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पार्षदों को राज्य शासन द्वारा प्रदत अधिकारों का प्रयोग करने का अधिकार प्रदान करने वाले नियम कानून छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट है जिसके आधार पर पार्षद अपने अधिनियमित अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं उल्लेखनीय है कि, नगर पालिक अधिनियम के अंतर्गत आयोजित सम्मिलानो में पार्षदों की भूमिका और पार्षदों के अधिकारों को छत्तीसगढ़ के राज्य शासन ने कानून बनाकर स्पष्ट कर दिया है | जिससे अब यह स्पष्ट हो गया है कि, निगम कार्यवाहियों में अब पार्षदों का वर्चस्व बना रहेगा |

  

प्रश्न पूछ सकते हैं “पार्षद”

पार्षद अब अपने अधिकारो का प्रयोग सांसद और विधायको की तरह निगम सम्मिलानो में प्रश्न पूछकर करेंगे | आयुक्त अपने अधिनस्त अधिकारियो को बाध्य करेगा की वे पार्षदों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित दस्तावेजो का अवलोकन निगम सम्मिलन से दो दिवस पूर्व पार्षद को करवाएं

पार्षदों के प्रश्नों के उत्तर देना आवश्यक

आयुक्त अपना पदेन कर्तव्यो का अनुपालन सुनिश्चित करेगा की निगम सम्मिलन के उपरांत पार्षदों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर उन्हें लिखित में मिले | निगम सम्मिलानो को विधानसभा की तर्ज पर आयोजित करने के लिए राज्य शासन ने नियम बनाया है उल्लेखनीय है की यह नियम निगम सम्मिलन के सभी विषयों को स्पष्ट करते हुए उनके व्यवहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालता है |

जनता की समस्याओ पर प्रश्न पूछेगा पार्षद

पार्षदों को यह अधिकार प्रदान कर दिया है गया है कि, वे आम जनता की समस्याओ को निगम सम्मिलानो में उठाकर जिम्मेदार अधिकरियो से जवाब-तलब कर सके लेकिन गौर तलब रहे कि, राज्य शासन की यह पहल तभी सफल होगी जब सभी वार्डों के पार्षदगण अपने अधिकारों का प्रयोग करेंगे और जनसामान्य की समस्यायों का निराकरण करने के लिए जिम्मेदार अधिकारीयों को निगम सम्मिलन के माध्यम से प्रश्नांकित करेंगे |

पार्षदों को डरना आसान नहीं रहा

अब पार्षदों को कोई-भी न तो डरा सकेगा, न ही धमका सकेगा और ना ही बेवकूफ बना सकेगा क्योकि पार्षद के द्वारा जो प्रश्न पूछा जायेगा उसका जवाब जिम्मेदार अधिकारीयों को लिखित में सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से देना पड़ेगा | परिणाम स्वरूप पार्षद जन समस्याओ को प्रश्नांकित कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारीयों को निगम सम्मिलन के माध्यम से जवाबदेही तय करवाने की कार्यवाही अपने स्तर से करवा सकेगा |

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार

अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे, प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और अधिकारियो और निगम सम्मिलन के दिन सत्ताधारियों से लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे | अब भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी और निर्वाचित जन प्रतिनिधि तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेगा तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले नये नियम निम्नानुसार हैं :-

1 ) छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा गया है कि, अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए प्रत्येक पार्षद के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे :-

(एक ) निगम के सम्मिलन में उपस्थित होना तथा उसमे भाग लेना तथा आवश्यकता होने पर मत देना |

(दो) महापौर या आयुक्त का ध्यान निगम की संपत्ति की किसी हानी या निगम के किसी योजना या सेवा में किसी कमी या निगम द्वारा निष्पादित किए जा रहे किसी कार्य की ओर आकर्षित करना |

2 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम ३ में कार्यसूची के संबंध में स्पष्ट विधि निर्देश है कि, नगरपालिका के सम्मिलन के लिए सुचना में सम्मिलित की जाने वाली कार्यसूची निम्नानुसार होगी :-

क) पूर्ववर्ती सम्मिलन के कार्यवृत्त की पुष्टि करना, यदि उसकी पुष्टि उस सम्मिलन में न हुई हो;

ख) पार्षदों द्वारा पूछे गये प्रश्न तथा उनके उत्तर;

ग) महत्त्वपूर्ण पत्र व्यवहार के संबंध में जानकारी ;

घ) कार्यसूची के शेष कामकाज जो पूर्ववर्ती सम्मिलन में संपादित न किये जा सके हों;

ङ) समितियों या मुख्य कार्यपालन अधिअकरी द्वारा प्रस्तुत सुझाव तथा प्रस्ताव;

च) पार्षदों द्वारा लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव : परन्तु यह कि किसी विशेष सम्मिलन में सुचना में विनिर्दिष्ट कमाक्ज के सिवाय कोई अन्य कामकाज संपादित नहीं किया जाएगा: परन्तु यह और कि लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव केवल साधारण सम्मिलन में ही रखा जायेगा|

3 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम ६ में  कार्यसूची के मदों से संबंधित दस्तावेज का निरिक्षण किये जाने का पार्षदों का अधिकार को स्पष्ट करते हुए विधि निर्देशित किया गया है कि, :-

मुख्य कार्यपालन अधिअकरी द्वारा कार्यसूची में सम्मिलित विषयों से संबंधित समस्त दस्तावेजों को साधारण सम्मिलन से दो कार्य दिवस तथा विशेष सम्मिलन से पुरे एक दिवस पूर्व पार्षद के निरिक्षण के लिए तैयार रखे जायेंगे और कोई भी पार्षद, मुख्य कार्यपालन अधिअकरी द्वारा नियुक्त अधिकारी के समक्ष उनका निरिक्षण कार्यालयीन समय के दौरान कर सकेंगे |

4 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम नियम १०. कार्यवृत्त का निरिक्षण एवं पुष्टि के संबंध विधि निर्देशित किया गया है कि, :-  

कार्यवृत्त, जिसकी पुष्टि नहीं हुई हो, कार्यालयीन समय के दौरान निरिक्षण हेतु उपलब्ध रहेगा यदि किसी भी पार्षद को उसके किसी भाग पर आपत्ति हो, तो वह पीठासीन अधिकारी द्वारा सम्मिलन में रखा जायेगा, अन्यथा यह समझा जायेगा कि उसको पढ़ लिया गया है, और पीठासीन अधिकारी उस पर पुष्टिकरण के प्रमाण स्वरूप अपने हस्ताक्षर करेगा| पीठासीन अधिकारी को हस्ताक्षर करने के पूर्व लिपिकीय त्रुटियों को संशोधित करने की शक्ति होगी |

5 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम १७ से पार्षदों द्वारा जानकारी प्राप्त करने के अधिकार को स्पष्ट करने वाला विधि निर्देश दिया गया है और कहा गया है कि, :-  -

१) कोई पार्षद, अधिनियम के अधीन नगरपालिका के कृत्यों और दायित्वों के संबंध में या किसी समिति के कृत्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए पीठासीन अधिकारी को संबोधित कर प्रश्न पूछ सकेगा |

२) प्रश्न पूछने वाला पार्षद कम से कम दस दिन पूर्व अपने सम्यक हस्ताक्षर करके अथवा अंगूठे का निशान लगाकर तिन प्रतियों में प्रश्न सचिव को प्रस्तुत करेगा जिसे वह मुख्य कार्यपालन अधिकारी को अग्रिम कार्यवाही के लिए भेजेगा|

३) इस नियम के उप- नियम (५) के अध्यधीन रहते हुए, प्रत्येक पार्षद उसके द्वारा पूछे गये प्रश्न का उत्तर नगरपालिका के सम्मिलन अथवा उसके पश्चातवर्ती सम्मिलन में मौखिक रूप में प्राप्त करने का हकदार होगा: परन्तु यह कि यदि महापौर/ अध्यक्ष की राय में ऐसे किसी प्रश्न का मौखिक उत्तर देणे के स्थान पर लिखित उत्तर दिया जाना अधिक उपयुक्त हो तो, ऐसे प्रश्न का उत्तर लिखित में दिया जायेगा|

४) प्रत्येक प्रश्न का उत्तर महापौर/ अध्यक्ष के दवारा अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत मेयर - इन- काउन्सिल / प्रेसिडेंट - इन- काउन्सिल के किसी सदस्य द्वारा दिया जायेगा: परन्तु यह कि पीठासीन अधिकारी की अनुमति से मुख्य कार्यपालन अधिकारी , महापौर/ अध्यक्ष अथवा किसी सदस्य की ओर से प्रश्न का उत्तर दे सकेगा| ५) कोई भी प्रश्न अग्राह्य किया जायेगा, यदि वह :-

५) (क) नगरपालिका के कार्यों से प्रत्यक्षत: संबंध नहीं रखता है;

५) (ख) नगरपालिका अथवा उसकी किसी समिति की शक्तियों से संबंधित नहीं है;

५) (ग) किसी विधि के न्यायलय के समक्ष लंबित मामले से संबंधित है;

५) (घ) किसी पार्षद अथवा नगरपालिका के किसी अधिकारी या सेवक के उसके पदीय या सार्वजनिक हैसियत के सिवाय, उसके चरित्र या आचरण से संबंधित है;

५) (ङ ) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानहानिकारक या आक्षेपणीय है अथवा किसी व्यक्ति अथवा किसी समाज के वर्ग के विरुद्ध आरोप लगता है अथवा व्यंग्यात्मक है अथवा तुच्छ स्वरूप का है;

५) (च) महापौर/ अध्यक्ष या नगरपालिका के अधिकारी या सेवक को विश्वास में दी गई जानकारी की संसूचना में अन्तर्वलित है;

५) (छ) अत्यधिक लम्बा है या उसका पूर्व में उत्तर दिया जा चुका है;

५) (ज) महापौर/ अध्यक्ष या नगरपालिका के अधिकारी अथवा सेवक को दी गई किसी गोपनीय जानकारी के प्रकटीकरण से संबंधित है;

५) (झ) पार्षद या नगरपालिका के किसी पार्षद, अधिकारी अथवा सेवक के संबंध में वैयक्तिक स्वरूप का है या शिकायत से संबंधित है;

परन्तु यह और कि किसी प्रश्न को ग्राह्य या अग्राह्य करने के संबंध में महापौर/ अध्यक्ष का निर्वाचन अंतिम होगा |

पार्षद एकजुट होकर आयुक्त को भी हटवा सकते है कैसे ? नियम जानियें

नगर पालिक अधिनियम की धारा ५४ में आयुक्त कि नियुक्ति तथा उसका हटाया जाने के निम्नानुसार प्रावधान है : --

१) निगम के लिए आयुक्त कि नियुक्ति ऐसे नवीनीकरण योग्य काल के लिए जो ५ वर्ष से अधिक न हो, शासन द्वारा की जाएगी |

२) वह अपने पद से तुरंत हटा दिया जाएगा, यदि इस संबंध में लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में निगम के किसी सम्मिलन में १[निर्वाचित पार्षदों ] की कुल संख्या के इतने सदस्यों द्वारा मत दिया जाए, जो तीन - चौथाई से कम न हो, और वह शासन द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकेगा, यदि शासन को यह प्रतीत हो की वह अपने पद के कर्तव्यों का संपादन करने में असमर्थ है या वह किसी ऐसे दुराचरण या प्रमाद का दोषी रहा है, जिससे उसका हटाया जाना उचित ठहरता हो:

उपरोक्तानुसार विषय पार्षदों की पाठशाला के महत्वपूर्ण विषय है जिसकी जानकारी आम मतदाताओं को होनी चाहिए जिसके आधार पर आम मतदाता और नागरिक अपने पार्षद की पदेन भूमिका और कार्य व्यवहार का आकलन कर सकते है और इस बात की समीक्षा कर सकते हैं की उनका पार्षद अपने वार्ड की जनता के प्रति कितना जिम्मेदार है ?

जिन विषयों को खोज रहे हैं लोग

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों के परिवारों की भावनाओं को… हाउस लीज विषय बेहद आहत करने वाला मामला, हमेशा से रहा है लेकिन..! इससे भी कहीं अधिक पीड़ा..! इस बात की है कि, बीएसपी हाउस लीज मामले में… झूठा आश्वासन देकर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव जैसे लोगों की… मौका परस्ती वाली राजनीतिक भूमिका ने भिलाई वासियों के भावनात्मक ज़ख्मों को… बेरहमी से कुरेदने का काम किया है लेकिन..! अब इस मामले में विधि अपेक्षित संघर्ष प्रारंभ हो गया है… कागजी कार्यवाहियों में दफ़न किए गए..! जमीन घोटालों को उजागर करने वाला पहला पड़ाव भिलाई निगम संपत्ति ब्यौरा मांगने की नोटिस देकर… मौक परस्त कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव से प्रतिक्रिया मांगी गई क्योंकि इसी प्रतिक्रिया के आधार पर हाउस लीज विषय स्वमेव पुनर्जीवित हो जाएगा है…

निगम संपत्ति का ब्यौरा क्यों ? भिलाई विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र यादव ने दो बार बीएसपी कर्मियों के परिवार की भावनाओं से जुड़े बीएसपी हाउस लीज मामले को झूठी और तथ्य विहीन जानकारी देकर राजनीतिक तौर पर भुनाया है..! उल्लेखनीय है कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव ने अपने चुनावी प्रचार में… यह तथ्य विहीन भ्रम फैलाया था कि… बीएसपी हाउस लीज की रजिस्ट्री होगी तदोपरांत… भ्रमित होकर कई लोगों ने मालिकाना हक्क प्राप्त करने के तर्क विहीन बहकावे में आकर बीएसपी हाउस लीज रजिस्ट्री भी करवाई लेकिन…! इसके बाद रजिस्ट्री करवाने वाले कितने हाउस लीज धारकों को तथाकथित मालिकाना हक्क मिला है..! यह अनुत्तरित प्रश्न विचारणीय पहलू है।  कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव की कुटिल राजनीति के लिए मुंहतोड़ प्रश्न ? गौरतलब रहे कि, पूर्व महापौर देवेंद्र यादव ने भिलाई नगर पालिक निगम संपत्ति का लेखा-जोखा की वार्ड वार विभागीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करवाने का पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया था । जिसके कारण भिलाई नगर निगम की अचल संपत्ति पर कितना अवैधानिक अतिक्रमण और कब्जा किया गया है ? यह अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं हु...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मंच कला क्षेत्र के छह प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना गया, वर्ष 2022 और 2023 के लिए 92 कलाकार संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों के लिए चुने गए, 80 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार दिया जाएगा

  संगीत , नृत्य और नाट्य कला से संबंधित संगीत नाटक अकादमी , नई दिल्ली की जनरल काउंसिल , नेशनल ने 21 और 22 फरवरी 2024 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी बैठक में सर्वसम्मति से मंच कला के क्षेत्र में छह ( 6) प्रतिष्ठित हस्तियों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना है। अकादमी की फेलोशिप सबसे प्रतिष्ठित और अपूर्व सम्मान है। यह फेलोशिप किसी भी खास समय में 40 व्यक्तियों को दी जाती है। जनरल काउंसिल ने वर्ष 2022 और 2023 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत , नृत्य , रंगमंच , पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच , कठपुतली और मंच कला में समग्र योगदान/छात्रवृत्ति के क्षेत्र से 92 कलाकारों का भी चयन किया। इस प्रकार चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता समग्र रूप से राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अतिरिक्त ये ख्याति प्राप्त कलाकार संगीत , नृत्य , नाटक , लोक और जनजातीय कला , कठपुतली और संबद्ध रंगमंच कला रूपों आदि के रूप में मंच कला रूपों के संपूर्ण रूप को कवर करते हैं। अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष ...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों की मनोभावनाओं से खिलवाड़ करके… अपनी राजनैतिक रोटी सेकने वाले… चालबाज विधायक देवेंद्र यादव ने… पुनः एक बार बीएसपी कर्मियों के भावनात्मक ज़ख्मों को कुरदने वाला कार्य व्यवहार किया है… जिसका खुलासा विगत 19 मार्च के विधानसभा प्रश्न कार्यवाही से उजागर हुआ है… जिसमें विधायक देवेंद्र के द्वारा पूछे गए विधानसभा प्रश्नों का मुंहतोड़ प्रशासकीय जवाब… छत्तीसगढ़ के वित्तमंत्री ओ.पी.चौधरी ने दिया है… उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री के जवाब का विषयवस्तु स्पष्ट करता है कि, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र ने बीएसपी कर्मियों को बेवकूफ बनाओ का कूटनीतिक कार्य व्यवहार अपनाकर चुनाव जीता है….

बी.एस.पी प्रबंधन को लीज डीड अनुबंध पंजीयन हेतु प्राप्त आवेदनों के विषय की कूटनीतिक और छल-कपटपूर्ण राजनीति पर प्रकाश डाल रहे है… मौकापरस्त विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न… पढ़िए कैसे ? बीएसपी लीज मामले में विधायक देवेंद्र यादव की धोखाधड़ी उजागर हुई   छत्तीसगढ़ विधानसभा कार्यवाही 19 मार्च से भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों को आहत करने वाला मामला सामने आया गौर तलब रहे कि, छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रश्न क्रम 1. प्रश्न क्रमांक. 186 से विधायक देवेन्द्र ने चार प्रश्न पूछे… जिसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ने दिया है जिसके बाद विधायक देवेंद्र यादव के कथनी और करनी के बीच का भ्रम स्पष्ट हो गया और यह भी स्पष्ट हो गया कि… विधायक देवेंद्र ने विगत विधानसभा चुनावों के पहले कैसे बीएसपी आवासीय मकान के लीज मामले मतदाताओं को गुमराह किया है… पढ़िए विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न और मंत्री द्वारा दिया गया जवाब तथा विधायक देवेंद्र यादव के कूटनीतिक छलावे पर प्रकाश डालने वाले विचारणीय पहलू… विधायक देवेंद्र का प्रश्न क्रमांक 186/1  क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बी.एस.पी प...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

भूपेश सरकार की नाकामी को उजागर कर रहा है विधायक देवेंद्र… भिलाई की कामकाजी महिलाओं को तर्क विहीन संभावना बताकर भावनात्मक आधार पर गुमराह करने का मामल है : भिलाई का सी-मार्ट व्यवस्थापन कार्य व्यवहार... इसलिए आमंत्रित है विधायक देवेंद्र यादव… सी-मार्ट की नोट शीट और मूल नस्ती के साथ.. “विशेष चर्चा के लिए”... सार्वजनिक मंच पर आईए… विधायक महोदय…

कामकाजी महिलाओं की आर्थिक स्थिति से खिलवाड़ का मामल विधानसभा कार्यवाही के बाद से पारदर्शिता के दायरे में आ रहा है । भिलाई क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को अपूर्णीय आर्थिक क्षति पहुंचाने वाली विगत भूपेश सरकार की  "ख्याली पुलाव साबित होने वाली योजना सी-मार्ट" पर विगत वर्षों से जमी अनियमितताओं की धूल को हटाने वाल विधानसभा प्रश्न इस योजना से व्यथित महिलाओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि विधानसभा सत्र दिनांक 25 फरवरी, 2025 का प्रश्न क्रम 25. प्रश्न क्र. 176 से विधायक देवेन्द्र यादव ने प्रश्न पूछा कि, क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि, 1/ नगर पालिका निगम भिलाई के अंतर्गत संचालित सी-मार्ट की वर्तमान स्थिति क्या है ?  2/ क्या उनका संचालन किया जा रहा है ?  3/ यदि हां तो उनमें किन उत्पादनों का विक्रय किया जा रहा है ?  4/ यदि बंद है तो उसको पुनः संचालित कब तक किया जाएगा, जानकारी देवें ? उल्लेखनीय है कि, विधायक देवेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश सरकार की नाकामी और भिलाई नगर निगम के महापौर की तर्क विहीन प्रशासकीय कार्य नीति तथा शासकीय कोष को क्षत...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना )

  शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना ) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना का कार्यान्वयन करता है। शिल्पकार प्रशिक्षण देश भर में योजना  के तहत , 14,688 आईटीआई (सरकारी - 3,345 और निजी - 11,343) के माध्यम से 169 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत व्यापार पाठ्यक्रम को उद्योग , शिक्षा जगत और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के परामर्श से समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों , आधुनिक उपकरणों और मशीनरी को इसमें शामिल करना हैं। इसके अलावा , शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया जाता है। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण को वर्तमान उद्योग मानकों के अनुरूप बनाना , समग्र गुणवत्ता में सुधार करना , नामांकन बढ़ाना और प्रशिक्षुओं को वेतनभोगी रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए तैयार करना है। पिछले तीन वर्...

पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना, साथ ही पहली बार स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प , जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक

  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया ·         दो चरणों में होने वाली जनगणना- 2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य , पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना , साथ ही पहली बार स्व-गणना ( Self-Enumeration) का विकल्प , स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा के माध्यम से होगी , उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे , जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक , देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक , पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना- 2027 में शामिल होंगे केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के लिए चार digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- “प्रगति” (महिला) और “ विकास” (पुरुष) - का...

सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना

  सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना   पर्यटन मंत्रालय देशभर में आतिथ्य एवं पर्यटन से संबंधित अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करता है , जिनका उद्देश्य पुरुष और महिला प्रशिक्षुओं , स्थानीय समुदायों , जनजातीय क्षेत्रों आदि के कौशल विकास , कौशल उन्नयन एवं पुनः कौशल विकास को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम ‘सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण’ योजना के अंतर्गत संचालित किया जाता है। यह योजना देशभर में , जिसमें राजस्थान और महाराष्ट्र भी शामिल हैं , सरकारी संस्थानों एवं सूचीबद्ध निजी संस्थानों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान , फूड क्राफ्ट संस्थान , भारतीय पाककला संस्थान आदि शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने 2025 में भारतीय गुणवत्ता परिषद के माध्यम से इस योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर और 36,000 से अधिक लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्रदान कर सीबीएसपी योजना ने भारत के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के कार्यबल को सशक्त ...

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने छूट प्रबंधन और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर ईपीएफओ प्रशिक्षण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण निर्धारित किया

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान , पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आज ‘‘छूट प्रबंधन , कानूनी ढांचा और प्रतिभूतियों का मूल्यांकन’’ शीर्षक से एक उच्च स्तरीय पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नौ से 13 मार्च 2026 तक चलने वाला यह कार्यक्रम देशभर में ईपीएफओ अधिकारियों की नियामक और वित्तीय निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन सत्र का नेतृत्व पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने किया , जिन्होंने आधुनिक सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में विशेष प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम को संबोधित दिया। श्री कुमार रोहित ने इस बात पर प्रकाश डाला कि छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों का विनियमन ईपीएफओ के भीतर ‘‘सबसे विशिष्ट और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण’’ क्षेत्रों में से एक है। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित अधिकारियों के कंधों पर टिकी अपार जिम्मेदारी पर जोर दिया। श्री कुमार रोहित ने कहा , ‘‘ छूट प्राप्त प्रतिष्ठान आज करोड़ों रुपये के भविष्य निधि संचय का प्रबंधन करते...

भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए नए सामान संबंधी नियम अधिसूचित किए, कस्टम्स बैगेज (घोषणा एवं प्रसंस्करण) विनियम, 2026 अधिसूचित; मास्टर सर्कुलर भी जारी

नए बैगेज नियम , 2026 से प्रक्रियाएँ सरल , पारदर्शिता में वृद्धि , इलेक्ट्रॉनिक एवं अग्रिम घोषणा से यात्रियों को मिलेगा तेज़ और सुगम क्लीयरेंस नए बदलाव सामान्य मुक्त भत्ते को बढ़ाने की अनुमति देंगे ; निवास लाभों का हस्तांतरण ; आभूषणों के लिए विशेष भत्ते ; अस्थायी आयात/पुन: आयात के लिए नए प्रावधान ; एक लैपटॉप ( 18 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों के लिए) और पालतू जानवरों का शुल्क मुक्त आयात ; और यात्री सुविधा में वृद्धि केंद्र सरकार ने बैगेज नियम , 2026 को अधिसूचित किया है। नए सीमा शुल्क सामान ( घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम , 2026 और एक मास्टर परिपत्र भी जारी किया गया है। ये उपाय अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और संशोधित प्रावधानों को दर्शाते हैं और नई आर्थिक स्थितियों , बढ़ती यात्रा की मात्रा और यात्रियों की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य मंत्रालयों , हवाई अड्डा ऑपरेटरों सहित हितधारकों के परामर्श और यात्रियों से प्राप्त फीडबैक आदि के साथ किया गया है। ये नियम प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे , पारदर्शिता बढ़ाएंगे , इलेक्ट्रॉनिक और अग्रिम घोषणाओं को सक्षम करेंगे और ...

प्लास्टिक कचरा मुक्त माझी वसुंधरा करन्याचे... एक पर्यावरणीय आणि सामाजिक आव्हान आपल्या समोर उभे आहे... आणि त्यासाठी आपल्या सर्वाचीच भागीदारी आवश्यक आहे कारण … जगभरात प्लास्टिक कचऱ्याची गंभीर समस्या निर्माण झाली आहे.

आजच्या जगात प्लास्टिक कचरा ही एक जटिल समस्या आहे ज्यासाठी तातडीने आणि बहुआयामी उपाय करन्यास जनजागृती करणे अत्यावश्यक आहे ...... प्लास्टिकचे आरोग्यावर विपरीत परिणाम कसे होतात : आजच्या जगात प्लास्टिक हे एक अत्यावश्यक साहित्य बनले आहे. तथापि, त्याचा अतिवापर आणि अयोग्य विल्हेवाट लावल्याने जगभरात प्लास्टिक कचऱ्याची गंभीर समस्या निर्माण झाली आहे. हा कचरा जमिनीत, पाण्यात आणि हवेत जमा होत आहे, ज्यामुळे पर्यावरणीय ऱ्हास, जैवविविधतेला धोका आणि मानवी आरोग्यावर विपरीत परिणाम होत आहे. ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 ****************************** प्लास्टिक कचरा: धोका आणि उपाय समस्या: प्लास्टिक कचरा हा जमिनीत, पाण्यात आणि हवेत जमा होतो. त्यामुळे प्रदूषण होते आणि जैवविविधतेला धोका निर्माण होतो. मानवी आरोग्यावरही विपरीत परिणाम होतो. ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 ****************************** समस्येवर मात करन्यास उपाय: प्लास्टिकचा वापर कमी करणे. पुनर्वापर आणि पुनर्निर्मिती. योग्य व्यवस्थापन. जागरूकता निर्माण करणे. आपण सर्वांनी मिळ...

क्या दुर्ग जिले को पुनः मिल गई है “प्रशासकीय अनियमितताओं का संरक्षण करने वाली” कलेक्टर और गैर जिम्मेदार जिला दंडाधिकारी..? वर्षों से लंबित जन सामान्य के इन प्रश्नों का समाधान खोजने को मजबूर… दुर्ग की जनता के ये प्रश्न… अब अनुत्तरित नहीं रहेंगे क्योंकि जनहित संरक्षण के लिए एक से अधिक परिवाद सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख ने जिला न्यायालय के समक्ष सप्रमाण प्रस्तुत कर दिए हैं पढ़िए पूरे विषय…

नव पदस्थ दुर्ग कलेक्टर की प्रशासकीय काबिलियत की वस्तुस्थिति जल्द ही सामने आयेगी… गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने उन हाई प्रोफाइल राजनैतिक लोगो को उत्पन्न किया हैं जिन्होंने दुर्ग के मतदाताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर केंद्र और राज्य सरकार में समय-समय पर अग्रणी भूमिका निभाई है । कांग्रेस के स्व.मोतीलाल वोरा जी और जननेता भूपेश बघेल ऐसे ही उल्लेखनीय नाम है लेकिन विडंबना यह है कि, दुर्ग जिले में पदस्थ कलेक्टरों ने कई ऐसी प्रशासकीय अनियमितताओं का खुल्लम-खुल्ला संरक्षण किया हैं जिसके कारण लोकन्याय और लोकहित पर प्रत्यक्ष अतिक्रमण हुआ है क्योंकि दुर्ग के मतदाताओं से जनादेश प्राप्त करने वाले नेताओं ने दुर्ग में पदस्थ कलेक्टरों के कार्यों की नियमानुसार समीक्षा नहीं की थी इसलिए कई प्रशासकीय अनियमितताओं को दुर्ग जिले में फलने-फूलने का अवसर मिला जिसे सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख व्यक्तिगत रूप से जिला न्यायालय के समक्ष विधिवत परिवाद विषय बनाकर प्रस्तुत करके प्रश्नांकित कर रही है । इसलिए अब आने वाला समय बताएगा की दुर्ग की नव पदस्थ कलेक्टर साहिबा प्रशासकीय अनियमितताओं के प्रश्नों पर जनहित सं...

श्रमिक अधिकार जागरूकता कार्ययोजना में... आपकी सहभागिता अपेक्षित है क्योंकि श्रम कानून तभी प्रभावी होंगे जब इन कानूनों के दांव पेंच श्रम क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विधिक दृष्टिकोण से समझ आयेंगे… पढ़िए कार्य योजना…

श्रमिक अधिकार को अभिप्राप्त करने के लिए अगर आप भी अपना योगदान देना चाहते है तो यह लेख और कार्य योजना… आपको श्रम क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवा सकते हैं... ……………….. पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 Contact us: श्रम विभाग से संबंधित जानकारी पर आयोजित कार्यशाला एवं संगोष्ठी में प्रतिभागी बनाने के लिए नीचे दिए गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके संपर्क करें । श्रमिक अधिकार का अर्थ क्या है ? श्रमिक अधिकार वे अधिकार हैं जो सभी श्रमिकों को, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में काम करते हों, प्राप्त हैं। ये अधिकार उन्हें एक सुरक्षित और स्वस्थ कार्यस्थल, उचित वेतन और काम के उचित घंटे प्रदान करते हैं। ……………….. पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇 Contact us: महिला सुरक्षा और महिला श्रमिकों से संबंधित प्रावधानों की जानकारी पर आयोजित कार्यशाला एवं संगोष्ठी में प्रतिभागी बनाने के लिए नीचे दिए गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके संपर्क करें । आपको जानने लायक कुछ महत्वपूर्ण विषयवस्तु है जो श्रमिक अधिकारों में शामिल हैं वह निम्नानुसार है : समान काम के लिए समान वेतन:   महिलाओं और पुरुषों को समान काम के लिए स...

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