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कंपनी मामलों में रुचि रखने वालों के लिए दुर्ग जिले के सुपेला थाना में दर्ज मामला चर्चित हो गया है क्योंकि इस मामले में पुलिस शिकायत पर जब एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो शिकायतकर्ता पक्ष ने न्यायालय की शरण ली और माननीय न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने निर्देश जारी किए…

 पढ़िए पूरा मामला…



मामले का विचारणीय विषय : 

माननीय न्यायालय द्वारा प्रश्नांकित पुलिस कार्यवाही पर दिए गए मार्गदर्शक निर्णय पर थाना सुपेला, भिलाई जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ में धारा 154 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दर्ज की गई FIR प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0241 वर्ष 2024 के विषयवस्तु पर की जा रही पुलिस कार्यवाही प्रक्रिया पर समीक्षा लेख लिखे जाने की सूचना देकर प्रतिक्रिया अभिप्राप्त करने बाबत लेख कर इस मामले के विधिक पहलुओं को इस लेख में उल्लेखित किया गया है ।

इस लेख का संज्ञानार्थ संदर्भ:

माननीय न्यायालय कुमारी अंकिता तिग्गा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय से ज्ञापन क्रमांक/क/न्या0मजि0प्र0क्षे0/2024 दुर्ग दिनांक 04/03/2024 का पत्र जिसमे परिवादी अजय कुमार अग्रवाल विरुद्ध शशीभूषण शुक्ला मे अभियुक्त शशीभूषण शुक्ला एवं अन्य के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने बाबत आदेश | 

पुलिस एफआईआर कार्यवाही से संबंधी विधिक विषयों पर प्रतिक्रिया लेने बाबत सभी पक्षकारों से पत्र सूचना देकर सूचित किया गया है और प्रतिक्रिया अभिप्रात्त करने के लिए अग्रलिखित लेख किया गया है 

विषयांतर्गत लेख है कि, संदर्भित न्यायालयीन आदेश पर पुलिस थाने में दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0241 वर्ष 2024 के विषयवस्तु में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि, प्रकरण के आरोपियों के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 एवं 120 बी, भादवि के अंतर्गत पुलिस कार्यवाही की जा रही है । इस पुलिस प्रकरण मे पक्षकारों का विवरण अग्रलिखित बिंदु 1, बिंदु 2, बिंदु 3, बिंदु 4 एवं बिंदु 5 में उल्लेखित हैं और इस एफआईआर में प्रथम सूचना तथ्य के तौर पर दर्ज है तथा माननीय न्यायालय ने परिवाद प्रकरण कार्यवाही निर्णय से बाद विषयों पर को विधिक प्रकाश डाला गाय है वह बिंदु … उल्लेखित है :

1/ एफआईआर के प्रथम सूचना तथ्य :

माननीय न्यायालय कुमारी अंकिता तिग्गा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय से ज्ञापन क्रमांक /क/न्या0 मजि0प्र0क्षे0/2024 दुर्ग दिनांक 04/03/2024 का पत्र परिवादी अजय कुमार अग्रवाल विरुद्ध शशीभूषण शुक्ला में दिए गए आदेशानुसार एफआईआर क्रमांक 0241 वर्ष 2024 दर्ज की गई है ।

2/ पुलिस प्रकरण मे निम्नानुसार अभियुक्त हैं : 

  1. शशीभूषण शुक्ला, 

  2. सुधीर अग्रवाल, 

  3. आशीष जोशी, 

  4. सुदामा वर्मा, 

  5. ओमप्रकाश निर्मलकर एवं 

  6. नीरज वैद

न्यायलयीन आदेशानुसार एफआईआर क्रमांक 0241 वर्ष 2024 दर्ज अभियुक्तगण उक्तानुसार है ।

3/ आरोपियों के विरुद्ध अग्रलिखित धाराओं का अपराध दर्ज है :

 उक्त उल्लेखित बिंदु 3 में उल्लेखित आरोपियों के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 एवं 120 बी, भादवि के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने बाबत आदेश दिए जाने का उल्लेख एफआईआर में दर्ज किया गया है । 

4/ FIR प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0241 वर्ष 2024 में समक्ष न्यायालय श्रीमान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दुर्ग (छग) के समक्ष प्रस्तुत परिवाद प्रकरण के आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण का संपर्क विवरण निम्नानुसार दर्शित है जो कि, सुलभ संदर्भ हेतु अग्रलिखित है :

4A/ अजय अग्रवाल 

निदेशक एस. के. बिल्डवर्क्स प्रा लि (वर्तमान नाम EBPL Ventures Pvt. Ltd.) कार्यालय-4/3, नेहरू परिसर, होटल ग्रांड ढिल्लन के पीछे भिलाई, जिला दुर्ग (छग) मो.नं. 9826390680 

……………..आवेदक/परिवादी

// विरुद्ध// 

4B1. शशीभूषण शुक्ला आ स्व चक्रपाणी शुक्ला उम्र 55 वर्ष.. निदेशक दुर्गा कॉन्टिनेंटल प्राइवेट लिमिटेड (DCPL) एवं दुर्गा कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड (DCrPL) कार्यालय पता-किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेंचर से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय-डी आर वर्मा साहू हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B2. सुधीर अग्रवाल आ. नामालूम, उम्र 58 वर्ष लगभग, कार्यालय पता- निदेशक दुर्गा कॉन्टिनेंटल प्राइवेट लिमिटेड (DCPL) एवं दुर्गा कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड (DCrPL) कार्यालय पता - किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे, बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B3. आशीष जोशी आ. गोविंद लाल जोशी, उम्र लगभग 47 वर्ष लगभग निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) कार्यालय पता किसन राईसमिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय - डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B4. सुदामा वर्मा आ. ननकूराम वर्मा, उम्र 54 वर्ष निदेशक ज्वाइंट वेंचर्स  से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (DHPPL) कार्यालय पता किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B5 -ओमप्रकाश निर्मलकर आ. धनरूराम निर्मलकर उम्र 37 वर्ष निदेशक ज्वाइंट वेचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (DHPPL) कार्यालय पता-किसान राइस मिल के पास बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) निदेशक ज्वाइंट वेचर्स से निर्मित कंपनी (DHPPL) दुर्गा हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड (DHPPL) पंजीकृत कार्यालय डी. आर. वर्मा, साहू, हॉस्पिटल के पीछे बलौदाबाजार, जिला बलौदाबाजार (छग) 

4B6. नीरज बैद (चार्टर्ड एकाउंटेंट) जैन एण्ड बैद चार्टर्ड एकाउंटेंट पता-पंजीकृत कार्यालय प्रथम तल एस.यू. आर वर्मा कॉम्प्लेक्स श्याम टाकीज रोड बुढापारा रायपुर तह० व जिला रायपुर (छग) 

………………… आरोपीगण 

5. आवेदक/परिवादी द्वारा की गई शिकायत का तारतम्य उल्लेख किया गया है।

माननीय न्यायालय के आदेश में अभिलिखित है कि, थाना प्रभारी सुपेला एवं पुलिस अधीक्षक दुर्ग के समक्ष शिकायत किये जाने के पश्चात् भी अभियुक्तगण के विरूद्ध प्र०सू०रि० दर्ज नहीं की गयी थी। अतः परिवादी द्वारा प्रस्तुत आवेदन पेश कर अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 420, 467, 468, 120 बी सहपठित धारा 34 भा०द०सं० के तहत अपराध पंजीबद्ध किये जाने हेतु संबंधित थाने को आदेशित किये जाने का निवेदन किया गया है।

6/ समीक्षा लेख से पूर्व आवेदन पत्र एवं आवेदन पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों का अध्यन किया गया ।

आवेदन पत्र के साथ संलग्न दस्तावेज के अवलोकन से दर्शित है कि आवेदक अजय अग्रवाल, तत्कालीन एस०के० बिल्डवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्तमान में EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED के निदेशक के द्वारा अभियुक्त क्र० 01 शशिभूषण शुक्ला निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED एवं अभियुक्त क्र० 02 सुधीर अग्रवाल निदेशक निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED के साथ दिनांक 09.04.2010 JOINT VENTURE AGREEMENT के द्वारा निर्धारित DHPPL कंपनी का निर्माण किया एवं उक्त करार के माध्यम से EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED एवं DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED को 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी एवं कार्य विभाजित करने का करार किया गया था । उक्त JOINT VENTURE AGREEMENT दिनांक 09.04.2010 के पंजीकरण दिनांक 22.04.2010 के पश्चात् दोनों पार्टनरशिप कंपनी को 5,000-5,000 शेयर आबंटित किया गया एवं दिनांक 21.02.2011 को पुनः 50,000-50,000 प्रतिशत शेयर आबंटित किया गया परन्तु दिसंबर 2018-जनवरी 2019 के मध्य अभियुक्त क्र० 01 व 02 के द्वारा सुनियोजित तरीके से JOINT VENTURE COMPANY, DURGA HIGHTECH PROJECT PRIVATE LIMITED (DHPPL) से करोड़ों की रकम गबन करने की मंशा से अपनी पूर्व भागीदारी कंपनी के 03 निदेशक आशीष जोशी, सुदामा वर्मा एवं ओमप्रकाश निर्मलकर को DHPPL में अवैध रूप से नियुक्त कर दिनांक 24.01.2019 को अपना त्यागपत्र दे दिया गया, जिसके उपरांत दिनांक 23.02.2019 को JOINT VENTURE AGREEMENT के प्रावधानों के विरूद्ध DHPPL में नवनियुक्त निदेशकों से प्राप्त बहुमत के आधार पर अनियमित व अवैध रूप से बड़ी रकम की अफरा-तफरी की गयी, जो कि कंपनी की बैलेंस शीट वर्ष 2018-19 व 2019-20 के दस्तावेजों से दर्शित है। षड्यंत्र पूर्वक धोखाधड़ी कर लाभ अर्जित करने हेतु अभियुक्त क्र० 01 व 02 के द्वारा एवं सहअभियुक्त क्र० 03, 04 व 05 की सहमति उपरान्त अभियुक्त क्र० 06 नीरज बैद को DHPPL का सी०ए० विधि विरूद्ध तरीके से नियुक्त कर कूटरचित दस्तावेजों व फर्जी बिल व खर्च दिखाकर कुल ₹1,82,44,593/-रूपये का गबन किया जाना भी ऑडिट रिपोर्ट 2018-19, 2019-20 में दर्शित है।

7/ माननीय न्यायालय के आदेश और एफआईआर कार्यवाही में उल्लेखित वाद विषय ।

उक्त बिंदु 1 से बिंदु 7 में उल्लिखित वाद विषय एवं संपूर्ण घटना के संबंध में थाना प्रभारी थाना सुपेला का जांच प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत है। थाना प्रभारी महोदय ने उक्त धोखाधड़ी संबंधी मामला NATIONAL COMPANY LAW TRIBUNAL (NCLT) कटक में दायर होना बताते हुए NCLT कटक के स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जिसके आधार पर NCLT कटक की वेबसाईट पर आवेदक अजय अग्रवाल के द्वारा अभियुक्तगण के विरूद्ध Section 126 Companies Act के तहत शिकायत पेश करना दर्शित है। NCLT कटक के समक्ष Section 126 Companies Act के तहत वाद दायर होना दर्शित है। Section 126 Companies Act मूलतः शेयरों के हस्तांतरण का पंजीकरण लंबित रहने तक लाभांस का अधिकार, वरन् उक्त व लाभांस के आबंटन, शेयर के हस्तांतरण, शेयर अधिकार और बोनस शेयर स्थगित करने हेतु प्रावधानित करता है फ़र्जी ट्रांसपोर्टेशन बिल बनाकर करोड़ों रुपयों का गबन संबंधी विचारण की न्यायिक निर्णय लेने की शक्ति NCLT को प्राप्त नहीं है , जिसके संबंध में Shrimanta Kumar Tripathy and Anusuya Tripathy v/s S.S. Mining and Infra Private Limited CP (IB) NO. 38/CB/2022 का न्यायदृष्टांत अवलोकनीय है। उक्त न्यायदृष्टांत के तहत NCLT कटक के द्वारा शैलेश कुमार शर्मा वि० डी०एस० लिमिटेड (2019) एस०एस०सी० ऑनलाईन NCLT 1274 के आधार पर ट्रिब्यूनल द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और विचारण का मंच (फोरम) नहीं है। अतः धोखाधड़ी संबंधी जांच व विचारण अधिकारिता आपराधिक न्यायालयों (जिला क्रिमिनल कोर्ट)को प्राप्त होना दर्शित होता है।

7A/ उक्तानुसार माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि, NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और न्यायिक निर्णय का मंच (फोरम) नहीं है। अतः धोखाधड़ी संबंधी जांच व विचारण अधिकारिता आपराधिक न्यायालयों को प्राप्त होना दर्शित होता है। 

7B/ उपरोक्तानुसार उल्ल्खित विषयों को माननीय न्यायालय के आदेश में स्पष्ट कर विधिक प्रकाश डाला गया है तथा आवेदक/परिवादी के परिवाद तथा शिकायत में अभिलिखित विषय वस्तु जिन पर माननीय न्यायालय ने अपना उक्त उल्लेखित निर्णय दिया है उन वाद विषयों को अधो हस्ताक्षरी अग्रलिखित बिंदूवार संज्ञान करवा रहा है ।

8/ माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं एफआईआर विषयवस्तु के आधार पर आवेदक/परिवादी का पक्ष निमानूसार है :

आवेदक/परिवादी एवं पीड़ित अजय अग्रवाल निदेशक एस. के. बिल्डवर्क्स प्रा लि (वर्तमान नाम EBPL Ventures Pvt. Ltd.) कार्यालय-4/3, नेहरू परिसर, होटल ग्रांड ढिल्लन के पीछे भिलाई, जिला दुर्ग (छग) के  द्वारा न्यायिक दंडाधिकारी दुर्ग (छग) के समक्ष एक परिवाद अंतर्गत धारा 156 (3) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत आरोपीगण DHHPL के निदेशकगण शशीभूषण शुक्ला, सुधीर अग्रवाल, आशीष जोशी, सुदामा वर्मा, ओमप्रकाश निर्मलकर एवं नीरज वैद चार्टर्ड अकाउंटेंट के विरूद्ध  प्रस्तुत किया गया था जिस पर माननीय  न्यायालय द्वारा संज्ञान लेते हुए उक्त आरोपीगण के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 एवं 120 बी, भा.दंड वि. के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया जाने का आदेश 04-03-2024 को दिया गया था जिस पर सुपेला पुलिस द्वारा उक्त धाराओं के तहत अपराध क्रमांक 0241/24 दर्ज की गयी ।

9/ परिवादी से उक्त मामले के सम्बन्ध में संपर्क करने पर व परिवादी से प्राप्त परिवाद पत्र  का अवलोकन करने से ज्ञात हुआ कि :-

आवेदक/परिवादी एवं पीड़ित अजय अग्रवाल, तत्कालीन एस०के० बिल्डवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्तमान में EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED के निदेशक के द्वारा आरोपी  क्र० 01 शशिभूषण शुक्ला निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED एवं आरोपी क्र० 02 सुधीर अग्रवाल निदेशक निदेशक DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED के साथ दिनांक 09.04.2010 JOINT VENTURE AGREEMENT के द्वारा निर्धारित DHPPL कंपनी का निर्माण किया एवं उक्त करार के माध्यम से EBPL VENTURE PRIVATE LIMITED एवं DURGA CONTINENTAL PRIVATE LIMITED को 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी एवं कार्य विभाजित करने का करार किया गया था । उक्त JOINT VENTURE AGREEMENT दिनांक 09.04.2010 के पंजीकरण दिनांक 22.04.2010 के पश्चात् दोनों पार्टनरशिप कंपनी को 5,000-5,000 शेयर आबंटित किया गया एवं दिनांक 21.02.2011 को पुनः 50,000-50,000 प्रतिशत शेयर आबंटित किया गया परन्तु दिसंबर 2018-जनवरी 2019 के मध्य आरोपी  क्र० 01 व 02 के द्वारा सुनियोजित तरीके से JOINT VENTURE COMPANY, DURGA HIGHTECH PROJECT PRIVATE LIMITED (DHPPL) से करोड़ों की रकम गबन करने की मंशा से DCPL 03 कर्मचारी  आशीष जोशी, सुदामा वर्मा एवं ओमप्रकाश निर्मलकर को DHPPL में अवैधानिक विधिविरुद्ध प्रक्रिया अपनाते हुए निदेशक के रूप में  नियुक्त कर दिनांक 24.01.2019 को षड्यंत्र पूर्वक अपना त्यागपत्र दे दिए, जिसके उपरांत दिनांक 23.02.2019 को JOINT VENTURE AGREEMENT के प्रावधानों के विरूद्ध DHPPL में नवनियुक्त निदेशकों से प्राप्त बहुमत के आधार पर अनियमित व अवैध रूप से बड़ी रकम की अफरा-तफरी की गयी, जो कि कंपनी की बैलेंस शीट वर्ष 2018-19 व 2019-20 के दस्तावेजों से दर्शित है। षड्यंत्र पूर्वक धोखाधड़ी कर लाभ अर्जित करने हेतु आरोपी क्र० 01 व 02 के द्वारा एवं आरोपी क्र० 03, 04 व 05 की सहमति उपरान्त आरोपी  क्र० 06 नीरज बैद को DHPPL का सी०ए०/ ऑडिटर  विधि विरूद्ध तरीके से नियुक्त कर कूटरचित दस्तावेजों व फर्जी बिल व खर्च दिखाकर कुल ₹1,82,44,593/-रूपये का गबन किया जाना भी ऑडिट रिपोर्ट 2018-19, 2019-20 में दर्शित है।

10/ जनहित और विधिक कार्यवाही के दृष्टिकोण से समीक्षक लेख से ध्यानाकर्षित किए जाने वाला न्याय संगत प्रश्न ?

क्या पुलिस आरोपीगण से निम्म बिंदुओं पर पूछताच कर रही है जिससे विधि अपेक्षित विवेचना जाँच होने का पता चल सके।  

जन अपेक्षित जाँच के बिंदु :- 

  1. जॉइंट वेंचर्स से निर्मित कंपनी DHPPL में किसी भी समय क्या किसी भी निदेशक को कंपनी के बाकि निदेशकों की / भागीदारों लिखित सहमति के बगैर अपने मन मर्जी से पृथक होने का अधिकार था।  

  2. नए निदेशकों की नियुक्ति के पूर्व ROC में  लिखित जानकारी देकर क्या विधिवत अनुमति सभी निदेशकों के हस्ताक्षर से प्राप्त की गयी।  

  3. क्या DHPPL में नए ऑडिटर/ सी.ए  की नियुक्ति के पूर्व कंपनी के पूर्व सभी निदेशकों से लिखित सहमती प्राप्त की गयी।  

  4. क्या DHHPL के पूर्व ऑडिटर/ सी.ए से लिखित NOC प्राप्त की गयी थी ।  

  5. क्या DHPPL के खाते  में जमा  राशि  ₹1,82,44,593/- रूपये को गबन  करने के लिए उक्त साजिशें रची गयी थी।  

  6. उक्त राशि को षड्यंत्रपूर्वक गबन करने के उद्देश्य से आरोपीगणों ने ट्रकों की तक़रीबन 24000 ट्रिप के माध्यम से कचरा उठाने का बिल होने की बात कही है उसमे किस किस दिनांक से किस किस स्थान से कितना कितना कचरा किस किस स्थान में डाला गया उस ट्रकों का तक़रीबन 24000 ट्रिप कौन-कौन से ट्रक क्रमांक का बिल संलग्न किया है बिलो की जाँच के सम्बन्ध में क्या विवेचना की जा रही है।  

  7.  ट्रकों का तक़रीबन 24000 ट्रिपों के वाहन चालकों का  बयान लिया जाना प्रकरण के निष्पक्ष जाँच एवं विवेचना हेतु क्या आवश्यक नहीं है।  

  8. टूटी रेलवे पांत स्क्रैप के कौन से कचरे को उठाकर किस स्थान पर डाला गया वहां पर के वीडियो ग्राफी CCTV फुटेज को क्या एकत्रित किया जा रहा है।  

  9. टूटी रेलवे पांत स्क्रैप की तक़रीबन 24000 ट्रिपों में परिवहन किया गया रेल पांत का भार (10 टन प्रति ट्रिप लेने से )करीब  2,40,000 टन होता है जिसका बाजार मूल्य लौह स्क्रैप का रेट  Rs 30,000/- प्रति टन  के हिसाब से लगभग 720  करोड़ रूपये होता है। क्या विवेचना अधिकारी इस एंगल से भी विवेचना कर रही है।   

  10.  720  करोड़ रूपये के मूल्य का लौह स्क्रैप का भुगतान किस कंपनी के मार्फ़त हुआ और उसका पेमेंट कहाँ गया।  

  11. रूपये 70 करोड़ के कुल टेका कार्य में  720 करोड़ रूपये के मूल्य का लौह स्क्रैप कहाँ से उत्पन्न होता है क्या विवेचना अधिकारी इस एंगल से भी जाँच करेंगे।  

  12. ठेका कार्य का सम्पादन जब 2014 में सम्पूर्ण हो गया था और उसका कार्य पूर्णता  प्रमाण पत्र L &T के द्वारा DHHPL को प्रदान कर दिया गया था तो उसके पश्चात 2017 से 2019 पर टूटी रेल पांत लौह स्क्रैप होने का प्रश्न ही नहीं उठता है।  

  13. क्या आरोपीगण ने सुपेला थाना पुलिस को यह झूठी और विधि विपरीत जानकारी देकर गुमराह किया है कि, NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और विचारण का मंच (फोरम) है, यह जाँच का विषय है ।

  14. क्या सुपेला थाना के विवेचना अधिकारी पुलिस मामलों की जांच कार्यवाही करने हेतु सुसंगत विधिक जानकारी के अभाव में संदर्भित अपराध मामले में विधि सम्मत निर्णय लेने की बौद्धिक क्षमता विहीन स्थिति में है और उक्त आपराधिक कृत्य के विरुद्ध विधि विपरीत पुलिस कार्यवाही करने का कार्य संपादन कर रही है, यह जाँच का विषय है ।

11/ विधि संगत प्रश्नों से प्रश्नांकित होती सुपेला पुलिस कार्यवाही लोकहित संरक्षण का विषय है ।

संदर्भित पुलिस कार्यवाही पर माननीय न्यायालय के द्वारा विधिक प्रकाश डालने के उपरांत उक्त उल्लेखित बिंदु 10 के विधि संगत प्रश्नों से प्रश्नांकित होती सुपेला पुलिस की अनियमित जांच कार्यवाही विशाल लोकहित और व्यावसायिक वित्तीय व्यवहार के मामलों में विपरीत प्रभाव डालने वाली पुलिस कार्यवाही का उदाहरण है अतः इस मामले में विधिक विश्लेषण किए जाने की न्यायसंगत आवश्यकता है l इसलिए इस विषय के विभिन्न विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाले लेख अधोहस्ताक्षरी अभिलिखित कर प्रकाशित कर रहा है जिसके संबंध में यह सूचना पत्र सुपेला पुलिस के माध्यम से श्रीमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग व आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण के संज्ञान में लाकर निवेदन कर रहा है कि, अधोहस्ताक्षरी के लेख के संबंध में किसी भी प्रकार की दावा आपत्ति हो तो सूचित करने का कष्ट करें जिससे की उनके पक्ष को भी लेख में उचित स्थान देकर पाठकों तक विधि अपेक्षित विषयों को समावेशित करने वाला लेख प्रस्तुत किया जा सके ।

12/ संदर्भित मामले में धोखाधड़ी की शिकायत पर पुलिस कार्यवाही के विरुद्ध परिवाद निर्णय के आधार पर खड़े किए जाने वाले समीक्षा लेख के प्रश्न :

उल्लेखनीय है कि, संदर्भित जांच कार्यवाही में आवेदक अजय अग्रवाल के द्वारा अभियुक्तों के विरूद्ध Section 126 Companies Act के तहत शिकायत पेश की जानकारी दर्शित होना और इसी गैर विधि सम्मत आधार पर सुपेला पुलिस द्वारा जांच कार्यवाही में विसंगतिपूर्ण विधि विपरीत निर्णय लेकर धोखाधड़ी संबंधी जांच व विचारण अधिकारिता का निर्णय लेकर आरोपीगण के विरुद्ध कार्यवाही नहीं किया जाना व्यथा का विषय है तथा यह व्यर्थनीय पुलिस कार्यवाही दो विधिक विषयों पर सुपेला थाना पुलिस को निम्नलिखित दो विषयों पर प्रश्नांकित करने का आधार बन प्रदान कर रही है कि :

 12 A /  क्या आरोपीगण ने सुपेला थाना पुलिस को यह झूठी और विधि विपरीत जानकारी देकर गुमराह किया है कि, NCLT धोखाधड़ी संबंधी जांच और विचारण का मंच (फोरम) है।

  12 B /  क्या सुपेला थाना पुलिस गबन मामलों की जांच कार्यवाही करने हेतु सुसंगत विधिक जानकारी के अभाव में संदर्भित गबन अपराध मामले में विधि सम्मत निर्णय लेने की बौद्धिक क्षमता विहीन स्थिति में है और गबन अपराध के विरुद्ध विधि विपरीत पुलिस कार्यवाही करने का कार्य संपादन कर रही है ।


संदर्भित पुलिस कार्यवाही पर माननीय न्यायालय के द्वारा विधिक प्रकाश डालने के उपरांत उक्त उल्लेखित दोनो विधि संगत प्रश्नों से प्रश्नांकित होती सुपेला पुलिस की अनियमित जांच कार्यवाही विशाल लोकहित और व्यावसायिक वित्तीय व्यवहार के मामलों में विपरीत प्रभाव डालने वाली पुलिस कार्यवाही का उदाहरण है अतः इस मामले में विधिक विश्लेषण किए जाने की न्यायसंगत आवश्यकता है इसलिए इस विषय के विभिन्न विधिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाले लेख अधोहस्ताक्षरी अभिलिखित कर प्रकाशित कर रहा है जिसके संबंध में यह सूचना पत्र सुपेला पुलिस के माध्यम से श्रीमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग व आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण के संज्ञान में लाकर निवेदन कर रहा है कि, अधोहस्ताक्षरी के लेख के संबंध में किसी भी प्रकार की दावा आपत्ति हो तो सूचित करने का कष्ट करें जिससे की यू के पक्ष को भी लेख में उचित स्थान देकर पाठकों तक विधि अपेक्षित विषयों को समावेशित करने वाला लेख प्रस्तुत किया जा सके ।

निवेदन किया गया है कि:

आशा है कि, सुपेला थाना माध्यम से श्रीमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग व आवेदक/परिवादी एवं आरोपीगण संज्ञान लेकर अपना पक्ष व दावा आपत्ति से अवगत करवायेंगे।

इसी आशा के साथ…..

अमोल मालुसरे

समाज सेवक एवं राजनीतिक विश्लेषक तथा

विधिक कार्यवाहियों का स्वविवेक समीक्षक 


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गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों के परिवारों की भावनाओं को… हाउस लीज विषय बेहद आहत करने वाला मामला, हमेशा से रहा है लेकिन..! इससे भी कहीं अधिक पीड़ा..! इस बात की है कि, बीएसपी हाउस लीज मामले में… झूठा आश्वासन देकर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव जैसे लोगों की… मौका परस्ती वाली राजनीतिक भूमिका ने भिलाई वासियों के भावनात्मक ज़ख्मों को… बेरहमी से कुरेदने का काम किया है लेकिन..! अब इस मामले में विधि अपेक्षित संघर्ष प्रारंभ हो गया है… कागजी कार्यवाहियों में दफ़न किए गए..! जमीन घोटालों को उजागर करने वाला पहला पड़ाव भिलाई निगम संपत्ति ब्यौरा मांगने की नोटिस देकर… मौक परस्त कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव से प्रतिक्रिया मांगी गई क्योंकि इसी प्रतिक्रिया के आधार पर हाउस लीज विषय स्वमेव पुनर्जीवित हो जाएगा है…

निगम संपत्ति का ब्यौरा क्यों ? भिलाई विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र यादव ने दो बार बीएसपी कर्मियों के परिवार की भावनाओं से जुड़े बीएसपी हाउस लीज मामले को झूठी और तथ्य विहीन जानकारी देकर राजनीतिक तौर पर भुनाया है..! उल्लेखनीय है कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव ने अपने चुनावी प्रचार में… यह तथ्य विहीन भ्रम फैलाया था कि… बीएसपी हाउस लीज की रजिस्ट्री होगी तदोपरांत… भ्रमित होकर कई लोगों ने मालिकाना हक्क प्राप्त करने के तर्क विहीन बहकावे में आकर बीएसपी हाउस लीज रजिस्ट्री भी करवाई लेकिन…! इसके बाद रजिस्ट्री करवाने वाले कितने हाउस लीज धारकों को तथाकथित मालिकाना हक्क मिला है..! यह अनुत्तरित प्रश्न विचारणीय पहलू है।  कांग्रेसी नेता देवेंद्र यादव की कुटिल राजनीति के लिए मुंहतोड़ प्रश्न ? गौरतलब रहे कि, पूर्व महापौर देवेंद्र यादव ने भिलाई नगर पालिक निगम संपत्ति का लेखा-जोखा की वार्ड वार विभागीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करवाने का पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया था । जिसके कारण भिलाई नगर निगम की अचल संपत्ति पर कितना अवैधानिक अतिक्रमण और कब्जा किया गया है ? यह अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं हु...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

मंच कला क्षेत्र के छह प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना गया, वर्ष 2022 और 2023 के लिए 92 कलाकार संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों के लिए चुने गए, 80 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार दिया जाएगा

  संगीत , नृत्य और नाट्य कला से संबंधित संगीत नाटक अकादमी , नई दिल्ली की जनरल काउंसिल , नेशनल ने 21 और 22 फरवरी 2024 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी बैठक में सर्वसम्मति से मंच कला के क्षेत्र में छह ( 6) प्रतिष्ठित हस्तियों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के रूप में चुना है। अकादमी की फेलोशिप सबसे प्रतिष्ठित और अपूर्व सम्मान है। यह फेलोशिप किसी भी खास समय में 40 व्यक्तियों को दी जाती है। जनरल काउंसिल ने वर्ष 2022 और 2023 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत , नृत्य , रंगमंच , पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच , कठपुतली और मंच कला में समग्र योगदान/छात्रवृत्ति के क्षेत्र से 92 कलाकारों का भी चयन किया। इस प्रकार चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता समग्र रूप से राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अतिरिक्त ये ख्याति प्राप्त कलाकार संगीत , नृत्य , नाटक , लोक और जनजातीय कला , कठपुतली और संबद्ध रंगमंच कला रूपों आदि के रूप में मंच कला रूपों के संपूर्ण रूप को कवर करते हैं। अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष ...

भूपेश सरकार की नाकामी को उजागर कर रहा है विधायक देवेंद्र… भिलाई की कामकाजी महिलाओं को तर्क विहीन संभावना बताकर भावनात्मक आधार पर गुमराह करने का मामल है : भिलाई का सी-मार्ट व्यवस्थापन कार्य व्यवहार... इसलिए आमंत्रित है विधायक देवेंद्र यादव… सी-मार्ट की नोट शीट और मूल नस्ती के साथ.. “विशेष चर्चा के लिए”... सार्वजनिक मंच पर आईए… विधायक महोदय…

कामकाजी महिलाओं की आर्थिक स्थिति से खिलवाड़ का मामल विधानसभा कार्यवाही के बाद से पारदर्शिता के दायरे में आ रहा है । भिलाई क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को अपूर्णीय आर्थिक क्षति पहुंचाने वाली विगत भूपेश सरकार की  "ख्याली पुलाव साबित होने वाली योजना सी-मार्ट" पर विगत वर्षों से जमी अनियमितताओं की धूल को हटाने वाल विधानसभा प्रश्न इस योजना से व्यथित महिलाओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि विधानसभा सत्र दिनांक 25 फरवरी, 2025 का प्रश्न क्रम 25. प्रश्न क्र. 176 से विधायक देवेन्द्र यादव ने प्रश्न पूछा कि, क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि, 1/ नगर पालिका निगम भिलाई के अंतर्गत संचालित सी-मार्ट की वर्तमान स्थिति क्या है ?  2/ क्या उनका संचालन किया जा रहा है ?  3/ यदि हां तो उनमें किन उत्पादनों का विक्रय किया जा रहा है ?  4/ यदि बंद है तो उसको पुनः संचालित कब तक किया जाएगा, जानकारी देवें ? उल्लेखनीय है कि, विधायक देवेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश सरकार की नाकामी और भिलाई नगर निगम के महापौर की तर्क विहीन प्रशासकीय कार्य नीति तथा शासकीय कोष को क्षत...

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों की मनोभावनाओं से खिलवाड़ करके… अपनी राजनैतिक रोटी सेकने वाले… चालबाज विधायक देवेंद्र यादव ने… पुनः एक बार बीएसपी कर्मियों के भावनात्मक ज़ख्मों को कुरदने वाला कार्य व्यवहार किया है… जिसका खुलासा विगत 19 मार्च के विधानसभा प्रश्न कार्यवाही से उजागर हुआ है… जिसमें विधायक देवेंद्र के द्वारा पूछे गए विधानसभा प्रश्नों का मुंहतोड़ प्रशासकीय जवाब… छत्तीसगढ़ के वित्तमंत्री ओ.पी.चौधरी ने दिया है… उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री के जवाब का विषयवस्तु स्पष्ट करता है कि, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विधायक देवेंद्र ने बीएसपी कर्मियों को बेवकूफ बनाओ का कूटनीतिक कार्य व्यवहार अपनाकर चुनाव जीता है….

बी.एस.पी प्रबंधन को लीज डीड अनुबंध पंजीयन हेतु प्राप्त आवेदनों के विषय की कूटनीतिक और छल-कपटपूर्ण राजनीति पर प्रकाश डाल रहे है… मौकापरस्त विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न… पढ़िए कैसे ? बीएसपी लीज मामले में विधायक देवेंद्र यादव की धोखाधड़ी उजागर हुई   छत्तीसगढ़ विधानसभा कार्यवाही 19 मार्च से भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों को आहत करने वाला मामला सामने आया गौर तलब रहे कि, छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रश्न क्रम 1. प्रश्न क्रमांक. 186 से विधायक देवेन्द्र ने चार प्रश्न पूछे… जिसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ने दिया है जिसके बाद विधायक देवेंद्र यादव के कथनी और करनी के बीच का भ्रम स्पष्ट हो गया और यह भी स्पष्ट हो गया कि… विधायक देवेंद्र ने विगत विधानसभा चुनावों के पहले कैसे बीएसपी आवासीय मकान के लीज मामले मतदाताओं को गुमराह किया है… पढ़िए विधायक देवेंद्र के विधानसभा प्रश्न और मंत्री द्वारा दिया गया जवाब तथा विधायक देवेंद्र यादव के कूटनीतिक छलावे पर प्रकाश डालने वाले विचारणीय पहलू… विधायक देवेंद्र का प्रश्न क्रमांक 186/1  क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बी.एस.पी प...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना )

  शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना ) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना का कार्यान्वयन करता है। शिल्पकार प्रशिक्षण देश भर में योजना  के तहत , 14,688 आईटीआई (सरकारी - 3,345 और निजी - 11,343) के माध्यम से 169 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत व्यापार पाठ्यक्रम को उद्योग , शिक्षा जगत और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के परामर्श से समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों , आधुनिक उपकरणों और मशीनरी को इसमें शामिल करना हैं। इसके अलावा , शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया जाता है। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण को वर्तमान उद्योग मानकों के अनुरूप बनाना , समग्र गुणवत्ता में सुधार करना , नामांकन बढ़ाना और प्रशिक्षुओं को वेतनभोगी रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए तैयार करना है। पिछले तीन वर्...

सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना

  सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना   पर्यटन मंत्रालय देशभर में आतिथ्य एवं पर्यटन से संबंधित अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करता है , जिनका उद्देश्य पुरुष और महिला प्रशिक्षुओं , स्थानीय समुदायों , जनजातीय क्षेत्रों आदि के कौशल विकास , कौशल उन्नयन एवं पुनः कौशल विकास को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम ‘सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण’ योजना के अंतर्गत संचालित किया जाता है। यह योजना देशभर में , जिसमें राजस्थान और महाराष्ट्र भी शामिल हैं , सरकारी संस्थानों एवं सूचीबद्ध निजी संस्थानों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान , फूड क्राफ्ट संस्थान , भारतीय पाककला संस्थान आदि शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने 2025 में भारतीय गुणवत्ता परिषद के माध्यम से इस योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर और 36,000 से अधिक लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्रदान कर सीबीएसपी योजना ने भारत के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के कार्यबल को सशक्त ...

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने छूट प्रबंधन और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर ईपीएफओ प्रशिक्षण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण निर्धारित किया

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान , पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आज ‘‘छूट प्रबंधन , कानूनी ढांचा और प्रतिभूतियों का मूल्यांकन’’ शीर्षक से एक उच्च स्तरीय पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नौ से 13 मार्च 2026 तक चलने वाला यह कार्यक्रम देशभर में ईपीएफओ अधिकारियों की नियामक और वित्तीय निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन सत्र का नेतृत्व पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने किया , जिन्होंने आधुनिक सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में विशेष प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम को संबोधित दिया। श्री कुमार रोहित ने इस बात पर प्रकाश डाला कि छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों का विनियमन ईपीएफओ के भीतर ‘‘सबसे विशिष्ट और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण’’ क्षेत्रों में से एक है। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित अधिकारियों के कंधों पर टिकी अपार जिम्मेदारी पर जोर दिया। श्री कुमार रोहित ने कहा , ‘‘ छूट प्राप्त प्रतिष्ठान आज करोड़ों रुपये के भविष्य निधि संचय का प्रबंधन करते...

भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए नए सामान संबंधी नियम अधिसूचित किए, कस्टम्स बैगेज (घोषणा एवं प्रसंस्करण) विनियम, 2026 अधिसूचित; मास्टर सर्कुलर भी जारी

नए बैगेज नियम , 2026 से प्रक्रियाएँ सरल , पारदर्शिता में वृद्धि , इलेक्ट्रॉनिक एवं अग्रिम घोषणा से यात्रियों को मिलेगा तेज़ और सुगम क्लीयरेंस नए बदलाव सामान्य मुक्त भत्ते को बढ़ाने की अनुमति देंगे ; निवास लाभों का हस्तांतरण ; आभूषणों के लिए विशेष भत्ते ; अस्थायी आयात/पुन: आयात के लिए नए प्रावधान ; एक लैपटॉप ( 18 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों के लिए) और पालतू जानवरों का शुल्क मुक्त आयात ; और यात्री सुविधा में वृद्धि केंद्र सरकार ने बैगेज नियम , 2026 को अधिसूचित किया है। नए सीमा शुल्क सामान ( घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम , 2026 और एक मास्टर परिपत्र भी जारी किया गया है। ये उपाय अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और संशोधित प्रावधानों को दर्शाते हैं और नई आर्थिक स्थितियों , बढ़ती यात्रा की मात्रा और यात्रियों की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य मंत्रालयों , हवाई अड्डा ऑपरेटरों सहित हितधारकों के परामर्श और यात्रियों से प्राप्त फीडबैक आदि के साथ किया गया है। ये नियम प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे , पारदर्शिता बढ़ाएंगे , इलेक्ट्रॉनिक और अग्रिम घोषणाओं को सक्षम करेंगे और ...

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने... जो निर्वाचन शपथ पत्र चुनाव आयोग में जमा करवाया है... उसमे भूपेश बघेल के विरुद्ध संस्थापित जांच कार्यवाही का उल्लेख नहीं है... इसलिए अभ्यर्थी भूपेश बघेल के नाम निर्देशन पत्र पर आपत्ति और पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है जिसका विवरण इस प्रकार है...

शपथ पत्र मामला   अभ्यर्थी भूपेश बघेल के निर्वाचन शपथ पत्र मामले में संविक्षा कार्यवाही के दौरान की गई आपत्ति पर भूपेश बघेल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने निर्वाचन कार्यवाही प्रक्रिया की विधि मान्यता को भूपेश बघेल ने स्वयं प्रश्नांकित छोड़ दिया अतः यह प्रश्न अनुत्तरित रह गया है कि, क्या भूपेश बघेल ने मतदाताओं को गुमराह करने के लिए बीएसपी लिज मामले में झूठी घोषणा की थी ? प्रतिक्रिया दो भूपेश बघेल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बीएसपी लिज मामले में कि गई घोषणा की वस्तुस्थिति जानने के लिए पंजीकृत डाक से प्रेषित नोटिस पर कोई जवाब और प्रतिक्रिया नहीं गई दी है इससे भी गंभीर मामला यह है की भूपेश बघेल ने नोटिस पर संज्ञान लेकर जांच आदेश देने वाले संभाग आयुक्त दुर्ग न्यायालय की कार्यवाही पर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और भिलाई के मतदाताओं को गुमराह करने वाला राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति का भाषण करके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जैसे गरिमापूर्ण पद की छवि को धूमिल की है । न्यायालयीन कार्यवाही प्रश्नांकित   दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा का निर्वाचन  संविक्षा अधिकारी अपने न्यायालयीन शक्तिया...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और ई-श्रम कार्ड प्रदान करके उनका पंजीकरण और सहायता करना है।

  ई-श्रम पोर्टल श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सत्यापित और आधार से जुड़े असंगठित श्रमिकों (एनडीयूडब्ल्यू) का एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल ( eshram.gov.in) लॉन्च किया। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और ई-श्रम कार्ड प्रदान करके उनका पंजीकरण और सहायता करना है। 31.07.2024 तक 29.85 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों ने ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। ई-श्रम पोर्टल का एक मुख्य उद्देश्य ई-श्रम पोर्टल का एक मुख्य उद्देश्य असंगठित श्रमिकों तक सामाजिक कल्याण योजनाओं की पहुँच को सुगम बनाना है। ई-श्रम का राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) और स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) के साथ एकीकरण है , जिसका उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को औपचारिक बनाना है। ई-श्रम के एनसीएस के साथ एकीकरण का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों के लिए उपयुक्त बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करना है। एसआईडीएच के साथ एकीकरण का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कौशल विकास और प्रशिक्षुता के अवसर प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त , सरकार...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

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