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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि चंद्रयान-3 मिशन से चंद्रमा के वायुमंडल, मिट्टी, खनिजों आदि के बारे में जानकारी भेजने की आशा है, जो दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए अपनी तरह का पहला और आने वाले समय में दूरगामी प्रभाव डालने वाला हो सकता है


 "विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने निश्चित कार्यक्रम के अनुसार मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना शुरू कर दिया है": डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर लैंडिंग के सजीव प्रसारण में देखी गई भारी दिलचस्पी को देखते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अगले महीने देश भर में एक जागरूकता अभियान शुरू करेगा, जिसमें विद्यार्थियों और आम लोगों को शामिल किया जाएगा

"अंतरिक्ष तक पहुंचने की हमारी क्षमता अब संदेह से परे सिद्ध हो गई है क्योंकि प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा है कि अंतरिक्ष कोई सीमा नहीं है": डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि चंद्रयान-3 मिशन से चंद्रमा के वायुमंडल, मिट्टी, खनिज आदि के बारे में जानकारी भेजने की आशा है, जो दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए अपनी तरह का पहला और आने वाले समय में दूरगामी प्रभाव वाला हो सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने निश्चित कार्यक्रम के अनुसार मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना शुरू कर दिया है।

एक मीडिया एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 पर विज्ञान पेलोड का मुख्य ध्यान चंद्रमा की सतह की विशेषताओं का एक एकीकृत मूल्यांकन प्रदान करना है, जिसमें चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी (रेगोलिथ) के साथ ही चंद्रमा की सतह के तापीय गुण और उसकी सतह के निकट प्लाज्मा वातावरण के तत्व शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों और चंद्रमा की सतह पर उल्का पिंडों के प्रभाव का भी आकलन करेगा।

केंद्रीयविज्ञानऔरप्रौद्योगिकीराज्यमंत्री (स्वतंत्रप्रभार), प्रधानमंत्रीकार्यालयमेंराज्यमंत्री, कार्मिक, लोकशिकायत, पेंशन, परमाणुऊर्जाऔरअंतरिक्षराज्यमंत्रीडॉ. जितेंद्रसिंहने कहा, "चंद्रमा की सतह के निकट पर्यावरण की मूल-भूत समझ और अन्वेषणों के लिए भविष्य में चंद्र आवास विकास करने के लिए ये सभी आवश्यक हैं।" विक्रम लैंडरमें सिस्मोमीटर चंद्र भूकंपीय गतिविधि उपकरण (आईएलएसए), चाएसटीई (चंद्रा सरफेस थर्मो-फिजिकल एक्सपेरिमेंट), लैंगमुइर प्रोब (आरएएमबीएचए-एलपी) और एक लेजर रेट्रोरेफ्लेक्टर ऐरे पेलोड है और प्रज्ञान रोवर में अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस) पेलोड है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "इन सभी पेलोड के 24 अगस्त 2023 से मिशन के अंत तक निरंतर संचालन की योजना बनाई गई है।" चंद्र भूकंपीय गतिविधि उपकरण (आईएलएसए) चंद्र भूकंपीय गतिविधियों के साथ-साथ चंद्रमा की सतह पर प्रभाव डालने वाले उल्का पिंडों का निरंतर अवलोकन करेगा। चंद्र भूकंपीय गतिविधि उपकरण चंद्रमा के उच्च अक्षांशों पर चंद्रमा की सतह पर कंपन का अध्ययन करने के लिए भेजा गया पहला भूकंपमापी है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "ये माप हमें उल्कापिंड के प्रभाव और भूकंपीय गतिविधियों से संभावित खतरों की आवृत्ति को समझकर भविष्य के आवास विकास की योजना बनाने में सहायता करेंगे।"

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चाएसटीई (चंद्रा सरफेस थर्मो-फिजिकल एक्सपेरिमेंट) विक्रम लैंडर पर लगाया गया एक अन्य प्रमुख उपकरण है। चाएसटीई पर लगे दस उच्च परिशुद्धता तापीय सेंसर, तापमान भिन्नता का अध्ययन करने के लिए चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी में खुदाई करेंगे। चाएसटीई चंद्र सतह के पहले 10 सेन्टी मीटर के थर्मोफिजिकल गुणों का अध्ययन करने वाला पहला प्रयोग है।

चंद्रमा के दिन और रात के दौरान चंद्रमा की सतह के तापमान में काफी परिवर्तन होता है। स्थानीय मध्यरात्रि के आसपास न्यूनतम तापमान -100 ℃या इससे कम और स्थानीय दोपहर के आसपास 100℃या इससे अधिक होता है। चंद्रमा की ऊपरीछिद्रपूर्ण मिट्टी (लगभग 5 से 20 मीटर की मोटाई वाली) के एक उत्कृष्ट इन्सुलेटर होने की उम्मीद है। इस इन्सुलेशन गुण और हवा की अनुपस्थिति के कारण, रेगोलिथ की ऊपरी सतह और आंतरिक भाग के बीच बहुत महत्वपूर्ण तापमान अंतर होने की संभावना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "रेजोलिथ का कम घनत्व और उच्च थर्मल इन्सुलेशन भविष्य के आवासों के लिए बुनियादी निर्माण खंड के रूप में इसकी क्षमता को बढ़ाता है, जबकि जीवित रहने के लिए तापमान भिन्नता की विस्तृत श्रृंखला का आकलन महत्वपूर्ण है।"

 लैंगमुइर जांच द्वारा चंद्रमा के निकट की सतह पर प्लाज्मा और इसकी समय भिन्नता का अध्ययन किया जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि रंभा-एलपी निकट-सतह प्लाज्मा और चंद्रमा के उच्च अक्षांश में इसकी दैनिक भिन्नता का पहला वास्तविक अवलोकन होगा, जहां सूर्य का ऊंचाई कोण कम है।

उन्होंने कहा, "ये भविष्य के मानव मिशनों के लिए चंद्रमा की सतह पर चार्जिंग का आकलन करने में सहायता करेंगे।" प्रज्ञान रोवर पर लगे अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोपी (एलआईबीएस) रोवर ट्रैक के साथ स्टॉप-पॉइंट्स (लगभग 4.5 घंटे में एक बार) पर चंद्रमा की सतह के तत्वों की माप करेंगे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये उच्च अक्षांशों में चंद्रमा की सतह की मौलिक संरचना का पहला स्वस्थानी अध्ययन है। उन्होंने कहा, "ये माप संभावित सतही मौलिक रचनाओं के बारे में अनुमान लगा सकते हैं जो भविष्य में आत्मनिर्भर आवास विकास के लिए सहायक होंगे।" लैंडर और रोवर पर लगे जांच उपकरणों के अलावा, चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा की प्रणोदन कक्षा में रहने योग्य ग्रह पृथ्वी (एसएचएपीई) की स्पेक्ट्रोपोलरिमेट्री ले जाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह भविष्य में पृथ्वी जैसे एक्सोप्लैनेट की पहचान करने में सहायता करेगा।” उन्होंने कहा, “प्रारंभिक विश्लेषण और समेकन के बाद डेटा विद्यार्थियों और आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालांकि लैंडर और रोवर मिशन का जीवन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर एक चंद्रमा दिवस तक चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसके बाद विक्रम और प्रज्ञान हाइबरनेशन में चले जाएंगे। इसरो वैज्ञानिकों ने कहा कि चंद्रमा की एक रात या 14 पृथ्वी दिनों के बाद, यदि दोनों रात के अत्यधिक ठंडे तापमान से बच गए तो फिर से बची हुई बैटरी और सौर पैनलों को शुरु करने की कोशिश की जाएगी।

इस बीच, इसरो सितंबर के पहले सप्ताह तक 7 पेलोड (उपकरण) के साथ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) एक्सएल का उपयोग करके आदित्य-एल-1 मिशन के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। आदित्य एल-1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष-आधारित भारतीय मिशन होगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु-1 (एल-1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर है। एल-1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखे गए उपग्रह को बिना किसी ग्रहण के सूर्य को लगातार देखने का प्रमुख लाभ होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष में भारत का पहला मानव युक्त मिशन गगनयान, इसरो के सामने अगली बड़ी परियोजना होगी। उन्होंने कहा, “किसी मानव को भेजने से पहले हमारे पास कम से कम दो मिशन होंगे। हमारा पहला मिशन संभवतः सितंबर या अगले साल की शुरुआत में होगा, जहां कुछ घंटों के लिए हम एक खाली अंतरिक्ष यान भेजेंगे जो ऊपर जाएगा और पानी में वापस आएगा। यह यान यह देखने के लिए जाएगा कि क्या हम बिना किसी नुकसान के इसकी सुरक्षित वापसी को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। यदि वह सफल रहा तो हम अगले वर्ष व्योम मित्र नामक रोबोट भेजकर दूसरा परीक्षण करेंगे, और अगर वह भी सफल रहा तो हम अंतिम मिशन भेजेंगे, जो मानव मिशन होगा। यह संभवतः वर्श 2024 की दूसरी छमाही में हो सकता है। शुरुआत में हमने 2022 के लिए इसकी योजना बनाई थी, लेकिन कोविड के कारण इसमें देरी हो गई है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद पिछले नौ वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को लागू करने की स्वतंत्रता दी गई है।

उन्होंने कहा, “वर्ष 2013 तक, प्रति वर्ष औसतन लगभग 3 प्रक्षेपण के साथ 40 प्रक्षेपण वाहन मिशन पूरे किए गए। पिछले 9 वर्षों में 53 प्रक्षेपण यान मिशनों के साथ प्रति वर्ष औसतन 6 प्रक्षेपणों के साथ यह दोगुना हो गया है।'' डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ''इसरो ने 2013 तक 35 विदेशी उपग्रह पक्षेपित किए थे। पिछले 9 वर्षों में इसमें तेजी से वृद्धि देखी गई है और 400 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए गए।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले 9 वर्षों में महत्वपूर्ण और नागरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली स्थापित की है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की शुरुआत की, जिससे भारतीय निजी व्यवसाइयों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र आसानी से सुलभ हो गया और सभी हितधारकों को शामिल करते हुए एक व्यापक भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 जारी की गई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में वर्ष 2014 के बाद ही अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप का उदय होना शुरू हुआ, वर्तमान में लगभग 200 स्टार्टअप विभिन्न अंतरिक्ष क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। पहला भारतीय निजी उप-कक्षीय प्रक्षेपण हाल ही में देखा गया था जिसे अंतरिक्ष क्षेत्रीय सुधारों के माध्यम से सक्षम किया गया था।

उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष तक पहुंचने की हमारी क्षमता अब संदेह से परे सिद्ध हो गई है क्योंकि प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा है कि अंतरिक्ष कोई सीमा नहीं है। इसलिए हम ब्रह्मांड के अनछुए क्षेत्रों की खोज के लिए अंतरिक्ष से आगे निकल गए हैं।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग के सजीव प्रसारण में देखी गई भारी रुचि को देखते हुए इसरो अगले महीने देश भर में जागरूकता अभियान शुरू करेगा, जिसमें विद्यार्थियों और आम लोगों को शामिल किया जाएगा।

 8 मिलियन से अधिक दर्शकों के साथ, चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का चंद्रमा की सतह पर उतरने का सजीव प्रसारण के दौरान यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कार्यक्रम बन गया। इसने विश्व कप 2022 के क्वार्टर फाइनल के दौरान ब्राजील और दक्षिण कोरिया के बीच फुटबॉल मैच के समान दर्शकों की संख्या को भी पीछे छोड़ दिया, जिसे 6.1 मिलियन बार देखा गया था। बाद में करीब 7 करोड़ दर्शकों ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग देखी। हालाँकि, कई समूह द्वारा स्क्रीनिंग के कारण दर्शकों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।

जागरूकता अभियान 1 सितंबर को शुरू होगा और इसमें स्पेस स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी साझेदार कंपनियों पर ध्यान देने के साथ फ्लैशमॉब्स, मेगा टाउन हॉल, क्विज़ प्रतियोगिता और सर्वश्रेष्ठ सेल्फी सहित ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियां शामिल होंगी।

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एमजी/एमएस/आरपी/एमकेएस/डीवीप्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2023 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 1952748) आगंतुक पटल : 156

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जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा

  भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता को बढ़ावा हाइड्रोजन रेल का आगमन भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई 2026 को उद्घाटन के साथ , हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा। यह उत्तर रेलवे के जींद - सोनीपत खंड पर चलेगी। यह ट्रेन समर्पित हाइड्रोजन भंडारण , ईंधन भरने और परिचालन बुनियादी ढांचे के साथ उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकी से युक्त है। यह भारत में स्वच्छ रेल परिवहन की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करेगा। एक प्रायौगिक पहल के रूप में विकसित यह ट्रेन नवाचार के लिए भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार परिवहन ...

महाराष्ट्र विधानसभा ने नेवा अधिनियम को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया

  डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "एक राष्ट्र , एक एप्लीकेशन" के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , महाराष्ट्र विधानमंडल ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) को अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। महाराष्ट्र विधानसभा में नेवा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय , महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग और महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय के बीच 16 जुलाई 2026 को मुंबई के विधानसभा भवन में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव और नेवा के मिशन लीडर डॉ. सत्य प्रकाश उपस्थित थे। महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से सचिव-प्रथम श्री जितेंद्र भोले और सचिव-चतुर्थ श्री सुदर्शन साठे उपस्थित थे। महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग की सचिव श्रीमती सुप्रिया धिवरे , अध्यक्ष के निजी सचिव श्री पंडित खेड़कर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक का समापन भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय , महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय और महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग के बीच समझ...

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं

जनजातीय छात्रों के लिए योजनाएं केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजाति के बच्चों को उनके सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना को लागू कर रहा है।   एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दर बढ़ाने के लिए , ब्रिज कोर्स , सुधारात्मक कक्षाएं एवं अकादमिक मार्गदर्शन जैसी कई पहलें शुरू की गई हैं। इनका उद्देश्य अध्यन की कमियों को दूर करना और कक्षाओं में सुचारू रूप से आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना है। उच्च शिक्षा एवं करियर विकल्पों की स्पष्टता प्रदान करने के लिए करियर परामर्श सत्र आयोजित किए जाते हैं। कक्षा 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से नीट/जेईई की तैयारी जैसे विशेष कोचिंग उपलब्ध कराए जाते हैं। सीएसआर के अंतर्गत , आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए तीन उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं , जो मध्य प्रदेश के भोपाल , आंध्र प्रदेश के चिंतपल्ले...

रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 एवं 2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा

·         सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 पूर्वी एवं मध्य भारत में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा , ·         डेयरी सहकारी संस्थाएँ महिलाओं को गृहिणी से उद्यमी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण वित्तीय इकोसिस्टम को सशक्त कर रही हैं तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा दे रही हैं , सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की वैश्विक ऊर्जा असंतुलन एवं ऊर्जा संकट के दौर में सहकारी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी एवं सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल भारत को आत्मनिर्भर एवं सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाएंगे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना , प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों एवं किसान-के...

कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे.

काशिळ येथील कोविड रुग्णालयाचे पालकमंत्री बाळासाहेब पाटील यांच्या हस्ते उद्घाटन कराड व सातारा तालुक्यातील कोरोना रुग्णांना मिळणार चांगली आरोग्य सुविधा सातारा दि. ३ (जिमाका) : काशिळ येथे सुरु करण्यात आलेल्या कोविड रुग्णालय कराड व साताराच्या मध्यवर्ती ठिकाणी आहे. कराड व सातारा तसेच काशिळ परिसरातील नागरिकांना या रुग्णालयाचा लाभ होणार असून या रुग्णालयामार्फत कोविड रुग्णांना चांगल्या आरोग्य सुविधा मिळणार आहेत, असा विश्वास पालकमंत्री बाळसाहेब पाटील यांनी व्यक्त केला. काशिळ येथील कोविड रुगणालयाचे उद्घाटन पालकमंत्री श्री. पाटील यांच्या हस्ते आज झाले. यावेळी ते बोलत होते. या उद्घाटन प्रसंगी गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री शभूराज देसाई, खासदार श्रीनिवास पाटील, माजी मुख्यमंत्री तथा आमदार पृथ्वीराज चव्हाण, प्रभारी जिल्हाधिकारी रामचंद्र शिंदे, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय गौडा, प्रांताधिकारी मिनाज मुल्ला, तहसीलदार आशा होळकर, जिल्हा शल्यचिकित्सक डॉ. सुभाष चव्हाण आदी उपस्थित होते. या कोविड रुग्णालयात 32 आयसीयु बेड व 31 ऑक्सिजन बेड असे एकूण 63 बेड आहेत. यामधील सुरुवातीला 32 ऑक्सिज...

शैक्षणिक सत्र 2023-24 से केंद्र/राज्य सरकार के 57 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों/संस्थानों में चार-वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) का शुभारंभ हुआ पढ़िए पूरी जानकारी

अमोल मालुसरे का दृष्टिकोण है कि, अध्यापन क्षेत्र में अब आया है बड़ा बदलाव ! राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने पूरे देश में शैक्षणिक सत्र 2023-24 से 57 अध्यापक शिक्षा संस्थानों (टीईआई) में एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) शुरू किया है। यह एनईपी 2020 के तहत एनसीटीई का एक प्रमुख कार्यक्रम है। आईटीईपी, जिसे 26 अक्टूबर 2021 को अधिसूचित किया गया था, एक 4 साल की दोहरी-समग्र स्नातक डिग्री है, जो बी.ए. बी.एड./ बी.एससी बी.एड. / और बी.कॉम बी.एड. पाठ्यक्रम पेश करती है। यह पाठ्यक्रम; नयी स्कूल संरचना के 4 चरणों यानि फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी (5+3+3+4) के लिए शिक्षकों को तैयार करेगा। यह कार्यक्रम शुरू में प्रतिष्ठित केंद्र/राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों/संस्थानों में पायलट मोड में चलाया जा रहा है। आईटीईपी उन सभी छात्रों के लिए उपलब्ध होगा, जो सेकेंडरी के बाद अपनी पसंद से शिक्षण को अपने करियर के रूप में चुनते हैं। इस एकीकृत पाठ्यक्रम से छात्रों को एक वर्ष की बचत का लाभ होगा, क्योंकि वे वर्तमान बी.एड. योजना के लिए आवश्यक 5 वर्षों के बजाय पाठ्यक्रम को 4 वर्...

छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश बघेल सरकार ने दुर्ग की आम जनता के परिवहन साधन… “शहरी बस सेवा” दुर्ग को अनियमितताओं के हवाले कर दिया और आम जनता को सस्ती व सुगम बस सेवा का लाभ लेने से वंचित कर दिया जिसके बाद जनता ने भूपेश बघेल सरकार को सत्ताविहीन कर दिया…

देवेंद्र यादव ने गड़बड़ियां का संरक्षण किया भिलाई के पूर्व महापौर और विधायक देवेंद्र यादव दुर्ग को सार्वजनिक सेवा की प्रशासकीय कार्यवाही में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की परिणाम स्वरूप दुर्ग जिले की बस सेवा अनियमितताओं के हवाले हो गई और दुर्ग जिले की जनता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित हो गई । क्यों जरूरी है बस सेवा ? शहरी बस सेवा: लोक कल्याण की सेवा है  शहरी बस सेवा, शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो नागरिकों को किफायती, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा प्रदान करती है। यह निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करने और शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आम जनता के परिवहन का सबसे सस्ता और सुगम साधन होती है । प्रमुख विशेषताएं: विविधता:  शहरी बसें विभिन्न आकारों और क्षमताओं में उपलब्ध हैं, जो विभिन्न शहरों और यात्री भार की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। कुछ छोटी और अधिक चपल होती हैं, जो संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर ढंग से संचालित होती हैं, जबकि अन्य बड़ी और जोड़दा...

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