आपके बच्चों को लॉक डाउन के दौरान घरों में बंद रहने से हो रहा है मानसिक कष्ट थोड़ा इस विषय पर भी विचार करिए
घरों में बंद बच्चों की मनोदशा का … संज्ञान लेने वाले प्राधिकारी आखिर कौन है ?
चॉकलेट और चिप्स कि दुकानों को आखिर क्यों बंद कर दिया गया है कैसे समझेंगे बच्चे ?
दोस्त से मिलने जुलने पर भी किसने और क्यों पाबंदी लगा दी गई है बच्चों को कौन स्पष्टीकरण देगा ?
स्कलों और खेल मैदान में जाने का अधिकार छीन लिए जाने का कारण क्या है कौन बच्चों को बताएगा ?
घरों में बंद बच्चों का सामाजिक व्यवस्था से परिचय कैसे होगा ?
वर्तमान स्थिति में कोरोनावायरस प्रकोप ने विश्व की सभी सरकारों और शासन व्यवस्थाओं को घुटने टिकवा दिए है इस बीच अफवाहों का बाजार भी गर्मा रहा है आम जनता आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य चिंताओं से ग्रसित है लोगों का सामाजिक तालमेल कभी भी बिगड़ने के ख़तरे की सीमा पर पहुंच गया है वगैरे - वगैर इस प्रकार की कई विश्वव्यापी चिंताओं ने हमे जकड़ रखा है लेकिन इस बीच हम उन बच्चों की मनोदशा पर बात करना और कोई सकारात्मक विचार करना भूल गए है जो अपने है घरों में इस विपरित परिस्थितियों में फसें हुए है बच्चो को घरों से बाहर निकलने की आजादी स्वास्थ्य दृष्टिकोण से बाधित है स्कूल जाकर सामाजिक गतिविधि को समझने का अवसर बच्चों से छीन गया है और इस गंभीर समस्याओं को हम जाने अनजाने नजरंदाज कर रहे है ऐसा क्यों हो रहा है ?
अपने ही घरों में बंद रहकर आर्थिक तंगी का सामना करने को मजबूर अभिभावक अपने व्यवसाय और रोजगार को प्रत्येक तालाबंदी दिवस के साथ गर्त मे जाता देख रहे है एक तरफ उद्योगपति और व्यवसाई अपने व्यवसाय में होने वाले घाटे का आकलन करके बेहद घबराएं हुवे है तो वहीं दूसरी ओर नौकरीपेशा लोग अपने नियोक्ता की बिगड़ती आर्थिक हालत और हाथ से जाती नौकरी के कारण अवसाद का शिकार हो रहे है जिसका विपरित असर उनके बच्चों पर भी पड़ रहा है क्योंकि उनकी बाल अवस्था यह समझने में नाकाम है कि उनके अभिभावक किस मानसिक तनाव पूर्ण दशा में है और परेशानियों से जूझते हुवे अपना आपा खोकर अपने ही घरो में असामाजिक और अमानवीय तरीके से पेश आने वाले हैं प्रत्येक परिवार का आपसी मानसिक तालमेल गड़बड़ाया हुआ है और बच्चों को अजीब से हालातों को जूझने पर मजबूर कर रहा है
डिजिटल स्क्रीन से झाकते शिक्षक और ज्ञान दाता अध्यापक कहीं बच्चों का मानसिक संतुलन तो नहीं बिगाड़ देंगे ?
अभीस्कूल संचालक स्कूल फीस वसूलना के एक मात्र साधन ऑनलाईन शिक्षा के नाम पर बच्चों को मानसिक तनाव के हवाले कर रहे है गौर तलब रहे कि बच्चों को मोबाइल लेने पर डाटने वाले माता पिता लॉक डाउन के बाद निजी शाला संचालकों के दबाव के कारण बच्चों को मोबाइल देकर ऑनलाईन शिक्षा लेने को मजबूर कर रहे है जबकि सभी जानते है कि ऐसी विपरित परिस्थितियों में बच्चो के बाल अवस्था का अपरिपक्व मस्तिक्ष यह समझ पाने में सक्षम नहीं है कि उनके माता पिता अचानक क्यों बदल गए है या कि मामल कुछ और है अब हालात ये है कि जो बच्चे मोबाइल को हाथ लगाने पर परिवारजनों से मार और डांट खाते थे उन्हीं बच्चों को उनके परिवार वाले दबाव बनाकर ऑनलाईन शिक्षा लेने को मजबूर कर रहे है वहीं दूसरी ओर डिजिटल स्क्रीन से झांकते शिक्षक बच्चों को उन्हीं के घर में यह अहसास करवा रहे है कि घरों में बंद बच्चो के एकाधिकार पर अब शिक्षक भी हिस्सेदार है जो बच्चों को उनके साथी छात्रों से बातचीत करने का अवसर भी नहीं देता है इसलिए हमारी अस्त व्यस्त व्यवस्था बच्चों को त्रासदी पूर्ण मानसिक तनाव दे रहे है