बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी)' योजना का उद्देश्य बाल लिंग-अनुपात में सुधार करना और लड़कियों तथा महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों का समाधान करना है
बीबीबीपी योजना का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में लड़कियों के प्रति लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाना है"
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना बाल लिंगानुपात (सीएसआर) में सुधार करने तथा
लड़कियों और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में सहायता
करती है। यह विभिन्न हितधारकों को जानकारी देकर, प्रभावित
करके, प्रेरित करके, उनकी भागीदारी
सुनिश्चित करके तथा उन्हें सशक्त बनाकर बालिका के प्रति लोगों की सोच और व्यवहार
में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करती है। 15वें वित्त
आयोग की अवधि में, मिशन शक्ति के संबल (SAMBAL) वर्टिकल के अंतर्गत एक घटक के रूप में बेटी बचाओ, बेटी
पढ़ाओ योजना का विस्तार देश के सभी जिलों तक किया गया है। इसके अंतर्गत
बहु-क्षेत्रीय प्रयासों के माध्यम से ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है,
जिनका जमीनी स्तर पर वास्तविक प्रभाव पड़ता है। आज बेटी बचाओ,
बेटी पढ़ाओ सिर्फ एक सरकारी नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी एजेंसियों, मीडिया, नागरिक समाज तथा आम जनता सहित विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से यह
एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
बीबीबीपी का
मुख्य उद्देश्य पूरे देश में बालिकाओं के प्रति लोगों की सोच और सामाजिक दृष्टिकोण
में व्यवहारगत एवं सामाजिक परिवर्तन लाना है। इस योजना का स्वरूप ऐसा है कि इसके
लाभार्थियों की संख्या को सटीक रूप से मापा नहीं जा सकता। भारत सरकार के स्वास्थ्य
एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की
नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार,
जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार दिखाई दे रहा है और यह 2014-15 से 2024-25 के दौरान 918 से
बढ़कर 929 हो गया है। इसी प्रकार, शिक्षा
मंत्रालय के यूडीआईएसई के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर
पर स्कूलों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 के 75.51% से बढ़कर 2025-26 में 83.4%
हो गया है।
प्रधानमंत्री
मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है, जिसे 1 जनवरी 2017 से देश के
सभी राज्यों (तेलंगाना को छोड़कर) और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया
है। यह एक केन्द्रीय प्रायोजित मातृत्व लाभ योजना है, जिसके
अंतर्गत पहली संतान के लिए पात्र लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में प्रत्यक्ष
लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से ₹5,000 की नकद सहायता प्रदान की जाती है।
अस्पताल या
स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव होने पर जननी सुरक्षा योजना के तय नियमों के तहत बाकी
बची प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है, जिससे औसतन एक महिला
को कुल ₹6,000/- का लाभ
प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा, यदि दूसरी संतान लड़की हो,
तो पात्र लाभार्थी को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत ₹6,000 की नकद सहायता भी प्रदान की जाती है। इस योजना की शुरुआत 1 जनवरी 2017 से लेकर 15 जुलाई 2026 तक, देशभर की लगभग 4.35 करोड़
महिलाओं को ₹20,446 करोड़ की
वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।
यह जानकारी
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक
प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीकेपी
प्रविष्टि तिथि: 22
JUL 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2288128) आगंतुक
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