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प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना

 सामाजिक सहायता के पांच और वर्ष, इसके दायरे में दिव्यांगजनों को व्यापक तौर पर शामिल किया गया                   

14 अक्टूबर 2026 को, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 53,428 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ, पांच वर्षों (2026-27 से 2030-31) के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जारी रखने की मंजूरी दी। इस कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है और इसकी चार उप-योजनाओं के नाम भी इसी के अनुसार बदल दिए गए हैं। जहां बुजुर्गों, विधवाओं और परिवार लाभ की पेंशन योजनाएं अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी, जबकि दिव्यांग पेंशन में संशोधन किया गया है। अब इसमें 80 प्रतिशत की जगह 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 40 प्रतिशत दिव्यांगता मानक का उपयोग किया जाएगा। इसकी 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा हटा दी गई है और अब जन्म से ही पात्रता लागू होगी। 0-79 वर्ष की आयु के लिए केंद्रीय सहायता बढ़कर 375 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के लिए 625 रुपये प्रति माह हो गई है। इसके अलावा, दिव्यांग योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो गई है।

सामाजिक सहायता के लिए नवीकृत कार्यक्रम

प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्‍टूबर 2026 को ग्रामीण विकास विभाग के उस प्रस्‍ताव को मंजूरी दी जिसमें राष्‍ट्रीय सामाजिक सहायता का कार्यक्रम को पांच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया गया है। यह मंजूरी 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए है और इसमें 53,428 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय शामिल है।

यह स्‍वीकृति तीन विषयों से संबंधित है। इसमें कार्यक्रम और इसकी प्रत्येक उप-योजना का नाम बदलने, दिव्यांगजन पेंशन में संशोधन जबकि अन्य उप-योजनाओं को उनके मौजूदा स्वरूप में ही जारी रखा गया है।

इस कार्यक्रम का नाम अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना है। इसके चारों पेंशन उप-योजनाओं के नए नाम इस प्रकार हैं: वृद्धावस्था पेंशन का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया गया है; विधवा पेंशन का नाम बदलकर प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना किया गया है; दिव्यांगजन पेंशन का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया गया है; और पारिवारिक लाभ योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना कर दिया गया है।

वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगे। जबकि विकलांगता पेंशन की पात्रता इसके दायरे और इसकी सहायता दर में बदलाव किया गया है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम क्या है

यह कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को आरंभ किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 को प्रभावी बनाता है, जो सरकार को बेरोजगारी, वृद्धावस्‍था, बीमारी और विकलांगता के मामलों में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का निर्देश देता है। यह एक पूर्णतः केंद्रीय वित्त पोषित योजना है और इसमें 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलती है। यह सुनिश्चित करता है कि गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्ति को देश में कहीं भी कम से कम न्यूनतम सहायता अवश्‍य प्राप्त हो। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को समाहित करता है, और इसके घटक बुनियादी शर्त यह है कि परिवार गरीबी रेखा से नीचे होना चाहिए।

इस कार्यक्रम के निम्नलिखित घटक हैं। इसके तहत वृद्धों, विधवाओं और दिव्‍यांग व्यक्तियों के लिए मासिक पेंशन की व्‍यवस्‍था है जबकि चौथा घटक परिवार के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु पर मिलने वाला एकमुश्त पारिवारिक लाभ है।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इन योजनाओं को मुख्य रूप से अपने सामाजिक कल्याण विभागों के माध्यम से लागू करते हैं, और कई राज्यों में ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, राजस्व या श्रम विभागों के माध्यम से लागू किया जाता है। ग्राम पंचायतें और नगरपालिकाएं लाभार्थियों की पहचान करने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, और भुगतान मुख्य रूप से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण द्वारा किया जाता है।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केंद्रीय दर के ऊपर सहायता में अपनी स्वयं की अतिरिक्त राशि भी जोड़ते हैं। सितंबर 2026 तक ये अतिरिक्‍त राशि प्रति लाभार्थी 50 रुपये से 5700 रुपये प्रति माह के बीच थे, जिससे अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 1100 रुपये की औसत मासिक पेंशन मिलती थी। इसलिए केंद्रीय दर वह आधार दर है जिस पर प्रत्येक राज्य सहायता राशि निर्धारण करते हैं।

यह कार्यक्रम प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए योजना-वार सीमाओं के मुकाबले लगभग 3.09 करोड़ लाभार्थियों में व्‍याप्‍त रहा। इसके तहत 2025-26 के लिए 9,652 करोड़ रुपये आवंटित किए गए जिसमें विकलांगता पेंशन 290 करोड़ रुपये रही। 14 अक्टूबर 2026 को मंजूरी मिलने के बाद इस कार्यक्रम का दायरा सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 3.20 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच गया है।

दिव्यांगजन पेंशन विस्तार से

दिव्‍यांगता पेंशन की शुरुआत फरवरी 2009 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्‍यांगता पेंशन योजना के रूप में की गई थी। राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 की धारा 2(ओ) गंभीर दिव्‍यांगता को एक या अधिक बहु-दिव्‍यांगताओं के साथ 80 प्रतिशत या उससे अधिक की दिव्‍यांगता के रूप में परिभाषित करती है। इसलिए, पेंशन प्राप्त करने के लिए एक व्यक्ति का मूल्यांकन 80 प्रतिशत या उससे अधिक और उसकी आयु कम से कम 18 वर्ष होना अनिवार्य है। 79 वर्ष की आयु तक के लाभार्थियों के लिए केंद्रीय सहायता 300 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक की आयु वाले लाभार्थियों के लिए 500 रुपये प्रति माह निर्धारित हुई।

इसके बाद संसद ने दिव्‍यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को प्रभावी बनाने के लिए दिव्‍यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 लागू किया। यह अधिनियम अपनी पात्रता दायरे में एकल पैमाना निर्धारित करता है। धारा 2(आर) मानक दिव्‍यांगता वाले व्यक्ति को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है, जो प्रमाणित प्राधिकारी के प्रमाणन अनुसार निर्दिष्ट दिव्‍यांगता का कम से कम 40 प्रतिशत से जूझ रहा हो।

2016 के अधिनियम ने दिव्‍यांगता पेंशन के लिए पात्रता मानदंडों में बदलाव आवश्यक बना दिया है, जिससे इसे 40 प्रतिशत की मानक दिव्‍यांगता से जोड़ दिया गया है।

14 अक्टूबर 2026 के अपने निर्णय द्वारा, सरकार ने इस पेंशन को, जो अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना है, को उसी मानक पर ला दिया है। इससे न्यूनतम आयु की आवश्यकता हटा कर पात्रता जन्म से ही प्रभावी हो गई है। इसमें केंद्रीय सहायता भी बढ़ाकर 79 वर्ष तक के लिए 375 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लिए 625 रुपये प्रति माह कर दी गई है। इस उप-योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो गई है।

संशोधित दिशानिर्देश, जिनमें पात्रता मानदंड, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दरें शामिल होंगी, तीन महीने के भीतर जारी और लागू किए जाएंगे।

निर्णय से किसे लाभ होगा

इस निर्णय से तीन समूहों को लाभ होगा, और उन्हें अलग-अलग रखना महत्वपूर्ण है।

  • वे व्यक्ति जो 40 से 79 प्रतिशत के बीच प्रमाणित हैं, और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से हैं, 14 अक्टूबर 2026 को स्वीकृत मानक दिव्यांगता उन्हें पेंशन के दायरे में लाता है।
  • गरीबी रेखा से नीचे के परिवार में ,मानक दिव्यांगता प्रमाण पत्र वाले बच्चे जन्म से ही स्वीकृत मानदंडों के तहत लाभान्वित होंगे, जबकि पहले परिवार को बच्चे के 18 वर्ष का होने तक इंतजार करना पड़ता था।
  • वैसे व्यक्ति जो पहले से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं उन्हें सरकार द्वारा स्वीकृत 375 रुपये और 625 रुपये की बढ़ी हुई दरें प्राप्त होंगी।

उन सभी के लिए तीन शर्तें अपरिवर्तित रखी गईं हैं। दिव्यांगता का प्रमाण पत्र अभी भी आवश्यक है, क्योंकि 2016 के अधिनियम के तहत मानक दिव्यांगता प्रमाणित करने वाले प्राधिकारी द्वारा इसके प्रतिशत का निर्धारण करता है। परिवार को अभी भी गरीबी रेखा से नीचे होना चाहिए, और इसके लिए आवेदन राज्य कल्याण विभाग के जरिए ही होगा।

सम्‍पूर्ण कल्याण व्‍यवस्‍था के साझा उपाय

वर्ष 2011 की जनगणना में भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति दर्ज किए गए थे, जो जनसंख्या का 2.21 प्रतिशत है। 2016 के अधिनियम की अनुसूची में 21 प्रकार की दिव्यांगताएं निर्धारित की गई हैं।

वर्ष 2016 का अधिनियम 19 अप्रैल 2017 को लागू हुआ था और इसका 40 प्रतिशत का मानक उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी और भूमि एवं आवास में दिव्यांगता पात्रता में लागू होता है। 14 अक्टूबर 2026 के निर्णय द्वारा, सरकार ने अपने सबसे पुराने सामाजिक सहायता कार्यक्रम, यानी दिव्यांगता पेंशन को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुरूप कर दिया है।

संशोधित दिशानिर्देश इसे समग्र रूप देंगे, जिसमें एक ही आधिकारिक दस्तावेज में प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत पात्रता, मानदंड, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दरें शामिल होंगी।

संदर्भ

कैबिनेट

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2323264

ग्रामीण विकास मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2323266

https://www.dord.gov.in/static/uploads/2024/07/1ff5b85d83a44d7b22cda3b40547ed4c.pdf

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3e58aea67b01fa747687f038dfde066f6/uploads/2023/10/202310161053958942.pdf

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3e58aea67b01fa747687f038dfde066f6/uploads/2023/11/202311171038909259.pdf

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3e58aea67b01fa747687f038dfde066f6/uploads/2023/10/20231107101118372.pdf

https://depwd.gov.in/en/about-department/introduction/

पत्र सूचना कार्यालय बैकग्रांउडर

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2187327

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=158466&ModuleId=3

पत्र सूचना कार्यालय शोध

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पीके/केसी/आरटी/एकेवी/एमपी(रिलीज़ आईडी: 2326687) आगंतुक पटल : 356प्रविष्टि तिथि: 22 OCT 2026  by PIB Delhi

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प्रशासनिक मामला | डोंगरगढ़ नायब तहसीलदार की जांच पर उठे गंभीर सवाल, SDM से स्वतंत्र जांच की मांग विवादित भूमि के स्वामित्व स्रोत, नामांतरण और पूर्व आपत्ति के रिकॉर्ड तक जांच के घेरे में; आवेदक ने कहा—अपूर्ण जांच को अंतिम निष्कर्ष न माना जाए ----------------------------- विवादित भूमि प्रकरण में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग डोंगरगढ़। राजस्व प्रकरण क्रमांक 202602095000018 (प्रकरण शीर्ष ब-121) में विवादित भूमि से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। आवेदक थैलेंद्र  देवांगन उर्फ चंद्रभूषण देवांगन ने अनुविभागीय अधिकारी/अनुविभागीय दंडाधिकारी, डोंगरगढ़ के समक्ष प्रस्तुत लिखित तर्क में लाल बहादुर नगर के नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। आवेदक का मुख्य सवाल है कि जब विवादित भूमि के स्वामित्व के मूल स्रोत, पंजीकृत विक्रय विलेखों और पूर्व में प्रस्तुत आपत्ति के कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण बताई जा रही है, तो इ...

शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए पाँच उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी

केंद्रों का उद्देश्य भारत की भाषाई और साहित्यिक विरासत के अनुसंधान , संरक्षण , डिजिटलीकरण तथा व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना उच्च शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय , भारत सरकार ने शास्त्रीय असमिया , शास्त्रीय बंगाली , शास्त्रीय मराठी , शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत में अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्रों ( सीओई ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह पहल उन्नत शैक्षणिक अनुसंधान , भाषाई और साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण और इन शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए समर्पित संस्थागत सहायता प्रदान करेगी। निम्नलिखित उच्च शिक्षण संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे : क्रम संख्या शास्त्रीय भाषा उत्कृष्टता केंद्र 1   शास्त्रीय असमिया तेजपुर विश्वविद्यालय , असम 2 शास्त्रीय बांग्ला विश्वभारती विश्वविद्यालय , पश्चिम बंगाल 3 शास्त्रीय मराठी डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान ( ...

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (11 जनवरी, 2024) नई दिल्ली में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए।

  भारत की राष्ट्रपति ने स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए  भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज ( 11 जनवरी , 2024) नई दिल्ली में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापक भागीदारी के साथ आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण , स्वच्छता के स्तर को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने ' स्वच्छता से संपन्नता ' के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए सभी की सराहना की। राष्ट्रपति ने इस पर अपनी   प्रसन्नता व्यक्त की कि स्वच्छता अभियान महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर उत्पन्न कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे सफाई मित्र हमारे स्वच्छता अभियान के तहत अग्रिम मोर्चे के सैनिक रहे हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि सफाई मित्रों की सुरक्षा , सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि मशीनीकृत सफाई के माध्यम से मैनहोल को समाप्त करके और मशीन-होल के माध्यम से स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करके ही हम एक संवेदनशील समाज के रूप में ...

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लक्ष्य,मार्च, 2024 तक बुनियादी सुविधाओं के साथ 2.95 करोड़ पक्के मकान बनाने का लक्ष्य है।

  प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में "सभी के लिए आवास" के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए , ग्रामीण विकास मंत्रालय पात्र ग्रामीण परिवारों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए 1 अप्रैल , 2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) लागू कर रहा है। मार्च , 2024 तक बुनियादी सुविधाओं के साथ 2.95 करोड़ पक्के मकान बनाने का लक्ष्य है। पीएमएवाई-जी के तहत राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों को आवंटित 2.95 करोड़ मकानों के कुल अनिवार्य लक्ष्य में से पात्र लाभार्थियों के लिए 2.94 करोड़ से अधिक मकान पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं। राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में 01.02.2024 तक 2.55 करोड़ से अधिक घर पहले ही पूरे हो चुके हैं। 01.02.2024 तक पीएमएवाई-जी के तहत आवंटित लक्ष्यों , स्वीकृत घरों और पूर्ण किए गए घरों का राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश-वार विवरण नीचे दिया गया है: 01.02.2024 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत आवंटित लक्ष्यों , स्वीकृत घरों और पूर्ण किए गए घरों का राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश-वार विवरण क्र.संख्‍या राज...

स्वावलंबिनी योजना- इस परियोजना का उद्देश्य छात्राओं में उद्यमशीलता की मानसिकता विकसित करना है

  स्वावलंबिनी योजना कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच के साथ ज्ञान साझेदार के रूप में सहयोग करते हुए , फरवरी 2025 में असम , मेघालय , मिजोरम , उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के छह उच्च शिक्षा संस्थानों/विश्वविद्यालयों में एक पायलट परियोजना के रूप में स्वावलंबिनी - एक महिला उद्यमिता कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंत्रालय इस कार्यक्रम को अपने नोएडा स्थित राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान ( एनआईईएसबीयूडी) , और गुवाहाटी के भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई) के माध्यम से कार्यान्वित कर रहा है।स्वावलंबिनी प्रायोगिक परियोजना युवा महिलाओं को सफल उद्यम निर्माण तक की यात्रा में सहायता करने के लिए एक संरचित , बहु-स्तरीय प्रशिक्षण पद्धति प्रस्तुत करता है। इस परियोजना का उद्देश्य छात्राओं में उद्यमशीलता की मानसिकता विकसित करना है , उन्हें उद्यमिता को करियर के रूप में अपनाने के लिए आवश्यक उपलब्ध सहायता तंत्रों , योजनाओं , संसाधनों और नेटवर्कों के बारे में जागरूक करना है। स्वावलंबिनी परियोजना के लक्षित समूह में उच्च शिक्षा संस्थानो...

दीनदयाल अंत्योदय योजना का उद्देश्य बांस की खेती के जरिए 10 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सशक्त बनाना है, संगोष्ठी में विभिन्न उद्योगों में एक टिकाऊ विकल्प के रूप में बांस की क्षमता पर जोर दिया गया

  बांस की खेती आजीविका में सुधार लाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है: श्री चरणजीत सिंह  दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ने संयुक्त राज्य अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) और उद्योग फाउंडेशन के साथ भागीदारी में 18 जुलाई , 2024 को बांस की खेती के जरिए स्थायी ग्रामीण आजीविका , महिला सशक्तिकरण और जलवायु लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए ' बांस पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी ' का आयोजन किया। इस संगोष्ठी में बांस की खेती पर भारत की पहली व्यापक पुस्तिका प्रस्तुत की गई , जो सात क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है , ताकि छोटी जोत वाली महिला किसानों को आवश्यक ज्ञान और अभ्यासों से सुसज्जित किया जा सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव श्री चरणजीत सिंह और यूएसएआईडी की कार्यवाहक मिशन निदेशक एलेक्जेंड्रिया ह्यूर्टा ने यूजीएओ ऐप , एक डिजिटल टूल , का भी शुभांरभ किया , जो छोटी जोत वाली महिला किसानों के लिए रियल टाइम डेटा मुहैया कराता है। यह ऐप फॉरेस्ट स्टीवर्डशिप काउंसिल (एफएससी) प्रमाणन के लिए ए...

भारत सरकार वित्त, बुनियादी ढांचे और बाजार के अवसरों तक पहुंच जैसे कारकों पर विचार करते हुए अनुकूल ग्रामीण उद्यमिता के लिए उपयुक्त वातावरण को बढ़ावा दे रही हैउसीकी कुछ पहलें

  ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना भारत सरकार वित्त , बुनियादी ढांचे और बाजार के अवसरों तक पहुंच जैसे कारकों पर विचार करते हुए अनुकूल ग्रामीण उद्यमिता के लिए उपयुक्त वातावरण   को बढ़ावा दे रही है। कुछ पहलें   इस प्रकार हैं: ( i) दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई एनआरएलएम) के अंतर्गत   प्रचारित महिला स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप्स-एसएचजी) द्वारा उत्पादित उत्पादों के विपणन के लिए , ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने सरकारी ई- मार्केटप्लेस (जीईएम) के सहयोग विपणन उत्पादों के लिए जीईएम में स्टोर फ्रंट के रूप में "सरस (एसएआरएएस)   समूह " बनाया है । ग्रामीण विकास मंत्रालय ने फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड , अमेज़ॅन , पतंजलि और फ़ैशनियर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (मीशो) जैसे विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफार्मों के साथ एसएचजी उत्पादों की ऑनबोर्डिंग और मार्केटिंग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए हैं I एसएचजी उत्पादों के ऑनलाइन विपणन के लिए एमओआरडी द्वारा एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ( www.esaras.in) और ई-कॉमर्स एप्लिके...

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