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प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई)

प्रगति के मार्ग को प्रशस्त करना

भारत की जनसंख्या का 16.6% हिस्सा अनुसूचित जाति (एससी) का है और इन्हें सामाजिक-आर्थिक उन्नति और समावेशन में ऐतिहासिक रूप से बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इन असमानताओं को दूर करना सामाजिक न्याय, समान अवसर और भारत के विकास पथ में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन विकास संबंधी कमियों को पहचानते हुए, भारत सरकार ने अनुसूचित जातियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) शुरू की।

समावेशी सशक्तिकरण का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के ज़रिए अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण करना है। सरकार ने पीएम-एजीएवाई योजना के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन के लिए 'पीएम-एजेएवाई' मोबाइल ऐप और 'पीएम-एजेएवाई' पोर्टल लॉन्च किया है।

पीएम-एजेएवाई तीन पूर्व केंद्र प्रायोजित योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जातियों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता उप योजना (एससीए टू एससीएसपी) और बाबू जगजीवन राम छात्रवास योजना (बीजेआरसीवाई) का विलय करके बनाई गई योजना है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित पीएम-एजेएवाई योजना, सभी के लिए विकास सुनिश्चित करने के अपने व्यापक लक्ष्य को निम्नलिखित तीन मुख्य उद्देश्यों के माध्यम से व्यावहारिक रूप देती है:

  • अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करके अनुसूचित जाति समुदायों की गरीबी कम करना। यह कौशल विकास, आय सृजन योजनाओं और अन्य पहलों के माध्यम से किया जा सकता है। इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य आजीविका के अवसरों को बढ़ाना और लाभार्थियों को स्थायी आय सृजन गतिविधियों से जुड़ने में सक्षम बनाना है।
  • अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा और आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना। यह योजना विकास संबंधी महत्वपूर्ण अंतरों को पाटने और जीवन की बेहतर गुणवत्ता में योगदान देने वाली आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में सुधार लाने का प्रयास करती है।
  • साक्षरता बढ़ाना और अनुसूचित जातियों को विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना। यह गुणवत्तापूर्ण संस्थानों और आवासीय विद्यालयों में पर्याप्त आवासीय सुविधाएं प्रदान करके प्राप्त किया जाता है, विशेष रूप से आकांक्षी जिलों/अनुसूचित जाति बहुल ब्लॉकों और भारत के अन्य हिस्सों में।

पीएम-एजेएवाई से कौन लाभान्वित हो सकता है?

पीएम- एजेएवाई के केंद्र में पात्रता का एक सुविचारित ढांचा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ उन व्यक्तियों और समुदायों तक पहुंचे, जिनके लिए यह लक्षित है। तदनुसार, योजना तक पहुंच निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर निर्धारित की जाती है:

  • जीआईए घटक के तहत लाभार्थियों का चयन करते समय, उन परिवारों/व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनकी वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं है। अनुसूचित जाति बहुसंख्यक समूह के अनुसूचित जाति सदस्य भी पात्र होंगे।
  • अवसंरचना विकास के मामले में, जिन गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी 40% या उससे अधिक है और कुल जनसंख्या 500 या उससे अधिक है, वे इस योजना के तहत अनुदान के लिए पात्र हैं।

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पीएम- एजेएवाई इन एक्शन 

पीएम- एजेएवाई योजना विकास के विभिन्न पहलुओं को संबोधित करने के लिए तीन विशिष्ट घटकों पर आधारित है:

अनुसूचित जाति बहुल गांवों का "आदर्श ग्राम" में विकास

अनुसूचित जाति बहुल गांवों को बुनियादी ढांचे और सेवाओं में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर करके 'आदर्श ग्राम' (मॉडल गांव) में परिवर्तित करना। आदर्श ग्राम घटक के अंतर्गत 47,243 गांव शामिल हैं, जिससे देशभर में 47.79 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ हुआ है। कुल 46,944 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 27,032 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं। 8 सितंबर 2026 तक, 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है, जो अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे, मूलभूत सेवाओं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

'आदर्श ग्राम' वह है, जहां लोगों को विभिन्न मूलभूत सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो। समाज के सभी वर्गों की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी तरह से पूरी की जाती हैं और असमानताओं को न्यूनतम स्तर तक कम किया जाता है। इन गांवों में गरिमापूर्ण जीवन के लिए ज़रुरी सभी बुनियादी ढांचे और सभी निवासियों के लिए सुलभता सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है। इससे प्रत्येक निवासी को अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है।

राज्य/जिला स्तर पर सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता

अनुसूचित जाति (एससी) के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के उद्देश्य से जिला/राज्य स्तरीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। इसमें शामिल हैं:

i) कौशल विकास और संबंधित अवसंरचना सहित व्यापक आजीविका परियोजनाओं के माध्यम से लक्षित आबादी की आय में वृद्धि करना।

ii) अनुसूचित जाति बहुल गांवों में पर्याप्त अवसंरचना का निर्माण करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना।

iii) आवश्यकतानुसार आवासीय विद्यालय उपलब्ध कराकर साक्षरता बढ़ाना और अनुसूचित जाति के छात्रों को विद्यालयों में नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना।

वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 तक अनुदान सहायता घटक के तहत राज्यों को सीधे ₹1,730 करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई है। इससे 2.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत और समूह लाभार्थियों को कौशल विकास और आजीविका सहायता प्रदान की गई है।

छात्रावासों का निर्माण/मरम्मत

  • अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाने और प्रोत्साहित करने के साधनों में से एक छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत है। देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए ऐसे छात्रावास अत्यंत लाभकारी हैं। सितंबर 2026 तक कुल 785 छात्र छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दो छात्रावास परियोजनाओं (एक लड़कियों के लिए और एक लड़कों के लिए) के निर्माण हेतु 61.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की है, जिनसे 264 छात्रों को आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सशक्तिकरण में निवेश

किसी भी कल्याणकारी पहल के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निरंतर वित्तीय सहायता आवश्यक है। पीएम-एजेएवाई के अंतर्गत वित्तपोषण ढांचे का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।

वित्त पोषण का संक्षिप्त विवरण

वित्तपोषण पैटर्न

 

100% केंद्र द्वारा वित्तपोषित योजना

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों का योगदान:

आवश्यकता पड़ने पर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अतिरिक्त संसाधनों से योजना को पूरक कर सकते हैं।

घटक-वार आवंटन:

  • 50% तक - चयनित आदर्श ग्राम गांवों में कमियों को दूर करने के लिए कार्य।
  • 5% तक - केंद्र स्तर पर तकनीकी सहायता समूह (टीएसजी) और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों (पीआईयू) की स्थापना और संचालन के लिए, साथ ही राज्य और जिला स्तर पर पीआईयू के लिए।
  • 2% तक - छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत - केंद्रीय संस्थानों के लिए उपयोग किया जाएगा और मंत्रालय द्वारा सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी किया जाएगा।
  • शेष धनराशि - जिला/राज्य स्तर पर परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता, अनुसूचित जाति की जनसंख्या और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या की तुलना में राज्य एससीएसपी के वार्षिक योजना अनुपात के आधार पर आवंटित की जाएगी।

रखरखाव

इस योजना के अंतर्गत अवसंरचना परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, उनका रखरखाव और संचालन संबंधित राज्य सरकारों/ कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा किया जाएगा।

 

प्रभावी शासन की ओर एक डिजिटल छलांग

हाल ही में लॉन्च किए गए 'पीएम-एजेएवाई ' मोबाइल ऐप और 'पीएम-एजेएवाई ' पोर्टल का उद्देश्य कागज आधारित कार्यप्रवाह और प्रसंस्करण से पूर्णतः डिजिटल कार्यप्रवाह और वास्तविक समय के आधार पर प्रसंस्करण की ओर परिवर्तन करना है।

सुशासन पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है। डिजिटल प्रौद्योगिकियों ने सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। प्रौद्योगिकी-आधारित शासन सूचना तक पहुंच में सुधार करता है, निगरानी को मजबूत बनाता है और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायक होता है। यह समन्वय, पारदर्शिता और कार्यक्रम कार्यान्वयन की समग्र प्रभावशीलता को भी बढ़ाता है

भारत की विकास गाथा का अगला अध्याय

2047 तक विकसित भारत की यात्रा इस सिद्धांत पर आधारित है, कि विकास के लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने चाहिए और सभी के लिए प्रगति के अवसर सृजित करने चाहिए। इस प्रयास में, पीएम-एजेएवाई अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सतत आजीविका, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने वाले लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से इस लक्ष्य को हासिल कर रहा है। योजना के विस्तार के साथ-साथ, प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग, मजबूत निगरानी तंत्र और लक्षित अंतिम-मील वितरण इसकी प्रभावशीलता और पहुंच को बढ़ा रहे हैं। व्यक्तियों और समुदायों को उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराने और भारत की विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाकर, पीएम-एजेएवाई एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और सशक्त राष्ट्र को बढ़ावा देना जारी रखेगा।

संदर्भ:

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय:

https://socialjustice.gov.in/

https://socialjustice.gov.in/schemes/104

https://socialjustice.gov.in/writereaddata/UploadFile/71441776233188.pdf

https://pmajay.dosje.gov.in/

https://pmajay.dosje.gov.in/Writereaddata/Guidelines.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2265530&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2285859&reg=48&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2268689&reg=48&lang=1

https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe93.pdf

वित्त मंत्रालय:

https://www.indiabudget.gov.in/doc/OutcomeBudgetE2026_2027.pdf

मायस्कीम:

https://www.myscheme.gov.in/schemes/pmajay-ag

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पीआईबी शोधपीके/केसी/आरटी/एनएस(रिलीज़ आईडी: 2315844) आगंतुक पटल : 180प्रविष्टि तिथि: 28 SEP 2026  by PIB Delhi

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

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खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है।

  भारत-न्यूजीलैंड एफटीए 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार , प्रौद्योगिकी और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी,  पहले दिन से न्यूजीलैंड को भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क,  कपड़ा , चमड़ा , जूते , इंजीनियरिंग सामान और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश से खेतों से लेकर कारखानों तक को लाभ मिलेगा रोजगार , निवेश और आवागमन को बढ़ावा मिलने से भारत के युवाओं , महिलाओं , किसानों और सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए , भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इस एफटीए पर 27 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम , नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।आज , केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं नि...

शक्ति सुपर-शी के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की युवा समाज सेविका एनी पीटर को राष्ट्र मंच पर सम्मानित किया गया… इस अवसर आयोजकों को विशेष आभार ज्ञापित किया गया

दुर्ग। जिला समन्वयक एनी पीटर ने जानकारी दी की उनको राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम स्थल से युवा कांग्रेस शक्ति टीम के राष्ट्रीय कार्यकारणी एवम प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी डॉ पलक वर्मा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री आकाश शर्मा, प्रदेश समन्वयक आशिका कुजूर व प्रीति वैष्णव द्वारा एनी पीटर को  महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देने के लिए जिला समन्वयक एनी पीटर ने धन्यवाद ज्ञापित किया । ………. उन्होंने बताया कि, भारतीय युवा कांग्रेस की अनूठी पहल 'शक्ति सुपर शी' को लॉन्च हुए एक साल हो गया है. यह कार्यक्रम विशेष रूप से युवा महिला नेताओं को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। इसकी राष्ट्रीय समन्वयक सरीफ रहमान हैं। प्रदेश में शक्ति सुपर शी की जिम्मेदारी प्रदेश महासचिव आशिका कुजूर और प्रीति वैष्णव को दी गई है. एसएसएस सदस्यता अभियान में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त हुआ। …………पूरा पढ़ने के लिए 👇क्लिक करें ………. पिछले एक साल में प्रदेश समन्वयक के रूप में काम करते हुए हमें कुछ प्रतिभाशाली महिलाएं/ लड़कियां मिलीं जो अपने क्षेत्र में कांग्रेस का परचम लहरा रही...

भारत का एआई गौरव- भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है।

  20,000 अतिरिक्त जीपीयू भारत के एआई नेतृत्व के अगले चरण को क्षमता प्रदान करेंगे भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक अहम और भरोसे के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है। 17 फरवरी 2026 को , नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित की जा रही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान , केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत अपनी कंप्यूट क्षमता को वर्तमान 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) से आगे बढ़ाएगा , और आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़े जाएंगे। यह घोषणा सिर्फ तकनीकी नहीं अपितु रणनीतिक थी। इसने संकेत दिया कि भारत इरादे के साथ आगे बढ़ रहा है और स्वयं की दुनिया की नेतृत्वकारी एआई शक्तियों में मजबूती से जगह बना रहा है। यह घोषणा सम्मेलन के दूसरे दिन की गई और इसका विषय था-सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय अर्थात सबका हित , सबकी प्रसन्नता। इस आयोजन को पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी एआई भागीदारी कहा जा रहा है। भारत मंडपम के अंदर , ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिख रही थी। इस दौरान होने वाले वार्तालाप सुस्पष्ट , भविष्...

महापौर की मनमानी और एकाधिकार पर अंकुश लगाने के लिए... एक जागरूक और निगम अधिनियम का जानकर पार्षद निगम की आम सभा में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है... क्योंकि पार्षद के पास है अचूक विधि निर्देश जिसका नाम है छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ३. कार्यसूची इसको पढ़ लीजिये

छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ नियम ३. कार्यसूची :- नगरपालिका के सम्मिलन की कार्यसूची के संबंध में स्पष्ट विधि निर्देश है की :- नगरपालिका के सम्मिलन के लिए सुचना में सम्मिलित की जाने वाली कार्यसूची निम्नानुसार होगी,- क) पूर्ववर्ती सम्मिलन के कार्यवृत्त की पुष्टि करना, यदि उसकी पुष्टि उस सम्मिलन में न हुई हो; ख) पार्षदों द्वारा पूछे गये प्रश्न तथा उनके उत्तर; ग) महत्त्वपूर्ण पत्र व्यवहार के संबंध में जानकारी ; घ) कार्यसूची के शेष कामकाज जो पूर्ववर्ती सम्मिलन में संपादित न किये जा सके हों; ङ) समितियों या मुख्य कार्यपालन अधिकारी   द्वारा प्रस्तुत सुझाव तथा प्रस्ताव; च) पार्षदों द्वारा लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव :- परन्तु यह कि किसी विशेष सम्मिलन में सुचना में विनिर्दिष्ट कमाक्ज के सिवाय कोई अन्य कामकाज संपादित नहीं किया जाएगा: परन्तु यह और कि लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव केवल साधारण सम्मिलन में ही रखा जायेगा | पार्षद का व्यक्तित्व निगम सम्मिलन में उजागर हो ...

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

 “जब कोई हुनर एक नया अवसर लेकर आता है” जिन गांवों में परिवारों का भविष्य काफी हद तक फसल पर निर्भर करता है , वहां कोई हुनर सीखने से आमदनी के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। गांवों के कई युवाओं के लिए यह सफर सीखने , काम करने और कमाई के नए अवसर तलाशने से शुरू होता है। यहीं पर ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 25 सितंबर 2014 को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू की गई डीडीयू-जीकेवाई योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के युवाओं पर केंद्रित है। यह योजना टिकाऊ आजीविका के लिए प्लेसमेंट से जुड़ी कौशल प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करती है। यह कार्यक्रम 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए है और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। कामकाज की बदलती दुनिया के साथ यह कार्यक्रम भी लगातार विकसित हो रहा है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग की अगुवाई वाली प्रशिक्षण व्यवस्था , दीर्घकालिक रोजगार , नौकरी मिलने के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन और नए कौशल प्रद...

एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल आसानी से दिलाने के लिए TReDS पर CGTMSE गारंटी कवर शुरू

M1xchange, RXIL और DTX (KredX) के साथ इंटीग्रेशन से योग्य माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ( MSEs) को तेज़ी से और टेक्नोलॉजी-आधारित क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकेगा। केंद्रीय बजट में ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम ( TReDS) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट गारंटी कवर देने की घोषणा के तहत , माइक्रो , स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के इनवॉइस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी की सुविधा शुरू की है। MSME मंत्रालय के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज ( CGTMSE) पोर्टल को अब TReDS इकोसिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है , और क्रेडिट गारंटी कवरेज अब तीन प्लेटफॉर्म - M1xchange, RXIL और DTX (KredX) - पर उपलब्ध है। यह MSME मंत्रालय और CGTMSE द्वारा शुरू की गई सबसे तेज़ टेक्नोलॉजी-आधारित सुविधाओं में से एक है ; इससे माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट आसानी से मिल सकेगा और वे TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए तेज़ी से वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकेंगे। तीन प्लेटफॉर्म पर CGTMSE गारंटी कवर की हाल ही में शुरू हुई सुविधा का मकसद ...

धरती माता को प्लास्टिक कचरे से बचाने वाली पर्यावरण संरक्षक योद्धा श्रद्धा साहू ने जन जागरूकता लाने के लिए बढ़ाया अगला कदम…

प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें, और कचरा हम रोजाना हमारी धरती माता पर फैलाते है इसलिए प्लास्टिक का ये कचरा हमारे ग्रह को नुकसान पहुंचा रहा है। यह जानवरों को मार रहा है और हमें भी बीमार कर रहा है। ***************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇 ****************************** सहभागिता दीजिए   सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहूने प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न खतरे की जानकारी देते हुए बताया की छत्तीसगढ़ को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराने के लिए राज्य स्तरीय मुहिम में सभी की सहभागिता सुनिश्चित होने से प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है ! हम सब मिलकर इसे रोक सकते हैं। ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें👇👇👇 ****************************** पृथ्वी माता को बचाने के कुछ आसान उपाय हैं जिन्हे हम आपसी सहभागिता बनाकर पर्यावरण संरक्षण कर सकते हो: कपड़े की थैली ️ले जाओ,  प्लास्टिक की नहीं। स्टील पानी की बोतल का इस्तेमाल करो। प्लास्टिक बोतल का प्रयोग बंद करो । प्लास्टिक के स्ट्रॉ को कहो, “ना”! प्लास्टिक वाले सामान बेहद जरूरी हो तो ही खरीदो...

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