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मेरा दृष्टिकोण:- छल कपट के आरोपी पक्षकार शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गयी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विधिक मुद्दों के आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार में महिर्षि महेश योगी के ट्रस्ट SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India की बलौदाबाजार स्थित दो जमींनों को गलत तरीके से रजिस्ट्री कर के हड़पने के आरोपित मामले में जिला सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने सुनवाई कर इन दोनों आरोपियों शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल को आरोपी बताते हुए इनके विरुद्ध में क्रिमिनल धाराएं 419, 420, 465, 467, 468, 471, 16, 212, 217 & 120B इंगित करते हुए दिनांक 10-11-2014 एवं 22-11-2014 को निर्णय जारी करते किया और निर्देशित किया की स्थानीय पुलिस स्टेशन बलौदाबाजार में FIR दर्ज करने का आदेश दिया इसके पश्चात आरोपियों ने अपना प्रभाव दिखाकर तथा भ्रमित करने वाले चार अलग-अलग आवेदन देकर पुनरीक्षण केस को हाई कोर्ट बिलासपुर में दाखिल करवाया जिसमे हाई कोर्ट बिलासपुर ने तथाकथित तौर पर बिना तथ्यों की जाँच करते हुए FIR को निरस्त करने का आदेश नौ साल बाद दिनांक 09-08-2023 को कर दिया था।

 हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है और मार्गदर्शक निर्णय देकर... संस्थागत मामलों के अपराधिक कृत्यों पर की जाने वाली पुलिस कार्यवाही पर विधिक प्रकाश डाला है....

आरोपियों के द्वारा हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष क्रिमिनल (Criminal) केस को दीवानी (Civil) केस दिखाकर निरस्त करवा लिया गया था लेकिन SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India के प्राधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए क्राइम केस न:- 486 /2014 के संबंध में दिनांक 22-10-2024 को सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त करके खारिज करवाया और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को दोबारा इस केस के तथ्यों को पुनः जाँच कर के क्रिमिनल केस की समूर्ण विवेचना करने का न्यायालयीन परामर्श दिलवा दिया है।



भ्रामक जानकारी के आधार पर आरोपियों ने प्राप्त किया विधि विरुद्ध लाभ  

आरोपियों ने हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से लंबित मामले का सम्पूर्ण लाभ उठाते हुए लोकल पुलिस से इस केस की विवेचना एवं चार्जशीट किया है क्या यह लंबित चार्जशीट कार्यवाही से स्पष्ट होगा । उल्लेकनीय है कि आरोपियों के विरुद्ध ऐसे ही आपराधिक कृत्यों से मिलता जुलता केस भिलाई के व्यवसाई अजय अग्रवाल की कंपनी EBPL Ventures Pvt  Ltd की FIR क्रमांक:- 0241/2024 दिनांक 07-03-2024 को सुपेला थाना भिलाई में दर्ज किया गया है जिसमे आरोपीगण शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल के ऊपर धाराएं 420,467,468,471 & 120B के तहत जुर्म कायम हुआ था।  इस केस में भी आरोपियों ने पुलिस और माननीय न्यायालय को गुमराह किए जाने का अभिलिखित आरोप लंबित है ।

भिलाई के सुपेला थाने और बलौदा बाजार पुलिस प्रकरण के आरोप-करीब-करीब एक जैसे हैं !

भिलाई और बलौदा बाजार के दोनो क्रिमिनल केसेस संबंधित जिला न्यायालय के समक्ष धारा 156(3) के तहत पेश किए गए थे जिस पर आवेदन का सम्पूर्ण संज्ञान लेते हुए जिला न्यायालय दुर्ग एवं जिला न्यायालय बलौदाबाजार के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश के तहत FIR दर्ज की गयी थी।  आरोपियों के पैसों के दवाव में और पहुँच के कारण दोनों क्रिमिनल केसेस में वकीलों से मिलकर एक भ्रामक कार्यप्रणाली अपनाते हुए दोनों केसेस में आरोपियों को जमानत मिल जाना जांच का विषय है एवं हाई कोर्ट से केसेस को रद्द (Quash) करवाने के तरीके को नियम विरुद्ध कार्य शैली से क्रियान्वन आरोपी करवाते आयें है। भिलाई वाले केस में भी वैसी ही कार्यप्रणाली अपनाते हुए आरोपियीं ने हाई कोर्ट में आवेदन दिया और पुलिस विभाग ने समापन रिपोर्ट (Closure report) देते हुए इन अर्रोपियों के केस को सिविल मामला बताते हुए क्रिमिनल FIR को ख़ारिज कर दिया। 

क़ानूनी प्रक्रिया के प्रति सतर्क है भिलाई का शिकायतकर्ता पक्ष..!

भिलाई के व्यवसाई एवं शिकायतकर्ता  अजय अग्रवाल को आरोपियों के शातिराना कार्य व्यवहार का अंदेशा पहले ही हो गया था इसलिए व्यवसाई अजय अग्रवाल ने पहले ही माननीय CGM कोर्ट दुर्ग में आवेदन देकर पुलिस की  समापन रिपोर्ट को गलत इंगित करते हुए माननीय CGM कोर्ट में दरख़ास्त एवं तर्क संगत दस्तावेजीक प्रमाण नियमानुसार जमा कर दिए है परिमाण स्वरूप सुनवाई अभी जारी है।  

क्या हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ के समक्ष अपूर्ण व भ्रामक जानकारी देते हैं आरोपी ?

भिलाई और बलौदा बाजार दोनों प्रकरणों से यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि जिला न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश को चुनौती देकर आरोपीगण हाई कोर्ट से अपना बचाव कर लेते है परन्तु यह भी बढ़ी अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट आरोपियों की शातिर कार्य शैली को विधिक तथ्यों के आधार पर समझतें हुए न्यायहित का संरक्षण कर हाई कोर्ट के फैसले को पलट देती है एवं जिला कोर्ट में  धारा 156(3) के तहत हुए आदेश को संज्ञान लेते हुए सलाह देती है की सम्पूर्ण जाँच कर केस की गहराई तक जाँच एवं  विवेचना कर के आरोपियों पर केस तय करे जबतक आरोपियों को गिरफ्तार से छुट दी गई है ।  

सुप्रीम कोर्ट अनुभव एवं बुद्धिमता के आधार पर क़ानूनी विसंगतियों एवं सुनियोजित और बनावटी गड़बड़ियों को पकड़ लेता है |

अन्तोत्गतवा इस लेख का सारभूत विषय यह है कि लंबी क़ानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग कर समाज के वैभवशाली एवं रसूक वाले लोग आपराधिक कार्य करते है और अपने ऊपर कार्यवाही भी नहीं होने देते है लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट में होता है तो अनुभवी न्यायालय न्यायहित सुनिश्चित करवाने वाली कार्यवाही करता है ।

धोखाधड़ी और भ्रमित करने वाली जानकारी देकर आरोपी जवाबदेही से आखिर कब तक बचेंगे..? 

आरोपी शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल के साथ NUVOCO कंपनी के उच्च अधिकारी अमित पीडीया जैसे छत्तीसगढ़ में कंपनी जगत से जुड़े बड़े नाम चर्चा में आ गए है क्योंकि DHPPL के डायरेक्टर अजय अग्रवाल द्वारा धोखाधड़ी, कुटरचना, छलरचित दस्तावेज बनाने के षड्यंत्र पूर्वक कार्याचरण की शिकायत पर माननीय न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश मार्दिच 2024 को दिए है….

व्यथित व्यवसाई के अधिवक्ता गण आरोपियों के द्वारा परिवाद कार्यवाही में भ्रम उत्पन्न करने वाले दांव-पेंच के विरुद्ध तथ्य पूर्ण क़ानूनी स्पष्टीकरण दे रहें है  

ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी DHPPL के प्रति अपराधिक कृत्य करने वाले आरोपियों के विरुद्ध भिलाई के व्यवसाई की शिकायत अक्रटूबर 2022 में की जिस पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से व्यथित व्यवसाई ने आरोपियों के विरुद्ध जिला न्यायालय दुर्ग के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी दुर्ग के समक्ष जनवरी 2023 में अपने अधिवक्ता सोहन शर्मा एवं सुदेश पेटे के माध्यम से पेश किया जिस पर संज्ञान लेकर माननीय न्यायालय ने न्याय सम्मत आदेश देकर आरोपियों के विरुद्ध मार्च 2024 फआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया है ।

यह लेख, विधि व्यवसाईयों लिए कंपनी मामलों का विश्लेषण करता है

ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी DHPPL के प्रति अपराधिक कृत्य करने वाले आरोपियों के द्वारा न्यायालयीन कार्यवाहियों में कोई गए सुनियोजित एवं अनियमित कार्य शैली को उजागर करता है इसलिए अगर आप भी कंपनी मामलों के विधिक पहलुओं को जानना चाहते है तो यह लेख… कंपनी मामलों के विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाला हैं….

सामान्य दृष्टिकोण से आरोप क्या है ? इस पर थोडा प्रकाश डालते हैं |

आरोपी पक्षकारो के विरुद्ध ये आरोप हैं कि उन्होंने DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD. COMPANY की बैलेंसशीट में संचय (reserves) कि हुई राशि रु 1,82,44,593 को हड़पने के उद्देश्य से फर्जी ट्रको की परिवहन बिल की कूट रचना करके षड्यंत्र पूर्वक उक्त राशि को आरोपी की कंपनी (DURGA CARRERS  PVT. LTD) के बैंक खाते में रकम अनियमित कार्य व्यवहार कर बैंक ट्रांसफर कर दिया गया है।

शिकायत अनुसार आरोपित गबन राशि को आरोपी ने कैसे खाताबही में ट्रांसफ़र किया गया था ? जान लीजिए !

छल और कुट रचित परिवहन बिल लगाकर आरोपित गबन राशि आरोपियों द्वारा कपट पूर्वक कार्य व्यवहार कर आहरित की गई | गौरतलब रहे कि, लगभग 24,000 ट्रको की ट्रिप में कंस्ट्र्रक्शन साइट का कचरा ढुलाई का बिल तथाकथित तौर पर लगाया गया, जिसमे मुख्यतः रेलपांत के टूटे हुए टुकड़े होने का विवरण दिया हुआ है | 

व्यवसायिक दृष्टिकोण से तर्क संगत क्यों नही माना जा सकता है “यह बिल” ?

एक ट्रक की भार-क्षमता अगर 10 टन भी होती है, तो 24,000 ट्रको के कुल स्केप का भार (टनऐज) लगभग  2,40,000 टन होगा | इस लौह-स्क्रैप का बाजार मूल्य 30,000 रु टन के हिसाब से अनुमानित 720 करोड़ होना चाहिए | तर्क है की : गौरतलब रहे कि, कुल 26 km नई रेल-लाइन बिछाने का L&T कंपनी द्वारा दिया गया ठेके का मूल्य 70 करोड़ रु था तो 720 करोड़ का स्क्रैप मूल्य कैसे हो सकता है ?

उत्पादन मानकों के अनुसार खाता बही में दर्शित लोहे की मात्र कितनी होनी चाहिए !

सम्पूर्ण 26 KM नई रेललाइन मैं रेलपांत की कुल मात्रा 26 X 2 =52 KM (52,000m) की होती हैं | 1 मीटर रेलपांत का वजन 60 किलो प्रति मीटर (60kg/m) होता है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau Of Indian Standards) द्वारा प्रमाणित है और पूरे भारतवर्ष में इसी मानक के आधार पर रेलपांत  का उत्पादन बड़ी इस्पात उद्योग कंपनियों जैसे कि भिलाई स्टील प्लांट, जिंदल स्टील प्लांट इत्यादि करती है। 

खाता बही में किए गए गबन अनुसार  परिवहन किए गए स्क्रैप का बाजार मूल्य पूरी कहानी बयां करता है !

उपरोक्त 52000 मीटर को 60 किलोग्राम प्रति  मीटर से गुना करेंगे तो कुल वजन 31,20,000 किलोग्राम आता है जो कि अगर मीट्रिक टन में बदले तो यह वजन 3120 मीट्रिक टन होता है (क्योंकि एक मीट्रिक टन मतलब 1000 किलोग्राम होता हैं |) इस 3120 मीट्रिक टन की नई रेलपांत का बाजार मूल्य रू 70,000 प्रति टन हैं l

जिससे पूरी रेल लाइन का कार्य करने में संपूर्ण रेलपांत का वजन  3120 मीट्रिकटन X रु 70000 /- टन= रू 21,84,00,000 (लगभग 22 करोड़ करोड़) 

तर्क : इतनी बड़ी राशि के मूल्य 720 करोड़ का लोहा स्क्रैप कहां है ? किसके गोदाम में रखा गया है ? 

आरोपिगणों ने लौह स्क्रैप  की मात्रा को 24000  ट्रैकों की ट्रिप से परिवहन करना दर्शाया है, जो की अत्यंत ज्यादा प्रतीत होता है इसलिए  मनगढ़ंत है चुंकि 24000 ट्रैकों की ट्रिप X 10 टन = 2,40,000 मीट्रिक टन का लौहस्क्रैप के उत्पन्न होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठाता है। इसलिए ऊपर दी गई गणना से स्पष्ट होता है कि यह की आरोपियों ने फर्जी ट्रांसपोर्टेशन बिल बना कर उसका समायोजन (कुल योग ) अनियमित तरीके से धोखा देने की नियत से षडयंत्र पूर्वक करके पैसा हड़पने की साजिश साफ स्पष्ट दिखाई देती है।

समयावधि के दृष्टिकोण से भी समायोजित परिवहन बिल राशि फर्जी है होना दर्कशित करती है ।

गौर तलब रहे की L & T कंपनी का 70 करोड़ का कार्य, 19 सितंबर 2014 में समाप्त हो चुका था, जिसका कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र  L & T कंपनी में जून 2015 में जारी कर दिया था, जब कार्य 2014 में संपूर्ण हो चुका था तो 2017, 2018  और  2019  में रेलपाथ के टूटे टकड़े  वो  भी 2,40,000 टन पूर्णतः मन घडंत है और सिर्फ DHPPL  कंपनी के बैलेंससीट में बची हुई राशि को हड़पने की साजिश एवं रणनीति थी | जिसे परिवाद में किए गए आरोपों अनुसार अंजाम दिया गया है क्योंकि सामान्य धारणा के अनुसार रेलवे का सम्पूर्ण कार्य समाप्त होने का तात्पर्य यही हैं कि कंस्ट्रक्शन साइट पर कोई भी स्क्रैप कचरा शेष नहीं हैं, उसके बाद ही मालगाड़ी बिजली इंजन (ELECTRICAL LOCO) से आवागमन कर पाती हैं |

ठेका कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के बाद परिवहन बिल !  कैसे संभव है ?

रेललाइन  बिछाने  एवं सिविल वर्क  का कार्य L & T कंपनी  के द्वारा  DHPPL  कंपनी को सन 2010 में दिया गया था इसलिए  DHPPL  कंपनी  की सारी जिम्मेदारी  L & T कंपनी के कर्य समाप्त करने के बाद खत्म हो जाती  है। इससे यह साफ स्पष्ट होता है कि कूटरचित परिवहन बिल बनाने का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ और सिर्फ 1,82,44,593 रु हड़प करने का षड्यंत्र जिसमें NUVOCO कंपनी के  उच्च अधिकारी श्रीमान अमित पीडीहा (Amit Pidiha)  को भी आरोपियों ने अपने इस षड्यंत्र में सम्मिलित कर लिया जिसके कारण उन्होंने कचरा ( रेलपाथ के टुकड़े ) का कार्य ( जो हुआ ही नहीं है ) को सत्यापित करते हुए आरोपियों के षड्यंत्र में भागीदार बन गये।   NUVOCO कंपनी  के MD को  रजिस्टर्ड ऑफिस मुंबई में लीगल नोटिस  और पत्राचार करके EBPL VENTURES PVT LTD के डायरेक्टर अजय अग्रवाल ने स्पष्टीकरण मांगा जिसका गोल-मोल जवाब दिया गया जो सत्य से परे था और गबन राशी के विषय में अनभिज्ञता जाहिर की गई तथा 720 करोड़ के स्क्रैप के बारे हमें कुछ भी मालूम नहीं है कहा गया |

कंपनी सीए को आरोपी बनाए जाने का आधार भी तर्क संगत है !

इस बात  से पूणतः स्पष्ट है कि 1,82 44,593 रु निकालने के लिए आरोपियों ने कूटरचित बिल दस्तावेजो बनाते हुए धोखाधड़ी करते हुए 50% पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD. को हानि पहुंचाई हैं, इस कूटरचित बिल दस्तावेजों को बना कर सन 2019-20 की ऑडिट रिपोर्ट में अनियमित कार्य व्यवहार से नियुक्त नए चार्टेड-अकॉउंटेट नीरज बेध रायपुर से दस्तावेज को प्रमाणित करवा लिया | नए ऑडिटर नीरज बेध की नियुक्ति पुराने ऑडिटर के बिना NOC के एवं 50%  पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD. के बिना अनुमति के  DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD. COMPANY में ऑडिटर बना कर कूटरचित बिल दस्तावेज को सही करवा कर MCA (MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS) की सरकारी वेबसाइट में अपलोड कर दिया गया था जिसे डाउनलोड करके 50%  पार्टनरशीप कंपनी EBPL VENTURES PVT. LTD ने संज्ञान लिया और सुपेला थाने में OCT’ 2022 को शिकायत दर्ज करवाई |

अपराधिक व्यवसायिक गतिविधि जो की खाताबाही में किए गए गबन आरोप आधारित है इस अपराध पर की गई अनियमित पुलिस कार्यवाही का विधिक आधार क्या है ?

पुलिस थाना सुपेला के द्वारा पुलिस शिकायत पर करवाई नहीं करने के पश्चात JAN’ 2023 में न्यायिक दण्डाधिकारी (JMFC) कोर्ट दुर्ग में धारा 156(3) के तहत  याचिका दायर करके माननीय न्यायालय में 4 march  2024 को याचिका को सही पाते हुए आदेश पारित किया कि 6 आरोपियों पर FIR करते हुए धारा 420, 467,468,471 &120B के तहत मामला दर्ज़ किये जावें  |  ऐसा विधि सम्मत आदेश पारित किया गया है ।

धोखाधड़ी कुटरचना छलरचित दस्तावेज जैसे गंभीर और पुलिस संज्ञान के अपराध की शिकायत पर लंबित है मामला  !

कंपनी अपराध के आरोप को विधि द्वारा किस धारा में परिभाषित किया गया है और माननीय  न्यायालय द्वारा धारा 420,467,468 & 120B लगाते हुए धोखाधड़ी कुटरचना छलरचित दस्तावेज बनाते हुए षड़यंत्र पूर्वक सभी 6 अरोपियों ने मिल कर 1,82,44,593 रु हड़पने के उद्देश्य से अपराधिक कार्य को अंजाम दिया गया है वर्तमान में यह पुलिस के जांच का विषय है । 

न्यायालयीन कार्यवाही में आरोपी अपना पक्ष प्रस्तुत करने में कैसे कठिनाई महसूस करेंगे ?

न्यायालय में आरोपियों को अपना पक्ष रखने में दिक्कत  होने का कारण  ये है कि कुटरचित एवं छलरचित दस्तावेजों  को  बनाने  के  बाद अब उसमे कोई भी सुधार की  गुंजाईश नहीं है | तथा कथित तौर पर उठाये गया कचरा (लौह स्केप) का परिवहन बिल जो आरोपी प्रस्तुत कर रहे हैं उस स्केप का बिक्री मूल्य जो कि लगभग 700 करोड़ रु से ज्यादा होता  है, उस पैसे का आरोपियों ने कहाँ उपयोग किया और पैसे किस बैंक खाते में आये तथा किस पार्टी को  स्क्रैप  बेचा गया | जैसे सवालों का जब आरोपी पक्षकारों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की विधिक बाध्यता वर्तमान में बनी हुई है ।

शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल कंपनी से त्यागपत्र देकर क्या अपने कर्मचारियों को गबन का आरोपी साबित कर बच जायेंगे ?

इस आपरधिक कार्य करने के पूर्व में DHPPL (DURGA HITECH PROJECTs PVT. LTD.) के दो डायरेक्टर एवं अरोपीगण (शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल ) ने सत्र JAN 2019 में त्यागपत्र देकर कंपनी DHPPL  में अपने तीन मुलाजिमों को कंपनी DHPPL में नये डायरेक्टर  के  रूप में नियुक्त कर दिया जिसमें 50% पार्टनरशिप कंपनी  EBPL VENTURES  PVT. LTD के डायरेक्टर  से कोई सहमति नहीं ली गई  |

आरोपी गण पुलिस जाँच में गलत बयां कर रहें है और कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश कर रहें है |

उक्त कंपनी मामलों का विश्लेषण होगा जैसे की DHPPL (DURGA HITECH PROJECT PVT. LTD.) की 50% पार्टनरशिप  EBPL VENTURES  PVT. LTD ने कंपनी DHPPL में उत्पीड़न एवं क्रुप्रबंधन होने के कारण NCLT नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल कटक में OCT 2022 में याचिका दायर कर DHPPL के प्रबंधन में अनियमितताओं  को उजागर करते हुए माननीय ट्रिब्यूनल से संज्ञान लेने की गुजारिश की, जिसमें माननीय ट्रिब्यूनल का निर्णय अभी  लंबित हैं  |    

जुलाई 2024 में हाई कोर्ट बिलासपुर ने आरोपी गण की FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया था क्योकि पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी, जिसके विरुद्ध शिकायतकर्ता ने पुलिस द्वारा शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण तत्पश्यत जारी की गई क्लोजर रिपोर्ट के विरुद्माध ननीय CJM कोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी जिस पर सुनवाई चल रहीं है ?  

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नोट : उक्त मामले में निजी तौर पर तृतीय पक्षकार के तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालूसरे हैं ने एक नोटिस आरोपियों से वस्तुस्थिति जानने के लिए दी है जिसका विवरण इस लिंक पर है 👇👇👇 

https://meradrushtikon.blogspot.com/2024/06/blog-post.html




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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

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भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश बघेल सरकार ने दुर्ग की आम जनता के परिवहन साधन… “शहरी बस सेवा” दुर्ग को अनियमितताओं के हवाले कर दिया और आम जनता को सस्ती व सुगम बस सेवा का लाभ लेने से वंचित कर दिया जिसके बाद जनता ने भूपेश बघेल सरकार को सत्ताविहीन कर दिया…

देवेंद्र यादव ने गड़बड़ियां का संरक्षण किया भिलाई के पूर्व महापौर और विधायक देवेंद्र यादव दुर्ग को सार्वजनिक सेवा की प्रशासकीय कार्यवाही में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की परिणाम स्वरूप दुर्ग जिले की बस सेवा अनियमितताओं के हवाले हो गई और दुर्ग जिले की जनता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित हो गई । क्यों जरूरी है बस सेवा ? शहरी बस सेवा: लोक कल्याण की सेवा है  शहरी बस सेवा, शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो नागरिकों को किफायती, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा प्रदान करती है। यह निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करने और शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आम जनता के परिवहन का सबसे सस्ता और सुगम साधन होती है । प्रमुख विशेषताएं: विविधता:  शहरी बसें विभिन्न आकारों और क्षमताओं में उपलब्ध हैं, जो विभिन्न शहरों और यात्री भार की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। कुछ छोटी और अधिक चपल होती हैं, जो संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर ढंग से संचालित होती हैं, जबकि अन्य बड़ी और जोड़दा...

उत्पन्नाचे विवरणपत्र सादर करण्याची मुदत 31 ऑक्टोबर 2021 ऐवजी आता 30 नोव्हेंबर 2021 पर्यंत वाढविण्यात आली आहे;

Ministry of Finance कोविड-19 साथीची दुष्कर परिस्थिती लक्षात घेत सरकारने काही बाबतींत दिली मुदतवाढ Posted Date:- May 20, 2021 नवी दिल्‍ली, 20 मे 2021   कोविड-19 साथीच्या दुष्कर परिस्थितीमुळे विविध भागीदारांना भेडसावणाऱ्या अडचणींवर तोडगा काढण्यासाठी सरकार वचनबद्ध आहे. त्याच प्रयत्नांचा एक भाग म्हणून, विविध भागीदारांकडून आलेल्या विनंत्यांचा विचार करून, 'प्राप्तिकर कायदा,1961' (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर कायदा/ हा कायदा असा असेल) याअंतर्गतच्या अनुपालनासाठीची मुदत पुढील काही बाबतींत वाढवून देण्याचा निर्णय सरकारने घेतला आहे--: ‘प्राप्तिकर नियम,1962’ (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर नियम / हे नियम असा असेल) यातील नियम 114E अंतर्गत आणि संबंधित विविध अधिसूचनांच्या अधीन राहून  31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'वित्तीय वर्ष 2020-21 साठी SFT म्हणजे 'वित्तीय व्यवहार निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरता येईल; सदर नियम 114G अंतर्गत 31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'कॅलेंडर वर्ष 2020 साठी नोंदण्यायोग्य खात्याचे निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान आरंभ किया

  भारत में तम्बाकू के उपयोग से बहुत से रोग पैदा होते हैं और इसके इस्तेमाल से व्यक्ति मृत्यु की कगार तक पहुंच सकता है। देश में हर साल लगभग 1.35 मिलियन मौतें तम्बाकू के कारण होती हैं। भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक भी है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस) 2019 के अनुसार , देश भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत स्कूली छात्र विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते पाये गये हैं। हमारे स्कूल भवनों और परिसरों के आसपास तम्बाकू उत्पादों की विभिन्न रूपों में आसान पहुँच को उपरोक्त स्थिति पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीटीपी) के अंग के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नाबालिगों और युवाओं को तम्बाकू के सेवन से बचाने के लिए शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू रहित बनाने के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान" दिशानिर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूलों के लिए "तम्बाकू मुक्त शिक्षा संस्थान कार्यान्वयन मैनुअल" विकसित किया है और...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने 'रंगीन मछली' ऐप लॉन्च किया, यह ऐप सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, जो शौकीनों, एक्वेरियम शॉप मालिकों और मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान संसाधन प्रदान करता है।

   केंद्रीय मत्स्यपालन , पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने आज भुवनेश्वर स्थित भाकृअनुप-केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान   संस्थान (भाकृअनुप-सीफा) में "रंगीन मछली" मोबाइल ऐप लॉन्च किया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के सहयोग से भाकृअनुप-सीफा द्वारा विकसित यह ऐप सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है , जो शौकीनों , एक्वेरियम शॉप मालिकों और मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान संसाधन प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में मत्स्यपालन , पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अपने संबोधन के दौरान श्री राजीव रंजन सिंह ने सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि मंत्रालय इसके विकास पर जोर दे रहा है , रोजगार पैदा करने और अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इस क्षेत्र की क्षमता को पहचान रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक्वेरियम के शौक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। "रंगीन मछली" ऐप आठ भारतीय भाषाओं में लोकप्रिय सजावटी मछ...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

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