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6 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य पूरा करने के लिए 700 शी-मार्ट और 1,000 ज़िला फ़ुलफ़िलमेंट सेंटर बनाए जाएंगे

ग्रामीण विकास सचिव ने डे-एनआरएलएम के अंतर्गत मार्केटिंग पहलों की समीक्षा की; महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने पर बल दियाक्षमता निर्माण, उद्यम को बढ़ावा देना, ओएनडीसी के साथ साझेदारी और वित्तीय समावेशन मुख्य प्राथमिकताएं बनी रहेंगी

ग्रामीण विकास विभाग ने छह करोड़ लखपति दीदियों को तैयार करने के लिए एक रणनीति बनाई है। इस रणनीति के मुख्य हिस्से हैं: उद्यम को बढ़ावा देकर आजीविका के बेहतर अवसर सृजित करना, ग्रामीण महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाना, और स्वयं सहायता समूह (शी) के सदस्यों के लिए क्षमता निर्माण, मार्केटिंग गतिविधियों, प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सहायता पर ध्यान देना। भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस पर चर्चा की गई। इस बैठक का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) और इसकी विभिन्न उप-योजनाओं की प्रगति का आकलन करना था। बैठक में संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा और सुश्री जयश्री एम.जी. के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका प्रभाग और राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

बातचीत का मुख्य मकसद एक मज़बूत और इंटीग्रेटेड मार्केटिंग इकोसिस्टम बनाना था। इससे ग्रामीण महिला प्रोड्यूसर सिर्फ़ रोज़ी-रोटी कमाने से आगे बढ़कर, पेशेवर तरीके से मैनेज किए जाने वाले और समुदाय के मालिकाना हक वाले ऐसे उद्यमों की मालिक बन सकेंगी, जिनकी संगठित बाज़ारों तक लगातार पहुँच हो। चर्चा में समुदाय के मालिकाना हक वाले रिटेल सिस्टम, एक यूनिफाइड नेशनल मार्केटिंग पहचान, डिजिटल कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म, मुख्य रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्थागत सहायता तंत्र और संबंधित गाइडलाइंस के ऑपरेशनल तौर पर तैयार होने जैसे मुद्दों पर बात हुई।

बैठक में बताया गया कि विभाग शी -आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 700 शी-मार्ट, 1,000 डिस्ट्रिक्ट फुलफिलमेंट सेंटर और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस बनाने के साथ-साथ राज्य-स्तरीय फेडरेशन को मज़बूत करने का प्रस्ताव है। शी-मार्ट को ज़्यादा संभावना वाली कमर्शियल जगहों पर बनाने का प्रस्ताव है, जहाँ  शी उत्पादों के लिए बाज़ार तक लगातार पहुँच सुनिश्चित करने के लिए मज़बूत बैकवर्ड और फॉरवर्ड मार्केट लिंकेज हों। काम को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए, सचिव जी ने गतिविधियों का एक विस्तृत सालाना कैलेंडर तैयार करने का निर्देश दिया और समय-सीमा का सख्ती से पालन करने पर बल दिया। उन्होंने एक बड़े पुरस्कार ढांचा के ज़रिए शी सदस्यों और सामुदायिक संस्थाओं के बेहतरीन योगदान को पहचानने और उन्हें सम्मानित करने पर भी बल दिया। प्रस्तावित श्रेणी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य, सबसे अच्छी महिला उद्यमी, सबसे अच्छी डिजिटलाइज़ेशन पहल, सबसे ज़्यादा शी फंड ट्रांसफर उपलब्धि, लखपति दीदी पुरस्कार और ग्रामीण आजीविका इकोसिस्टम में उत्कृष्टता को पहचानने वाली अन्य श्रेणी शामिल हैं।

खेती-बाड़ी से अलग आजीविका और मार्केटिंग पहलों की समीक्षा करते हुए, सचिव ने संशोधित सरस मेला गाइडलाइंस बनाने और जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही शी उत्पादों की बिक्री के मौकों और बाज़ार तक पहुँच को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर सरस मेलों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्रोड्यूसर ग्रुप ऐप लॉन्च करने और जन समर्थ पोर्टल के ज़रिए जमा किए गए लोन आवेदनों में देरी को दूर करने के निर्देश भी जारी किए। उन्होंने डे-एनआरएलएम क्रेडिट-लिंक्ड स्कीम के बारे में बैंकरों के बीच जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर भी बल दिया।

समीक्षा में 'सरस आजीविका' के लिए प्रस्तावित यूनिफाइड नेशनल मार्केटिंग पहचान की भी समीक्षा की गई। इसका उद्देश्य बिखरी हुई ब्रांडिंग को एक ही, प्रीमियम और सांस्कृतिक रूप से जुड़े राष्ट्रीय ब्रांड में बदलना है। इस पहल का उद्देश्य बेहतर प्रोडक्ट पोजिशनिंग और अच्छी पैकेजिंग के ज़रिए बाज़ार में पहचान बढ़ाना है, जो उत्पादों के पीछे के कारीगरों और समुदायों को उजागर करे।

री-डिज़ाइन किए गए ई-सरस पोर्टल पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। स्व-सहायता समूह के उत्पादों की डिजिटल पहुंच बढ़ाने के लिए इस प्लेटफ़ॉर्म को सिंगल-वेंडर वेबसाइट से बदलकर मल्टी-वेंडर, ओमनी-चैनल मार्केटप्लेस बनाया जा रहा है। इसके अलावा, नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रमुख 'सरस गैलरी' को नए सिरे से तैयार करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इसमें ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने और रिटेल परफॉर्मेंस को मज़बूत करने पर ध्यान दिया गया।

प्रोडक्ट इनोवेशन, डिज़ाइन डेवलपमेंट, पैकेजिंग में सुधार, क्वालिटी कंप्लायंस और क्षमता निर्माण के लिए नेशनल हब बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। उम्मीद है कि ये हब  उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और बाज़ार में उनकी तैयारी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

बैठक का एक मुख्य हिस्सा हर पहल के लिए विस्तृत कामकाजी दिशा-निर्देश पेश करना था। ये दिशा-निर्देश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक सामान्य रूपरेखा, मानक परिचालन प्रक्रियाएं और स्पष्ट रूप से तय भूमिकाएं, समय-सीमा और प्रक्रियाएं प्रदान करती हैं। ताकि इनका असरदार तरीके से पालन हो सके और तय नतीजे समय पर मिल सकें। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा काम को आगे बढ़ाने और मंत्रालय द्वारा रणनीतिक मार्गदर्शन और सहायता मिलने से, इन प्रयासों से ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए बाज़ार तक पहुंच काफी मज़बूत होने और शी उत्पादों को प्रीमियम राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ारों में सफलता दिलाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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पीके/केसी/एसके प्रविष्टि तिथि: 14 JUN 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2272821) आगंतुक पटल : 2365

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने... जो निर्वाचन शपथ पत्र चुनाव आयोग में जमा करवाया है... उसमे भूपेश बघेल के विरुद्ध संस्थापित जांच कार्यवाही का उल्लेख नहीं है... इसलिए अभ्यर्थी भूपेश बघेल के नाम निर्देशन पत्र पर आपत्ति और पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है जिसका विवरण इस प्रकार है...

शपथ पत्र मामला   अभ्यर्थी भूपेश बघेल के निर्वाचन शपथ पत्र मामले में संविक्षा कार्यवाही के दौरान की गई आपत्ति पर भूपेश बघेल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने निर्वाचन कार्यवाही प्रक्रिया की विधि मान्यता को भूपेश बघेल ने स्वयं प्रश्नांकित छोड़ दिया अतः यह प्रश्न अनुत्तरित रह गया है कि, क्या भूपेश बघेल ने मतदाताओं को गुमराह करने के लिए बीएसपी लिज मामले में झूठी घोषणा की थी ? प्रतिक्रिया दो भूपेश बघेल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बीएसपी लिज मामले में कि गई घोषणा की वस्तुस्थिति जानने के लिए पंजीकृत डाक से प्रेषित नोटिस पर कोई जवाब और प्रतिक्रिया नहीं गई दी है इससे भी गंभीर मामला यह है की भूपेश बघेल ने नोटिस पर संज्ञान लेकर जांच आदेश देने वाले संभाग आयुक्त दुर्ग न्यायालय की कार्यवाही पर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और भिलाई के मतदाताओं को गुमराह करने वाला राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति का भाषण करके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जैसे गरिमापूर्ण पद की छवि को धूमिल की है । न्यायालयीन कार्यवाही प्रश्नांकित   दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा का निर्वाचन  संविक्षा अधिकारी अपने न्यायालयीन शक्तिया...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

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सतारा जिला कोरोना संक्रमण की समीक्षा जल्द चालू होगा जिला खेल परिसर में बैडमिंटन हॉल में 78 बेड के कोविड केंद्र

अस्पताल सुविधाओं की उपलब्धता, बिस्तरों में वृद्धि के संबंध में तत्काल कार्रवाई करें - अध्यक्ष रामराजे नाइक-निम्बालकर सतारा जिला कोरोना संक्रमण की समीक्षा सतारा (जिमका): जिले में कोरोना रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि रोगियों को उपचार से वंचित न किया जाए और यह सुनिश्चित करने के लिए देखभाल की जाए कि जिन रोगियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता है, वे ऑक्सीजन से वंचित हैं, रामराजे नाइक-निम्बालकर, विधानसभा अध्यक्ष परिषद कोरोना रोकथाम उपाय की बैठक कोरेगांव पंचायत समिति के हॉल में विधान परिषद के अध्यक्ष रामराजे नाइक-निम्बालकर की अध्यक्षता में हुई। इस बार उन्होंने सुझाव दिया। बैठक में संरक्षक मंत्री बालासाहेब पाटिल, गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) शंभुराज देसाई, सांसद श्रीनिवास पाटिल, विधायक शशिकांत शिंदे, विधायक महेश शिंदे, विधायक दीपक चव्हाण, कलेक्टर शेखर सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौड़ा, पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे अजय कुमार बंसल, अनुविभागीय अधिकारी ज्योति पाटिल। तहसीलदार अमोल ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

EMRS एकलव्य विद्यालय की संचालन प्रणाली मेरे दृष्टिकोण से .... भाग १

  एकलव्य शाला योजना आशा की किरण है क्योकि ... आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने बनाई है "महत्वाकांक्षी एकलव्य शाला योजना" ? अब शासकीय पदों की अपेक्षित शैक्षणिक व तकनिकी आहर्ता अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को हासिल करना आसान हो गया है केंद्र और राज्य सरकार के प्रशासकीय तालमेल से संचालित होने वाली एकलव्य शाला अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दिलवाएगी मुख्य धारा से जुड़ने अवसर   एकलव्य विद्यालय योजना का पहला चरण सामाजिक अपेक्षाओं को पूरा कर रहा है लेकिन इसके संचालन और व्यस्थपन की प्रक्रिया क्या व्यवहारिक है ? आदिवासी आवासीय विद्यालय की स्थापना की परिकल्पना भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कि है और इस परिकल्पना को वास्तविकता की धरातल पर लाने के लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय नामक योजना को स्थापित किया गया इस महत्वाकांक्षी योजना को भारत सरकार ने अपने जनजाति कार्य मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वित भी किया है आदिवासी छात्रों के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह योजना बढ़ी कारगर साबित हो रहे है अपने शुर...

“क्लिनिक”, “क्लिनिकल स्थापना” और “अस्पताल” में अंतर क्या होता है ?

क्या आप जानते है कि, चिकित्सा व्यवसाय को किये जाने के स्थान को कानून ने अलग - अलग नाम क्यों दिए है नर्सिंग एक्ट के तहत “क्लिनिक”, “क्लिनिकल स्थापना” और “अस्पताल” में अंतर क्या होता है ? -------------------------------- “क्लिनिक” से अभिप्रेत है, कोई ऐसा परिसर जिसमें किसी बीमार के इलाज के लिए सुविधाएं उपलब्ध हों और जो उनके प्रवेशन के लिए उपयोग में लाया जाता हो तथा ठहरने के लिए न हो | ----------------------------------- -“क्लिनिकल स्थापना” से अभिप्रेत है, मेडिकल लेबोरेटरी, फिजियोथेरेपी स्थापना अथवा क्लिनिक अथवा अस्पताल अथवा कोई अन्य स्थापना जो इनमें से किसी के भी सदृश्य हो और जिस किसी नाम से जाना जाता हो |   ----------------------------------- “अस्पताल” से अभिप्रेत है, ऐसा कोई परिसर जिसमें बीमारी के इलाज की सुविधाएं हों और जो उनके प्रवेशन या ठहरने के लिए उपयोग में लाया जाता हो

निर्वाचन आरोपी सुश्री सरोज पांडेय के विरुद्ध प्रस्तुत निर्वाचन याचिका में समाज सेवक श्री विंसेंट डिसूजा जी ने गवाही दी और प्रस्तुत किए गए प्रमाणित दस्तावेजों की पुष्टि भी कर दी… पढ़िए याचिका कार्यवाही की वर्तमान स्थिति…

बिलासपुर : उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में सुश्री सरोज पांडेय की राज्य सभा सदस्यता को श्री लेखराम साहू ने निर्वाचन याचिका क्रमांक EP 01/2018. (Lekhram Sahu vs Saroj pandey court case) प्रस्तुत करके चुनौती दी है । वर्तमान में  माननीय श्री नरेंद्र कुमार व्यास महोदय के न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रहीं है । जिसमे याचिकाकर्ता लेखराम साहू की गवाही पूरी होने के बाद प्रमुख गवाह विंसेंट डिसूजा ने अपनी गवाही माननीय न्यायालय के समक्ष दी और दस्तावेजिक प्रमाण जो की विंसेंट डिसूजा ने शासकीय कार्यालयों से विधिवत अभिप्रात्त करके निर्वाचन याचिका कार्यवाही में याचिकाकर्ता में माध्यम से साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत किए थे उनकी पुष्टि माननीय न्यायालय के समक्ष कर दी। उल्लेखनीय है कि, विंसेंट डिसूजा के द्वारा निर्वाचन याचिकाकर्ता के माध्यम से न्यायालय के समक्ष साक्ष्य स्वरूप दुर्ग स्थित शासकीय भंडार गृह जल परिसर के आबंटन दस्तावेज, बैंक खाता विवरण जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेजिक प्रमाणों को प्रस्तुत किया गया और जल परिसर भंडार गृह का बकाया बिजली बिल के संबंध में बताया है । उच्च न्यायालय छत...

अगर आपके मन में यह प्रश्न है कि सामाजिक संगठन क्या होता है ? इसका गठन क्यो किया जाता है ?

समाज-कार्य (social work) या समाजसेवा एक शैक्षिक एवं व्यावसायिक विधा है जो सामुदायिक सगठन एवं अन्य विधियों द्वारा लोगों एवं समूहों के जीवन-स्तर को उन्नत बनाने का प्रयत्न करता है। सामाजिक कार्य का अर्थ है सकारात्मक, और सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके व्यक्तियों की क्षमताओं को बेहतर करना ताकि वे अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करते हुए अपनी तकलीफ़ों को कम कर सकें। इस प्रक्रिया में समाज-कार्य लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने और उन्हें अपने ही मूल्यों की कसौटी पर खरे उतरने में सहायक होता है। 'समाजसेवा'वैयक्तिक आधार पर, समूह अथवा समुदाय में व्यक्तियों की सहायता करने की एक प्रक्रिया है, जिससे व्यक्ति अपनी सहायता स्वयं कर सके। इसके माध्यम से सेवार्थी वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में उत्पन्न अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने में सक्षम होता है। समाजसेवा अन्य सभी व्यवसायों से सर्वथा भिन्न होती है, क्योंकि समाज सेवा उन सभी सामाजिक, आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों का निरूपण कर उसके परिप्रेक्ष्य में क्रियान्वित होती है, जो व्यक्...

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