संशोधित उड़ान योजना: भारत के क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क को सशक्त बनाना
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क्षेत्रीय हवाई
संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई उड़े देश का आम नागरिक-उड़ान
योजना ने पूरे देश में हवाई यात्रा को अधिक सुलभ और किफायती बनाया है। पिछले नौ वर्षों में इस योजना के तहत 95 हवाई
अड्डों, हेलीपोर्टों
और जल एयरोड्रोमों को जोड़ते हुए 679 क्षेत्रीय मार्ग परिचालित किए गए
हैं। इन मार्गों पर 3.58 लाख से अधिक उड़ानों के माध्यम से 1.68 करोड़ से
अधिक यात्रियों को हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। संशोधित उड़ान
योजना को वित्तीय वर्ष 2026–27 से 2035–36 तक 28,840 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू
किया जा रहा है। इस योजना के तहत अंतिम छोर तक हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने के
लिए 100 नए हवाई
अड्डों तथा 200 आधुनिक
हेलीपैड विकसित करने की भी परिकल्पना की गई है। |
क्षेत्रीय
कनेक्टिविटी के माध्यम से दूरियां कम करना
कनेक्टिविटी लंबे समय से आर्थिक विकास की
आधारशिला रही है। यह उत्पादन को बाज़ारों से और लोगों को
अवसरों से जोड़ती है। तेज, विश्वसनीय और सुलभ परिवहन व्यवस्था आज सतत
विकास की एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। इस बदलते परिदृश्य में, नागरिक
उड्डयन क्षेत्र तेज, सुगम और व्यापक संपर्क उपलब्ध कराने के एक महत्वपूर्ण
माध्यम के रूप में उभरा है। हालांकि, लंबे समय तक भारत में हवाई संपर्क कुछ
चुनिंदा महानगरों और बड़े शहरों तक ही सीमित रहा है। अनेक छोटे शहरों और
दूरस्थ क्षेत्रों में नियमित हवाई सेवाओं का अभाव था। इस स्थिति ने महानगरों
से परे क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करने और देश के अधिक से अधिक
हिस्सों को राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित
किया।
सभी के लिए सुलभ और व्यापक हवाई संपर्क की आवश्यकता
को ध्यान में रखते हुए, अक्टूबर 2016 में क्षेत्रीय संपर्क
योजना (आरसीएस)–उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) शुरू की गई।
यह योजना आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को अधिक किफायती और सुलभ बनाने
की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही, इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों
में भी हवाई संपर्क का विस्तार करना है, जहां यह सुविधा सीमित या उपलब्ध नहीं
थी। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू नागरिक उड्डयन बाजार बन
चुका है। पिछले एक दशक में देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में उल्लेखनीय
वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां देश में 74 परिचालित
हवाई अड्डे थे, वहीं 15 जुलाई 2026 तक उनकी
संख्या बढ़कर 165 हो गई है।
क्षेत्रीय संपर्क योजना–उड़ान ने नए हवाई मार्गों की शुरुआत और क्षेत्रीय
विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाकर इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई है। इस योजना ने देशभर में अधिक संतुलित और समावेशी
विमानन नेटवर्क के विकास को नई गति प्रदान की है।
इसी क्रम में, 4 जुलाई 2026 को शुरू की गई संशोधित उड़ान योजना भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है। यह योजना 10 वर्षों की अवधि, अर्थात वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2035–36 तक, 28,840 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ लागू की जा रही है। योजना के इस नए चरण में हवाई अड्डा अवसंरचना के विस्तार, परिचालन सहायता को सुदृढ़ करने तथा छोटे बाजारों में सेवाएं प्रदान करने वाले विमानन परिचालकों के लिए अधिक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य उड़ान योजना की अब तक की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप क्षेत्रीय हवाई संपर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
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जोधपुर हवाई अड्डे पर हाल ही में शुरू की गई नई टर्मिनल इमारत विश्वस्तरीय नागरिक उड्डयन अवसंरचना विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है। 23,342 वर्ग मीटर में फैला यह आधुनिक टर्मिनल पीक आवर्स के दौरान 1,500 यात्रियों तथा प्रतिवर्ष 20 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने में सक्षम है। इसमें 20 चेक-इन काउंटर, उन्नत सुरक्षा जांच प्रणाली, आधुनिक सामान प्रबंधन सुविधाएं तथा छह एयरोब्रिज जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो यात्रियों को निर्बाध, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करती हैं। |
अगला चरण: संशोधित
उड़ान योजना
क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार केवल नए
मार्ग शुरू करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए सुदृढ़ अवसंरचना, विश्वसनीय
परिचालन व्यवस्था तथा छोटे बाजारों में सेवाएं प्रदान करने वाले विमानन
परिचालकों के लिए सक्षम सहयोगी तंत्र भी आवश्यक है। अनेक क्षेत्रों की
भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, जहां हेलीपैड और
विशेष प्रकार के विमानों के माध्यम से आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित
की जा सकती है। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय
संपर्क योजना–संशोधित उड़ान को एक सुदृढ़, समावेशी और
भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रूपरेखा के रूप में तैयार किया गया है।
संशोधित उड़ान योजना
के प्रमुख घटक
संशोधित उड़ान योजना में कई प्रमुख घटक
शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय
हवाई संपर्क का दीर्घकालिक विस्तार सुनिश्चित करना तथा योजना की वित्तीय और
परिचालन व्यवहार्यता को सुदृढ़ बनाना है।
एयरोड्रोमों का विकास
एयरड्रोम का विकास संशोधित उड़ान योजना का एक प्रमुख
घटक है। इसके तहत देशभर में वर्तमान में गैर-परिचालित हवाई पट्टियों पर 100 नए हवाई
अड्डों का विकास किया जाएगा, ताकि नागरिक उड्डयन अवसंरचना का
विस्तार हो सके। इस पहल का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों को
राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ना, यात्रियों
एवं माल परिवहन को सुगम बनाना तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति
देना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अगले आठ वर्षों में एयरड्रोम विकास
पर 12,159 करोड़ रुपये का बजट
प्रस्तावित किया गया है।
संचालन और रखरखाव सहायता
छोटे हवाई अड्डों की दीर्घकालिक संचालन
क्षमता सुनिश्चित करने के लिए संशोधित उड़ान योजना के तहत संचालन एवं
रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। क्षेत्रीय संपर्क
योजना के तहत संचालित कई हवाई अड्डों को प्रारंभिक वर्षों में उच्च परिचालन
व्यय और सीमित राजस्व स्रोतों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में विश्वसनीय और निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए परिचालन
सहायता आवश्यक है। इन्हीं चुनौतियों के समाधान के लिए योजना के अंतर्गत
तीन वर्षों की अवधि तक संचालन एवं रखरखाव सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव
है। इसके तहत प्रत्येक हवाई अड्डे के लिए प्रतिवर्ष 3.06 करोड़ रुपये तथा
प्रत्येक हेलीपोर्ट या जल एयरोड्रोम के लिए प्रतिवर्ष 0.90 करोड़ रुपये तक की
वित्तीय सहायता निर्धारित की गई है। इस घटक पर 2,577
करोड़ रुपये का अनुमानित
व्यय प्रस्तावित है, जिससे देशभर के लगभग 441 हवाई अड्डों को लाभ
मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक हेलीपैड का विकास
देश के अनेक क्षेत्रों में भौगोलिक
चुनौतियों के कारण पारंपरिक हवाई अड्डा अवसंरचना का विकास हमेशा संभव नहीं
होता। ऐसे क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं आवश्यक सेवाओं तक समय पर
पहुंच सुनिश्चित करने तथा अंतिम छोर तक संपर्क को सुदृढ़ बनाने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संशोधित उड़ान योजना के
तहत कनेक्टिविटी से वंचित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 200 आधुनिक
हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है। इन हेलीपैडों से
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार, आपातकालीन
राहत एवं बचाव कार्यों को गति, तथा प्रशासनिक और आर्थिक
गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है। प्रत्येक हेलीपैड के विकास की
अनुमानित लागत 15 करोड़ रुपये निर्धारित की
गई है। इस घटक के लिए अगले आठ वर्षों में 3,661
करोड़ रुपये का कुल
अनुमानित व्यय प्रस्तावित है।
एयरलाइन परिचालकों के लिए व्यवहार्यता
अंतर वित्तपोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग)
एयरलाइन परिचालकों को सहायता प्रदान करने
तथा छोटे बाजारों में क्षेत्रीय मार्गों के सतत विकास को प्रोत्साहित करने
के लिए संशोधित उड़ान योजना के तहत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण
(वायबिलिटी गैप फंडिंग–वीजीएफ) का प्रावधान जारी रखा गया है। कम यात्री संख्या
और अधिक परिचालन लागत के कारण प्रारंभिक चरण में क्षेत्रीय मार्गों के
संचालन के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। वीजीएफ यह सुनिश्चित करता
है कि मांग धीरे-धीरे बढ़ने तक इन मार्गों पर सेवाओं का संचालन
निर्बाध रूप से जारी रहे। संशोधित उड़ान योजना के तहत 10 वर्षों की
अवधि के लिए वीजीएफ मद में 10,043
करोड़ रुपये का प्रावधान
किया गया है। एयरलाइन परिचालकों को पांच वर्षों
तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरे वर्ष से इस सहायता को
चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा, जबकि किसी
मार्ग पर विशेष परिचालन अधिकार केवल तीन वर्षों तक ही प्रदान किए
जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार के विकास और दीर्घकालिक वाणिज्यिक
व्यवहार्यता के बीच संतुलन स्थापित करना है।
आत्मनिर्भर भारत और घरेलू नागरिक
उड्डयन क्षमता
संशोधित उड़ान योजना के तहत आत्मनिर्भर
भारत पहल के अनुरूप घरेलू नागरिक उड्डयन
क्षमता को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। दूरस्थ और दुर्गम
क्षेत्रों में संचालन के लिए उपयुक्त छोटे फिक्स्ड-विंग विमानों तथा
हेलीकॉप्टरों की सीमित उपलब्धता लंबे समय से एक प्रमुख
परिचालन चुनौती रही है। इस चुनौती के समाधान के लिए योजना के अंतर्गत पवन
हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर तथा अलायंस
एयर के लिए दो एचएएल डॉर्नियर विमान उपलब्ध
कराने का प्रस्ताव है। इन स्वदेशी विमानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों
में प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ घरेलू विमान निर्माण
क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शामिल किया गया है।
उड़ान योजना:
क्षेत्रीय विमानन विकास की मजबूत नींव
उड़ान योजना के कार्यान्वयन के नौ वर्षों
से अधिक समय में इसने क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार और नागरिक
उड्डयन क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
परिचालन संबंधी उपलब्धियां
उड़ान योजना के तहत 15 जुलाई 2026 तक देशभर
में 679 क्षेत्रीय
मार्गों के माध्यम से 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों
और जल एयरोड्रोमों को जोड़ा जा चुका है। योजना की शुरुआत से अब तक 3.58 लाख से अधिक
उड़ानों का संचालन किया गया है, जिनके माध्यम से 1.68 करोड़ से अधिक
यात्रियों को हवाई यात्रा की सुविधा प्राप्त हुई है। ये उपलब्धियां
क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने
तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास में उड़ान योजना के महत्वपूर्ण योगदान को
दर्शाती हैं।
कनेक्टिविटी और सेवाओं पर असर
उड़ान योजना का प्रभाव देश के अनेक
क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा गया है। इसके लाभ विशेष रूप से तेज़पुर, पासीघाट, दीव, पिथौरागढ़, राउरकेला
तथा अन्य दूरस्थ, पर्वतीय और द्वीपीय क्षेत्रों में
उल्लेखनीय रहे हैं। इस योजना के माध्यम से परिवहन सेवाओं तक पहुंच में सुधार
हुआ है तथा छोटे शहरों और कस्बों का बड़े शहरी केंद्रों के साथ संपर्क
सुदृढ़ हुआ है। इसके अतिरिक्त, उड़ान योजना ने अनेक क्षेत्रों में
पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं और
आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच को भी बेहतर बनाया है।
यात्रियों की सुविधा इस योजना की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। यात्रा को
अधिक आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के लिए कई पहलें की गई हैं। उड़ान
यात्री कैफे के माध्यम से देशभर के हवाई अड्डों पर किफायती भोजन उपलब्ध
कराया जा रहा है, जबकि फ्लाईब्ररी जैसी पहल के जरिए यात्रियों को पुस्तकों तक
निःशुल्क पहुंच और निःशुल्क वाई-फाई जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे
यात्रा का अनुभव और बेहतर बन रहा है।
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सुगम हवाई यात्रा: उड़ान योजना कैसे बदल
रही है यात्रियों का सफर उड़ान योजना ने
विभिन्न शहरों के बीच यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी लाकर क्षेत्रीय हवाई संपर्क को
अधिक प्रभावी बनाया है। इसका एक प्रमुख उदाहरण विजयवाड़ा
और कडपा के बीच शुरू किया गया हवाई मार्ग है। जो यात्रा पहले सड़क मार्ग से लंबी और समय लेने वाली थी, वह अब हवाई
मार्ग से लगभग एक घंटे में पूरी की जा सकती है। यह क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार से मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों
को दर्शाता है। आंध्र प्रदेश के नागेंद्र भारती ने बताया कि विजयवाड़ा और
कडपा के बीच सड़क मार्ग से यात्रा
करने में पहले 8 से 10 घंटे लगते थे, जबकि अब हवाई मार्ग से यह यात्रा बहुत कम समय में
और अधिक सुविधाजनक ढंग से पूरी हो जाती है। इसी प्रकार, विद्यानगर के सैयद इलियास अहमद
ने कहा कि जिस यात्रा में पहले लगभग छह घंटे लगते थे, उसे अब किफायती किराये पर केवल
एक घंटे में पूरा किया जा सकता है। ये अनुभव उड़ान योजना की उस व्यापक सफलता को
रेखांकित करते हैं, जिसके
माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत हुआ है, यात्रा संबंधी बाधाएं कम हुई हैं और नागरिकों के
लिए आवागमन अधिक सुगम बना है। दूरस्थ क्षेत्रों तक तेज और सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध कराकर यह योजना देशभर के लोगों के दैनिक जीवन को अधिक सहज बना रही है। |
वित्तपोषण व्यवस्था और संस्थागत सहयोग
अमेरिका, कनाडा, ब्राज़ील और
ऑस्ट्रेलिया जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले देशों में
क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बनाए रखने के लिए प्रायः सरकारी वित्तीय सहायता पर
निर्भरता रहती है। भारत ने उड़ान योजना के माध्यम से एक विशिष्ट वित्तपोषण
मॉडल विकसित किया है। इसके तहत क्षेत्रीय संपर्क योजना लेवी व्यवस्था
अपनाई गई है, जिसके माध्यम से नागरिक उड्डयन क्षेत्र के भीतर से ही वित्तीय
संसाधन जुटाए जाते हैं। इसके लिए घरेलू उड़ानों की चयनित श्रेणियों
पर एक मामूली लेवी लगाई जाती है। केंद्र और राज्य सरकारों की सक्रिय
भागीदारी से विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और हवाई अड्डा स्तर पर अधिक उत्तरदायित्व
सुनिश्चित हुआ है। साथ ही, गैर-वित्तीय माध्यम से विमानन
पारिस्थितिकी तंत्र में परिचालन लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिली
है।
उड़ान से संशोधित
उड़ान तक: भारत के नागरिक उड्डयन विजन का विस्तार
उड़ान से संशोधित उड़ान योजना तक की
यात्रा भारत के समावेशी, सुदृढ़ और भविष्य उन्मुख
नागरिक उड्डयन नेटवर्क के निर्माण के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती
है। यह योजना विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने, आर्थिक गतिविधियों को गति देने
तथा नागरिकों के दैनिक आवागमन को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभा रही है। पिछले नौ वर्षों में उड़ान योजना ने देश में
क्षेत्रीय नागरिक उड्डयन के परिदृश्य में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। इसके माध्यम
से सैकड़ों क्षेत्रीय मार्ग ऐसे क्षेत्रों तक हवाई संपर्क पहुंचा चुके
हैं, जहां पहले यह सुविधा सीमित थी, जिससे लाखों
लोगों के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ और किफायती बनी है। संशोधित
उड़ान योजना को मंजूरी मिलने के साथ ही आधुनिक, समावेशी और
टिकाऊ नागरिक उड्डयन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में भारत
की प्रतिबद्धता और सुदृढ़ हुई है। यह योजना सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षित, किफायती और
सुलभ हवाई यात्रा का लाभ देश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे।
संदर्भ
नागर विमानन मंत्रालय
https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/migration/Udaan_Eng.pdf
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प्रधानमंत्री कार्यालय
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
https://www.aai.aero/en/rcs-udan
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तिथि: 17 JUL
2026 by PIB Delhi पीआईबी अनुसंधानपीके/केसी/एनके(रिलीज़ आईडी: 2285673) आगंतुक पटल : 608