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दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

 “जब कोई हुनर एक नया अवसर लेकर आता है”

जिन गांवों में परिवारों का भविष्य काफी हद तक फसल पर निर्भर करता है, वहां कोई हुनर सीखने से आमदनी के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। गांवों के कई युवाओं के लिए यह सफर सीखने, काम करने और कमाई के नए अवसर तलाशने से शुरू होता है। यहीं पर ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 25 सितंबर 2014 को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू की गई डीडीयू-जीकेवाई योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के युवाओं पर केंद्रित है। यह योजना टिकाऊ आजीविका के लिए प्लेसमेंट से जुड़ी कौशल प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करती है। यह कार्यक्रम 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए है और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है।

कामकाज की बदलती दुनिया के साथ यह कार्यक्रम भी लगातार विकसित हो रहा है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग की अगुवाई वाली प्रशिक्षण व्यवस्था, दीर्घकालिक रोजगार, नौकरी मिलने के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन और नए कौशल प्रदान करने पर अधिक जोर दिया गया है। अब एक समग्र डिजिटल प्रणाली के माध्यम से प्रशिक्षण, आकलन, प्रमाणन, निगरानी और रोजगार की प्रगति पर नजर रखी जाती है। साथ ही, साझेदारी, रोजगार मेलों, कैंपस प्लेसमेंट और उद्योग के साथ संवाद के माध्यम से नियोक्ताओं के साथ जुड़ाव को भी सशक्त किया जाता है।

मकसद स्पष्ट है: प्रशिक्षण से रोजगार मिलना चाहिए और उस रोजगार के लंबे समय तक बने रहने की बेहतर संभावना होनी चाहिए। जून 2026 तक, डीडीयू-जीकेवाई के तहत 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 12.35 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।

इन आंकड़ों के पीछे उन लोगों की कहानियां हैं, जिनकी जिंदगी तब बदली, जब सीखने और प्रशिक्षण की प्रक्रिया ने उनके लिए रोजगार और आजीविका के नए रास्ते खोल दिए।

अपने सपने को जीवित रखना

नागालैंड की विमेथानो सखरी ने वर्षों तक अपनी मां को दस सदस्यों वाले परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दिन-रात मेहनत करते देखा। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद विमेथानो आगे की पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना मुश्किल हो गया।

जब उन्हें डीडीयू-जीकेवाई के बारे में पता चला, तो सब कुछ बदल गया। अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हुए, उन्होंने डीडीयू-जीकेवाई के पर्यटन और आतिथ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में दाखिला लिया। कुछ महीनों बाद, विमेथानो ने ‘द डेन बेंगलुरु’ में खाद्य एवं पेय सेवा के क्षेत्र में अपनी पहली नौकरी शुरू की। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं थी, बल्कि उनके और उनके परिवार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत थी।

विमेथानो ने अपनी यात्रा को याद करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय और नागालैंड सरकार के एनएसआरएलएम का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने डीडीयू-जीकेवाई को लागू किया, जिससे पूरे भारत में कई बेरोजगार युवाओं को सहायता मिली है। यह अवसर मेरे लिए एक वरदान जैसा था और मुझे उम्मीद है कि मेरे जैसी ही कई युवा भी इससे लाभ उठा सकेंगी।

विमेथानो के लिए, डीडीयू-जीकेवाई ने बीच में छूटी हुई पढ़ाई को करियर की नई शुरुआत का आधार बना दिया। चंदन शाह के लिए, इस अवसर ने उन्हें आगे बढ़ने और घर से बहुत दूर तक अपनी पहचान बनाने का रास्ता दिया।

 छोटे-मोटे कामों से लेकर विदेश में करियर तक

एक समय ऐसा था जब चंदन शाह के परिवार के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था। बिहार के सिवान जिले के तेतहली गांव में रहने के कारण उनकी पढ़ाई जारी रखने की उम्मीद बहुत कम थी। हाई स्कूल के बाद उन्होंने खेतों में अपने पिता की मदद करने के लिए स्कूल छोड़ दिया। आसपास रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के कारण चंदन ने गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम करना शुरू कर दिया। फिर भी, उन कामों से इतनी आय नहीं हो पाती थी कि वे एक बेहतर जीवन जी सकें।

उनकी मां के माध्यम से उनके लिए एक नया रास्ता खुला, जो ‘गेंदा जीविका स्वयं सहायता समूह’ की सदस्य थीं। उन्होंने चंदन को डीडीयू-जीकेवाई के बारे में जानने और इसे आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया। चंदन ने परामर्श लिया और सहायक इलेक्ट्रीशियन के रूप में प्रशिक्षण लेने का निर्णय किया। इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने करियर की शुरुआत करने के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त हुए। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद, उन्हें बद्दी की एक डिस्टिलरी में सहायक के रूप में पहली नौकरी मिली, जहां वे हर महीने 10,500 रुपये कमाते थे। इस शुरुआती अनुभव ने उनके पेशेवर विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया। इन्हीं कौशल और अनुभव के दम पर चंदन ने बाद में विदेश में काम करने का अवसर तलाशा और दुबई चले गए, जहां उन्होंने ‘अल शफा जनरल कॉन्ट्रैक्टिंग’ में इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम शुरू किया।

तब तक उनकी मासिक आय बढ़कर 35,000 रुपये हो गई थी। इसका प्रभाव केवल उनके करियर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनके परिवार को भी बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिली। चंदन अपने परिवार का खर्च उठाने और अपने भाई-बहनों की निजी स्कूलों में पढ़ाई में मदद करने में सक्षम हो गए। उनके इस सफर ने उन्हें गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना दिया।

चंदन की कहानी दिखाती है कि नौकरी का पहला अवसर लंबे समय तक आजीविका में प्रगति की नींव बन सकता है। डीडीयू-जीकेवाई ने उन्हें पहला कदम उठाने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान किए, जबकि उनके दृढ़ संकल्प और अनुभव ने उन्हें आगे के अवसर हासिल करने में मदद की। इन सभी प्रयासों ने मिलकर उन्हें अपने और अपने परिवार के लिए अधिक सुरक्षित भविष्य बनाने में सहायता की।

लेकिन, डीडीयू-जीकेवाई का हर सफर घर से दूर नहीं ले जाता। रूपाली हासदा के मामले में, यह अवसर आखिरकार उन्हें वापस अपने घर ले आया।

 नौकरी को एक व्यवसाय में बदलना

आर्थिक तंगी के कारण असम के चराइदेव की रूपाली हासदा को 9वीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा। उनका परिवार खेती पर निर्भर था और उनके पिता ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मां, जो एक स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य थीं, अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें लगातार प्रोत्साहित करती रहीं। रूपाली को एक ‘जीविका सखी’ के माध्यम से डीडीयू-जीकेवाई के बारे में पता चला और उन्होंने दिसंबर 2022 में ‘सिलाई मशीन ऑपरेटर’ ट्रेड में दाखिला लिया।

अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें तमिलनाडु के तिरुपुर में केपीआर अपैरल मिल्स में नौकरी मिल गई। पांच महीने तक उन्होंने एक अनजान शहर में काम किया और नए माहौल में खुद को ढाला। फिर भी, उनका मन घर पर ही लगा रहता था। नौकरी से हुई बचत के साथ वे हातीबंधा लौट आईं और सिलाई-कटाई केंद्र में 50,000 रुपये का निवेश किया। जो काम उन्होंने अपनी आजीविका के लिए शुरू किया था, उसने जल्द ही किसी और के लिए भी रोजगार का अवसर पैदा कर दिया। उन्होंने केंद्र में एक युवा लड़की को काम पर रखा और अपने समुदाय में एक कारोबार खड़ा करना शुरू किया। सालाना लगभग 1.10 लाख रुपये की कमाई के साथ, रूपाली का सफर कौशल प्रशिक्षण के एक और पहलू को दर्शाता है। नौकरी ने उन्हें शुरुआत का अवसर दिया, लेकिन उन्होंने उस अनुभव को अपने खुद के व्यवसाय में बदलने का फैसला किया।

रूपाली ने अपने घर के पास ही अपनी आजीविका बनाने का फैसला किया। वहीं, हीरालाल ने एक अलग रास्ता चुना—ऐसा रास्ता, जिसने उन्हें चुनौतियों का सामना करते हुए अपना करियर बनाने में मदद की।

अपना स्वयं का करियर

झारखंड के हीरालाल पंडित ने बचपन से ही देखा था कि उनके परिवार का गुजारा काफी हद तक फसल पर निर्भर करता था। चार सदस्यों का उनका परिवार उनके पिता की मौसमी खेती पर निर्भर था, जिससे महीने में लगभग 5,000 रुपये की कमाई होती थी।

10वीं कक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की हर संभव मदद करना शुरू कर दिया। दिव्यांग होने के कारण उनके लिए काम पाना आसान नहीं था, लेकिन हीरालाल ने अपनी परिस्थितियों को अपने भविष्य पर हावी नहीं होने दिया।

वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करते हुए अपना करियर बनाना चाहते थे। अपने लिए विकल्प तलाशते समय हीरालाल को डीडीयू-जीकेवाई के बारे में पता चला। इस कार्यक्रम के तहत निःशुल्क प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सहायता ने उन्हें कौशल सीखने और नौकरी पाने का अवसर दिया। उन्होंने झारखंड के दुमका में एक प्रशिक्षण केंद्र में ‘हेल्थकेयर मल्टीपर्पस’ ट्रेड में दाखिला लिया।

यह प्रशिक्षण हीरालाल के सफर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्हें ऐसे माहौल में नए कौशल सीखने का अवसर मिला, जहां सभी के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार किया जाता था। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें नासिक के एसएमबीटी अस्पताल में ‘जनरल ड्यूटी असिस्टेंट’ के तौर पर नौकरी मिल गई। इस अवसर ने उन्हें अपने परिवार की भलाई में योगदान देने के साथ-साथ स्वयं भी आय अर्जित करने में सक्षम बनाया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अनुभव ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें अपनी क्षमताओं के बारे में एक नई दृष्टि दी।

आज हीरालाल अन्य युवाओं को भी अपनी कठिन परिस्थितियों से आगे देखने और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके लिए यह सफर पहला कदम उठाने के साहस से शुरू हुआ था। डीडीयू-जीकेवाई ने उन्हें उस पहले कदम को करियर और अधिक सुरक्षित भविष्य की राह में बदलने में मदद की।

जब कोई हुनर आजीविका का आधार बन जाता है

कोई हुनर ग्रामीण परिवार की हर मुश्किल को दूर तो नहीं कर सकता, लेकिन यह बेहतर संभावनाओं के रास्ते जरूर खोल सकता है। विमेथानो के लिए, जब आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई रुक गई, तो इस हुनर ने उन्हें रोजगार का जरिया दिया। चंदन के लिए, इसने एक ऐसे करियर की शुरुआत की, जो उन्हें आगे चलकर दुबई ले गया। रूपाली ने अपने हुनर और अनुभव का इस्तेमाल कर अपना खुद का कारोबार शुरू किया, जबकि हीरालाल को रोजगार का जरिया मिला और अपने परिवार की मदद करने का अवसर मिला।

उनके रास्ते अलग-अलग रहे, लेकिन उनमें एक बात समान है: कौशल सीखने, उसका उपयोग करने और आजीविका कमाने का अवसर। डीडीयू-जीकेवाई इसी पहले कदम को संभव बनाना चाहता है, ताकि ग्रामीण युवा प्रशिक्षण से रोजगार की ओर और रोजगार से अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ आजीविका की ओर बढ़ सकें।

संदर्भ

ग्रामीण विकास मंत्रालय

http://ddugky.info/

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2289001

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2297790

https://nsrlm.nagaland.gov.in/vimethano-sakhrie/

https://www.nitiforstates.gov.in/public-assets/Best_Practices/Compendiums/75%20Inspirational%20Stories%20of%20Aatmanirbhar%20Rural%20Women.pdf

https://asrlms.assam.gov.in/portlets/success-stories-0

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पीके/केसी/आरटी/एनकेपीआईबी शोधप्रविष्टि तिथि: 24 SEP 2026 by PIB Delhiरिलीज़ आईडी: 2314281) आगंतुक पटल : 724

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हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

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·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

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पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है।

  भारत-न्यूजीलैंड एफटीए 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार , प्रौद्योगिकी और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी,  पहले दिन से न्यूजीलैंड को भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क,  कपड़ा , चमड़ा , जूते , इंजीनियरिंग सामान और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश से खेतों से लेकर कारखानों तक को लाभ मिलेगा रोजगार , निवेश और आवागमन को बढ़ावा मिलने से भारत के युवाओं , महिलाओं , किसानों और सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए , भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इस एफटीए पर 27 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम , नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।आज , केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं नि...

शक्ति सुपर-शी के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की युवा समाज सेविका एनी पीटर को राष्ट्र मंच पर सम्मानित किया गया… इस अवसर आयोजकों को विशेष आभार ज्ञापित किया गया

दुर्ग। जिला समन्वयक एनी पीटर ने जानकारी दी की उनको राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम स्थल से युवा कांग्रेस शक्ति टीम के राष्ट्रीय कार्यकारणी एवम प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी डॉ पलक वर्मा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री आकाश शर्मा, प्रदेश समन्वयक आशिका कुजूर व प्रीति वैष्णव द्वारा एनी पीटर को  महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देने के लिए जिला समन्वयक एनी पीटर ने धन्यवाद ज्ञापित किया । ………. उन्होंने बताया कि, भारतीय युवा कांग्रेस की अनूठी पहल 'शक्ति सुपर शी' को लॉन्च हुए एक साल हो गया है. यह कार्यक्रम विशेष रूप से युवा महिला नेताओं को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। इसकी राष्ट्रीय समन्वयक सरीफ रहमान हैं। प्रदेश में शक्ति सुपर शी की जिम्मेदारी प्रदेश महासचिव आशिका कुजूर और प्रीति वैष्णव को दी गई है. एसएसएस सदस्यता अभियान में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त हुआ। …………पूरा पढ़ने के लिए 👇क्लिक करें ………. पिछले एक साल में प्रदेश समन्वयक के रूप में काम करते हुए हमें कुछ प्रतिभाशाली महिलाएं/ लड़कियां मिलीं जो अपने क्षेत्र में कांग्रेस का परचम लहरा रही...

भारत का एआई गौरव- भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है।

  20,000 अतिरिक्त जीपीयू भारत के एआई नेतृत्व के अगले चरण को क्षमता प्रदान करेंगे भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है। 17 फरवरी 2026 को , नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित की जा रही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान , केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत अपनी कंप्यूट क्षमता को वर्तमान 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) से आगे बढ़ाएगा , और आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़े जाएंगे। यह घोषणा सिर्फ तकनीकी नहीं अपितु रणनीतिक थी। इसने संकेत दिया कि भारत इरादे के साथ आगे बढ़ रहा है और स्वयं की दुनिया की नेतृत्वकारी एआई शक्तियों में मजबूती से जगह बना रहा है। यह घोषणा सम्मेलन के दूसरे दिन की गई और इसका विषय था-सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय अर्थात सबका हित , सबकी प्रसन्नता। इस आयोजन को पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी एआई भागीदारी कहा जा रहा है। भारत मंडपम के अंदर , ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिख रही थी। इस दौरान होने वाले वार्तालाप सुस्पष्ट , भविष्...

महापौर की मनमानी और एकाधिकार पर अंकुश लगाने के लिए... एक जागरूक और निगम अधिनियम का जानकर पार्षद निगम की आम सभा में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है... क्योंकि पार्षद के पास है अचूक विधि निर्देश जिसका नाम है छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ३. कार्यसूची इसको पढ़ लीजिये

छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ३. कार्यसूची :- नगरपालिका के सम्मिलन की कार्यसूची के संबंध में स्पष्ट विधि निर्देश है की :- नगरपालिका के सम्मिलन के लिए सुचना में सम्मिलित की जाने वाली कार्यसूची निम्नानुसार होगी,- क) पूर्ववर्ती सम्मिलन के कार्यवृत्त की पुष्टि करना, यदि उसकी पुष्टि उस सम्मिलन में न हुई हो; ख) पार्षदों द्वारा पूछे गये प्रश्न तथा उनके उत्तर; ग) महत्त्वपूर्ण पत्र व्यवहार के संबंध में जानकारी ; घ) कार्यसूची के शेष कामकाज जो पूर्ववर्ती सम्मिलन में संपादित न किये जा सके हों; ङ) समितियों या मुख्य कार्यपालन अधिकारी   द्वारा प्रस्तुत सुझाव तथा प्रस्ताव; च) पार्षदों द्वारा लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव :- परन्तु यह कि किसी विशेष सम्मिलन में सुचना में विनिर्दिष्ट कमाक्ज के सिवाय कोई अन्य कामकाज संपादित नहीं किया जाएगा: परन्तु यह और कि लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव केवल साधारण सम्मिलन में ही रखा जायेगा | पार्षद का व्यक्तित्व निगम सम्मिलन में उजागर हो ...

एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल आसानी से दिलाने के लिए TReDS पर CGTMSE गारंटी कवर शुरू

M1xchange, RXIL और DTX (KredX) के साथ इंटीग्रेशन से योग्य माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ( MSEs) को तेज़ी से और टेक्नोलॉजी-आधारित क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकेगा। केंद्रीय बजट में ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम ( TReDS) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट गारंटी कवर देने की घोषणा के तहत , माइक्रो , स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के इनवॉइस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी की सुविधा शुरू की है। MSME मंत्रालय के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज ( CGTMSE) पोर्टल को अब TReDS इकोसिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है , और क्रेडिट गारंटी कवरेज अब तीन प्लेटफॉर्म - M1xchange, RXIL और DTX (KredX) - पर उपलब्ध है। यह MSME मंत्रालय और CGTMSE द्वारा शुरू की गई सबसे तेज़ टेक्नोलॉजी-आधारित सुविधाओं में से एक है ; इससे माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट आसानी से मिल सकेगा और वे TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए तेज़ी से वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकेंगे। तीन प्लेटफॉर्म पर CGTMSE गारंटी कवर की हाल ही में शुरू हुई सुविधा का मकसद ...

धरती माता को प्लास्टिक कचरे से बचाने वाली पर्यावरण संरक्षक योद्धा श्रद्धा साहू ने जन जागरूकता लाने के लिए बढ़ाया अगला कदम…

प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें, और कचरा हम रोजाना हमारी धरती माता पर फैलाते है इसलिए प्लास्टिक का ये कचरा हमारे ग्रह को नुकसान पहुंचा रहा है। यह जानवरों को मार रहा है और हमें भी बीमार कर रहा है। ***************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇 ****************************** सहभागिता दीजिए   सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहूने प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न खतरे की जानकारी देते हुए बताया की छत्तीसगढ़ को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराने के लिए राज्य स्तरीय मुहिम में सभी की सहभागिता सुनिश्चित होने से प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है ! हम सब मिलकर इसे रोक सकते हैं। ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇 ****************************** पृथ्वी माता को बचाने के कुछ आसान उपाय हैं जिन्हे हम आपसी सहभागिता बनाकर पर्यावरण संरक्षण कर सकते हो: कपड़े की थैली ️ले जाओ,  प्लास्टिक की नहीं। स्टील पानी की बोतल का इस्तेमाल करो। प्लास्टिक बोतल का प्रयोग बंद करो । प्लास्टिक के स्ट्रॉ को कहो, “ना”! प्लास्टिक वाले सामान बेहद जरूरी हो तो ही खरीदो...

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