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पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी

भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।, उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती, भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।

माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति देने की घोषणा की। अब तक, विभिन्न राज्यों और सीपीएसई में 4,874 ईवी चार्जर्स की स्थापना के लिए कुल 503.86 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाले ईवी चार्जिंग प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। स्वीकृत प्रस्तावों में एचपीसीएल, आईओसीएल और बीपीसीएल जैसे बड़े सीपीएसई के साथ-साथ राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य भी शामिल हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. हनीफ़ कुरैशी ने कहा कि पीएम ई-ड्राइव पहल पूरे भारत में एक निर्बाध और भविष्योन्मुखी ईवी चार्जिंग नेटवर्क की नींव रख रही है। भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक-तिपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक-कारों, इलेक्ट्रिक-बसों और इलेक्ट्रिक-ट्रकों के लिए ईवी चार्जर्स को सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र, राज्यों, बीएचईएल, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स और उद्योग के हितधारकों के बीच समन्वित प्रयास एक प्रभावी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास के अगले चरण को समर्थन देने में सक्षम होगा।

पीएम ई-ड्राइव के अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है। इनमें पीएलआई ऑटो  (25,938 करोड़ रुपये), पीएलआई एसीसी (18,100 करोड़ रुपये), भुगतान सुरक्षा तंत्र (3,435 करोड़ रुपये) और रेर अर्थ मैग्नेट योजना (7,280 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

सम्मेलन देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी लाने पर केंद्रित रहा।

यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ। इस सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स, ईवी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम), तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), ऑटोमोबाइल उद्योग संघों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

राज्यों ने सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां और कार्यान्वयन रणनीतियां साझा कीं।

इस सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों में तेलंगाना सरकार के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री नवीन मित्तल (आईएएस), केरल सरकार के अपर मुख्य सचिव (विद्युत) श्री पुनीत कुमार (आईएएस),  केरल सरकार के केएसईबी के सीएमडी श्री मिन्हाज आलम, कर्नाटक सरकार के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री गौरव गुप्ता और ओडिशा सरकार के परिवहन आयुक्त श्री अमिताभ ठाकुर शामिल थे। इन अधिकारियों ने ईवी चार्जिंग के विस्तार और चार्जिंग की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए अपने अनुभव, नीतिगत पहलों और राज्य-स्तरीय रणनीतियों को साझा किया।

पीएम ई-ड्राइव योजना देशभर में चार्जिंग नेटवर्क को आगे बढ़ा रही है।

PM ई-ड्राइव योजना के तहत, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और कई क्षेत्रों में ईवी इकोसिस्टम के विकास में मदद करने के लिए कुल 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। यह योजना विभिन्न वाहन श्रेणियों और उनसे जुड़े पार्ट्स के लिए डिमांड इंसेंटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देती है। इस योजना के तहत, लगभग 24.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों और लगभग 3.16 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स—जिनमें ई-रिक्शा, ई-कार्ट और एल5 श्रेणी के वाहन शामिल हैं—को सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इस योजना में 14,028 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए 4,391 करोड़ रुपये की सहायता देने की भी परिकल्पना की गई है। वाणिज्यिक और सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रकों के लिए भी खास सपोर्ट शामिल किया गया है।

कुल परिव्यय में से, 3,679 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिक दोपहिया, इलेक्ट्रिक तिपहिया, इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक-ट्रक और इलेक्ट्रिक वाहनों की अन्य उभरती श्रेणियों के लिए डिमांड इंसेंटिव हेतु निर्धारित किए गए हैं। देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

विस्तारित और विश्वसनीय ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सहयोग महत्वपूर्ण है

इस सम्मेलन में देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, इंटरऑपरेबिलिटी, मानकीकरण और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, ओएमसी, ओईएम, सीपीओ और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के महत्व पर ज़ोर दिया गया। प्रतिभागियों ने भारत के तेजी से बढ़ते ईवी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए तेजी से तैनाती, सामान्य तकनीकी मानकों और बेहतर सार्वजनिक-निजी भागीदारी की जरूरत पर प्रकाश डाला।

भारी उद्योग मंत्रालय ने स्वच्छ परिवहन लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।

भारी उद्योग मंत्रालय ने राज्यों और हितधारकों को ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को समय पर कार्यान्वित करने में सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह भारत के स्वच्छ परिवहन की दिशा में बदलाव में तेजी लाने, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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पीके/केसी/एसके/डीएप्रविष्टि तिथि: 12 MAY 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2260454) आगंतुक पटल : 332

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माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने... जो निर्वाचन शपथ पत्र चुनाव आयोग में जमा करवाया है... उसमे भूपेश बघेल के विरुद्ध संस्थापित जांच कार्यवाही का उल्लेख नहीं है... इसलिए अभ्यर्थी भूपेश बघेल के नाम निर्देशन पत्र पर आपत्ति और पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है जिसका विवरण इस प्रकार है...

शपथ पत्र मामला   अभ्यर्थी भूपेश बघेल के निर्वाचन शपथ पत्र मामले में संविक्षा कार्यवाही के दौरान की गई आपत्ति पर भूपेश बघेल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने निर्वाचन कार्यवाही प्रक्रिया की विधि मान्यता को भूपेश बघेल ने स्वयं प्रश्नांकित छोड़ दिया अतः यह प्रश्न अनुत्तरित रह गया है कि, क्या भूपेश बघेल ने मतदाताओं को गुमराह करने के लिए बीएसपी लिज मामले में झूठी घोषणा की थी ? प्रतिक्रिया दो भूपेश बघेल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बीएसपी लिज मामले में कि गई घोषणा की वस्तुस्थिति जानने के लिए पंजीकृत डाक से प्रेषित नोटिस पर कोई जवाब और प्रतिक्रिया नहीं गई दी है इससे भी गंभीर मामला यह है की भूपेश बघेल ने नोटिस पर संज्ञान लेकर जांच आदेश देने वाले संभाग आयुक्त दुर्ग न्यायालय की कार्यवाही पर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और भिलाई के मतदाताओं को गुमराह करने वाला राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति का भाषण करके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जैसे गरिमापूर्ण पद की छवि को धूमिल की है । न्यायालयीन कार्यवाही प्रश्नांकित   दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा का निर्वाचन  संविक्षा अधिकारी अपने न्यायालयीन शक्तिया...

बलौदा बाजार के शशि भूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल एवं रायपुर के सीए नीरज बैद व अन्य के विरुद्ध दुर्ग न्यायालय के आदेश से अपराध दर्ज हुआ… जिसके बाद न्यायालय पर जन सामान्य का यह विश्वास पुनः स्थापित हो गया… पढ़िए अनापेक्षित पुलिस पर समीक्षात्मक लेख…

भिलाई के व्यवसाई की शिकायत पर पुलिस की शंकास्पद और गैर जिम्मेदाराना भूमिका… जो की नियमित और प्रावधानों का अनुपालन-प्रिय व्यवसाई को व्यथित कर न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर करने वाली साबित हुई… इस मामले में न्यायलयीन संज्ञान लिया जाना कानूनी प्रावधानों के प्रति अनुपालन-प्रिय व्यवसायियों के लिए विश्वसनीय कानूनी आधार साबित करने वाला अभूतपूर्व उदाहरण बन गया है…  इस उदाहरण के वैधानिक पहलू निम्नानुसार है: कानूनी प्रावधानों के प्रति अनुपालन-प्रिय अनुपालन-प्रिय व्यवसाई के परिवाद मामले पर न्यायलयीन कार्यवाही का विवरण मार्गदर्शक आदेश साबित हो रहा है…  भिलाई नेहरू नगर के अजय अग्रवाल जो कि EBPL Ventures Pvt.Ltd के डायरेक्टर है इन्होंने पुलिस थाना सुपेला भिलाई में  23/10/2022 को लिखित शिकायत एफआईआर करने वास्ते प्रस्तुत की थी । जिस पर पुलिस थाने द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने के बाद कानूनी प्रावधानों के प्रति अनुपालन-प्रिय व्यथित व्यवसाई अजय अग्रवाल ने पुलिस अधीक्षक दुर्ग के समक्ष 09/11/2022 को शिकायत प्रस्तुत की… लेकिन अनापेक्षित तौर पर व्यथित व्यवसाई के लिखित शिकायत पर पुलिस न...

छत्तीसगढ़ में उप मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा हो गई है और उप मुख्यमंत्री टी.एस.सिंह देव ने केंद्रीय कांग्रेस के निर्णयानुसार अपनी नई भूमिका संभाल ली है... जिसके कारण छत्तीसगढ़ की राजनीति से ED की कार्यवाही का भय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन से हट जायेगा क्योंकि अब अगर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से किसी भी जांच कार्यवाही में पूछताछ होगी तब की स्थिति में उप मुख्यमंत्री का पद सभी जिम्मेदारी संभालने के लिए विधि सम्मत और प्राधिकृत विकल्प होगा लेकिन इसके अलावा भी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक आबो-हवा में बहुत कुछ बदल जायेगा... पढ़िए क्या होंगे नए राजनीतिक बदलाव नीचे है राजनैतिक विश्लेषण

दिल्ली में कांग्रेस के थिंकटैंक ने ED की कार्यवाहियों को छत्तीसगढ़ की राजनीतिक गतिविधियों पर हावी होने से रोकने के लिए निर्णायक कदम उड़ाया है और छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता टी.एस.सिंहदेव की एक पुरानी मांग को मान लिया है l उप मुख्यमंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री दावेदार होने के एक मात्र चर्चित नाम को कांग्रेस हाई कमान ने उप मुख्यमंत्री पद की मंजूरी दे दी है l जिसके बाद कांग्रेसी नेता टी.एस. सिंहदेव का राजनैतिक महत्व भी बढ़ गया है गौर तलब रहे की अगर अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विरुद्ध… कोई कार्यवाही यदि ED करेगी तो कांग्रेस के पास छत्तीसगढ़ में विधि मान्य विकल्प तैयार है इस बात का प्रामाणिक आश्वासन कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली स्तर से दे दिया गया है l अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का विकल्प अधिकृत तौर पर तैयार हो गया है क्योंकि उप मुख्यमंत्री के रूप में टी.एस.सिंहदेव ने अपनी पदेन जिम्मेदारी को अधिकृत तौर पर संभाल लिया है कांग्रेस हाई कमान के द्वारा उप मुख्यमंत्री के विषय पर लिया गया तथाकथित निर्णय जन सामान्य की जान...

यवतमाल, महाराष्ट्र में विभिन्न परियोजनाओं के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

जय भवानी , जय भवानी , जय सेवालाल! जय बिरसा! आपल्या सर्वांना माझा नमस्कार!  महाराष्ट्र के राज्यपाल श्रीमान रमेश बैस जी , मुख्यमंत्री श्रीमान एकनाथ शिंदे जी , उपमुख्यमंत्री , देवेन्द्र फडणवीस जी , अजित पवार जी , मंच पर विराजमान अन्य सभी वरिष्ठ महानुभाव। आज इस कार्यक्रम में देश के भी अन्य भागों से बहुत बड़ी मात्रा में हमारे किसान भाई-बहन जुड़े हैं , मैं उनका भी यहां से स्वागत करता हूं। भाइयों और बहनों , मैं छत्रपति शिवाजी महाराज की इस पावन भूमि को श्रद्धापूर्वक वंदन करता हूं। महाराष्ट्र की संतान और देश की शान , डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर को भी मैं नमन करता हूं। यवतमाळ-वाशिम तांडेर मार गोर बंजारा भाई , भिया , नायक , डाव , कारभारी तमनून हात जोडन राम रामी! साथियों , मैं 10 साल पहले जब ‘चाय पर चर्चा’ करने यवतमाल आया था , तो आपने बहुत आशीर्वाद दिया। और देश की जनता ने NDA को 300 पार पहुंचा दिया। फिर मैं 2019 में फरवरी के महीने में ही यवतमाल आया था। तब भी आपने हम पर खूब प्रेम बरसाया। देश ने भी तब NDA को 350 पार करा दिया। और आज जब 2024 के चुनाव से पहले मैं विकास के उत्सव में ...

सतारा जिला कोरोना संक्रमण की समीक्षा जल्द चालू होगा जिला खेल परिसर में बैडमिंटन हॉल में 78 बेड के कोविड केंद्र

अस्पताल सुविधाओं की उपलब्धता, बिस्तरों में वृद्धि के संबंध में तत्काल कार्रवाई करें - अध्यक्ष रामराजे नाइक-निम्बालकर सतारा जिला कोरोना संक्रमण की समीक्षा सतारा (जिमका): जिले में कोरोना रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि रोगियों को उपचार से वंचित न किया जाए और यह सुनिश्चित करने के लिए देखभाल की जाए कि जिन रोगियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता है, वे ऑक्सीजन से वंचित हैं, रामराजे नाइक-निम्बालकर, विधानसभा अध्यक्ष परिषद कोरोना रोकथाम उपाय की बैठक कोरेगांव पंचायत समिति के हॉल में विधान परिषद के अध्यक्ष रामराजे नाइक-निम्बालकर की अध्यक्षता में हुई। इस बार उन्होंने सुझाव दिया। बैठक में संरक्षक मंत्री बालासाहेब पाटिल, गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) शंभुराज देसाई, सांसद श्रीनिवास पाटिल, विधायक शशिकांत शिंदे, विधायक महेश शिंदे, विधायक दीपक चव्हाण, कलेक्टर शेखर सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौड़ा, पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे अजय कुमार बंसल, अनुविभागीय अधिकारी ज्योति पाटिल। तहसीलदार अमोल ...

EMRS एकलव्य विद्यालय की संचालन प्रणाली मेरे दृष्टिकोण से .... भाग १

  एकलव्य शाला योजना आशा की किरण है क्योकि ... आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने बनाई है "महत्वाकांक्षी एकलव्य शाला योजना" ? अब शासकीय पदों की अपेक्षित शैक्षणिक व तकनिकी आहर्ता अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को हासिल करना आसान हो गया है केंद्र और राज्य सरकार के प्रशासकीय तालमेल से संचालित होने वाली एकलव्य शाला अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दिलवाएगी मुख्य धारा से जुड़ने अवसर   एकलव्य विद्यालय योजना का पहला चरण सामाजिक अपेक्षाओं को पूरा कर रहा है लेकिन इसके संचालन और व्यस्थपन की प्रक्रिया क्या व्यवहारिक है ? आदिवासी आवासीय विद्यालय की स्थापना की परिकल्पना भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कि है और इस परिकल्पना को वास्तविकता की धरातल पर लाने के लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय नामक योजना को स्थापित किया गया इस महत्वाकांक्षी योजना को भारत सरकार ने अपने जनजाति कार्य मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वित भी किया है आदिवासी छात्रों के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह योजना बढ़ी कारगर साबित हो रहे है अपने शुर...

उत्पन्नाचे विवरणपत्र सादर करण्याची मुदत 31 ऑक्टोबर 2021 ऐवजी आता 30 नोव्हेंबर 2021 पर्यंत वाढविण्यात आली आहे;

Ministry of Finance कोविड-19 साथीची दुष्कर परिस्थिती लक्षात घेत सरकारने काही बाबतींत दिली मुदतवाढ Posted Date:- May 20, 2021 नवी दिल्‍ली, 20 मे 2021   कोविड-19 साथीच्या दुष्कर परिस्थितीमुळे विविध भागीदारांना भेडसावणाऱ्या अडचणींवर तोडगा काढण्यासाठी सरकार वचनबद्ध आहे. त्याच प्रयत्नांचा एक भाग म्हणून, विविध भागीदारांकडून आलेल्या विनंत्यांचा विचार करून, 'प्राप्तिकर कायदा,1961' (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर कायदा/ हा कायदा असा असेल) याअंतर्गतच्या अनुपालनासाठीची मुदत पुढील काही बाबतींत वाढवून देण्याचा निर्णय सरकारने घेतला आहे--: ‘प्राप्तिकर नियम,1962’ (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर नियम / हे नियम असा असेल) यातील नियम 114E अंतर्गत आणि संबंधित विविध अधिसूचनांच्या अधीन राहून  31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'वित्तीय वर्ष 2020-21 साठी SFT म्हणजे 'वित्तीय व्यवहार निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरता येईल; सदर नियम 114G अंतर्गत 31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'कॅलेंडर वर्ष 2020 साठी नोंदण्यायोग्य खात्याचे निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा...

निर्वाचन आरोपी सुश्री सरोज पांडेय के विरुद्ध प्रस्तुत निर्वाचन याचिका में समाज सेवक श्री विंसेंट डिसूजा जी ने गवाही दी और प्रस्तुत किए गए प्रमाणित दस्तावेजों की पुष्टि भी कर दी… पढ़िए याचिका कार्यवाही की वर्तमान स्थिति…

बिलासपुर : उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में सुश्री सरोज पांडेय की राज्य सभा सदस्यता को श्री लेखराम साहू ने निर्वाचन याचिका क्रमांक EP 01/2018. (Lekhram Sahu vs Saroj pandey court case) प्रस्तुत करके चुनौती दी है । वर्तमान में  माननीय श्री नरेंद्र कुमार व्यास महोदय के न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रहीं है । जिसमे याचिकाकर्ता लेखराम साहू की गवाही पूरी होने के बाद प्रमुख गवाह विंसेंट डिसूजा ने अपनी गवाही माननीय न्यायालय के समक्ष दी और दस्तावेजिक प्रमाण जो की विंसेंट डिसूजा ने शासकीय कार्यालयों से विधिवत अभिप्रात्त करके निर्वाचन याचिका कार्यवाही में याचिकाकर्ता में माध्यम से साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत किए थे उनकी पुष्टि माननीय न्यायालय के समक्ष कर दी। उल्लेखनीय है कि, विंसेंट डिसूजा के द्वारा निर्वाचन याचिकाकर्ता के माध्यम से न्यायालय के समक्ष साक्ष्य स्वरूप दुर्ग स्थित शासकीय भंडार गृह जल परिसर के आबंटन दस्तावेज, बैंक खाता विवरण जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेजिक प्रमाणों को प्रस्तुत किया गया और जल परिसर भंडार गृह का बकाया बिजली बिल के संबंध में बताया है । उच्च न्यायालय छत...

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