"महिला शक्ति सुरक्षा मुहिम" चलाकर निशा देशमुख ने स्मृति ईरानी और किरणमई नायक के असंतोषप्रद कार्यप्रणाली को दस्तावेजिक प्रमाणों के आधार पर खंगाला, टटोला और निष्पक्ष समीक्षक के दृष्टिकोण से आकलन किया.. तो व्यथित करने वाली परिस्थिति सामने आई… पढ़िए #छत्तीसगढ़ में महिला सुरक्षा के हालचाल…
सामाजिक कार्यकर्ता…
निशा देशमुख से विशेष बातचीत
केंद्रीय और प्रदेश स्तर से महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाली केंद्रीय व प्रदेश स्तर की दो प्राधिकृत महिलाओं की कार्यप्राणली से आम महिलाओं के लिए उत्पन्न होने वाली पीड़ा को दस्तावेजिक प्रमाणों के साथ उजागर करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख ने बताया की… क्यों है..?
स्मृति ईरानी का…वैसे तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने छत्तीसगढ़ में आकर तथाकथित हुंकार रैली में नाटकीय अंदाज का भाषण दिया और आरोपों का पुलिंदा पढ़ा… लेकिन अपनी पदेन शक्तियों का प्रयोग करके गृहणियों और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को अमल में लाने के हेतु... स्मृति ईरानी ने क्या किया… "यह किसी को नहीं बताया!"… गौरतलब रहें कि, डिजिटल माध्यमों से प्रसारित होने वाले नाटक नौटंकी के क्षेत्र में अद्वितीय स्थान हासिल करने वाली स्मृति ईरानी ने… "गृहणी के अधिकारों" को सुरक्षित करने के लिए भारत सरकार के महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित #onestop वन स्टॉप सखी सेंटर की बदहाल स्थिति पर छत्तीसगढ़ में आकर कुछ नहीं बोला । इस लिंक पर है योजना विवरण 👇
https://wcd.nic.in/schemes/one-stop-centre-scheme-1
स्मृति ईरानी ने #poshact "महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013" कानून को अमल में लाने के लिए क्या किया यह भी नहीं बताया… इस अधिनियम को डाउनलोड लाने के लिए इस 👇लिंक पर क्लिक करें
https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/2104?sam_handle=123456789/1362
स्मृति ईरानी कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के विषय पर कुछ नहीं बोली क्योंकि कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने में विफल स्मृति ईरानी का प्रमाण… दिल्ली की सड़को पर संघर्षरत महिला पहलवानों के विरोध ने जग जाहिर कर दिया था । महिला पहलवानों के संघर्ष ने यह भी साबित कर दिया की वास्तविकता के धरातल पर मैडम स्मृति ईरानी की कार्य प्रणाली की हुंकार कितनी दमदार है…
किरणमई नायक की…
"असहाय कार्यप्रणाली"…
छत्तीसगढ़ महिला आयोग के कार्यालय में कार्यरत महिला कर्मचारी और आगंतुक महिला पक्षकार कितनी सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के लिए किरण मई नायक ने क्या किया है ? यह विषय अब खुले मंच पर बहस किए जाने का बन गया है… क्योंकि छत्तीसगढ़ में महिलाओं का कार्यस्थल पर #poshact लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष ) अधिनियम, 2013 कानून का विस्तार और इस कानून के विधि निर्देशों को सुनिश्चित करवाने में किरण मई नायक के कार्यप्रणाली की वस्तुस्थिति बेहद चिंताजनक स्थिति में है । छत्तीसगढ़ के स्कूल, अस्पताल, महाविद्यालय, शासकीय अशासकीय विद्यालयों और छोटे कारखानों और बड़े उद्योगों तक हर स्तर पर महिला सुरक्षा की सुनिश्चित्ता नहीं हो पाई है… जो की किरण मई नायक की विफलता का संकेत है और इस विपरित स्थिति के लिए किरण मई नायक जवाबदेह है बावजूद इसके मैडम इस विषय पर खामोश हैं । छत्तीसगढ़ की गृहणियों को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने सशक्त कानून बनाएं हैं लेकिन ये कानून छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अदासीन कार्यवाहियों के कारण महज शासकीय फाइलों में दफन जांच का विषय बना हुआ है । इसलिए छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित होने को मजबूर हैं ।
निशा देशमुख की समीक्षा का…
पैमाना राष्ट्रीय स्तर का… अध्यन है…
निशा देशमुख द्वारा #womensafety https://www.mha.gov.in/en/divisionofmha/women-safety-division महिला सुरक्षा सुनिश्चित करवाने वाले कानून को अमल में लाने वाले प्राधिकारियों के कार्य प्रणाली पर लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के आधार पर केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क करके.... कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करवाने के लिए एक नोटिस सूचना पत्र भेजा था और आवश्यक विधि अपेक्षित कार्यवाही प्रक्रिया में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा महिलाओं को संरक्षण देने वाले विधि निर्देशों को महत्व दिए जाने के लिए पत्र व्यवहार किया था….
पढ़िए इस👇 लिंक पर है पूरी जानकारी
https://meradrushtikon.blogspot.com/2023/06/blog-post.html
महिला आयोग की…
कार्य प्रणाली पर लगाया गंभीर आरोप
समाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख ने छत्तीसगढ़ राज्य के महिला आयोग के जन सूचना अधिकारी के कार्य व्यवहार पर प्रश्न उठाकर यह गंभीर आरोप लगाया है कि, महिला आयोग से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेने के हेतु आवेदन करने वाली महिलाओं से, आवेदन शुल्क महिला आयोग द्वारा नगद नहीं लिया जाता है और उन्हें पोस्टल आर्डर या शुल्क अदा करने के अन्य माध्यम से शुल्क अदा करने के लिए महिला आयोग के अधिकारियों द्वारा विधि विरूद्ध तरीके से मजबूर किया जाता है । जिसके कारण महिला आयोग में आने वाली व्यथित महिलाओं की व्यथा कम होने के बजाय बढ़ जाती है ।
पढ़िए इस👇 लिंक पर है पूरी जानकारी
