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जिला राजनादगांव के नायब तहसीलदार लालबहादुर नगर द्वारा कि गई जांच अब प्रश्नांकित होकर पुनः विधिक चुनौति का सामना कर रही है.. आरोप गंभीर है!

प्रशासनिक मामला | डोंगरगढ़

नायब तहसीलदार की जांच पर उठे गंभीर सवाल, SDM से स्वतंत्र जांच की मांग

विवादित भूमि के स्वामित्व स्रोत, नामांतरण और पूर्व आपत्ति के रिकॉर्ड तक जांच के घेरे में; आवेदक ने कहा—अपूर्ण जांच को अंतिम निष्कर्ष न माना जाए
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विवादित भूमि प्रकरण में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग

डोंगरगढ़। राजस्व प्रकरण क्रमांक 202602095000018 (प्रकरण शीर्ष ब-121) में विवादित भूमि से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। आवेदक थैलेंद्र  देवांगन उर्फ चंद्रभूषण देवांगन ने अनुविभागीय अधिकारी/अनुविभागीय दंडाधिकारी, डोंगरगढ़ के समक्ष प्रस्तुत लिखित तर्क में लाल बहादुर नगर के नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आवेदक का मुख्य सवाल है कि जब विवादित भूमि के स्वामित्व के मूल स्रोत, पंजीकृत विक्रय विलेखों और पूर्व में प्रस्तुत आपत्ति के कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण बताई जा रही है, तो इन मूल प्रश्नों का पूर्ण परीक्षण किए बिना जांच को अंतिम निष्कर्ष कैसे माना जा सकता है?

🔴 मामला एक नजर में

प्रकरण क्रमांक: 202602095000018

प्रकरण शीर्ष: ब-121

आवेदक: थैलेंद्र देवांगन उर्फ चंद्रभूषण देवांगन

अनावेदकगण: श्रीमती सरोज गांधी एवं अन्य 02

मुख्य मांग: स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अभिलेखीय जांच

संबंधित जांच प्रतिवेदन: 06 अगस्त 2026

⚖️ जांच की निष्पक्षता पर क्यों उठाया गया सवाल?

आवेदक के लिखित तर्क के अनुसार विवादित भूमि के संबंध में प्रारंभिक आपत्ति संबंधित राजस्व कार्यालय में प्रस्तुत की गई थी। आवेदक का दावा है कि उस आपत्ति की कार्यालयीन प्राप्ति और कार्रवाई को लेकर भी प्रश्न हैं।

इसके बाद आवेदक द्वारा रजिस्टर्ड डाक से आपत्ति भेजे जाने का उल्लेख किया गया है। आवेदक का तर्क है कि जिस कार्यालयीन घटनाक्रम से संबंधित शिकायत या आपत्ति उत्पन्न हुई, उसी घटनाक्रम से जुड़े अधिकारी स्तर से जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत होने की स्थिति में स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच किसी ऐसे वरिष्ठ अधिकारी से कराई जानी चाहिए जो पूर्व घटनाक्रम से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित न रहा हो।

महत्वपूर्ण: आवेदक ने अपने लिखित तर्क में यह भी कहा है कि वह इस स्तर पर किसी अधिकारी पर दुर्भावना अथवा जानबूझकर गलत प्रतिवेदन तैयार करने का अंतिम आरोप नहीं लगा रहा है, बल्कि स्वतंत्र जांच के माध्यम से अभिलेखीय तथ्यों की जांच चाहता है।

📑 सबसे बड़ा सवाल—स्वामित्व की शुरुआत कहां से हुई?

आवेदक ने विवादित भूमि की स्वामित्व श्रृंखला की जांच को मामले का केंद्रीय प्रश्न बताया है। उसके अनुसार यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित पक्ष के कथित विक्रेता नछत्तर सिंह पड्डा को उक्त भूमि पर स्वामित्व अथवा अधिकार मूल रूप से किस दस्तावेज के आधार पर प्राप्त हुआ।

आवेदक द्वारा उठाया गया मूल प्रश्न
“नछत्तर सिंह पड्डा के पक्ष में विवादित भूमि पर स्वामित्व अथवा अधिकार किस मूल दस्तावेज से उत्पन्न हुआ?”

⚠️ 06 अगस्त 2026 के जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति

आवेदक ने अपने लिखित तर्क में कहा है कि जांच प्रतिवेदन में विवादित भूमि से संबंधित पंजीकृत विक्रय विलेखों और स्वामित्व के स्रोत की वैधानिक जांच की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।

आवेदक का कहना है कि यदि मूल स्वामित्व स्रोत और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक मानी गई है, तो मूल दस्तावेजों का पूर्ण परीक्षण किए बिना आरोपों को प्रथम दृष्टया सिद्ध नहीं मानते हुए निष्कर्ष निकालना जांच की पूर्णता पर प्रश्न खड़ा करता है।

इसी आधार पर आवेदक ने वर्तमान जांच प्रतिवेदन को अंतिम एवं निर्णायक निष्कर्ष न मानते हुए उसे अधिकतम प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन मानकर शेष अभिलेखीय तथ्यों की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है।

📮 पूर्व आपत्ति के रिकॉर्ड की जांच की मांग

आवेदक ने अपनी प्रारंभिक आपत्ति से जुड़े कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच को भी महत्वपूर्ण बताया है। इसके लिए निम्न अभिलेखों के परीक्षण की मांग की गई है:

  • आवक-जावक रजिस्टर
  • संबंधित नोटशीट
  • आपत्ति की कार्यालयीन प्राप्ति
  • रजिस्टर्ड डाक की रसीद
  • डाक ट्रैकिंग रिकॉर्ड
  • प्राप्ति प्रमाण
  • आपत्ति पर की गई कार्यालयीन कार्रवाई

🏛️ SDM से क्या-क्या मांग की गई?

आवेदक ने SDM डोंगरगढ़ के समक्ष कुल 10 प्रमुख बिंदुओं में राहत की मांग की है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

01. 06 अगस्त 2026 के जांच प्रतिवेदन को अंतिम एवं निर्णायक निष्कर्ष न माना जाए।

02. स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से पुनः अभिलेखीय जांच कराई जाए।

03. पूर्व घटनाक्रम से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित अधिकारी से अलग अधिकारी को जांच सौंपी जाए।

04. प्रारंभिक आपत्ति तथा रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई आपत्ति के रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।

05. आवक-जावक रजिस्टर, नोटशीट और संबंधित कार्यालयीन कार्यवाही का परीक्षण कराया जाए।

06. जांच अधिकारी द्वारा परीक्षण किए गए मूल दस्तावेजों का विवरण स्पष्ट कराया जाए।

07. अनियमितता या कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

08. स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के बाद आवेदक को अपना अतिरिक्त पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

09. स्वतंत्र जांच पूरी होने तक मौजूदा प्रतिवेदन के आधार पर प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने से बचा जाए।

10. आवेदक के सक्षम राजस्व, सिविल अथवा अन्य विधिक मंचों पर उपलब्ध अधिकार सुरक्षित रखे जाएं।

❓ अब प्रशासन के सामने क्या है बड़ा सवाल?

क्या 06 अगस्त 2026 के जांच प्रतिवेदन को अंतिम माना जाएगा, या विवादित भूमि के मूल दस्तावेज, विक्रय विलेख, नामांतरण प्रक्रिया और पूर्व आपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?

📌 आगे क्या?

आवेदक ने SDM डोंगरगढ़ से न्यायहित और प्रशासनिक पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र जांच कराने तथा यदि जांच में किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा प्रक्रिया का उल्लंघन या अभिलेखीय अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया है।

अब इस लिखित तर्क और स्वतंत्र जांच की मांग पर SDM डोंगरगढ़ द्वारा लिया जाने वाला निर्णय प्रकरण की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

अस्वीकरण: इस लेख में उल्लिखित आरोप, आपत्तियां एवं तथ्य आवेदक द्वारा प्रस्तुत लिखित तर्क/अभिलेखों में किए गए कथनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी अधिकारी अथवा अन्य पक्ष के विरुद्ध अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। मामले में अंतिम तथ्यात्मक अथवा कानूनी निष्कर्ष संबंधित सक्षम प्राधिकारी/न्यायालय द्वारा निर्धारित किया जाना है।
स्रोत: आवेदक द्वारा प्रस्तुत लिखित तर्क एवं संबंधित प्रकरण संबंधी अभिलेख
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पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

तहसीलदार भिलाई 3 और अनुविभागीय अधिकारी को भू-अभिलेख संधारण की वस्तुस्थिति बताने के लिए ध्यानाकर्षण करवाकर पहल की गई है!

मेरा दृष्टिकोण | जनहित की वार्ता  भिलाई-3 चरोदा क्षेत्र में भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण को लेकर नागरिक पहल प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने सूचना नोटिस, सांसद-विधायक को भी कराया गया वस्तुस्थिति से अवगत भिलाई-3 | जनहित पहल भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण को लेकर नागरिक स्तर से जन-जागरूकता की पहल भिलाई-3। भिलाई-3 चरोदा तहसील क्षेत्र में भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण तथा उससे जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों द्वारा एक पहल शुरू की गई है। इस पहल के माध्यम से नागरिक स्तर पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भू-अभिलेखों के महत्व तथा उनके नियमानुसार संधारण की आवश्यकता की ओर आकर्षित कराया जा रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे, श्रीमती निशा देशमुख एवं उनके साथियों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भिलाई-3 तथा तहसीलदार, भिलाई-3 के समक्ष सूचना नोटिस प्रस्तुत कर विषय की ओर ध्यानाकर्षण कर...

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नायब तहसीलदार लालबहादुर नगर जांच अब प्रश्नों के घेरे में फंसकर पुनः जांच के दायरे में आ गई है।

 

भारत टैक्सी का शुभारंभ, “भारत टैक्सी” भारत का पहला सहकारी-नेतृत्व वाला राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है।

सहकारिता मंत्रालय सहकारी संस्थाओं को रोजगार सृजन , सामाजिक सुरक्षा तथा जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी के प्रभावी साधन के रूप में सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत टैक्सी को मोबिलिटी क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है , जिसमें चालकों—जिन्हें ‘सारथी’ कहा गया है—को स्वामित्व , प्रबंधन और मूल्य सृजन के केंद्र में रखा गया है , जिससे एग्रीगेटर-आधारित मॉडलों के लिए एक स्थायी और सम्मानजनक विकल्प उपलब्ध कराया जा सके। “भारत टैक्सी” भारत का पहला सहकारी-नेतृत्व वाला राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। यह सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने और ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के अनुरूप समावेशी , नागरिक-केंद्रित मोबिलिटी समाधान को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।   बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम , 2002 के अंतर्गत पंजीकृत भारत टैक्सी की स्थापना 6 जून , 2025 को सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत 8 राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं द्वारा की गई थी तथा इसका आधिकारिक शुभारंभ 5 फरवरी , 2026 को किया गया। वर्तमान में भारत टैक्सी सेवा दिल्ल...

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

 “जब कोई हुनर एक नया अवसर लेकर आता है” जिन गांवों में परिवारों का भविष्य काफी हद तक फसल पर निर्भर करता है , वहां कोई हुनर सीखने से आमदनी के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। गांवों के कई युवाओं के लिए यह सफर सीखने , काम करने और कमाई के नए अवसर तलाशने से शुरू होता है। यहीं पर ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 25 सितंबर 2014 को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू की गई डीडीयू-जीकेवाई योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के युवाओं पर केंद्रित है। यह योजना टिकाऊ आजीविका के लिए प्लेसमेंट से जुड़ी कौशल प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करती है। यह कार्यक्रम 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए है और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। कामकाज की बदलती दुनिया के साथ यह कार्यक्रम भी लगातार विकसित हो रहा है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग की अगुवाई वाली प्रशिक्षण व्यवस्था , दीर्घकालिक रोजगार , नौकरी मिलने के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन और नए कौशल प्रद...

व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है।

  भारत-न्यूजीलैंड एफटीए 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार , प्रौद्योगिकी और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी,  पहले दिन से न्यूजीलैंड को भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क,  कपड़ा , चमड़ा , जूते , इंजीनियरिंग सामान और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश से खेतों से लेकर कारखानों तक को लाभ मिलेगा रोजगार , निवेश और आवागमन को बढ़ावा मिलने से भारत के युवाओं , महिलाओं , किसानों और सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए , भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इस एफटीए पर 27 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम , नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।आज , केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं नि...

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