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पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी

भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।, उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती, भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।

माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति देने की घोषणा की। अब तक, विभिन्न राज्यों और सीपीएसई में 4,874 ईवी चार्जर्स की स्थापना के लिए कुल 503.86 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाले ईवी चार्जिंग प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। स्वीकृत प्रस्तावों में एचपीसीएल, आईओसीएल और बीपीसीएल जैसे बड़े सीपीएसई के साथ-साथ राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य भी शामिल हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. हनीफ़ कुरैशी ने कहा कि पीएम ई-ड्राइव पहल पूरे भारत में एक निर्बाध और भविष्योन्मुखी ईवी चार्जिंग नेटवर्क की नींव रख रही है। भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक-तिपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक-कारों, इलेक्ट्रिक-बसों और इलेक्ट्रिक-ट्रकों के लिए ईवी चार्जर्स को सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र, राज्यों, बीएचईएल, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स और उद्योग के हितधारकों के बीच समन्वित प्रयास एक प्रभावी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास के अगले चरण को समर्थन देने में सक्षम होगा।

पीएम ई-ड्राइव के अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है। इनमें पीएलआई ऑटो  (25,938 करोड़ रुपये), पीएलआई एसीसी (18,100 करोड़ रुपये), भुगतान सुरक्षा तंत्र (3,435 करोड़ रुपये) और रेर अर्थ मैग्नेट योजना (7,280 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

सम्मेलन देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी लाने पर केंद्रित रहा।

यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ। इस सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स, ईवी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम), तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), ऑटोमोबाइल उद्योग संघों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

राज्यों ने सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां और कार्यान्वयन रणनीतियां साझा कीं।

इस सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों में तेलंगाना सरकार के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री नवीन मित्तल (आईएएस), केरल सरकार के अपर मुख्य सचिव (विद्युत) श्री पुनीत कुमार (आईएएस),  केरल सरकार के केएसईबी के सीएमडी श्री मिन्हाज आलम, कर्नाटक सरकार के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री गौरव गुप्ता और ओडिशा सरकार के परिवहन आयुक्त श्री अमिताभ ठाकुर शामिल थे। इन अधिकारियों ने ईवी चार्जिंग के विस्तार और चार्जिंग की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए अपने अनुभव, नीतिगत पहलों और राज्य-स्तरीय रणनीतियों को साझा किया।

पीएम ई-ड्राइव योजना देशभर में चार्जिंग नेटवर्क को आगे बढ़ा रही है।

PM ई-ड्राइव योजना के तहत, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और कई क्षेत्रों में ईवी इकोसिस्टम के विकास में मदद करने के लिए कुल 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। यह योजना विभिन्न वाहन श्रेणियों और उनसे जुड़े पार्ट्स के लिए डिमांड इंसेंटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देती है। इस योजना के तहत, लगभग 24.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों और लगभग 3.16 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स—जिनमें ई-रिक्शा, ई-कार्ट और एल5 श्रेणी के वाहन शामिल हैं—को सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इस योजना में 14,028 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए 4,391 करोड़ रुपये की सहायता देने की भी परिकल्पना की गई है। वाणिज्यिक और सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रकों के लिए भी खास सपोर्ट शामिल किया गया है।

कुल परिव्यय में से, 3,679 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिक दोपहिया, इलेक्ट्रिक तिपहिया, इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक-ट्रक और इलेक्ट्रिक वाहनों की अन्य उभरती श्रेणियों के लिए डिमांड इंसेंटिव हेतु निर्धारित किए गए हैं। देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

विस्तारित और विश्वसनीय ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सहयोग महत्वपूर्ण है

इस सम्मेलन में देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, इंटरऑपरेबिलिटी, मानकीकरण और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, ओएमसी, ओईएम, सीपीओ और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के महत्व पर ज़ोर दिया गया। प्रतिभागियों ने भारत के तेजी से बढ़ते ईवी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए तेजी से तैनाती, सामान्य तकनीकी मानकों और बेहतर सार्वजनिक-निजी भागीदारी की जरूरत पर प्रकाश डाला।

भारी उद्योग मंत्रालय ने स्वच्छ परिवहन लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।

भारी उद्योग मंत्रालय ने राज्यों और हितधारकों को ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को समय पर कार्यान्वित करने में सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह भारत के स्वच्छ परिवहन की दिशा में बदलाव में तेजी लाने, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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पीके/केसी/एसके/डीएप्रविष्टि तिथि: 12 MAY 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2260454) आगंतुक पटल : 332

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माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

झोलाछाप डॉक्टरों और अपंजीकृत चिकित्सा व्यवसाइयों को पहचानना और उनसे बचाव करने के लिए हमारे लोकतांत्रिक कानूनी व्यवस्था में चिकित्सा सुविधा देने के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की है पर्याप्त व्यवस्था है… पढ़िए जागरूक रहने के विधिक पहलू…

लोक स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले अनियमित चिकित्सा व्यवसाई ग्रामीण और शहरी दोनो ही जगह… अपनी दुकान चला रहें है लेकिन जन जागरूक के आभाव में इनके विरुद्ध शासन कानूनी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है… इसलिए यह लेख जन जागरूकता लाने का एक प्रयास है… झोलाछाप डॉक्टरों को पहचानना और उनसे बचना बेहद ज़रूरी है। ये लोग न केवल आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं बल्कि आपकी जान को भी खतरे में डाल सकते हैं। झोलाछाप डॉक्टरों की कुछ खास पहचान: अयोग्यता का दावा: ये लोग अक्सर असाध्य बीमारियों का भी इलाज करने का दावा करते हैं, जो किसी योग्य डॉक्टर के लिए भी मुश्किल हो सकता है। गुप्त स्थान: ये लोग अक्सर घरों, छोटी दुकानों या ऐसी जगहों पर अपना क्लीनिक चलाते हैं जहां कोई मेडिकल सुविधाएं नहीं होतीं। सस्ते इलाज का लालच: ये लोग आमतौर पर अन्य डॉक्टरों की तुलना में बहुत कम पैसे में इलाज करने का झांसा देते हैं। आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञता: ये लोग आधुनिक मेडिकल उपकरणों और तकनीकों से अनजान होते हैं। अनावश्यक दवाएं: ये लोग अक्सर मरीजों को अनावश्यक दवाएं देते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती...

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पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ ·         ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने हेतु 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी ·         महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में निर्बाध ट्रांजिशन सुनिश्चित किया जाएगा ·         रोजगार , आजीविका और ग्रामीण परिवर्तन को गति देने हेतु ₹ 95,692 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन ·         मौजूदा जॉब कार्ड मान्य रहेंगे , पहले से चल रहे कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए , भारत सरकार ने 11 मई 2026 को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [ VB–G RAM G] अधिनियम , 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्...

सीसीपीए ने कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की; कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए गए और उन पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया

  सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों पर जुर्माना लगाया केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों , अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 के अंतर्गत उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन में लिप्त पाए जाने पर मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना और सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) के खिलाफ 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अंतिम आदेश पारित किया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए। मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्र की अध्यक्षता वाले केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) , सीकर के खिलाफ आदेश पारित किए हैं। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीईट...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय नवाचार एवं समावेशिता शिखर सम्मेलन - भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों - में जननी (प्रसवपूर्व, प्रसवोत्तर और नवजात शिशु एकीकृत देखभाल की यात्रा) प्‍लेटफॉर्म लॉन्‍च किया।

·         मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में जननी प्लेटफॉर्म लॉन्‍च किया ·         जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया ·         विद्यमान आरसीएच पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित , यह प्लेटफॉर्म देखभाल की निरंतरता में प्रमुख सेवा वितरण कार्यकलापों को दर्ज करके एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाता है ·         आज तक , जननी ने 1.34 करोड़ लाभार्थी पंजीकरण , 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण , 30 लाख से अधिक एमसीएच कार्ड जारी किए और एक लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन किए   जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन ...

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