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पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ


पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ

·        ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने हेतु 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी

·        महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में निर्बाध ट्रांजिशन सुनिश्चित किया जाएगा

·        रोजगार, आजीविका और ग्रामीण परिवर्तन को गति देने हेतु 95,692 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन

·        मौजूदा जॉब कार्ड मान्य रहेंगे, पहले से चल रहे कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे

ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए, भारत सरकार ने 11 मई 2026 को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा), 2005 उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक समेकित (इंटीग्रेटेड), भविष्य उन्मुख एवं उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) आधारित ग्रामीण परिवर्तन के नए युग की शुरुआत करता है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। यह बढ़ी हुई गारंटी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा ग्राम स्तर पर सतत विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से लाई गई है।

VB–G RAM G अधिनियम लागू होने संबंधी राजपत्र अधिसूचना देखने के लिए यहां क्लिक करें।

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।

 यह अधिनियम समयबद्ध और पारदर्शी मजदूरी भुगतान पर विशेष बल देता है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में किया जाता रहेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे।

भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने 95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान चरण में अब तक का सर्वाधिक आवंटन है।

राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह आवंटन ग्रामीण अवसंरचना विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आय में वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।

बिना किसी बाधा के, सुचारु और श्रमिक-केंद्रित ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए नए अधिनियम के लागू होने की तिथि तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत रोजगार बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे। 30 जून तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य संरक्षित रहेंगे और विकसित भारत–जी राम जी के प्रावधानों के अनुरूप उन्हें सुचारु रूप से नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा। ग्रामीण श्रमिकों को समय पर कार्य उपलब्ध कराना और मजदूरी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत सरकार ने रोजगार की मांग के पैटर्न और मैदानी आवश्यकताओं के अनुरूप राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पर्याप्त श्रम बजट उपलब्ध कराया है, ताकि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने से पूर्व की अवधि में किसी भी ग्रामीण परिवार को असुविधा का सामना न करना पड़े।

वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मान्य रहेंगे। जिन श्रमिकों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते हैं। केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा, तथा ई-केवाईसी पूर्ण कराने हेतु राज्य सरकारों द्वारा मैदानी स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विभिन्न नियमों के ड्राफ्ट राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं, जो निम्नानुसार हैं:

·        मानक(नॉरमेटिव) आवंटन हेतु वस्तुनिष्ठ मानदंडों से संबंधित नियम

·        संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियम

·        राष्ट्रीय स्तर पर संचालन समिति के नियम

·        केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम

·        प्रशासनिक व्यय नियम

·        शिकायत निवारण नियम

·        मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ते के भुगतान की प्रक्रिया संबंधी नियम

·        अतिरिक्त व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम

·        बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में योजना व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम

महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में सुचारु ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियमों में उपयुक्त प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा। उपर्युक्त अन्य नियमों के प्रारूप भी तैयार कर लिए गए हैं और उन्हें सार्वजनिक परामर्श हेतु जल्द प्रकाशित किया जाएगा।

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 से ग्रामीण रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की अपेक्षा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए यह अधिनियम सशक्त, समृद्ध और विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

FAQ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

विस्तृत विवरण देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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RC/PU प्रविष्टि तिथि: 11 MAY 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2259707) आगंतुक पटल : 318

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों को अपने पक्ष में करके राज्य की सत्ता हासिल की लेकिन भूपेश सरकार ने अधिग्रहण कानून का दुरुपयोग कर किसानों की जमीन को… जबरन हथियाने का भी काम किया और… किसानों के आशीर्वाद से सत्ता हासिल करने के बाद भूपेश सरकार ने भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि और नया रायपुर विकास प्राधिकरण के लिए अधिग्रहित भूमि को किसानों को लौटने के कार्य नहीं किया पढ़िए व्यथित किसानों की पीड़ा…

भिलाई, पाटन, दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के संघर्षरत किसानों को उनकी... जमीन लौटा दो...   भूपेश भैय्या… सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कई बार यह निवेदन किया की भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए तत्कालीन कांग्रेस शासन ने जो किसानों की अन्नदाता जमीन अधिग्रहित की थी उसे लौटा दो भूपेश भैय्या… लेकिन भूपेश बघेल ने भिलाई, पाटन, दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के किसानों की जमीन उन्हें लौटने के लिए कुछ नही किया बल्कि भूपेश बघेल सरकार ने भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों को मनगढ़ंत आश्वासन देते हुए यह बताया की आवासीय लिज की रजिस्ट्री भूपेश बघेल सरकार कर रहीं है । नया रायपुर के लिए... बलिवेदी पर चढ़ी किसानों की जमीन... कुछ तो बोलो... .... भूपेश भैय्या… किसानों की अन्नदाता उसकी खेत जमीन तथा "उसकी आत्मा उसका गांव और घर को राज्य शासन ने अधिग्रहित करके आलीशान महलों जैसे उद्यान और अन्य विलासिता वाले मनोरंजन के साधन नया रायपुर में विकसित किए है" लेकिन विस्थापित किसानों को उसके घर और जमीन से बेदखल करने के बाद राज्य शासन ने किसानों के पुनर्वास के लिए कुछ नहीं किया और नया र...

एक आरटीआई आवेदन मे केवल एक विषय की जानकारी मांगियें ? ऐसा क्यों ?

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में किया जाने वाला अनुरोध अर्थात RTI आरटीआई आवेदन केवल एक विषय वस्तु का होना चाहिए ऐसा क्यों ⁉️ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में किया जाने वाला अनुरोध अर्थात RTI आरटीआई आवेदन केवल एक विषय वस्तु का होना चाहिए छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए है उसमे लिखा है कि :-  अनुरोध केवल एक विषयवस्तु से संबंधित हो :-  सूचना के लिये अधिनियम की धारा (6) के अंतर्गत अनुरोध लिखित में एक विषयवस्तु से संबंधित रहेगा एवं वह सामान्यतः एक सौ पचास शब्दों से अधिक नहीं होगा. यदि कोई आवेदक एक से अधिक विषयवस्तु की सूचना चाहता है, तो वह इनके लिये अलग-अलग आवेदन करेगा.                    🎯 परन्तु अनुरोध एक से अधिक विषयवस्तु से संबंधित होने की स्थिति में जन सूचना अधिकारी केवल प्रथम विषयवस्तु के संबंध में उत्तर देगा तथा अन्य प्रत्येक विषयवस्तु के लिए आवेदक को अलग-अलग आवेदन करने हेतु सलाह दे सकेगा. --------------------------------- कब सूचना अधिकारी आपका आवेद...

नए आपराधिक कानूनों की मुख्य विशेषताएँ

नए आपराधिक कानूनों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने वाले प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन कानूनों की मुख्य विशेषताएँ अनुलग्नक में दी गई हैं। जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए , भारतीय न्याय संहिता , 2023 (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता , 2023 (बीएनएसएस) में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं: i. बीएनएसएस की धारा 290 में , आरोपी का अभियोजक के साथ समझौता करना (प्ली बार्गेनिंग) समयबद्ध बनाया गया है और प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन आरोप तय होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर किया जा सकता है।   बीएनएस की धारा 293 के अंतर्गत मामले का पारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटारा करने के लिए , जहाँ अभियुक्त ने पहली बार अपराध किया है और उसे पहले कभी किसी अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है , न्यायालय ऐसे अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित दंड का एक-चौथाई/छठा भाग दंड दे सकता है। ii. बीएनएसएस की धारा 479 में विचाराधीन कैदी को हिरासत में रखने की अधिकतम अवधि निर्धारित की गई है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि जहाँ कोई व्यक्ति पहली बार अपराध करता है (जिसे पहले कभी किसी अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है)...

रोज़गार मेले के तहत 51,000+ नियुक्ति पत्रों के वितरण पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

  नियुक्ति पत्र पाने वाले 50 हजार युवाओं के परिवार के लिए ये मौका दीवाली से जरा भी कम नहीं है। आप सभी ने कड़ी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है। इसके लिए आप सभी मेरे नौजवान साथी विशेषकर हमारी बेटियां बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं। आपके परिवार को विशेष रूप से मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। नमस्कार। रोजगार मेले की ये यात्रा इस महीने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंची है। पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में ही रोजगार मेले की शुरुआत हुई थी। तब से निरंतर केंद्र और एनडीए शासित , भाजपा शासित राज्यों में रोजगार मेले का आयोजन लगातार किया जा रहा है , बार-बार किया जा रहा है। अब तक लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। आज भी 50 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। दीवाली में अभी कुछ ही समय बाकी है , लेकिन नियुक्ति पत्र पाने वाले 50 हजार युवाओं के परिवार के लिए ये मौका दीवाली से जरा भी कम नहीं है। आप सभी ने कड़ी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है। इसके लिए आप सभी मेरे नौजवान साथी विशेषकर हमारी बेटियां बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं। आपके परिवार को विशेष रूप से मेरी तरफ ...

भूपेश का झूठ जीत गया और... प्रेम प्रकाश पांडे का सच... हार गया... ऐसा क्यों हुआ ? यह प्रश्न कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए विचारणीय है क्योंकि दोनों पार्टियों की अंदरूनी खींचतान को यह प्रश्न उजागर करता है... पढ़िए एक पक्षीय पहलू...

भूपेश बघेल ने तीन प्रकार के झूठ बोले और अविश्वसनीय धोखेबाजी की तथा छत्तीसगढ़ में अपना शासन स्थापित करने के लिए हर स्तर पर गड़बड़ियां की...  पहला कार्यकर्ता से झूठ बोला  दूसरा मतदाता से झूठ बोला  तीसरा शासन प्रशासन से बड़ा झूठ बोला और   अपने करीबियों को भी बेहद गुमराह करते हुए ऐसी विषम विधि स्थिति में फंसा दिया जिससे कि उनका राजनीतिक अस्तित्व समाप्ति की दिशा में बढ़ जाए परिणाम स्वरुप भूपेश बघेल के हाथ में पहले कांग्रेस का संगठन आया उसके बाद छत्तीसगढ़ का कांग्रेस शासन भूपेश बघेल हाथ आया और शासन आने के बाद अब भूपेश बघेल के हाथ में कांग्रेस की हाई कमान है जिसके आधार पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपनी मर्जी से हांक सकता है देवेंद्र यादव का सफेद झूठ था या भूपेश बघेल की कुटिल राजनीति थी छत्तीसगढ़ में भाजपा का 15 साल कांग्रेस के लिए राजनीतिक वनवास जैसा था लेकिन इस वनवास को तोड़ते हुए भिलाई के देवेंद्र यादव ने भिलाई महापौर चुनाव जीता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ऊर्जानवित्त करते हुए पुनः सत्ता में आने की उम्मीद जगाई लेकिन भूपेश बघेल इस उम्मीद को अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा क...

राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का विकल्प छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने तैयार कर लिया है… गौरतलब रहे कि, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने अपनी गिरफ्तारी के पूर्व कांग्रेस हाई कमान को कई कूटनीतिक संकेत दिए है… उल्लेखनीय है कि, प्रदेश कांग्रेस दीपक बैज के खेमे ने आरोपी देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के पूर्व अपनी उपस्थिति दल-बल के साथ देकर… कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारियों को यह बता दिया है कि, विगत छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेतृत्व ने राहुल गांधी से भी अधिक प्रभावशील नेतृत्व क्षमता वाले नेता को… भिलाई विधायक के तौर पर विधानसभा में बैठाया है… उसे वर्तमान प्रदेश हाई कमान ने नियंत्रण में कर लिया है… पढ़िए अंदरूनी राजनीतिक पहलू…

पुलिस प्रशासन ने जिम्मेदारी निभाई आमाजिक तत्व हुए हताश दुर्ग जिला प्रशासन द्वारा घर में छिपे आरोपी विधायक को दी गई समझाइश और विधिक कार्यवाही के बाद बलौदाबाजार-भाटापारा जिला प्रशासन ने भिलाई विधायक आरोपी देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी उसके घर से करके… यह बता दिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक विद्वेष पैदा करने वाली मानसिकता से राजनीतिक रोटी सेंकने वाले नेता को… दृढ़ प्रशासकीय इच्छाशक्ति कायम कर उसके घर से विधि अपेक्षानुसार गिरफ्तार किया जा सकता है… ताडफोड जैसी अवांछित घटना का शिकार होने से  बच गई भिलाई इस्पात संयंत्र के आवासीय क्षेत्र की शांति व्यवस्था क्यों घर में छिपा था देवेंद्र यादव… बलौदा बाज़ार ज़िला  ( Baloda Bazar district ) पुलिस का सहयोग कर कांग्रेस के दीपक बैज के खेमा ने बीच बचाव करके घर में छिपे बैठे आरोपी देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी बिना किसी सार्वजनिक नुकसान के करवाई… क्योंकि आरोपी देवेंद्र यादव के द्वारा पुलिस को असहयोग किए जाने पर… छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कोई बड़ा नेता आरोपी देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी को कानून हाथ में लेकर बलात रोकने के लिए आगे आना नहीं चाहता ...

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और असंगठित श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप पात्र असंगठित श्रमिकों के बच्चों के लिए शैक्षिक सहायता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार किया है।

  ये सुधार समावेशी सामाजिक सुरक्षा के लिए कल्याणकारी और योग्यता-आधारित छात्रवृत्तियों का संयोजन सुनिश्चित करेंगे , असंगठित श्रमिकों के आश्रितों के लिए शिक्षा संबंधी सहायता सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 के अनुरूप सुदृढ़ की गई मंत्रालय कल्याणकारी श्रम कल्याण योजना (शिक्षा घटक) का संचालन करता है , जिसका नाम है , " बीड़ी/सिने/लौह , मैंगनीज और क्रोम अयस्क (आईओएमसी)/चूना पत्थर और डोलोमाइट अयस्क (एलएसडी)/अभ्रक खदानों के श्रमिकों के बच्चों को मैट्रिक से पहले और बाद की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता"। यह योजना आर्थिक परेशानियों को कम करने और निर्बल श्रमिक परिवारों में शिक्षा की निरंतरता को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। यह योजना आवश्यकता-आधारित है और इसमें कोई योग्यता मानदंड निर्धारित नहीं है। मंत्रालय समानता को बढ़ावा देने , अनपेक्षित भेदभावों को दूर करने और नीतिगत स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए योजना के दिशानिर्देशों के संबंधित प्रावधान में उपयुक्त संशोधन करेगा। संशोधित दृष्टिकोण से मंत्रालय की कल्याणकारी छात्रवृत्ति का लाभ उठाने वाले छात्र , यदि पात्र हैं , तो किसी भी केंद्रीय य...

कोव्हीशील्ड लसीच्या पहिल्या आणि दुसऱ्या मात्रेमधील अंतर 12 ते 16 आठवड्यांपर्यंत वाढविण्याची कोविड कार्यकारी गटाची ही शिफारस मान्य केली आहे.

कोविड कार्यकारी गटाच्या सल्ल्यानुसार कोव्हीशील्ड लसीच्या दोन मात्रांमधील अंतर 6-8 आठवड्यांपासून 12-16 आठवड्यांपर्यंत वाढविण्यात आले Release Ministry of Health and Family Welfare कोविड कार्यकारी गटाच्या सल्ल्यानुसार कोव्हीशील्ड लसीच्या दोन मात्रांमधील अंतर 6-8 आठवड्यांपासून 12-16 आठवड्यांपर्यंत वाढविण्यात आले Posted Date:- May 13, 2021 नवी दिल्ली, 13 मे 2021 डॉ. एन. के. अरोरा यांच्या अध्यक्षतेखालील कोविड कार्यकारी गटाने, कोव्हीशील्ड लसीच्या पहिल्या आणि दुसऱ्या मात्रेमधील अंतर 12 ते 16 आठवड्यांपर्यंत वाढवण्याची शिफारस केली आहे. कोव्हीशिलड लसीच्या दोन मात्रांमधील विद्यमान अंतर 6-8 आठवडे आहे. विशेषतः ब्रिटनमधील उपलब्ध वास्तववादी पुराव्यांच्या आधारे, कोविड -19 कार्यकारी गटाने कोव्हीशिल्ड लसीच्या दोन मात्रांमधील अंतर 12-16 आठवड्यांपर्यंत वाढवण्यासाठी सहमती दर्शविली. कोविड कार्यकारी गटात खालील सदस्यांचा समावेश आहे: 1 . डॉ एन के अरोरा,संचालक ,आयएनसीएलएएन ट्रस्ट 2 . डॉ. राकेश अग्रवाल , संचालक आणि अधिष्ठाता , जीआयपीएमईआर, पुडुचेरी 3. डॉ. गगनदीप कांग, प्राध्यापक, ख्रिश्चन वैद्यकी...

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