जो महत्वाकांक्षा को बुनियादी ढांचे से और अवधारणा को  निष्पादन से जोड़ने का दृढ संकल्प रखता है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो के उद्घाटन के साथ 16 फरवरी 2026 से इस सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसका अर्थ बेहद सशक्त था। वैश्विक दक्षिण में एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी का शुभारंभ हो रहा था और इसका नेतृत्व भारत कर रहा है। संदेश स्पष्ट और दृढ संकल्पित था। एआई में नेतृत्व अब सिर्फ़ पारंपरिक सत्ता केन्द्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि नई आवाज़ें एजेंडे को आकार दे रही हैं।

यह सम्मेलन 20 से ज़्यादा राष्ट्राध्यक्षों, 60 मंत्रियों और 500 अंतर्राष्ट्रीय एआई प्रमुखों की एक साथ भागीदारी का साक्षी बन रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ। नीति निर्माता नीति विशेषज्ञों से जुड़ रहे हैं। अभिनवकर्ता शैक्षिक और उद्योग प्रमुखों से संवाद कर रहे हैं। यह सम्मेलन अभिनव विचारों, साझेदारी और वचनबद्धता के लिए एक भेंट मंच बन गया है। यह प्रत्यक्ष है कि दुनिया सिर्फ़ भारत की एआई यात्रा को न सिर्फ देख ही नहीं रही है बल्कि इससे जुड़ भी रही है।

यह उत्साह औपचारिक रूप से होने वाले सत्र से कहीं अधिक है। सिर्फ़ सम्मेलन के पहले दिन, पूरे भारत में 2.5 लाख से ज़्यादा छात्रों ने उत्तरदायी अभिनव के लिए एआई का उपयोग करने का संकल्प लिया। इस पहल को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में पहचान के लिए भेजा गया है। एक साथ संकल्प लेते हुए छात्रों की तस्वीर ने एक ऐसे देश की भावना को दिखाया जो उत्तरदायित्व और पूर्ण आशा के साथ एआई को अपना रहा है। एक नई पीढ़ी आगे आकर इसका नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

निवेश की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी है। माननीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने पूर्ण आशा व्यक्त है कि अगले दो वर्षों में भारत के एआई  इकोसिस्टम में 200 बिलियन अमरीकी डॉलर से ज़्यादा का निवेश आने की संभावना है। उद्यम पूंजी फर्म एआई स्टैक की सभी पाँच लेयर में डीप टेक स्टार्टअप्स को निधि प्रदान कर रही हैं। बड़े सॉल्यूशन और बड़े एप्लिकेशन को सहायता मिल रही है। इसके प्रति रूझान का स्तर भारत के एआई परिवेश में वैश्विक भरोसे का संकेत देता है।

निवेश का भरोसा ज़मीनी स्तर पर प्रौद्योगिक क्षमता के अनुरूप है। भारत के सॉवरेन एआई मॉडल्स इस सम्मेलन का विशेष बिन्दु बनकर उभरे हैं। यहां शुरू किए गए कई मॉडल्स को वैश्विक मानकों पर पूरी तरह से जांचा गया है। कई बड़े अंतर्राष्ट्रीय सिस्टमों से तुलना में कई भारतीय मॉडल को कई मानकों पर बेहतर रेटिंग मिली है। यह कोई धीरे-धीरे होने वाली प्रगति नहीं है। यह प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता है। यह स्वदेशी योग्यता से परिपूर्ण एक गंभीर अंतर्राष्ट्रीय एआई राष्ट्र के रूप में भारत के उभरने को और सुदृढ़ करता है।

वैश्विक पहचान से महत्व और बढ़ता है। स्टैनफ़ोर्ड ने भारत को दुनिया के टॉप तीन एआई राष्ट्रों में जगह दी है। भारत को तेज़ी से एक ऐसे हब के तौर पर देखा जा रहा है जहां योग्यता, नीति और बुनियादी ढांचा एक साथ आते हैं। 38,000 से 58,000 से अधिक जीपीयू तक का विस्तार उस बुनियाद को मज़बूत करता है और एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत नेतृत्व के लिए तैयार हो रहा है।

इस नेतृत्व के मूल में प्रजातंत्रीकरण है। एआई के प्रजातंत्रीकरण का अर्थ सिर्फ़ तैयार एप्लिकेशन्स तक पहुंच से कहीं ज़्यादा है। इसमें कंप्यूट पावर, डेटासेट और मॉडल इकोसिस्टम तक पहुँच शामिल है। जब ये ज़रूरी संसाधन व्यापक स्तर पर और सस्ती कीमतों पर मिलते हैं, तो अभिनव फलता-फूलता है। स्टार्टअप्स विश्वास के साथ से प्रयोग कर सकते हैं। अनुसंधानकर्ता व्यापक विचारों को का परीक्षण कर सकते हैं। सार्वजनिक संस्थान ऐसे एआई समाधान प्रदान कर सकते हैं जो लाखों लोगों तक पहुंचते हैं। अवसंरचना सशक्तिकरण बन जाती है।

इस सम्मेलन का बौद्धिक प्रारूप तीन बेसिक सूत्रों पर आधारित है। प्रथम है व्यक्ति, जो इस बात पर बल देता है कि एआई  को अपनी पूरी विविध क्षमता के साथ इंसानियत की सेवा करनी चाहिए, साथ ही सम्मान और सबको साथ लेकर चलने के भाव को बनाए रखना चाहिए। दूसरा है पृथ्वी या ग्रह, जो यह सुनिश्चित करता है कि अभिनव परिवेश प्रबंधन और स्थायित्व एक दूसरे के पूरक हों। तीसरा है प्रगति, जो इस बात पर बल देती है कि एआई के लाभ सभी समाजों में बराबर बांटे जाने चाहिए। ये सिद्धांत मिलकर महत्वाकाक्षा को ज़िम्मेदारी के साथ एक सूत्र में बांधते हैं।

इन सूत्रों के आधार पर, सात चक्रों के संदर्भ में बातचीत होती है जो दर्शन को क्रियान्वयन में बदलती है। मानव पूंजी चक्र एक समान एआई पुनःकौशल इकोसिस्टम बनाने और एआई अर्थव्यवस्था के लिए कार्यबल को तैयार करने पर ध्यान केन्द्रित करता है। समाजिक अधिकारिता चक्र के लिए समावेशन ऐसे सहभागी एआई समाधान खोजता है जो अंतिम छोर तक सेवा डिलीवरी को मज़बूत करते हैं। ये चर्चाएँ व्यवहारिक और भविष्योन्मुख हैं।

सुरक्षित और विश्वसनीय एआई  चक्र अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों को अंतर-संचालित शासन प्रारूप बदलने, घरेलू निगरानी को मज़बूत करने और नवोन्मेष को संभव बनाने पर ध्यान देता है। अनुकूलता, नवोन्मेष और दक्षता चक्र बड़े एआई  सिस्टम से पैदा होने वाली पर्यावरण और संसाधन की चुनौतियों का समाधान निकालता हुए यह सुनिश्चित करता है कि विकास निरंतर और स्थिर रूप से बना रहे। ये बाहरी चिंताएँ नहीं हैं। ये दीर्घकालिक नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं।

विज्ञान चक्र का उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु क्लाइमेट में खोज को तेज़ करने के लिए एआई का उपयोग करना है, साथ ही अनुसंधान क्षमता तक पहुंच में असमानताओं को ठीक करना है। प्रजातंत्रीकरण एआई संसाधन चक्र अंतर्राष्ट्रीय एआई मूल्य श्रृंखला में बराबर की भागीदारी की सोच रखता है। आर्थिक वृद्धि और समाजिक बेहतरी चक्र के लिए एआई ऐसे उच्च प्रभाव वाले मामलों की पहचान करता है जो अर्थव्यवस्था और समुदाय को बदल सकते हैं। हर चक्र एआई को ऐसे परिणामों से जोड़ने के भारत के दृढ़ संकल्प को दिखाता है जिन्हें मापा जा सके।

परिणामों के लिए यह वचनबद्धता सम्मेलन में हुई एक बड़ी घोषणा में दिखाई दी। भारत सरकार ने 6 सेक्टोरल एआई इम्पैक्ट केसबुक जारी कीं, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा, लैंगिक सशक्तिकरण, शिक्षा, कृषि और सुलभता जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में 170 से ज़्यादा डिप्लॉय और स्केलेबल एआई नवोन्मेष दिखाती हैं। ये केसबुक प्रोटोटाइप या पायलट आइडिया नहीं दिखातीं। वे पहले से ही परिणाम देने वाले समाधान को प्रदर्शित करती हैं, और परीक्षित मॉडल का एक कलेक्शन प्रदान करती  हैं जिन्हें कॉपी और स्केल किया जा सकता है।

यह गति सिर्फ़ दस्तावेजीकरण तक ही नहीं थमती है इसे लागू करने की भावना भी इस सम्मेलन की उच्च प्रभावी पैनल चर्चा में भी जारी रही, जहाँ सिद्धांतों और सिद्ध हो चुके मॉडल्स की जाँच की गई, उन्हें बेहतर बनाया गया और क्षेत्र की अहम मुद्दों के साथ जोड़ा गया। रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने एआई समर्थ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दो सत्र रखे, जिसमें भारत और उसके बाहर के लिए समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए सहयोगात्मक मॉडलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, साथ ही सरल और सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल डिलीवरी पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने देखा कि कैसे एआई कैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत कर सकता है और अलग-अलग इलाकों में पहुँच बढ़ा सकता है।

सम्मेलन के दूसरे दिन, 'एआई इन गर्वनेंस: रिवोल्यूशनाइजिंग गर्वमेन्ट एफिशिएंसी' शीर्षक से सत्र में  में दुनिया भर के अनुसंधानकर्ता और वरिष्ठ नीति निर्माता एक साथ एक मंच पर इस मंथन के साथ एकत्रित हुए कि किस प्रकार से एआई व्यापक स्तर पर सार्वजनिक सेवा डिलीवरी को मज़बूत कर सकता है। यह चर्चा शुरूआती और सैद्धातिंक विचारों से कहीं अधिक सकारात्मक रही। वक्ताओं ने मापनीय असर, कड़े मूल्यांकन और ज़िम्मेदारी से उपयोग पर बल दिया। चर्चा का पूरा ध्यान पूरी सरकार में सिस्टम स्तर की तैयारी पर था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई समावेशन सोच-समझकर, पहुँच के भीतर और जबावदेह हो।

इसका ध्यान सिर्फ सिस्टम और सर्विस डिलीवरी तक ही सीमित नहीं रहा अपितु यह लोगों और कार्य  के भविष्य तक विस्तारित था। एआई के दौर में रोजगार के भविष्य पर एक उच्च स्तरीय सत्र हाई- में नीति निर्माताओं, उदयोग प्रमुख, शिक्षक और नवोन्मेषक एक साथ आए। चर्चा में छोटे तकनीक कौशल से व्यक्तियों की योग्यता को बढ़ाने के लिए बदलाव पर बल दिया गया। एआई के दौर में भारत की डेमोग्राफिक क्षमता का भी निरंतर उल्लेख करते हुए इसे एक बड़ा लाभकारी पक्ष बताया गया।

एल्गोरिदम टू आउटकम शीर्षक वाले सत्र में, वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कंप्यूट, मॉडल्स और डेटा से ऐसी डिप्लॉयेबल एप्लिकेशन बननी चाहिए जो उत्पादकता बढ़ाएं, शासन को मज़बूत करें और नागरिकों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाएं। इसी तरह, स्केलिंग इम्पैक्ट फ्रांम इंडियाज सोवरन एआई एंड डेटा पर चर्चा में यह जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया कि भारत कैसे मुख्य रूप से एआई का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर वाले सिस्टम का निर्माता बन सकता है।

इन वार्तालाप के दौरान, यह भी स्पष्ट हुआ कि इतने व्यापक स्तर की महत्वाकांक्षा के लिए इतने बड़े बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की ज़रूरत होती है।

जैसे-जैसे सम्मेलन आगे बढ़ रहा है, 20,000 जीपीयू का जुड़ना एक अहम पड़ाव है। यह इसका स्तर दिखाता है। यह इसकी पहुँच दर्शाता है। सबसे बढ़कर, यह विश्वास दिखाता है। भारत धीरे-धीरे होने वाली प्रगति से संतुष्ट नही है। यह त्वरित और एक उद्देश्यपूर्ण स्पष्ट नीति के साथ अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। बुनियादी ढांचे के विस्तार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एक मज़बूत नैतिक प्रारूप के साथ, भारत स्वयं को एक नेतृत्वकारी वैश्विक एआई राष्ट्र के रूप में सिद्ध कर रहा है, जो एक ऐसा भविष्य बनाने के लिए दृढ़ संकल्प रखता है जहाँ नवोन्मेष सभी का कल्याण, समृद्धि और साझा प्रगति लेकर आए।

संदर्भ:

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पीआईबी शोधपीके/केसी/एसएस प्रविष्टि तिथि: 17 FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2229482) आगंतुक पटल : 183

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पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

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·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है।

  भारत-न्यूजीलैंड एफटीए 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार , प्रौद्योगिकी और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी,  पहले दिन से न्यूजीलैंड को भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क,  कपड़ा , चमड़ा , जूते , इंजीनियरिंग सामान और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश से खेतों से लेकर कारखानों तक को लाभ मिलेगा रोजगार , निवेश और आवागमन को बढ़ावा मिलने से भारत के युवाओं , महिलाओं , किसानों और सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए , भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इस एफटीए पर 27 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम , नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।आज , केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं नि...

शक्ति सुपर-शी के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की युवा समाज सेविका एनी पीटर को राष्ट्र मंच पर सम्मानित किया गया… इस अवसर आयोजकों को विशेष आभार ज्ञापित किया गया

दुर्ग। जिला समन्वयक एनी पीटर ने जानकारी दी की उनको राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम स्थल से युवा कांग्रेस शक्ति टीम के राष्ट्रीय कार्यकारणी एवम प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी डॉ पलक वर्मा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री आकाश शर्मा, प्रदेश समन्वयक आशिका कुजूर व प्रीति वैष्णव द्वारा एनी पीटर को  महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देने के लिए जिला समन्वयक एनी पीटर ने धन्यवाद ज्ञापित किया । ………. उन्होंने बताया कि, भारतीय युवा कांग्रेस की अनूठी पहल 'शक्ति सुपर शी' को लॉन्च हुए एक साल हो गया है. यह कार्यक्रम विशेष रूप से युवा महिला नेताओं को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। इसकी राष्ट्रीय समन्वयक सरीफ रहमान हैं। प्रदेश में शक्ति सुपर शी की जिम्मेदारी प्रदेश महासचिव आशिका कुजूर और प्रीति वैष्णव को दी गई है. एसएसएस सदस्यता अभियान में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त हुआ। …………पूरा पढ़ने के लिए 👇क्लिक करें ………. पिछले एक साल में प्रदेश समन्वयक के रूप में काम करते हुए हमें कुछ प्रतिभाशाली महिलाएं/ लड़कियां मिलीं जो अपने क्षेत्र में कांग्रेस का परचम लहरा रही...

महापौर की मनमानी और एकाधिकार पर अंकुश लगाने के लिए... एक जागरूक और निगम अधिनियम का जानकर पार्षद निगम की आम सभा में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है... क्योंकि पार्षद के पास है अचूक विधि निर्देश जिसका नाम है छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ३. कार्यसूची इसको पढ़ लीजिये

छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ३. कार्यसूची :- नगरपालिका के सम्मिलन की कार्यसूची के संबंध में स्पष्ट विधि निर्देश है की :- नगरपालिका के सम्मिलन के लिए सुचना में सम्मिलित की जाने वाली कार्यसूची निम्नानुसार होगी,- क) पूर्ववर्ती सम्मिलन के कार्यवृत्त की पुष्टि करना, यदि उसकी पुष्टि उस सम्मिलन में न हुई हो; ख) पार्षदों द्वारा पूछे गये प्रश्न तथा उनके उत्तर; ग) महत्त्वपूर्ण पत्र व्यवहार के संबंध में जानकारी ; घ) कार्यसूची के शेष कामकाज जो पूर्ववर्ती सम्मिलन में संपादित न किये जा सके हों; ङ) समितियों या मुख्य कार्यपालन अधिकारी   द्वारा प्रस्तुत सुझाव तथा प्रस्ताव; च) पार्षदों द्वारा लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव :- परन्तु यह कि किसी विशेष सम्मिलन में सुचना में विनिर्दिष्ट कमाक्ज के सिवाय कोई अन्य कामकाज संपादित नहीं किया जाएगा: परन्तु यह और कि लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव केवल साधारण सम्मिलन में ही रखा जायेगा | पार्षद का व्यक्तित्व निगम सम्मिलन में उजागर हो ...

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

 “जब कोई हुनर एक नया अवसर लेकर आता है” जिन गांवों में परिवारों का भविष्य काफी हद तक फसल पर निर्भर करता है , वहां कोई हुनर सीखने से आमदनी के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। गांवों के कई युवाओं के लिए यह सफर सीखने , काम करने और कमाई के नए अवसर तलाशने से शुरू होता है। यहीं पर ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 25 सितंबर 2014 को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू की गई डीडीयू-जीकेवाई योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के युवाओं पर केंद्रित है। यह योजना टिकाऊ आजीविका के लिए प्लेसमेंट से जुड़ी कौशल प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करती है। यह कार्यक्रम 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए है और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। कामकाज की बदलती दुनिया के साथ यह कार्यक्रम भी लगातार विकसित हो रहा है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग की अगुवाई वाली प्रशिक्षण व्यवस्था , दीर्घकालिक रोजगार , नौकरी मिलने के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन और नए कौशल प्रद...

एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल आसानी से दिलाने के लिए TReDS पर CGTMSE गारंटी कवर शुरू

M1xchange, RXIL और DTX (KredX) के साथ इंटीग्रेशन से योग्य माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ( MSEs) को तेज़ी से और टेक्नोलॉजी-आधारित क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकेगा। केंद्रीय बजट में ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम ( TReDS) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट गारंटी कवर देने की घोषणा के तहत , माइक्रो , स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के इनवॉइस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी की सुविधा शुरू की है। MSME मंत्रालय के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज ( CGTMSE) पोर्टल को अब TReDS इकोसिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है , और क्रेडिट गारंटी कवरेज अब तीन प्लेटफॉर्म - M1xchange, RXIL और DTX (KredX) - पर उपलब्ध है। यह MSME मंत्रालय और CGTMSE द्वारा शुरू की गई सबसे तेज़ टेक्नोलॉजी-आधारित सुविधाओं में से एक है ; इससे माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट आसानी से मिल सकेगा और वे TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए तेज़ी से वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकेंगे। तीन प्लेटफॉर्म पर CGTMSE गारंटी कवर की हाल ही में शुरू हुई सुविधा का मकसद ...

धरती माता को प्लास्टिक कचरे से बचाने वाली पर्यावरण संरक्षक योद्धा श्रद्धा साहू ने जन जागरूकता लाने के लिए बढ़ाया अगला कदम…

प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें, और कचरा हम रोजाना हमारी धरती माता पर फैलाते है इसलिए प्लास्टिक का ये कचरा हमारे ग्रह को नुकसान पहुंचा रहा है। यह जानवरों को मार रहा है और हमें भी बीमार कर रहा है। ***************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇 ****************************** सहभागिता दीजिए   सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहूने प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न खतरे की जानकारी देते हुए बताया की छत्तीसगढ़ को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराने के लिए राज्य स्तरीय मुहिम में सभी की सहभागिता सुनिश्चित होने से प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है ! हम सब मिलकर इसे रोक सकते हैं। ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇 ****************************** पृथ्वी माता को बचाने के कुछ आसान उपाय हैं जिन्हे हम आपसी सहभागिता बनाकर पर्यावरण संरक्षण कर सकते हो: कपड़े की थैली ️ले जाओ,  प्लास्टिक की नहीं। स्टील पानी की बोतल का इस्तेमाल करो। प्लास्टिक बोतल का प्रयोग बंद करो । प्लास्टिक के स्ट्रॉ को कहो, “ना”! प्लास्टिक वाले सामान बेहद जरूरी हो तो ही खरीदो...

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