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स्व-सहायता समूहों के लिए लागू की गई ग्रामीण योजनाएं

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम)-ग्रामीण विकास मंत्रालय, ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करने तथा उन्हें निरंतर विकसित एवं समर्थित करने के उद्देश्य से दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) कार्यान्वित कर रहा है, ताकि समय के साथ उनकी आय में सराहनीय वृद्धि हो सके तथा उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। संचयी रूप से, 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संचालित किया गया है। मिशन अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए चार मुख्य घटकों अर्थात (1) ग्रामीण गरीबों की स्व-प्रबंधित एवं वित्तीय रूप से टिकाऊ सामुदायिक संस्थाओं का सामाजिक संचालन, संवर्धन एवं सुदृढ़ीकरण; (2) ग्रामीण गरीबों का वित्तीय समावेशन; (3) टिकाऊ आजीविका; तथा (4) सामाजिक समावेशन एवं सामाजिक विकास में निवेश करता है। यह मिशन देश भर में 28 राज्यों एवं 6 संघ-राज्य क्षेत्रों (दिल्ली एवं चंडीगढ़ को छोड़कर) में कार्यान्वित किया जा रहा है।

मंत्रालय, डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच उपलब्ध कराता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, महिला स्वयं सहायता समूह भारतीय रिज़र्व बैंक तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण प्राप्त करते हैं। इन स्वयं सहायता समूहों के प्रशिक्षण हेतु, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) इन समूहों सहित ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता प्रशिक्षण प्रदान करते हैं जिसमे महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जाता है। ये संस्थान आजीविका एवं उद्यम विकास में सहायता प्रदान करके, बैंक ऋण संबद्धता की सुविधा प्रदान करके तथा प्रशिक्षणोपरांत व्यापक हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा देते हैं।

इसके अतिरिक्त, डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्रों (सीएमटीसी) को बढ़ावा दिया जाता है, जो समुदाय-स्वामित्व एवं समुदाय-प्रबंधित संस्थाएं हैं तथा क्षमता निर्माण, सहकर्मी अधिगम एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में कार्य करती हैं।

डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत देश में स्थापित महिला स्वयं सहायता समूहों की कुल संख्या का राज्य-वार विवरण अनुबंध-I में दिया गया है।

स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को कई प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें लैंगिक असमानता, प्रवासन तथा निम्न साक्षरता जैसी सामाजिक बाधाएं शामिल हैं, जो भागीदारी एवं समावेशन को और अधिक बाधित करती हैं। इसके अतिरिक्त, विपणन सुविधाओं के विस्तार, प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच तथा प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य आपातस्थितियों, जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं भी विद्यमान हैं।

डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं संस्थागत सशक्तिकरण हेतु एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इन कार्यकलापों के सकारात्मक परिणामों को मंत्रालय द्वारा प्रायोजित स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन अध्ययनों के माध्यम से सत्यापित किया गया है। 9 राज्यों में लगभग 23,000 परिवारों को कवर करते हुए 2019 एवं 2024 में किए गए आंकड़ा संग्रहण के दो चरणों पर आधारित 3ie प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (2025) में पाया गया कि एनआरएलएम ब्लॉकों में परिवारों की आय में 9.5% की वृद्धि हुई, जबकि परिपक्व सामुदायिक संस्था समूहों में आय वृद्धि 12% से 33% के बीच रही। इस अध्ययन में प्रति व्यक्ति पारिवारिक उपभोग में 6-11% की वृद्धि के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, आजीविका विविधीकरण एवं समग्र पारिवारिक कल्याण में सुधार की भी रिपोर्ट दी गई।

इसके अतिरिक्त, नीति आयोग के ग्रामीण विकास क्षेत्र में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के मूल्यांकन (2025) में डीएवाई-एनआरएलएम को एक अत्यंत प्रासंगिक एवं प्रभावी कार्यक्रम के रूप में आंका गया है, जिसमें आय वृद्धि, विविधीकृत आजीविका अवसरों, बेहतर वित्तीय समावेशन एवं साक्षरता, महिलाओं में अधिक आत्मविश्वास तथा सुदृढ़ सामुदायिक संस्थाओं एवं अन्य विकास पहलों के साथ अभिसरण के माध्यम से बेहतर सामाजिक समावेशन में इसके योगदान का उल्लेख किया गया है। ये निष्कर्ष महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने तथा ग्रामीण परिवारों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण में सुधार लाने में डीएवाई-एनआरएलएम की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं। इसने उल्लेखनीय सकारात्मक परिणाम दर्शाए हैं, जिसमें औसत पारिवारिक आय में 49% की वृद्धि हुई है। इसने महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है, क्योंकि 58% महिलाओं ने बढ़े हुए आत्मविश्वास की जानकारी दी, 52% को आय-सृजन के अवसरों तक बेहतर पहुंच प्राप्त हुई, तथा 46% अपने बैंकिंग लेन-देन को स्वतंत्र रूप से प्रबंधित करने में सक्षम हो गईं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों ने सिलाई, बकरी पालन एवं कृषि-व्यापार सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों में विविधीकरण किया है, जिससे आय के स्रोत सुदृढ़ हुए हैं तथा टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिला है।

इसके अतिरिक्त, डीएवाई-एनआरएलएम योजना के अंतर्गत लखपति दीदी पहल एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों की आय बढ़ाना है, ताकि उन्हें “लखपति दीदी” बनाया जा सके। इसमें स्वयं सहायता समूह सदस्यों को 1 लाख रुपये या इससे अधिक की वार्षिक आय प्राप्त करने में सहायता करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। देश भर में लखपति दीदियों की कुल संख्या 3.46 करोड़ तक पहुंच गई है, जो स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों की आय पर डीएवाई-एनआरएलएम योजना के प्रभाव को दर्शाती है।

 अनुबंध-Iदेश में स्थापित महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) का राज्य-वार विवरण:

क्र.

सं.

राज्य/संघ-राज्य क्षेत्र

देश में स्थापित एसएचजी (राज्यवार)

1

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

1,343

2

आंध्र प्रदेश

8,27,133

3

अरुणाचल प्रदेश

12,853

4

असम

3,56,760

5

बिहार

13,53,025

6

छत्तीसगढ़

2,91,453

7

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

1,823

8

गोवा

3,462

9

गुजरात

2,32,911

10

हरियाणा

62,921

11

हिमाचल प्रदेश

43,344

12

जम्मू और कश्मीर

96,637

13

झारखंड

3,20,838

14

कर्नाटक

2,97,982

15

केरल

2,38,981

16

लद्दाख

2,119

17

लक्षद्वीप

348

18

मध्य प्रदेश

4,68,501

19

महाराष्ट्र

6,67,562

20

मणिपुर

13,689

21

मेघालय

47,946

22

मिजोरम

10,083

23

नागालैंड

15,333

24

ओडिशा

5,51,414

25

पुद्दुचेरी

4,927

26

पंजाब

57,337

27

राजस्थान

3,36,928

28

सिक्किम

5,895

29

तमिलनाडु

3,48,977

30

तेलंगाना

3,93,845

31

त्रिपुरा

54,860

32

उत्तर प्रदेश

8,71,820

33

उत्तराखंड

69,811

34

पश्चिम बंगाल

11,67,882

कुल

92,30,743

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

आर सी/ पीयू प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2297770) आगंतुक पटल : 5473

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पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

किसानों से ठगी : ढाई हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र के किसानों से प्रशासकीय ठगी करने वाले जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के गड़बड़ी बाज अधिकारियों के गिरोह को विधिक कार्यवाही प्रक्रिया से दंडित करवाने की आवश्यकता क्यों है आप भी जान लीजिए…

मामला बिलासपुर के अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना निर्माण का जिसमें 25000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य शासन का है जिसके लिए शासन ने इस लोकहिताय परियोजना को बड़ी राशि से वित्त पोषित किया जिसमें से ठेकेदार को 317 करोड़ का भुगतान जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा किए जाने की जानकारी जांच कार्यवाही विवरण में स्पष्ट की गई है । अनियमितता और भ्रष्टाचार के हवाले है अरपा-भैंसाझार  जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी अरपा-भैंसाझार परियोजना को अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हवाले कर चुके है परिणाम स्वरूप यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में अधूरी और अपूर्ण स्थिति में है जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा नुकसान हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार की छवि भी दागदार हुई है तथा सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में परियोजना लगात बढ़ गई है इसलिए जब भी यह परियोजना पूरी करने की कोशिश जब भी सरकार करेगी तब सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी अरपा-भैंसाझार बिलासपुर वासियों के लिए आवश्यक जल आपूर्ति व्यवस्था और किसानों के कृषि कार्यों के लिए आवश्यक जल व्यव...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

छत्तीसगढ़ की विगत भूपेश बघेल सरकार ने दुर्ग की आम जनता के परिवहन साधन… “शहरी बस सेवा” दुर्ग को अनियमितताओं के हवाले कर दिया और आम जनता को सस्ती व सुगम बस सेवा का लाभ लेने से वंचित कर दिया जिसके बाद जनता ने भूपेश बघेल सरकार को सत्ताविहीन कर दिया…

देवेंद्र यादव ने गड़बड़ियां का संरक्षण किया भिलाई के पूर्व महापौर और विधायक देवेंद्र यादव दुर्ग को सार्वजनिक सेवा की प्रशासकीय कार्यवाही में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की परिणाम स्वरूप दुर्ग जिले की बस सेवा अनियमितताओं के हवाले हो गई और दुर्ग जिले की जनता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित हो गई । क्यों जरूरी है बस सेवा ? शहरी बस सेवा: लोक कल्याण की सेवा है  शहरी बस सेवा, शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो नागरिकों को किफायती, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा प्रदान करती है। यह निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करने और शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आम जनता के परिवहन का सबसे सस्ता और सुगम साधन होती है । प्रमुख विशेषताएं: विविधता:  शहरी बसें विभिन्न आकारों और क्षमताओं में उपलब्ध हैं, जो विभिन्न शहरों और यात्री भार की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। कुछ छोटी और अधिक चपल होती हैं, जो संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर ढंग से संचालित होती हैं, जबकि अन्य बड़ी और जोड़दा...

उत्पन्नाचे विवरणपत्र सादर करण्याची मुदत 31 ऑक्टोबर 2021 ऐवजी आता 30 नोव्हेंबर 2021 पर्यंत वाढविण्यात आली आहे;

Ministry of Finance कोविड-19 साथीची दुष्कर परिस्थिती लक्षात घेत सरकारने काही बाबतींत दिली मुदतवाढ Posted Date:- May 20, 2021 नवी दिल्‍ली, 20 मे 2021   कोविड-19 साथीच्या दुष्कर परिस्थितीमुळे विविध भागीदारांना भेडसावणाऱ्या अडचणींवर तोडगा काढण्यासाठी सरकार वचनबद्ध आहे. त्याच प्रयत्नांचा एक भाग म्हणून, विविध भागीदारांकडून आलेल्या विनंत्यांचा विचार करून, 'प्राप्तिकर कायदा,1961' (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर कायदा/ हा कायदा असा असेल) याअंतर्गतच्या अनुपालनासाठीची मुदत पुढील काही बाबतींत वाढवून देण्याचा निर्णय सरकारने घेतला आहे--: ‘प्राप्तिकर नियम,1962’ (येथून पुढे याचा उल्लेख सदर नियम / हे नियम असा असेल) यातील नियम 114E अंतर्गत आणि संबंधित विविध अधिसूचनांच्या अधीन राहून  31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'वित्तीय वर्ष 2020-21 साठी SFT म्हणजे 'वित्तीय व्यवहार निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरता येईल; सदर नियम 114G अंतर्गत 31 मे 2021 रोजी किंवा त्यापूर्वी भरावयाचे 'कॅलेंडर वर्ष 2020 साठी नोंदण्यायोग्य खात्याचे निवेदन', आता 30 जून 2021 रोजी किंवा...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

राष्ट्र के लिए नया आधार ऐप समर्पित

·        नया आधार ऐप पहचान सत्यापन को नए सिरे से परिभाषित करता है , जिसमें जनता को केंद्र में रखा गया है ·        चुनिंदा जानकारी का साझाकरण , सहमति का नियंत्रण आपकी उंगलियों पर ·        दिखाएँ , साझा करें , सत्यापित करें: आधार ऐप आधार के उपयोग को बढ़ावा देगा और जीवन को सुगम बनाएगा वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज नए आधार ऐप को राष्ट्र को समर्पित किया , जो जनहित में पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित आधार ऐप एक अगली पीढ़ी का मोबाइल एप्लिकेशन है , जिसे आधार संख्या धारकों (एएनएच) को अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित , सुविधाजनक और गोपनीय तरीके से ले जाने , साझा करने , दिखाने और सत्यापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नए ऐप का अनावरण करने के बाद , श्री प्रसाद ने यूआईडीएआई को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और जोर देते हुए कहा कि आधार सरकार के लिए डिजिट...

केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने 'रंगीन मछली' ऐप लॉन्च किया, यह ऐप सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, जो शौकीनों, एक्वेरियम शॉप मालिकों और मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान संसाधन प्रदान करता है।

   केंद्रीय मत्स्यपालन , पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने आज भुवनेश्वर स्थित भाकृअनुप-केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान   संस्थान (भाकृअनुप-सीफा) में "रंगीन मछली" मोबाइल ऐप लॉन्च किया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के सहयोग से भाकृअनुप-सीफा द्वारा विकसित यह ऐप सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है , जो शौकीनों , एक्वेरियम शॉप मालिकों और मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान संसाधन प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में मत्स्यपालन , पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अपने संबोधन के दौरान श्री राजीव रंजन सिंह ने सजावटी मत्स्यपालन क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि मंत्रालय इसके विकास पर जोर दे रहा है , रोजगार पैदा करने और अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इस क्षेत्र की क्षमता को पहचान रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक्वेरियम के शौक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। "रंगीन मछली" ऐप आठ भारतीय भाषाओं में लोकप्रिय सजावटी मछ...

आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025

तेजी से बढ़ता शहरीकरण बड़े शहरी क्षेत्रों में नई और अनूठी चुनौतियां ला रहा है , जो कई क्षेत्रों में एक से अधिक जिलों में भी फैले हुए हैं। इसलिए , शहरी आपदा जोखिम प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने और शहरी मुद्दों पर एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए , आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 में संशोधन कर प्रावधान '41 ए ' जोड़ा गया है , जो राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले सभी शहरों (राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को छोड़कर) में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूडीएमए) गठित करने का अधिकार देता है , जिससे शहर-विशिष्ट आपदाओं से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके।   यूडीएमए शहरी विशिष्ट आपदाओं , जिनमें बाढ़ और लू शामिल हैं , पर ध्यान देने वाली शहरी योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए , यूडीएमए की स्थापना करना राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है। मौजूदा जानकारी के अनुसार , केवल एक राज्य , कर्नाटक ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के लिए यूडीएमए का गठन किया है। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम , 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा ...

डाक विभाग ने भारत भर में 887 एटीएम सक्रिय करके अपने एटीएम ढांचे का आधुनिकीकरण किया है

बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , डाक विभाग ने देश भर में अपने एटीएम बुनियादी ढांचे का नवीनीकरण किया है। विभिन्न डाकघरों में स्थापित ये 887 एटीएम नागरिकों को उनके घरों के पास ही आवश्यक बैंकिंग सेवाओं तक पहुँचने में मदद कर रहे हैं। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए लाभदायक है , जिससे डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के सरकार के दृष्टिकोण को बल मिलता है। इन एटीएम के माध्यम से ग्राहक आसानी से नकदी निकाल सकते हैं , खाते की शेष राशि की जांच कर सकते हैं और अन्य बुनियादी बैंकिंग लेनदेन कर सकते हैं। सभी नागरिकों को देशभर में मौजूद डाक विभाग की एटीएम सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। *** पीके/केसी/आईएम/एसके प्रविष्टि तिथि: 20 JAN 2026 by PIB Delhi( रिलीज़ आईडी: 2216455) आगंतुक पटल : 312

जागतिक बालमजुरीविरोधी दिनाची संकल्पना आहे. बाल मजुरीची पद्धत संपूर्णपणे थांबविण्यासाठी आवश्यक असणाऱ्या कृतीवर ती केंद्रीभूत आहे.

जागतिक बालमजुरीविरोधी दिनानिमित्त नोबेल विजेते कैलाश सत्यार्थी यांच्यावरील चित्रपटाचे प्रसारण Posted Date:- Jun 11, 2021 जागतिक बालमजुरीविरोधी दिनानिमित्त उद्या दिनांक 12 जून 2021 रोजी, फिल्म्स प्रभाग नोबेल पारितोषिक विजेते आणि बालमजुरी विरुध्दच्या लढ्यात मोठे योगदान देणारे कैलाश सत्यार्थी यांच्या कार्याची महती अधोरेखित करणारा माहितीपट प्रसारित करणार आहे. हा चित्रपट फिल्म प्रभागाच्या संकेतस्थळावरून तसेच यू-ट्यूब वाहिनीवरून प्रदर्शित होईल. “आत्ताच कृती करा: बालमजुरी थांबवा” ही यावर्षीच्या जागतिक बालमजुरीविरोधी दिनाची संकल्पना आहे. बाल मजुरीची पद्धत संपूर्णपणे थांबविण्यासाठी आवश्यक असणाऱ्या कृतीवर ती केंद्रीभूत आहे. चित्रपटांच्या माध्यमातून सामाजिक संदेश देण्याची परंपरा सुरु ठेवत, फिल्म प्रभागाने बाल गुलामगिरी आणि लहान मुलांचे शोषण थांबविण्यासाठी जागतिक पातळीवरील चळवळीत आघाडीवर असणारे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ते कैलाश सत्यार्थी यांच्या या क्षेत्रातील योगदानाला अधोरेखित करणाऱ्या माहितीपटाचे प्रदर्शन करण्याचे ठरविले आहे. सत्यार्थी यांनी त्यांच्...

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