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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि चंद्रयान-3 मिशन से चंद्रमा के वायुमंडल, मिट्टी, खनिजों आदि के बारे में जानकारी भेजने की आशा है, जो दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए अपनी तरह का पहला और आने वाले समय में दूरगामी प्रभाव डालने वाला हो सकता है


 "विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने निश्चित कार्यक्रम के अनुसार मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना शुरू कर दिया है": डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर लैंडिंग के सजीव प्रसारण में देखी गई भारी दिलचस्पी को देखते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अगले महीने देश भर में एक जागरूकता अभियान शुरू करेगा, जिसमें विद्यार्थियों और आम लोगों को शामिल किया जाएगा

"अंतरिक्ष तक पहुंचने की हमारी क्षमता अब संदेह से परे सिद्ध हो गई है क्योंकि प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा है कि अंतरिक्ष कोई सीमा नहीं है": डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि चंद्रयान-3 मिशन से चंद्रमा के वायुमंडल, मिट्टी, खनिज आदि के बारे में जानकारी भेजने की आशा है, जो दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए अपनी तरह का पहला और आने वाले समय में दूरगामी प्रभाव वाला हो सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने निश्चित कार्यक्रम के अनुसार मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना शुरू कर दिया है।

एक मीडिया एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 पर विज्ञान पेलोड का मुख्य ध्यान चंद्रमा की सतह की विशेषताओं का एक एकीकृत मूल्यांकन प्रदान करना है, जिसमें चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी (रेगोलिथ) के साथ ही चंद्रमा की सतह के तापीय गुण और उसकी सतह के निकट प्लाज्मा वातावरण के तत्व शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों और चंद्रमा की सतह पर उल्का पिंडों के प्रभाव का भी आकलन करेगा।

केंद्रीयविज्ञानऔरप्रौद्योगिकीराज्यमंत्री (स्वतंत्रप्रभार), प्रधानमंत्रीकार्यालयमेंराज्यमंत्री, कार्मिक, लोकशिकायत, पेंशन, परमाणुऊर्जाऔरअंतरिक्षराज्यमंत्रीडॉ. जितेंद्रसिंहने कहा, "चंद्रमा की सतह के निकट पर्यावरण की मूल-भूत समझ और अन्वेषणों के लिए भविष्य में चंद्र आवास विकास करने के लिए ये सभी आवश्यक हैं।" विक्रम लैंडरमें सिस्मोमीटर चंद्र भूकंपीय गतिविधि उपकरण (आईएलएसए), चाएसटीई (चंद्रा सरफेस थर्मो-फिजिकल एक्सपेरिमेंट), लैंगमुइर प्रोब (आरएएमबीएचए-एलपी) और एक लेजर रेट्रोरेफ्लेक्टर ऐरे पेलोड है और प्रज्ञान रोवर में अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस) पेलोड है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "इन सभी पेलोड के 24 अगस्त 2023 से मिशन के अंत तक निरंतर संचालन की योजना बनाई गई है।" चंद्र भूकंपीय गतिविधि उपकरण (आईएलएसए) चंद्र भूकंपीय गतिविधियों के साथ-साथ चंद्रमा की सतह पर प्रभाव डालने वाले उल्का पिंडों का निरंतर अवलोकन करेगा। चंद्र भूकंपीय गतिविधि उपकरण चंद्रमा के उच्च अक्षांशों पर चंद्रमा की सतह पर कंपन का अध्ययन करने के लिए भेजा गया पहला भूकंपमापी है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "ये माप हमें उल्कापिंड के प्रभाव और भूकंपीय गतिविधियों से संभावित खतरों की आवृत्ति को समझकर भविष्य के आवास विकास की योजना बनाने में सहायता करेंगे।"

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चाएसटीई (चंद्रा सरफेस थर्मो-फिजिकल एक्सपेरिमेंट) विक्रम लैंडर पर लगाया गया एक अन्य प्रमुख उपकरण है। चाएसटीई पर लगे दस उच्च परिशुद्धता तापीय सेंसर, तापमान भिन्नता का अध्ययन करने के लिए चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी में खुदाई करेंगे। चाएसटीई चंद्र सतह के पहले 10 सेन्टी मीटर के थर्मोफिजिकल गुणों का अध्ययन करने वाला पहला प्रयोग है।

चंद्रमा के दिन और रात के दौरान चंद्रमा की सतह के तापमान में काफी परिवर्तन होता है। स्थानीय मध्यरात्रि के आसपास न्यूनतम तापमान -100 ℃या इससे कम और स्थानीय दोपहर के आसपास 100℃या इससे अधिक होता है। चंद्रमा की ऊपरीछिद्रपूर्ण मिट्टी (लगभग 5 से 20 मीटर की मोटाई वाली) के एक उत्कृष्ट इन्सुलेटर होने की उम्मीद है। इस इन्सुलेशन गुण और हवा की अनुपस्थिति के कारण, रेगोलिथ की ऊपरी सतह और आंतरिक भाग के बीच बहुत महत्वपूर्ण तापमान अंतर होने की संभावना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "रेजोलिथ का कम घनत्व और उच्च थर्मल इन्सुलेशन भविष्य के आवासों के लिए बुनियादी निर्माण खंड के रूप में इसकी क्षमता को बढ़ाता है, जबकि जीवित रहने के लिए तापमान भिन्नता की विस्तृत श्रृंखला का आकलन महत्वपूर्ण है।"

 लैंगमुइर जांच द्वारा चंद्रमा के निकट की सतह पर प्लाज्मा और इसकी समय भिन्नता का अध्ययन किया जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि रंभा-एलपी निकट-सतह प्लाज्मा और चंद्रमा के उच्च अक्षांश में इसकी दैनिक भिन्नता का पहला वास्तविक अवलोकन होगा, जहां सूर्य का ऊंचाई कोण कम है।

उन्होंने कहा, "ये भविष्य के मानव मिशनों के लिए चंद्रमा की सतह पर चार्जिंग का आकलन करने में सहायता करेंगे।" प्रज्ञान रोवर पर लगे अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोपी (एलआईबीएस) रोवर ट्रैक के साथ स्टॉप-पॉइंट्स (लगभग 4.5 घंटे में एक बार) पर चंद्रमा की सतह के तत्वों की माप करेंगे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये उच्च अक्षांशों में चंद्रमा की सतह की मौलिक संरचना का पहला स्वस्थानी अध्ययन है। उन्होंने कहा, "ये माप संभावित सतही मौलिक रचनाओं के बारे में अनुमान लगा सकते हैं जो भविष्य में आत्मनिर्भर आवास विकास के लिए सहायक होंगे।" लैंडर और रोवर पर लगे जांच उपकरणों के अलावा, चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा की प्रणोदन कक्षा में रहने योग्य ग्रह पृथ्वी (एसएचएपीई) की स्पेक्ट्रोपोलरिमेट्री ले जाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह भविष्य में पृथ्वी जैसे एक्सोप्लैनेट की पहचान करने में सहायता करेगा।” उन्होंने कहा, “प्रारंभिक विश्लेषण और समेकन के बाद डेटा विद्यार्थियों और आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालांकि लैंडर और रोवर मिशन का जीवन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर एक चंद्रमा दिवस तक चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसके बाद विक्रम और प्रज्ञान हाइबरनेशन में चले जाएंगे। इसरो वैज्ञानिकों ने कहा कि चंद्रमा की एक रात या 14 पृथ्वी दिनों के बाद, यदि दोनों रात के अत्यधिक ठंडे तापमान से बच गए तो फिर से बची हुई बैटरी और सौर पैनलों को शुरु करने की कोशिश की जाएगी।

इस बीच, इसरो सितंबर के पहले सप्ताह तक 7 पेलोड (उपकरण) के साथ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) एक्सएल का उपयोग करके आदित्य-एल-1 मिशन के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। आदित्य एल-1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष-आधारित भारतीय मिशन होगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु-1 (एल-1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर है। एल-1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखे गए उपग्रह को बिना किसी ग्रहण के सूर्य को लगातार देखने का प्रमुख लाभ होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष में भारत का पहला मानव युक्त मिशन गगनयान, इसरो के सामने अगली बड़ी परियोजना होगी। उन्होंने कहा, “किसी मानव को भेजने से पहले हमारे पास कम से कम दो मिशन होंगे। हमारा पहला मिशन संभवतः सितंबर या अगले साल की शुरुआत में होगा, जहां कुछ घंटों के लिए हम एक खाली अंतरिक्ष यान भेजेंगे जो ऊपर जाएगा और पानी में वापस आएगा। यह यान यह देखने के लिए जाएगा कि क्या हम बिना किसी नुकसान के इसकी सुरक्षित वापसी को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। यदि वह सफल रहा तो हम अगले वर्ष व्योम मित्र नामक रोबोट भेजकर दूसरा परीक्षण करेंगे, और अगर वह भी सफल रहा तो हम अंतिम मिशन भेजेंगे, जो मानव मिशन होगा। यह संभवतः वर्श 2024 की दूसरी छमाही में हो सकता है। शुरुआत में हमने 2022 के लिए इसकी योजना बनाई थी, लेकिन कोविड के कारण इसमें देरी हो गई है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद पिछले नौ वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को लागू करने की स्वतंत्रता दी गई है।

उन्होंने कहा, “वर्ष 2013 तक, प्रति वर्ष औसतन लगभग 3 प्रक्षेपण के साथ 40 प्रक्षेपण वाहन मिशन पूरे किए गए। पिछले 9 वर्षों में 53 प्रक्षेपण यान मिशनों के साथ प्रति वर्ष औसतन 6 प्रक्षेपणों के साथ यह दोगुना हो गया है।'' डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ''इसरो ने 2013 तक 35 विदेशी उपग्रह पक्षेपित किए थे। पिछले 9 वर्षों में इसमें तेजी से वृद्धि देखी गई है और 400 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए गए।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले 9 वर्षों में महत्वपूर्ण और नागरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली स्थापित की है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की शुरुआत की, जिससे भारतीय निजी व्यवसाइयों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र आसानी से सुलभ हो गया और सभी हितधारकों को शामिल करते हुए एक व्यापक भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 जारी की गई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में वर्ष 2014 के बाद ही अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप का उदय होना शुरू हुआ, वर्तमान में लगभग 200 स्टार्टअप विभिन्न अंतरिक्ष क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। पहला भारतीय निजी उप-कक्षीय प्रक्षेपण हाल ही में देखा गया था जिसे अंतरिक्ष क्षेत्रीय सुधारों के माध्यम से सक्षम किया गया था।

उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष तक पहुंचने की हमारी क्षमता अब संदेह से परे सिद्ध हो गई है क्योंकि प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा है कि अंतरिक्ष कोई सीमा नहीं है। इसलिए हम ब्रह्मांड के अनछुए क्षेत्रों की खोज के लिए अंतरिक्ष से आगे निकल गए हैं।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग के सजीव प्रसारण में देखी गई भारी रुचि को देखते हुए इसरो अगले महीने देश भर में जागरूकता अभियान शुरू करेगा, जिसमें विद्यार्थियों और आम लोगों को शामिल किया जाएगा।

 8 मिलियन से अधिक दर्शकों के साथ, चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का चंद्रमा की सतह पर उतरने का सजीव प्रसारण के दौरान यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कार्यक्रम बन गया। इसने विश्व कप 2022 के क्वार्टर फाइनल के दौरान ब्राजील और दक्षिण कोरिया के बीच फुटबॉल मैच के समान दर्शकों की संख्या को भी पीछे छोड़ दिया, जिसे 6.1 मिलियन बार देखा गया था। बाद में करीब 7 करोड़ दर्शकों ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग देखी। हालाँकि, कई समूह द्वारा स्क्रीनिंग के कारण दर्शकों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।

जागरूकता अभियान 1 सितंबर को शुरू होगा और इसमें स्पेस स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी साझेदार कंपनियों पर ध्यान देने के साथ फ्लैशमॉब्स, मेगा टाउन हॉल, क्विज़ प्रतियोगिता और सर्वश्रेष्ठ सेल्फी सहित ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियां शामिल होंगी।

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एमजी/एमएस/आरपी/एमकेएस/डीवीप्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2023 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 1952748) आगंतुक पटल : 156

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निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

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बी.एस.पी प्रबंधन को लीज डीड अनुबंध पंजीयन हेतु प्राप्त आवेदनों के विषय की कूटनीतिक और छल-कपटपूर्ण राजनीति पर प्रकाश डाल रहे है… मौकापरस्त विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न… पढ़िए कैसे ? बीएसपी लीज मामले में विधायक देवेंद्र यादव की धोखाधड़ी उजागर हुई   छत्तीसगढ़ विधानसभा कार्यवाही 19 मार्च से भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों को आहत करने वाला मामला सामने आया गौर तलब रहे कि, छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रश्न क्रम 1. प्रश्न क्रमांक. 186 से विधायक देवेन्द्र ने चार प्रश्न पूछे… जिसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ने दिया है जिसके बाद विधायक देवेंद्र यादव के कथनी और करनी के बीच का भ्रम स्पष्ट हो गया और यह भी स्पष्ट हो गया कि… विधायक देवेंद्र ने विगत विधानसभा चुनावों के पहले कैसे बीएसपी आवासीय मकान के लीज मामले मतदाताओं को गुमराह किया है… पढ़िए विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न और मंत्री द्वारा दिया गया जवाब तथा विधायक देवेंद्र यादव के कूटनीतिक छलावे पर प्रकाश डालने वाले विचारणीय पहलू… विधायक देवेंद्र का प्रश्न क्रमांक 186/1  क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बी.एस.पी प...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

भूपेश सरकार की नाकामी को उजागर कर रहा है विधायक देवेंद्र… भिलाई की कामकाजी महिलाओं को तर्क विहीन संभावना बताकर भावनात्मक आधार पर गुमराह करने का मामल है : भिलाई का सी-मार्ट व्यवस्थापन कार्य व्यवहार... इसलिए आमंत्रित है विधायक देवेंद्र यादव… सी-मार्ट की नोट शीट और मूल नस्ती के साथ.. “विशेष चर्चा के लिए”... सार्वजनिक मंच पर आईए… विधायक महोदय…

कामकाजी महिलाओं की आर्थिक स्थिति से खिलवाड़ का मामल विधानसभा कार्यवाही के बाद से पारदर्शिता के दायरे में आ रहा है । भिलाई क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को अपूर्णीय आर्थिक क्षति पहुंचाने वाली विगत भूपेश सरकार की  "ख्याली पुलाव साबित होने वाली योजना सी-मार्ट" पर विगत वर्षों से जमी अनियमितताओं की धूल को हटाने वाल विधानसभा प्रश्न इस योजना से व्यथित महिलाओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि विधानसभा सत्र दिनांक 25 फरवरी, 2025 का प्रश्न क्रम 25. प्रश्न क्र. 176 से विधायक देवेन्द्र यादव ने प्रश्न पूछा कि, क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि, 1/ नगर पालिका निगम भिलाई के अंतर्गत संचालित सी-मार्ट की वर्तमान स्थिति क्या है ?  2/ क्या उनका संचालन किया जा रहा है ?  3/ यदि हां तो उनमें किन उत्पादनों का विक्रय किया जा रहा है ?  4/ यदि बंद है तो उसको पुनः संचालित कब तक किया जाएगा, जानकारी देवें ? उल्लेखनीय है कि, विधायक देवेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश सरकार की नाकामी और भिलाई नगर निगम के महापौर की तर्क विहीन प्रशासकीय कार्य नीति तथा शासकीय कोष को क्षत...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना )

  शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना ) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना का कार्यान्वयन करता है। शिल्पकार प्रशिक्षण देश भर में योजना  के तहत , 14,688 आईटीआई (सरकारी - 3,345 और निजी - 11,343) के माध्यम से 169 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत व्यापार पाठ्यक्रम को उद्योग , शिक्षा जगत और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के परामर्श से समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों , आधुनिक उपकरणों और मशीनरी को इसमें शामिल करना हैं। इसके अलावा , शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया जाता है। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण को वर्तमान उद्योग मानकों के अनुरूप बनाना , समग्र गुणवत्ता में सुधार करना , नामांकन बढ़ाना और प्रशिक्षुओं को वेतनभोगी रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए तैयार करना है। पिछले तीन वर्...

पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना, साथ ही पहली बार स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प , जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक

  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया ·         दो चरणों में होने वाली जनगणना- 2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य , पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना , साथ ही पहली बार स्व-गणना ( Self-Enumeration) का विकल्प , स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा के माध्यम से होगी , उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे , जनगणना- 2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के प्रतीक , देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक , पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना- 2027 में शामिल होंगे केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जनगणना- 2027 के लिए चार digital tools का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- “प्रगति” (महिला) और “ विकास” (पुरुष) - का...

सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना

  सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना   पर्यटन मंत्रालय देशभर में आतिथ्य एवं पर्यटन से संबंधित अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करता है , जिनका उद्देश्य पुरुष और महिला प्रशिक्षुओं , स्थानीय समुदायों , जनजातीय क्षेत्रों आदि के कौशल विकास , कौशल उन्नयन एवं पुनः कौशल विकास को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम ‘सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण’ योजना के अंतर्गत संचालित किया जाता है। यह योजना देशभर में , जिसमें राजस्थान और महाराष्ट्र भी शामिल हैं , सरकारी संस्थानों एवं सूचीबद्ध निजी संस्थानों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान , फूड क्राफ्ट संस्थान , भारतीय पाककला संस्थान आदि शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने 2025 में भारतीय गुणवत्ता परिषद के माध्यम से इस योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर और 36,000 से अधिक लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्रदान कर सीबीएसपी योजना ने भारत के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के कार्यबल को सशक्त ...

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने छूट प्रबंधन और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर ईपीएफओ प्रशिक्षण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण निर्धारित किया

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान , पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आज ‘‘छूट प्रबंधन , कानूनी ढांचा और प्रतिभूतियों का मूल्यांकन’’ शीर्षक से एक उच्च स्तरीय पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नौ से 13 मार्च 2026 तक चलने वाला यह कार्यक्रम देशभर में ईपीएफओ अधिकारियों की नियामक और वित्तीय निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन सत्र का नेतृत्व पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने किया , जिन्होंने आधुनिक सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में विशेष प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम को संबोधित दिया। श्री कुमार रोहित ने इस बात पर प्रकाश डाला कि छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों का विनियमन ईपीएफओ के भीतर ‘‘सबसे विशिष्ट और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण’’ क्षेत्रों में से एक है। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित अधिकारियों के कंधों पर टिकी अपार जिम्मेदारी पर जोर दिया। श्री कुमार रोहित ने कहा , ‘‘ छूट प्राप्त प्रतिष्ठान आज करोड़ों रुपये के भविष्य निधि संचय का प्रबंधन करते...

भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए नए सामान संबंधी नियम अधिसूचित किए, कस्टम्स बैगेज (घोषणा एवं प्रसंस्करण) विनियम, 2026 अधिसूचित; मास्टर सर्कुलर भी जारी

नए बैगेज नियम , 2026 से प्रक्रियाएँ सरल , पारदर्शिता में वृद्धि , इलेक्ट्रॉनिक एवं अग्रिम घोषणा से यात्रियों को मिलेगा तेज़ और सुगम क्लीयरेंस नए बदलाव सामान्य मुक्त भत्ते को बढ़ाने की अनुमति देंगे ; निवास लाभों का हस्तांतरण ; आभूषणों के लिए विशेष भत्ते ; अस्थायी आयात/पुन: आयात के लिए नए प्रावधान ; एक लैपटॉप ( 18 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों के लिए) और पालतू जानवरों का शुल्क मुक्त आयात ; और यात्री सुविधा में वृद्धि केंद्र सरकार ने बैगेज नियम , 2026 को अधिसूचित किया है। नए सीमा शुल्क सामान ( घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम , 2026 और एक मास्टर परिपत्र भी जारी किया गया है। ये उपाय अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और संशोधित प्रावधानों को दर्शाते हैं और नई आर्थिक स्थितियों , बढ़ती यात्रा की मात्रा और यात्रियों की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य मंत्रालयों , हवाई अड्डा ऑपरेटरों सहित हितधारकों के परामर्श और यात्रियों से प्राप्त फीडबैक आदि के साथ किया गया है। ये नियम प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे , पारदर्शिता बढ़ाएंगे , इलेक्ट्रॉनिक और अग्रिम घोषणाओं को सक्षम करेंगे और ...

प्लास्टिक कचरा मुक्त माझी वसुंधरा करन्याचे... एक पर्यावरणीय आणि सामाजिक आव्हान आपल्या समोर उभे आहे... आणि त्यासाठी आपल्या सर्वाचीच भागीदारी आवश्यक आहे कारण … जगभरात प्लास्टिक कचऱ्याची गंभीर समस्या निर्माण झाली आहे.

आजच्या जगात प्लास्टिक कचरा ही एक जटिल समस्या आहे ज्यासाठी तातडीने आणि बहुआयामी उपाय करन्यास जनजागृती करणे अत्यावश्यक आहे ...... प्लास्टिकचे आरोग्यावर विपरीत परिणाम कसे होतात : आजच्या जगात प्लास्टिक हे एक अत्यावश्यक साहित्य बनले आहे. तथापि, त्याचा अतिवापर आणि अयोग्य विल्हेवाट लावल्याने जगभरात प्लास्टिक कचऱ्याची गंभीर समस्या निर्माण झाली आहे. हा कचरा जमिनीत, पाण्यात आणि हवेत जमा होत आहे, ज्यामुळे पर्यावरणीय ऱ्हास, जैवविविधतेला धोका आणि मानवी आरोग्यावर विपरीत परिणाम होत आहे. ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 ****************************** प्लास्टिक कचरा: धोका आणि उपाय समस्या: प्लास्टिक कचरा हा जमिनीत, पाण्यात आणि हवेत जमा होतो. त्यामुळे प्रदूषण होते आणि जैवविविधतेला धोका निर्माण होतो. मानवी आरोग्यावरही विपरीत परिणाम होतो. ****************************** पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 ****************************** समस्येवर मात करन्यास उपाय: प्लास्टिकचा वापर कमी करणे. पुनर्वापर आणि पुनर्निर्मिती. योग्य व्यवस्थापन. जागरूकता निर्माण करणे. आपण सर्वांनी मिळ...

क्या दुर्ग जिले को पुनः मिल गई है “प्रशासकीय अनियमितताओं का संरक्षण करने वाली” कलेक्टर और गैर जिम्मेदार जिला दंडाधिकारी..? वर्षों से लंबित जन सामान्य के इन प्रश्नों का समाधान खोजने को मजबूर… दुर्ग की जनता के ये प्रश्न… अब अनुत्तरित नहीं रहेंगे क्योंकि जनहित संरक्षण के लिए एक से अधिक परिवाद सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख ने जिला न्यायालय के समक्ष सप्रमाण प्रस्तुत कर दिए हैं पढ़िए पूरे विषय…

नव पदस्थ दुर्ग कलेक्टर की प्रशासकीय काबिलियत की वस्तुस्थिति जल्द ही सामने आयेगी… गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने उन हाई प्रोफाइल राजनैतिक लोगो को उत्पन्न किया हैं जिन्होंने दुर्ग के मतदाताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर केंद्र और राज्य सरकार में समय-समय पर अग्रणी भूमिका निभाई है । कांग्रेस के स्व.मोतीलाल वोरा जी और जननेता भूपेश बघेल ऐसे ही उल्लेखनीय नाम है लेकिन विडंबना यह है कि, दुर्ग जिले में पदस्थ कलेक्टरों ने कई ऐसी प्रशासकीय अनियमितताओं का खुल्लम-खुल्ला संरक्षण किया हैं जिसके कारण लोकन्याय और लोकहित पर प्रत्यक्ष अतिक्रमण हुआ है क्योंकि दुर्ग के मतदाताओं से जनादेश प्राप्त करने वाले नेताओं ने दुर्ग में पदस्थ कलेक्टरों के कार्यों की नियमानुसार समीक्षा नहीं की थी इसलिए कई प्रशासकीय अनियमितताओं को दुर्ग जिले में फलने-फूलने का अवसर मिला जिसे सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख व्यक्तिगत रूप से जिला न्यायालय के समक्ष विधिवत परिवाद विषय बनाकर प्रस्तुत करके प्रश्नांकित कर रही है । इसलिए अब आने वाला समय बताएगा की दुर्ग की नव पदस्थ कलेक्टर साहिबा प्रशासकीय अनियमितताओं के प्रश्नों पर जनहित सं...

श्रमिक अधिकार जागरूकता कार्ययोजना में... आपकी सहभागिता अपेक्षित है क्योंकि श्रम कानून तभी प्रभावी होंगे जब इन कानूनों के दांव पेंच श्रम क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विधिक दृष्टिकोण से समझ आयेंगे… पढ़िए कार्य योजना…

श्रमिक अधिकार को अभिप्राप्त करने के लिए अगर आप भी अपना योगदान देना चाहते है तो यह लेख और कार्य योजना… आपको श्रम क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवा सकते हैं... ……………….. पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇👇👇 Contact us: श्रम विभाग से संबंधित जानकारी पर आयोजित कार्यशाला एवं संगोष्ठी में प्रतिभागी बनाने के लिए नीचे दिए गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके संपर्क करें । श्रमिक अधिकार का अर्थ क्या है ? श्रमिक अधिकार वे अधिकार हैं जो सभी श्रमिकों को, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में काम करते हों, प्राप्त हैं। ये अधिकार उन्हें एक सुरक्षित और स्वस्थ कार्यस्थल, उचित वेतन और काम के उचित घंटे प्रदान करते हैं। ……………….. पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇 Contact us: महिला सुरक्षा और महिला श्रमिकों से संबंधित प्रावधानों की जानकारी पर आयोजित कार्यशाला एवं संगोष्ठी में प्रतिभागी बनाने के लिए नीचे दिए गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके संपर्क करें । आपको जानने लायक कुछ महत्वपूर्ण विषयवस्तु है जो श्रमिक अधिकारों में शामिल हैं वह निम्नानुसार है : समान काम के लिए समान वेतन:   महिलाओं और पुरुषों को समान काम के लिए स...

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