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भारत का एआई गौरव- भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है।


 20,000 अतिरिक्त जीपीयू भारत के एआई नेतृत्व के अगले चरण को क्षमता प्रदान करेंगे

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है। 17 फरवरी 2026 को, नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित की जा रही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत अपनी कंप्यूट क्षमता को वर्तमान 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) से आगे बढ़ाएगा, और आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़े जाएंगे। यह घोषणा सिर्फ तकनीकी नहीं अपितु रणनीतिक थी। इसने संकेत दिया कि भारत इरादे के साथ आगे बढ़ रहा है और स्वयं की दुनिया की नेतृत्वकारी एआई शक्तियों में मजबूती से जगह बना रहा है।

यह घोषणा सम्मेलन के दूसरे दिन की गई और इसका विषय था-सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय अर्थात सबका हित, सबकी प्रसन्नता। इस आयोजन को पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी एआई भागीदारी कहा जा रहा है। भारत मंडपम के अंदर, ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिख रही थी। इस दौरान होने वाले वार्तालाप सुस्पष्ट, भविष्य की सोच से परिपूर्ण और क्रियाशीलता पर आधारित थे। मंत्री महोदय ने कहा कि कंप्यूट बुनियादी ढांचे का विस्तार, भारत की एआई रणनीति के अगले चरण को दिखाता है, जिसमें ज़्यादा क्षमता को ज़िम्मेदारी से तैनाती के साथ जोड़ा गया है। इसका विषय प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि इसने इम्पैक्ट समिट 2026 का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

भारत का तरीका दुनिया भर में सबसे अलग है। कई देशों में, अत्याधुनिक एआई बुनियादी ढांचा कुछ ही कॉर्पोरेशनों के हाथों में है और वही यह तय करते हैं कि कौन नव परिवर्तन लाएगा जबकि भारत एक अलग मॉडल बना रहा है, जो 10,300 करोड़ से ज्यादा रुपए के इंडिया एआई मिशन पर आधारित है और यह आमजन के हित के लिए उत्तरदायी एआई तक पहुंच बढ़ा रहा है और उसे संभव बना रहा है। इस अभियान के अंतर्गत, वर्तमान 38,000 से ज़्यादा हाई-एंड जीपीयू 65 रुपए प्रति घंटे पर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे स्टार्टअप्स, अनुसंधानकर्ताओं, छात्रों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए कंप्यूट की बाधाऐं कम हुई हैं। वास्तव में, यह एक मज़बूत विश्वास को दिखाता है कि प्रौद्योगिकी का प्रजातंत्रीकरण करना किया जाना चाहिए।

मंत्री महोदय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पांचवीं औद्योगिक क्रांति को आगे बढ़ा रहा है। इसका असर कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, विनिर्माण, शासन और जलवायु के लिए कार्यान्वयन पर पड़ेगा। भारत इस क्रांति से अलग नहीं रह सकता बल्कि वह इसे सक्रिय रूप से आकार दे रहा है। जीपीयू क्षमता का बढ़ना एक ऐसे देश को दिखाता है जो महत्वाकांक्षा को बुनियादी ढांचे से और अवधारणा को  निष्पादन से जोड़ने का दृढ संकल्प रखता है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो के उद्घाटन के साथ 16 फरवरी 2026 से इस सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसका अर्थ बेहद सशक्त था। वैश्विक दक्षिण में एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी का शुभारंभ हो रहा था और इसका नेतृत्व भारत कर रहा है। संदेश स्पष्ट और दृढ संकल्पित था। एआई में नेतृत्व अब सिर्फ़ पारंपरिक सत्ता केन्द्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि नई आवाज़ें एजेंडे को आकार दे रही हैं।

यह सम्मेलन 20 से ज़्यादा राष्ट्राध्यक्षों, 60 मंत्रियों और 500 अंतर्राष्ट्रीय एआई प्रमुखों की एक साथ भागीदारी का साक्षी बन रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ। नीति निर्माता नीति विशेषज्ञों से जुड़ रहे हैं। अभिनवकर्ता शैक्षिक और उद्योग प्रमुखों से संवाद कर रहे हैं। यह सम्मेलन अभिनव विचारों, साझेदारी और वचनबद्धता के लिए एक भेंट मंच बन गया है। यह प्रत्यक्ष है कि दुनिया सिर्फ़ भारत की एआई यात्रा को न सिर्फ देख ही नहीं रही है बल्कि इससे जुड़ भी रही है।

यह उत्साह औपचारिक रूप से होने वाले सत्र से कहीं अधिक है। सिर्फ़ सम्मेलन के पहले दिन, पूरे भारत में 2.5 लाख से ज़्यादा छात्रों ने उत्तरदायी अभिनव के लिए एआई का उपयोग करने का संकल्प लिया। इस पहल को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में पहचान के लिए भेजा गया है। एक साथ संकल्प लेते हुए छात्रों की तस्वीर ने एक ऐसे देश की भावना को दिखाया जो उत्तरदायित्व और पूर्ण आशा के साथ एआई को अपना रहा है। एक नई पीढ़ी आगे आकर इसका नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

निवेश की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी है। माननीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने पूर्ण आशा व्यक्त है कि अगले दो वर्षों में भारत के एआई  इकोसिस्टम में 200 बिलियन अमरीकी डॉलर से ज़्यादा का निवेश आने की संभावना है। उद्यम पूंजी फर्म एआई स्टैक की सभी पाँच लेयर में डीप टेक स्टार्टअप्स को निधि प्रदान कर रही हैं। बड़े सॉल्यूशन और बड़े एप्लिकेशन को सहायता मिल रही है। इसके प्रति रूझान का स्तर भारत के एआई परिवेश में वैश्विक भरोसे का संकेत देता है।

निवेश का भरोसा ज़मीनी स्तर पर प्रौद्योगिक क्षमता के अनुरूप है। भारत के सॉवरेन एआई मॉडल्स इस सम्मेलन का विशेष बिन्दु बनकर उभरे हैं। यहां शुरू किए गए कई मॉडल्स को वैश्विक मानकों पर पूरी तरह से जांचा गया है। कई बड़े अंतर्राष्ट्रीय सिस्टमों से तुलना में कई भारतीय मॉडल को कई मानकों पर बेहतर रेटिंग मिली है। यह कोई धीरे-धीरे होने वाली प्रगति नहीं है। यह प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता है। यह स्वदेशी योग्यता से परिपूर्ण एक गंभीर अंतर्राष्ट्रीय एआई राष्ट्र के रूप में भारत के उभरने को और सुदृढ़ करता है।

वैश्विक पहचान से महत्व और बढ़ता है। स्टैनफ़ोर्ड ने भारत को दुनिया के टॉप तीन एआई राष्ट्रों में जगह दी है। भारत को तेज़ी से एक ऐसे हब के तौर पर देखा जा रहा है जहां योग्यता, नीति और बुनियादी ढांचा एक साथ आते हैं। 38,000 से 58,000 से अधिक जीपीयू तक का विस्तार उस बुनियाद को मज़बूत करता है और एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत नेतृत्व के लिए तैयार हो रहा है।

इस नेतृत्व के मूल में प्रजातंत्रीकरण है। एआई के प्रजातंत्रीकरण का अर्थ सिर्फ़ तैयार एप्लिकेशन्स तक पहुंच से कहीं ज़्यादा है। इसमें कंप्यूट पावर, डेटासेट और मॉडल इकोसिस्टम तक पहुँच शामिल है। जब ये ज़रूरी संसाधन व्यापक स्तर पर और सस्ती कीमतों पर मिलते हैं, तो अभिनव फलता-फूलता है। स्टार्टअप्स विश्वास के साथ से प्रयोग कर सकते हैं। अनुसंधानकर्ता व्यापक विचारों को का परीक्षण कर सकते हैं। सार्वजनिक संस्थान ऐसे एआई समाधान प्रदान कर सकते हैं जो लाखों लोगों तक पहुंचते हैं। अवसंरचना सशक्तिकरण बन जाती है।

इस सम्मेलन का बौद्धिक प्रारूप तीन बेसिक सूत्रों पर आधारित है। प्रथम है व्यक्ति, जो इस बात पर बल देता है कि एआई  को अपनी पूरी विविध क्षमता के साथ इंसानियत की सेवा करनी चाहिए, साथ ही सम्मान और सबको साथ लेकर चलने के भाव को बनाए रखना चाहिए। दूसरा है पृथ्वी या ग्रह, जो यह सुनिश्चित करता है कि अभिनव परिवेश प्रबंधन और स्थायित्व एक दूसरे के पूरक हों। तीसरा है प्रगति, जो इस बात पर बल देती है कि एआई के लाभ सभी समाजों में बराबर बांटे जाने चाहिए। ये सिद्धांत मिलकर महत्वाकाक्षा को ज़िम्मेदारी के साथ एक सूत्र में बांधते हैं।

इन सूत्रों के आधार पर, सात चक्रों के संदर्भ में बातचीत होती है जो दर्शन को क्रियान्वयन में बदलती है। मानव पूंजी चक्र एक समान एआई पुनःकौशल इकोसिस्टम बनाने और एआई अर्थव्यवस्था के लिए कार्यबल को तैयार करने पर ध्यान केन्द्रित करता है। समाजिक अधिकारिता चक्र के लिए समावेशन ऐसे सहभागी एआई समाधान खोजता है जो अंतिम छोर तक सेवा डिलीवरी को मज़बूत करते हैं। ये चर्चाएँ व्यवहारिक और भविष्योन्मुख हैं।

सुरक्षित और विश्वसनीय एआई  चक्र अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों को अंतर-संचालित शासन प्रारूप बदलने, घरेलू निगरानी को मज़बूत करने और नवोन्मेष को संभव बनाने पर ध्यान देता है। अनुकूलता, नवोन्मेष और दक्षता चक्र बड़े एआई  सिस्टम से पैदा होने वाली पर्यावरण और संसाधन की चुनौतियों का समाधान निकालता हुए यह सुनिश्चित करता है कि विकास निरंतर और स्थिर रूप से बना रहे। ये बाहरी चिंताएँ नहीं हैं। ये दीर्घकालिक नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं।

विज्ञान चक्र का उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु क्लाइमेट में खोज को तेज़ करने के लिए एआई का उपयोग करना है, साथ ही अनुसंधान क्षमता तक पहुंच में असमानताओं को ठीक करना है। प्रजातंत्रीकरण एआई संसाधन चक्र अंतर्राष्ट्रीय एआई मूल्य श्रृंखला में बराबर की भागीदारी की सोच रखता है। आर्थिक वृद्धि और समाजिक बेहतरी चक्र के लिए एआई ऐसे उच्च प्रभाव वाले मामलों की पहचान करता है जो अर्थव्यवस्था और समुदाय को बदल सकते हैं। हर चक्र एआई को ऐसे परिणामों से जोड़ने के भारत के दृढ़ संकल्प को दिखाता है जिन्हें मापा जा सके।

परिणामों के लिए यह वचनबद्धता सम्मेलन में हुई एक बड़ी घोषणा में दिखाई दी। भारत सरकार ने 6 सेक्टोरल एआई इम्पैक्ट केसबुक जारी कीं, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा, लैंगिक सशक्तिकरण, शिक्षा, कृषि और सुलभता जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में 170 से ज़्यादा डिप्लॉय और स्केलेबल एआई नवोन्मेष दिखाती हैं। ये केसबुक प्रोटोटाइप या पायलट आइडिया नहीं दिखातीं। वे पहले से ही परिणाम देने वाले समाधान को प्रदर्शित करती हैं, और परीक्षित मॉडल का एक कलेक्शन प्रदान करती  हैं जिन्हें कॉपी और स्केल किया जा सकता है।

यह गति सिर्फ़ दस्तावेजीकरण तक ही नहीं थमती है इसे लागू करने की भावना भी इस सम्मेलन की उच्च प्रभावी पैनल चर्चा में भी जारी रही, जहाँ सिद्धांतों और सिद्ध हो चुके मॉडल्स की जाँच की गई, उन्हें बेहतर बनाया गया और क्षेत्र की अहम मुद्दों के साथ जोड़ा गया। रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने एआई समर्थ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दो सत्र रखे, जिसमें भारत और उसके बाहर के लिए समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए सहयोगात्मक मॉडलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, साथ ही सरल और सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल डिलीवरी पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने देखा कि कैसे एआई कैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत कर सकता है और अलग-अलग इलाकों में पहुँच बढ़ा सकता है।

सम्मेलन के दूसरे दिन, 'एआई इन गर्वनेंस: रिवोल्यूशनाइजिंग गर्वमेन्ट एफिशिएंसी' शीर्षक से सत्र में  में दुनिया भर के अनुसंधानकर्ता और वरिष्ठ नीति निर्माता एक साथ एक मंच पर इस मंथन के साथ एकत्रित हुए कि किस प्रकार से एआई व्यापक स्तर पर सार्वजनिक सेवा डिलीवरी को मज़बूत कर सकता है। यह चर्चा शुरूआती और सैद्धातिंक विचारों से कहीं अधिक सकारात्मक रही। वक्ताओं ने मापनीय असर, कड़े मूल्यांकन और ज़िम्मेदारी से उपयोग पर बल दिया। चर्चा का पूरा ध्यान पूरी सरकार में सिस्टम स्तर की तैयारी पर था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई समावेशन सोच-समझकर, पहुँच के भीतर और जबावदेह हो।

इसका ध्यान सिर्फ सिस्टम और सर्विस डिलीवरी तक ही सीमित नहीं रहा अपितु यह लोगों और कार्य  के भविष्य तक विस्तारित था। एआई के दौर में रोजगार के भविष्य पर एक उच्च स्तरीय सत्र हाई- में नीति निर्माताओं, उदयोग प्रमुख, शिक्षक और नवोन्मेषक एक साथ आए। चर्चा में छोटे तकनीक कौशल से व्यक्तियों की योग्यता को बढ़ाने के लिए बदलाव पर बल दिया गया। एआई के दौर में भारत की डेमोग्राफिक क्षमता का भी निरंतर उल्लेख करते हुए इसे एक बड़ा लाभकारी पक्ष बताया गया।

एल्गोरिदम टू आउटकम शीर्षक वाले सत्र में, वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कंप्यूट, मॉडल्स और डेटा से ऐसी डिप्लॉयेबल एप्लिकेशन बननी चाहिए जो उत्पादकता बढ़ाएं, शासन को मज़बूत करें और नागरिकों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाएं। इसी तरह, स्केलिंग इम्पैक्ट फ्रांम इंडियाज सोवरन एआई एंड डेटा पर चर्चा में यह जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया कि भारत कैसे मुख्य रूप से एआई का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर वाले सिस्टम का निर्माता बन सकता है।

इन वार्तालाप के दौरान, यह भी स्पष्ट हुआ कि इतने व्यापक स्तर की महत्वाकांक्षा के लिए इतने बड़े बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की ज़रूरत होती है।

जैसे-जैसे सम्मेलन आगे बढ़ रहा है, 20,000 जीपीयू का जुड़ना एक अहम पड़ाव है। यह इसका स्तर दिखाता है। यह इसकी पहुँच दर्शाता है। सबसे बढ़कर, यह विश्वास दिखाता है। भारत धीरे-धीरे होने वाली प्रगति से संतुष्ट नही है। यह त्वरित और एक उद्देश्यपूर्ण स्पष्ट नीति के साथ अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। बुनियादी ढांचे के विस्तार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एक मज़बूत नैतिक प्रारूप के साथ, भारत स्वयं को एक नेतृत्वकारी वैश्विक एआई राष्ट्र के रूप में सिद्ध कर रहा है, जो एक ऐसा भविष्य बनाने के लिए दृढ़ संकल्प रखता है जहाँ नवोन्मेष सभी का कल्याण, समृद्धि और साझा प्रगति लेकर आए।

संदर्भ:

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पीआईबी शोधपीके/केसी/एसएस प्रविष्टि तिथि: 17 FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2229482) आगंतुक पटल : 183

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भिलाई नगर विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत विद्युत बिलों में उपभोक्ताओं को प्रदायित छूट के संबंध में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री महोदय ने विधानसभा प्रश्न पर…  महत्वपूर्ण जानकारी दी है लेकिन इस जानकारी के आधार पर भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों के आवास का बिजली कितना कम होगा  ? यह विधायक महोदय कब बतायेंगे..? इसका इंतजार सभी को है… विधायक देवेंद्र यादव का विधानसभा प्रश्न… छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग से विधानसभा कार्यवाही में 12 मार्च, 2025 विधानसभा प्रश्न क्रम 33. प्रश्न क्र. 1564 विधायक देवेंद्र यादव द्वारा पूछा गया था कि, क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि, भिलाई नगर विधान सभा क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में क्या छूट प्रदान की जा रही है ? इस प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री (श्री विष्णु देव साय) ने बताया कि:-  भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को "घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत देयकों में राहत" योजना”, बीपीएल उपभोक्ताओं को एकल बत्ती कनेक्शन हेतु अनुदान योजना एवं कृषकों को "डॉ० खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना" क...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

मंच कला क्षेत्र के छह प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना गया, वर्ष 2022 और 2023 के लिए 92 कलाकार संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों के लिए चुने गए, 80 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार दिया जाएगा

  संगीत , नृत्य और नाट्य कला से संबंधित संगीत नाटक अकादमी , नई दिल्ली की जनरल काउंसिल , नेशनल ने 21 और 22 फरवरी 2024 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी बैठक में सर्वसम्मति से मंच कला के क्षेत्र में छह ( 6) प्रतिष्ठित हस्तियों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना है। अकादमी की फेलोशिप सबसे प्रतिष्ठित और अपूर्व सम्मान है। यह फेलोशिप किसी भी खास समय में 40 व्यक्तियों को दी जाती है। जनरल काउंसिल ने वर्ष 2022 और 2023 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत , नृत्य , रंगमंच , पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच , कठपुतली और मंच कला में समग्र योगदान/छात्रवृत्ति के क्षेत्र से 92 कलाकारों का भी चयन किया। इस प्रकार चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता समग्र रूप से राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अतिरिक्त ये ख्याति प्राप्त कलाकार संगीत , नृत्य , नाटक , लोक और जनजातीय कला , कठपुतली और संबद्ध रंगमंच कला रूपों आदि के रूप में मंच कला रूपों के संपूर्ण रूप को कवर करते हैं। अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

बुजुर्गों के लिए योजनाएं और लाभार्थी

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू कर रहा है , जिनमें एकीकृत वृद्धजन कार्यक्रम , राष्ट्रीय वयोश्री योजना (अटल वयो अभ्युदय योजना-एवीवाईएवाई के अंतर्गत) और राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धजन पेंशन योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यान्वित की जाती है। एकीकृत वृद्धजन कार्यक्रम के अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रमों और अन्य सुविधाओं के संचालन और रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान एकीकृत वृद्धजन कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल लाभार्थियों की संख्या , राज्यवार और वर्षवार , अनुलग्नक- I में दी गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय से प्राप्‍त सूचना के अनुसार इंदिरा गांधी वृद्धजन पेंशन योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) पात्रता मानदंडों के अधीन , 60-79 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों को 200 रुपये प्रति माह और...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

निगम पार्षद को विधि द्वारा प्रदात सबसे महत्वपूर्ण प्राधिकार निगम के दस्तावेजों का निरिक्षण करने का होता है जिसके आधार पर पार्षद निगम से संबंधित किसी भी अभिलेख / दस्तावेज / फाइल आदि का निरिक्षण कर सकता है पढियें क्या कहता है छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ६ :-

  छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ६ कार्यसूची की मदों से संबंधित दस्तावेज का निरिक्षण किये जाने का पार्षदों का अधिकार :- मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा कार्यसूची में सम्मिलित विषयों से संबंधित समस्त दस्तावेजों को साधारण सम्मिलन से दो कार्य दिवस तथा विशेष सम्मिलन से पुरे एक दिवस पूर्व पार्षद के निरिक्षण के लिए तैयार रखे जायेंगे और कोई भी पार्षद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा नियुक्त अधिकारी के समक्ष उनका निरिक्षण कार्यालयीन समय के दौरान कर सकेंगे | मेरा दृष्टिकोण है कि, पार्षद को जिन मामलों में निगम आयुक्त या महापौर को विधिक आधार पर निगम कार्यवाहियों की अनियमितताओं के संबंध में प्रश्नांकित करना है ऐसे मामलों का प्रश्न विधिवत पूछना चाहिए साधारण सम्मिलन पार्षद को चाहिए कि, साधारण सम्मिलन से दो कार्य दिवस के पूर्व अपना प्रश्न निगम सचिव के पास लिखित में ऐसी प्रक्रिया, जिसमे निगम सचिव सूचना करें और ऐसे प्रारूप में जो निगम सचिव जारी करें उस रीती में पार्षद को अपना प्रश्न निगम सचिव के पास जमा करवाकर निगम सम्मिलन की अपनी भूमिका स्पष्ट कर अपना पदेन...

आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए सहायता (स्माइल) योजना

  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय , स्माइल (आजीविका और उद्यम के लिए सीमांत व्यक्तियों को सहायता) योजना को लागू कर रहा है , जिसमें "भिक्षा वृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास" उप-योजना शामिल है , जिसका उद्देश्य व्यापक पुनर्वास उपायों के माध्यम से भिक्षा वृत्ति मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है। स्माइल भिक्षावृत्ति उप-योजना वर्तमान में देश भर के 181 चयनित शहरों में चलाई जा रही है। 31 जनवरी 2026 तक , कुल 30,257 भिक्षुकों की पहचान की गई है , और विभिन्न शहरों में 8,129   ऐसे व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है। स्माइल योजना के अंतर्गत ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए , सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 23 गरिमा गृहों को वर्तमान में सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से 6 गरिमा गृहों को वर्ष 2025-26 के दौरान नया अनुमोदन प्राप्त हुआ और खोला गया। अगले पांच वर्षों के भीतर प्रत्येक राज्य की राजधानी में कम से कम एक गरिमा गृह स्थापित करने के लिए फिलहाल कोई रोडमैप प्रस्तावित नहीं किया गया है। स्माइल योजना के तहत...

विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित शिकायतें

  संसद का प्रश्न: विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित शिकायतें केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) एक ऑनलाइन मंच है जो नागरिकों को सातों दिन चौबीसों घंटे उपलब्ध है   जिसके माध्यम से वे सेवा वितरण से संबंधित किसी भी विषय पर सार्वजनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। पिछले तीन वर्षों ( 2023, 2024 और 2025) के दौरान , भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों को सीपीग्राम्स पर 51,15,713 सार्वजनिक शिकायतें प्राप्त हुईं , जिनमें से 43,56,331 शिकायतें , यानी लगभग 85%, निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटा दी गईं। सीपीग्राम्स में आरटीआई मामलों का निवारण नहीं किया जाता है। सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिए कई तंत्र स्थापित किए हैं , जिनमें डैशबोर्ड-आधारित निगरानी के साथ समयबद्ध शिकायत निवारण के लिए सीपीग्राम्स ; फाइलों के इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण के लिए ई-ऑफिस को अपनाना ; सार्वजनिक सेवा वितरण पोर्टलों की गुणवत्ता और दक्षता का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय ई-सेवा वितरण मूल्यांकन (एनईएसडीए) शामिल हैं...

आयुष्मान सहकार योजना

आयुष्मान सहकार योजना राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम , जो सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक  संगठन है , अन्य कार्यों के साथ-साथ विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में सहकारी समितियों के संवर्धन हेतु योजनाएं संचालित करता है । एनसीडीसी ने स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अधिदेश के साथ स्वयं को संरेखित करते हुए आयुष्मान सहकार योजना को अधिसूचित किया । योजना के हिस्से के रूप में , एनसीडीसी परियोजना के विस्तृत तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पात्र सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता स्वीकृत करता है , जिससे दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होती है। यह योजना आयुष सहित स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है , जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रदाय में सामुदायिक स्वामित्व , भागीदारी और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है। कोई भी सहकारी समिति जो किसी भी राज्य अधिनियम या बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम के अधीन पंजीकृत है और जिसकी उपविधियों में अस्पताल , स्वास्थ्य सेवा या स्वास्थ्य शिक्षा से संबंध...

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और असंगठित श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप पात्र असंगठित श्रमिकों के बच्चों के लिए शैक्षिक सहायता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार किया है।

  ये सुधार समावेशी सामाजिक सुरक्षा के लिए कल्याणकारी और योग्यता-आधारित छात्रवृत्तियों का संयोजन सुनिश्चित करेंगे , असंगठित श्रमिकों के आश्रितों के लिए शिक्षा संबंधी सहायता सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 के अनुरूप सुदृढ़ की गई मंत्रालय कल्याणकारी श्रम कल्याण योजना (शिक्षा घटक) का संचालन करता है , जिसका नाम है , " बीड़ी/सिने/लौह , मैंगनीज और क्रोम अयस्क (आईओएमसी)/चूना पत्थर और डोलोमाइट अयस्क (एलएसडी)/अभ्रक खदानों के श्रमिकों के बच्चों को मैट्रिक से पहले और बाद की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता"। यह योजना आर्थिक परेशानियों को कम करने और निर्बल श्रमिक परिवारों में शिक्षा की निरंतरता को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। यह योजना आवश्यकता-आधारित है और इसमें कोई योग्यता मानदंड निर्धारित नहीं है। मंत्रालय समानता को बढ़ावा देने , अनपेक्षित भेदभावों को दूर करने और नीतिगत स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए योजना के दिशानिर्देशों के संबंधित प्रावधान में उपयुक्त संशोधन करेगा। संशोधित दृष्टिकोण से मंत्रालय की कल्याणकारी छात्रवृत्ति का लाभ उठाने वाले छात्र , यदि पात्र हैं , तो किसी भी केंद्रीय य...

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