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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई)

 “100 ज़िलों में केंद्रित कृषि विकास का एक साल”

जिला-स्तर पर कार्रवाई के ज़रिए कृषि में बदलाव

भारत के कृषि क्षेत्र में अलग-अलग इलाकों और किसान समुदायों के बीच काफी क्षमता है। हालांकि इतनी क्षमता होने के बावजूद, कई इलाकों को कम उत्पादकता, सिंचाई की अपर्याप्त सुविधा, ऋण मिलने में मुश्किल और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नतीजतन, ये इलाके अपनी पूरी कृषि क्षमता हासिल नहीं कर पाते और आर्थिक विकास में पीछे रह जाते हैं।

पीएम धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) इन कमियों को दूर करने और खास तौर पर ध्यान देकर 100 आकांक्षी कृषि ज़िलों का विकास करने का लक्ष्य रखती है। ज़िले की खास ज़रूरतों को पूरा करके, यह योजना उत्पादकता, सिंचाई, लोन की सुविधा और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे में नए मौके खोलने में मदद कर सकती है। पीएमडीडीकेवाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई, 2025 को छह साल की अवधि के लिए मंज़ूरी दी थी और माननीय प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर, 2025 को इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस साल 11 अक्टूबर को इसकी पहली वर्षगांठ मनाई जा रही है।

2025-26 से शुरू होने वाली यह छह साल की पहल, 100 आकांक्षी कृषि जिलों में खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों को बदलने पर केंद्रित है। इन जिलों की पहचान तीन मुख्य पैमानों के आधार पर की गई थी: कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और खेती के लिए कम कर्ज मिलना। चयन करते समय हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में खेती वाले कुल इलाके और ऑपरेशनल होल्डिंग्स के हिस्से पर भी ध्यान दिया गया। हर राज्य में कम से कम एक जिला चुना गया है।

यह योजना 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं, राज्य की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मिलाकर लागू की जा रही है, जिससे स्थानीय कृषि प्राथमिकताओं के हिसाब से कदम उठाए जा सकें।

क्रियान्वयन का प्रशासनिक ढांचा

पीएमडीडीकेवाई योजना को लागू करने का ढांचा तीन स्तरों वाला है-

•      जिला स्तर: जिला कलेक्टर/डीएम की अध्यक्षता वाली जिला धन-धान्य कृषि योजना समिति जिले के लिए एक्शन प्लान बनाती है और उसे लागू करती है।

•      राज्य स्तर: राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य धन-धान्य कृषि योजना समिति जिला योजनाओं की समीक्षा और निगरानी करती है।

•      राष्ट्रीय स्तर: दो समितियां इस योजना की देखरेख करती हैं। राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री करते हैं। राष्ट्रीय निगरानी समिति की अध्यक्षता डीए एंड एफडब्ल्यू के सचिव करते हैं।

ज़िला एक्शन प्लान

  • ज़िला एक्शन प्लान (डीएपी) बेसलाइन और डायग्नोस्टिक विश्लेषण के आधार पर तैयार किए जाते हैं। ये प्लान स्थानीय कृषि ज़रूरतों की पहचान करते हैं और संबंधित केंद्रीय और राज्य योजनाओं को मिलाकर उन्हें पूरा करते हैं। डीएपी में नतीजों पर आधारित लक्ष्य, सालाना उपलब्धियों और संबंधित योजनाओं से जुड़े उपाय तय किए जाते हैं।
  • डीएपी को संबंधित राज्य विभागों को भेजा जाता है, ताकि उन्हें संबंधित सालाना एक्शन प्लान में शामिल किया जा सके। इससे ज़रूरी मंज़ूरी और फंड जारी करने में मदद मिलती है।
  • 36 योजनाओं के तहत 121 संकेतकों (74 आउटपुट और 47 आउटकम संकेतक) के ज़रिए प्रगति पर नज़र रखी जाती है। आउटपुट संकेतकों पर ज़िलों के प्रदर्शन की रैंकिंग हर महीने पीएम-डीडीकेवाई डैशबोर्ड - https://pmddky.niti.gov.in/  के ज़रिए की जाती है।

अमल और प्रगति का एक साल

पीएमडीडीकेवाई डैशबोर्ड अक्टूबर 2025 के आखिरी हफ्ते में चालू हुआ। नवंबर 2025 में आउटपुट-संकेतकों की मासिक रैंकिंग शुरू हुई, जिससे 100 ज़िलों में प्रगति की निगरानी का एक तरीका मिला।

•      सभी 100 डीडीकेवाई ज़िलों ने डीएपी तैयार कर लिए हैं और उन पर अमल हो रहा है।

•      समीक्षा और निगरानी के लिए राज्य, ज़िला और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां बनाई गईं।

•      सभी 100 ज़िलों ने अगस्त 2026 तक आउटपुट संकेतकों के डेटा जमा किए। सभी 100 ज़िलों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आउटकम संकेतकों का डेटा भी जमा किया।

•      केंद्रीय नोडल अधिकारी नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और ज़िलों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

•      पब्लिक एंटरप्राइज़ेज़ विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए सीपीएसई द्वारा सीएसआर गतिविधि के तहत डीडीकेवाई ज़िलों को अपनाने को शामिल किया है।

•      छह उद्देश्यों में 100 ज़िलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 में 18.85 से बढ़कर अगस्त 2026 में 46.89 हो गया, जो 28.04 अंकों का सुधार है।

•  इसी दौरान लक्ष्य के हिसाब से औसत स्कोर में भी सुधार देखा गया-

o     खेती की पैदावार बढ़ाना: 1.50 से 8.08

o     फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देना: 4.08 से 10.18

o     फसल कटाई के बाद स्टोरेज क्षमता बढ़ाना: 2.14 से 5.19

o     सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार: 1.38 से 4.91

o     कम और लंबी अवधि के कृषि लोन तक बेहतर पहुंच बनाना: 2.40 से 6.53

o     बेहतर गवर्नेंस और सर्विस डिलीवरी: 7.41 से 12.05

पहले साल में किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए अनुभव साझा करने और नए मौकों को तलाशने के लिए प्लेटफॉर्म भी बनाए गए। दिसंबर 2025 में आयोजित पीएमडीडीकेवाई एफपीओ संगम में 15 राज्यों और 33 पीएमडीडीकेवाई जिलों के 72 से ज़्यादा एफपीओ शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उत्पादकता, बाज़ार तक पहुँच और आय बढ़ाने से जुड़े अनुभव साझा किए गए। इसमें प्राकृतिक खेती, तिलहन, मधुमक्खी पालन, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, संस्थागत वित्त और डिजिटल कृषि जैसे विषय भी शामिल थे।

धन-धान्य जिलों के बेहतरीन उपाय

स्थानीय प्रोसेसिंग, बेहतर कीमत मिलना

महाराष्ट्र के पीएमडीडीकेवाई जिले गढ़चिरौली में, देसाईगंज फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) के 800 किसान सदस्य हैं। इसने 3 टन प्रति घंटे की क्षमता वाली चावल प्रोसेसिंग यूनिट और 900 मीट्रिक टन (एमटी) का गोदाम बनाया है। इसके खास जय श्री राम चावल की किस्म के लिए फसल कटाई के बाद का इंफ्रास्ट्रक्चर स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और बेहतर कीमत पाने में मदद करता है। एफपीओ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.24 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया।

बेहतर बाज़ार, बेहतर रिटर्न

कर्नाटक के पीएमडीडीकेवाई जिले तुमकुरु में, तिप्तूर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड एफपीओ के 750 किसान सदस्य हैं। यह एक फ्रांसीसी मल्टीनेशनल कंपनी को बॉल कोपरा सप्लाई करता है, जिससे एफपीओ के किसानों को बेहतर कीमत और बाज़ार तक पहुँच मिलती है। एफपीओ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.60 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया और 12 सितंबर 2026 तक 1.9 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत का 138 टन से ज़्यादा कोपरा इकट्ठा किया है।

स्मार्ट सिंचाई, बेहतर खेती की उत्पादकता

राजस्थान के पीएमडीडीकेवाई जिले जैसलमेर में, जैसलमेर कृषि फेड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के 1,236 किसान सदस्य हैं। एफपीओ 2,000 एकड़ में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम) आधारित जीरे की खेती करता है। यह 500 एकड़ में सौर ऊर्जा आधारित स्प्रिंकलर सिंचाई का इस्तेमाल करता है। यह पहल पानी के कुशल इस्तेमाल, नवीकरणीय ऊर्जा और खेती की बेहतर उत्पादकता को बढ़ावा देती है।

ज़िलों में खेती-बाड़ी को बढ़ावा देना

 पीएमडीडीकेवाई ने 11 अक्टूबर 2026 को अपना पहला साल पूरा किया, जो ज़िला-स्तर पर केंद्रित कामकाज का एक साल रहा है। 100 ज़िलों में अब ज़िला एक्शन प्लान और संकेतक आधारित निगरानी लागू हो चुकी है। ज़िले-विशेष उपाय ज़मीनी स्तर पर खेती-बाड़ी के विकास में मदद कर रहे हैं। अब तक हुई प्रगति आने वाले सालों में बेहतर तालमेल और खेती-बाड़ी के लगातार विकास के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करती है।

संदर्भ

प्रधानमंत्री कार्यालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2177454

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय

https://pmddky.niti.gov.in/aboutTheScheme

https://pmddky.niti.gov.in/

https://agriwelfare.gov.in/Documents/Guidelines/Guidelines_PM_DDKY_19092025_Final[1]_0.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2244624

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2201150

 पीआईबी विश्लेषक

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=154909&NoteId=154909&ModuleId=3&reg=48&lang=2

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पीआईबी शोधपीके/केसी/आरटी/एनएस(रिलीज़ आईडी: 2321910) आगंतुक पटल : 297प्रविष्टि तिथि: 10 OCT 2026  by PIB Delhi

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शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए पाँच उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी

केंद्रों का उद्देश्य भारत की भाषाई और साहित्यिक विरासत के अनुसंधान , संरक्षण , डिजिटलीकरण तथा व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना उच्च शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय , भारत सरकार ने शास्त्रीय असमिया , शास्त्रीय बंगाली , शास्त्रीय मराठी , शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत में अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्रों ( सीओई ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह पहल उन्नत शैक्षणिक अनुसंधान , भाषाई और साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण और इन शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए समर्पित संस्थागत सहायता प्रदान करेगी। निम्नलिखित उच्च शिक्षण संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे : क्रम संख्या शास्त्रीय भाषा उत्कृष्टता केंद्र 1   शास्त्रीय असमिया तेजपुर विश्वविद्यालय , असम 2 शास्त्रीय बांग्ला विश्वभारती विश्वविद्यालय , पश्चिम बंगाल 3 शास्त्रीय मराठी डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान ( ...

मुफ्त में घुमाने - फिरने के दावे करने वाली लेट्स ट्रेव्हल्स‍‌‍ "Free' कंपनी की वास्तविकता बताने वाले.... कहाँ है ? उनसे वस्तुस्थिति जानने के लिए पहल कर दी गई है पढ़िए नोटिस

पंजीकृत डाक से नोटिस प्रेषित कर लेट्स ट्रेव्हल्स ‍‌‍ कंपनी के द्वारा की जा रहीं अनियमित गतिविधियों पर प्रतिक्रिया लेने बाबत नोटिस क्रमांक 29102023/ 001/  letsTravelFree से दिनांक : 28-10-2023 को  सामाजिक कार्यकर्त्ता  अमोल मालुसरे   जो की नोटिसकर्ता है ने व्यक्तिगत स्तर से जनहित संरक्षण की  एक पहल कर दी है | किसको भेजी गई नोटिस गौरतलब रहे कि, नोटिस के उत्तरवादी निम्नानुसार लोग है जिन्होंने नियम विरुद्ध एक संस्था का गठन करके तथाकथित तौर पर कई गड़बड़ियाँ की है ऐसा माना जा रहा है जिस कंपनी के गतिविधीयो की जानकारी लेने का प्रयास किया जा रहा है उसका नाम व सोसाइटी का विवरण अग्रलिखित है श्री नागेश कुमारधारा प्रोप्राएटर : JANARADHANA K KUMARADHARA FIRM LETS TRAVEL FREE पता :- प्रथम तल सूर्य ट्रेसर्स आइलैंड माल जुनवानी भिलाई छत्तीसगढ़ शासन कार्यालय भिलाई नगर निगम द्वारा भयप्रद एवं उत्तेजक व्यापार एवं कारखाना अधिनियम के तहत प्रदत अनुज्ञप्ति आवेदन क्रमांक 4621012208002907 Website : https://letstravelfree.com/ अनुज्ञप्ति प्रभावशील दिनांक 09 मई 2023...

मेरा दृष्टिकोण:- छल कपट के आरोपी पक्षकार शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गयी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विधिक मुद्दों के आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। गौरतलब रहे कि, छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार में महिर्षि महेश योगी के ट्रस्ट SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India की बलौदाबाजार स्थित दो जमींनों को गलत तरीके से रजिस्ट्री कर के हड़पने के आरोपित मामले में जिला सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने सुनवाई कर इन दोनों आरोपियों शशिभूषण शुक्ला और सुधीर अग्रवाल को आरोपी बताते हुए इनके विरुद्ध में क्रिमिनल धाराएं 419, 420, 465, 467, 468, 471, 16, 212, 217 & 120B इंगित करते हुए दिनांक 10-11-2014 एवं 22-11-2014 को निर्णय जारी करते किया और निर्देशित किया की स्थानीय पुलिस स्टेशन बलौदाबाजार में FIR दर्ज करने का आदेश दिया इसके पश्चात आरोपियों ने अपना प्रभाव दिखाकर तथा भ्रमित करने वाले चार अलग-अलग आवेदन देकर पुनरीक्षण केस को हाई कोर्ट बिलासपुर में दाखिल करवाया जिसमे हाई कोर्ट बिलासपुर ने तथाकथित तौर पर बिना तथ्यों की जाँच करते हुए FIR को निरस्त करने का आदेश नौ साल बाद दिनांक 09-08-2023 को कर दिया था।

  हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है और मार्गदर्शक निर्णय देकर... संस्थागत मामलों के अपराधिक कृत्यों पर की जाने वाली पुलिस कार्यवाही पर विधिक प्रकाश डाला है.... आरोपियों के द्वारा हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष क्रिमिनल (Criminal) केस को दीवानी (Civil) केस दिखाकर निरस्त करवा लिया गया था लेकिन SRM Spiritual Regenerartion Movement Foundation of India के प्राधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए क्राइम केस न:- 486 /2014 के संबंध में दिनांक 22-10-2024 को सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त करके खारिज करवाया और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को दोबारा इस केस के तथ्यों को पुनः जाँच कर के क्रिमिनल केस की समूर्ण विवेचना करने का न्यायालयीन परामर्श दिलवा दिया है। भ्रामक जानकारी के आधार पर आरोपियों ने प्राप्त किया विधि विरुद्ध लाभ    आरोपियों ने हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से लंबित मामले का सम्पूर्ण लाभ उठाते हुए लोकल पुलिस से इस केस की विवेचना एवं चार्जशीट किया है क्या यह लंबित चार्जशीट कार्यवाही...

एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल आसानी से दिलाने के लिए TReDS पर CGTMSE गारंटी कवर शुरू

M1xchange, RXIL और DTX (KredX) के साथ इंटीग्रेशन से योग्य माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ( MSEs) को तेज़ी से और टेक्नोलॉजी-आधारित क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकेगा। केंद्रीय बजट में ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम ( TReDS) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट गारंटी कवर देने की घोषणा के तहत , माइक्रो , स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के इनवॉइस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी की सुविधा शुरू की है। MSME मंत्रालय के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज ( CGTMSE) पोर्टल को अब TReDS इकोसिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है , और क्रेडिट गारंटी कवरेज अब तीन प्लेटफॉर्म - M1xchange, RXIL और DTX (KredX) - पर उपलब्ध है। यह MSME मंत्रालय और CGTMSE द्वारा शुरू की गई सबसे तेज़ टेक्नोलॉजी-आधारित सुविधाओं में से एक है ; इससे माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट आसानी से मिल सकेगा और वे TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए तेज़ी से वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकेंगे। तीन प्लेटफॉर्म पर CGTMSE गारंटी कवर की हाल ही में शुरू हुई सुविधा का मकसद ...

तहसीलदार भिलाई 3 और अनुविभागीय अधिकारी को भू-अभिलेख संधारण की वस्तुस्थिति बताने के लिए ध्यानाकर्षण करवाकर पहल की गई है!

मेरा दृष्टिकोण | जनहित की वार्ता  भिलाई-3 चरोदा क्षेत्र में भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण को लेकर नागरिक पहल प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने सूचना नोटिस, सांसद-विधायक को भी कराया गया वस्तुस्थिति से अवगत भिलाई-3 | जनहित पहल भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण को लेकर नागरिक स्तर से जन-जागरूकता की पहल भिलाई-3। भिलाई-3 चरोदा तहसील क्षेत्र में भू-अभिलेखों के नियमसम्मत संधारण तथा उससे जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों द्वारा एक पहल शुरू की गई है। इस पहल के माध्यम से नागरिक स्तर पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भू-अभिलेखों के महत्व तथा उनके नियमानुसार संधारण की आवश्यकता की ओर आकर्षित कराया जा रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे, श्रीमती निशा देशमुख एवं उनके साथियों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भिलाई-3 तथा तहसीलदार, भिलाई-3 के समक्ष सूचना नोटिस प्रस्तुत कर विषय की ओर ध्यानाकर्षण कर...

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) का अवधि विस्तार 01.07.2026 से 30.06.2027 तक स्वीकृत किया है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं: ·         लाभार्थी व्यक्ति को बेरोज़गारी से ठीक पहले निरन्तर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए और बेरोज़गारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए। ·         बेरोज़गारी कदाचार ( misconduct), लॉकआउट , सुपरअन्यूसिएशन (सेवानिवृत्ति) , या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 की व्यवस्था के तहत गलत बयान देने पर दोषी सिद्ध होने के कारण नहीं होनी चाहिए। ·         योजना के तहत दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं ; इनमें दावों का ऑनलाइन सबमिशन और प्रोसेसिंग , लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ( DBT), और लाभों के समय पर भुगतान सुन...

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई)

प्रगति के मार्ग को प्रशस्त करना भारत की जनसंख्या का 16.6% हिस्सा अनुसूचित जाति (एससी) का है और इन्हें सामाजिक-आर्थिक उन्नति और समावेशन में ऐतिहासिक रूप से बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इन असमानताओं को दूर करना सामाजिक न्याय , समान अवसर और भारत के विकास पथ में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन विकास संबंधी कमियों को पहचानते हुए , भारत सरकार ने अनुसूचित जातियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) शुरू की। समावेशी सशक्तिकरण का दृष्टिकोण प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के ज़रिए अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण करना है। सरकार ने पीएम-एजीएवाई योजना के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण...

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