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मेरा दृष्टिकोण:- छल कपट के आरोपी पक्षकार शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गयी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विधिक मुद्दों के आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार में महिर्षि महेश योगी के ट्रस्ट SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India की बलौदाबाजार स्थित दो जमींनों को गलत तरीके से रजिस्ट्री कर के हड़पने के आरोपित मामले में जिला सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने सुनवाई कर इन दोनों आरोपियों शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल को आरोपी बताते हुए इनके विरुद्ध में क्रिमिनल धाराएं 419, 420, 465, 467, 468, 471, 16, 212, 217 & 120B इंगित करते हुए दिनांक 10-11-2014 एवं 22-11-2014 को निर्णय जारी करते किया और निर्देशित किया की स्थानीय पुलिस स्टेशन बलौदाबाजार में FIR दर्ज करने का आदेश दिया इसके पश्चात आरोपियों ने अपना प्रभाव दिखाकर तथा भ्रमित करने वाले चार अलग-अलग आवेदन देकर पुनरीक्षण केस को हाई कोर्ट बिलासपुर में दाखिल करवाया जिसमे हाई कोर्ट बिलासपुर ने तथाकथित तौर पर बिना तथ्यों की जाँच करते हुए FIR को निरस्त करने का आदेश नौ साल बाद दिनांक 09-08-2023 को कर दिया था।

 हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है और मार्गदर्शक निर्णय देकर... संस्थागत मामलों के अपराधिक कृत्यों पर की जाने वाली पुलिस कार्यवाही पर विधिक प्रकाश डाला है....

आरोपियों के द्वारा हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष क्रिमिनल (Criminal) केस को दीवानी (Civil) केस दिखाकर निरस्त करवा लिया गया था लेकिन SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India के प्राधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए क्राइम केस न:- 486 /2014 के संबंध में दिनांक 22-10-2024 को सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त करके खारिज करवाया और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को दोबारा इस केस के तथ्यों को पुनः जाँच कर के क्रिमिनल केस की समूर्ण विवेचना करने का न्यायालयीन परामर्श दिलवा दिया है।



भ्रामक जानकारी के आधार पर आरोपियों ने प्राप्त किया विधि विरुद्ध लाभ  

आरोपियों ने हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से लंबित मामले का सम्पूर्ण लाभ उठाते हुए लोकल पुलिस से इस केस की विवेचना एवं चार्जशीट किया है क्या यह लंबित चार्जशीट कार्यवाही से स्पष्ट होगा । उल्लेकनीय है कि आरोपियों के विरुद्ध ऐसे ही आपराधिक कृत्यों से मिलता जुलता केस भिलाई के व्यवसाई अजय अग्रवाल की कंपनी EBPL Ventures Pvt  Ltd की FIR क्रमांक:- 0241/2024 दिनांक 07-03-2024 को सुपेला थाना भिलाई में दर्ज किया गया है जिसमे आरोपीगण शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल के ऊपर धाराएं 420,467,468,471 & 120B के तहत जुर्म कायम हुआ था।  इस केस में भी आरोपियों ने पुलिस और माननीय न्यायालय को गुमराह किए जाने का अभिलिखित आरोप लंबित है ।

भिलाई के सुपेला थाने और बलौदा बाजार पुलिस प्रकरण के आरोप-करीब-करीब एक जैसे हैं !

भिलाई और बलौदा बाजार के दोनो क्रिमिनल केसेस संबंधित जिला न्यायालय के समक्ष धारा 156(3) के तहत पेश किए गए थे जिस पर आवेदन का सम्पूर्ण संज्ञान लेते हुए जिला न्यायालय दुर्ग एवं जिला न्यायालय बलौदाबाजार के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश के तहत FIR दर्ज की गयी थी।  आरोपियों के पैसों के दवाव में और पहुँच के कारण दोनों क्रिमिनल केसेस में वकीलों से मिलकर एक भ्रामक कार्यप्रणाली अपनाते हुए दोनों केसेस में आरोपियों को जमानत मिल जाना जांच का विषय है एवं हाई कोर्ट से केसेस को रद्द (Quash) करवाने के तरीके को नियम विरुद्ध कार्य शैली से क्रियान्वन आरोपी करवाते आयें है। भिलाई वाले केस में भी वैसी ही कार्यप्रणाली अपनाते हुए आरोपियीं ने हाई कोर्ट में आवेदन दिया और पुलिस विभाग ने समापन रिपोर्ट (Closure report) देते हुए इन अर्रोपियों के केस को सिविल मामला बताते हुए क्रिमिनल FIR को ख़ारिज कर दिया। 

क़ानूनी प्रक्रिया के प्रति सतर्क है भिलाई का शिकायतकर्ता पक्ष..!

भिलाई के व्यवसाई एवं शिकायतकर्ता  अजय अग्रवाल को आरोपियों के शातिराना कार्य व्यवहार का अंदेशा पहले ही हो गया था इसलिए व्यवसाई अजय अग्रवाल ने पहले ही माननीय CGM कोर्ट दुर्ग में आवेदन देकर पुलिस की  समापन रिपोर्ट को गलत इंगित करते हुए माननीय CGM कोर्ट में दरख़ास्त एवं तर्क संगत दस्तावेजीक प्रमाण नियमानुसार जमा कर दिए है परिमाण स्वरूप सुनवाई अभी जारी है।  

क्या हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ के समक्ष अपूर्ण व भ्रामक जानकारी देते हैं आरोपी ?

भिलाई और बलौदा बाजार दोनों प्रकरणों से यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि जिला न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश को चुनौती देकर आरोपीगण हाई कोर्ट से अपना बचाव कर लेते है परन्तु यह भी बढ़ी अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट आरोपियों की शातिर कार्य शैली को विधिक तथ्यों के आधार पर समझतें हुए न्यायहित का संरक्षण कर हाई कोर्ट के फैसले को पलट देती है एवं जिला कोर्ट में  धारा 156(3) के तहत हुए आदेश को संज्ञान लेते हुए सलाह देती है की सम्पूर्ण जाँच कर केस की गहराई तक जाँच एवं  विवेचना कर के आरोपियों पर केस तय करे जबतक आरोपियों को गिरफ्तार से छुट दी गई है ।  

सुप्रीम कोर्ट अनुभव एवं बुद्धिमता के आधार पर क़ानूनी विसंगतियों एवं सुनियोजित और बनावटी गड़बड़ियों को पकड़ लेता है |

अन्तोत्गतवा इस लेख का सारभूत विषय यह है कि लंबी क़ानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग कर समाज के वैभवशाली एवं रसूक वाले लोग आपराधिक कार्य करते है और अपने ऊपर कार्यवाही भी नहीं होने देते है लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट में होता है तो अनुभवी न्यायालय न्यायहित सुनिश्चित करवाने वाली कार्यवाही करता है ।

धोखाधड़ी और भ्रमित करने वाली जानकारी देकर आरोपी जवाबदेही से आखिर कब तक बचेंगे..? 

आरोपी शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल के साथ NUVOCO कंपनी के उच्च अधिकारी अमित पीडीया जैसे छत्तीसगढ़ में कंपनी जगत से जुड़े बड़े नाम चर्चा में आ गए है क्योंकि DHPPL के डायरेक्टर अजय अग्रवाल द्वारा धोखाधड़ी, कुटरचना, छलरचित दस्तावेज बनाने के षड्यंत्र पूर्वक कार्याचरण की शिकायत पर माननीय न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश मार्दिच 2024 को दिए है….

व्यथित व्यवसाई के अधिवक्ता गण आरोपियों के द्वारा परिवाद कार्यवाही में भ्रम उत्पन्न करने वाले दांव-पेंच के विरुद्ध तथ्य पूर्ण क़ानूनी स्पष्टीकरण दे रहें है  

ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी DHPPL के प्रति अपराधिक कृत्य करने वाले आरोपियों के विरुद्ध भिलाई के व्यवसाई की शिकायत अक्रटूबर 2022 में की जिस पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से व्यथित व्यवसाई ने आरोपियों के विरुद्ध जिला न्यायालय दुर्ग के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी दुर्ग के समक्ष जनवरी 2023 में अपने अधिवक्ता सोहन शर्मा एवं सुदेश पेटे के माध्यम से पेश किया जिस पर संज्ञान लेकर माननीय न्यायालय ने न्याय सम्मत आदेश देकर आरोपियों के विरुद्ध मार्च 2024 फआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया है ।

यह लेख, विधि व्यवसाईयों लिए कंपनी मामलों का विश्लेषण करता है

ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी DHPPL के प्रति अपराधिक कृत्य करने वाले आरोपियों के द्वारा न्यायालयीन कार्यवाहियों में कोई गए सुनियोजित एवं अनियमित कार्य शैली को उजागर करता है इसलिए अगर आप भी कंपनी मामलों के विधिक पहलुओं को जानना चाहते है तो यह लेख… कंपनी मामलों के विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाला हैं….

सामान्य दृष्टिकोण से आरोप क्या है ? इस पर थोडा प्रकाश डालते हैं |

आरोपी पक्षकारो के विरुद्ध ये आरोप हैं कि उन्होंने DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD. COMPANY की बैलेंसशीट में संचय (reserves) कि हुई राशि रु 1,82,44,593 को हड़पने के उद्देश्य से फर्जी ट्रको की परिवहन बिल की कूट रचना करके षड्यंत्र पूर्वक उक्त राशि को आरोपी की कंपनी (DURGA CARRERS  PVT. LTD) के बैंक खाते में रकम अनियमित कार्य व्यवहार कर बैंक ट्रांसफर कर दिया गया है।

शिकायत अनुसार आरोपित गबन राशि को आरोपी ने कैसे खाताबही में ट्रांसफ़र किया गया था ? जान लीजिए !

छल और कुट रचित परिवहन बिल लगाकर आरोपित गबन राशि आरोपियों द्वारा कपट पूर्वक कार्य व्यवहार कर आहरित की गई | गौरतलब रहे कि, लगभग 24,000 ट्रको की ट्रिप में कंस्ट्र्रक्शन साइट का कचरा ढुलाई का बिल तथाकथित तौर पर लगाया गया, जिसमे मुख्यतः रेलपांत के टूटे हुए टुकड़े होने का विवरण दिया हुआ है | 

व्यवसायिक दृष्टिकोण से तर्क संगत क्यों नही माना जा सकता है “यह बिल” ?

एक ट्रक की भार-क्षमता अगर 10 टन भी होती है, तो 24,000 ट्रको के कुल स्केप का भार (टनऐज) लगभग  2,40,000 टन होगा | इस लौह-स्क्रैप का बाजार मूल्य 30,000 रु टन के हिसाब से अनुमानित 720 करोड़ होना चाहिए | तर्क है की : गौरतलब रहे कि, कुल 26 km नई रेल-लाइन बिछाने का L&T कंपनी द्वारा दिया गया ठेके का मूल्य 70 करोड़ रु था तो 720 करोड़ का स्क्रैप मूल्य कैसे हो सकता है ?

उत्पादन मानकों के अनुसार खाता बही में दर्शित लोहे की मात्र कितनी होनी चाहिए !

सम्पूर्ण 26 KM नई रेललाइन मैं रेलपांत की कुल मात्रा 26 X 2 =52 KM (52,000m) की होती हैं | 1 मीटर रेलपांत का वजन 60 किलो प्रति मीटर (60kg/m) होता है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau Of Indian Standards) द्वारा प्रमाणित है और पूरे भारतवर्ष में इसी मानक के आधार पर रेलपांत  का उत्पादन बड़ी इस्पात उद्योग कंपनियों जैसे कि भिलाई स्टील प्लांट, जिंदल स्टील प्लांट इत्यादि करती है। 

खाता बही में किए गए गबन अनुसार  परिवहन किए गए स्क्रैप का बाजार मूल्य पूरी कहानी बयां करता है !

उपरोक्त 52000 मीटर को 60 किलोग्राम प्रति  मीटर से गुना करेंगे तो कुल वजन 31,20,000 किलोग्राम आता है जो कि अगर मीट्रिक टन में बदले तो यह वजन 3120 मीट्रिक टन होता है (क्योंकि एक मीट्रिक टन मतलब 1000 किलोग्राम होता हैं |) इस 3120 मीट्रिक टन की नई रेलपांत का बाजार मूल्य रू 70,000 प्रति टन हैं l

जिससे पूरी रेल लाइन का कार्य करने में संपूर्ण रेलपांत का वजन  3120 मीट्रिकटन X रु 70000 /- टन= रू 21,84,00,000 (लगभग 22 करोड़ करोड़) 

तर्क : इतनी बड़ी राशि के मूल्य 720 करोड़ का लोहा स्क्रैप कहां है ? किसके गोदाम में रखा गया है ? 

आरोपिगणों ने लौह स्क्रैप  की मात्रा को 24000  ट्रैकों की ट्रिप से परिवहन करना दर्शाया है, जो की अत्यंत ज्यादा प्रतीत होता है इसलिए  मनगढ़ंत है चुंकि 24000 ट्रैकों की ट्रिप X 10 टन = 2,40,000 मीट्रिक टन का लौहस्क्रैप के उत्पन्न होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठाता है। इसलिए ऊपर दी गई गणना से स्पष्ट होता है कि यह की आरोपियों ने फर्जी ट्रांसपोर्टेशन बिल बना कर उसका समायोजन (कुल योग ) अनियमित तरीके से धोखा देने की नियत से षडयंत्र पूर्वक करके पैसा हड़पने की साजिश साफ स्पष्ट दिखाई देती है।

समयावधि के दृष्टिकोण से भी समायोजित परिवहन बिल राशि फर्जी है होना दर्कशित करती है ।

गौर तलब रहे की L & T कंपनी का 70 करोड़ का कार्य, 19 सितंबर 2014 में समाप्त हो चुका था, जिसका कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र  L & T कंपनी में जून 2015 में जारी कर दिया था, जब कार्य 2014 में संपूर्ण हो चुका था तो 2017, 2018  और  2019  में रेलपाथ के टूटे टकड़े  वो  भी 2,40,000 टन पूर्णतः मन घडंत है और सिर्फ DHPPL  कंपनी के बैलेंससीट में बची हुई राशि को हड़पने की साजिश एवं रणनीति थी | जिसे परिवाद में किए गए आरोपों अनुसार अंजाम दिया गया है क्योंकि सामान्य धारणा के अनुसार रेलवे का सम्पूर्ण कार्य समाप्त होने का तात्पर्य यही हैं कि कंस्ट्रक्शन साइट पर कोई भी स्क्रैप कचरा शेष नहीं हैं, उसके बाद ही मालगाड़ी बिजली इंजन (ELECTRICAL LOCO) से आवागमन कर पाती हैं |

ठेका कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के बाद परिवहन बिल !  कैसे संभव है ?

रेललाइन  बिछाने  एवं सिविल वर्क  का कार्य L & T कंपनी  के द्वारा  DHPPL  कंपनी को सन 2010 में दिया गया था इसलिए  DHPPL  कंपनी  की सारी जिम्मेदारी  L & T कंपनी के कर्य समाप्त करने के बाद खत्म हो जाती  है। इससे यह साफ स्पष्ट होता है कि कूटरचित परिवहन बिल बनाने का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ और सिर्फ 1,82,44,593 रु हड़प करने का षड्यंत्र जिसमें NUVOCO कंपनी के  उच्च अधिकारी श्रीमान अमित पीडीहा (Amit Pidiha)  को भी आरोपियों ने अपने इस षड्यंत्र में सम्मिलित कर लिया जिसके कारण उन्होंने कचरा ( रेलपाथ के टुकड़े ) का कार्य ( जो हुआ ही नहीं है ) को सत्यापित करते हुए आरोपियों के षड्यंत्र में भागीदार बन गये।   NUVOCO कंपनी  के MD को  रजिस्टर्ड ऑफिस मुंबई में लीगल नोटिस  और पत्राचार करके EBPL VENTURES PVT LTD के डायरेक्टर अजय अग्रवाल ने स्पष्टीकरण मांगा जिसका गोल-मोल जवाब दिया गया जो सत्य से परे था और गबन राशी के विषय में अनभिज्ञता जाहिर की गई तथा 720 करोड़ के स्क्रैप के बारे हमें कुछ भी मालूम नहीं है कहा गया |

कंपनी सीए को आरोपी बनाए जाने का आधार भी तर्क संगत है !

इस बात  से पूणतः स्पष्ट है कि 1,82 44,593 रु निकालने के लिए आरोपियों ने कूटरचित बिल दस्तावेजो बनाते हुए धोखाधड़ी करते हुए 50% पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD. को हानि पहुंचाई हैं, इस कूटरचित बिल दस्तावेजों को बना कर सन 2019-20 की ऑडिट रिपोर्ट में अनियमित कार्य व्यवहार से नियुक्त नए चार्टेड-अकॉउंटेट नीरज बेध रायपुर से दस्तावेज को प्रमाणित करवा लिया | नए ऑडिटर नीरज बेध की नियुक्ति पुराने ऑडिटर के बिना NOC के एवं 50%  पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD. के बिना अनुमति के  DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD. COMPANY में ऑडिटर बना कर कूटरचित बिल दस्तावेज को सही करवा कर MCA (MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS) की सरकारी वेबसाइट में अपलोड कर दिया गया था जिसे डाउनलोड करके 50%  पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD ने संज्ञान लिया और सुपेला थाने में OCT’ 2022 को शिकायत दर्ज करवाई |

अपराधिक व्यवसायिक गतिविधि जो की खाताबाही में किए गए गबन आरोप आधारित है इस अपराध पर की गई अनियमित पुलिस कार्यवाही का विधिक आधार क्या है ?

पुलिस थाना सुपेला के द्वारा पुलिस शिकायत पर करवाई नहीं करने के पश्चात JAN’ 2023 में न्यायिक दण्डाधिकारी (JMFC) कोर्ट दुर्ग में धारा 156(3) के तहत  याचिका दायर करके माननीय न्यायालय में 4 march  2024 को याचिका को सही पाते हुए आदेश पारित किया कि 6 आरोपियों पर FIR करते हुए धारा 420, 467,468,471 &120B के तहत मामला दर्ज़ किये जावें  |  ऐसा विधि सम्मत आदेश पारित किया गया है ।

धोखाधड़ी कुटरचना छलरचित दस्तावेज जैसे गंभीर और पुलिस संज्ञान के अपराध की शिकायत पर लंबित है मामला  !

कंपनी अपराध के आरोप को विधि द्वारा किस धारा में परिभाषित किया गया है और माननीय  न्यायालय द्वारा धारा 420,467,468 & 120B लगाते हुए धोखाधड़ी कुटरचना छलरचित दस्तावेज बनाते हुए षड़यंत्र पूर्वक सभी 6 अरोपियों ने मिल कर 1,82,44,593 रु हड़पने के उद्देश्य से अपराधिक कार्य को अंजाम दिया गया है वर्तमान में यह पुलिस के जांच का विषय है । 

न्यायालयीन कार्यवाही में आरोपी अपना पक्ष प्रस्तुत करने में कैसे कठिनाई महसूस करेंगे ?

न्यायालय में आरोपियों को अपना पक्ष रखने में दिक्कत  होने का कारण  ये है कि कुटरचित एवं छलरचित दस्तावेजों  को  बनाने  के  बाद अब उसमे कोई भी सुधार की  गुंजाईश नहीं है | तथा कथित तौर पर उठाये गया कचरा (लौह स्केप) का परिवहन बिल जो आरोपी प्रस्तुत कर रहे हैं उस स्केप का बिक्री मूल्य जो कि लगभग 700 करोड़ रु से ज्यादा होता  है, उस पैसे का आरोपियों ने कहाँ उपयोग किया और पैसे किस बैंक खाते में आये तथा किस पार्टी को  स्क्रैप  बेचा गया | जैसे सवालों का जब आरोपी पक्षकारों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की विधिक बाध्यता वर्तमान में बनी हुई है ।

शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल कंपनी से त्यागपत्र देकर क्या अपने कर्मचारियों को गबन का आरोपी साबित कर बच जायेंगे ?

इस आपरधिक कार्य करने के पूर्व में DHPPL (DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD.) के दो डायरेक्टर एवं अरोपीगण (शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल ) ने सत्र JAN 2019 में त्यागपत्र देकर कंपनी DHPPL  में अपने तीन मुलाजिमों को कंपनी DHPPL में नये डायरेक्टर  के  रूप में नियुक्त कर दिया जिसमें 50% पार्टनरशिप कंपनी  EBPL VENTURES  PVT. LTD के डायरेक्टर  से कोई सहमति नहीं ली गई  |

आरोपी गण पुलिस जाँच में गलत बयां कर रहें है और कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश कर रहें है |

उक्त कंपनी मामलों का विश्लेषण होगा जैसे की DHPPL (DURGA HITECH PROJECT PVT. LTD.) की 50% पार्टनरशिप  EBPL VENTURES  PVT. LTD ने कंपनी DHPPL में उत्पीड़न एवं क्रुप्रबंधन होने के कारण NCLT नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल कटक में OCT 2022 में याचिका दायर कर DHPPL के प्रबंधन में अनियमितताओं  को उजागर करते हुए माननीय ट्रिब्यूनल से संज्ञान लेने की गुजारिश की, जिसमें माननीय ट्रिब्यूनल का निर्णय अभी  लंबित हैं  |    

जुलाई 2024 में हाई कोर्ट बिलासपुर ने आरोपी गण की FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया था क्योकि पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी, जिसके विरुद्ध शिकायतकर्ता ने पुलिस द्वारा शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण तत्पश्यत जारी की गई क्लोजर रिपोर्ट के विरुद्माध ननीय CJM कोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी जिस पर सुनवाई चल रहीं है ?  

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नोट : उक्त मामले में निजी तौर पर तृतीय पक्षकार के तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालूसरे हैं ने एक नोटिस आरोपियों से वस्तुस्थिति जानने के लिए दी है जिसका विवरण इस लिंक पर है 👇👇👇 

https://meradrushtikon.blogspot.com/2024/06/blog-post.html




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दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों के परिवारों की भावनाओं को… हाउस लीज विषय बेहद आहत करने वाला मामला, हमेशा से रहा है लेकिन..! इससे भी कहीं अधिक पीड़ा..! इस बात की है कि, बीएसपी हाउस लीज मामले में… झूठा आश्वासन देकर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव जैसे लोगों की… मौका परस्ती वाली राजनीतिक भूमिका ने भिलाई वासियों के भावनात्मक ज़ख्मों को… बेरहमी से कुरेदने का काम किया है लेकिन..! अब इस मामले में विधि अपेक्षित संघर्ष प्रारंभ हो गया है… कागजी कार्यवाहियों में दफ़न किए गए..! जमीन घोटालों को उजागर करने वाला पहला पड़ाव भिलाई निगम संपत्ति ब्यौरा मांगने की नोटिस देकर… मौक परस्त कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव से प्रतिक्रिया मांगी गई क्योंकि इसी प्रतिक्रिया के आधार पर हाउस लीज विषय स्वमेव पुनर्जीवित हो जाएगा है…

निगम संपत्ति का ब्यौरा क्यों ? भिलाई विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र यादव ने दो बार बीएसपी कर्मियों के परिवार की भावनाओं से जुड़े बीएसपी हाउस लीज मामले को झूठी और तथ्य विहीन जानकारी देकर राजनीतिक तौर पर भुनाया है..! उल्लेखनीय है कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव ने अपने चुनावी प्रचार में… यह तथ्य विहीन भ्रम फैलाया था कि… बीएसपी हाउस लीज की रजिस्ट्री होगी तदोपरांत… भ्रमित होकर कई लोगों ने मालिकाना हक्क प्राप्त करने के तर्क विहीन बहकावे में आकर बीएसपी हाउस लीज रजिस्ट्री भी करवाई लेकिन…! इसके बाद रजिस्ट्री करवाने वाले कितने हाउस लीज धारकों को तथाकथित मालिकाना हक्क मिला है..! यह अनुत्तरित प्रश्न विचारणीय पहलू है।  कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव की कुटिल राजनीति के लिए मुंहतोड़ प्रश्न ? गौरतलब रहे कि, पूर्व महापौर देवेंद्र यादव ने भिलाई नगर पालिक निगम संपत्ति का लेखा-जोखा की वार्ड वार विभागीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करवाने का पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया था । जिसके कारण भिलाई नगर निगम की अचल संपत्ति पर कितना अवैधानिक अतिक्रमण और कब्जा किया गया है ? यह अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं हु...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मंच कला क्षेत्र के छह प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना गया, वर्ष 2022 और 2023 के लिए 92 कलाकार संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों के लिए चुने गए, 80 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार दिया जाएगा

  संगीत , नृत्य और नाट्य कला से संबंधित संगीत नाटक अकादमी , नई दिल्ली की जनरल काउंसिल , नेशनल ने 21 और 22 फरवरी 2024 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी बैठक में सर्वसम्मति से मंच कला के क्षेत्र में छह ( 6) प्रतिष्ठित हस्तियों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना है। अकादमी की फेलोशिप सबसे प्रतिष्ठित और अपूर्व सम्मान है। यह फेलोशिप किसी भी खास समय में 40 व्यक्तियों को दी जाती है। जनरल काउंसिल ने वर्ष 2022 और 2023 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत , नृत्य , रंगमंच , पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच , कठपुतली और मंच कला में समग्र योगदान/छात्रवृत्ति के क्षेत्र से 92 कलाकारों का भी चयन किया। इस प्रकार चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता समग्र रूप से राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अतिरिक्त ये ख्याति प्राप्त कलाकार संगीत , नृत्य , नाटक , लोक और जनजातीय कला , कठपुतली और संबद्ध रंगमंच कला रूपों आदि के रूप में मंच कला रूपों के संपूर्ण रूप को कवर करते हैं। अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष ...

भूपेश सरकार की नाकामी को उजागर कर रहा है विधायक देवेंद्र… भिलाई की कामकाजी महिलाओं को तर्क विहीन संभावना बताकर भावनात्मक आधार पर गुमराह करने का मामल है : भिलाई का सी-मार्ट व्यवस्थापन कार्य व्यवहार... इसलिए आमंत्रित है विधायक देवेंद्र यादव… सी-मार्ट की नोट शीट और मूल नस्ती के साथ.. “विशेष चर्चा के लिए”... सार्वजनिक मंच पर आईए… विधायक महोदय…

कामकाजी महिलाओं की आर्थिक स्थिति से खिलवाड़ का मामल विधानसभा कार्यवाही के बाद से पारदर्शिता के दायरे में आ रहा है । भिलाई क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को अपूर्णीय आर्थिक क्षति पहुंचाने वाली विगत भूपेश सरकार की  "ख्याली पुलाव साबित होने वाली योजना सी-मार्ट" पर विगत वर्षों से जमी अनियमितताओं की धूल को हटाने वाल विधानसभा प्रश्न इस योजना से व्यथित महिलाओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि विधानसभा सत्र दिनांक 25 फरवरी, 2025 का प्रश्न क्रम 25. प्रश्न क्र. 176 से विधायक देवेन्द्र यादव ने प्रश्न पूछा कि, क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि, 1/ नगर पालिका निगम भिलाई के अंतर्गत संचालित सी-मार्ट की वर्तमान स्थिति क्या है ?  2/ क्या उनका संचालन किया जा रहा है ?  3/ यदि हां तो उनमें किन उत्पादनों का विक्रय किया जा रहा है ?  4/ यदि बंद है तो उसको पुनः संचालित कब तक किया जाएगा, जानकारी देवें ? उल्लेखनीय है कि, विधायक देवेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश सरकार की नाकामी और भिलाई नगर निगम के महापौर की तर्क विहीन प्रशासकीय कार्य नीति तथा शासकीय कोष को क्षत...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों की मनोभावनाओं से खिलवाड़ करके… अपनी राजनैतिक रोटी सेकने वाले… चालबाज विधायक देवेंद्र यादव ने… पुनः एक बार बीएसपी कर्मियों के भावनात्मक ज़ख्मों को कुरदने वाला कार्य व्यवहार किया है… जिसका खुलासा विगत 19 मार्च के विधानसभा प्रश्न कार्यवाही से उजागर हुआ है… जिसमें विधायक देवेंद्र के द्वारा पूछे गए विधानसभा प्रश्नों का मुंहतोड़ प्रशासकीय जवाब… छत्तीसगढ़ के वित्तमंत्री ओ.पी.चौधरी ने दिया है… उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री के जवाब का विषयवस्तु स्पष्ट करता है कि, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र ने बीएसपी कर्मियों को बेवकूफ बनाओ का कूटनीतिक कार्य व्यवहार अपनाकर चुनाव जीता है….

बी.एस.पी प्रबंधन को लीज डीड अनुबंध पंजीयन हेतु प्राप्त आवेदनों के विषय की कूटनीतिक और छल-कपटपूर्ण राजनीति पर प्रकाश डाल रहे है… मौकापरस्त विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न… पढ़िए कैसे ? बीएसपी लीज मामले में विधायक देवेंद्र यादव की धोखाधड़ी उजागर हुई   छत्तीसगढ़ विधानसभा कार्यवाही 19 मार्च से भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों को आहत करने वाला मामला सामने आया गौर तलब रहे कि, छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रश्न क्रम 1. प्रश्न क्रमांक. 186 से विधायक देवेन्द्र ने चार प्रश्न पूछे… जिसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ने दिया है जिसके बाद विधायक देवेंद्र यादव के कथनी और करनी के बीच का भ्रम स्पष्ट हो गया और यह भी स्पष्ट हो गया कि… विधायक देवेंद्र ने विगत विधानसभा चुनावों के पहले कैसे बीएसपी आवासीय मकान के लीज मामले मतदाताओं को गुमराह किया है… पढ़िए विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न और मंत्री द्वारा दिया गया जवाब तथा विधायक देवेंद्र यादव के कूटनीतिक छलावे पर प्रकाश डालने वाले विचारणीय पहलू… विधायक देवेंद्र का प्रश्न क्रमांक 186/1  क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बी.एस.पी प...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना )

  शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना ) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना का कार्यान्वयन करता है। शिल्पकार प्रशिक्षण देश भर में योजना  के तहत , 14,688 आईटीआई (सरकारी - 3,345 और निजी - 11,343) के माध्यम से 169 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत व्यापार पाठ्यक्रम को उद्योग , शिक्षा जगत और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के परामर्श से समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों , आधुनिक उपकरणों और मशीनरी को इसमें शामिल करना हैं। इसके अलावा , शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया जाता है। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण को वर्तमान उद्योग मानकों के अनुरूप बनाना , समग्र गुणवत्ता में सुधार करना , नामांकन बढ़ाना और प्रशिक्षुओं को वेतनभोगी रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए तैयार करना है। पिछले तीन वर्...

सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना

  सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना   पर्यटन मंत्रालय देशभर में आतिथ्य एवं पर्यटन से संबंधित अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करता है , जिनका उद्देश्य पुरुष और महिला प्रशिक्षुओं , स्थानीय समुदायों , जनजातीय क्षेत्रों आदि के कौशल विकास , कौशल उन्नयन एवं पुनः कौशल विकास को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम ‘सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण’ योजना के अंतर्गत संचालित किया जाता है। यह योजना देशभर में , जिसमें राजस्थान और महाराष्ट्र भी शामिल हैं , सरकारी संस्थानों एवं सूचीबद्ध निजी संस्थानों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान , फूड क्राफ्ट संस्थान , भारतीय पाककला संस्थान आदि शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने 2025 में भारतीय गुणवत्ता परिषद के माध्यम से इस योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर और 36,000 से अधिक लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्रदान कर सीबीएसपी योजना ने भारत के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के कार्यबल को सशक्त ...

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने छूट प्रबंधन और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर ईपीएफओ प्रशिक्षण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण निर्धारित किया

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान , पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आज ‘‘छूट प्रबंधन , कानूनी ढांचा और प्रतिभूतियों का मूल्यांकन’’ शीर्षक से एक उच्च स्तरीय पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नौ से 13 मार्च 2026 तक चलने वाला यह कार्यक्रम देशभर में ईपीएफओ अधिकारियों की नियामक और वित्तीय निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन सत्र का नेतृत्व पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने किया , जिन्होंने आधुनिक सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में विशेष प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम को संबोधित दिया। श्री कुमार रोहित ने इस बात पर प्रकाश डाला कि छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों का विनियमन ईपीएफओ के भीतर ‘‘सबसे विशिष्ट और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण’’ क्षेत्रों में से एक है। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित अधिकारियों के कंधों पर टिकी अपार जिम्मेदारी पर जोर दिया। श्री कुमार रोहित ने कहा , ‘‘ छूट प्राप्त प्रतिष्ठान आज करोड़ों रुपये के भविष्य निधि संचय का प्रबंधन करते...

भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए नए सामान संबंधी नियम अधिसूचित किए, कस्टम्स बैगेज (घोषणा एवं प्रसंस्करण) विनियम, 2026 अधिसूचित; मास्टर सर्कुलर भी जारी

नए बैगेज नियम , 2026 से प्रक्रियाएँ सरल , पारदर्शिता में वृद्धि , इलेक्ट्रॉनिक एवं अग्रिम घोषणा से यात्रियों को मिलेगा तेज़ और सुगम क्लीयरेंस नए बदलाव सामान्य मुक्त भत्ते को बढ़ाने की अनुमति देंगे ; निवास लाभों का हस्तांतरण ; आभूषणों के लिए विशेष भत्ते ; अस्थायी आयात/पुन: आयात के लिए नए प्रावधान ; एक लैपटॉप ( 18 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों के लिए) और पालतू जानवरों का शुल्क मुक्त आयात ; और यात्री सुविधा में वृद्धि केंद्र सरकार ने बैगेज नियम , 2026 को अधिसूचित किया है। नए सीमा शुल्क सामान ( घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम , 2026 और एक मास्टर परिपत्र भी जारी किया गया है। ये उपाय अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और संशोधित प्रावधानों को दर्शाते हैं और नई आर्थिक स्थितियों , बढ़ती यात्रा की मात्रा और यात्रियों की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य मंत्रालयों , हवाई अड्डा ऑपरेटरों सहित हितधारकों के परामर्श और यात्रियों से प्राप्त फीडबैक आदि के साथ किया गया है। ये नियम प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे , पारदर्शिता बढ़ाएंगे , इलेक्ट्रॉनिक और अग्रिम घोषणाओं को सक्षम करेंगे और ...

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने... जो निर्वाचन शपथ पत्र चुनाव आयोग में जमा करवाया है... उसमे भूपेश बघेल के विरुद्ध संस्थापित जांच कार्यवाही का उल्लेख नहीं है... इसलिए अभ्यर्थी भूपेश बघेल के नाम निर्देशन पत्र पर आपत्ति और पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है जिसका विवरण इस प्रकार है...

शपथ पत्र मामला   अभ्यर्थी भूपेश बघेल के निर्वाचन शपथ पत्र मामले में संविक्षा कार्यवाही के दौरान की गई आपत्ति पर भूपेश बघेल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने निर्वाचन कार्यवाही प्रक्रिया की विधि मान्यता को भूपेश बघेल ने स्वयं प्रश्नांकित छोड़ दिया अतः यह प्रश्न अनुत्तरित रह गया है कि, क्या भूपेश बघेल ने मतदाताओं को गुमराह करने के लिए बीएसपी लिज मामले में झूठी घोषणा की थी ? प्रतिक्रिया दो भूपेश बघेल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बीएसपी लिज मामले में कि गई घोषणा की वस्तुस्थिति जानने के लिए पंजीकृत डाक से प्रेषित नोटिस पर कोई जवाब और प्रतिक्रिया नहीं गई दी है इससे भी गंभीर मामला यह है की भूपेश बघेल ने नोटिस पर संज्ञान लेकर जांच आदेश देने वाले संभाग आयुक्त दुर्ग न्यायालय की कार्यवाही पर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और भिलाई के मतदाताओं को गुमराह करने वाला राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति का भाषण करके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जैसे गरिमापूर्ण पद की छवि को धूमिल की है । न्यायालयीन कार्यवाही प्रश्नांकित   दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा का निर्वाचन  संविक्षा अधिकारी अपने न्यायालयीन शक्तिया...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और ई-श्रम कार्ड प्रदान करके उनका पंजीकरण और सहायता करना है।

  ई-श्रम पोर्टल श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सत्यापित और आधार से जुड़े असंगठित श्रमिकों (एनडीयूडब्ल्यू) का एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल ( eshram.gov.in) लॉन्च किया। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और ई-श्रम कार्ड प्रदान करके उनका पंजीकरण और सहायता करना है। 31.07.2024 तक 29.85 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों ने ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। ई-श्रम पोर्टल का एक मुख्य उद्देश्य ई-श्रम पोर्टल का एक मुख्य उद्देश्य असंगठित श्रमिकों तक सामाजिक कल्याण योजनाओं की पहुँच को सुगम बनाना है। ई-श्रम का राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) और स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) के साथ एकीकरण है , जिसका उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को औपचारिक बनाना है। ई-श्रम के एनसीएस के साथ एकीकरण का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों के लिए उपयुक्त बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करना है। एसआईडीएच के साथ एकीकरण का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कौशल विकास और प्रशिक्षुता के अवसर प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त , सरकार...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

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