सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शासकीय योजना और NGO प्रोजेक्ट के विषय सूचि के लिए क्लिक करें

ज़्यादा दिखाएं

संशोधित उड़ान योजना: भारत के क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क को सशक्त बनाना

 संशोधित उड़ान योजना: भारत के क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क को सशक्त बनाना  

क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई उड़े देश का आम नागरिक-उड़ान योजना ने पूरे देश में हवाई यात्रा को अधिक सुलभ और किफायती बनाया है। पिछले नौ वर्षों में इस योजना के तहत 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और जल एयरोड्रोमों को जोड़ते हुए 679 क्षेत्रीय मार्ग परिचालित किए गए हैं। इन मार्गों पर 3.58 लाख से अधिक उड़ानों के माध्यम से 1.68 करोड़ से अधिक यात्रियों को हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। संशोधित उड़ान योजना को वित्तीय वर्ष 2026–27 से 2035–36 तक 28,840 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत अंतिम छोर तक हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए 100 नए हवाई अड्डों तथा 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने की भी परिकल्पना की गई है।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के माध्यम से दूरियां कम करना

कनेक्टिविटी लंबे समय से आर्थिक विकास की आधारशिला रही है। यह उत्पादन को बाज़ारों से और लोगों को अवसरों से जोड़ती है। तेज, विश्वसनीय और सुलभ परिवहन व्यवस्था आज सतत विकास की एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। इस बदलते परिदृश्य में, नागरिक उड्डयन क्षेत्र तेज, सुगम और व्यापक संपर्क उपलब्ध कराने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभरा है। हालांकि, लंबे समय तक भारत में हवाई संपर्क कुछ चुनिंदा महानगरों और बड़े शहरों तक ही सीमित रहा है। अनेक छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों में नियमित हवाई सेवाओं का अभाव था। इस स्थिति ने महानगरों से परे क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करने और देश के अधिक से अधिक हिस्सों को राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

सभी के लिए सुलभ और व्यापक हवाई संपर्क की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, अक्टूबर 2016 में क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस)–उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) शुरू की गई। यह योजना आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही, इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में भी हवाई संपर्क का विस्तार करना है, जहां यह सुविधा सीमित या उपलब्ध नहीं थी। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू नागरिक उड्डयन बाजार बन चुका है। पिछले एक दशक में देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां देश में 74 परिचालित हवाई अड्डे थे, वहीं 15 जुलाई 2026 तक उनकी संख्या बढ़कर 165 हो गई है। क्षेत्रीय संपर्क योजना–उड़ान ने नए हवाई मार्गों की शुरुआत और क्षेत्रीय विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाकर इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना ने देशभर में अधिक संतुलित और समावेशी विमानन नेटवर्क के विकास को नई गति प्रदान की है।

इसी क्रम में, 4 जुलाई 2026 को शुरू की गई संशोधित उड़ान योजना भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है। यह योजना 10 वर्षों की अवधि, अर्थात वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2035–36 तक, 28,840 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ लागू की जा रही है। योजना के इस नए चरण में हवाई अड्डा अवसंरचना के विस्तार, परिचालन सहायता को सुदृढ़ करने तथा छोटे बाजारों में सेवाएं प्रदान करने वाले विमानन परिचालकों के लिए अधिक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य उड़ान योजना की अब तक की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप क्षेत्रीय हवाई संपर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

 


जोधपुर हवाई अड्डे पर हाल ही में शुरू की गई नई टर्मिनल इमारत विश्वस्तरीय नागरिक उड्डयन अवसंरचना विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है। 23,342 वर्ग मीटर में फैला यह आधुनिक टर्मिनल पीक आवर्स के दौरान 1,500 यात्रियों तथा प्रतिवर्ष 20 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने में सक्षम है। इसमें 20 चेक-इन काउंटर, उन्नत सुरक्षा जांच प्रणाली, आधुनिक सामान प्रबंधन सुविधाएं तथा छह एयरोब्रिज जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो यात्रियों को निर्बाध, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करती हैं।

 अगला चरण: संशोधित उड़ान योजना

क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार केवल नए मार्ग शुरू करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए सुदृढ़ अवसंरचना, विश्वसनीय परिचालन व्यवस्था तथा छोटे बाजारों में सेवाएं प्रदान करने वाले विमानन परिचालकों के लिए सक्षम सहयोगी तंत्र भी आवश्यक है। अनेक क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, जहां हेलीपैड और विशेष प्रकार के विमानों के माध्यम से आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय संपर्क योजना–संशोधित उड़ान को एक सुदृढ़, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रूपरेखा के रूप में तैयार किया गया है।



संशोधित उड़ान योजना के प्रमुख घटक

संशोधित उड़ान योजना में कई प्रमुख घटक शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क का दीर्घकालिक विस्तार सुनिश्चित करना तथा योजना की वित्तीय और परिचालन व्यवहार्यता को सुदृढ़ बनाना है।

 एयरोड्रोमों का विकास

एयरड्रोम का विकास संशोधित उड़ान योजना का एक प्रमुख घटक है। इसके तहत देशभर में वर्तमान में गैर-परिचालित हवाई पट्टियों पर 100 नए हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा, ताकि नागरिक उड्डयन अवसंरचना का विस्तार हो सके। इस पहल का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों को राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ना, यात्रियों एवं माल परिवहन को सुगम बनाना तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अगले आठ वर्षों में एयरड्रोम विकास पर 12,159 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।

 संचालन और रखरखाव सहायता

छोटे हवाई अड्डों की दीर्घकालिक संचालन क्षमता सुनिश्चित करने के लिए संशोधित उड़ान योजना के तहत संचालन एवं रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत संचालित कई हवाई अड्डों को प्रारंभिक वर्षों में उच्च परिचालन व्यय और सीमित राजस्व स्रोतों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में विश्वसनीय और निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए परिचालन सहायता आवश्यक है। इन्हीं चुनौतियों के समाधान के लिए योजना के अंतर्गत तीन वर्षों की अवधि तक संचालन एवं रखरखाव सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है। इसके तहत प्रत्येक हवाई अड्डे के लिए प्रतिवर्ष 3.06 करोड़ रुपये तथा प्रत्येक हेलीपोर्ट या जल एयरोड्रोम के लिए प्रतिवर्ष 0.90 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता निर्धारित की गई है। इस घटक पर 2,577 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय प्रस्तावित है, जिससे देशभर के लगभग 441 हवाई अड्डों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

 आधुनिक हेलीपैड का विकास

देश के अनेक क्षेत्रों में भौगोलिक चुनौतियों के कारण पारंपरिक हवाई अड्डा अवसंरचना का विकास हमेशा संभव नहीं होता। ऐसे क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं आवश्यक सेवाओं तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने तथा अंतिम छोर तक संपर्क को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संशोधित उड़ान योजना के तहत कनेक्टिविटी से वंचित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है। इन हेलीपैडों से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार, आपातकालीन राहत एवं बचाव कार्यों को गति, तथा प्रशासनिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है। प्रत्येक हेलीपैड के विकास की अनुमानित लागत 15 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस घटक के लिए अगले आठ वर्षों में 3,661 करोड़ रुपये का कुल अनुमानित व्यय प्रस्तावित है।

 एयरलाइन परिचालकों के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग)

एयरलाइन परिचालकों को सहायता प्रदान करने तथा छोटे बाजारों में क्षेत्रीय मार्गों के सतत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए संशोधित उड़ान योजना के तहत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग–वीजीएफ) का प्रावधान जारी रखा गया है। कम यात्री संख्या और अधिक परिचालन लागत के कारण प्रारंभिक चरण में क्षेत्रीय मार्गों के संचालन के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। वीजीएफ यह सुनिश्चित करता है कि मांग धीरे-धीरे बढ़ने तक इन मार्गों पर सेवाओं का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहे। संशोधित उड़ान योजना के तहत 10 वर्षों की अवधि के लिए वीजीएफ मद में 10,043 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। एयरलाइन परिचालकों को पांच वर्षों तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरे वर्ष से इस सहायता को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा, जबकि किसी मार्ग पर विशेष परिचालन अधिकार केवल तीन वर्षों तक ही प्रदान किए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार के विकास और दीर्घकालिक वाणिज्यिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन स्थापित करना है।

 आत्मनिर्भर भारत और घरेलू नागरिक उड्डयन क्षमता

संशोधित उड़ान योजना के तहत आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप घरेलू नागरिक उड्डयन क्षमता को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में संचालन के लिए उपयुक्त छोटे फिक्स्ड-विंग विमानों तथा हेलीकॉप्टरों की सीमित उपलब्धता लंबे समय से एक प्रमुख परिचालन चुनौती रही है। इस चुनौती के समाधान के लिए योजना के अंतर्गत पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर तथा अलायंस एयर के लिए दो एचएएल डॉर्नियर विमान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इन स्वदेशी विमानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ घरेलू विमान निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शामिल किया गया है।

 उड़ान योजना: क्षेत्रीय विमानन विकास की मजबूत नींव

उड़ान योजना के कार्यान्वयन के नौ वर्षों से अधिक समय में इसने क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

 परिचालन संबंधी उपलब्धियां

उड़ान योजना के तहत 15 जुलाई 2026 तक देशभर में 679 क्षेत्रीय मार्गों के माध्यम से 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और जल एयरोड्रोमों को जोड़ा जा चुका है। योजना की शुरुआत से अब तक 3.58 लाख से अधिक उड़ानों का संचालन किया गया है, जिनके माध्यम से 1.68 करोड़ से अधिक यात्रियों को हवाई यात्रा की सुविधा प्राप्त हुई है। ये उपलब्धियां क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास में उड़ान योजना के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती हैं।

कनेक्टिविटी और सेवाओं पर असर

उड़ान योजना का प्रभाव देश के अनेक क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा गया है। इसके लाभ विशेष रूप से तेज़पुर, पासीघाट, दीव, पिथौरागढ़, राउरकेला तथा अन्य दूरस्थ, पर्वतीय और द्वीपीय क्षेत्रों में उल्लेखनीय रहे हैं। इस योजना के माध्यम से परिवहन सेवाओं तक पहुंच में सुधार हुआ है तथा छोटे शहरों और कस्बों का बड़े शहरी केंद्रों के साथ संपर्क सुदृढ़ हुआ है। इसके अतिरिक्त, उड़ान योजना ने अनेक क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच को भी बेहतर बनाया है। यात्रियों की सुविधा इस योजना की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। यात्रा को अधिक आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के लिए कई पहलें की गई हैं। उड़ान यात्री कैफे के माध्यम से देशभर के हवाई अड्डों पर किफायती भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि फ्लाईब्ररी जैसी पहल के जरिए यात्रियों को पुस्तकों तक निःशुल्क पहुंच और निःशुल्क वाई-फाई जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे यात्रा का अनुभव और बेहतर बन रहा है।

 

 

सुगम  हवाई यात्रा: उड़ान योजना कैसे बदल रही है यात्रियों का सफर


उड़ान योजना ने विभिन्न शहरों के बीच यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी लाकर क्षेत्रीय हवाई  संपर्क को अधिक प्रभावी बनाया है। इसका एक प्रमुख उदाहरण विजयवाड़ा और कडपा के बीच शुरू किया गया हवाई मार्ग है। जो यात्रा पहले सड़क मार्ग से लंबी और समय लेने वाली थी, वह अब हवाई मार्ग से लगभग एक घंटे में पूरी की जा सकती है। यह क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार से मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों को दर्शाता है। आंध्र प्रदेश के नागेंद्र भारती ने बताया कि विजयवाड़ा और कडपा के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने में पहले 8 से 10 घंटे लगते थे, जबकि अब हवाई मार्ग से यह यात्रा बहुत कम समय में और अधिक सुविधाजनक ढंग से पूरी हो जाती है। इसी प्रकार, विद्यानगर के सैयद इलियास अहमद ने कहा कि जिस यात्रा में पहले लगभग छह घंटे लगते थे, उसे अब किफायती किराये पर केवल एक घंटे में पूरा किया जा सकता है। ये अनुभव उड़ान योजना की उस व्यापक सफलता को रेखांकित करते हैं, जिसके माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत हुआ है, यात्रा संबंधी बाधाएं कम हुई हैं और नागरिकों के लिए आवागमन अधिक सुगम बना है। दूरस्थ क्षेत्रों तक तेज और सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध कराकर यह योजना देशभर के लोगों के दैनिक जीवन को अधिक सहज बना रही है।

वित्तपोषण व्यवस्था और संस्थागत सहयोग

अमेरिका, कनाडा, ब्राज़ील और ऑस्ट्रेलिया जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले देशों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बनाए रखने के लिए प्रायः सरकारी वित्तीय सहायता पर निर्भरता रहती है। भारत ने उड़ान योजना के माध्यम से एक विशिष्ट वित्तपोषण मॉडल विकसित किया है। इसके तहत क्षेत्रीय संपर्क योजना लेवी व्यवस्था अपनाई गई है, जिसके माध्यम से नागरिक उड्डयन क्षेत्र के भीतर से ही वित्तीय संसाधन जुटाए जाते हैं। इसके लिए घरेलू उड़ानों की चयनित श्रेणियों पर एक मामूली लेवी लगाई जाती है। केंद्र और राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी से विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और हवाई अड्डा स्तर पर अधिक उत्तरदायित्व सुनिश्चित हुआ है। साथ ही, गैर-वित्तीय  माध्यम से विमानन पारिस्थितिकी तंत्र में परिचालन लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिली है।

 उड़ान से संशोधित उड़ान तक: भारत के नागरिक उड्डयन विजन का विस्तार

उड़ान से संशोधित उड़ान योजना तक की यात्रा भारत के समावेशी, सुदृढ़ और भविष्य उन्मुख नागरिक उड्डयन नेटवर्क के निर्माण के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह योजना विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने, आर्थिक गतिविधियों को गति देने तथा नागरिकों के दैनिक आवागमन को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पिछले नौ वर्षों में उड़ान योजना ने देश में क्षेत्रीय नागरिक उड्डयन के परिदृश्य में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। इसके माध्यम से सैकड़ों क्षेत्रीय मार्ग ऐसे क्षेत्रों तक हवाई संपर्क पहुंचा चुके हैं, जहां पहले यह सुविधा सीमित थी, जिससे लाखों लोगों के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ और किफायती बनी है। संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी मिलने के साथ ही आधुनिक, समावेशी और टिकाऊ नागरिक उड्डयन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता और सुदृढ़ हुई है। यह योजना सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षित, किफायती और सुलभ हवाई यात्रा का लाभ देश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे।

 संदर्भ

नागर विमानन मंत्रालय

https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/migration/Udaan_Eng.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2245099&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2245471&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2241546&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2181310&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2241546&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2236062&reg=3&lang=1

https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/migration/UDAN-Manual.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2281051&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2285420&reg=3&lang=1

प्रधानमंत्री कार्यालय

https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/cabinet-approves-regional-connectivity-scheme-modified-udan-with-a-total-outlay-of-rs-28840-crore/

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण

https://www.aai.aero/en/rcs-udan

 PDF में देखने के लिए क्लिक करें

 

प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 by PIB Delhi पीआईबी अनुसंधानपीके/केसी/एनके(रिलीज़ आईडी: 2285673) आगंतुक पटल : 608

जिन विषयों को खोज रहे हैं लोग

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 एवं 2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा

·         सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 पूर्वी एवं मध्य भारत में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा , ·         डेयरी सहकारी संस्थाएँ महिलाओं को गृहिणी से उद्यमी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण वित्तीय इकोसिस्टम को सशक्त कर रही हैं तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा दे रही हैं , सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की वैश्विक ऊर्जा असंतुलन एवं ऊर्जा संकट के दौर में सहकारी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी एवं सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल भारत को आत्मनिर्भर एवं सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाएंगे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना , प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों एवं किसान-के...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

पद्मा पुरस्कार 2026 की घोषणा

पद्मा पुरस्कार 2026 की घोषणा पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं , जो तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं: पद्म विभूषण , पद्म भूषण और पद्म श्री। ये पुरस्कार कला , सामाजिक कार्य , सार्वजनिक मामलों , विज्ञान और इंजीनियरिंग , व्यापार और उद्योग , चिकित्सा , साहित्य और शिक्षा , खेल , सिविल सेवा आदि विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाते हैं। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए , पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोहों में प्रदान किए जाते हैं , जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष मार्च/अप्रैल के आसपास होते हैं। वर्ष 2026 के लिए , राष्ट्रपति ने 131 पद्म पुरस्कारों के प्रदान करने की स्वीकृति दी है , जिनमें 2 युगल पुरस्कार (युगल पुरस्कार को एक ही माना जाता है) शामिल हैं , जैसा कि नीचे दी गई सूची में है। इस सूची में 5 पद्म विभूषण , 13 पद्म भूषण और 113 प...

आंतरिक शिकायत समिति का महत्व... आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। पढ़िए कैसे यह समिति महिलाओं का संरक्षण करती है....

सुरक्षित और दबावपूर्ण कामकाजी वातावरण को... कानून के दायरे में लाकर गरिमापूर्ण बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा.... आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. जागरूकता फैलाना: आईसीसी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता फैलाने का काम करती है। यह कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न के बारे में शिक्षित करती है और उन्हें इस बारे में जानकारी प्रदान करती है कि यदि वे उत्पीड़न का शिकार होते हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए। 5. कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाना: आईसीसी क...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा

  भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा हाइड्रोजन रेल का आगमन भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई 2026 को उद्घाटन के साथ , हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा। यह उत्तर रेलवे के जींद - सोनीपत खंड पर चलेगी। यह ट्रेन समर्पित हाइड्रोजन भंडारण , ईंधन भरने और परिचालन बुनियादी ढांचे के साथ उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकी से युक्त है। यह भारत में स्वच्छ रेल परिवहन की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करेगा। एक प्रायौगिक पहल के रूप में विकसित यह ट्रेन नवाचार के लिए भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार परिवहन ...

महाराष्ट्र विधानसभा ने नेवा अधिनियम को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया

  डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "एक राष्ट्र , एक एप्लीकेशन" के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , महाराष्ट्र विधानमंडल ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) को अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। महाराष्ट्र विधानसभा में नेवा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय , महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग और महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय के बीच 16 जुलाई 2026 को मुंबई के विधानसभा भवन में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव और नेवा के मिशन लीडर डॉ. सत्य प्रकाश उपस्थित थे। महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से सचिव-प्रथम श्री जितेंद्र भोले और सचिव-चतुर्थ श्री सुदर्शन साठे उपस्थित थे। महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग की सचिव श्रीमती सुप्रिया धिवरे , अध्यक्ष के निजी सचिव श्री पंडित खेड़कर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक का समापन भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय , महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय और महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग के बीच समझ...

इस ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाले नए विषयों को जानने के लिए फॉलो करें