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कंपनी मामलों में रुचि रखने वालों के लिए दुर्ग जिले के सुपेला थाना में दर्ज मामला चर्चित हो गया है क्योंकि इस मामले में पुलिस शिकायत पर जब एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो शिकायतकर्ता पक्ष ने न्यायालय की शरण ली और माननीय न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने निर्देश जारी किए…

 पढ़िए पूरा मामला…



मामले का विचारणीय विषय : 

माननीय न्यायालय द्वारा प्रश्नांकित पुलिस कार्यवाही पर दिए गए मार्गदर्शक निर्णय पर थाना सुपेला, भिलाई जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ में धारा 154 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दर्ज की गई FIR प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0241 वर्ष 2024 के विषयवस्तु पर की जा रही पुलिस कार्यवाही प्रक्रिया पर समीक्षा लेख लिखे जाने की सूचना देकर प्रतिक्रिया अभिप्राप्त करने बाबत लेख कर इस मामले के विधिक पहलुओं को इस लेख में उल्लेखित किया गया है ।

इस लेख का संज्ञानार्थ संदर्भ:

माननीय न्यायालय कुमारी अंकिता तिग्गा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय से ज्ञापन क्रमांक/क/न्या0मजि0प्र0क्षे0/2024 दुर्ग दिनांक 04/03/2024 का पत्र जिसमे परिवादी अजय कुमार अग्रवाल विरुद्ध शशीभूषण शुक्ला मे अभियुक्त शशीभूषण शुक्ला एवं अन्य के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने बाबत आदेश | 

पुलिस एफआईआर कार्यवाही से संबंधी विधिक विषयों पर प्रतिक्रिया लेने बाबत सभी पक्षकारों से पत्र सूचना देकर सूचित किया गया है और प्रतिक्रिया अभिप्रात्त करने के लिए अग्रलिखित लेख किया गया है 

विषयांतर्गत लेख है कि, संदर्भित न्यायालयीन आदेश पर पुलिस थाने में दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0241 वर्ष 2024 के विषयवस्तु में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि, प्रकरण के आरोपियों के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 एवं 120 बी, भादवि के अंतर्गत पुलिस कार्यवाही की जा रही है । इस पुलिस प्रकरण मे पक्षकारों का विवरण अग्रलिखित बिंदु 1, बिंदु 2, बिंदु 3, बिंदु 4 एवं बिंदु 5 में उल्लेखित हैं और इस एफआईआर में प्रथम सूचना तथ्य के तौर पर दर्ज है तथा माननीय न्यायालय ने परिवाद प्रकरण कार्यवाही निर्णय से बाद विषयों पर को विधिक प्रकाश डाला गाय है वह बिंदु … उल्लेखित है :

1/ एफआईआर के प्रथम सूचना तथ्य :

माननीय न्यायालय कुमारी अंकिता तिग्गा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय से ज्ञापन क्रमांक /क/न्या0 मजि0प्र0क्षे0/2024 दुर्ग दिनांक 04/03/2024 का पत्र परिवादी अजय कुमार अग्रवाल विरुद्ध शशीभूषण शुक्ला में दिए गए आदेशानुसार एफआईआर क्रमांक 0241 वर्ष 2024 दर्ज की गई है ।

2/ पुलिस प्रकरण मे निम्नानुसार अभियुक्त हैं : 

  1. शशीभूषण शुक्ला, 

  2. सुधीर अग्रवाल, 

  3. आशीष जोशी, 

  4. सुदामा वर्मा, 

  5. ओमप्रकाश निर्मलकर एवं 

  6. नीरज वैद

न्यायलयीन आदेशानुसार एफआईआर क्रमांक 0241 वर्ष 2024 दर्ज अभियुक्तगण उक्तानुसार है ।

3/ आरोपियों के विरुद्ध अग्रलिखित धाराओं का अपराध दर्ज है :

 उक्त उल्लेखित बिंदु 3 में उल्लेखित आरोपियों के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 एवं 120 बी, भादवि के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने बाबत आदेश दिए जाने का उल्लेख एफआईआर में दर्ज किया गया है । 

4/ FIR प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0241 वर्ष 2024 में समक्ष न्यायालय श्रीमान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दुर्ग (छग) के समक्ष प्रस्तुत परिवाद प्रकरण के आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण का संपर्क विवरण निम्नानुसार दर्शित है जो कि, सुलभ संदर्भ हेतु अग्रलिखित है :

4A/ अजय अग्रवाल 

निदेशक एस. के. बिल्डवर्क्स प्रा लि (वर्तमान नाम EBPL Ventures Pvt. Ltd.) कार्यालय-4/3, नेहरू परिसर, होटल ग्रांड ढिल्लन के पीछे भिलाई, जिला दुर्ग (छग) मो.नं. 9826390680 

……………..आवेदक/परिवादी

// विरुद्ध// 

4B1. शशीभूषण शुक्ला आ स्व चक्रपाणी शुक्ला उम्र 55 वर्ष.. निदेशक दुर्गा कॉन्टिनेंटल प्राइवेट लिमिटेड (DCPL) एवं दुर्गा कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड (DCrPL) कार्यालय पता-किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेंचर से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय-डी आर वर्मा साहू हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B2. सुधीर अग्रवाल आ. नामालूम, उम्र 58 वर्ष लगभग, कार्यालय पता- निदेशक दुर्गा कॉन्टिनेंटल प्राइवेट लिमिटेड (DCPL) एवं दुर्गा कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड (DCrPL) कार्यालय पता - किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे, बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B3. आशीष जोशी आ. गोविंद लाल जोशी, उम्र लगभग 47 वर्ष लगभग निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) कार्यालय पता किसन राईसमिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय - डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B4. सुदामा वर्मा आ. ननकूराम वर्मा, उम्र 54 वर्ष निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स  से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (DHPPL) कार्यालय पता किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B5 -ओमप्रकाश निर्मलकर आ. धनरूराम निर्मलकर उम्र 37 वर्ष निदेशक ज्वाइंट वेचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (DHPPL) कार्यालय पता-किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B6. नीरज बैद (चार्टर्ड एकाउंटेंट) जैन एण्ड बैद चार्टर्ड एकाउंटेंट पता-पंजीकृत कार्यालय प्रथम तल एस.यू. आर वर्मा कॉम्प्लेक्स श्याम टाकीज रोड बुढापारा रायपुर तह० व जिला रायपुर (छग) 

………………… आरोपीगण 

5. आवेदक/परिवादी द्वारा की गई शिकायत का तारतम्य उल्लेख किया गया है।

माननीय न्यायालय के आदेश में अभिलिखित है कि, थाना प्रभारी सुपेला एवं पुलिस अधीक्षक दुर्ग के समक्ष शिकायत किये जाने के पश्चात् भी अभियुक्तगण के विरूद्ध प्र०सू०रि० दर्ज नहीं की गयी थी। अतः परिवादी द्वारा प्रस्तुत आवेदन पेश कर अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 420, 467, 468, 120 बी सहपठित धारा 34 भा०द०सं० के तहत अपराध पंजीबद्ध किये जाने हेतु संबंधित थाने को आदेशित किये जाने का निवेदन किया गया है।

6/ समीक्षा लेख से पूर्व आवेदन पत्र एवं आवेदन पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों का अध्यन किया गया ।

आवेदन पत्र के साथ संलग्न दस्तावेज के अवलोकन से दर्शित है कि आवेदक अजय अग्रवाल, तत्कालीन एस०के० बिल्डवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्तमान में EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED के निदेशक के द्वारा अभियुक्त क्र० 01 शशिभूषण शुक्ला निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED एवं अभियुक्त क्र० 02 सुधीर अग्रवाल निदेशक निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED के साथ दिनांक 09.04.2010 JOINT VENTURE AGREEMENT के द्वारा निर्धारित DHPPL कंपनी का निर्माण किया एवं उक्त करार के माध्यम से EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED एवं DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED को 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी एवं कार्य विभाजित करने का करार किया गया था । उक्त JOINT VENTURE AGREEMENT दिनांक 09.04.2010 के पंजीकरण दिनांक 22.04.2010 के पश्चात् दोनों पार्टनरशिप कंपनी को 5,000-5,000 शेयर आबंटित किया गया एवं दिनांक 21.02.2011 को पुनः 50,000-50,000 प्रतिशत शेयर आबंटित किया गया परन्तु दिसंबर 2018-जनवरी 2019 के मध्य अभियुक्त क्र० 01 व 02 के द्वारा सुनियोजित तरीके से JOINT VENTURE COMPANY, DURGA HIGHTECH PROJECT PRIVATE LIMITED (DHPPL) से करोड़ों की रकम गबन करने की मंशा से अपनी पूर्व भागीदारी कंपनी के 03 निदेशक आशीष जोशी, सुदामा वर्मा एवं ओमप्रकाश निर्मलकर को DHPPL में अवैध रूप से नियुक्त कर दिनांक 24.01.2019 को अपना त्यागपत्र दे दिया गया, जिसके उपरांत दिनांक 23.02.2019 को JOINT VENTURE AGREEMENT के प्रावधानों के विरूद्ध DHPPL में नवनियुक्त निदेशकों से प्राप्त बहुमत के आधार पर अनियमित व अवैध रूप से बड़ी रकम की अफरा-तफरी की गयी, जो कि कंपनी की बैलेंस शीट वर्ष 2018-19 व 2019-20 के दस्तावेजों से दर्शित है। षड्यंत्र पूर्वक धोखाधड़ी कर लाभ अर्जित करने हेतु अभियुक्त क्र० 01 व 02 के द्वारा एवं सहअभियुक्त क्र० 03, 04 व 05 की सहमति उपरान्त अभियुक्त क्र० 06 नीरज बैद को DHPPL का सी०ए० विधि विरूद्ध तरीके से नियुक्त कर कूटरचित दस्तावेजों व फर्जी बिल व खर्च दिखाकर कुल ₹1,82,44,593/-रूपये का गबन किया जाना भी ऑडिट रिपोर्ट 2018-19, 2019-20 में दर्शित है।

7/ माननीय न्यायालय के आदेश और एफआईआर कार्यवाही में उल्लेखित वाद विषय ।

उक्त बिंदु 1 से बिंदु 7 में उल्लिखित वाद विषय एवं संपूर्ण घटना के संबंध में थाना प्रभारी थाना सुपेला का जांच प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत है। थाना प्रभारी महोदय ने उक्त धोखाधड़ी संबंधी मामला NATIONAL COMPANY LAW TRIBUNAL (NCLT) कटक में दायर होना बताते हुए NCLT कटक के स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जिसके आधार पर NCLT कटक की वेबसाईट पर आवेदक अजय अग्रवाल के द्वारा अभियुक्तगण के विरूद्ध Section 126 Companies Act के तहत शिकायत पेश करना दर्शित है। NCLT कटक के समक्ष Section 126 Companies Act के तहत वाद दायर होना दर्शित है। Section 126 Companies Act मूलतः शेयरों के हस्तांतरण का पंजीकरण लंबित रहने तक लाभांस का अधिकार, वरन् उक्त व लाभांस के आबंटन, शेयर के हस्तांतरण, शेयर अधिकार और बोनस शेयर स्थगित करने हेतु प्रावधानित करता है फ़र्जी ट्रांसपोर्टेशन बिल बनाकर करोड़ों रुपयों का गबन संबंधी विचारण की न्यायिक निर्णय लेने की शक्ति NCLT को प्राप्त नहीं है , जिसके संबंध में Shrimanta Kumar Tripathy and Anusuya Tripathy v/s S.S. Mining and Infra Private Limited CP (IB) NO. 38/CB/2022 का न्यायदृष्टांत अवलोकनीय है। उक्त न्यायदृष्टांत के तहत NCLT कटक के द्वारा शैलेश कुमार शर्मा वि० डी०एस० लिमिटेड (2019) एस०एस०सी० ऑनलाईन NCLT 1274 के आधार पर ट्रिब्यूनल द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और विचारण का मंच (फोरम) नहीं है। अतः धोखाधड़ी संबंधी जांच व विचारण अधिकारिता आपराधिक न्यायालयों (जिला क्रिमिनल कोर्ट)को प्राप्त होना दर्शित होता है।

7A/ उक्तानुसार माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि, NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और न्यायिक निर्णय का मंच (फोरम) नहीं है। अतः धोखाधड़ी संबंधी जांच व विचारण अधिकारिता आपराधिक न्यायालयों को प्राप्त होना दर्शित होता है। 

7B/ उपरोक्तानुसार उल्ल्खित विषयों को माननीय न्यायालय के आदेश में स्पष्ट कर विधिक प्रकाश डाला गया है तथा आवेदक/परिवादी के परिवाद तथा शिकायत में अभिलिखित विषय वस्तु जिन पर माननीय न्यायालय ने अपना उक्त उल्लेखित निर्णय दिया है उन वाद विषयों को अधो हस्ताक्षरी अग्रलिखित बिंदूवार संज्ञान करवा रहा है ।

8/ माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं एफआईआर विषयवस्तु के आधार पर आवेदक/परिवादी का पक्ष निमानूसार है :

आवेदक/परिवादी एवं पीड़ित अजय अग्रवाल निदेशक एस. के. बिल्डवर्क्स प्रा लि (वर्तमान नाम EBPL Ventures Pvt. Ltd.) कार्यालय-4/3, नेहरू परिसर, होटल ग्रांड ढिल्लन के पीछे भिलाई, जिला दुर्ग (छग) के  द्वारा न्यायिक दंडाधिकारी दुर्ग (छग) के समक्ष एक परिवाद अंतर्गत धारा 156 (3) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत आरोपीगण DHHPL के निदेशकगण शशीभूषण शुक्ला, सुधीर अग्रवाल, आशीष जोशी, सुदामा वर्मा, ओमप्रकाश निर्मलकर एवं नीरज वैद चार्टर्ड अकाउंटेंट के विरूद्ध  प्रस्तुत किया गया था जिस पर माननीय  न्यायालय द्वारा संज्ञान लेते हुए उक्त आरोपीगण के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 एवं 120 बी, भा.दंड वि. के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया जाने का आदेश 04-03-2024 को दिया गया था जिस पर सुपेला पुलिस द्वारा उक्त धाराओं के तहत अपराध क्रमांक 0241/24 दर्ज की गयी ।

9/ परिवादी से उक्त मामले के सम्बन्ध में संपर्क करने पर व परिवादी से प्राप्त परिवाद पत्र  का अवलोकन करने से ज्ञात हुआ कि :-

आवेदक/परिवादी एवं पीड़ित अजय अग्रवाल, तत्कालीन एस०के० बिल्डवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्तमान में EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED के निदेशक के द्वारा आरोपी  क्र० 01 शशिभूषण शुक्ला निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED एवं आरोपी क्र० 02 सुधीर अग्रवाल निदेशक निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED के साथ दिनांक 09.04.2010 JOINT VENTURE AGREEMENT के द्वारा निर्धारित DHPPL कंपनी का निर्माण किया एवं उक्त करार के माध्यम से EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED एवं DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED को 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी एवं कार्य विभाजित करने का करार किया गया था । उक्त JOINT VENTURE AGREEMENT दिनांक 09.04.2010 के पंजीकरण दिनांक 22.04.2010 के पश्चात् दोनों पार्टनरशिप कंपनी को 5,000-5,000 शेयर आबंटित किया गया एवं दिनांक 21.02.2011 को पुनः 50,000-50,000 प्रतिशत शेयर आबंटित किया गया परन्तु दिसंबर 2018-जनवरी 2019 के मध्य आरोपी  क्र० 01 व 02 के द्वारा सुनियोजित तरीके से JOINT VENTURE COMPANY, DURGA HIGHTECH PROJECT PRIVATE LIMITED (DHPPL) से करोड़ों की रकम गबन करने की मंशा से DCPL 03 कर्मचारी  आशीष जोशी, सुदामा वर्मा एवं ओमप्रकाश निर्मलकर को DHPPL में अवैधानिक विधिविरुद्ध प्रक्रिया अपनाते हुए निदेशक के रूप में  नियुक्त कर दिनांक 24.01.2019 को षड्यंत्र पूर्वक अपना त्यागपत्र दे दिए, जिसके उपरांत दिनांक 23.02.2019 को JOINT VENTURE AGREEMENT के प्रावधानों के विरूद्ध DHPPL में नवनियुक्त निदेशकों से प्राप्त बहुमत के आधार पर अनियमित व अवैध रूप से बड़ी रकम की अफरा-तफरी की गयी, जो कि कंपनी की बैलेंस शीट वर्ष 2018-19 व 2019-20 के दस्तावेजों से दर्शित है। षड्यंत्र पूर्वक धोखाधड़ी कर लाभ अर्जित करने हेतु आरोपी क्र० 01 व 02 के द्वारा एवं आरोपी क्र० 03, 04 व 05 की सहमति उपरान्त आरोपी  क्र० 06 नीरज बैद को DHPPL का सी०ए०/ ऑडिटर  विधि विरूद्ध तरीके से नियुक्त कर कूटरचित दस्तावेजों व फर्जी बिल व खर्च दिखाकर कुल ₹1,82,44,593/-रूपये का गबन किया जाना भी ऑडिट रिपोर्ट 2018-19, 2019-20 में दर्शित है।

10/ जनहित और विधिक कार्यवाही के दृष्टिकोण से समीक्षक लेख से ध्यानाकर्षित किए जाने वाला न्याय संगत प्रश्न ?

क्या पुलिस आरोपीगण से निम्म बिंदुओं पर पूछताच कर रही है जिससे विधि अपेक्षित विवेचना जाँच होने का पता चल सके।  

जन अपेक्षित जाँच के बिंदु :- 

  1. जॉइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी DHPPL में किसी भी समय क्या किसी भी निदेशक को कंपनी के बाकि निदेशकों की / भागीदारों लिखित सहमति के बगैर अपने मन मर्जी से पृथक होने का अधिकार था।  

  2. नए निदेशकों की नियुक्ति के पूर्व ROC में  लिखित जानकारी देकर क्या विधिवत अनुमति सभी निदेशकों के हस्ताक्षर से प्राप्त की गयी।  

  3. क्या DHPPL में नए ऑडिटर/ सी.ए  की नियुक्ति के पूर्व कंपनी के पूर्व सभी निदेशकों से लिखित सहमती प्राप्त की गयी।  

  4. क्या DHHPL के पूर्व ऑडिटर/ सी.ए से लिखित NOC प्राप्त की गयी थी ।  

  5. क्या DHPPL के खाते  में जमा  राशि  ₹1,82,44,593/- रूपये को गबन  करने के लिए उक्त साजिशें रची गयी थी।  

  6. उक्त राशि को षड्यंत्रपूर्वक गबन करने के उद्देश्य से आरोपीगणों ने ट्रकों की तक़रीबन 24000 ट्रिप के माध्यम से कचरा उठाने का बिल होने की बात कही है उसमे किस किस दिनांक से किस किस स्थान से कितना कितना कचरा किस किस स्थान में डाला गया उस ट्रकों का तक़रीबन 24000 ट्रिप कौन-कौन से ट्रक क्रमांक का बिल संलग्न किया है बिलो की जाँच के सम्बन्ध में क्या विवेचना की जा रही है।  

  7.  ट्रकों का तक़रीबन 24000 ट्रिपों के वाहन चालकों का  बयान लिया जाना प्रकरण के निष्पक्ष जाँच एवं विवेचना हेतु क्या आवश्यक नहीं है।  

  8. टूटी रेलवे पांत स्क्रैप के कौन से कचरे को उठाकर किस स्थान पर डाला गया वहां पर के वीडियो ग्राफी CCTV फुटेज को क्या एकत्रित किया जा रहा है।  

  9. टूटी रेलवे पांत स्क्रैप की तक़रीबन 24000 ट्रिपों में परिवहन किया गया रेल पांत का भार (10 टन प्रति ट्रिप लेने से )करीब  2,40,000 टन होता है जिसका बाजार मूल्य लौह स्क्रैप का रेट  Rs 30,000/- प्रति टन  के हिसाब से लगभग 720  करोड़ रूपये होता है। क्या विवेचना अधिकारी इस एंगल से भी विवेचना कर रही है।   

  10.  720  करोड़ रूपये के मूल्य का लौह स्क्रैप का भुगतान किस कंपनी के मार्फ़त हुआ और उसका पेमेंट कहाँ गया।  

  11. रूपये 70 करोड़ के कुल टेका कार्य में  720 करोड़ रूपये के मूल्य का लौह स्क्रैप कहाँ से उत्पन्न होता है क्या विवेचना अधिकारी इस एंगल से भी जाँच करेंगे।  

  12. ठेका कार्य का सम्पादन जब 2014 में सम्पूर्ण हो गया था और उसका कार्य पूर्णता  प्रमाण पत्र L &T के द्वारा DHHPL को प्रदान कर दिया गया था तो उसके पश्चात 2017 से 2019 पर टूटी रेल पांत लौह स्क्रैप होने का प्रश्न ही नहीं उठता है।  

  13. क्या आरोपीगण ने सुपेला थाना पुलिस को यह झूठी और विधि विपरीत जानकारी देकर गुमराह किया है कि, NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और विचारण का मंच (फोरम) है, यह जाँच का विषय है ।

  14. क्या सुपेला थाना के विवेचना अधिकारी पुलिस मामलों की जांच कार्यवाही करने हेतु सुसंगत विधिक जानकारी के अभाव में संदर्भित अपराध मामले में विधि सम्मत निर्णय लेने की बौद्धिक क्षमता विहीन स्थिति में है और उक्त आपराधिक कृत्य के विरुद्ध विधि विपरीत पुलिस कार्यवाही करने का कार्य संपादन कर रही है, यह जाँच का विषय है ।

11/ विधि संगत प्रश्नों से प्रश्नांकित होती सुपेला पुलिस कार्यवाही लोकहित संरक्षण का विषय है ।

संदर्भित पुलिस कार्यवाही पर माननीय न्यायालय के द्वारा विधिक प्रकाश डालने के उपरांत उक्त उल्लेखित बिंदु 10 के विधि संगत प्रश्नों से प्रश्नांकित होती सुपेला पुलिस की अनियमित जांच कार्यवाही विशाल लोकहित और व्यावसायिक वित्तीय व्यवहार के मामलों में विपरीत प्रभाव डालने वाली पुलिस कार्यवाही का उदाहरण है अतः इस मामले में विधिक विश्लेषण किए जाने की न्यायसंगत आवश्यकता है l इसलिए इस विषय के विभिन्न विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाले लेख अधोहस्ताक्षरी अभिलिखित कर प्रकाशित कर रहा है जिसके संबंध में यह सूचना पत्र सुपेला पुलिस के माध्यम से श्रीमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग व आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण के संज्ञान में लाकर निवेदन कर रहा है कि, अधोहस्ताक्षरी के लेख के संबंध में किसी भी प्रकार की दावा आपत्ति हो तो सूचित करने का कष्ट करें जिससे की उनके पक्ष को भी लेख में उचित स्थान देकर पाठकों तक विधि अपेक्षित विषयों को समावेशित करने वाला लेख प्रस्तुत किया जा सके ।

12/ संदर्भित मामले में धोखाधड़ी की शिकायत पर पुलिस कार्यवाही के विरुद्ध परिवाद निर्णय के आधार पर खड़े किए जाने वाले समीक्षा लेख के प्रश्न :

उल्लेखनीय है कि, संदर्भित जांच कार्यवाही में आवेदक अजय अग्रवाल के द्वारा अभियुक्तों के विरूद्ध Section 126 Companies Act के तहत शिकायत पेश की जानकारी दर्शित होना और इसी गैर विधि सम्मत आधार पर सुपेला पुलिस द्वारा जांच कार्यवाही में विसंगतिपूर्ण विधि विपरीत निर्णय लेकर धोखाधड़ी संबंधी जांच व विचारण अधिकारिता का निर्णय लेकर आरोपीगण के विरुद्ध कार्यवाही नहीं किया जाना व्यथा का विषय है तथा यह व्यर्थनीय पुलिस कार्यवाही दो विधिक विषयों पर सुपेला थाना पुलिस को निम्नलिखित दो विषयों पर प्रश्नांकित करने का आधार बन प्रदान कर रही है कि :

 12 A /  क्या आरोपीगण ने सुपेला थाना पुलिस को यह झूठी और विधि विपरीत जानकारी देकर गुमराह किया है कि, NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और विचारण का मंच (फोरम) है।

  12 B /  क्या सुपेला थाना पुलिस गबन मामलों की जांच कार्यवाही करने हेतु सुसंगत विधिक जानकारी के अभाव में संदर्भित गबन अपराध मामले में विधि सम्मत निर्णय लेने की बौद्धिक क्षमता विहीन स्थिति में है और गबन अपराध के विरुद्ध विधि विपरीत पुलिस कार्यवाही करने का कार्य संपादन कर रही है ।


संदर्भित पुलिस कार्यवाही पर माननीय न्यायालय के द्वारा विधिक प्रकाश डालने के उपरांत उक्त उल्लेखित दोनो विधि संगत प्रश्नों से प्रश्नांकित होती सुपेला पुलिस की अनियमित जांच कार्यवाही विशाल लोकहित और व्यावसायिक वित्तीय व्यवहार के मामलों में विपरीत प्रभाव डालने वाली पुलिस कार्यवाही का उदाहरण है अतः इस मामले में विधिक विश्लेषण किए जाने की न्यायसंगत आवश्यकता है इसलिए इस विषय के विभिन्न विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाले लेख अधोहस्ताक्षरी अभिलिखित कर प्रकाशित कर रहा है जिसके संबंध में यह सूचना पत्र सुपेला पुलिस के माध्यम से श्रीमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग व आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण के संज्ञान में लाकर निवेदन कर रहा है कि, अधोहस्ताक्षरी के लेख के संबंध में किसी भी प्रकार की दावा आपत्ति हो तो सूचित करने का कष्ट करें जिससे की यू के पक्ष को भी लेख में उचित स्थान देकर पाठकों तक विधि अपेक्षित विषयों को समावेशित करने वाला लेख प्रस्तुत किया जा सके ।

निवेदन किया गया है कि:

आशा है कि, सुपेला थाना माध्यम से श्रीमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग व आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण संज्ञान लेकर अपना पक्ष व दावा आपत्ति से अवगत करवायेंगे।

इसी आशा के साथ…..

अमोल मालुसरे

समाज सेवक एवं राजनीतिक विश्लेषक तथा

विधिक कार्यवाहियों का स्वविवेक समीक्षक 


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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

मेरा दृष्टिकोण:- छल कपट के आरोपी पक्षकार शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गयी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विधिक मुद्दों के आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार में महिर्षि महेश योगी के ट्रस्ट SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India की बलौदाबाजार स्थित दो जमींनों को गलत तरीके से रजिस्ट्री कर के हड़पने के आरोपित मामले में जिला सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने सुनवाई कर इन दोनों आरोपियों शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल को आरोपी बताते हुए इनके विरुद्ध में क्रिमिनल धाराएं 419, 420, 465, 467, 468, 471, 16, 212, 217 & 120B इंगित करते हुए दिनांक 10-11-2014 एवं 22-11-2014 को निर्णय जारी करते किया और निर्देशित किया की स्थानीय पुलिस स्टेशन बलौदाबाजार में FIR दर्ज करने का आदेश दिया इसके पश्चात आरोपियों ने अपना प्रभाव दिखाकर तथा भ्रमित करने वाले चार अलग-अलग आवेदन देकर पुनरीक्षण केस को हाई कोर्ट बिलासपुर में दाखिल करवाया जिसमे हाई कोर्ट बिलासपुर ने तथाकथित तौर पर बिना तथ्यों की जाँच करते हुए FIR को निरस्त करने का आदेश नौ साल बाद दिनांक 09-08-2023 को कर दिया था।

  हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है और मार्गदर्शक निर्णय देकर... संस्थागत मामलों के अपराधिक कृत्यों पर की जाने वाली पुलिस कार्यवाही पर विधिक प्रकाश डाला है.... आरोपियों के द्वारा हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष क्रिमिनल (Criminal) केस को दीवानी (Civil) केस दिखाकर निरस्त करवा लिया गया था लेकिन SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India के प्राधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए क्राइम केस न:- 486 /2014 के संबंध में दिनांक 22-10-2024 को सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त करके खारिज करवाया और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को दोबारा इस केस के तथ्यों को पुनः जाँच कर के क्रिमिनल केस की समूर्ण विवेचना करने का न्यायालयीन परामर्श दिलवा दिया है। भ्रामक जानकारी के आधार पर आरोपियों ने प्राप्त किया विधि विरुद्ध लाभ    आरोपियों ने हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से लंबित मामले का सम्पूर्ण लाभ उठाते हुए लोकल पुलिस से इस केस की विवेचना एवं चार्जशीट किया है क्या यह लंबित चार्जशीट कार्यवाही...

आयकर अधिनियम, 2025 (1 अप्रैल, 2026) से लागू हुआ, आयकर अधिनियम, 2025, भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार है।

आयकर अधिनियम , 2025 आज ( 1 अप्रैल , 2026) से लागू हुआ आयकर अधिनियम , 2025, भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार है। यह देश के आयकर कानून को सरल और आधुनिक बनाने का एक व्यापक प्रयास है , जो छह दशक पुराने आयकर अधिनियम , 1961 की जगह लेता है। यह अधिनियम मूल कर नीति में बदलाव किए बिना , सरल भाषा , सुव्यवस्थित संरचना और पाठक-अनुकूल प्रस्तुति के माध्यम से अधिक स्पष्टता और अनुपालन में सुगमता की ओर एक बदलाव का प्रतीक है। यह विधेयक संसद द्वारा 12 अगस्त , 2025 को पारित किया गया था और 21 अगस्त , 2025 को इसे भारत के माननीय राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई , जिसके परिणामस्वरूप यह ' आयकर अधिनियम , 2025' बन गया। (राजपत्र अधिसूचना – आयकर अधिनियम , 2025) नए अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए , केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा 20 मार्च , 2026 को ' आयकर नियम , 2026' अधिसूचित किए गए। (राजपत्र अधिसूचना – आयकर नियम , 2026) । इससे संबंधित नए प्रपत्र भी अधिसूचित कर दिए गए हैं। अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से , इन प्रपत्रों को सरल , मानकीकृत और उनकी प्रक...

शासकीय कार्यालयों तथा उनके अंतर्गत निगम, मंडल, अधिकरणों एवं एन.जी.ओ. की जानकारी एवं मैनुअल इत्यादि राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र (NIC) को तत्काल उपलब्ध कराएं तथा उसकी सूचना सामान्य प्रशासन विभाग (सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ) को भेजना सुनिश्चित करें।

छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय विभागों के लिए स्पष्ट निर्देश है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी का इंटरनेट स्व-सक्रिय प्रकटीकरण हेतु प्रत्येक विभाग, अपने अधीनस्थ समस्त कार्यालयों तथा उनके अंतर्गत निगम, मंडल, अधिकरणों एवं एन.जी.ओ. की जानकारी एवं मैनुअल इत्यादि राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र (NIC) को तत्काल उपलब्ध कराएं  जानिए क्या लिखा है आदेश मे … इंटरनेट पर स्वप्रेरणा से प्रकटीकरण विषय :- सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत विभागीय जानकारी का इंटरनेट पर स्व-सक्रिय प्रकटीकरण । संदर्भ :- इस विभाग का पत्र क्रमांक एफ 7-6/2005/1/6, दिनांक 16.09.2005 एवं दिनांक 07.11.2005 इस विभाग के उपरोक्त संदर्भित परिपत्र द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रत्येक कार्यालय के विभागीय मैनुअल पीडीएफ फारमेट में तैयार करके शासन की वेबसाइड पर राष्ट्रीय सूचना केन्द्र छप्द्र के माध्यम से उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दिये गये है, ताकि शासन के समस्त कार्यालयों द्वारा जारी नियम/निर्देशों की जानकारी / सूचना सीधे आम जनता/पणथारियों (Stakeholders) को स्व-सक्रिय प्रकटीकरण (Proacti...

आयुष्मान भव अभियान, 5 करोड़ से अधिक आभा(एबीएचए) खाते खोले गए

  आयुष्मान आरोग्य मंदिर मेलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेलों के रूप में 13,84,309 स्वास्थ्य मेलों में संयुक्त रूप से कुल 11 करोड़ से अधिक लोगों ने भागीदारी की   6,41,70,297 लोगों को निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया और 5,10,48,644 लोगों को निःशुल्क निदान सेवाएं दी गईं , पहली तिमाही में 45,43,705 गर्भवती माताओं ने पंजीकरण कराते हुए पहली एएनसी जांच पूरी की ; 29,83,565 माताओं और 49,44,359 बच्चों का टीकाकरण किया गया एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करते हुए , वर्तमान में जारी आयुष्मान भव अभियान के दौरान 5 करोड़ से अधिक आभा(एबीएचए) खाते खोले गए हैं। इसके अलावा , कुल 4,44,92,564 आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं और 1,15,923 आयुष्मान सभाओं का आयोजन किया गया हैं। यह 28 दिसम्बर , 2023 तक के डेटा को प्रतिबिंबित करता है। वर्तमान में आयुष्मान भव अभियान के अंतर्गत , 28.12.2023 तक 13,84,309 स्वास्थ्य मेलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर मेलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेलों में संयुक्त रूप से लोगों की भागीदारी 11,30,98,010 तक पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य मेलों में निम्नलिखित ग...

खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों में हुई गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं तथा... संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही बाबत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर (छ.ग.) स्तर से पहला कर दी गई है… जिसके तहत खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 24 उचित मूल्य दुकानों के संचलन के लिए नवीन स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया है… पढ़िए पूर्वानुमानित विश्लेषण

खाद्य नियंत्रक दुर्ग कार्यालय के दोषी अधिकारियों को पकड़ने की चौतरफा विभागीय कार्यवाही वास्तविकता के धरातल की ओर चल पड़ी है… जांच कार्यवाही की रूपरेखा पर प्रकाश डालने वाले पहलुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है… खाद्य विभाग दुर्ग कार्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर विगत कई वर्षों से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय स्तर पर सक्षम अधिकारियों की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण ये जांच कार्यवाहियां लंबे समय से लंबित पड़ी हुई थीं। अत्यंत हर्ष का विषय है कि, विभागीय शीर्ष अधिकारियों एवं सचिवालय के संज्ञान में आने के बाद इस पूरे तंत्र में व्याप्त जिला स्तरीय गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। वर्तमान में इस विभागीय कार्यवाही के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जो सराहनीय हैं: पहला पहलू: पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले को कानूनी शिकंजे लाना सुनिश्चित करने हेतु २४ उचित मूल्य दुकानों के नए संचालनकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। दूसरा पहलू: जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों को लंबे समय तक...

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