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मेरा दृष्टिकोण:- छल कपट के आरोपी पक्षकार शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गयी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विधिक मुद्दों के आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार में महिर्षि महेश योगी के ट्रस्ट SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India की बलौदाबाजार स्थित दो जमींनों को गलत तरीके से रजिस्ट्री कर के हड़पने के आरोपित मामले में जिला सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने सुनवाई कर इन दोनों आरोपियों शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल को आरोपी बताते हुए इनके विरुद्ध में क्रिमिनल धाराएं 419, 420, 465, 467, 468, 471, 16, 212, 217 & 120B इंगित करते हुए दिनांक 10-11-2014 एवं 22-11-2014 को निर्णय जारी करते किया और निर्देशित किया की स्थानीय पुलिस स्टेशन बलौदाबाजार में FIR दर्ज करने का आदेश दिया इसके पश्चात आरोपियों ने अपना प्रभाव दिखाकर तथा भ्रमित करने वाले चार अलग-अलग आवेदन देकर पुनरीक्षण केस को हाई कोर्ट बिलासपुर में दाखिल करवाया जिसमे हाई कोर्ट बिलासपुर ने तथाकथित तौर पर बिना तथ्यों की जाँच करते हुए FIR को निरस्त करने का आदेश नौ साल बाद दिनांक 09-08-2023 को कर दिया था।

 हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है और मार्गदर्शक निर्णय देकर... संस्थागत मामलों के अपराधिक कृत्यों पर की जाने वाली पुलिस कार्यवाही पर विधिक प्रकाश डाला है....

आरोपियों के द्वारा हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष क्रिमिनल (Criminal) केस को दीवानी (Civil) केस दिखाकर निरस्त करवा लिया गया था लेकिन SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India के प्राधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए क्राइम केस न:- 486 /2014 के संबंध में दिनांक 22-10-2024 को सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त करके खारिज करवाया और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को दोबारा इस केस के तथ्यों को पुनः जाँच कर के क्रिमिनल केस की समूर्ण विवेचना करने का न्यायालयीन परामर्श दिलवा दिया है।



भ्रामक जानकारी के आधार पर आरोपियों ने प्राप्त किया विधि विरुद्ध लाभ  

आरोपियों ने हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से लंबित मामले का सम्पूर्ण लाभ उठाते हुए लोकल पुलिस से इस केस की विवेचना एवं चार्जशीट किया है क्या यह लंबित चार्जशीट कार्यवाही से स्पष्ट होगा । उल्लेकनीय है कि आरोपियों के विरुद्ध ऐसे ही आपराधिक कृत्यों से मिलता जुलता केस भिलाई के व्यवसाई अजय अग्रवाल की कंपनी EBPL Ventures Pvt  Ltd की FIR क्रमांक:- 0241/2024 दिनांक 07-03-2024 को सुपेला थाना भिलाई में दर्ज किया गया है जिसमे आरोपीगण शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल के ऊपर धाराएं 420,467,468,471 & 120B के तहत जुर्म कायम हुआ था।  इस केस में भी आरोपियों ने पुलिस और माननीय न्यायालय को गुमराह किए जाने का अभिलिखित आरोप लंबित है ।

भिलाई के सुपेला थाने और बलौदा बाजार पुलिस प्रकरण के आरोप-करीब-करीब एक जैसे हैं !

भिलाई और बलौदा बाजार के दोनो क्रिमिनल केसेस संबंधित जिला न्यायालय के समक्ष धारा 156(3) के तहत पेश किए गए थे जिस पर आवेदन का सम्पूर्ण संज्ञान लेते हुए जिला न्यायालय दुर्ग एवं जिला न्यायालय बलौदाबाजार के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश के तहत FIR दर्ज की गयी थी।  आरोपियों के पैसों के दवाव में और पहुँच के कारण दोनों क्रिमिनल केसेस में वकीलों से मिलकर एक भ्रामक कार्यप्रणाली अपनाते हुए दोनों केसेस में आरोपियों को जमानत मिल जाना जांच का विषय है एवं हाई कोर्ट से केसेस को रद्द (Quash) करवाने के तरीके को नियम विरुद्ध कार्य शैली से क्रियान्वन आरोपी करवाते आयें है। भिलाई वाले केस में भी वैसी ही कार्यप्रणाली अपनाते हुए आरोपियीं ने हाई कोर्ट में आवेदन दिया और पुलिस विभाग ने समापन रिपोर्ट (Closure report) देते हुए इन अर्रोपियों के केस को सिविल मामला बताते हुए क्रिमिनल FIR को ख़ारिज कर दिया। 

क़ानूनी प्रक्रिया के प्रति सतर्क है भिलाई का शिकायतकर्ता पक्ष..!

भिलाई के व्यवसाई एवं शिकायतकर्ता  अजय अग्रवाल को आरोपियों के शातिराना कार्य व्यवहार का अंदेशा पहले ही हो गया था इसलिए व्यवसाई अजय अग्रवाल ने पहले ही माननीय CGM कोर्ट दुर्ग में आवेदन देकर पुलिस की  समापन रिपोर्ट को गलत इंगित करते हुए माननीय CGM कोर्ट में दरख़ास्त एवं तर्क संगत दस्तावेजीक प्रमाण नियमानुसार जमा कर दिए है परिमाण स्वरूप सुनवाई अभी जारी है।  

क्या हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ के समक्ष अपूर्ण व भ्रामक जानकारी देते हैं आरोपी ?

भिलाई और बलौदा बाजार दोनों प्रकरणों से यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि जिला न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश को चुनौती देकर आरोपीगण हाई कोर्ट से अपना बचाव कर लेते है परन्तु यह भी बढ़ी अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट आरोपियों की शातिर कार्य शैली को विधिक तथ्यों के आधार पर समझतें हुए न्यायहित का संरक्षण कर हाई कोर्ट के फैसले को पलट देती है एवं जिला कोर्ट में  धारा 156(3) के तहत हुए आदेश को संज्ञान लेते हुए सलाह देती है की सम्पूर्ण जाँच कर केस की गहराई तक जाँच एवं  विवेचना कर के आरोपियों पर केस तय करे जबतक आरोपियों को गिरफ्तार से छुट दी गई है ।  

सुप्रीम कोर्ट अनुभव एवं बुद्धिमता के आधार पर क़ानूनी विसंगतियों एवं सुनियोजित और बनावटी गड़बड़ियों को पकड़ लेता है |

अन्तोत्गतवा इस लेख का सारभूत विषय यह है कि लंबी क़ानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग कर समाज के वैभवशाली एवं रसूक वाले लोग आपराधिक कार्य करते है और अपने ऊपर कार्यवाही भी नहीं होने देते है लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट में होता है तो अनुभवी न्यायालय न्यायहित सुनिश्चित करवाने वाली कार्यवाही करता है ।

धोखाधड़ी और भ्रमित करने वाली जानकारी देकर आरोपी जवाबदेही से आखिर कब तक बचेंगे..? 

आरोपी शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल के साथ NUVOCO कंपनी के उच्च अधिकारी अमित पीडीया जैसे छत्तीसगढ़ में कंपनी जगत से जुड़े बड़े नाम चर्चा में आ गए है क्योंकि DHPPL के डायरेक्टर अजय अग्रवाल द्वारा धोखाधड़ी, कुटरचना, छलरचित दस्तावेज बनाने के षड्यंत्र पूर्वक कार्याचरण की शिकायत पर माननीय न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश मार्दिच 2024 को दिए है….

व्यथित व्यवसाई के अधिवक्ता गण आरोपियों के द्वारा परिवाद कार्यवाही में भ्रम उत्पन्न करने वाले दांव-पेंच के विरुद्ध तथ्य पूर्ण क़ानूनी स्पष्टीकरण दे रहें है  

ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी DHPPL के प्रति अपराधिक कृत्य करने वाले आरोपियों के विरुद्ध भिलाई के व्यवसाई की शिकायत अक्रटूबर 2022 में की जिस पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से व्यथित व्यवसाई ने आरोपियों के विरुद्ध जिला न्यायालय दुर्ग के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी दुर्ग के समक्ष जनवरी 2023 में अपने अधिवक्ता सोहन शर्मा एवं सुदेश पेटे के माध्यम से पेश किया जिस पर संज्ञान लेकर माननीय न्यायालय ने न्याय सम्मत आदेश देकर आरोपियों के विरुद्ध मार्च 2024 फआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया है ।

यह लेख, विधि व्यवसाईयों लिए कंपनी मामलों का विश्लेषण करता है

ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी DHPPL के प्रति अपराधिक कृत्य करने वाले आरोपियों के द्वारा न्यायालयीन कार्यवाहियों में कोई गए सुनियोजित एवं अनियमित कार्य शैली को उजागर करता है इसलिए अगर आप भी कंपनी मामलों के विधिक पहलुओं को जानना चाहते है तो यह लेख… कंपनी मामलों के विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाला हैं….

सामान्य दृष्टिकोण से आरोप क्या है ? इस पर थोडा प्रकाश डालते हैं |

आरोपी पक्षकारो के विरुद्ध ये आरोप हैं कि उन्होंने DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD. COMPANY की बैलेंसशीट में संचय (reserves) कि हुई राशि रु 1,82,44,593 को हड़पने के उद्देश्य से फर्जी ट्रको की परिवहन बिल की कूट रचना करके षड्यंत्र पूर्वक उक्त राशि को आरोपी की कंपनी (DURGA CARRERS  PVT. LTD) के बैंक खाते में रकम अनियमित कार्य व्यवहार कर बैंक ट्रांसफर कर दिया गया है।

शिकायत अनुसार आरोपित गबन राशि को आरोपी ने कैसे खाताबही में ट्रांसफ़र किया गया था ? जान लीजिए !

छल और कुट रचित परिवहन बिल लगाकर आरोपित गबन राशि आरोपियों द्वारा कपट पूर्वक कार्य व्यवहार कर आहरित की गई | गौरतलब रहे कि, लगभग 24,000 ट्रको की ट्रिप में कंस्ट्र्रक्शन साइट का कचरा ढुलाई का बिल तथाकथित तौर पर लगाया गया, जिसमे मुख्यतः रेलपांत के टूटे हुए टुकड़े होने का विवरण दिया हुआ है | 

व्यवसायिक दृष्टिकोण से तर्क संगत क्यों नही माना जा सकता है “यह बिल” ?

एक ट्रक की भार-क्षमता अगर 10 टन भी होती है, तो 24,000 ट्रको के कुल स्केप का भार (टनऐज) लगभग  2,40,000 टन होगा | इस लौह-स्क्रैप का बाजार मूल्य 30,000 रु टन के हिसाब से अनुमानित 720 करोड़ होना चाहिए | तर्क है की : गौरतलब रहे कि, कुल 26 km नई रेल-लाइन बिछाने का L&T कंपनी द्वारा दिया गया ठेके का मूल्य 70 करोड़ रु था तो 720 करोड़ का स्क्रैप मूल्य कैसे हो सकता है ?

उत्पादन मानकों के अनुसार खाता बही में दर्शित लोहे की मात्र कितनी होनी चाहिए !

सम्पूर्ण 26 KM नई रेललाइन मैं रेलपांत की कुल मात्रा 26 X 2 =52 KM (52,000m) की होती हैं | 1 मीटर रेलपांत का वजन 60 किलो प्रति मीटर (60kg/m) होता है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau Of Indian Standards) द्वारा प्रमाणित है और पूरे भारतवर्ष में इसी मानक के आधार पर रेलपांत  का उत्पादन बड़ी इस्पात उद्योग कंपनियों जैसे कि भिलाई स्टील प्लांट, जिंदल स्टील प्लांट इत्यादि करती है। 

खाता बही में किए गए गबन अनुसार  परिवहन किए गए स्क्रैप का बाजार मूल्य पूरी कहानी बयां करता है !

उपरोक्त 52000 मीटर को 60 किलोग्राम प्रति  मीटर से गुना करेंगे तो कुल वजन 31,20,000 किलोग्राम आता है जो कि अगर मीट्रिक टन में बदले तो यह वजन 3120 मीट्रिक टन होता है (क्योंकि एक मीट्रिक टन मतलब 1000 किलोग्राम होता हैं |) इस 3120 मीट्रिक टन की नई रेलपांत का बाजार मूल्य रू 70,000 प्रति टन हैं l

जिससे पूरी रेल लाइन का कार्य करने में संपूर्ण रेलपांत का वजन  3120 मीट्रिकटन X रु 70000 /- टन= रू 21,84,00,000 (लगभग 22 करोड़ करोड़) 

तर्क : इतनी बड़ी राशि के मूल्य 720 करोड़ का लोहा स्क्रैप कहां है ? किसके गोदाम में रखा गया है ? 

आरोपिगणों ने लौह स्क्रैप  की मात्रा को 24000  ट्रैकों की ट्रिप से परिवहन करना दर्शाया है, जो की अत्यंत ज्यादा प्रतीत होता है इसलिए  मनगढ़ंत है चुंकि 24000 ट्रैकों की ट्रिप X 10 टन = 2,40,000 मीट्रिक टन का लौहस्क्रैप के उत्पन्न होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठाता है। इसलिए ऊपर दी गई गणना से स्पष्ट होता है कि यह की आरोपियों ने फर्जी ट्रांसपोर्टेशन बिल बना कर उसका समायोजन (कुल योग ) अनियमित तरीके से धोखा देने की नियत से षडयंत्र पूर्वक करके पैसा हड़पने की साजिश साफ स्पष्ट दिखाई देती है।

समयावधि के दृष्टिकोण से भी समायोजित परिवहन बिल राशि फर्जी है होना दर्कशित करती है ।

गौर तलब रहे की L & T कंपनी का 70 करोड़ का कार्य, 19 सितंबर 2014 में समाप्त हो चुका था, जिसका कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र  L & T कंपनी में जून 2015 में जारी कर दिया था, जब कार्य 2014 में संपूर्ण हो चुका था तो 2017, 2018  और  2019  में रेलपाथ के टूटे टकड़े  वो  भी 2,40,000 टन पूर्णतः मन घडंत है और सिर्फ DHPPL  कंपनी के बैलेंससीट में बची हुई राशि को हड़पने की साजिश एवं रणनीति थी | जिसे परिवाद में किए गए आरोपों अनुसार अंजाम दिया गया है क्योंकि सामान्य धारणा के अनुसार रेलवे का सम्पूर्ण कार्य समाप्त होने का तात्पर्य यही हैं कि कंस्ट्रक्शन साइट पर कोई भी स्क्रैप कचरा शेष नहीं हैं, उसके बाद ही मालगाड़ी बिजली इंजन (ELECTRICAL LOCO) से आवागमन कर पाती हैं |

ठेका कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के बाद परिवहन बिल !  कैसे संभव है ?

रेललाइन  बिछाने  एवं सिविल वर्क  का कार्य L & T कंपनी  के द्वारा  DHPPL  कंपनी को सन 2010 में दिया गया था इसलिए  DHPPL  कंपनी  की सारी जिम्मेदारी  L & T कंपनी के कर्य समाप्त करने के बाद खत्म हो जाती  है। इससे यह साफ स्पष्ट होता है कि कूटरचित परिवहन बिल बनाने का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ और सिर्फ 1,82,44,593 रु हड़प करने का षड्यंत्र जिसमें NUVOCO कंपनी के  उच्च अधिकारी श्रीमान अमित पीडीहा (Amit Pidiha)  को भी आरोपियों ने अपने इस षड्यंत्र में सम्मिलित कर लिया जिसके कारण उन्होंने कचरा ( रेलपाथ के टुकड़े ) का कार्य ( जो हुआ ही नहीं है ) को सत्यापित करते हुए आरोपियों के षड्यंत्र में भागीदार बन गये।   NUVOCO कंपनी  के MD को  रजिस्टर्ड ऑफिस मुंबई में लीगल नोटिस  और पत्राचार करके EBPL VENTURES PVT LTD के डायरेक्टर अजय अग्रवाल ने स्पष्टीकरण मांगा जिसका गोल-मोल जवाब दिया गया जो सत्य से परे था और गबन राशी के विषय में अनभिज्ञता जाहिर की गई तथा 720 करोड़ के स्क्रैप के बारे हमें कुछ भी मालूम नहीं है कहा गया |

कंपनी सीए को आरोपी बनाए जाने का आधार भी तर्क संगत है !

इस बात  से पूणतः स्पष्ट है कि 1,82 44,593 रु निकालने के लिए आरोपियों ने कूटरचित बिल दस्तावेजो बनाते हुए धोखाधड़ी करते हुए 50% पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD. को हानि पहुंचाई हैं, इस कूटरचित बिल दस्तावेजों को बना कर सन 2019-20 की ऑडिट रिपोर्ट में अनियमित कार्य व्यवहार से नियुक्त नए चार्टेड-अकॉउंटेट नीरज बेध रायपुर से दस्तावेज को प्रमाणित करवा लिया | नए ऑडिटर नीरज बेध की नियुक्ति पुराने ऑडिटर के बिना NOC के एवं 50%  पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD. के बिना अनुमति के  DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD. COMPANY में ऑडिटर बना कर कूटरचित बिल दस्तावेज को सही करवा कर MCA (MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS) की सरकारी वेबसाइट में अपलोड कर दिया गया था जिसे डाउनलोड करके 50%  पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD ने संज्ञान लिया और सुपेला थाने में OCT’ 2022 को शिकायत दर्ज करवाई |

अपराधिक व्यवसायिक गतिविधि जो की खाताबाही में किए गए गबन आरोप आधारित है इस अपराध पर की गई अनियमित पुलिस कार्यवाही का विधिक आधार क्या है ?

पुलिस थाना सुपेला के द्वारा पुलिस शिकायत पर करवाई नहीं करने के पश्चात JAN’ 2023 में न्यायिक दण्डाधिकारी (JMFC) कोर्ट दुर्ग में धारा 156(3) के तहत  याचिका दायर करके माननीय न्यायालय में 4 march  2024 को याचिका को सही पाते हुए आदेश पारित किया कि 6 आरोपियों पर FIR करते हुए धारा 420, 467,468,471 &120B के तहत मामला दर्ज़ किये जावें  |  ऐसा विधि सम्मत आदेश पारित किया गया है ।

धोखाधड़ी कुटरचना छलरचित दस्तावेज जैसे गंभीर और पुलिस संज्ञान के अपराध की शिकायत पर लंबित है मामला  !

कंपनी अपराध के आरोप को विधि द्वारा किस धारा में परिभाषित किया गया है और माननीय  न्यायालय द्वारा धारा 420,467,468 & 120B लगाते हुए धोखाधड़ी कुटरचना छलरचित दस्तावेज बनाते हुए षड़यंत्र पूर्वक सभी 6 अरोपियों ने मिल कर 1,82,44,593 रु हड़पने के उद्देश्य से अपराधिक कार्य को अंजाम दिया गया है वर्तमान में यह पुलिस के जांच का विषय है । 

न्यायालयीन कार्यवाही में आरोपी अपना पक्ष प्रस्तुत करने में कैसे कठिनाई महसूस करेंगे ?

न्यायालय में आरोपियों को अपना पक्ष रखने में दिक्कत  होने का कारण  ये है कि कुटरचित एवं छलरचित दस्तावेजों  को  बनाने  के  बाद अब उसमे कोई भी सुधार की  गुंजाईश नहीं है | तथा कथित तौर पर उठाये गया कचरा (लौह स्केप) का परिवहन बिल जो आरोपी प्रस्तुत कर रहे हैं उस स्केप का बिक्री मूल्य जो कि लगभग 700 करोड़ रु से ज्यादा होता  है, उस पैसे का आरोपियों ने कहाँ उपयोग किया और पैसे किस बैंक खाते में आये तथा किस पार्टी को  स्क्रैप  बेचा गया | जैसे सवालों का जब आरोपी पक्षकारों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की विधिक बाध्यता वर्तमान में बनी हुई है ।

शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल कंपनी से त्यागपत्र देकर क्या अपने कर्मचारियों को गबन का आरोपी साबित कर बच जायेंगे ?

इस आपरधिक कार्य करने के पूर्व में DHPPL (DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD.) के दो डायरेक्टर एवं अरोपीगण (शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल ) ने सत्र JAN 2019 में त्यागपत्र देकर कंपनी DHPPL  में अपने तीन मुलाजिमों को कंपनी DHPPL में नये डायरेक्टर  के  रूप में नियुक्त कर दिया जिसमें 50% पार्टनरशिप कंपनी  EBPL VENTURES  PVT. LTD के डायरेक्टर  से कोई सहमति नहीं ली गई  |

आरोपी गण पुलिस जाँच में गलत बयां कर रहें है और कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश कर रहें है |

उक्त कंपनी मामलों का विश्लेषण होगा जैसे की DHPPL (DURGA HITECH PROJECT PVT. LTD.) की 50% पार्टनरशिप  EBPL VENTURES  PVT. LTD ने कंपनी DHPPL में उत्पीड़न एवं क्रुप्रबंधन होने के कारण NCLT नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल कटक में OCT 2022 में याचिका दायर कर DHPPL के प्रबंधन में अनियमितताओं  को उजागर करते हुए माननीय ट्रिब्यूनल से संज्ञान लेने की गुजारिश की, जिसमें माननीय ट्रिब्यूनल का निर्णय अभी  लंबित हैं  |    

जुलाई 2024 में हाई कोर्ट बिलासपुर ने आरोपी गण की FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया था क्योकि पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी, जिसके विरुद्ध शिकायतकर्ता ने पुलिस द्वारा शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण तत्पश्यत जारी की गई क्लोजर रिपोर्ट के विरुद्माध ननीय CJM कोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी जिस पर सुनवाई चल रहीं है ?  

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नोट : उक्त मामले में निजी तौर पर तृतीय पक्षकार के तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालूसरे हैं ने एक नोटिस आरोपियों से वस्तुस्थिति जानने के लिए दी है जिसका विवरण इस लिंक पर है 👇👇👇 

https://meradrushtikon.blogspot.com/2024/06/blog-post.html




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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

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भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

आयकर अधिनियम, 2025 (1 अप्रैल, 2026) से लागू हुआ, आयकर अधिनियम, 2025, भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार है।

आयकर अधिनियम , 2025 आज ( 1 अप्रैल , 2026) से लागू हुआ आयकर अधिनियम , 2025, भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार है। यह देश के आयकर कानून को सरल और आधुनिक बनाने का एक व्यापक प्रयास है , जो छह दशक पुराने आयकर अधिनियम , 1961 की जगह लेता है। यह अधिनियम मूल कर नीति में बदलाव किए बिना , सरल भाषा , सुव्यवस्थित संरचना और पाठक-अनुकूल प्रस्तुति के माध्यम से अधिक स्पष्टता और अनुपालन में सुगमता की ओर एक बदलाव का प्रतीक है। यह विधेयक संसद द्वारा 12 अगस्त , 2025 को पारित किया गया था और 21 अगस्त , 2025 को इसे भारत के माननीय राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई , जिसके परिणामस्वरूप यह ' आयकर अधिनियम , 2025' बन गया। (राजपत्र अधिसूचना – आयकर अधिनियम , 2025) नए अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए , केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा 20 मार्च , 2026 को ' आयकर नियम , 2026' अधिसूचित किए गए। (राजपत्र अधिसूचना – आयकर नियम , 2026) । इससे संबंधित नए प्रपत्र भी अधिसूचित कर दिए गए हैं। अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से , इन प्रपत्रों को सरल , मानकीकृत और उनकी प्रक...

शासकीय कार्यालयों तथा उनके अंतर्गत निगम, मंडल, अधिकरणों एवं एन.जी.ओ. की जानकारी एवं मैनुअल इत्यादि राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र (NIC) को तत्काल उपलब्ध कराएं तथा उसकी सूचना सामान्य प्रशासन विभाग (सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ) को भेजना सुनिश्चित करें।

छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय विभागों के लिए स्पष्ट निर्देश है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी का इंटरनेट स्व-सक्रिय प्रकटीकरण हेतु प्रत्येक विभाग, अपने अधीनस्थ समस्त कार्यालयों तथा उनके अंतर्गत निगम, मंडल, अधिकरणों एवं एन.जी.ओ. की जानकारी एवं मैनुअल इत्यादि राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र (NIC) को तत्काल उपलब्ध कराएं  जानिए क्या लिखा है आदेश मे … इंटरनेट पर स्वप्रेरणा से प्रकटीकरण विषय :- सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत विभागीय जानकारी का इंटरनेट पर स्व-सक्रिय प्रकटीकरण । संदर्भ :- इस विभाग का पत्र क्रमांक एफ 7-6/2005/1/6, दिनांक 16.09.2005 एवं दिनांक 07.11.2005 इस विभाग के उपरोक्त संदर्भित परिपत्र द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रत्येक कार्यालय के विभागीय मैनुअल पीडीएफ फारमेट में तैयार करके शासन की वेबसाइड पर राष्ट्रीय सूचना केन्द्र छप्द्र के माध्यम से उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दिये गये है, ताकि शासन के समस्त कार्यालयों द्वारा जारी नियम/निर्देशों की जानकारी / सूचना सीधे आम जनता/पणथारियों (Stakeholders) को स्व-सक्रिय प्रकटीकरण (Proacti...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

योजना - अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को डिजिटाइज़ करने और मजबूत बनाने के लिए पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल ऐप का शुभारंभ

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को डिजिटाइज़ करने और मजबूत बनाने के लिए पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया पीएम-अजय पोर्टल के माध्‍यम से आदर्श ग्राम , जीआईए और छात्रावास के लिए वास्तविक समय की निगरानी , पारदर्शी शासन और निधि प्रवाह सक्षम हो सकेगा   केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन के लिए ' पीएम-अजय ' पोर्टल और पीएम-अजय मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य कागज आधारित कार्य प्रणाली और प्रसंस्करण से पूर्णतः डिजिटल कार्य प्रणाली और वास्तविक समय के आधार पर प्रसंस्करण में परिवर्तन करना है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा , सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत और सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। सभी राज्यों और केंद्र शा...

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