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भारत का एआई गौरव- भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है।


 20,000 अतिरिक्त जीपीयू भारत के एआई नेतृत्व के अगले चरण को क्षमता प्रदान करेंगे

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है। 17 फरवरी 2026 को, नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित की जा रही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत अपनी कंप्यूट क्षमता को वर्तमान 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) से आगे बढ़ाएगा, और आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़े जाएंगे। यह घोषणा सिर्फ तकनीकी नहीं अपितु रणनीतिक थी। इसने संकेत दिया कि भारत इरादे के साथ आगे बढ़ रहा है और स्वयं की दुनिया की नेतृत्वकारी एआई शक्तियों में मजबूती से जगह बना रहा है।

यह घोषणा सम्मेलन के दूसरे दिन की गई और इसका विषय था-सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय अर्थात सबका हित, सबकी प्रसन्नता। इस आयोजन को पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी एआई भागीदारी कहा जा रहा है। भारत मंडपम के अंदर, ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिख रही थी। इस दौरान होने वाले वार्तालाप सुस्पष्ट, भविष्य की सोच से परिपूर्ण और क्रियाशीलता पर आधारित थे। मंत्री महोदय ने कहा कि कंप्यूट बुनियादी ढांचे का विस्तार, भारत की एआई रणनीति के अगले चरण को दिखाता है, जिसमें ज़्यादा क्षमता को ज़िम्मेदारी से तैनाती के साथ जोड़ा गया है। इसका विषय प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि इसने इम्पैक्ट समिट 2026 का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

भारत का तरीका दुनिया भर में सबसे अलग है। कई देशों में, अत्याधुनिक एआई बुनियादी ढांचा कुछ ही कॉर्पोरेशनों के हाथों में है और वही यह तय करते हैं कि कौन नव परिवर्तन लाएगा जबकि भारत एक अलग मॉडल बना रहा है, जो 10,300 करोड़ से ज्यादा रुपए के इंडिया एआई मिशन पर आधारित है और यह आमजन के हित के लिए उत्तरदायी एआई तक पहुंच बढ़ा रहा है और उसे संभव बना रहा है। इस अभियान के अंतर्गत, वर्तमान 38,000 से ज़्यादा हाई-एंड जीपीयू 65 रुपए प्रति घंटे पर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे स्टार्टअप्स, अनुसंधानकर्ताओं, छात्रों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए कंप्यूट की बाधाऐं कम हुई हैं। वास्तव में, यह एक मज़बूत विश्वास को दिखाता है कि प्रौद्योगिकी का प्रजातंत्रीकरण करना किया जाना चाहिए।

मंत्री महोदय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पांचवीं औद्योगिक क्रांति को आगे बढ़ा रहा है। इसका असर कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, विनिर्माण, शासन और जलवायु के लिए कार्यान्वयन पर पड़ेगा। भारत इस क्रांति से अलग नहीं रह सकता बल्कि वह इसे सक्रिय रूप से आकार दे रहा है। जीपीयू क्षमता का बढ़ना एक ऐसे देश को दिखाता है जो महत्वाकांक्षा को बुनियादी ढांचे से और अवधारणा को  निष्पादन से जोड़ने का दृढ संकल्प रखता है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो के उद्घाटन के साथ 16 फरवरी 2026 से इस सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसका अर्थ बेहद सशक्त था। वैश्विक दक्षिण में एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी का शुभारंभ हो रहा था और इसका नेतृत्व भारत कर रहा है। संदेश स्पष्ट और दृढ संकल्पित था। एआई में नेतृत्व अब सिर्फ़ पारंपरिक सत्ता केन्द्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि नई आवाज़ें एजेंडे को आकार दे रही हैं।

यह सम्मेलन 20 से ज़्यादा राष्ट्राध्यक्षों, 60 मंत्रियों और 500 अंतर्राष्ट्रीय एआई प्रमुखों की एक साथ भागीदारी का साक्षी बन रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ। नीति निर्माता नीति विशेषज्ञों से जुड़ रहे हैं। अभिनवकर्ता शैक्षिक और उद्योग प्रमुखों से संवाद कर रहे हैं। यह सम्मेलन अभिनव विचारों, साझेदारी और वचनबद्धता के लिए एक भेंट मंच बन गया है। यह प्रत्यक्ष है कि दुनिया सिर्फ़ भारत की एआई यात्रा को न सिर्फ देख ही नहीं रही है बल्कि इससे जुड़ भी रही है।

यह उत्साह औपचारिक रूप से होने वाले सत्र से कहीं अधिक है। सिर्फ़ सम्मेलन के पहले दिन, पूरे भारत में 2.5 लाख से ज़्यादा छात्रों ने उत्तरदायी अभिनव के लिए एआई का उपयोग करने का संकल्प लिया। इस पहल को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में पहचान के लिए भेजा गया है। एक साथ संकल्प लेते हुए छात्रों की तस्वीर ने एक ऐसे देश की भावना को दिखाया जो उत्तरदायित्व और पूर्ण आशा के साथ एआई को अपना रहा है। एक नई पीढ़ी आगे आकर इसका नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

निवेश की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी है। माननीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने पूर्ण आशा व्यक्त है कि अगले दो वर्षों में भारत के एआई  इकोसिस्टम में 200 बिलियन अमरीकी डॉलर से ज़्यादा का निवेश आने की संभावना है। उद्यम पूंजी फर्म एआई स्टैक की सभी पाँच लेयर में डीप टेक स्टार्टअप्स को निधि प्रदान कर रही हैं। बड़े सॉल्यूशन और बड़े एप्लिकेशन को सहायता मिल रही है। इसके प्रति रूझान का स्तर भारत के एआई परिवेश में वैश्विक भरोसे का संकेत देता है।

निवेश का भरोसा ज़मीनी स्तर पर प्रौद्योगिक क्षमता के अनुरूप है। भारत के सॉवरेन एआई मॉडल्स इस सम्मेलन का विशेष बिन्दु बनकर उभरे हैं। यहां शुरू किए गए कई मॉडल्स को वैश्विक मानकों पर पूरी तरह से जांचा गया है। कई बड़े अंतर्राष्ट्रीय सिस्टमों से तुलना में कई भारतीय मॉडल को कई मानकों पर बेहतर रेटिंग मिली है। यह कोई धीरे-धीरे होने वाली प्रगति नहीं है। यह प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता है। यह स्वदेशी योग्यता से परिपूर्ण एक गंभीर अंतर्राष्ट्रीय एआई राष्ट्र के रूप में भारत के उभरने को और सुदृढ़ करता है।

वैश्विक पहचान से महत्व और बढ़ता है। स्टैनफ़ोर्ड ने भारत को दुनिया के टॉप तीन एआई राष्ट्रों में जगह दी है। भारत को तेज़ी से एक ऐसे हब के तौर पर देखा जा रहा है जहां योग्यता, नीति और बुनियादी ढांचा एक साथ आते हैं। 38,000 से 58,000 से अधिक जीपीयू तक का विस्तार उस बुनियाद को मज़बूत करता है और एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत नेतृत्व के लिए तैयार हो रहा है।

इस नेतृत्व के मूल में प्रजातंत्रीकरण है। एआई के प्रजातंत्रीकरण का अर्थ सिर्फ़ तैयार एप्लिकेशन्स तक पहुंच से कहीं ज़्यादा है। इसमें कंप्यूट पावर, डेटासेट और मॉडल इकोसिस्टम तक पहुँच शामिल है। जब ये ज़रूरी संसाधन व्यापक स्तर पर और सस्ती कीमतों पर मिलते हैं, तो अभिनव फलता-फूलता है। स्टार्टअप्स विश्वास के साथ से प्रयोग कर सकते हैं। अनुसंधानकर्ता व्यापक विचारों को का परीक्षण कर सकते हैं। सार्वजनिक संस्थान ऐसे एआई समाधान प्रदान कर सकते हैं जो लाखों लोगों तक पहुंचते हैं। अवसंरचना सशक्तिकरण बन जाती है।

इस सम्मेलन का बौद्धिक प्रारूप तीन बेसिक सूत्रों पर आधारित है। प्रथम है व्यक्ति, जो इस बात पर बल देता है कि एआई  को अपनी पूरी विविध क्षमता के साथ इंसानियत की सेवा करनी चाहिए, साथ ही सम्मान और सबको साथ लेकर चलने के भाव को बनाए रखना चाहिए। दूसरा है पृथ्वी या ग्रह, जो यह सुनिश्चित करता है कि अभिनव परिवेश प्रबंधन और स्थायित्व एक दूसरे के पूरक हों। तीसरा है प्रगति, जो इस बात पर बल देती है कि एआई के लाभ सभी समाजों में बराबर बांटे जाने चाहिए। ये सिद्धांत मिलकर महत्वाकाक्षा को ज़िम्मेदारी के साथ एक सूत्र में बांधते हैं।

इन सूत्रों के आधार पर, सात चक्रों के संदर्भ में बातचीत होती है जो दर्शन को क्रियान्वयन में बदलती है। मानव पूंजी चक्र एक समान एआई पुनःकौशल इकोसिस्टम बनाने और एआई अर्थव्यवस्था के लिए कार्यबल को तैयार करने पर ध्यान केन्द्रित करता है। समाजिक अधिकारिता चक्र के लिए समावेशन ऐसे सहभागी एआई समाधान खोजता है जो अंतिम छोर तक सेवा डिलीवरी को मज़बूत करते हैं। ये चर्चाएँ व्यवहारिक और भविष्योन्मुख हैं।

सुरक्षित और विश्वसनीय एआई  चक्र अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों को अंतर-संचालित शासन प्रारूप बदलने, घरेलू निगरानी को मज़बूत करने और नवोन्मेष को संभव बनाने पर ध्यान देता है। अनुकूलता, नवोन्मेष और दक्षता चक्र बड़े एआई  सिस्टम से पैदा होने वाली पर्यावरण और संसाधन की चुनौतियों का समाधान निकालता हुए यह सुनिश्चित करता है कि विकास निरंतर और स्थिर रूप से बना रहे। ये बाहरी चिंताएँ नहीं हैं। ये दीर्घकालिक नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं।

विज्ञान चक्र का उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु क्लाइमेट में खोज को तेज़ करने के लिए एआई का उपयोग करना है, साथ ही अनुसंधान क्षमता तक पहुंच में असमानताओं को ठीक करना है। प्रजातंत्रीकरण एआई संसाधन चक्र अंतर्राष्ट्रीय एआई मूल्य श्रृंखला में बराबर की भागीदारी की सोच रखता है। आर्थिक वृद्धि और समाजिक बेहतरी चक्र के लिए एआई ऐसे उच्च प्रभाव वाले मामलों की पहचान करता है जो अर्थव्यवस्था और समुदाय को बदल सकते हैं। हर चक्र एआई को ऐसे परिणामों से जोड़ने के भारत के दृढ़ संकल्प को दिखाता है जिन्हें मापा जा सके।

परिणामों के लिए यह वचनबद्धता सम्मेलन में हुई एक बड़ी घोषणा में दिखाई दी। भारत सरकार ने 6 सेक्टोरल एआई इम्पैक्ट केसबुक जारी कीं, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा, लैंगिक सशक्तिकरण, शिक्षा, कृषि और सुलभता जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में 170 से ज़्यादा डिप्लॉय और स्केलेबल एआई नवोन्मेष दिखाती हैं। ये केसबुक प्रोटोटाइप या पायलट आइडिया नहीं दिखातीं। वे पहले से ही परिणाम देने वाले समाधान को प्रदर्शित करती हैं, और परीक्षित मॉडल का एक कलेक्शन प्रदान करती  हैं जिन्हें कॉपी और स्केल किया जा सकता है।

यह गति सिर्फ़ दस्तावेजीकरण तक ही नहीं थमती है इसे लागू करने की भावना भी इस सम्मेलन की उच्च प्रभावी पैनल चर्चा में भी जारी रही, जहाँ सिद्धांतों और सिद्ध हो चुके मॉडल्स की जाँच की गई, उन्हें बेहतर बनाया गया और क्षेत्र की अहम मुद्दों के साथ जोड़ा गया। रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने एआई समर्थ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दो सत्र रखे, जिसमें भारत और उसके बाहर के लिए समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए सहयोगात्मक मॉडलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, साथ ही सरल और सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल डिलीवरी पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने देखा कि कैसे एआई कैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत कर सकता है और अलग-अलग इलाकों में पहुँच बढ़ा सकता है।

सम्मेलन के दूसरे दिन, 'एआई इन गर्वनेंस: रिवोल्यूशनाइजिंग गर्वमेन्ट एफिशिएंसी' शीर्षक से सत्र में  में दुनिया भर के अनुसंधानकर्ता और वरिष्ठ नीति निर्माता एक साथ एक मंच पर इस मंथन के साथ एकत्रित हुए कि किस प्रकार से एआई व्यापक स्तर पर सार्वजनिक सेवा डिलीवरी को मज़बूत कर सकता है। यह चर्चा शुरूआती और सैद्धातिंक विचारों से कहीं अधिक सकारात्मक रही। वक्ताओं ने मापनीय असर, कड़े मूल्यांकन और ज़िम्मेदारी से उपयोग पर बल दिया। चर्चा का पूरा ध्यान पूरी सरकार में सिस्टम स्तर की तैयारी पर था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई समावेशन सोच-समझकर, पहुँच के भीतर और जबावदेह हो।

इसका ध्यान सिर्फ सिस्टम और सर्विस डिलीवरी तक ही सीमित नहीं रहा अपितु यह लोगों और कार्य  के भविष्य तक विस्तारित था। एआई के दौर में रोजगार के भविष्य पर एक उच्च स्तरीय सत्र हाई- में नीति निर्माताओं, उदयोग प्रमुख, शिक्षक और नवोन्मेषक एक साथ आए। चर्चा में छोटे तकनीक कौशल से व्यक्तियों की योग्यता को बढ़ाने के लिए बदलाव पर बल दिया गया। एआई के दौर में भारत की डेमोग्राफिक क्षमता का भी निरंतर उल्लेख करते हुए इसे एक बड़ा लाभकारी पक्ष बताया गया।

एल्गोरिदम टू आउटकम शीर्षक वाले सत्र में, वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कंप्यूट, मॉडल्स और डेटा से ऐसी डिप्लॉयेबल एप्लिकेशन बननी चाहिए जो उत्पादकता बढ़ाएं, शासन को मज़बूत करें और नागरिकों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाएं। इसी तरह, स्केलिंग इम्पैक्ट फ्रांम इंडियाज सोवरन एआई एंड डेटा पर चर्चा में यह जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया कि भारत कैसे मुख्य रूप से एआई का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर वाले सिस्टम का निर्माता बन सकता है।

इन वार्तालाप के दौरान, यह भी स्पष्ट हुआ कि इतने व्यापक स्तर की महत्वाकांक्षा के लिए इतने बड़े बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की ज़रूरत होती है।

जैसे-जैसे सम्मेलन आगे बढ़ रहा है, 20,000 जीपीयू का जुड़ना एक अहम पड़ाव है। यह इसका स्तर दिखाता है। यह इसकी पहुँच दर्शाता है। सबसे बढ़कर, यह विश्वास दिखाता है। भारत धीरे-धीरे होने वाली प्रगति से संतुष्ट नही है। यह त्वरित और एक उद्देश्यपूर्ण स्पष्ट नीति के साथ अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। बुनियादी ढांचे के विस्तार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एक मज़बूत नैतिक प्रारूप के साथ, भारत स्वयं को एक नेतृत्वकारी वैश्विक एआई राष्ट्र के रूप में सिद्ध कर रहा है, जो एक ऐसा भविष्य बनाने के लिए दृढ़ संकल्प रखता है जहाँ नवोन्मेष सभी का कल्याण, समृद्धि और साझा प्रगति लेकर आए।

संदर्भ:

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पीआईबी शोधपीके/केसी/एसएस प्रविष्टि तिथि: 17 FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2229482) आगंतुक पटल : 183

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पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

झोलाछाप डॉक्टरों और अपंजीकृत चिकित्सा व्यवसाइयों को पहचानना और उनसे बचाव करने के लिए हमारे लोकतांत्रिक कानूनी व्यवस्था में चिकित्सा सुविधा देने के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की है पर्याप्त व्यवस्था है… पढ़िए जागरूक रहने के विधिक पहलू…

लोक स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले अनियमित चिकित्सा व्यवसाई ग्रामीण और शहरी दोनो ही जगह… अपनी दुकान चला रहें है लेकिन जन जागरूक के आभाव में इनके विरुद्ध शासन कानूनी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है… इसलिए यह लेख जन जागरूकता लाने का एक प्रयास है… झोलाछाप डॉक्टरों को पहचानना और उनसे बचना बेहद ज़रूरी है। ये लोग न केवल आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं बल्कि आपकी जान को भी खतरे में डाल सकते हैं। झोलाछाप डॉक्टरों की कुछ खास पहचान: अयोग्यता का दावा: ये लोग अक्सर असाध्य बीमारियों का भी इलाज करने का दावा करते हैं, जो किसी योग्य डॉक्टर के लिए भी मुश्किल हो सकता है। गुप्त स्थान: ये लोग अक्सर घरों, छोटी दुकानों या ऐसी जगहों पर अपना क्लीनिक चलाते हैं जहां कोई मेडिकल सुविधाएं नहीं होतीं। सस्ते इलाज का लालच: ये लोग आमतौर पर अन्य डॉक्टरों की तुलना में बहुत कम पैसे में इलाज करने का झांसा देते हैं। आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञता: ये लोग आधुनिक मेडिकल उपकरणों और तकनीकों से अनजान होते हैं। अनावश्यक दवाएं: ये लोग अक्सर मरीजों को अनावश्यक दवाएं देते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

झोलाछाप डॉक्टरों और अपंजीकृत चिकित्सा व्यवसाइयों को पहचानना और उनसे बचाव करने के लिए हमारे लोकतांत्रिक कानूनी व्यवस्था में चिकित्सा सुविधा देने के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की है पर्याप्त व्यवस्था है… पढ़िए जागरूक रहने के विधिक पहलू…

लोक स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले अनियमित चिकित्सा व्यवसाई ग्रामीण और शहरी दोनो ही जगह… अपनी दुकान चला रहें है लेकिन जन जागरूक के आभाव में इनके विरुद्ध शासन कानूनी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है… इसलिए यह लेख जन जागरूकता लाने का एक प्रयास है… झोलाछाप डॉक्टरों को पहचानना और उनसे बचना बेहद ज़रूरी है। ये लोग न केवल आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं बल्कि आपकी जान को भी खतरे में डाल सकते हैं। झोलाछाप डॉक्टरों की कुछ खास पहचान: अयोग्यता का दावा: ये लोग अक्सर असाध्य बीमारियों का भी इलाज करने का दावा करते हैं, जो किसी योग्य डॉक्टर के लिए भी मुश्किल हो सकता है। गुप्त स्थान: ये लोग अक्सर घरों, छोटी दुकानों या ऐसी जगहों पर अपना क्लीनिक चलाते हैं जहां कोई मेडिकल सुविधाएं नहीं होतीं। सस्ते इलाज का लालच: ये लोग आमतौर पर अन्य डॉक्टरों की तुलना में बहुत कम पैसे में इलाज करने का झांसा देते हैं। आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञता: ये लोग आधुनिक मेडिकल उपकरणों और तकनीकों से अनजान होते हैं। अनावश्यक दवाएं: ये लोग अक्सर मरीजों को अनावश्यक दवाएं देते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

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