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डीपीआईआईटी ने विद्युत सहायक उपकरण, प्रयोगशाला कांच के बर्तन, कब्जे, तांबे के उत्पाद और दरवाजे की फिटिंग जैसे उपभोक्ता सुरक्षा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए

 सरकार देश में सुदृढ़ गुणवत्ता इकोसिस्टम विकसित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है डीपीआईआईटी ने विद्युत सहायक उपकरण, प्रयोगशाला कांच के बर्तन, कब्जे, तांबे के उत्पाद और दरवाजे की फिटिंग जैसे उपभोक्ता सुरक्षा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए

सरकार देश में सुदृढ़ गुणवत्ता इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) विकसित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसका उद्देश्य सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और उच्च विकास के लिए बेहतर तथा सुरक्षा अनुरूप उत्पादों पर बल देना है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इस प्रयास के हिस्से के रूप में, विद्युत सहायक उपकरण, प्रयोगशाला ग्लासवेयर, कब्जे, तांबे के उत्पाद और दरवाजे की फिटिंग जैसे उपभोक्ता सामग्रियां सुरक्षा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) जारी किए हैं। ये गुणवत्ता नियंत्रण आदेश भारतीय उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जाने वाले सामान की रेंज से समझौता किए बिना, 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने के लिए हैं। यह दृष्टिकोण भारत को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पादों के पर्याय के रूप में विनिर्माण पावरहाउस के तौर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षा अनुरूप उत्पाद प्रदान करने में भारत को विश्व में अग्रणी रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, कई सुधार किए गए हैं। 'मेड इन इंडिया' ब्रांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ब्रांडों के साथ मेल खाता है और प्रीमियम गुणवत्ता प्रदान करते हैं। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुधार केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यदि दुनिया के किसी भी मंच पर "भारत में निर्मित" उत्पाद है, तो दुनिया को विश्वास होना चाहिए कि इससे बेहतर कुछ भी नहीं है, चाहे वह हमारी उपज हो, हमारी सेवाएँ हों, हमारे शब्द हों, हमारी संस्थाएँ हों, या हमारी निर्णय लेने की प्रक्रियाएँ हों, सब कुछ सर्वश्रेष्ठ होगा, तभी हम उत्कृष्टता के भाव को आगे बढ़ा सकते हैं।

प्रौद्योगिकी के साथ, सुरक्षा मानकों से संबंधित पहलुओं जैसे प्रदर्शन मापदंडों, स्थायित्व और सामान की निर्भरता के बारे में ग्राहक अधिक विशिष्ट हो रहे हैं। खरीदारी करने से पहले उत्पाद की गुणवत्ता की समीक्षा जांचना एक आम बात हो गई है। इसलिए, विनिर्माण रणनीति के संदर्भ में उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा को बढ़ाने के लिए मजबूत गुणवत्ता मानकों को लागू करने के लिए, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) के कार्यान्वयन पर अभूतपूर्व नीतिगत फोकस है। ये विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) समझौते के प्रावधानों के अनुरूप है।

 गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों को लागू करने से भारत को उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा बढ़ाने, भारतीय बाजार में घटिया उत्पादों के प्रसार को रोकने, निवेश आकर्षित करने और जीवन की हानि या किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए गुणवत्ता मानकों से वैश्विक विनिर्माण बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार के उत्पाद दोष और खराबी का पता लगाने में मदद मिलेगी जो कि तर्कसंगत लागत के माध्यम से निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी होगा।

भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में कार्य करने वाला भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ)/अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (आईईसी) द्वारा निर्धारित प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुकूल है। यह सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्ता वाला सामान प्रदान करने के अंतर्निहित उद्देश्य के साथ वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन और गुणवत्ता प्रमाणन तथा अनुरूपता मूल्यांकन में शामिल है। किसी भी उत्पाद या प्रक्रिया के लिए बीआईएस द्वारा जारी किए गए मानक स्वैच्छिक अनुपालन के लिए हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा मुख्य रूप से योजना-I में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) के माध्यम से तकनीकी विनियमन, (टीआर) और योजना-II के अंतर्गत अनिवार्य पंजीकरण आदेश (सीआरओ) अनिवार्य प्रकृति के हैं।

सुरक्षा पहलू के महत्व को ध्यान में रखते हुए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करने तथा भारतीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपने दायरे में आने वाले उत्पादों के लिए एक मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे लगभग 300 उत्पाद मानकों को कवर करने वाले 60 से अधिक नए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए गए हैं, जिससे न केवल यह सुनिश्चित हुआ है कि उपभोक्ताओं को विश्वसनीय उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि विनिर्माण गुणवत्ता मानकों में भी सुधार हुआ है, जिससे 'मेड इन' के ब्रांड और मूल्य में वृद्धि हुई है।

विभिन्न उत्पाद श्रेणियों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को लागू करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। उन उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनके लिए मानकों का उल्लंघन, गंभीर नुकसान और चोट के कारण उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है क्योंकि ये आवासों में व्यापक रूप से प्रयोग होते हैं। इसलिए, गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को हाल ही में 'स्टील वायर्स/स्ट्रैंड्स, नायलॉन वायर रोप्स और वायर मेश', 'हिंग्स', 'तिजोरियां, सेफ डिपॉजिट लॉकर कैबिनेट्स और की लॉक्स', 'लैबोरेटरी ग्लासवेयर' और 'इलेक्ट्रिकल एक्सेसरीज' समेत कई के अन्य वस्तुओं के लिए अधिसूचित किया गया है। किसी भी अप्रत्याशित दुर्घटनाओं से बचाव के लिए ये मानक बहुत महत्वपूर्ण हैं।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का कार्यान्वयन एक व्यापक अभ्यास है जिसमें उन उत्पादों की पहचान के लिए हितधारकों के साथ डीपीआईआईटी की निरंतर भागीदारी शामिल है। पहचान के बाद, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से भारतीय मानकों, उपयुक्त अनुरूपता मूल्यांकन योजना, बीआईएस परीक्षण प्रयोगशालाओं की उपलब्धता या बीआईएस मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रयोगशालाओं और उत्पाद मैनुअल सहित विभिन्न पहलुओं पर परामर्श किया जाता है। इसके बाद गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का मसौदा तैयार किया जाता है, जिस पर उद्योग और संबंधित हितधारकों के साथ परामर्श किया जाता है।

उद्योग जगत की टिप्पणियों को शामिल करने के बाद, गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के मसौदे को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री द्वारा अनुमोदित किया जाता है इसके पश्चात विधायी विभाग द्वारा कानूनी जांच की जाती है। गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वेबसाइट पर 60 दिनों के लिए अपलोड किया जाता है, जिसमें डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों से टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं। सदस्य देशों की इन टिप्पणियों की जांच और समीक्षा की जाती है, जिसके बाद गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को अधिसूचित करने के लिए संबंधित केंद्र सरकार प्राधिकरण से अंतिम मंजूरी मांगी जाती है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के सुचारू कार्यान्वयन की सुविधा के लिए समयसीमा में छूट के संदर्भ में कई बदलाव और छूट की परिकल्पना की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा लाइसेंस और/या अनुरूपता प्रमाणपत्र के माध्यम से लागू किया जाता है। इसकी अधिसूचना के साथ, गैर-बीआईएस प्रमाणित उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बीआईएस अधिनियम के प्रावधान का उल्लंघन करने पर पहले अपराध के लिए 2 साल तक की कैद या कम से कम 2 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है, जो दूसरे और बाद के अपराध के लिए बढ़कर न्यूनतम 5 लाख रुपये हो सकता है।

भारत में एक सुदृढ़ गुणवत्ता इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) विकसित करने के लिए उद्योग-सरकारी की साझेदारी से, डीपीआईआईटी उद्योग के सदस्यों, क्षेत्रीय संघों और संबंधित हितधारकों के साथ नियमित परामर्श आयोजित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जारी किए जा रहे गुणवत्ता नियंत्रण आदेश उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। अधिसूचना के बाद, अखिल भारतीय स्तर पर उद्योग में जागरूकता और स्वामित्व की भावना विकसित करने के लिए नए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के संबंध में कई पहल की गई हैं। ये व्यापक परामर्श यह सुनिश्चित करते हैं कि सुचारू कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों के विचारों, फीडबैक और तकनीकी इनपुट पर विचार किया जाए।

 उपभोक्ताओं की सुरक्षा और भलाई सर्वोपरि है, जिसके लिए उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश पेश करने के निरंतर प्रयास किए जाएंगे। सुरक्षा मानकों का पालन घटिया उत्पादों के उत्पादन और वितरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जो 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की मूल्य वृद्धि में एक बड़ा कदम होगा। दुर्घटनाओं से बचने के लिए गुणवत्ता पर फिर से ध्यान केंद्रित किया गया है, इसलिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश उपभोक्ता के विश्वास को बढ़ावा देने के लिए एक अभिन्न अंग बन गया है।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश घरेलू ब्रांडों को बढ़ावा देने और किसी भी प्रकृति की अक्षमता को कम करते हुए भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता और मूल्यवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगा। वैश्विक मानकों के अनुरूप परिणाम देने वाले 'जीरो डिफेक्ट' और 'जीरो इफेक्ट' के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि किसी नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव या स्थिरता पर कोई समझौता न हो। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस विषय पर बल दिया है वर्तमान समय 'जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट' के लोकाचार के साथ काम करने का उपयुक्त क्षण है और हर घर में 'वोकल फॉर लोकल' की गूंज के साथ, यह सुनिश्चित करने का समय है कि हमारे उत्पाद विशेष रूप से वैश्विक मानकों को पूरा करे। सुरक्षा की दृष्टि से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश से भारत में बेहतर गुणवत्ता वाले विश्वस्तरीय उत्पाद विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने के दृष्टिकोण को हासलि किया जा सकेगा।

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एमजी/एआर/आरपी/वीएलके/वाईबी प्रविष्टि तिथि: 30 JAN 2024 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2000565) आगंतुक पटल : 18

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खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

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फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 एवं 2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा

·         सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 पूर्वी एवं मध्य भारत में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा , ·         डेयरी सहकारी संस्थाएँ महिलाओं को गृहिणी से उद्यमी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण वित्तीय इकोसिस्टम को सशक्त कर रही हैं तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा दे रही हैं , सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की वैश्विक ऊर्जा असंतुलन एवं ऊर्जा संकट के दौर में सहकारी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी एवं सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल भारत को आत्मनिर्भर एवं सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाएंगे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना , प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों एवं किसान-के...

छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश बघेल सरकार ने दुर्ग की आम जनता के परिवहन साधन… “शहरी बस सेवा” दुर्ग को अनियमितताओं के हवाले कर दिया और आम जनता को सस्ती व सुगम बस सेवा का लाभ लेने से वंचित कर दिया जिसके बाद जनता ने भूपेश बघेल सरकार को सत्ताविहीन कर दिया…

देवेंद्र यादव ने गड़बड़ियां का संरक्षण किया भिलाई के पूर्व महापौर और विधायक देवेंद्र यादव दुर्ग को सार्वजनिक सेवा की प्रशासकीय कार्यवाही में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की परिणाम स्वरूप दुर्ग जिले की बस सेवा अनियमितताओं के हवाले हो गई और दुर्ग जिले की जनता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित हो गई । क्यों जरूरी है बस सेवा ? शहरी बस सेवा: लोक कल्याण की सेवा है  शहरी बस सेवा, शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो नागरिकों को किफायती, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा प्रदान करती है। यह निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करने और शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आम जनता के परिवहन का सबसे सस्ता और सुगम साधन होती है । प्रमुख विशेषताएं: विविधता:  शहरी बसें विभिन्न आकारों और क्षमताओं में उपलब्ध हैं, जो विभिन्न शहरों और यात्री भार की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। कुछ छोटी और अधिक चपल होती हैं, जो संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर ढंग से संचालित होती हैं, जबकि अन्य बड़ी और जोड़दा...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान आरंभ किया

  भारत में तम्बाकू के उपयोग से बहुत से रोग पैदा होते हैं और इसके इस्तेमाल से व्यक्ति मृत्यु की कगार तक पहुंच सकता है। देश में हर साल लगभग 1.35 मिलियन मौतें तम्बाकू के कारण होती हैं। भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक भी है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस) 2019 के अनुसार , देश भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत स्कूली छात्र विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते पाये गये हैं। हमारे स्कूल भवनों और परिसरों के आसपास तम्बाकू उत्पादों की विभिन्न रूपों में आसान पहुँच को उपरोक्त स्थिति पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीटीपी) के अंग के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नाबालिगों और युवाओं को तम्बाकू के सेवन से बचाने के लिए शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू रहित बनाने के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान" दिशानिर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूलों के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान कार्यान्वयन मैनुअल" विकसित किया है और...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

पद्मा पुरस्कार 2026 की घोषणा

पद्मा पुरस्कार 2026 की घोषणा पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं , जो तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं: पद्म विभूषण , पद्म भूषण और पद्म श्री। ये पुरस्कार कला , सामाजिक कार्य , सार्वजनिक मामलों , विज्ञान और इंजीनियरिंग , व्यापार और उद्योग , चिकित्सा , साहित्य और शिक्षा , खेल , सिविल सेवा आदि विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाते हैं। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए , पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोहों में प्रदान किए जाते हैं , जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष मार्च/अप्रैल के आसपास होते हैं। वर्ष 2026 के लिए , राष्ट्रपति ने 131 पद्म पुरस्कारों के प्रदान करने की स्वीकृति दी है , जिनमें 2 युगल पुरस्कार (युगल पुरस्कार को एक ही माना जाता है) शामिल हैं , जैसा कि नीचे दी गई सूची में है। इस सूची में 5 पद्म विभूषण , 13 पद्म भूषण और 113 प...

मुंबईतल्या ‘इंद्रा वॉटर’ या स्टार्ट-अप कंपनीने एन-95 मास्क/पीपीई चे निर्जंतुकीकरण करण्याची प्रणाली विकसित केली

डीएसटीच्या सहकार्याने एन-95 मास्क/पीपीई वैद्यकीय आणि बिगर-वैद्यकीय उपकरणांचे निर्जंतुकीकरण करण्याची प्रणाली विकसित; तसेच कोविड-19 शी संबंधित जैव-वैद्यकीय कचरानिर्मिती कमी करण्यातही मदत आयआयटी मुंबईतील जैवविज्ञान आणि जैव-अभियांत्रिकी विभागाकडून या प्रणालीची चाचणी आणि मान्यता Posted Date:- May 27, 2021 मुंबईतल्या ‘इंद्रा वॉटर’ या स्टार्ट-अप कंपनीने एन-95 मास्क/पीपीई चे निर्जंतुकीकरण करण्याची प्रणाली विकसित केली असून महाराष्ट्र आणि तेलंगणातील विविध सरकारी रुग्णालयांमध्ये ही प्रणाली बसवण्यात आली आहे. ‘वज्र कवच’ असे नाव असणारी ही निर्जंतुकीकरण प्रणाली पुनर्वापर करण्यास योग्य असे पीपीई सूट्स, वैद्यकीय आणि बिगर-वैद्यकीय उपकरणे यांच्यासाठी होणारा खर्च कमी करण्यास उपयुक्त ठरली आहे. तसेच कोविड-19 शी संबंधित जैव-वैद्यकीय कचरानिर्मिती कमी करण्यातही मदत करत असल्याने ती पर्यावरणपूरकही आहे. वैयक्तिक संरक्षणविषयक उपकरणे अधिक प्रमाणात आणि किफायतशीर दरात तसेच सहज उपलब्ध करणे, यासाठीही या प्रणालीची मदत होते आहे. या प्रणालीत, विविध पातळ्यांवर निर्जंतुकीकरणाची प्रक्रिया केली जाते. य...

आंतरिक शिकायत समिति का महत्व... आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। पढ़िए कैसे यह समिति महिलाओं का संरक्षण करती है....

सुरक्षित और दबावपूर्ण कामकाजी वातावरण को... कानून के दायरे में लाकर गरिमापूर्ण बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा.... आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. जागरूकता फैलाना: आईसीसी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता फैलाने का काम करती है। यह कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न के बारे में शिक्षित करती है और उन्हें इस बारे में जानकारी प्रदान करती है कि यदि वे उत्पीड़न का शिकार होते हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए। 5. कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाना: आईसीसी क...

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