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कैबिनेट ने 2024-25 से 2030-31 तक के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन (एनएमईओ -तिलहन) को मंजूरी दी

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन (एनएमईओ -तिलहन) को मंजूरी दी है, जो घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता /  (आत्मनिर्भर भारत) हासिल करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक पहल है। मिशन को 10,103 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ 2024-25 से 2030-31 तक की सात वर्ष  की अवधि में लागू किया जाएगा।

मिशन का लक्ष्य सात वर्षों में तिलहन उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है ,मिशन साथी पोर्टल की शुरुआत करेगा, जिसके जरिये राज्य गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता के लिए हितधारकों के साथ समन्वय कर सकेंगे 

नयी मंजूरी प्राप्त एनएमईओ-तिलहन, रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी व  तिल जैसी प्रमुख प्राथमिक तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ कपास के बीज, चावल की भूसी /  वृक्ष जनित तेलों जैसे द्वितीयक स्रोतों से संग्रह और निष्कर्षण दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। मिशन का लक्ष्य प्राथमिक तिलहन उत्पादन को 39 मिलियन टन (2022-23) से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है। एनएमईओ-ओपी (ऑयल पाम) के साथ/  मिशन का लक्ष्य 2030-31 तक घरेलू खाद्य तेल उत्पादन में 25.45 मिलियन टन तक की वृद्धि करना है, जिससे हमारी अनुमानित घरेलू आवश्यकता का लगभग 72% पूरा हो जाएगा। इसे उच्च उपज देने वाली व उच्च तेल सामग्री वाली बीज किस्मों को अपनाने, चावल की परती भूमि में खेती का विस्तार करने और अंतर-फसल को बढ़ावा देने के द्वारा हासिल किया जाएगा। मिशन जीनोम एडिटिंग जैसी अत्याधुनिक वैश्विक तकनीकों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के वर्तमान में जारी विकास का उपयोग करेगा।

गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, मिशन ‘बीज प्रमाणीकरण, पता लगाने की क्षमता / समग्र सूची (साथी)’ पोर्टल के माध्यम से एक ऑनलाइन ५ वर्षीय बीज योजना शुरू करेगा, जिसके जरिये राज्यों को सहकारी समितियों /  किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सरकारी या निजी बीज निगमों सहित बीज उत्पादक एजेंसियों के साथ अग्रिम गठजोड़ स्थापित करने में मदद मिलेगी। बीज उत्पादन अवसंरचना में सुधार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में 65 नए बीज केंद्र और 50 बीज भंडारण इकाइयां स्थापित की जाएँगी।

 इसके अतिरिक्त, 347 विशिष्ट जिलों में 600 से अधिक मूल्य श्रृंखला क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जो सालाना 10 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करेंगे। इन क्लस्टरों का प्रबंधन एफपीओ, सहकारी समितियों और सार्वजनिक या निजी संस्थाओं जैसे मूल्य श्रृंखला भागीदारों द्वारा किया जाएगा। इन क्लस्टरों में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपी) पर प्रशिक्षण तथा मौसम और कीट प्रबंधन पर सलाहकार सेवाएं प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।

मिशन का उद्देश्य

मिशन का उद्देश्य तिलहन की खेती के रकबे में अतिरिक्त 40 लाख हेक्टेयर तक की वृद्धि करना है, जिसके लिए चावल और आलू की परती भूमि को लक्षित किया जाएगा, अंतर-फसल को बढ़ावा दिया जाएगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

एफपीओ, सहकारी समितियों और उद्योग जगत को फसल कटाई के बाद की इकाइयों की स्थापना या उन्नयन के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे कपास के बीज, चावल की भूसी, मकई का तेल और वृक्ष-जनित तेल (टीबीओ) जैसे स्रोतों से आपूर्ति बढ़ेगी।

इसके अलावा, मिशन सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान के माध्यम से खाद्य तेलों के लिए अनुशंसित आहार संबंधी दिशा-निर्देशों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देगा।

मिशन का उद्देश्य घरेलू तिलहन उत्पादन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना तथा खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करना है, जिससे आयात निर्भरता कम होगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी और मूल्यवान विदेशी मुद्रा का संरक्षण होगा। यह मिशन कम पानी के उपयोग, मिट्टी के बेहतर स्वास्थ्य और फसल के परती क्षेत्रों के उत्पादक उपयोग के रूप में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय लाभ भी अर्जित करेगा।

पृष्ठभूमि:

देश आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, जो खाद्य तेलों की घरेलू मांग का 57% पूरा करता है। इस निर्भरता को दूर करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें 2021 में देश में तेल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए 11,040 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) का शुभारंभ शामिल है।

इसके अलावा, तिलहन किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए निर्दिष्ट खाद्य तिलहनों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम- आशा) की निरंतरता यह सुनिश्चित करती है कि तिलहन किसानों को मूल्य समर्थन योजना और मूल्य कमी भुगतान योजना के माध्यम से एमएसपी प्राप्त हो। इसके अतिरिक्त, घरेलू उत्पादकों को सस्ते आयात से संरक्षण प्रदान करने और स्थानीय खेती को प्रोत्साहित करने के लिए खाद्य तेलों पर 20% आयात शुल्क लगाया गया है।

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एमजी / आरपीएम / केसी / जेके प्रविष्टि तिथि: 03 OCT 2024  by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2061741) आगंतुक पटल : 1268

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तहसीलदार भिलाई 3 और अनुविभागीय अधिकारी को भू-अभिलेख संधारण की वस्तुस्थिति बताने के लिए ध्यानाकर्षण करवाकर पहल की गई है!

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जिला राजनादगांव के नायब तहसीलदार लालबहादुर नगर द्वारा कि गई जांच अब प्रश्नांकित होकर पुनः विधिक चुनौति का सामना कर रही है.. आरोप गंभीर है!

प्रशासनिक मामला | डोंगरगढ़ नायब तहसीलदार की जांच पर उठे गंभीर सवाल, SDM से स्वतंत्र जांच की मांग विवादित भूमि के स्वामित्व स्रोत, नामांतरण और पूर्व आपत्ति के रिकॉर्ड तक जांच के घेरे में; आवेदक ने कहा—अपूर्ण जांच को अंतिम निष्कर्ष न माना जाए ----------------------------- विवादित भूमि प्रकरण में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग डोंगरगढ़। राजस्व प्रकरण क्रमांक 202602095000018 (प्रकरण शीर्ष ब-121) में विवादित भूमि से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। आवेदक थैलेंद्र  देवांगन उर्फ चंद्रभूषण देवांगन ने अनुविभागीय अधिकारी/अनुविभागीय दंडाधिकारी, डोंगरगढ़ के समक्ष प्रस्तुत लिखित तर्क में लाल बहादुर नगर के नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। आवेदक का मुख्य सवाल है कि जब विवादित भूमि के स्वामित्व के मूल स्रोत, पंजीकृत विक्रय विलेखों और पूर्व में प्रस्तुत आपत्ति के कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण बताई जा रही है, तो इ...

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई)

प्रगति के मार्ग को प्रशस्त करना भारत की जनसंख्या का 16.6% हिस्सा अनुसूचित जाति (एससी) का है और इन्हें सामाजिक-आर्थिक उन्नति और समावेशन में ऐतिहासिक रूप से बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इन असमानताओं को दूर करना सामाजिक न्याय , समान अवसर और भारत के विकास पथ में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन विकास संबंधी कमियों को पहचानते हुए , भारत सरकार ने अनुसूचित जातियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) शुरू की। समावेशी सशक्तिकरण का दृष्टिकोण प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के ज़रिए अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण करना है। सरकार ने पीएम-एजीएवाई योजना के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण...

नायब तहसीलदार लालबहादुर नगर जांच अब प्रश्नों के घेरे में फंसकर पुनः जांच के दायरे में आ गई है।

 

एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल आसानी से दिलाने के लिए TReDS पर CGTMSE गारंटी कवर शुरू

M1xchange, RXIL और DTX (KredX) के साथ इंटीग्रेशन से योग्य माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ( MSEs) को तेज़ी से और टेक्नोलॉजी-आधारित क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकेगा। केंद्रीय बजट में ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम ( TReDS) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट गारंटी कवर देने की घोषणा के तहत , माइक्रो , स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के इनवॉइस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी की सुविधा शुरू की है। MSME मंत्रालय के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज ( CGTMSE) पोर्टल को अब TReDS इकोसिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है , और क्रेडिट गारंटी कवरेज अब तीन प्लेटफॉर्म - M1xchange, RXIL और DTX (KredX) - पर उपलब्ध है। यह MSME मंत्रालय और CGTMSE द्वारा शुरू की गई सबसे तेज़ टेक्नोलॉजी-आधारित सुविधाओं में से एक है ; इससे माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट आसानी से मिल सकेगा और वे TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए तेज़ी से वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकेंगे। तीन प्लेटफॉर्म पर CGTMSE गारंटी कवर की हाल ही में शुरू हुई सुविधा का मकसद ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

 “जब कोई हुनर एक नया अवसर लेकर आता है” जिन गांवों में परिवारों का भविष्य काफी हद तक फसल पर निर्भर करता है , वहां कोई हुनर सीखने से आमदनी के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। गांवों के कई युवाओं के लिए यह सफर सीखने , काम करने और कमाई के नए अवसर तलाशने से शुरू होता है। यहीं पर ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 25 सितंबर 2014 को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू की गई डीडीयू-जीकेवाई योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के युवाओं पर केंद्रित है। यह योजना टिकाऊ आजीविका के लिए प्लेसमेंट से जुड़ी कौशल प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करती है। यह कार्यक्रम 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए है और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। कामकाज की बदलती दुनिया के साथ यह कार्यक्रम भी लगातार विकसित हो रहा है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग की अगुवाई वाली प्रशिक्षण व्यवस्था , दीर्घकालिक रोजगार , नौकरी मिलने के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन और नए कौशल प्रद...

छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकानों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूहों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कि जा रही है प्रशासकीय धोखाधड़ी जानिए कैसे…?

महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई)

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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई)

  “100 ज़िलों में केंद्रित कृषि विकास का एक साल” जिला-स्तर पर कार्रवाई के ज़रिए कृषि में बदलाव भारत के कृषि क्षेत्र में अलग-अलग इलाकों और किसान समुदायों के बीच काफी क्षमता है। हालांकि इतनी क्षमता होने के बावजूद , कई इलाकों को कम उत्पादकता , सिंचाई की अपर्याप्त सुविधा , ऋण मिलने में मुश्किल और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नतीजतन , ये इलाके अपनी पूरी कृषि क्षमता हासिल नहीं कर पाते और आर्थिक विकास में पीछे रह जाते हैं। पीएम धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई ) इन कमियों को दूर करने और खास तौर पर ध्यान देकर 100 आकांक्षी कृषि ज़िलों का विकास करने का लक्ष्य रखती है। ज़िले की खास ज़रूरतों को पूरा करके , यह योजना उत्पादकता , सिंचाई , लोन की सुविधा और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे में नए मौके खोलने में मदद कर सकती है। पीएमडीडीकेवाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई , 2025 को छह साल की अवधि के लिए मंज़ूरी दी थी और माननीय प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर , 2025 को इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस साल 11 अक्टूबर को इसकी पहल...

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज यहां जन औषधि केंद्रों के लिए एक ऋण सहायता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने जन औषधि केंद्रों को ऋण सहायता के लिए एक वेबसाइट https://jak-prayaasloans.sidbi.in/home भी शुरू की ।

   डॉ. मनसुख मंडाविया ने जन औषधि केंद्रों के लिए ऋण सहायता कार्यक्रम का शुभारंभ किया ,  2014 में केवल 80 जन औषधि केंद्रों से बढ़कर   आज देश भर में इनकी लगभग 11,000 इकाइयाँ संचालित हो रही हैं: डॉ. मनसुख मंडाविया "अनुमान है कि प्रतिदिन 10 से 12 लाख लोग जन औषधि केंद्रों पर आते हैं , जिससे उन्हें महत्वपूर्ण बचत और आवश्यक औषधियों तक पहुंच मिलती है", "सिडबी और पीएमबीआई के बीच समझौता ज्ञापन छोटे और नए उद्यमियों के लिए एक आशीर्वाद के रूप में उभरेगा क्योंकि इसमें देश में जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को और मजबूत और आधुनिक बनाने की क्षमता है", एमओयू के अंतर्गत   जन औषधि केंद्रों के छोटे उद्यमियों के लिए सिडबी द्वारा 2 लाख रुपये रुपये तक की क्रेडिट सीमा के लिए परियोजना ऋण पर अत्यंत प्रतिस्पर्धी और किफायती ब्याज दर की पेशकश की जाएगी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज यहां जन औषधि केंद्रों के लिए एक ऋण सहायता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस संबंध में , उन्होंने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी-एसआईडीबीआई) और फार्मा...

प्याज की पर्याप्त उपलब्धता; सरकार द्वारा मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से सुनियोजित और लक्षित मात्रा में प्याज जारी किया जा रहा है

प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना , प्रमुख उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति के लिए रेलवे रेक और सड़क परिवहन के माध्यम से हाइब्रिड परिवहन मॉडल एनसीसीएफ , नेफेड , केंद्रीय भंडार और अन्य खुदरा दुकानों के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा Delhi सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी मूल्य दबाव को कम करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित और लक्षित मात्रा में निकासी शुरू कर दी है। यह हस्तक्षेप रेलवे रेक और सड़क परिवहन से युक्त हाइब्रिड परिवहन मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है , जिसके तहत मौजूदा बाजार स्थितियों और मूल्य रुझानों के आधार पर प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्याज उपलब्धता और शानदार उत्पादन आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्ष 2025-26 में 307.37 एलएमटी उत्पादन का अनुमान है , जो पिछले वर्ष के 307.67 एलएमटी उत्पादन के लगभग बराबर ही है। मजबूत उत्पादन , बफर स्टॉक की उपलब्धता और सक्रिय बाजार हस्तक...

जिला राजनादगांव के नायब तहसीलदार लालबहादुर नगर द्वारा कि गई जांच अब प्रश्नांकित होकर पुनः विधिक चुनौति का सामना कर रही है.. आरोप गंभीर है!

प्रशासनिक मामला | डोंगरगढ़ नायब तहसीलदार की जांच पर उठे गंभीर सवाल, SDM से स्वतंत्र जांच की मांग विवादित भूमि के स्वामित्व स्रोत, नामांतरण और पूर्व आपत्ति के रिकॉर्ड तक जांच के घेरे में; आवेदक ने कहा—अपूर्ण जांच को अंतिम निष्कर्ष न माना जाए ----------------------------- विवादित भूमि प्रकरण में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग डोंगरगढ़। राजस्व प्रकरण क्रमांक 202602095000018 (प्रकरण शीर्ष ब-121) में विवादित भूमि से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। आवेदक थैलेंद्र  देवांगन उर्फ चंद्रभूषण देवांगन ने अनुविभागीय अधिकारी/अनुविभागीय दंडाधिकारी, डोंगरगढ़ के समक्ष प्रस्तुत लिखित तर्क में लाल बहादुर नगर के नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। आवेदक का मुख्य सवाल है कि जब विवादित भूमि के स्वामित्व के मूल स्रोत, पंजीकृत विक्रय विलेखों और पूर्व में प्रस्तुत आपत्ति के कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण बताई जा रही है, तो इ...

पीएफ सदस्य की ऑनलाइन फाइलिंग के लिए एक नई सॉफ्टवेयर कार्यक्षमता का शुभारंभ हुआ ताकि वे अपने सदस्यों के प्रोफाइल को अद्यतन/सही कर सकें

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ अपने सदस्यों की संख्या और इसमें किए गए वित्तीय लेनदेन की मात्रा के मामले में दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है। वर्तमान में , लगभग 7.5 करोड़ सदस्य हर महीने भविष्य निधि , पेंशन और बीमा योजनाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष के पहले 2 महीनों में ही आवास के लिए अग्रिम राशि , बच्चों की मैट्रिक के बाद की शिक्षा , विवाह , बीमारी , अंतिम भविष्य निधि निपटान , पेंशन , बीमा आदि जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों के रूप में लगभग 87 लाख दावों का निपटान किया गया। पीएफ सदस्य इन लाभों का दावा ऑनलाइन करते हैं। यह एक मजबूत कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन के माध्यम से संभव हुआ है , जो यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) में सदस्य के डेटा को मान्य करता है। इसलिए , ईपीएफओ ​​के रिकॉर्ड में सदस्यों के डेटा की एकरूपता सबसे महत्वपूर्ण है , ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सेवाएं ऑनलाइन निर्बाध रूप से और सही सदस्य को प्रदान की जाएं , ताकि गलत भुगतान या धोखाधड़ी के किसी भी जोखिम से बचा जा सके। इस प्रकार ईपीएफओ ​​द्वारा 22 अगस्त , 2023...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

6 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य पूरा करने के लिए 700 शी-मार्ट और 1,000 ज़िला फ़ुलफ़िलमेंट सेंटर बनाए जाएंगे

ग्रामीण विकास सचिव ने डे-एनआरएलएम के अंतर्गत मार्केटिंग पहलों की समीक्षा की ; महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने पर बल दियाक्षमता निर्माण , उद्यम को बढ़ावा देना , ओएनडीसी के साथ साझेदारी और वित्तीय समावेशन मुख्य प्राथमिकताएं बनी रहेंगी ग्रामीण विकास विभाग ने छह करोड़ लखपति दीदियों को तैयार करने के लिए एक रणनीति बनाई है। इस रणनीति के मुख्य हिस्से हैं: उद्यम को बढ़ावा देकर आजीविका के बेहतर अवसर सृजित करना , ग्रामीण महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाना , और स्वयं सहायता समूह (शी) के सदस्यों के लिए क्षमता निर्माण , मार्केटिंग गतिविधियों , प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सहायता पर ध्यान देना। भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस पर चर्चा की गई। इस बैठक का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) और इसकी विभिन्न उप-योजनाओं की प्रगति का आकलन करना था। बैठक में संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा और सुश्री जयश्री एम.जी. के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका प्रभाग और राष्ट्रीय मिशन प...

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