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पार्षदों को राज्य शासन द्वारा प्रदत अधिकारों का प्रयोग करने का अधिकार प्रदान करने वाले नियम कानून छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट है जिसके आधार पर पार्षद अपने अधिनियमित अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं उल्लेखनीय है कि, नगर पालिक अधिनियम के अंतर्गत आयोजित सम्मिलानो में पार्षदों की भूमिका और पार्षदों के अधिकारों को छत्तीसगढ़ के राज्य शासन ने कानून बनाकर स्पष्ट कर दिया है | जिससे अब यह स्पष्ट हो गया है कि, निगम कार्यवाहियों में अब पार्षदों का वर्चस्व बना रहेगा |

  

प्रश्न पूछ सकते हैं “पार्षद”

पार्षद अब अपने अधिकारो का प्रयोग सांसद और विधायको की तरह निगम सम्मिलानो में प्रश्न पूछकर करेंगे | आयुक्त अपने अधिनस्त अधिकारियो को बाध्य करेगा की वे पार्षदों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित दस्तावेजो का अवलोकन निगम सम्मिलन से दो दिवस पूर्व पार्षद को करवाएं

पार्षदों के प्रश्नों के उत्तर देना आवश्यक

आयुक्त अपना पदेन कर्तव्यो का अनुपालन सुनिश्चित करेगा की निगम सम्मिलन के उपरांत पार्षदों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर उन्हें लिखित में मिले | निगम सम्मिलानो को विधानसभा की तर्ज पर आयोजित करने के लिए राज्य शासन ने नियम बनाया है उल्लेखनीय है की यह नियम निगम सम्मिलन के सभी विषयों को स्पष्ट करते हुए उनके व्यवहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालता है |

जनता की समस्याओ पर प्रश्न पूछेगा पार्षद

पार्षदों को यह अधिकार प्रदान कर दिया है गया है कि, वे आम जनता की समस्याओ को निगम सम्मिलानो में उठाकर जिम्मेदार अधिकरियो से जवाब-तलब कर सके लेकिन गौर तलब रहे कि, राज्य शासन की यह पहल तभी सफल होगी जब सभी वार्डों के पार्षदगण अपने अधिकारों का प्रयोग करेंगे और जनसामान्य की समस्यायों का निराकरण करने के लिए जिम्मेदार अधिकारीयों को निगम सम्मिलन के माध्यम से प्रश्नांकित करेंगे |

पार्षदों को डरना आसान नहीं रहा

अब पार्षदों को कोई-भी न तो डरा सकेगा, न ही धमका सकेगा और ना ही बेवकूफ बना सकेगा क्योकि पार्षद के द्वारा जो प्रश्न पूछा जायेगा उसका जवाब जिम्मेदार अधिकारीयों को लिखित में सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से देना पड़ेगा | परिणाम स्वरूप पार्षद जन समस्याओ को प्रश्नांकित कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारीयों को निगम सम्मिलन के माध्यम से जवाबदेही तय करवाने की कार्यवाही अपने स्तर से करवा सकेगा |

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार

अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे, प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और अधिकारियो और निगम सम्मिलन के दिन सत्ताधारियों से लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे | अब भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी और निर्वाचित जन प्रतिनिधि तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेगा तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले नये नियम निम्नानुसार हैं :-

1 ) छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा गया है कि, अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए प्रत्येक पार्षद के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे :-

(एक ) निगम के सम्मिलन में उपस्थित होना तथा उसमे भाग लेना तथा आवश्यकता होने पर मत देना |

(दो) महापौर या आयुक्त का ध्यान निगम की संपत्ति की किसी हानी या निगम के किसी योजना या सेवा में किसी कमी या निगम द्वारा निष्पादित किए जा रहे किसी कार्य की ओर आकर्षित करना |

2 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम ३ में कार्यसूची के संबंध में स्पष्ट विधि निर्देश है कि, नगरपालिका के सम्मिलन के लिए सुचना में सम्मिलित की जाने वाली कार्यसूची निम्नानुसार होगी :-

क) पूर्ववर्ती सम्मिलन के कार्यवृत्त की पुष्टि करना, यदि उसकी पुष्टि उस सम्मिलन में न हुई हो;

ख) पार्षदों द्वारा पूछे गये प्रश्न तथा उनके उत्तर;

ग) महत्त्वपूर्ण पत्र व्यवहार के संबंध में जानकारी ;

घ) कार्यसूची के शेष कामकाज जो पूर्ववर्ती सम्मिलन में संपादित न किये जा सके हों;

ङ) समितियों या मुख्य कार्यपालन अधिअकरी द्वारा प्रस्तुत सुझाव तथा प्रस्ताव;

च) पार्षदों द्वारा लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव : परन्तु यह कि किसी विशेष सम्मिलन में सुचना में विनिर्दिष्ट कमाक्ज के सिवाय कोई अन्य कामकाज संपादित नहीं किया जाएगा: परन्तु यह और कि लोक महत्त्व के विषयों पर व्यक्तव्य देने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव केवल साधारण सम्मिलन में ही रखा जायेगा|

3 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम ६ में  कार्यसूची के मदों से संबंधित दस्तावेज का निरिक्षण किये जाने का पार्षदों का अधिकार को स्पष्ट करते हुए विधि निर्देशित किया गया है कि, :-

मुख्य कार्यपालन अधिअकरी द्वारा कार्यसूची में सम्मिलित विषयों से संबंधित समस्त दस्तावेजों को साधारण सम्मिलन से दो कार्य दिवस तथा विशेष सम्मिलन से पुरे एक दिवस पूर्व पार्षद के निरिक्षण के लिए तैयार रखे जायेंगे और कोई भी पार्षद, मुख्य कार्यपालन अधिअकरी द्वारा नियुक्त अधिकारी के समक्ष उनका निरिक्षण कार्यालयीन समय के दौरान कर सकेंगे |

4 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम नियम १०. कार्यवृत्त का निरिक्षण एवं पुष्टि के संबंध विधि निर्देशित किया गया है कि, :-  

कार्यवृत्त, जिसकी पुष्टि नहीं हुई हो, कार्यालयीन समय के दौरान निरिक्षण हेतु उपलब्ध रहेगा यदि किसी भी पार्षद को उसके किसी भाग पर आपत्ति हो, तो वह पीठासीन अधिकारी द्वारा सम्मिलन में रखा जायेगा, अन्यथा यह समझा जायेगा कि उसको पढ़ लिया गया है, और पीठासीन अधिकारी उस पर पुष्टिकरण के प्रमाण स्वरूप अपने हस्ताक्षर करेगा| पीठासीन अधिकारी को हस्ताक्षर करने के पूर्व लिपिकीय त्रुटियों को संशोधित करने की शक्ति होगी |

5 ) छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया ) नियम २०१६ के नियम १७ से पार्षदों द्वारा जानकारी प्राप्त करने के अधिकार को स्पष्ट करने वाला विधि निर्देश दिया गया है और कहा गया है कि, :-  -

१) कोई पार्षद, अधिनियम के अधीन नगरपालिका के कृत्यों और दायित्वों के संबंध में या किसी समिति के कृत्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए पीठासीन अधिकारी को संबोधित कर प्रश्न पूछ सकेगा |

२) प्रश्न पूछने वाला पार्षद कम से कम दस दिन पूर्व अपने सम्यक हस्ताक्षर करके अथवा अंगूठे का निशान लगाकर तिन प्रतियों में प्रश्न सचिव को प्रस्तुत करेगा जिसे वह मुख्य कार्यपालन अधिकारी को अग्रिम कार्यवाही के लिए भेजेगा|

३) इस नियम के उप- नियम (५) के अध्यधीन रहते हुए, प्रत्येक पार्षद उसके द्वारा पूछे गये प्रश्न का उत्तर नगरपालिका के सम्मिलन अथवा उसके पश्चातवर्ती सम्मिलन में मौखिक रूप में प्राप्त करने का हकदार होगा: परन्तु यह कि यदि महापौर/ अध्यक्ष की राय में ऐसे किसी प्रश्न का मौखिक उत्तर देणे के स्थान पर लिखित उत्तर दिया जाना अधिक उपयुक्त हो तो, ऐसे प्रश्न का उत्तर लिखित में दिया जायेगा|

४) प्रत्येक प्रश्न का उत्तर महापौर/ अध्यक्ष के दवारा अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत मेयर - इन- काउन्सिल / प्रेसिडेंट - इन- काउन्सिल के किसी सदस्य द्वारा दिया जायेगा: परन्तु यह कि पीठासीन अधिकारी की अनुमति से मुख्य कार्यपालन अधिकारी , महापौर/ अध्यक्ष अथवा किसी सदस्य की ओर से प्रश्न का उत्तर दे सकेगा| ५) कोई भी प्रश्न अग्राह्य किया जायेगा, यदि वह :-

५) (क) नगरपालिका के कार्यों से प्रत्यक्षत: संबंध नहीं रखता है;

५) (ख) नगरपालिका अथवा उसकी किसी समिति की शक्तियों से संबंधित नहीं है;

५) (ग) किसी विधि के न्यायलय के समक्ष लंबित मामले से संबंधित है;

५) (घ) किसी पार्षद अथवा नगरपालिका के किसी अधिकारी या सेवक के उसके पदीय या सार्वजनिक हैसियत के सिवाय, उसके चरित्र या आचरण से संबंधित है;

५) (ङ ) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानहानिकारक या आक्षेपणीय है अथवा किसी व्यक्ति अथवा किसी समाज के वर्ग के विरुद्ध आरोप लगता है अथवा व्यंग्यात्मक है अथवा तुच्छ स्वरूप का है;

५) (च) महापौर/ अध्यक्ष या नगरपालिका के अधिकारी या सेवक को विश्वास में दी गई जानकारी की संसूचना में अन्तर्वलित है;

५) (छ) अत्यधिक लम्बा है या उसका पूर्व में उत्तर दिया जा चुका है;

५) (ज) महापौर/ अध्यक्ष या नगरपालिका के अधिकारी अथवा सेवक को दी गई किसी गोपनीय जानकारी के प्रकटीकरण से संबंधित है;

५) (झ) पार्षद या नगरपालिका के किसी पार्षद, अधिकारी अथवा सेवक के संबंध में वैयक्तिक स्वरूप का है या शिकायत से संबंधित है;

परन्तु यह और कि किसी प्रश्न को ग्राह्य या अग्राह्य करने के संबंध में महापौर/ अध्यक्ष का निर्वाचन अंतिम होगा |

पार्षद एकजुट होकर आयुक्त को भी हटवा सकते है कैसे ? नियम जानियें

नगर पालिक अधिनियम की धारा ५४ में आयुक्त कि नियुक्ति तथा उसका हटाया जाने के निम्नानुसार प्रावधान है : --

१) निगम के लिए आयुक्त कि नियुक्ति ऐसे नवीनीकरण योग्य काल के लिए जो ५ वर्ष से अधिक न हो, शासन द्वारा की जाएगी |

२) वह अपने पद से तुरंत हटा दिया जाएगा, यदि इस संबंध में लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में निगम के किसी सम्मिलन में १[निर्वाचित पार्षदों ] की कुल संख्या के इतने सदस्यों द्वारा मत दिया जाए, जो तीन - चौथाई से कम न हो, और वह शासन द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकेगा, यदि शासन को यह प्रतीत हो की वह अपने पद के कर्तव्यों का संपादन करने में असमर्थ है या वह किसी ऐसे दुराचरण या प्रमाद का दोषी रहा है, जिससे उसका हटाया जाना उचित ठहरता हो:

उपरोक्तानुसार विषय पार्षदों की पाठशाला के महत्वपूर्ण विषय है जिसकी जानकारी आम मतदाताओं को होनी चाहिए जिसके आधार पर आम मतदाता और नागरिक अपने पार्षद की पदेन भूमिका और कार्य व्यवहार का आकलन कर सकते है और इस बात की समीक्षा कर सकते हैं की उनका पार्षद अपने वार्ड की जनता के प्रति कितना जिम्मेदार है ?

जिन विषयों को खोज रहे हैं लोग

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 एवं 2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा

·         सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 पूर्वी एवं मध्य भारत में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा , ·         डेयरी सहकारी संस्थाएँ महिलाओं को गृहिणी से उद्यमी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण वित्तीय इकोसिस्टम को सशक्त कर रही हैं तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा दे रही हैं , सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की वैश्विक ऊर्जा असंतुलन एवं ऊर्जा संकट के दौर में सहकारी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी एवं सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल भारत को आत्मनिर्भर एवं सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाएंगे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना , प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों एवं किसान-के...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा

  भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा हाइड्रोजन रेल का आगमन भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई 2026 को उद्घाटन के साथ , हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा। यह उत्तर रेलवे के जींद - सोनीपत खंड पर चलेगी। यह ट्रेन समर्पित हाइड्रोजन भंडारण , ईंधन भरने और परिचालन बुनियादी ढांचे के साथ उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकी से युक्त है। यह भारत में स्वच्छ रेल परिवहन की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करेगा। एक प्रायौगिक पहल के रूप में विकसित यह ट्रेन नवाचार के लिए भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार परिवहन ...

महाराष्ट्र विधानसभा ने नेवा अधिनियम को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया

  डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "एक राष्ट्र , एक एप्लीकेशन" के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , महाराष्ट्र विधानमंडल ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) को अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। महाराष्ट्र विधानसभा में नेवा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय , महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग और महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय के बीच 16 जुलाई 2026 को मुंबई के विधानसभा भवन में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव और नेवा के मिशन लीडर डॉ. सत्य प्रकाश उपस्थित थे। महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से सचिव-प्रथम श्री जितेंद्र भोले और सचिव-चतुर्थ श्री सुदर्शन साठे उपस्थित थे। महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग की सचिव श्रीमती सुप्रिया धिवरे , अध्यक्ष के निजी सचिव श्री पंडित खेड़कर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक का समापन भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय , महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय और महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग के बीच समझ...

वस्त्र मंत्रालय की सचिव सुश्री नीलम शमी राव ने आज भारत टेक्स 2026 इवेंट ऐप लॉच किया। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म भारत के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र आयोजन में खरीदारों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, वक्ताओं, सोर्सिंग सलाहकारों, भागीदारों, प्रदर्शकों और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।

वस्त्र मंत्रालय की सचिव सुश्री नीलम शमी राव ने भारत टेक्स 2026 मोबाइल ऐप लॉन्च किया  ' भारत टेक्स ऐप निर्बाध आयोजन नेविगेशन , प्रदर्शक खोज , बी 2 बी बैठकें , डिजिटल बैज , लीड कैप्चर और एआई-संचालित सहायता उपलब्ध कराएगा ' भारत के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र आयोजन में वस्त्र उद्योग जगत के लिए एक एकीकृत डिजिटल साथी , भारत टेक्स 2026 का आयोजन 14 से 17 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होगा आधिकारिक भारत टेक्स 2026 ऐप इस आयोजन की ‘डिजिटल-प्रथम’ सोच को दर्शाता है और यह व्यावसायिक संपर्क स्थापित करने , प्रतिभागियों के अनुभव को बेहतर बनाने , डेटा-आधारित सहभागिता को सक्षम करने तथा भारत टेक्स 2026 के व्यापक पैमाने और महत्वाकांक्षा को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह ऐप भारत टेक्स 2026 के लिए एक व्यापक डिजिटल सहयोगी के रूप में विकसित किया गया है , जिसके माध्यम से पंजीकृत प्रतिभागी आयोजन संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे , प्रदर्शकों को खोज कर सकेंगे , बैठकें निर्धारित कर सकेंगे , आयोजन स्थल पर मार्ग दर्शन प्राप्त कर सकेंगे , लीड कैप्चर कर सकेंगे , ज्ञान सत्रों...

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजाति के बच्चों को उनके सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना को लागू कर रहा है।   एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दर बढ़ाने के लिए , ब्रिज कोर्स , सुधारात्मक कक्षाएं एवं अकादमिक मार्गदर्शन जैसी कई पहलें शुरू की गई हैं। इनका उद्देश्य अध्यन की कमियों को दूर करना और कक्षाओं में सुचारू रूप से आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना है। उच्च शिक्षा एवं करियर विकल्पों की स्पष्टता प्रदान करने के लिए करियर परामर्श सत्र आयोजित किए जाते हैं। कक्षा 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से नीट/जेईई की तैयारी जैसे विशेष कोचिंग उपलब्ध कराए जाते हैं। सीएसआर के अंतर्गत , आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए तीन उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं , जो मध्य प्रदेश के भोपाल , आंध्र प्रदेश के चिंतपल्ले...

कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे.

काशिळ येथील कोविड रुग्णालयाचे पालकमंत्री बाळासाहेब पाटील यांच्या हस्ते उद्घाटन कराड व सातारा तालुक्यातील कोरोना रुग्णांना मिळणार चांगली आरोग्य सुविधा सातारा दि. ३ (जिमाका) : काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे. कराड व सातारा तसेच काशिळ परिसरातील नागरिकांना या रुग्णालयाचा लाभ होणार असून या रुग्णालयामार्फत कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत, असा विश्वास पालकमंत्री बाळसाहेब पाटील यांनी व्यक्त केला. काशिळ येथील कोविड रुगणालयाचे उद्घाटन पालकमंत्री श्री. पाटील यांच्या हस्ते आज झाले. यावेळी ते बोलत होते. या उद्घाटन प्रसंगी गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री शभूराज देसाई, खासदार श्रीनिवास पाटील, माजी मुख्यमंत्री तथा आमदार पृथ्वीराज चव्हाण, प्रभारी जिल्हाधिकारी रामचंद्र शिंदे, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौडा, प्रांताधिकारी मिनाज मुल्ला, तहसीलदार आशा होळकर, जिल्हा शल्यचिकित्सक डॉ. सुभाष चव्हाण आदी उपस्थित होते. या कोविड रुग्णालयात 32 आयसीयु बेड व 31 ऑक्सिजन बेड असे एकूण 63 बेड आहेत. यामधील सुरुवातीला 32 ऑक्सिज...

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