सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शासकीय योजना और NGO प्रोजेक्ट के विषय सूचि के लिए क्लिक करें

ज़्यादा दिखाएं

सीसीपीए ने कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की; कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए गए और उन पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया

 सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों पर जुर्माना लगाया

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन में लिप्त पाए जाने पर मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना और सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) के खिलाफ 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अंतिम आदेश पारित किया है।

यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।

मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्र की अध्यक्षता वाले केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी), सीकर के खिलाफ आदेश पारित किए हैं। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीईटी परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से उपयोग करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड का मामला : निम्नलिखित दावे किए गए थे -

  1. जेईई एडवांस्ड परिणाम 2025: मोशन के अनुसार जेईई एडवांस्ड में उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 3231/6332 = 51.02 प्रतिशत”
  2.     जेईई (मुख्य परीक्षा) 65.8 प्रतिशत 6930/10532”
  3.     " मोशन है तो सिलेक्शन है "
  4.     नीट परिणाम 2025: उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 6972/7645 = 91.2 प्रतिशत”
  5.     "नीट परिणाम 2025- शीर्ष 500 अखिल भारतीय रैंक (सामान्य और ओबीसी) में 19 छात्र और हमारे 7 छात्रों ने 100 से कम में अखिल भारतीय रैंक प्राप्त की है।"

 सीसीपीए ने संस्थान द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम अकाउंट और समाचार पत्रों में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित कीं, साथ ही साथ "पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रम", "आवासीय कार्यक्रम", "नर्चर बैच", "एन्थ्यूज बैच" और "ड्रॉपर/लीडर बैच" जैसे अपने सशुल्क कार्यक्रमों का विज्ञापन किया, जबकि सफल उम्मीदवारों द्वारा किए गए वास्तविक पाठ्यक्रमों का खुलासा नहीं किया।

जांच महानिदेशक द्वारा की गई जांच में पता चला कि विज्ञापनों में दिखाए गए अधिकांश छात्र "आई-एकलव्य (ऑनलाइन)" पाठ्यक्रमों में नामांकित थे। सीसीपीए ने पाया कि "आई-एकलव्य" पाठ्यक्रम जेईई और नीट उम्मीदवारों के लिए एक प्रमुख रैंकर्स बैच है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रारूपों में उपलब्ध है और चयनित छात्रों को परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से निःशुल्क प्रदान किया जाता है। हालांकि, विज्ञापनों में यह महत्वपूर्ण जानकारी, यानी सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम का खुलासा नहीं किया गया था।

जांच में यह भी पाया गया कि संस्थान ने परीक्षा संपन्न होने के बाद दाखिला लेने वाले कुछ छात्रों के नाम और तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया था, जिससे प्रचार के उद्देश्य से उनकी सफलता का झूठा श्रेय संस्थान को दिया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि छात्रों या उनके माता-पिता/अभिभावकों की उचित सहमति प्राप्त किए बिना छात्रों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था।

सीसीपीए ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद संस्थान विज्ञापनों में किए गए कई दावों को साबित करने में विफल रहा। प्राधिकरण ने माना कि सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों की प्रकृति के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के अंतर्गत भ्रामक विज्ञापन और धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आता है।

सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) का मामला : निम्नलिखित आरोप लगाए गए थे -

  1.     एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्र”
  2.     नीट में ऑल इंडिया रैंक-100 में 2 सीएलसी छात्र”
  3.     “3 सीएलसी छात्र दिल्ली के एम्स में”
  4.     “6 सीएलसी छात्रों ने 720 में से 710 से अधिक अंक प्राप्त किए”
  5.     ऑल इंडिया रैंक-1000 में परिणामों में 7 गुना वृद्धि
  6.     " सीकर में पिछले वर्ष में सर्वश्रेष्ठ सीएलसी एआईआर-1000 में सर्वाधिक 7 गुना वृद्धि "

 सीसीपीए ने सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों की तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित कीं और साथ ही विभिन्न कक्षा कार्यक्रमों का प्रचार किया, जबकि उम्मीदवारों द्वारा चुने गए वास्तविक पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

जांच महानिदेशक द्वारा की गई जांच में पता चला कि संस्थान ने बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद अपने दावों को साबित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। जांच में यह भी पाया गया कि कई छात्र जिनके नाम और तस्वीरें विज्ञापनों में इस्तेमाल की गई थीं, वे केवल परीक्षा श्रृंखला पाठ्यक्रमों में नामांकित थे, जिसे विज्ञापनों में जानबूझकर छिपाया गया था।

सीसीपीए ने आगे पाया कि संस्थान ने "एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्रों" के अपने दावे के संबंध में विरोधाभासी रुख अपनाया। अपने लिखित बयान में संस्थान ने कहा कि यह आंकड़ा 1996 से संचयी चयन का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सुनवाई के दौरान उसने दावा किया कि यह आंकड़ा केवल वर्ष 2024 से संबंधित है। प्राधिकरण ने माना कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों ने दावे को निराधार और भ्रामक बना दिया है।

प्राधिकरण ने यह भी पाया कि दोनों संस्थान परिणाम घोषित होने के बाद सफल उम्मीदवारों से लिखित सहमति प्राप्त करने का दस्तावेजी साक्ष्य प्रदान करने में विफल रहे, जैसा कि कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश, 2024 के अंतर्गत अनिवार्य है।

सीसीपीए ने दोनों कोचिंग संस्थानों को तत्काल प्रभाव से भ्रामक विज्ञापन बंद करने, भविष्य में भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित न करने और भविष्य के विज्ञापनों में सत्य और पूर्ण जानकारी देने का निर्देश दिया था। हालांकि, दोनों संस्थानों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष अपील दायर करके सीसीपीए के आदेशों को चुनौती दी है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 उपभोक्ताओं को सूचित होने का अधिकार प्रदान करता है, जिसमें सत्य और सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार भी शामिल है, जिससे वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें । भ्रामक विज्ञापन इस अधिकार को कमजोर करते हैं और उपभोक्ता हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में जहां इच्छुक छात्र अपना काफी समय, प्रयास और वित्तीय संसाधन निवेश करते हैं।

सीसीपीए ने पाया कि सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाना , जिसमें यह जानकारी भी शामिल है कि क्या ऐसे उम्मीदवारों ने पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रमों, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों, फाउंडेशन बैचों, क्रैश पाठ्यक्रमों या केवल परीक्षा श्रृंखलाओं में भाग लिया था, अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन के बराबर है।

छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, सीसीपीए ने अब तक भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। विस्तृत जांच के बाद, सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले 31 कोचिंग संस्थानों पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।

(अंतिम आदेश केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://doca.gov.in/ccpa/orders-advisories.php?page_no=1 )

***

पीके/केसी/एसएस/पीके प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2026  by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2261344) आगंतुक पटल : 309

जिन विषयों को खोज रहे हैं लोग

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

यूट्यूबर यशवंत साहू जो… भिलाई टाईम्स नामक ब्लॉग लिखता है और… यह कपटपूर्ण विषयवस्तु वाले वीडियो आधारित दबदबा बनाकर सोशल मीडिया मंच वाला व्यापार चलाता है… इसी व्यापारिक गतिविधि के तहत यशवंत के द्वारा आपत्तिजनक वीडियो रोजाना बनाया जाता है… इस आपराधिक गतिविधि की पुनरावृत्ति करते हुए यशवंत ने… विगत दिनों उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली… महिला स्व सहायता समूहों पर मानसिक दबाव बनाने का कपट पूर्वक प्रयास किया है… जिसकी पुलिस FIR कार्यवाही शिकायत दर्ज करवाई गई है..! पढ़िए पूरा मामला…

भिलाई टाईम्स वाला यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत का सामना करेगा रिसाली और भिलाई के कुछ वार्डों की जानकारी और… लोगों की आपसी खुन्नस को… चटकेदार मिर्च मसाला लगाकर… बिना किसी दस्तावेजिक प्रमाण के… यशवंत बयानबाजी करते हुए नाटकीय वीडियो बनाता है और… वीडियो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर… यशवंत प्रकाशित करता है । जिस पर आने वाली लाईक और क्लीक बढ़ाकर यशवंत द्वारा… अपनी रोजी रोटी चलाय जाना की बात लोगों ने बताई है लेकिन… इस बार यशवंत ने अपनी यूट्यूबर सीमा से बाहर जाकर… उचित मूल्य दुकान की संचालक महिला स्व सहायता समूहों को निशाना बनाया और… अपने बड़बोले अंदाज में पुलिस और शासन को भी… अपनी युटुब वीडियो बयान विषयवस्तु के आधार पर कटघरे में खड़ा कर दिया है । इसलिए अब यूट्यूबर यशवंत साहू पुलिस शिकायत कार्यवाही का सामना करने की स्थिति में आ गया है । जवाबदेही तय : बचकाना भाषा शैली और लालच ने यशवंत को बुरा फसाया… साबित करना पड़ेगा फिल्मी डायलॉग वाले आरोप..!  वैसे तो यूट्यूबर यशवंत स्थानीय राजनीति में अपनी छोटी मोटी जगह तलाशने और… भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाए नाटकीय वीडियो के आधार पर ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी मामले में रायपुर कलेक्टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है !

 मुख्य विषय :-  प्रोफेशनल इंन्स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी खरोरा रायपुर का मामला है। संस्थापक एवं छात्रवृत्ति प्रभारी श्री विक्की सागर के विरूध्द पुलिस एफ.आई.आर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अरूण कुमार राऊतराय ने 2018-2019 में व्यथा दर्ज करवाई थी । छत्तीसगढ़ लोक आयोग के द्वारा संज्ञान लिए जाने पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई । ऑनलाईन छात्रवृत्ति फार्म डालकर धोखाधडी किये जाने के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए आयुक्त आदिवासी विकास स्तर से बारंबार निर्देश दिए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करवा रहा था जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने इस मामले को छत्तीसगढ़ लोक आयोग में परिवाद दाखिल कर संज्ञान करवाया तब लोक आयोग द्वारा प्रकरण कार्यवाही विषयक कलेक्टर रायपुर से स्पष्टीकरण मांगा तदोपरांत वर्षों से आरोपियों को दिए जा रहे प्रशासकीय संरक्षण मामले पर विराम लगाकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है  आयुक्त आदिवासी विकास ने दिए थे स्पष्ट निर्देश   संजय चंदेल जो कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग रायपुर छ.ग. ने प्रोफ...

निगम अधिनियम में वार्ड पार्षद को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है... जिनका प्रयोग करके वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र का सर्वागीण विकास कर सकता है... इसके लिए आवश्यक है की पार्षद को निगम अधिनियम के अग्रलिखित विधि निर्देश को पढ़ना और समझना पड़ेगा तथा अपने अधिकार को प्रयोग में लाना होगा

पार्षदों को मिला असीमित अधिकार अब पार्षद प्रश्न भी पूछ सकेंगे,   प्रश्न से सम्बंधित दस्तावेजो और फ़ाइल का अवलोकन भी कर सकेंगे और   नियम आयुक्त और निगम अधिकारियो से निगम सम्मिलन के दिन लिखित में जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे इसलिए अब निगम आयुक्त, निगम के अधिकारी / कर्मचारी और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अर्थात एम.आई.सी. सदस्य इन तीनो से पार्षद सीधे प्रश्न पूछकर जवाब मांग सकेंगे तथा विधायक और सांसद की तरह शहर सरकार का सशक्त अंग होने की अपनी पहचान बना सकेंगे पार्षद को शक्ति संपन्न बनाने वाले निगम अधिनियम के अंतर्गत बनाये गए नियम निम्नानुसार हैं :-  पहला नियम :-   छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क पार्षदों के कर्तव्य - छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा २५-क में परिभाषित किये गए है और इस विधि निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, पार्षद निगम सम्मिलन में भाग लेकर महापौर या आयुक्त का ध्यान... निगम की सम्पत्ति की किसी हानी या... निगम के किसी योजना या.... सेवा में किसी कमी के तरफ ध्यानान्कर्षण करवायेगा दूसरा नियम :- छ,ग. नगरपालिक (कामकाज के ...

छत्तीसगढ़ में निजी विश्विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि… छत्तीसगढ़ के निजी विश्विद्यालयों नियामक आयोग ने जिन निजी विश्विद्यालयों को मान्यता दी है… उन विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है और… इनकी पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने की नियामक आयोग की प्रशासकीय जिम्मेदारियों को भी पूरा नहीं किया गया है… जिसके कारण अनियमित शैक्षणिक आहर्ता प्रमाण बांटें जाने का प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है..! जिसके दुष्परिणाम जान लीजिए…

फर्जी प्रमाण पत्र  नियम विरुद्ध हासिल किए गए फर्जी शैक्षणिक आहर्ताएँ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं, समाज में विश्वास की कमी पैदा करती हैं और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाकर भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाती हैं।   फर्जी शैक्षणिक आहर्ता से समाज पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और नुकसान… 1. शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है चिंताजनक विपरीत असर गुणवत्ता में गिरावट: जब शिक्षक या पेशेवर फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।   शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है: असली मेहनत करने वाले छात्रों और योग्य व्यक्तियों का विश्वास टूटता है।   संस्थागत भ्रष्टाचार निरंकुश होकर पनपता है: फर्जी प्रमाणपत्रों का चलन शिक्षा संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचाता है।   2. सामाजिक ढाँचे को पहुंचता है अपूरणीय नुकसान और डालता है विपरीत असर नैतिक पतन: समाज में शैक्षणिक स्तर से ईमानदारी और मेहनत की जगह धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।   असमानता और अन्याय: योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते, जिससे सामाजिक असमानता ...

निर्माण श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए शासन योजनाओं का संचालन कर रहीं जिनकी जानकारी हितग्राही श्रमिक तक पहुंचना आवश्यक है... इसलिए इनको जान लीजिए...

  निर्माण श्रमिक अर्थात कौन ? निर्माण श्रमिक से तात्पर्य जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्ध कुशल या अकुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, पर्यवेक्षणिक, तकनीकी अथवा लिपिकीय कार्य भाड़े या पारिश्रमिक के लिए करता हो। नियोजन के निबन्धन प्रकट हों या विवक्षित हो, किन्तु प्रबंधकीय या प्रशासकीय हैसियत में नियोजित व्यक्ति इसमें सम्मिलित नहीं है। कहां होता पंजीयन ? हितग्राही पंजीयन भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण श्रमिक का पंजीयन मंडल के द्वारा किया जाता है। पंजीयन हेतु अर्हताएं क्या है ? निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीयन हेतु निर्धारित आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं किन्तु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय हैे कि, हितग्राही श्रमिक द्वारा विगत एक वर्ष में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक के रूप में 90 दिवस कार्य करने संबंधी नियोजक / श्रमिक संघ / श्रम निरीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है। कहां होता हैं पंजीयन ? किसी भी लोक सेवा केन्द्र से श्रम विभाग के वेबसाईट पर ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाईट लिंक अंत में दी गई जिस...

पत्रकार और यूट्यूबर में अंतर को सभी को जानना जरूरी है क्योंकि यूट्यूबर भ्रामक जानकारी के आधार पर स्वयं को पत्रकार होने का भ्रम बनाते है... परिणाम स्वरूप इसका विपरीत प्रभाव पत्रकारिता जगत पड़ रहा है...

पत्रकार और यूट्यूबर के बीच अंतर को समझना आसान है ! अगर हम उनके उद्देश्य, जिम्मेदारी और काम करने के तरीकों को देखें तो दोनों की मंशा और लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है । 🎙️ पत्रकार   भूमिका: समाज को तथ्यात्मक, सत्यापित और संतुलित जानकारी देना।   जिम्मेदारी: पत्रकारिता आचार संहिता का पालन करना, स्रोतों की पुष्टि करना और निष्पक्ष रहना।   माध्यम: अख़बार, टीवी, रेडियो, पत्रिका, अन्य प्रिंट माध्यम    लक्ष्य: जनता को जागरूक करना, सत्ता और संस्थाओं को जवाबदेह बनाना।  विश्वसनीयता: गलत सूचना देने पर कानूनी और नैतिक जवाबदेही होती है।   📹 यूट्यूबर भूमिका: मनोरंजन, शिक्षा, व्यक्तिगत विचार या अनुभव साझा करना।   जिम्मेदारी: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों का पालन करना, लेकिन ये शासकीय अपेक्षाओं के विपरीत पत्रकारिता जैसी सख़्त आचार संहिता का पालन नहीं करते है । सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं ।  माध्यम: YouTube चैनल और सोशल मीडिया।   लक्ष्य: दर्शकों को एन-केन-प्रकारेंण आकर्षित करना, तथ्यविहीन लुभावनी जा...

अविभाजित भिलाई निगम के संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में नहीं होने कर कारण भिलाई और रिसाली निगम को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जमीन दलालों को फायदा हुआ है… वहीं दूसरी ओर आम-जनता जो अपनी जीवन भर के मेहनत की कमाई से महंगे भूखंड खरीद कर मकान बनाती है… उसे नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली के प्रशासन की अनियमितताओं के कारण ठगी का शिकार होने की चिंताजनक संभावना का सामान करना पड़ रहा था… इसलिए महापौरगण को अग्रलिखित बिंदुवार भूमि लेखा-जोखा संज्ञान नोटिस देकर प्रश्नांकित किया गया है..! पढ़िए पूरा मामला और नोटिस…

जन सामान्य के आवासीय प्रयोजन के भूखंडों का नियमितीकरण मामला नोटिस कार्यवाही प्रक्रिया से पारदर्शिता के दायरे में आयेगा… मौकापरस्त महापौर अब जन-सामान्य की समस्याओं को नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं रहेंगे… अविभाजित भिलाई निगम में विगत कई वर्षों से लगातार कांग्रेस की शहर सरकार रहीं है… निगम महापौर भी कांग्रेस का रहा है… जिसने अविभाजित भिलाई निगम और विभाजित रिसाली एवं भिलाई निगम की संपत्ति का लेखा-जोखा पारदर्शिता के दायरे में लाने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है जिसके कारण नोटिस देकर कार्यवाही करने की परिस्थिति बनी है… नोटिस Download लिंक 👇क्लिक करें 👇 https://drive.google.com/file/d/152ki3rd2ZzJRzu-pB_LDlrLpYwz9WqGR/view?usp=drivesdk पार्षद अब अपने प्राधिकार का उपयोग कर महापौर की पदेन जिम्मेदारी तय करवायेगें  जन सामान्य स्तर से की गई संज्ञान नोटिस पर अब पार्षद संज्ञान लेकर निगम महापौर से अपने वार्ड के शासकीय अचल संपत्ति ब्यौरा मांगने के बाध्य हो गए हैं क्योंकि… इस नोटिस की प्रति सभी पार्षदों को व्हाट्सएप पर दी गई है और पार्षद चाहें तो निगम आयुक्त से विधिवत इसकी छायाप्...

झोलाछाप डॉक्टरों और अपंजीकृत चिकित्सा व्यवसाइयों को पहचानना और उनसे बचाव करने के लिए हमारे लोकतांत्रिक कानूनी व्यवस्था में चिकित्सा सुविधा देने के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की है पर्याप्त व्यवस्था है… पढ़िए जागरूक रहने के विधिक पहलू…

लोक स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले अनियमित चिकित्सा व्यवसाई ग्रामीण और शहरी दोनो ही जगह… अपनी दुकान चला रहें है लेकिन जन जागरूक के आभाव में इनके विरुद्ध शासन कानूनी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है… इसलिए यह लेख जन जागरूकता लाने का एक प्रयास है… झोलाछाप डॉक्टरों को पहचानना और उनसे बचना बेहद ज़रूरी है। ये लोग न केवल आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं बल्कि आपकी जान को भी खतरे में डाल सकते हैं। झोलाछाप डॉक्टरों की कुछ खास पहचान: अयोग्यता का दावा: ये लोग अक्सर असाध्य बीमारियों का भी इलाज करने का दावा करते हैं, जो किसी योग्य डॉक्टर के लिए भी मुश्किल हो सकता है। गुप्त स्थान: ये लोग अक्सर घरों, छोटी दुकानों या ऐसी जगहों पर अपना क्लीनिक चलाते हैं जहां कोई मेडिकल सुविधाएं नहीं होतीं। सस्ते इलाज का लालच: ये लोग आमतौर पर अन्य डॉक्टरों की तुलना में बहुत कम पैसे में इलाज करने का झांसा देते हैं। आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञता: ये लोग आधुनिक मेडिकल उपकरणों और तकनीकों से अनजान होते हैं। अनावश्यक दवाएं: ये लोग अक्सर मरीजों को अनावश्यक दवाएं देते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती...

मामले जिन पर चर्चा गरमाई हुयी है

पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ

पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ ·         ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने हेतु 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी ·         महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में निर्बाध ट्रांजिशन सुनिश्चित किया जाएगा ·         रोजगार , आजीविका और ग्रामीण परिवर्तन को गति देने हेतु ₹ 95,692 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन ·         मौजूदा जॉब कार्ड मान्य रहेंगे , पहले से चल रहे कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए , भारत सरकार ने 11 मई 2026 को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [ VB–G RAM G] अधिनियम , 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्...

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ

सरकार भविष्योन्मुखी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: श्री एच.डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। , उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए , केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती , भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्य...

गैरजिम्मेदार महापौर!... कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के मामले में… रिसाली निगम महापौर बेहद गैरजिम्मेदार तरीके का प्रशासकीय व्यवहार कर अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहीं है… जिसके कारण महिला उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है…

कौन है जो रोकेगा गड़बड़ियां ? महिला उत्पीड़न रोकने के मामले में रिसाली निगम की कांग्रेसी शहर सरकार प्रताड़ना करने वाले आरोपियों का निंदनीय संरक्षण करते नजर आ रहीं है । विशेषकर रिसाली महापौर की भूमिका महिला प्रताड़ना करने वालों के लिए सहानभूति पूर्ण नजर आ रहीं है जिसको विधिवत प्रश्नांकित करने की भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती निशा देशमुख पूरी कर रहीं है… अरे! कहां है रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति… रिसाली महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार ने रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति का अस्तित्व अनियमितताओं के हवाले हो गया है! बेहद व्यथित करने वाली वास्तविकता यह है कि रिसाली निगम की आंतरिक शिकायत समिति इन दिनों प्रताड़ित महिलाओं की व्यथा का निराकरण करने के स्थान पर प्रताड़ित करने वाले आरोपियों की संरक्षक के तौर पर कार्य करती नजर आ रहीं है जिसके लिए रिसाली की महापौर जिम्मदार है क्योंकि महापौर कामकाजी  महिलाओं की सुरक्षा के लिए की जाने वाली व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवश्यक प्रशासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहीं है । मैडम महापौर अध्यक्ष आंतरिक शिकायत समिति की जवाबदेही कब ...

देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय नवाचार एवं समावेशिता शिखर सम्मेलन - भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों - में जननी (प्रसवपूर्व, प्रसवोत्तर और नवजात शिशु एकीकृत देखभाल की यात्रा) प्‍लेटफॉर्म लॉन्‍च किया।

·         मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में जननी प्लेटफॉर्म लॉन्‍च किया ·         जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया ·         विद्यमान आरसीएच पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित , यह प्लेटफॉर्म देखभाल की निरंतरता में प्रमुख सेवा वितरण कार्यकलापों को दर्ज करके एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाता है ·         आज तक , जननी ने 1.34 करोड़ लाभार्थी पंजीकरण , 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण , 30 लाख से अधिक एमसीएच कार्ड जारी किए और एक लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन किए   जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन ...

इस ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाले नए विषयों को जानने के लिए फॉलो करें