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सीसीपीए ने कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की; कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए गए और उन पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया

 सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों पर जुर्माना लगाया

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन में लिप्त पाए जाने पर मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना और सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) के खिलाफ 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अंतिम आदेश पारित किया है।

यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।

मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्र की अध्यक्षता वाले केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी), सीकर के खिलाफ आदेश पारित किए हैं। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीईटी परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से उपयोग करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड का मामला : निम्नलिखित दावे किए गए थे -

  1. “जेईई एडवांस्ड परिणाम 2025: मोशन के अनुसार जेईई एडवांस्ड में उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 3231/6332 = 51.02 प्रतिशत”
  2.     “जेईई (मुख्य परीक्षा) 65.8 प्रतिशत 6930/10532”
  3.     " मोशन है तो सिलेक्शन है "
  4.     “नीट परिणाम 2025: उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 6972/7645 = 91.2 प्रतिशत”
  5.     "नीट परिणाम 2025- शीर्ष 500 अखिल भारतीय रैंक (सामान्य और ओबीसी) में 19 छात्र और हमारे 7 छात्रों ने 100 से कम में अखिल भारतीय रैंक प्राप्त की है।"

 सीसीपीए ने संस्थान द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम अकाउंट और समाचार पत्रों में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित कीं, साथ ही साथ "पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रम", "आवासीय कार्यक्रम", "नर्चर बैच", "एन्थ्यूज बैच" और "ड्रॉपर/लीडर बैच" जैसे अपने सशुल्क कार्यक्रमों का विज्ञापन किया, जबकि सफल उम्मीदवारों द्वारा किए गए वास्तविक पाठ्यक्रमों का खुलासा नहीं किया।

जांच महानिदेशक द्वारा की गई जांच में पता चला कि विज्ञापनों में दिखाए गए अधिकांश छात्र "आई-एकलव्य (ऑनलाइन)" पाठ्यक्रमों में नामांकित थे। सीसीपीए ने पाया कि "आई-एकलव्य" पाठ्यक्रम जेईई और नीट उम्मीदवारों के लिए एक प्रमुख रैंकर्स बैच है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रारूपों में उपलब्ध है और चयनित छात्रों को परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से निःशुल्क प्रदान किया जाता है। हालांकि, विज्ञापनों में यह महत्वपूर्ण जानकारी, यानी सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम का खुलासा नहीं किया गया था।

जांच में यह भी पाया गया कि संस्थान ने परीक्षा संपन्न होने के बाद दाखिला लेने वाले कुछ छात्रों के नाम और तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया था, जिससे प्रचार के उद्देश्य से उनकी सफलता का झूठा श्रेय संस्थान को दिया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि छात्रों या उनके माता-पिता/अभिभावकों की उचित सहमति प्राप्त किए बिना छात्रों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था।

सीसीपीए ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद संस्थान विज्ञापनों में किए गए कई दावों को साबित करने में विफल रहा। प्राधिकरण ने माना कि सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों की प्रकृति के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के अंतर्गत भ्रामक विज्ञापन और धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आता है।

सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) का मामला : निम्नलिखित आरोप लगाए गए थे -

  1.     “एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्र”
  2.     “नीट में ऑल इंडिया रैंक-100 में 2 सीएलसी छात्र”
  3.     “3 सीएलसी छात्र दिल्ली के एम्स में”
  4.     “6 सीएलसी छात्रों ने 720 में से 710 से अधिक अंक प्राप्त किए”
  5.     ऑल इंडिया रैंक-1000 में परिणामों में 7 गुना वृद्धि
  6.     " सीकर में पिछले वर्ष में सर्वश्रेष्ठ सीएलसी एआईआर-1000 में सर्वाधिक 7 गुना वृद्धि "

 सीसीपीए ने सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों की तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित कीं और साथ ही विभिन्न कक्षा कार्यक्रमों का प्रचार किया, जबकि उम्मीदवारों द्वारा चुने गए वास्तविक पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

जांच महानिदेशक द्वारा की गई जांच में पता चला कि संस्थान ने बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद अपने दावों को साबित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। जांच में यह भी पाया गया कि कई छात्र जिनके नाम और तस्वीरें विज्ञापनों में इस्तेमाल की गई थीं, वे केवल परीक्षा श्रृंखला पाठ्यक्रमों में नामांकित थे, जिसे विज्ञापनों में जानबूझकर छिपाया गया था।

सीसीपीए ने आगे पाया कि संस्थान ने "एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्रों" के अपने दावे के संबंध में विरोधाभासी रुख अपनाया। अपने लिखित बयान में संस्थान ने कहा कि यह आंकड़ा 1996 से संचयी चयन का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सुनवाई के दौरान उसने दावा किया कि यह आंकड़ा केवल वर्ष 2024 से संबंधित है। प्राधिकरण ने माना कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों ने दावे को निराधार और भ्रामक बना दिया है।

प्राधिकरण ने यह भी पाया कि दोनों संस्थान परिणाम घोषित होने के बाद सफल उम्मीदवारों से लिखित सहमति प्राप्त करने का दस्तावेजी साक्ष्य प्रदान करने में विफल रहे, जैसा कि कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश, 2024 के अंतर्गत अनिवार्य है।

सीसीपीए ने दोनों कोचिंग संस्थानों को तत्काल प्रभाव से भ्रामक विज्ञापन बंद करने, भविष्य में भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित न करने और भविष्य के विज्ञापनों में सत्य और पूर्ण जानकारी देने का निर्देश दिया था। हालांकि, दोनों संस्थानों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष अपील दायर करके सीसीपीए के आदेशों को चुनौती दी है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 उपभोक्ताओं को सूचित होने का अधिकार प्रदान करता है, जिसमें सत्य और सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार भी शामिल है, जिससे वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें । भ्रामक विज्ञापन इस अधिकार को कमजोर करते हैं और उपभोक्ता हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में जहां इच्छुक छात्र अपना काफी समय, प्रयास और वित्तीय संसाधन निवेश करते हैं।

सीसीपीए ने पाया कि सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाना , जिसमें यह जानकारी भी शामिल है कि क्या ऐसे उम्मीदवारों ने पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रमों, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों, फाउंडेशन बैचों, क्रैश पाठ्यक्रमों या केवल परीक्षा श्रृंखलाओं में भाग लिया था, अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन के बराबर है।

छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, सीसीपीए ने अब तक भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। विस्तृत जांच के बाद, सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले 31 कोचिंग संस्थानों पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।

(अंतिम आदेश केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://doca.gov.in/ccpa/orders-advisories.php?page_no=1 )

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पीके/केसी/एसएस/पीके प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2026  by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2261344) आगंतुक पटल : 309

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प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई)

प्रगति के मार्ग को प्रशस्त करना भारत की जनसंख्या का 16.6% हिस्सा अनुसूचित जाति (एससी) का है और इन्हें सामाजिक-आर्थिक उन्नति और समावेशन में ऐतिहासिक रूप से बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इन असमानताओं को दूर करना सामाजिक न्याय , समान अवसर और भारत के विकास पथ में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन विकास संबंधी कमियों को पहचानते हुए , भारत सरकार ने अनुसूचित जातियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) शुरू की। समावेशी सशक्तिकरण का दृष्टिकोण प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के ज़रिए अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण करना है। सरकार ने पीएम-एजीएवाई योजना के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण...

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एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल आसानी से दिलाने के लिए TReDS पर CGTMSE गारंटी कवर शुरू

M1xchange, RXIL और DTX (KredX) के साथ इंटीग्रेशन से योग्य माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ( MSEs) को तेज़ी से और टेक्नोलॉजी-आधारित क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकेगा। केंद्रीय बजट में ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम ( TReDS) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट गारंटी कवर देने की घोषणा के तहत , माइक्रो , स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के इनवॉइस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी की सुविधा शुरू की है। MSME मंत्रालय के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज ( CGTMSE) पोर्टल को अब TReDS इकोसिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है , और क्रेडिट गारंटी कवरेज अब तीन प्लेटफॉर्म - M1xchange, RXIL और DTX (KredX) - पर उपलब्ध है। यह MSME मंत्रालय और CGTMSE द्वारा शुरू की गई सबसे तेज़ टेक्नोलॉजी-आधारित सुविधाओं में से एक है ; इससे माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट आसानी से मिल सकेगा और वे TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए तेज़ी से वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकेंगे। तीन प्लेटफॉर्म पर CGTMSE गारंटी कवर की हाल ही में शुरू हुई सुविधा का मकसद ...

दुर्ग से कांग्रेस संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की नजरों में अग्रणी स्थान बनाने वाले मोतीलाल वोरा जी के बाद… अपने दम पर उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका हासिल करने वाली… कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्त एनी पीटर ही है… जो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ की जमीनी कार्यकर्ता है… जिसने दिल्ली की कर्मभूमि पर… कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला..! और दुर्ग का नाम अपने दम पर केंद्रीय राजनीति में दर्ज करवा दिया है… पढ़िए एक विश्लेषण..!

माननीय वोरा जी के बाद… वैसे छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला… केंद्रीय राजनीति में दो जन नेता के नामों के लिए जाना जाता है पहला मोतीलाल वोरा Moti lal Vora और दूसरा सरोज पांडेय..! Saroj Pandey उल्लेखनीय है कि ये दोनों जन नेता अपने दम पर अपनी पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों से संपर्क में आए और इन्होंने अपना अद्वितीय स्थान अपनी - अपनी पार्टी में बनाया लेकिन… अब इस कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर का नाम भी जुड़ता जा रहा है… वैसे यह नव-उज्वलित नाम..! अभी सिर्फ सड़क की लड़ाई के पहले पायदान पर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की सड़कों पर अपनी संघर्षरत गाथा के आधार पर अपनी उपस्थिति देकर  सुर्खियां बटोर रहा है..! एकल चलो रे..! Chhattisgadh congress  सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है इसके कई उदाहरण है जो कांग्रेसी आह्वाहन पर सड़क पर संघर्ष करने वाली कार्यकता होने के तौर पर पहचानी जाती है… वैसे तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कई खेमों और गुटों में बटी है लेकिन एनी पीटर ही एक मात्र समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता है जो सभी के साथ तालमेल रखती है और जब भी कांग्रेस पार्टी को जरूरत प...

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

 “जब कोई हुनर एक नया अवसर लेकर आता है” जिन गांवों में परिवारों का भविष्य काफी हद तक फसल पर निर्भर करता है , वहां कोई हुनर सीखने से आमदनी के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। गांवों के कई युवाओं के लिए यह सफर सीखने , काम करने और कमाई के नए अवसर तलाशने से शुरू होता है। यहीं पर ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 25 सितंबर 2014 को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू की गई डीडीयू-जीकेवाई योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के युवाओं पर केंद्रित है। यह योजना टिकाऊ आजीविका के लिए प्लेसमेंट से जुड़ी कौशल प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करती है। यह कार्यक्रम 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए है और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। कामकाज की बदलती दुनिया के साथ यह कार्यक्रम भी लगातार विकसित हो रहा है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग की अगुवाई वाली प्रशिक्षण व्यवस्था , दीर्घकालिक रोजगार , नौकरी मिलने के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन और नए कौशल प्रद...

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महिला समूहों को... उनके दुकान के प्रतिमाह का... वित्तीय विवरण खाद्य विभाग देता है क्या ? गड़बड़ियों के पिटारे में से… छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों/ कर्मचारियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के बीच समन्वय और गड़बड़ी के कई मामले सामने आते रहे हैं। इस विषय को दोनों पक्षों के पहलुओं से समझा जाना आवश्यक है। तभी सार्थक हल निकलना संभव होगा । एक तरफ जहां कुछ समूहों द्वारा वाकई अनियमितता किए जाने की बात सामने आती है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं और समूहों के शोषण व प्रशासनिक दबाव की शिकायतें भी उठती रही हैं। जिसका असल कारण यह है कि, महिला समूहों को प्रतिमाह लेन देन का वित्तीय विवरण खाद्य नियंत्रक कार्यालय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है और ऐसे मासिक विवरण की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग पूरी नहीं कर रहा है । इस गंभीर विषय ओर खाद्य नियंत्रक प्रश्नांकित है । छत्तीसगढ़ के जमीनी परिदृश्य और इस पूरे विषय के मुख्य बिंदु बेहद चिंताजनक हैं गड़बड़ियां कई स्तरो...

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  भारतीय बधिर क्रिकेट संघ (आईडीसीए) और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के बीच रोमांचक मैच का प्रदर्शन , लक्ष्‍य- समावेशिता और दिव्‍यांगजन पहुंच , दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के लिए मतदाता मार्गदर्शिका का शुभारंभ अपनी तरह की विशिष्‍ट प्रथम पहल के रूप में , भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सहयोग से भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदाता शिक्षा और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय बधिर क्रिकेट एसोसिएशन (आईडीसीए) टीम और दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) टीम के बीच एक प्रदर्शनी क्रिकेट मैच का आयोजन किया। यह मैच 16 मार्च , 2024 को नई दिल्ली के करनैल सिंह स्टेडियम में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर प्रतिष्ठित पैरा-तीरंदाज और अर्जुन पुरस्‍कार विजेता , सुश्री शीतल देवी एक को दिव्‍यांगता श्रेणी (पीडब्ल्यूडी) में राष्ट्रीय आइकन घोषित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार और निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार और श्री सुखबीर सिंह संधू ने विजेता टीम को सम्मानित किया। प्रसिद्ध पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी निखिल चोपड़ा को भी ...

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने 13 निर्दिष्ट डार्क पैटर्न को सूचीबद्ध करते हुए डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए ‘डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश, 2023’ जारी किए हैं

    डार्क पैटर्न में डिज़ाइन और पसंद आर्किटेक्चर/बनावट का उपयोग कर उपभोक्ताओं को धोखा देने , मजबूर करने या ऐसे विकल्प चुनने के लिए प्रभावित करना , जो उनके सर्वोत्तम हित में नहीं हैं , शामिल है। डार्क पैटर्न में ड्रिप मूल्य निर्धारण , प्रच्छन्न विज्ञापन ,   प्रलोभन युक्ति (बेट एंड स्विच) , झूठी तात्कालिकता आदि जैसे हेरफेर प्रथाओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।  ऐसी प्रथाएं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 के तहत परिभाषित “अनुचित व्यापार प्रथाओं” की श्रेणी में आती हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने , उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 की धारा 18 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सूचीबद्ध किए हुए 13 निर्दिष्ट डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए 30 नवंबर , 2023 को “डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश , 2023” जारी किए। उपभोक्ताओं को ई-कॉमर्स में अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचाने के लिए , उपभोक्ता मामलों के विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 के प्रावधानों के तहत उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम , 2020 को भी अधिसूचित किया है।...

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना

  सामाजिक सहायता के पांच और वर्ष, इसके दायरे में दिव्यांगजनों को व्यापक तौर पर शामिल किया गया                     14 अक्टूबर 2026 को , केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 53,428 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ , पांच वर्षों ( 2026-27 से 2030-31) के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जारी रखने की मंजूरी दी। इस कार्यक्रम का नाम बदलकर प्र धानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है और इसकी चार उप-योजनाओं के नाम भी इसी के अनुसार बदल दिए गए हैं। जहां बुजुर्गों , विधवाओं और परिवार लाभ की पेंशन योजनाएं अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी , जबकि दिव्यांग पेंशन में संशोधन किया गया है। अब इसमें 80 प्रतिशत की जगह ' दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 40 प्रतिशत दिव्यांगता मानक का उपयोग किया जाएगा। इसकी 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा हटा दी गई है और अब जन्म से ही पात्रता लागू होगी। 0-79 वर्ष की आयु के लिए कें...

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) का अवधि विस्तार 01.07.2026 से 30.06.2027 तक स्वीकृत किया है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ( ABVKY) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं: ·         लाभार्थी व्यक्ति को बेरोज़गारी से ठीक पहले निरन्तर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए और बेरोज़गारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए। ·         बेरोज़गारी कदाचार ( misconduct), लॉकआउट , सुपरअन्यूसिएशन (सेवानिवृत्ति) , या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 की व्यवस्था के तहत गलत बयान देने पर दोषी सिद्ध होने के कारण नहीं होनी चाहिए। ·         योजना के तहत दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं ; इनमें दावों का ऑनलाइन सबमिशन और प्रोसेसिंग , लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ( DBT), और लाभों के समय पर भुगतान सुन...

महिला सुरक्षा का प्रश्न: एक ज्वलंत मुद्दा है… जिस पर हम सभी शासन प्रशासन और सामाजिक व्यवस्थाओं पर आरोप तो लगाते रहते है लेकिन… विडंबना यह है कि, महिला सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत तौर आपने क्या किया है ? इस प्रश्न का जवाब हम में से बहुत कम लोगों के पास होगा..! इसलिए आइए महिला सुरक्षा विषय पर अपनी भागीदारी देने के लिए पहल करते हैं कार्यशाला के प्रतिभागी बनकर अपने अनुभव साझा करते हैं…

महिला सुरक्षा आज के समय में एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने समाज में भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर विचार करना और त्वरित समाधान ढूंढना अत्यंत आवश्यक है और इस विषय का सार्थक हाल सभी को भागीदारी से ही मिल सकता है महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुछ मुख्य कारण: लैंगिक भेदभाव:   समाज में लैंगिक भेदभाव गहराई से जमा हुआ है, जिसके कारण महिलाओं को कमजोर और पुरुषों से कमतर समझा जाता है। पैतृकता:   पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व और नियंत्रण का भाव महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक प्रमुख कारण है। शिक्षा का अभाव :  शिक्षा का अभाव महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों के बारे में जागरूक नहीं होने देता, जिसके कारण वे शोषण का शिकार हो जाती हैं। गरीबी:   गरीबी महिलाओं को कमजोर बनाती है और उन्हें अपराधियों का आसान शिकार बना देती है। कानून व्यवस्था में कमियां:   कानून व्यवस्था में कमियां और अपराधियों को सजा न मिलने से महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा मिलता है। नोट : महिला सुरक्षा संबंधित कार्य करने के इच्छुक लोगों के लिए कार्य...

विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित शिकायतें

  संसद का प्रश्न: विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित शिकायतें केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) एक ऑनलाइन मंच है जो नागरिकों को सातों दिन चौबीसों घंटे उपलब्ध है   जिसके माध्यम से वे सेवा वितरण से संबंधित किसी भी विषय पर सार्वजनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। पिछले तीन वर्षों ( 2023, 2024 और 2025) के दौरान , भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों को सीपीग्राम्स पर 51,15,713 सार्वजनिक शिकायतें प्राप्त हुईं , जिनमें से 43,56,331 शिकायतें , यानी लगभग 85%, निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटा दी गईं। सीपीग्राम्स में आरटीआई मामलों का निवारण नहीं किया जाता है। सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिए कई तंत्र स्थापित किए हैं , जिनमें डैशबोर्ड-आधारित निगरानी के साथ समयबद्ध शिकायत निवारण के लिए सीपीग्राम्स ; फाइलों के इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण के लिए ई-ऑफिस को अपनाना ; सार्वजनिक सेवा वितरण पोर्टलों की गुणवत्ता और दक्षता का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय ई-सेवा वितरण मूल्यांकन (एनईएसडीए) शामिल हैं...

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज यहां जन औषधि केंद्रों के लिए एक ऋण सहायता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने जन औषधि केंद्रों को ऋण सहायता के लिए एक वेबसाइट https://jak-prayaasloans.sidbi.in/home भी शुरू की ।

   डॉ. मनसुख मंडाविया ने जन औषधि केंद्रों के लिए ऋण सहायता कार्यक्रम का शुभारंभ किया ,  2014 में केवल 80 जन औषधि केंद्रों से बढ़कर   आज देश भर में इनकी लगभग 11,000 इकाइयाँ संचालित हो रही हैं: डॉ. मनसुख मंडाविया "अनुमान है कि प्रतिदिन 10 से 12 लाख लोग जन औषधि केंद्रों पर आते हैं , जिससे उन्हें महत्वपूर्ण बचत और आवश्यक औषधियों तक पहुंच मिलती है", "सिडबी और पीएमबीआई के बीच समझौता ज्ञापन छोटे और नए उद्यमियों के लिए एक आशीर्वाद के रूप में उभरेगा क्योंकि इसमें देश में जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को और मजबूत और आधुनिक बनाने की क्षमता है", एमओयू के अंतर्गत   जन औषधि केंद्रों के छोटे उद्यमियों के लिए सिडबी द्वारा 2 लाख रुपये रुपये तक की क्रेडिट सीमा के लिए परियोजना ऋण पर अत्यंत प्रतिस्पर्धी और किफायती ब्याज दर की पेशकश की जाएगी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज यहां जन औषधि केंद्रों के लिए एक ऋण सहायता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस संबंध में , उन्होंने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी-एसआईडीबीआई) और फार्मा...

स्टैंड-अप इंडिया योजना - हाशिए पर खड़े लोगों को वित्तीय और संस्थागत मदद प्रदान करती है

  स्टैंड-अप इंडिया योजना हाशिए पर खड़े लोगों को वित्तीय और संस्थागत मदद प्रदान करती है ; अप्रैल 2022 से मार्च 2025 तक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति तथा महिला उद्यमियों को लगभग 29,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए वित्तीय मदद के अतिरिक्त , यह योजना हाशिए पर खड़े वर्ग को परामर्श , ट्रेनिंग और कौशल केंद्र , मेंटरशिप सहयोग , उद्यम विकास कार्यक्रम केंद्र , जिला उद्योग केंद्र जैसा विशेष प्रशिक्षण प्रदान करती है स्टैंड - अप इंडिया योजना 05 अप्रैल , 2016 को लॉन्च की गई थी। स्टैंड - अप इंडिया योजना का उद्देश्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक ( एससीबी ) के जरिए 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच लोन उपलब्ध कराना था , जो विनिर्माण , सेवाएं या व्यापार क्षेत्र में ग्रीनफील्ड उद्यम लगाने या कृषि संबंधी गतिविधि के लिए हर शाखा में न्यूनतम एक अनुसूचित जाति ( एससी ) या अनुसूचित जनजाति ( एसटी ) और महिला को प्रदान किया जाता था। यह योजना किसी श्रेणी ( रेटिंग ) के लिए   न्यूनतम उपयुक्त दर पर 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये ...

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