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MyGov has launched the Innovation Challenge to create an app that will enable individuals to learn simple sentences of any Indian language

MyGov launches innovation challenge for creating Indian Language Learning App

Aims to take forward PM'S Vision of celebrating India's Cultural Diversity

Posted Date:- May 17, 2021

MyGov, the citizen engagement platform of the Government of India, in partnership with Department of Higher Education has launched an Innovation Challenge for creating an Indian Language Learning App. This Innovation Challenge has been launched to take forward Prime Minister Narendra Modi’s vision of celebrating India’s cultural diversity through greater interaction among its constituent parts.

MyGov has launched the Innovation Challenge to create an app that will enable individuals to learn simple sentences of any Indian language and acquire working knowledge of a language. The objective of this challenge is to create an app that will promote regional language literacy, thereby creating greater cultural understanding within the country. The key parameters that will be looked into will include ease of use, simplicity, Graphical User Interface, gamification features, UI, UX and superior content, that makes it easy and fun to learn an Indian language.

The Innovation Challenge is open to Indian individuals, startups and companies. MyGov envisions the app to be multi-modular, with the capacity to teach through the written word, voice and video/visuals. App developers can propose multiple interfaces for engagement of learners. The innovation challenge cab be accessed at https://innovateindia.mygov.in/indian-language-app-challenge/. All terms and conditions for the challenge are also stated in that page and participants are encouraged to visit the site.

The Innovation Challenge closes on 27 May 2021. Upon evaluation of submission of prototypes, the top 10 teams will be invited to make presentations and top 3 will be selected by a jury. The top 3 will receive funding of INR 20, 10 and 5 lakhs to make the apps better. The solutions would be evaluated based on broad parameters such as Innovation, Scalability, Usability, Interoperability, Ease of deployment/roll-out and Campaign.

 

RKJ/M

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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारों के मौसम में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए

हाल के हफ़्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को यह ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी , जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और उसने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। असल में , इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा , देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज , खासकर मक्के से आता है। चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है , जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन , त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग , मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान , दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। श...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई)

खनन से होने वाले लाभ उन लोगों के साथ साझा करना , जो इसकी कीमत चुकाते हैं   संक्षिप्त विवरण खनिज महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधन हैं। इनके खनन से राजस्व प्राप्त होता है , उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। हालांकि , जिन जिलों में खनन गतिविधियां होती हैं , वहां रहने वाले लोगों को अक्सर इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। विस्थापन , प्रदूषण और पारंपरिक आजीविका के नुकसान का बोझ स्थानीय समुदायों को उठाना पड़ता है। भारत ने खनन से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा इन समुदायों के कल्याण के लिए वापस उपलब्ध कराने की एक विशेष व्यवस्था की है। यह व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) के माध्यम से संचालित होती है। डीएमएफ खनन पट्टाधारकों से कानूनी रूप से अनिवार्य योगदान एकत्र करते हैं। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) 17 सितंबर , 2015 को शुरू की गई थी। इसके तहत इन निधियों का उपयोग जमीनी स्तर पर कल्याण एवं विकास की योजनाओं के लिए किया जाता है। योजना के बारे में जानकारी खनन से प्रभावित प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम बुनियादी सामाजिक और भौतिक ...

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने प्राथमिक शिक्षक संबंधी शिक्षा में छह माह के प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया

यह पाठ्यक्रम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सेवारत प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करेगा केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने 16 सितंबर , 2026 को नई दिल्ली में प्राथमिक शिक्षक संबंधी शिक्षा (पीटीई) में छह माह के प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। यह पाठ्यक्रम ऐसे सेवारत प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है , जिनके पास बी.एड. की डिग्री है। यह पाठ्यक्रम ऐसे शिक्षकों के लिए प्राथमिक स्तर पर शिक्षण हेतु आवश्यक प्रमाणन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। यह विशेष व्यावसायिक विकास कार्यक्रम शिक्षकों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करेगा , जिससे वे प्राथमिक स्तर (कक्षा I से V) के   विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से शिक्षित करने के लिए आवश्यक कौशल और दक्षताएं विकसित कर सकेंगे। यह ब्रिज पाठ्यक्रम राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत शिक्षकों को बाल-केंद्रित , समावेशी तथा बाल विकास के अनुरुप शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा। इससे शिक्षा के आधारभूत औ...

घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना

  हर घर के लिए स्वच्छ और किफायती पाइप से आपूर्ति की जाने वाली खाना पकाने की गैस   संक्षिप्त विवरण       पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी ) का विस्तार भारत की स्वच्छ घरेलू ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की ओर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। घरों तक पीएनजी पहुंचाना सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन ( सीजीडी ) नेटवर्क के विकास का हिस्सा है। इस तरह के नेटवर्क में पाइपलाइन और उससे जुड़ी सुविधाएं होती हैं , जो घरों , वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों को सेवा देती हैं। इसे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी ) द्वारा अधिकृत संस्थाओं द्वारा विकसित किया जाता है। पीएनजीआरबी ने 309 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए ) में संस्थाओं को अधिकृत किया है। इन क्षेत्रों में देश के पूरे मुख्य भू-भाग शामिल हैं। 18 अगस्त 2026 तक देशभर में 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध थे। पीएनजी कवरेज को और बढ़ाने के लिए , 18 अगस्त 2026 को घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। यह योजना 1 सितंबर...

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंदौर (मध्य प्रदेश), भोपाल (मध्य प्रदेश) और उदयपुर (राजस्थान) शहरों के लिए आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत वेटलैंड सिटी प्रमाणन (डब्ल्यूसीए) के लिए भारत से तीन नामांकन प्रस्तुत किए हैं।

  पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंदौर , भोपाल और उदयपुर शहरों के लिए आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत वेटलैंड सिटी प्रमाणन के लिए प्रस्ताव दिया  पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंदौर (मध्य प्रदेश) , भोपाल (मध्य प्रदेश) और उदयपुर (राजस्थान) शहरों के लिए आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत वेटलैंड सिटी प्रमाणन (डब्ल्यूसीए) के लिए भारत से तीन नामांकन प्रस्तुत किए हैं। ये पहले तीन भारतीय शहर हैं जिनके लिए नगर निगमों के सहयोग से संबंधित राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर डब्ल्यूसीए के लिए नामांकन प्रस्तुत किए गए हैं। इन शहरों में और उसके आसपास स्थित आर्द्रभूमि अपने नागरिकों को बाढ़ विनियमन , आजीविका के अवसरों , मनोरंजक और सांस्कृतिक मूल्यों के संदर्भ में अनेक लाभ प्रदान करती है। सिरपुर वेटलैंड (इंदौर में रामसर साइट) , यशवंत सागर (इंदौर के समीप रामसर साइट) , भोज वेटलैंड (भोपाल में रामसर साइट) और उदयपुर और उसके आसपास कई वेटलैंड्स (झीलें) इन शहरों के लिए जीवन रेखा के रूप में काम करते हैं। तीन नामांकित शहरों में शाम...

सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी भंडारण सीमा 15 दिनों से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। अतिरिक्त स्टॉक की खरीद अग्रिम स्‍वीकृति योजना (एएएस) और शुल्‍क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत आयातित चीनी से ही की जाएगी

खुदरा चीनी की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट ; सरकार ने व्यापारियों और थोक विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वे कम हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा 15 दिनों की चीनी भंडारण सीमा को बढ़ाकर 30 दिन करने का निर्णय लिया है , बशर्ते मौजूदा 15 दिनों की सीमा से अधिक स्टॉक की मात्रा केवल अग्रिम स्‍वीकृति योजना (एएएस) और शुल्‍क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत आयातित चीनी से ही प्राप्त की जाए। खुले बाजार से खरीद के लिए स्टॉक रखने की सीमा अपरिवर्तित रहेगी और केवल 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगी। सरकार ने थोक उपभोक्ताओं द्वारा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल @https://foodstock.dfpd.gov.in/ के माध्यम से प्रत्येक शुक्रवार को चीनी स्टॉक की घोषणा और साप्ताहिक जानकारी के लिए एक तंत्र भी स्थापित किया है। सरकार ने चीनी के प्रमुख थोक उपभोक्ताओं के साथ विस्तृत परामर्श किया है और एक स्थिर और व्यवस्थित चीनी बाजार को बनाए रखने के उद्देश्य से उनके सुझावों पर विधिवत विचार किया गया है। वर्तमान में उत्पादन , उपभोग या उपयोग के लिए कच्चे...

हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने का संकल्प, उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़े का आगाज, राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को उर्वरक विभाग में हिंदी पखवाड़ा शुरू

राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरक विभाग में , 1 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा- 2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त सचिव श्री अनुराग रोहतगी के मार्गदर्शन में किया गया , जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री अनुराग रोहतगी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़े की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं , बल्कि देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी कार्मिकों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग राजभाषा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है , इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी क्रम में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अधिक...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्रालय ने एनईपी 2020 के कार्यान्वयन के लिए कदम उठाने को लेकर सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को सूचित किया।

  राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्रालय ने एनईपी 2020 के कार्यान्वयन के लिए कदम उठाने को लेकर सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को सूचित किया।   एनईपी 2020 के कुछ प्रावधान / मुख्य बातें इस प्रकार हैं : ( i) स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक सबकी एक समान पहुंच सुनिश्चित करना। ( ii) 3 से 6 वर्ष के बीच के सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल्यकाल देखभाल और शिक्षा सुनिश्चित करना। ( iii) नए पाठ्यक्रम और शैक्षणिक संरचना (5+3+3+4) को लागू करना। ( iv) कला एवं विज्ञान के बीच , पाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच और व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच सख्त रूप में कोई भिन्नता नहीं हाेने को सुनिश्चित करना। ( v) मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता पर राष्ट्रीय मिशन की स्थापना। ( vi) बहुभाषावाद और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर , कम से कम ग्रेड 5 तक , अच्छा होगा कि ग्रेड 8 तक शिक्षा का माध्यम घरेलू भाषा/मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा होगी। ( vii) मूल...

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0

समय पर क्रेडिट सहायता के ज़रिए बिज़नेस की मज़बूती बढ़ाना ईसीएलजीएस 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा क्रियान्वित यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थानों को कम क्रेडिट जोखिम के साथ अतिरिक्त कार्यशील पूंजी देने में सक्षम बनाती है। यह सरकार समर्थित गारंटियों के माध्यम से एमएसएमई , पात्र गैर - एमएसएमई व्यवसायों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस का समर्थन करती है। कोविड - 19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ईसीएलजीएस के पूर्ववर्ती चरणों के आधार पर , यह योजना व्यावसायिक निरंतरता को समर्थन देने के साथ - साथ संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करती है। व्यापक पहुंच , जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पहुंच तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी ने इसके दायरे का विस्तार किया है। तरलता में सुधार , रोजगार की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके , ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यावसायिक लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास में योगदान देती है।   ...

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